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	<title>चातुर्मास श्रीमहावीरजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>चातुर्मास श्रीमहावीरजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>गुरुजनों के सान्निध्य से बदल सकती है तकदीर और तस्वीर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Aug 2022 13:07:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Shreephalnews]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य वर्धमान सागर]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास श्रीमहावीरजी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का मंगल उद्बोधन न्यूज सौजन्य-राजेश पंचोलिया  श्रीमहावीरजी। आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने आचार्य श्री वर्द्धमान सागर चातुर्मास कमेटी अंतर्गत आयोजित गुरु भक्ति कार्यक्रम में सोमवार को महती धर्मसभा को संबोधित किया। आचार्य श्री ने धर्मसभा में बताया कि महान गुरुजनों का परम आशीर्वाद हमारे सिर पर है। उनके [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<ul>
<li>आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का मंगल उद्बोधन</li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000">न्यूज सौजन्य-राजेश पंचोलिया </span></p>
<p><strong>श्रीमहावीरजी।</strong> आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने आचार्य श्री वर्द्धमान सागर चातुर्मास कमेटी अंतर्गत आयोजित गुरु भक्ति कार्यक्रम में सोमवार को महती धर्मसभा को संबोधित किया। आचार्य श्री ने धर्मसभा में बताया कि महान गुरुजनों का परम आशीर्वाद हमारे सिर पर है। उनके आशीर्वाद से संघ सहित संपूर्ण भारत में हम विहार कर रहे हैं। गुरुजनों के सान्निध्य से आपकी भी तकदीर और तस्वीर बदल सकती है। इसके लिए धर्म का पालन करना होगा। गुरुजनों का महत्व है। उनके सान्निध्य में भगवान बन सकते हैं क्योंकि भगवान बनने का मार्ग गुरुजन बताते हैं।</p>
<p>आचार्यजी ने जानकारी दी कि भगवान श्री शांतिनाथ के पूर्व जैन धर्म की परंपरा खंडित हो गई थी जो भगवान शांतिनाथ के बाद से सतत चल रही है। बीसवीं सदी में मुनि धर्म परंपरा भी, जो पूर्व में खंडित हो गई थी, उसे पुनर्जीवित प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागर जी ने किया है। वहीं अक्षुण्ण परंपरा निरंतर चल रही है। आज जितने भी मुनि राज दिख रहे हैं, वह आचार्य श्री शांतिसागर जी की देन हैं।</p>
<p><strong>भक्तों की भक्ति में शक्ति</strong><br />
आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने कहा कि भक्तों की भक्ति में शक्ति होती है। भगवान की भक्ति से भगवान बनने के मार्ग पर चल सकते हैं। कुछ दिनों बाद दादी- नानी दीक्षा समारोह होगा। स्त्री पर्याय के छेदन के लिए दीक्षा ही सर्वोत्तम मार्ग है।जो संयमपूर्वक समाधि मरण करते हैं, वह शीघ्र ही मुक्ति को प्राप्त करते हैं। इसलिए सभी को धर्म का महत्व समझना चाहिए। टीवी मोबाइल ने जीवन को उलट पलट दिया है। मानव धर्म की संस्कृति को भूल रहा है। इस कारण रहन-सहन खान-पान स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव हो रहा है। हमें उत्तम धर्म का पालन करना चाहिए। उसकी शरण से ही हमें मुक्ति मिल सकती है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री का चरण प्रक्षालन</strong><br />
आचार्य श्री के मंगल उद्बोधन के पूर्व मंगलाचरण श्री अंजू जैन महावीर जी ने किया। टोंक के आमंत्रित अतिथियों द्वारा भगवान श्री महावीर स्वामी के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्जवलन किया। प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांति सागर जी सहित सभी पूर्वाचार्यो को अर्ध संघस्थ श्रावक- श्राविकाओं एवं समाज के लोगों ने किया। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी जी का पूजन नेहा दीदी ने कराई। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य निखार क्रिएशन पाटनी परिवार जयपुर को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन श्री मुकेश जी ने किया। राजेश पंचोलिया, इंदौर ने बताया कि टोंक से पधारे श्रावकों ने वर्ष 2023 के चातुर्मास हेतु श्रीफल भेंट किया।</p>
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		<title>ऐषणा समिति पर विशद जानकारी दी आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/aishana-samiti-par-vishad-jaanakaaree-dee-aachaary-shree-varddhamaan-saagar-jee-ne/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Jul 2022 16:06:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य वर्धमान सागर]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास श्रीमहावीरजी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल news]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज सौजन्य- राजेश पंचोलिया श्रीमहावीरजी। पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी संघ सहित श्रीमहावीरजी अतिशय क्षेत्र में विराजित हैं। मंगलवार को नियम सार स्वाध्याय में समितियों के वर्णन में में ऐषणा समिति की चर्चा हुई। आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने बताया कि जो महाव्रती साधु विधिवत श्रावक के द्वारा नवधा भक्तिपूर्वक शुद्ध आहार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;">न्यूज सौजन्य- राजेश पंचोलिया</span></p>
<p><strong>श्रीमहावीरजी।</strong> पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी संघ सहित श्रीमहावीरजी अतिशय क्षेत्र में विराजित हैं। मंगलवार को नियम सार स्वाध्याय में समितियों के वर्णन में में ऐषणा समिति की चर्चा हुई। आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने बताया कि जो महाव्रती साधु विधिवत श्रावक के द्वारा नवधा भक्तिपूर्वक शुद्ध आहार ग्रहण करके अपनी आत्मा का ध्यान करता है, वही मोक्ष का अधिकारी है।<br />
विवेचन में आचार्य श्री ने बताया कि नवधा भक्ति अंतर्गत पड़गाहन, उच्च आसान, चरण प्रक्षालन, पूजन, नमस्कार, मन- वचन- काय की शुद्धि और भोजनशुद्धि- इन नाम वाले नव प्रकार के पुण्यों से श्रावक श्राविकाएं नवधा भक्ति करते हैं।<br />
वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री ने आगे बताया कि श्रद्धाशक्ति उपलब्धता, भक्ति, विवेक, दया और क्षमा इन नाम वाले सात गुणों सहित शुद्ध ओर योग्य आचार के पालन करने वाले श्रावक श्राविकाओं द्वारा दिए आहार को ग्रहण करते हुए, जो परम तपोधन रहते हैं, उनके ऐषणा समिति होती है।</p>
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		<title>व्यवहार चारित्र को धारण करें-  आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/vyavahaar-chaaritr-ko-dhaaran-karen-aachaary-shree-varddhamaan-saagar-jee/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Jul 2022 15:37:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य वर्धमान सागर]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास श्रीमहावीरजी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीमहावीर तीर्थ]]></category>
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					<description><![CDATA[आचार्यजी का संघ के चेत्यालय में हुआ पंचामृत अभिषेक न्यूज सौजन्य- राजेश पंचोलिया श्रीमहावीरजी। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने अपने उद्बोधन में कहा है कि सम्यक्त्व होने पर ज्ञान व वैराग्य की शक्ति अवश्य प्रगट हो जाती है। जो समिति से रहित हैं, उन्हें ही संसार में बार-बार जन्म लेना पड़ता है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><em><strong>आचार्यजी का संघ के चेत्यालय में हुआ पंचामृत अभिषेक</strong></em></p>
<p><span style="color: #ff0000">न्यूज सौजन्य- राजेश पंचोलिया</span></p>
<p><strong>श्रीमहावीरजी।</strong> वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने अपने उद्बोधन में कहा है कि सम्यक्त्व होने पर ज्ञान व वैराग्य की शक्ति अवश्य प्रगट हो जाती है। जो समिति से रहित हैं, उन्हें ही संसार में बार-बार जन्म लेना पड़ता है। जो समितियों का पालन कर रहे हैं, समझिए उन्हें जल्द ही मुक्ति रूपी लक्ष्मी प्राप्त होने वाली है। व्यवहार समिति के बिना निश्चय समिति नहीं हो सकती और निश्चय समिति के बिना मोक्ष नहीं हो सकता। अत: व्यवहार चारित्र को धारण करके निश्चय चारित्र को प्राप्त करने का उद्यम करना चाहिए। वर्द्धमान सागर जी ने श्रीमहावीरजी में नियम सार के स्वाध्याय में समितियों के विवेचन में उक्त विचार प्रगट किए।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter wp-image-25678" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/07/FB_IMG_1658763392543-300x135.jpg" alt="" width="450" height="202" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/07/FB_IMG_1658763392543-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/07/FB_IMG_1658763392543-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/07/FB_IMG_1658763392543.jpg 1080w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /></p>
<p>राजस्थान के प्रसिद्ध अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी में विराजित प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्ति सागर जी महाराज की परम्परा के पंचम पट्टाचार्य परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज का सोमवार को प्रात:कालीन वन्दना उपरांत संघ के चेत्यालय में पंचामृत अभिषेक हुआ। तत्पश्चात श्री मद कुंदकुंद आचार्य देव प्रणीत नियम सार ग्रंथराज का सामूहिक स्वाध्याय वाचन हुआ।</p>
<p>राजेश पंचोलिया ने बताया कि दोपहर में भी सामूहिक स्वाध्याय सभा हुई। आचार्य संघ अभी संग्रहालय के ऊपर परिसर में विराजमान हैं। शाम को यहीं पर आरती, गुरु वंदना नियमित रूप से होती है।</p>
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