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	<title>चातुर्मास इंदौर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>चातुर्मास इंदौर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>चातुर्मास निष्ठापन और निर्वाण महोत्सव सम्पन्न</title>
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		<pubDate>Wed, 26 Oct 2022 12:18:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुरैना (मनोज नायक)। जैन अतिशय क्षेत्र टिकटोली में भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव, चातुर्मास निष्ठापन एवं कलश वितरण कार्यक्रम भव्यतापूर्वक सम्पन्न हुए। क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष राजेन्द्र भण्डारी एवं महामंत्री ओमप्रकाश जैन ने बताया कि भगवान श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र टिकटोली में परम् पूज्य मुनिश्री अजीतसागर जी महाराज ससंघ का चातुर्मास चल रहा है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुरैना (मनोज नायक)।</strong> जैन अतिशय क्षेत्र टिकटोली में भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव, चातुर्मास निष्ठापन एवं कलश वितरण कार्यक्रम भव्यतापूर्वक सम्पन्न हुए। क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष राजेन्द्र भण्डारी एवं महामंत्री ओमप्रकाश जैन ने बताया कि भगवान श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र टिकटोली में परम् पूज्य मुनिश्री अजीतसागर जी महाराज ससंघ का चातुर्मास चल रहा है।</p>
<p>मुनिश्री के पावन सान्निध्य में जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव हर्षोल्लास पूर्वक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। निर्वाण दिवस पर अभिषेक, शांतिधारा, पूजन के पश्चात निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। इसके साथ ही चातुर्मास का समापन भी हो गया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-28762 size-full" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221026-WA0012.jpg" alt="" width="1280" height="625" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221026-WA0012.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221026-WA0012-300x146.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221026-WA0012-1024x500.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221026-WA0012-768x375.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221026-WA0012-990x483.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>मुनिश्री ने अपने शिष्यों के साथ चातुर्मास निष्ठापन की क्रियाएं सम्पन्न कीं। इसके बाद मुनिश्री ने प्रवचनों के माध्यम से सभी भक्तों को धर्मवृद्धि का आशीर्वाद प्रदान किया मुरैना में गढ़ी वाले नायक परिवार द्वारा आयोजित होने जा रहे श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान के आयोजन के लिए मुनिश्री ने नायक परिवार को आशीर्वाद प्रदान किया। विधान की पत्रिका एवं पोस्टर आदि का मुनिश्री ने अवलोकन भी किया। इस अवसर पर विधान की पत्रिका का विमोचन किया गया और क्षेत्र कमेटी की ओर से नायक परिवार को सम्मानित किया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर चातुर्मास स्थापना पर स्थापित किये गए मंगल कलशों का वितरण किया गया। मंगल कलश प्राप्त करने वालों में जगदीशचंद जैन भैयाजी, अभिषेक जैन टीटू (आलोक प्रेस), विनोद जैन (तार वाले), सोनू जैन (वरहाना), सुरेशचंद बाबूजी, सुमेदीलाल जैन (ख़बरोली), विवेक जैन विक्की, वीरेंद्र जैन (वावा), अनिल जैन (प्रिंसिपल), राजेन्द्र भण्डारी, प्रेमचंद जैन ( वन्दना साड़ी), वीरेंद्र जैन ठेकेदार, प्रेमचंद जैन (गढ़ी), पंकज जैन (मेडिकल), पारस जैन, डॉ. अभिषेक जैन, आशीष जैन पत्रकार सहित सभी तीर्थरक्षक सदस्य शामिल थे। कार्यक्रम के समापन पर सभी के लिए सामूहिक भोज की व्यवस्था रखी गई थी।</p>
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		<item>
		<title>व्यक्ति अपने पुण्य- पाप से दुखी और सुखी होता हैः मुनि सुधासागर जी</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/pap-punya-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Oct 2022 15:19:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पड़ोसी सुखी है तो उसके पुण्य की सराहना करने का दिया मंत्र श्रमण संस्कृति संस्थान के छात्र- छात्राओं को उपदेश ललितपुर. राजीव सिंघई । श्री अभिनन्दनोदय अतिशय तीर्थ में श्रमण निर्यापक मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ने श्रमण संस्कृति संस्थान के छात्र- छात्राओं को धर्मामृत पिलाते हुए कहा कि हम दूसरे को सुखी देखना ही नहीं चाहते। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पड़ोसी सुखी है तो उसके पुण्य की सराहना करने का दिया मंत्र</strong><br />
<strong>श्रमण संस्कृति संस्थान के छात्र- छात्राओं को उपदेश</strong></p>
<p><strong>ललितपुर. राजीव सिंघई ।</strong> श्री अभिनन्दनोदय अतिशय तीर्थ में श्रमण निर्यापक मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ने श्रमण संस्कृति संस्थान के छात्र- छात्राओं को धर्मामृत पिलाते हुए कहा कि हम दूसरे को सुखी देखना ही नहीं चाहते। अगर हम दुखी हैं तो दूसरों को भी दुखी देखना चाहते हैं। आपको नींद नहीं आ रही, रात भर करवट बदल रहे हैं पर बाजू वाला खर्राटे मारकर सो रहा है। बताओ तुम्हें कैसा लग रहा। अंदर से भाव उत्पन्न हो ही जाते हैं कि मैं रात भर से जाग रहा, मैं मर रहा हूं, पर ये आराम से चैन की नींद सो रहे हैं। हम रोगी हैं तो निरोगी को देखकर ईर्ष्या करते हैं जो सुख हमारे पास है नहीं, दूसरों में देखते हैं तो हम कुढ़ने लगते हैं।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone  wp-image-28453" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/WhatsApp-Image-2022-10-19-at-8.36.34-PM-300x90.jpeg" alt="" width="1157" height="347" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/WhatsApp-Image-2022-10-19-at-8.36.34-PM-300x90.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/WhatsApp-Image-2022-10-19-at-8.36.34-PM-1024x308.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/WhatsApp-Image-2022-10-19-at-8.36.34-PM-768x231.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/WhatsApp-Image-2022-10-19-at-8.36.34-PM-990x298.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/WhatsApp-Image-2022-10-19-at-8.36.34-PM.jpeg 1098w" sizes="(max-width: 1157px) 100vw, 1157px" /></p>
<p>ईर्ष्या के साथ साथ बद्दुआ भी देते हैं कि मुझे नींद नहीं आ रही, इसको भी न आये। मैं दुखी हूं, ये भी दुखी हो जाये। मैं फेल हो गया, ये भी फेल हो जाए। मैं रोगी हूं ये भी रोगी हो जाए। मनुष्य की पहली कमजोरी ईर्ष्या करना और दूसरी बद्दुआ देना है। ये सुखी क्यों, यह ईर्ष्या है और ये भी दुखी हो जाये ये बद्दुआ। मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ने कहा कि ये पापी का लक्षण है, अधर्मी का लक्षण है। उन्होंने सीख देते हुए कहा कि अगर तुम दुखी और पड़ोसी सुखी है तो उसके पुण्य की सराहना करो कि पूर्व में उसने पुण्य किया, उसी का परिणाम है कि आज वह सुखी है। कभी- कभी हम भगवान को भी दोष देने में नहीं चूकते हैं कि भगवान मैं दुखी हूं और पड़ोसी सुखी है।</p>
<p>आपने ऐसा पक्षपात क्यों किया। अगर मैं दुखी हूं तो पड़ोसी को भी दुखी करना था। हम अपने आप को दोष नहीं देते कि मेरे जीवन में जो दुख हैं, उसमें मेरा ही दोष है क्योंकि अतीत में मैंने किसी को दुखी किया होगा तो उसका फल मैं आज भोग रहा हूं। पर हमें अपने दोष नहीं दिखते, भगवान को भी पक्षपाती बना देते हैं। मुनिश्री ने सुखी और निरोगी होने का मंत्र बताते हुए कहा कि सुखी आदमी को देखकर कुढ़ो मत, उसे बद्दुआ मत दो परन्तु उसकी प्रशंसा करो। उनके पुण्य की सराहना करो, यही सुखी होने का रहस्य है। व्यक्ति अपने अपने पुण्य- पाप से दुखी और सुखी होता है। जैसा करोगे वैसा भरोगे।</p>
<p>पाप का बीज बोओगे तो उसमें फल भी दुख के लगेंगे। सीधा सा सिद्धान्त है कि जो बोओगे वही काटोगे। इसलिए दूसरों की बढ़ती देख कभी न ईर्ष्या भाव करूं। इस भाव के साथ जीवन जियें। कार्यक्रम का संचालन मंहामंत्री डा. अक्षय टडैया ने किया। धार्मिक आयोजन समिति के संयोजक मनोज बबीना ने बताया कि आज समयसार शिक्षण शिविर के अंतिम दिन प्रातः परीक्षा होगी और सभी विद्यार्थी प्रातः देवगढ़ और गोलाकोट जाकर प्रभु वंदना करेंगे।<br />
इसके पूर्व प्रातःकाल मूलननायक अभिनंदनाथ भगवान का श्रावकों ने अभिषेक किया।</p>
<p>इसके उपरान्त मुनि श्री के मुखारविन्द से शान्तिधारा आणिकार नागेन्द्र निश्चय बेंगलुरु, तरूण काला मुम्बई, चंदावाई संदीप सरार्फ के द्वारा हुई। तदुपरान्त श्रावक श्रेष्ठि परिवारों ने आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं मुनि श्री का पादप्रक्षालन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। बुधवार को निर्यापक मुनि श्री सुधासागर महाराज को आहार किरन प्रकाश शास्त्री कोटा, मुनि पूज्यसागर महाराज को आहार सांगानेर बालिका विद्यालय की छात्राओं को संजीव कुमार ममता स्पोर्ट के आवास पर, ऐलक धैर्यसागर को आहार नीरज चढ़रउ परिवार एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज को आहारदान का पुर्ण्याजन अमित कालू इमलिया परिवार को मिला।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>चातुर्मास औऱ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के लिए कार्यकारिणी की बैठक</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/panch-kalyanak-baithak/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Oct 2022 17:05:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पारसोला। स्थानीय जैन समाज द्वारा आगामी चातुर्मास और समवशरण की भव्य पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के लिए सन्मति भवन में जैन समाज के अध्यक्ष जयंतीलाल कोठारी और महावीर मैदावत के सानिध्य में युवा कार्यकारिणी की बैठक हुई। बैठक में पंच कल्याणक महोत्सव आयोजन समिति के लिए सर्वसम्मति से बाबूलाल सरिया को अध्यक्ष और सम्पति लाल तेजपाल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>पारसोला।</strong> स्थानीय जैन समाज द्वारा आगामी चातुर्मास और समवशरण की भव्य पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के लिए सन्मति भवन में जैन समाज के अध्यक्ष जयंतीलाल कोठारी और महावीर मैदावत के सानिध्य में युवा कार्यकारिणी की बैठक हुई। बैठक में पंच कल्याणक महोत्सव आयोजन समिति के लिए सर्वसम्मति से बाबूलाल सरिया को अध्यक्ष और सम्पति लाल तेजपाल सेठ व प्रकाश रत्नपाल पचौरी को उपाध्यक्ष बनाया गया।</p>
<p>जैन युवा कार्यकारिणी ने आचार्य श्री वर्द्धमान सागरजी महाराज ससंघ के महावीरजी जिला करौली से पारसोला विहार और भव्य समवशरण की प्रतिष्ठा के लिए तैयारी शुरू कर दी है। बैठक में सन्दीप वगेरिया, प्रवीण पचौरी, कुलदीप वगेरिया, विनोद जैन, योगेश घाटलिया, नरेश घाटलिया, प्रवीण वगेरिया, संजीव सेठ, अमित मकनावत सहित कई युवा उपस्थित थे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>वर्णी संस्थान विकास सभा का राष्ट्रीय अधिवेशन सम्पन्नc</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/vikas-sabha-sagar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 Oct 2022 11:13:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[Jaipur.Dr. Mahendra Jain। चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री सुनीलसागर के ससंघ के सान्निध्य में भट्टारक जी की नसियां, जयपुर में ‘वर्णी संस्थान विकास सभा’ का राष्ट्रीय अधिवेशन सम्पन्न हुआ। इसमें डॉ. शीतलचंद जैन, डॉ. सनत कुमार जैन, डॉ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’, डॉ. विमल जैन, डॉ. अखिल बंसल सहित कई विद्वान उपस्थित रहे। अधिवेशन से पूर्व वर्णी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>Jaipur.Dr. Mahendra Jain।</strong> चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री सुनीलसागर के ससंघ के सान्निध्य में भट्टारक जी की नसियां, जयपुर में ‘वर्णी संस्थान विकास सभा’ का राष्ट्रीय अधिवेशन सम्पन्न हुआ। इसमें डॉ. शीतलचंद जैन, डॉ. सनत कुमार जैन, डॉ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’, डॉ. विमल जैन, डॉ. अखिल बंसल सहित कई विद्वान उपस्थित रहे। अधिवेशन से पूर्व वर्णी संस्थान विकास सभा का विधिवत गठन हुआ और विधिवत कार्यकारिणी घोषित की गई। इसमें परम संरक्षक सुरेश चंद जैन आईएएस नैनागिरि, डॉ. भागचंद ‘भास्कर’, श्रीजीवंधर शास्त्री जबलपुर को मनोनीत किया गया।</p>
<p>राजकुमार शास्त्री सागर, प्रतिष्ठाचार्य ऋषभ शास्त्री राजिम, शीतलचंद शास्त्री मानकी, अशोक शास्त्री रजपुरा को परामर्श मंडल में मनोनीत किया गया। अध्यक्ष पद पर डॉ. पंडित हरिशचंद जैन साहित्याचार्य पूर्व प्राचार्य श्री गोपालदास दिगंबर जैन संस्कृत महाविद्यालय मुरैना को, महामंत्री पद पर त्रिलोकचंद्र शास्त्री प्रबंधक त्रिलोक तीर्थ संस्थान बड़ागांव दिल्ली, कार्याध्यक्ष संजय जैन ढाना वरिष्ठ समाजसेवी को, मुख्य संयोजक पद पर चन्द्रेश शास्त्री, भारतीय डाक सेवा प्रवर अधीक्षक डाकघर ग्वालियर संभाग को, कोषाध्यक्ष पद पर राजेंद्र शास्त्री दलपतपुर को, प्रबंध संयोजक पद पर कमलेश जैन जेरा, उपाध्यक्ष पद पर दीपचंद जैन शास्त्री भोपाल, डॉ. अरविंद जैन शास्त्री सुनवाहा इंदौर, प्रकाश सागोनी, सुरेश केवलारी, विनोद बम्हौरी और मनोज जैन बेगमगंज को नियुक्त किया गया।</p>
<p>वहीं संयुक्तमंत्री पद भाई आनंदी लाल जैन, संगठन मंत्री पद पर राजेंद्र जैन नैनागिर बैतूल को नियुक्त किया गया। अन्य पदाधिकारी डॉ. संजय शास्त्री सागर, पं. अखिलेश जैन रामगढ़ा, संजय पावला मनोनीत किये गये। सभी पदाधिकारियों का शपथग्रहण समारोह भी संपन्न किया गया। कार्यक्रम के संयोजक चन्द्रेश शास्त्री ने बताया कि उक्त संस्था की स्थापना परम पूज्य 108 आचार्य आदिसागर अंकलीकर परंपरा के महान तपस्वी साधक आचार्य 108 सुनील सागर जी महाराज के आशीर्वाद से हुई है।</p>
<p>यह संस्था परम पूज्य आचार्य श्री के मंगल आशीर्वाद से देश के समस्त वर्णी संस्थानों के लिए कार्य करेगी तथा वर्णी जी के संस्कृति संवर्धन कार्य को आगे बढ़ाएगी। इस संस्था के किसी भी निर्णय में परम पूज्य आचार्यश्री सुनीलसागर जी का ही निर्देशन सर्वमान्य होगा। ज्ञातव्य है कि इस अवसर पर वर्ष 2022 के प्रतिष्ठित पांचों अंकलीकर पुरस्कार गणेशवर्णी दिगम्बर संस्कृत विद्यालय वर्णीभवन मोराजी और इस विद्यालय में सेवारत रहे प्राध्यापकों को प्रदान किये गये।</p>
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			</item>
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		<title>रानी बाग में मनाया गया शरद पूर्णिमा महोत्सव</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/rani-yog-jain/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Oct 2022 14:08:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली. समीर जैन। श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर, रानी बाग में शरद पूर्णिमा के परम पावन अमृत योग में प्रथम बार 16 मंडलीय श्री शान्तिनाथ महामण्डल विधान एवं विश्वशान्ति मंत्रानुष्ठान का भव्य आयोजन परम श्रद्धेय, मंत्र महर्षि, धर्मयोगी संत (डॉ.) क्षुल्लक श्री 105 योग भूषण जी महाराज के पावन सान्निध्य में भक्तिभाव सहित किया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली. समीर जैन।</strong> श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर, रानी बाग में शरद पूर्णिमा के परम पावन अमृत योग में प्रथम बार 16 मंडलीय श्री शान्तिनाथ महामण्डल विधान एवं विश्वशान्ति मंत्रानुष्ठान का भव्य आयोजन परम श्रद्धेय, मंत्र महर्षि, धर्मयोगी संत (डॉ.) क्षुल्लक श्री 105 योग भूषण जी महाराज के पावन सान्निध्य में भक्तिभाव सहित किया गया। मूलनायक श्री शान्तिनाथ भगवान की मनोहारी प्रतिमा का प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य ज्ञान चंद जैन (रानी बाग), वृहद् शान्तिधारा का सौभाग्य राजकुमार जैन (श्रीनगर) एवं राजेश जैन (विवेकानंदपुरी) को प्राप् हुआ।</p>
<p>महायज्ञनायक बनने का सौभाग्य रमेश चंद जैन (राजा पार्क) को प्राप्त हुआ। पं. विवेक जैन शास्त्री के विधानाचार्यत्व में समस्त मांगलिक क्रियाएं विधि-विधान पूर्वक संपन्न हुईं। नित्य-नियम पूजन के पश्चात मंडल प्रतिष्ठा की गई, जिसमें ममता जैन सेठी (रानी बाग), काकाली जैन बड़जात्या (रानी बाग), सुमन जैन (श्रीनगर) एवं सुनीता जैन (श्रीनगर) को चतुष्कोण कलश तथा हीरादेवी जैन बड़जात्या (रानी बाग) को मुख्य कलश विराजमान करने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ। युवा मंडल द्वारा क्षुल्लक श्री के पाद प्रक्षालन किया गया। सौभाग्यवती महिलाओं द्वारा शास्त्र भेंट किया गया।</p>
<p>श्री शान्तिनाथ कथा के माध्यम से क्षुल्लक श्री ने उपस्थित जनसमुदाय को श्री शान्तिनाथ भगवान के जीवन से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा का ज्योतिषीय मुहूर्त मंत्र साधना व सिद्धि के लिए विशिष्ट लाभकारी है। क्षुल्लक श्री ने यह भी बताया कि शरद पूर्णिमा पर चन्द्रमा अपनी समस्त कलाओं के साथ आकाश से धरती पर अमृत की वर्षा करता है, जिसमें स्नान करने से अभूतपूर्व आनंद की अनुभूति होती है। इस शुभ संयोग पर पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का जन्मदिवस, पूज्य आचार्य श्री अतिवीर जी मुनिराज का एलाचार्य पद प्रतिष्ठापन दिवस, गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का जन्मदिवस आते हैं।</p>
<p>अतिशय क्षेत्र बड़ागांव में अनुपम कृति त्रिलोक तीर्थ का शिलान्यास जैसा अद्वितीय कार्य भी इसी दिन संपन्न हुआ है। विधान का समापन सर्वतोभद्र मंत्रानुष्ठान से हुआ, जिसमें सभी ने पुष्पाहुति से विश्वशांति की मंगल कामना की।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>गुरुदेव के अवतरण दिवस पर नेत्र शिविर का हुआ आयोजन</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/samaj-sagar-kasli/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 09 Oct 2022 15:27:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[इंदौर. राजेश जैन दद्दू । संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के अवतरण दिवस पर आज शरद पूर्णिमा पर निशुल्क नेत्र शिविर, निशुल्क चश्मा एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन पंचवालयति मंदिर में किया गया। प्रचार संयोजक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आयोजन में विशेष रूप से कासलीवाल परिवार, काला फाउंडेशन से विमला कासलीवाल, अनुपमा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर. राजेश जैन दद्दू ।</strong> संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के अवतरण दिवस पर आज शरद पूर्णिमा पर निशुल्क नेत्र शिविर, निशुल्क चश्मा एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन पंचवालयति मंदिर में किया गया। प्रचार संयोजक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आयोजन में विशेष रूप से कासलीवाल परिवार, काला फाउंडेशन से विमला कासलीवाल, अनुपमा विकास एवं सामाजिक संसद कोषाध्यक्ष राजेन्द्र, शशि सोनी सहित विशेष जन उपस्थित हुए। शिविर में आंखों की जांच हुई एवं निशुल्क चश्मों का वितरण किया गया। विनोद चंद्रेश, सुधीर सिघंई, सुरेश चंद, घनश्याम, वीरेन्द्र, गौरव, राकेश, डॉ. पवार, डॉ. संदीप, डॉ. नीता बजाज, पंचवालयति मंदिर संघ समिति अहिंसा ग्रुप के साथी व अनेक समाज श्रेष्ठी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।</p>
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		<title>जीवन में धन हो ना हो लेकिन माता- पिता जरूर हों-मुनि मुनि श्री आदित्य सागर जी</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/jeevan-mein-dhan-ho-na-ho-lekin-maata-pita-jaroor-hon-muni-muni-shree-aadity-saagar-jee/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Aug 2022 15:22:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Shreephalnews]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि आदित्य सागर]]></category>
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					<description><![CDATA[माता- पिता अपने बच्चों को सदैव हित के लिए प्रेरित करते हैं न्यूज़ सौजन्य -राजेश जैन दद्दू इंदौर। समोसरण मंदिर, कंचन बाग में मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने शनिवार को अपने प्रवचन में युवाओं को इंगित करते हुए कहा कि जीवन में धन हो ना हो लेकिन माता- पिता जरूर हों। माता- पिता [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>माता- पिता अपने बच्चों को सदैव हित के लिए प्रेरित करते हैं</strong></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;">न्यूज़ सौजन्य -राजेश जैन दद्दू</span></p>
<p><strong>इंदौर।</strong> समोसरण मंदिर, कंचन बाग में मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने शनिवार को अपने प्रवचन में युवाओं को इंगित करते हुए कहा कि जीवन में धन हो ना हो लेकिन माता- पिता जरूर हों। माता- पिता अपने बच्चों को सदैव हित के लिए प्रेरित करते हैं। यदि माता- पिता जन्म न देते तो तुम संसार में कैसे आते और कैसे सुख भोग पाते? इसलिए प्रत्येक युवक- युवती का कर्तव्य है कि वह जीवन की अंतिम सांस तक अपने माता पिता के प्रति कृतज्ञ रहें और उनकी सेवा करें।<br />
मुनि श्री ने आगे कहा कि आजकल की युवा पीढ़ी बन चुके भगवानों को तो पूज रही है लेकिन भविष्य में भगवान बनने वाली जीवात्मा (माता- पिता) को नहीं पूज रही है बल्कि उनकी उपेक्षा ही कर रही है। धिक्कार है उन युवाओं को, जो अपने माता- पिता और गुरुजनों से ऊंची आवाज में बात करते हैं और अपने व्यवहार से माता-पिता को दुखी कर रहे हैं। ऐसे युवा जीवन में कभी भी सुख नहीं पा सकते। मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि रविवार को मुनिश्री के विशेष प्रवचन होंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>अशुभ भाव रखने वालों के प्रति भी शुभ भाव रखेंः मुनि श्री आदित्य सागरजी</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/ashubh-bhaav-rakhane-vaalon-ke-prati-bhee-shubh-bhaav-rakhenh-muni-shree-aadity-saagarajee/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Aug 2022 15:04:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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		<category><![CDATA[Shreephalnews]]></category>
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		<category><![CDATA[न्यूज़ श्रीफल]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि आदित्य सागर]]></category>
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					<description><![CDATA[समोसरण मंदिर, कंचन बाग में चारित्र विनय पर प्रवचन न्यूज़ सौजन्य- राजेश जैन दद्दू इंदौर‌। संसार में सब तरह के लोग होते हैं। कुछ विघ्न संतोषी भी होते हैं जो किसी के प्रति शुभ भाव नहीं रखते, किसी को सुखी नहीं देख सकते। सच्चा सम्यक दृष्टि वही है जो अशुभ भाव रखने वालों के प्रति [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>समोसरण मंदिर, कंचन बाग में चारित्र विनय पर प्रवचन</strong></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;">न्यूज़ सौजन्य- राजेश जैन दद्दू</span></p>
<p><strong>इंदौर‌।</strong> संसार में सब तरह के लोग होते हैं। कुछ विघ्न संतोषी भी होते हैं जो किसी के प्रति शुभ भाव नहीं रखते, किसी को सुखी नहीं देख सकते। सच्चा सम्यक दृष्टि वही है जो अशुभ भाव रखने वालों के प्रति भी शुभ भाव रखे। जब कोई आपको पीड़ा पहुंचाए तो समता रखना एवं आर्त रोद्र ध्यान नहीं करना, धर्म ध्यान करना। कर्म किसी को नहीं छोड़ते, सीए अकाउंट में भूल- चूक कर सकता है लेकिन कर्म, अपना फल देने में कभी भी भूल चूक नहीं कर सकता। कर्म बंध का फल तो व्यक्ति को भोगना ही पड़ता है।<br />
यह उद्गार मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने बुधवार को समोसरण मंदिर, कंचन बाग में व्यक्त किए। मुनि श्री अप्रमित सागरजी ने चारित्र विनय पर प्रवचन देते हुए कहा कि कभी भी पुण्यात्मा एवं दिगंबर मुनियों का अविनय ना करें, जो दिगंबर मुनियों एवं त्यागियों की निंदा करता है उसका पुण्य क्षीण होता है और उसे तीव्र कषाय भाव के परिणाम भुगतना पड़ते हैं। अतः किसी के प्रति विनय नहीं कर सकते तो अविनय भी ना करें। इस अवसर पर प्रवचन पंडाल में आर्यिका पूर्णमति माताजी के सान्निध्य में होने वाले गुरु आराधना महोत्सव में निकलने वाली वैराग्य बारात मैं नेमीकुमार के रूप में दूल्हे की भूमिका निभाने वाले आदित्य एवं नेमी कुमार के भाई बलदेव बने आगम की गोद मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज के ससंघ सान्निध्य में भरी गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री प्रदीप जैन आदित्य भी इस अवसर पर उपस्थित थे। उन्होंने भी नेमी कुमार की गोद भरने का सौभाग्य अर्जित किया। सभा का संचालन हंसमुख गांधी ने किया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>आपके जैसे भाव, वैसी गति होगीः मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/aapake-jaise-bhaav-vaisee-gati-hogeeh-muni-shree-aadity-saagar-jee-mahaaraaj/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Jul 2022 02:28:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Shreephalnews]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिआदित्य सागर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[आज का विचार जिसे बुरा भी बूरा सा (शक्कर का) लगे, वह साधु न्यूज सौजन्य- राजेश जैन दद्दू इंदौर। श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने समोसरण मंदिर, कंचन बाग में शनिवार को प्रवचन देते हुए कहा कि आपके भाव स्वर्ग का सुख ही नहीं, मोक्ष का भी सुख दे सकते हैं। जैसा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: center"><strong>आज का विचार</strong></p>
<blockquote>
<p style="text-align: left"><span style="color: #008000"><strong><em>जिसे बुरा भी बूरा सा (शक्कर का) लगे, वह साधु</em></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000">न्यूज सौजन्य- राजेश जैन दद्दू</span></p></blockquote>
<p><strong>इंदौर।</strong> श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने समोसरण मंदिर, कंचन बाग में शनिवार को प्रवचन देते हुए कहा कि आपके भाव स्वर्ग का सुख ही नहीं, मोक्ष का भी सुख दे सकते हैं। जैसा भाव वैसा भव, अर्थात जैसी आप के भावों की गति होगी वैसी ही आप के भव की गति होगी। अतः शुभ भावों को जागृत करें और अनुपयोगी भाव और अनुपयोगी वस्तुओं का त्याग करें।<br />
आदित्य सागर जी ने आपने साधु के भावों की चर्चा करते हुए कहा कि साधु के भाव समता मूलक, निष्परिग्रह (लेश मात्र परिग्रह नहीं), निशंग (शल्य रहित) और निरग्रंथ (ग्रंथिरहित) होते हैं। जिसे बुरा भी बूरा सा (शक्कर का) लगे, वह साधु है। साधु में साधुता देखना चाहते हैं तो पहले अपने स्वभाव में साधुता लाएं, साधु भावों की प्राप्ति के लिए अपने अशुभ भावों को कृष करें। असाधु भाव छोड़ना, साधु भाव जोड़ना आपका मोक्ष मार्ग प्रशस्त होने में सहायक होगा।</p>
<p>स्थिति और कर्म बड़ा रोड़ाः सहज सागर<br />
मुनि श्री सहज सागर जी ने भी धर्मसभा में प्रवचन देते हुए कहा कि हमारे भाव तो संस्कारों को इकट्ठे करने के होते हैं लेकिन स्थिति और कर्म के वश के कारण हम उसमें स्थिर नहीं हो पाते। इस अवसर पर वार्ड नंबर 55 से हाल ही में पार्षद निर्वाचित श्रीमती पंखुड़ी दोषी और वार्ड नंबर 50 से निर्वाचित श्री राजीव जैन के पार्षद निर्वाचित होने पर दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष श्री राजकुमार पाटोदी, सुशील पांड्या, अरुण सेठी, आजाद जैन हंसमुख गांधी और श्रीमती ममता एवं आशा खासगीवाला ने पार्षद द्वय का मोतियों की माला, शाल और श्रीफल से सम्मान किया इस अवसर पर पंडित रतन लाल जी शास्त्री अशोक खासगी वाला डॉक्टर जैनेंद्र जैन कैलाश वेद आदि उपस्थित थे।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>जितनी बड़ी बोली लगे वह उतना बड़ा साधु, इस परंपरा को रोकना होगा</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/jitanee-badee-bolee-lage-vah-utana-bada-saadhu-is-parampara-ko-rokana-hoga/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[मनीष गोधा]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Jul 2022 15:31:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[इन्दौर जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[मंगल कलश स्थापना]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि आदित्य सागर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; इंदौर के कंचनबाग में मुनि श्री आदित्य सागर ने कहा, चातुर्मास में धन का नहीं धर्म का संग्रह करो न्यूज सौजन्य- राजेश जैन दद्दू इंदौर। वर्षा काल में सूक्ष्म जीवों की अधिक उत्पत्ति होने से आवागमन करनने पर इनकी हिंसा हो सकती है। इसलिए साधु अहिंसा धर्म का पालन, जीवों की रक्षा और श्रुत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong><em>इंदौर के कंचनबाग में मुनि श्री आदित्य सागर ने कहा, चातुर्मास में धन का नहीं धर्म का संग्रह करो</em></strong></p>
<p><span style="color: #ff0000">न्यूज सौजन्य- राजेश जैन दद्दू</span></p>
<p><strong>इंदौर</strong>। वर्षा काल में सूक्ष्म जीवों की अधिक उत्पत्ति होने से आवागमन करनने पर इनकी हिंसा हो सकती है। इसलिए साधु अहिंसा धर्म का पालन, जीवों की रक्षा और श्रुत की आराधना के लिए 4 माह तक एक ही स्थान पर ठहरकर चातुर्मास करते हैं। मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने समोसरण मंदिर कंचन बाग में 11वें श्रुत आराधना वर्षायोग मंगल कलश स्थापना समारोह में धर्म सभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। उनके साथ मुनिश्री अप्रतिमसागरजी, मुनि श्री सहजसागरजी भी वर्षा योग कर रहे हैं।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि चातुर्मास को कभी धन के संग्रह से मत जोड़ना, चातुर्मास में धन का नहीं धर्म का संग्रह और श्रुत की आराधना होना चाहिए। मुनिश्री ने आजकल श्रावकों एवं समाज में पनप रही इस धारणा को भी गलत बताया कि जिस साधु के सान्निध्य में जितनी बड़ी बोली लगे वह उतना बड़ा साधु। श्रावकों को कोई हक नहीं कि वह बोलियों के दम पर साधु की पहचान स्थापित करे। साधु की पहचान बोलियों से नहीं, साधु की बोली (वाणी, प्रवचन) , चर्या, चरित्र और ज्ञान से की जाना चाहिए। समाज को मैत्री, प्रमोद, करुणा और माध्यस्थ भाव से जीने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जहां भी चातुर्मास हो रहे हैं, वह सभी धर्म की अभूतपूर्व प्रभावना के साथ महामंगलमयी हों और श्रावक भी सुविधा, समय और इच्छा अनुसार जहां चाहे वहां जाकर साधु के सान्निध्य में जिनवाणी का श्रवण करे।<br />
प्रवचन के पूर्व आचार्यश्री विद्यासागर एवं आचार्यश्री विशुद्ध सागरजी के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्जवलन समोसरण मंदिर ट्रस्ट, तुकोगंज दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारियों ने किया। आचार्य विशुद्धसागर जी की पूजन हुई एवं मुनि संघ का पाद प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किए गए।</p>
<p><img decoding="async" class="size-medium wp-image-25236 aligncenter" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/07/IMG-20220710-WA0011-300x135.jpg" alt="" width="300" height="135" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/07/IMG-20220710-WA0011-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/07/IMG-20220710-WA0011-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/07/IMG-20220710-WA0011.jpg 1040w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>मुख्य मंगल कलश प्राप्त करने का सौभाग्य डॉक्टर महेंद्र कुमार अनिल कुमार परिवार भोपाल ने एवं प्रथमानुयोग कलश लेने का सौभाग्य सर्वश्री नरेंद्र कुमार पप्पाजी, आजाद कुमारजी, सुशील पांड्या सुभाष गंगवाल और पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर अंजनी नगर ने प्राप्त किया।इस अवसर पर पंडितश्रीरतनलालजी शास्त्री, अधिष्ठाता ब्रह्मचारी अनिल भैया, अभय भैया ,राजकुमार पाटोदी, अमित कासलीवाल, एम के जैन टी के वेद, डॉक्टर अनुपम जैन, अजीत जैन, अशोक खासगीवाला, डॉक्टर जैनेंद्र जैन, जैनेस झांझरी, कैलाश वेद, स्वतंत्र सिरमोर, राजेश जैन दद्दू, जयंतीलाल शाह आदि उपस्थित थे। संचालन हंसमुख गांधी ने किया।</p>
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