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	<title>चरण प्रक्षालन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>चरण प्रक्षालन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 10 वर्षों के बाद भव्य मंगल प्रवेश : श्री दिगंबर चंद्रप्रभ मंदिर चंद्रपुरी बड़ के बालाजी ठिकरिया गांव में हुुई भव्य अगवानी  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 May 2026 10:41:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 5 मई को 6.5 किमी विहार कर श्री दिगंबर चन्द्रप्रभ मंदिर चंद्रपुरी बड़ के बालाजी ग्राम ठिकरिया में हाथी धोड़े, सैकड़ों ध्वज पताका भक्ति नृत्य के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 5 मई को 6.5 किमी विहार कर श्री दिगंबर चन्द्रप्रभ मंदिर चंद्रपुरी बड़ के बालाजी ग्राम ठिकरिया में हाथी धोड़े, सैकड़ों ध्वज पताका भक्ति नृत्य के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 5 मई को 6.5 किमी विहार कर श्री दिगंबर चन्द्रप्रभ मंदिर चंद्रपुरी बड़ के बालाजी ग्राम ठिकरिया में हाथी धोड़े, सैकड़ों ध्वज पताका भक्ति नृत्य के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। भागचंद सुनीता चुड़ीवाल परिवार ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर मंगल आरती की। आचार्य श्री के साथ 10 मुनिराज, 20 आर्यिका, 1 ऐलक, 4 क्षुल्लक और 1 क्षुल्लिका सहित 37 पिच्छी का प्रवेश हुआ। सुनीता भागचंद चुड़ीवाल अनुसार इसके पूर्व 28 फरवरी 2016 को आचार्य श्री संघ का जयपुर महानगर के बड़ के बालाजी में प्रवेश हुआ था। आचार्य संघ श्री जी के दर्शन, पंचामृत अभिषेक के बाद मंचासीन हुए। श्री चंद्रप्रभ भगवान के चित्र अनावरण कर दीप प्रज्वलन ब्रह्मचारी गज्जू भैय्या एवं अतिथियों सुनीता, भागचंद चूड़ीवाल परिवार ने किया। नृत्य मंगलाचरण के बाद मुनि श्री हितेंद्रसागर जी के प्रवचन हुए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने समाधिस्थ आर्यिका श्री सुपार्श्व मतिजी के जन्म स्थली सनावद में वर्ष 1964 चातुर्मास का उल्लेख कर यादें साझा की।</p>
<p><strong>आत्मा को कोई नहीं देखता </strong></p>
<p>आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने कहा कि देव शास्त्र और गुरु परम आराध्य हैं। इनकी भक्ति से कर्म नष्ट प्रक्षालन होता हैं। देव ,शास्त्र ,गुरु जैनधर्म के प्राण हैं और उनका जीवन, संसार के प्राणी के लिए मार्गदर्शक होता है। चाहे देव हो, चाहे शास्त्र हो या गुरु हो। उनके द्वारा प्राप्त मार्गदर्शन जो होता है। उस मार्गदर्शन से संसार का प्राणी अपने जीवन को संवारता है। जब आप घर से निकलते हैं तो दर्पण आपके सामने होता है। दर्पण के सामने आप खड़े होते हैं और उस दर्पण में अपने शरीर कमी को देखकर ठीक करते हो। आत्मा को कोई नहीं देखता कि आत्मा कर्मों से मलीन है। शरीर को देखते हैं कि अब हम घर से बाहर जा रहे हैं हमारा शरीर ठीक है या नहीं है।</p>
<p><strong>जब पाप कर्मों का उदय आता है, जब जीवन में बाधा कष्ट आते हैं</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने आगे बताया कि ममता कहंे या मोह कहें। इस मोह से ऊपर उठने के लिए भगवान जी के चरणों में जाया जाता है। अभिषेक पूजन भक्ति की जाती है। धार्मिक कार्यों से आत्मा पुण्य कमाती अर्जित करती है। उस पुण्य के फल से श्रेष्ठ मानव कुल प्राप्त होता है। श्रेष्ठ कुल में मार्गदर्शक गुरुजन जो है, वो मार्ग जैसा बताते हैं। वैसे कर्म करने से पाप कर्म पुण्यकर्म किए जाते हैं। जब पाप कर्मों का उदय आता है, जब जीवन में बाधा कष्ट आते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि हमें याद आती गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्व मति जी, उन्होंने दीक्षा का संकल्प लिया था उसे पूरा किया।</p>
<p><strong>आर्यिका श्री सुपार्श्व मति जी को याद कर आचार्यों का भी किया स्मरण</strong></p>
<p>आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने कहा कि वचन का पालन करना साधु का परम कर्तव्य होता है। जिनके जीवन में धर्म का आलंबन होता है, वे ठीक-ठीक प्रकार से विचार कर दृढ़ संकल्प को पूर्ण करते हैं। अपनी गृहस्थ अवस्था और आर्यिका श्री सुपार्श्व मति जी के चातुर्मास का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हम बहुत छोटे थे, उस वर्षायोग में माताजी के पास बैठकर के अध्ययन करने का एक अवसर मिला था। माताजी ने हमें सन 1965 में देखा था लेकिन, उनके मन में एक भाव था, क्या देखा था? क्या उनका ज्योतिष ज्ञान था? कुछ पता नहीं लेकिन, उन्होंने कहा कि इस व्यक्ति में कुछ दम योग्यता गुण तो है। चतुर्थ पट्टाधीश श्री अजित सागर जी महाराज ने आचार्य पद का निर्णय किया। उस निर्णय को मुहर लगाने का काम माताजी ने किया था। माताजी ने यही कहा था कि मैंने 1965 में उनको उनके घर में देखा था। मेरा ज्ञान कहता है कि यह आचार्य जरूर बनेंगे। आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज, आचार्य श्री अजीत सागर जी महाराज का मस्तक पर हाथ रखा हुआ आशीर्वाद साथ रहा। आचार्य श्री अजीत सागर जी महाराज भी अस्वस्थ थे और अस्वस्थता के कारण उन्होंने 4 लाइन का श्लोक लिखकर भेजा। आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज की समाधि के बाद हम सब लोग अजमेर में थे। 4 लाइन का 1 श्लोक लिखा हुआ, जिस की अंतिम पंक्ति थी। मैं प्रतीक्षा कर रहा हूं पर मिलाने वाला दुर्लभ है। संघ में साधुओं ने निर्णय लिया आज ही चलेंगे देखें दुर्लभता क्या करती है और उसी समय संघ ने विहार कर दिया और जाकर मिल गए।</p>
<p><strong>भक्ति में वो शक्ति है और शक्ति प्राप्त होती है</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि हमें अवसर मिला आचार्य श्री की सेवा करने का। बंधुओं देव शास्त्र, गुरु की, भक्ति करें, पूजन करें, आराधना करें, इससे पुण्य अर्जन करें। ये 3 द्रव्य तो ऐसे हैं कि जिनकी भक्ति कभी खाली नहीं जाती है। आवश्यकता इस बात की है कि वैसे हमारा मन बने यदि देव शास्त्र, गुरु की भक्ति करते हैं। सुनिश्चित बात है कि उसका फल अवश्य प्राप्त होता है क्योंकि, उनकी भक्ति में वो शक्ति है और शक्ति प्राप्त होती है। भक्ति करने वाले को वह अपने जीवन में सुकार्य शुभ कार्य करता है, पुण्य अर्जन करता है और पुण्य अर्जन करने के बाद उसे उसका प्रतिफल पूरे रूप में मिलता है। पीले पीले वस्त्र ड्रेस कोड हो गया। पुरुषों ने 1 ड्रेस कोड बना लिया। पीला कुर्ता और सफेद पाजामा। ड्रेस कोड का बड़ा महत्व होता है। भगवान का अभिषेक करने के लिए भी सुनिश्चित ड्रेस धोती दुपट्टा है। देव गुरु हमारे परम आराध्य है। सारे कर्मों का प्रक्षालन भी देव शास्त्र गुरु की परम भक्ति करके ही कर सकते हैं।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में होगी पंच कल्याणक प्रतिष्ठा: भव्य मंगल प्रवेश पर अगवानी में उमड़े समाजजन, चरण प्रक्षालन कर पुष्पवृष्टि की  </title>
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		<pubDate>Tue, 25 Nov 2025 11:47:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सवाई माधोपुर जिले के जैन समाज, पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति और 1008 श्री चंद्र प्रभु मंदिर समिति पीपल्दा तथा संपूर्ण सर्वधर्म के नागरिकों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की संघ सहित भव्य अगवानी की। पीपल्दा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; पीपल्दा। सवाई माधोपुर जिले के जैन समाज, पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति और [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सवाई माधोपुर जिले के जैन समाज, पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति और 1008 श्री चंद्र प्रभु मंदिर समिति पीपल्दा तथा संपूर्ण सर्वधर्म के नागरिकों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की संघ सहित भव्य अगवानी की। <span style="color: #ff0000">पीपल्दा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पीपल्दा।</strong> सवाई माधोपुर जिले के जैन समाज, पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति और 1008 श्री चंद्र प्रभु मंदिर समिति पीपल्दा तथा संपूर्ण सर्वधर्म के नागरिकों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की संघ सहित भव्य अगवानी की। मंगल आरती कर उनके चरण प्रक्षालन किए। मंगलवार को राजकीय स्वास्थ्य केंद्र पीपल्दा से आचार्य श्री संघ का दिगंबर मंदिर के लिए जुलूस प्रारंभ हुआ। नगर में 1 किमी पूर्व से बड़े-बड़े फ्लेक्स कट आउट और स्वागत द्वार सभी धर्मों ने नागरिकों ने राजकीय अतिथि 76 वर्षीय पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर पर पुष्प वृष्टि कर मंगल आरती की विभिन्न स्थानों पर पाद प्रक्षालन किया गया। जुलूस के प्रारंभ में शताधिक महिलाओं ने मस्तक पर कलश धारण किए। जगह-जगह समाजजनों ने मकान के सामने रांगोली बनाई। प्रशासनिक अधिकारियों भी राजकीय अतिथि की अगवानी व्यवस्था में तत्पर रहे। युवाओं का उत्साह और भक्ति चरम सीमा पर रही।</p>
<p><strong>संक्षिप्त आशीर्वचन से भक्तों को आशीष दिया </strong></p>
<p>1008 चंद्र प्रभु श्री महावीर स्वामी, आचार्य श्री शांतिसागर जी, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की जय जयकार से नगर गुंजायमान रहा। पीपल्दा जैन समाज अध्यक्ष बजरंगलाल और पंच कल्याणक समिति के अध्यक्ष मनोज जैन सोगानी ने बताया कि जुलूस का समापन नूतन मंदिर परिसर में हुआ। आचार्य श्री ने संक्षिप्त आशीर्वचन प्रवचन में कहा कि नूतन मंदिर का निर्माण नगर के पुण्य से होता हैं। धार्मिक क्रियाओं से पुण्य में वृद्धि होती हैं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-95337" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0045.jpg" alt="" width="1599" height="899" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0045.jpg 1599w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0045-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0045-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0045-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0045-1536x864.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0045-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0045-1320x742.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0045-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0045-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0045-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0045-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1599px) 100vw, 1599px" />5 दिवसीय होगा कल्याणक प्रतिष्ठा समारोह </strong></p>
<p>आगामी 28 नवंबर से 2 दिसंबर तक 5 दिवसीय बहु प्रतिक्षित पंच कल्याणक आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ के सानिध्य और निर्देशन में प्रतिष्ठाचार्य पंडित मनोज शास्त्री के द्वारा धार्मिक क्रियाओं से संपन्न होगा। दीपक प्रधान के अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागरजी सहित 7 साधु आए हैं। पंच कल्याणक के प्रमुख पात्रों माता पिता, सौधर्म इंद्र, कुबेर, महायज्ञ नायक माहेन्द्र ब्रह्म इंद्र सहित सभी ने आचार्य संघ की अगवानी की।</p>
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		<title>धर्म मरण को समाधि संलेखना से सुमरण बनाता है: आत्महत्या करने से अगले जन्म में अल्प आयु होती हैं &#8211; आचार्य श्री वर्धमान सागर जी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Jul 2025 13:48:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संसारी प्राणी सुख और शरण की खोज करते हैं। रोगी डॉक्टर की शरण में जाते हैं, आपत्ति और कष्ट आने पर आप भगवान को याद करते हैं। देव शास्त्र गुरु के अलावा अन्य कोई मंगल शरण नहीं है, यह पंच परमेष्ठि हमें सुख, धर्म का मार्ग दिखाते हैं। टोंक से विकास जैन की पढ़िए, यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संसारी प्राणी सुख और शरण की खोज करते हैं। रोगी डॉक्टर की शरण में जाते हैं, आपत्ति और कष्ट आने पर आप भगवान को याद करते हैं। देव शास्त्र गुरु के अलावा अन्य कोई मंगल शरण नहीं है, यह पंच परमेष्ठि हमें सुख, धर्म का मार्ग दिखाते हैं। <span style="color: #ff0000">टोंक से विकास जैन की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> संसारी प्राणी सुख और शरण की खोज करते हैं। रोगी डॉक्टर की शरण में जाते हैं, आपत्ति और कष्ट आने पर आप भगवान को याद करते हैं। देव शास्त्र गुरु के अलावा अन्य कोई मंगल शरण नहीं है, यह पंच परमेष्ठि हमें सुख, धर्म का मार्ग दिखाते हैं। जैन धर्म प्रचारक विमल जौंला के अनुसार आचार्य श्री ने कहा कि संसार में विषय भोगों के कारण जन्म मरण का आवागमन होता है क्योंकि, सांसारिक प्राणी पांच इंद्रीय के विषय भोगों में लिप्त है। आपके कर्मों मिथ्यात्व के कारण आपको उस अनुसार गति प्राप्त होती है ।केवल मनुष्य गति में ही संयम धारण कर दीक्षा धारण की जा सकती है। देवता भी संयम लेने को तरसते हैं। धर्म ही मरण को समाधि द्वारा सुमरण बनाता है। आत्महत्या करना धार्मिक दृष्टि से ठीक नहीं है, जो आत्महत्या करते हैं उन्हें अगले जन्म में अल्प आयु प्राप्त होती है। जैसे कर्म रूपी बीज बोते हैं, उसी अनुसार पुण्य पाप का फल प्राप्त होगा। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने धर्म सभा में प्रकट की।</p>
<p><strong>तीन बार णमोकार मंत्र का जाप करना चाहिए</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने सूत्र बताए कि सभी को गुरु संतों के वचनों पर श्रद्धा रखना चाहिए।सभी को एक दिन में तीन कम से कम तीन बार णमोकार मंत्र का जाप सुबह ,दोपहर शाम को करना चाहिए। जप से एकाग्रता और शांति महसूस होती है जप श्रद्धापूर्वक करना चाहिए जाप कीऔपचारिकता या दिखावा नहीं करना चाहिए। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री निर्मुक्तमति माताजी ने प्रवचन में बताया कि सभी को संत समागम का लाभ लेना चाहिए आपने दान चार प्रकार बताएं। आहार दान देने में दाता के सात गुण होते हैं। दान नवधा भक्ति से विवेक ,श्रद्धा ,आनंद पूर्वक निर्मल भाव से देना चाहिए।</p>
<p>चातुर्मास समिति प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार के अनुसार प्रवचन के पूर्व श्री जी और पूर्वाचार्यों के चित्र समक्ष दीप प्रवज्जलन जैन वूमन्स ग्रुप ने किया तथा आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन एवं जिनवाणी भेंट की एवं भक्ति भाव से मंगल अष्ट द्रव्यों से पूजन किया। इस मौके पर टोनी आंडरा को प्रबंध समिति का सहमंत्री बनाया गया। इस दौरान गुरुवार को आचार्य को गुरु भक्त निवाई के लाड़ देवी, गोपाल कठमाणा, शंभु कठमाणा, रानी देवी एवं मीना कठमाणा को निवाई के चोके में आहार चर्या करवाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इंदौर से पधारे गुरुभक्त स्पर्श समर कंठाली ने आहार दान दिया एवं आचार्य शांतिसागर शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत वीरेंद्र कुमार,महेंद्र कुमार, अंकुर कुमार पाटनी, ताराचंद जयदीप बडजात्या, कमल कुमार, पुनीत कुमार, सुमित कुमार जागीरदार परिवार, विनोद कुमार, मनीष कुमार, राजेश कुमार शिवाडीया परिवार, रिंकू कुमार, कैलाश चंद फूलेता परिवार एवं गुप्त सज्जन परिवार ने कलश स्थापित किए। प्रतिदिन राजस्थान के अतिरिक्त अन्य राज्यों नगरों से भक्त नगर आ रहे हैं</p>
<p><strong>कार्यक्रम में यह रहे मौजूद </strong></p>
<p>इस मौके पर कमल सर्राफ, नरेंद्र छामुनिया, ओम ककोड़, पंकज फूलेता, लोकेश कल्ली, सुनील सर्राफ, नरेंद्र दाखिया, जैन वूमन्स ग्रुप की नीलेश छामुनिया, आशा गंगवाल, रचना टोरडी, संतोष नमक वाले, अन्ना रोहतक, शीलू बिलासपुरिया, वंदना नमक, नीतू छामुनिया, अंजना, राजुल फूलेता, स्वाति, सीमा देवली, बीना बोरदा, पिंकी छाबड़ा आदि समाज के महिला पुरुष मौजूद रहे।</p>
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		<title>मुनि श्री प्रणीत सागर जी का मंगल प्रवेश: श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में दी देशना  </title>
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		<pubDate>Mon, 02 Jun 2025 12:50:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रणीत सागर जी का सिलीकॉन सिटी इंदौर से विहार कर श्री महावीर मंदिर परिवहन नगर आगमन हुआ। समाज जनों ने मुनि संघ की अगवानी की। जगह-जगह मुनि श्री के चरण प्रक्षालन किए गए। मुनि श्री ने जिनालय के दर्शन किए। श्रीजी के अभिषेक एवं शांतिधारा मुनि श्री के मुखारबिंद से हुई। इंदौर से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रणीत सागर जी का सिलीकॉन सिटी इंदौर से विहार कर श्री महावीर मंदिर परिवहन नगर आगमन हुआ। समाज जनों ने मुनि संघ की अगवानी की। जगह-जगह मुनि श्री के चरण प्रक्षालन किए गए। मुनि श्री ने जिनालय के दर्शन किए। श्रीजी के अभिषेक एवं शांतिधारा मुनि श्री के मुखारबिंद से हुई। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> नगर गौरव नवीन पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर से दीक्षित मुनि श्री प्रणीत सागर जी का सिलीकॉन सिटी इंदौर से विहार कर श्री महावीर मंदिर परिवहन नगर आगमन हुआ। अध्यक्ष नवनीत जैन सहित अनेक समाज जनों ने मुनि संघ की अगवानी की। जगह-जगह मुनि श्री के चरण प्रक्षालन किए गए। मुनि श्री ने जिनालय के दर्शन किए। श्रीजी के अभिषेक एवं शांतिधारा मुनि श्री के मुखारबिंद से हुई। राजेश पंचोलिया और नवनीत जैन ने बताया कि इस अवसर पर मुनि श्री प्रणीत सागर जी ने श्रावकों के प्रमुख कर्तव्य, श्रीजी के दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, दान आदि पर विस्तृत विवेचना कर बताया कि श्रावक को किस प्रकार विनय करना चाहिए।</p>
<p>विनय में लोकानुवृति, अर्थ काम भय मोक्ष है। विनय का अभाव है तो वह गलत होता है। मुनिराज द्वारा मुलाचार ग्रंथ के आधार पर टीका की विवेचना की जा रही है। इसमें श्रावकाचार और साधुओं के लिए श्रमणाचार का वर्णन है। श्रावकों को उठने, बैठने खाने-पीने चलने-देखने और सोने, स्वाध्याय के समय विनय रखना चाहिए। मुनिश्री ने ज्ञान, दर्शन, चरित्र, तप और उपचार यह विनय के गुण बताए।</p>
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		<title>संसार रूपी समुद्र पर करने का ज्ञान गुरु कराते हैं :  आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का जावद में हुआ मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Wed, 07 May 2025 16:31:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 36 साधुओं सहित नीमच से विहार कर 7 मई को जावद नगर में मंगल प्रवेश किया। सकल जैन समाज ने अगवानी की। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर आरती की गई। उन्होंने यहां धर्मसभा को संबोधित किया। जावद से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230; जावद। जिन्होंने संसार को जीत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 36 साधुओं सहित नीमच से विहार कर 7 मई को जावद नगर में मंगल प्रवेश किया। सकल जैन समाज ने अगवानी की। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर आरती की गई। उन्होंने यहां धर्मसभा को संबोधित किया। <span style="color: #ff0000">जावद से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जावद।</strong> जिन्होंने संसार को जीत लिया, जिन्होंने मोह, राग़,द्वेष को जीत लिया वही जिन कहलाता है। नगर प्रवेश में अनेक दुकानों के नाम पर प्रवचन को केंद्रित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि भगवान के दर्शन आस्था से करना चाहिए। भगवान के जिनालय आस्था का संदेश देते हैं। चारों कषाय क्रोध, मान, माया लोभ और पांचों इंद्रियों के विषयों से दूर रहना चाहिए। यह उद्गार आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने मंगल प्रवेश के दौरान धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संत हमें भगवान के स्वरूप का दर्शन कराते हैं और भगवान बनने की प्रेरणा देते हैं। संसार रूपी समुद्र को कैसे पार किया जा सकता है। इसका गुरु ज्ञान कराते हैं। आचार्य श्री ने आगे कथा के माध्यम से बताया कि एक कमंडल में छिद्र था तो वह पानी में डूब गया। दूसरा कमंडल में छिद्र नहीं था इसलिए वह पानी में तैरता रहा। इसी प्रकार संसार रूपी समुद्र में, नदी में व्यक्ति विषय, रागद्वेष रूपी छिंद्र से संसार में डूब रहा है। संसार में परिभ्रमण कर रहा है। हर संसारी प्राणी में अनंत शक्ति है 24 तीर्थंकरों ने धर्म का संदेश दिया है । भगवान महावीर स्वामी ने भी जियो और जीने दो का संदेश दिया है।</p>
<p><strong>व्यक्ति अपने स्वरूप को भूल रहा</strong></p>
<p>आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज ने संसार में सुखी रहने का सूत्र बताए। उसके लिए व्यक्ति को शरीर और आत्मा का भेद समझना जरूरी है। जिनालय में स्थित भगवान वीतरागता का संदेश देते हैं। व्यक्ति अपनी शक्ति,अपने स्वरूप को भूल रहा है। जब उन्हें अपने शक्ति का बोध होता तो हम सब प्राणी में सिद्ध बनने की क्षमता है।</p>
<p><strong>श्री जिनेंद्र जैन जावद ने बताया कि धर्मसभा के पूर्व</strong></p>
<p>प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का विहार मध्यप्रदेश से राजस्थान की ओर चल रहा है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 36 साधुओं सहित नीमच से विहार कर 7 मई को जावद नगर में मंगल प्रवेश किया। सकल जैन समाज ने अगवानी की। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर आरती की गई। आचार्य श्री का इस नगर में दूसरी बार मंगल प्रवेश हुआ। इसके पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ आपका मुनि अवस्था में आगमन हुआ था। प्रतिदिन मध्यप्रदेश, राजस्थान के अनेक नगरों से भक्त आचार्य संघ के दर्शन कर नगर पधारने का निवेदन कर रहे हैं।</p>
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		<title>श्री शांति सागरजी ने धर्म, जिनालय, जिनवाणी, संस्कृति की रक्षा हेतु महान कार्य कियाः जैन धर्म अनादि निधन धर्म है  </title>
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		<pubDate>Tue, 01 Apr 2025 17:33:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज का 33 साधु सहित धर्म नगरी प्रतापगढ़ में एक अप्रैल को भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जूना मंदिर में आयोजित धर्मसभा में आचार्यश्री ने बताया कि इसी मंदिर परिसर में आचार्यश्री शिव सागरजी का वर्षा योग हुआ था। तब हम ब्रह्मचारी अवस्था में थे उपवास के बाद वह प्रवचन करते थे। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज का 33 साधु सहित धर्म नगरी प्रतापगढ़ में एक अप्रैल को भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जूना मंदिर में आयोजित धर्मसभा में आचार्यश्री ने बताया कि इसी मंदिर परिसर में आचार्यश्री शिव सागरजी का वर्षा योग हुआ था। तब हम ब्रह्मचारी अवस्था में थे उपवास के बाद वह प्रवचन करते थे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया से प्रतापगढ़ की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>प्रतापगढ।</strong> पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज का 33 साधु सहित अनेक जिनालयों, अनेक साधुओं की जन्म भूमि धर्म नगरी प्रतापगढ़ में एक अप्रैल को भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जूना मंदिर में आयोजित धर्मसभा में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने बताया कि इसी मंदिर परिसर में सन 1968 में आचार्यश्री शिव सागरजी का वर्षा योग हुआ था। तब हम ब्रह्मचारी अवस्था में थे इसी परिसर में स्टेज पर पांच-पांच उपवास के बाद वह प्रवचन करते थे। यह धर्म देशना आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने 42 वर्षों के बाद प्रतापगढ़ प्रवेश पर आयोजित धर्मसभा में प्रगट की।</p>
<p><strong>जैन धर्म अनादि निधन धर्म है </strong></p>
<p>आचार्यश्री ने आगे बताया कि प्रतापगढ़ समाज गुरुभक्त समाज है। उन्होंने मिंडा, गांधी जवेरी परिवार का स्मरण किया। जैन धर्म अनादि निधन धर्म है जो की 24 तीर्थंकरों द्वारा प्रतिपादित है। आप लोग नारा लगाते हैं दिगंबर साधु देख लो त्याग करना सीख लो, धन का अर्जन कर विसर्जन भी करना चाहिए अर्थात द्रव्य, धन दान देना चाहिए। प्रसिद्ध भामाशाह इसी राजस्थान के थे जिन्होंने देश और प्रांत की रक्षा के लिए अपने संपत्ति दान की थी।</p>
<p><strong>सभी प्राणियों के प्रति मैत्री और दया का भाव रखें</strong></p>
<p>प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी महाराज जो की दिगंबर धर्माचार्य थे उन्होंने संस्कृति, जिनालय, जिनवाणी की रक्षा की। जैन धर्म में अहिंसा की प्रधानता है तथा सभी प्राणियों के प्रति मैत्री और दया का भाव होना चाहिए। आचार्यश्री ने देव शास्त्र गुरुओं की शोभा यात्रा में बगैर जूते-चप्पल के शामिल होने की प्रेरणा दी।</p>
<p><strong>शोभायात्रा कर भव्य मंगल अगवानी</strong></p>
<p>इसके पूर्व एम आर मल्टी पर हजारों समाजजनों ने आचार्यश्री संघ की भव्य मंगल अगवानी की। शोभा यात्रा में शताधिक महिलाओं ने मस्तक पर कलश धारण किए। सभी पुरुष सफेद कुर्ता, पायजामा, पगड़ी तथा महिलाएं पीली, लाल केसरिया परिधान में नगर के धार्मिक मंडल अपनी वेशभूषा में शामिल होकर श्रीजी और आचार्यश्री शांति सागरजी, आचार्यश्री वर्धमान सागरजी की जय-जयकार से नगर को गुंजायमान कर रहे थे। सकल दिगंबर समाज ओर मुनि सेवा समिति के तत्वावधान में शोभायात्रा प्रारंभ होकर प्रमुख मार्गों कलेक्टर चौराहा, अंबेडकर चौराहा से नीमच नाका रोड से नगर के अधिकाश जैन मंदिरों के आचार्यश्री संघ ने दर्शन किए।</p>
<p><strong>चरण प्रक्षालन कर मंगल आरती उतारी </strong></p>
<p>शोभा यात्रा के मार्ग में समाजजनों ने भक्ति भाव से आचार्यश्री के चरण प्रक्षालन कर मंगल आरती उतारी। शोभायात्रा में समाजजन जैन धर्म की पताका लहरा कर भक्ति प्रदर्शित कर रहे थे। शोभायात्रा का समापन दिगम्बर जूना मंदिर परिसर के वर्धमान पांडाल में हुआ। मंगलाचरण, श्रीजी आचार्यश्री शांति सागरजी सहित पूर्वाचार्यों के चित्र का अनावरण ओर दीप प्रज्वलित, आचार्यश्री के चरण प्रक्षालन और जिनवाणी भेंट सौभाग्य शाली परिवारों द्वारा की गई। कार्यक्रम संचालन ने किया।</p>
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		<title>आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का संघ सहित मंगल विहारः 21 फरवरी को खूंता होगा मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Thu, 20 Feb 2025 12:26:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के आदिनाथ भगवान अतिशयकारी हैं। 14 एकड़ की जमीन पर हम आदिनाथ जिन शरण जिनालय गुरु मंदिर, स्कूल, कॉलेज, औषधालय वाटिका आदि बनाने जा रहे हैं। धरियावद जैसे स्कूल कॉलेज बच्चों को उचित अध्ययन मिलने के लिए जरूरी है। आचार्यश्री के आशीर्वाद उपदेश के पूर्व समाज अध्यक्ष ने नगर समीप 14 एकड़ की भूमि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर के आदिनाथ भगवान अतिशयकारी हैं। 14 एकड़ की जमीन पर हम आदिनाथ जिन शरण जिनालय गुरु मंदिर, स्कूल, कॉलेज, औषधालय वाटिका आदि बनाने जा रहे हैं। धरियावद जैसे स्कूल कॉलेज बच्चों को उचित अध्ययन मिलने के लिए जरूरी है। आचार्यश्री के आशीर्वाद उपदेश के पूर्व समाज अध्यक्ष ने नगर समीप 14 एकड़ की भूमि पर प्रस्तावित योजना के बारे में आचार्यश्री से मार्ग दर्शन एवं आशीर्वाद चाहा। आचार्यश्री को धरियावद आने हेतु श्रीफल भेंट किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए धरियावद से राजेश पंचोलिया की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> नगर की समाज गुरु भक्त समाज है। नगर के आदिनाथ भगवान अतिशय कारी हैं। अध्यक्ष करनमलजी ने बताया कि 14 एकड़ की जमीन पर हम आदिनाथ जिन शरण जिनालय गुरु मंदिर, स्कूल, कॉलेज, औषधालय वाटिका आदि बनाने जा रहे हैं धरियावद जैसे स्कूल कॉलेज बच्चों को उचित अध्ययन मिलने के लिए जरूरी है। अभी बागड़ धरियावद खूंता होकर जाएंगे। अनुकूलता रही तो पुनः भी आ सकते हैं। आचार्यश्री के आशीर्वाद उपदेश के पूर्व समाज अध्यक्ष करण मल मैदावत ने नगर समीप 14 एकड़ की भूमि पर प्रस्तावित योजना के बारे में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी से मार्ग दर्शन एवं आशीर्वाद चाहा। सभा में खूंता समाज सहित प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जी धरियावद ने आचार्यश्री को धरियावद आने हेतु श्रीफल भेंट किया ।</p>
<p><strong>मुंगाणा में विहार हुआ</strong></p>
<p>इस अवसर पर काफी नगरों के भक्त उपस्थित रहे। प्राचीन अतिशययुक्त चमत्कारी श्रीआदिनाथ भगवान दिगंबर मंदिर एवं श्रीअजीतनाथ भगवान जिनालय तथा नगर गौरव मुनि सुदृढ ़सागर, सुरम्य सागर, आर्यिका प्रीतिमती, आ श्रीसुप्रज्ञमति, क्षु श्रीसुभव सागरजी, क्षुल्लिका श्री सुगंधमति, क्षु श्री अटलमति की जन्म और कर्मभूमि मुंगाणा में पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, 9 मुनिराज 20 आर्यिका माताजी और 2 क्षुल्लक साधु सहित 20 फरवरी को विहार हुआ। करणमल मैदावत, अनिरुद्ध अनुसार आचार्यश्री संघ सानिध्य में श्रीजी का पंचामृत अभिषेक पूजन धार्मिक अनुष्ठान हुए।</p>
<p><strong>चरण प्रक्षालन आरती कर विदाई दी </strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गज्जू भैया, राजेश पंचोलिया के अनुसार  आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनि चिन्मय सागरजी, हितेंद्र सागरजी, प्रशम सागरजी, प्रभव सागरजी, चिंतन सागरजी, दर्शित सागरजी, प्रबुद्ध सागरजी, मुमुक्षु सागरजी, प्रणित सागरजी आर्यिकाश्री शुभमतिजी, शीतलमतिजी, चैत्यमतिजी, वत्सलमतिजी, विलोकमतिजी, दिव्यांशुमतिजी, पूर्णिमामति मुदितमतिजी, विचक्षणमतिजी, समर्पितमतिजी, निर्मुक्तमतिजी, विनम्रमतिजी, दर्शनामतिजी, देशनामतिजी, महायशमतिजी, देवर्धिमतिजी, प्रणतमतिजी, निर्माेहमतिजी, पद्मयशमतिजी, दिव्ययशमतिजी, प्रेक्षामतिजी, जिनेशमति, क्षुल्लक विशाल सागरजी, क्षुल्लक प्राप्ति सागरजी, संघ का 20 फरवरी को मंगल विहार हुआ। समाजजनों ने निवास के सामने चरण प्रक्षालन आरती कर विदाई दी। रात्रि विश्राम नाड़ की राजकीय स्कूल में होगा।</p>
<p><strong>आचार्य संघ का प्रवेश व आहारचर्या खूंता में </strong></p>
<p>21 फरवरी को आचार्य संघ का प्रवेश श्री आदिनाथ दिगम्बर मन्दिर, खूंता होगा संघ की आहारचर्या खूंता में होगी। इस अवसर पर पारसोला से भी काफी भक्त उपस्थित रहे।</p>
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		<title>बाल ब्रह्मचारिणी अलका व जनक दीदी की गोद भराईः वर्द्धमान सागरजी महाराज के सानिध्य में सम्पन्न  </title>
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		<pubDate>Fri, 10 Jan 2025 11:34:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रतापगढ़ जिले के आदर्श धर्मनगरी पारसोला में वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी संघ सानिध्य में दोनों भव्य जैनेश्वरी दीक्षार्थी बहनों की सम्पूर्ण नगरवासियों द्वारा गोद भराई व अनुमोदना की। महाराजजी के आगमन से जैन समाज मे हर्ष की लहर छाई रही। पढ़िए पारसोला से राजेश पंचोलिया की यह पूरी खबर.. पारसोला। प्रथमाचार्य चारित्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p>प्रतापगढ़ जिले के आदर्श धर्मनगरी पारसोला में वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी संघ सानिध्य में दोनों भव्य जैनेश्वरी दीक्षार्थी बहनों की सम्पूर्ण नगरवासियों द्वारा गोद भराई व अनुमोदना की। महाराजजी के आगमन से जैन समाज मे हर्ष की लहर छाई रही। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पारसोला से राजेश पंचोलिया की यह पूरी खबर..</span></p>
<hr />
<p>पारसोला। प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्यश्री शांतिसागरजी महाराज की परंपरा की पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज पारसोला में संघ सहित विराजित है। आगामी फरवरी माह में दीक्षा लेने वाले भावी दीक्षार्थियों ब्रह्म अलका दीदी और ब्रह्मचारिणी जनक दीदी ने 9 जनवरी को पारसोला जाकर आचार्यश्री वर्धमान सागरजी सहित समस्त साधुओं के दर्शन किए उन्हें आचार्यश्री वर्धमान सागरजी भगवंत के चरण प्रक्षालन व अदभूत वात्सल्यरूपी आशीष सहज रूप से प्राप्त हुआ। आचार्यश्री ने आशीर्वाद स्वरुप जिनवाणी ग्रंथ स्वाध्याय हेतु दिए।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-72243" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250110-WA0012.jpg" alt="" width="1280" height="580" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250110-WA0012.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250110-WA0012-300x136.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250110-WA0012-1024x464.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250110-WA0012-768x348.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250110-WA0012-990x449.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />गोद भरकर वैराग्य भावों की अनुमोदना</strong></p>
<p>अध्यक्ष जयंतीलाल कोठारी अध्यक्ष दशा हूमड समाज एवं ऋषभ पचौरी अध्यक्ष वर्षायोग समिति ने बताया कि सकल जैन समाज पारसोला द्वारा भावी दीक्षार्थियों चितरी गौरव अलका दीदी एवं गुजरात के छत्राल की जनक दीदी के गोद भरने का कार्यक्रम संघ सानिध्य में आयोजित किया गया। सभी समाजजनों ने दीक्षार्थियों के भावों की अनुमोदना कर विविध द्रव्य आदि से गोद भरकर वैराग्य भावों की अनुमोदना की।</p>
<p><strong>सभी सामाजिक मंडलों का योगदान सराहनीय</strong></p>
<p>वीरेंद्र सेठ ने बताया कि आचार्यश्री वर्धमान सागरजी संघ के शिष्य मुनिश्री हितेंद्र सागरजी के समक्ष दीक्षार्थियों के भावों की अनुमोदना कर सर्वप्रथम आचार्य संघ की ओर से बाल ब्रह्मचारी गज्जू भैया, श्रीमती तारा सेठी, निर्मला दीदी, कीर्ति दीदी, सुरेश शाह, छोटू भैया तथा समाज अध्यक्ष जयंतीलाल कोठारी, वर्षायोग समिति अध्यक्ष ऋषभ पचौरी वीरेंद्र सेठ, पंडित अशोक, महिला समाज अध्यक्ष वीणा घाटलिया, मेहुल दीपेश, श्यामा, उपासना, रोशनी, विनीता सभी सामाजिक मंडलों के द्वारा गोद भरी गई।</p>
<p><strong>भक्ति नृत्य के साथ वैराग्य की अनुमोदना की</strong></p>
<p>इस अवसर पर दीक्षार्थी परिवार से श्रीमती शकुंतला देवी, मधोक, मयंक अनमोल, शीतल शाह, चितरी से उपस्थित रहे। दीक्षार्थी बहनों द्वारा गीत के माध्यम से अपने भावों की अभिव्यक्ति की गई। जिस पर महिलाओं द्वारा भक्ति नृत्य कर वैराग्य की अनुमोदना की। दिनांक 9 जनवरी 2024 को समस्त पारसोलावासियों ने मिलकर चितरी नगर गौरव बाल ब्रह्मचारिणी अलका दीदी व गुजरात के छत्राल की क्षत्रिय कुलगौरव बाल ब्रह्मजनक दीदी आदि दोनों जैनेश्वरी दीक्षार्थी बहनों के प्रति भक्ति विनय आत्मीयतापूर्वक भाव प्रगट किए। मधोक शाह चितरी ने बताया कि दोनों दीक्षार्थी दीदी पिछले दो दशक से श्रीमद् राजचंद्रजी साधना केंद्र कोबा गांधीनगर में राष्ट्र सेवा करते हुए संयम साधना हेतु अभ्यासरत थी।</p>
<p><strong>एक फरवरी को जैनेश्वरी दीक्षा संपन्न होगी।</strong></p>
<p>पारसोला गांव के समस्त वासियों की इन दीक्षार्थी बहनों के प्रति अनुमोदना का भाव वंदनीय है। ’दोनों बहनों की दिनांक 1 फरवरी 2025 को गजपंथा सिद्ध क्षेत्र में आचार्यश्री चंद्रगुप्तजी गुरुदेव के हस्तकमलों से जैनेश्वरी दीक्षा संपन्न होगी।</p>
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