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	<title>चंद्रगिरी तीर्थ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>दया और करुणा के सागर आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज: वर्तमान युग के ‘वर्धमान’ का आज है प्रथम समाधि दिवस </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Feb 2025 03:36:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वर्तमान युग के वर्धमान के नाम से विश्व विख्यात संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी इसी श्रेणी में अपना गौरवपूर्ण स्थान रखते हैं। जैन धर्म के धर्मावलंबियों की लंबी फेहरिस्त है, जिन्होंने आचार्य विद्यासागर जी के अमृत वचनों का रसपान किया है और अपने कर्मों की निर्जरा की है। 6 फरवरी यानि माघ शुक्ल 9 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वर्तमान युग के वर्धमान के नाम से विश्व विख्यात संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी इसी श्रेणी में अपना गौरवपूर्ण स्थान रखते हैं। जैन धर्म के धर्मावलंबियों की लंबी फेहरिस्त है, जिन्होंने आचार्य विद्यासागर जी के अमृत वचनों का रसपान किया है और अपने कर्मों की निर्जरा की है। 6 फरवरी यानि माघ शुक्ल 9 को आचार्यश्री ने अपनी देह का त्याग किया और समाधिस्थ हो गए। उनके गुणानुवाद के रूप में श्रीफल जैन न्यूज की ओर से यह विनम्र प्रस्तुति उप संपादक प्रीतम लखवाल के संयोजन में&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म में अपनी सिद्धता से, अपनी देशनाओं के माध्यम से धर्म को आकाश की उंचाईयों से भी उंचाई पर ले जाने के लिए सतत साधना करने वाले संत बिरले ही हुए हैं। वर्तमान युग के वर्धमान के नाम से विश्व विख्यात संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी इसी श्रेणी में अपना गौरवपूर्ण स्थान रखते हैं। जैन धर्म के धर्मावलंबियों की लंबी फेहरिस्त है, जिन्होंने आचार्य विद्यासागर जी के अमृत वचनों का रसपान किया है और अपने कर्मों की निर्जरा की है। जैन धर्म के विशाल सागर में अनमोल रत्न के रूप में विद्यासागर जी का स्थान सर्वाेपरि इसलिए है कि उन्होंने हमेशा शांत रहकर सौम्यता को धारण कर जैन धर्म के अनुयायियों और भगवंत भक्ति में लीन श्रावक-श्राविकाओं को अमूल्य ज्ञान की धरोहर से समृद्ध किया है। आचार्य विद्यासागर दिगंबर आचार्य थे। आचार्य विद्यासागर जी हिन्दी, अंग्रेजी सहित 8 भाषाओं के ज्ञाता थे। माघ शुक्ल नवमी को आचार्य श्री विद्यासागर जी का प्रथम समाधि दिवस है। इस अवसर पर समूचे भारत वर्ष में इसे महोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। इंदौर सहित मप्र के विभिन्न शहरों, नगरों और कस्बों में आचार्यश्री के प्रथम समाधि दिवस पर कार्यक्रम आयोजित होने जा रहे हैं।</p>
<p><strong>आचार्यश्री ने कर्नाटक के बेलगांव जिले के सदलगा में लिया जन्म</strong></p>
<p>आचार्य विद्यासागर जी का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को विद्याधर के रूप में कर्नाटक के बेलगांव जिले के सदलगा में शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था। उनके पिता श्री मल्लप्पा थे, जो बाद में मुनि मल्लिसागर बने। उनकी माता श्रीमंती थीं, जो बाद में आर्यिका समयमति बनीं। विद्यासागर जी को 30 जून 1968 में अजमेर में 22 वर्ष की आयु में आचार्य ज्ञानसागर ने दीक्षा दी, जो आचार्य शांतिसागर के वंश के थे लेकिन, गुरु परंपरा से द्रोहकर अलग एकल विचरण करते थे। आचार्य विद्यासागर को 22 नवंबर 1972 में आचार्यश्री ज्ञानसागर जी ने आचार्य पद दिया था। उनके भाई, सभी घर के लोग संन्यास ले चुके हैं। उनके भाई अनंतनाथ और शांतिनाथ ने आचार्य विद्यासागर से ही दीक्षा ग्रहण की और मुनिश्री योगसागर और मुनिश्री समयसागर कहलाए। उनके बड़े भाई भी उनसे दीक्षा लेकर मुनिश्री उत्कृष्टसागर जी महाराज कहलाए। इनका जीवन दिगंबर समाज के सर्वजन के लिए अनुकरणीय है।</p>
<p><strong>आचार्यश्री के जीवनत्व और व्यक्तित्व पर हुईं पीएचडी</strong></p>
<p>आचार्यश्री विद्यासागर संस्कृत, प्राकृत सहित विभिन्न आधुनिक भाषाओं हिन्दी, मराठी और कन्नड़ में विशेषज्ञ स्तर का ज्ञान रखते हैं। उन्होंने हिन्दी और संस्कृत के विशाल मात्रा में रचनाएं की हैं। विभिन्न शोधार्थियों ने उनके कार्य का मास्टर्स और डॉक्ट्रेट के लिए अध्ययन किया है। उनके कार्य में निरंजना शतक, भावना शतक, परिषह जाया शतक, सुनीति शतक और शरमाना शतक शामिल हैं। उन्होंने काव्य ‘मूक माटी’ की भी रचना की है। विभिन्न संस्थानों में यह स्नातकोत्तर के हिन्दी पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है। आचार्य श्री विद्यासागर कई धार्मिक कार्यों में प्रेरणास्रोत रहे हैं। आचार्य विद्यासागर के शिष्य मुनिश्री क्षमासागर ने उन पर आत्मान्वेषी नामक जीवनी लिखी है। इस पुस्तक का अंग्रेज़ी अनुवाद भारतीय ज्ञानपीठ की ओर से प्रकाशित हो चुका है। मुनि प्रणम्यसागरजी ने उनके जीवन पर ‘अनासक्त महायोगी’ काव्य की रचना की है।</p>
<p><strong>आचार्यश्री की यह रचनाएं है ज्ञानवर्द्धक</strong></p>
<p>हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेजी आदि में एक दर्जन से अधिक मौलिक रचनाएं प्रकाशित-‘नर्मदा का नरम कंकर’, ‘डूबो मत लगाओ डुबकी’, श्तोता रोता क्यों?, ‘मूक माटी’ आदि काव्य कृतियां; गुरुवाणी, प्रवचन परिजात, प्रवचन प्रमेय आदि प्रवचन संग्रह, आचार्य कुंदकुंद के समयासार, नियमसार, प्रवचनसार और जैन गीता आदि ग्रंथों का पद्य अनुवाद।़ यह रचनाएं जैन धर्म और समाज के लिए अनुपम भेंट के रूप में विख्यात हैं।</p>
<p><strong>आचार्यश्री के शिष्य गण</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने 130 मुनिराजों, 172 आर्यिकाओं और 20 ऐलक जी, 14 क्षुल्लकगणों को दीक्षित किया है। मुनिश्री समयसागर जी, मुनिश्री योगसागर जी, मुनिश्री चिन्मयसागर (जंगल वाले बाबा जी), मुनिश्री अभयसागर जी, मुनिश्री क्षमासागर जी, क्षुल्लकश्री ध्यान सागर जी का दीक्षित किया है।</p>
<p><strong>आपका समाधिमरण माघ शुक्ल नवमी को </strong></p>
<p>शरीर की अस्वस्थता के चलते आचार्य जी चंद्रगिरी पर ही विराजमान थे, शरीर मे भयंकर व्याधि ने इन्हे घेर लिया था, इनके शरीर पर पीलिया का प्रभाव देखा गया। पर धैर्य से डॉक्टर और वैद्यों की टीम से दिगंबर आगमनुकूल चर्या से इलाज करवाते रहे लेकिन, कोई असर ना पड़ा। इस प्रकार छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी दिगंबर तीर्थ में तीन दिन की संलेखना लेकर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने 18 फरवरी 2024 को सुबह 2.35 बजे पर अपनी देह का त्याग किया। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने उन्हें ब्रह्मांड के देवता के रूप में सम्मानित किया।</p>
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		<title>आचार्य विद्यासागर महाराज के समाधि स्थल पर बनेगा 54 फीट ऊंचा भव्य स्मारक: भक्तों के लिए म्यूजियम भी होगा तैयार </title>
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		<pubDate>Wed, 05 Feb 2025 14:36:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चंद्रगिरी पर्वत पर आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के समाधि स्थल को स्मारक बनाया जा रहा है। आधुनिक तरीके से यहां उनके जीवनपर्यंत कार्यों को श्रद्धालु देख सकेंगे। यहां उनकी होलोग्राम प्रतिमा भी लगाई जाएगी। 6 फरवरी को स्मारक का गृह मंत्री शाह भूमिपूजन करेंगे। वे जैन संत और भक्तों से भी मुलाकात करेंगे। पढ़िए रेखा जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>चंद्रगिरी पर्वत पर आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के समाधि स्थल को स्मारक बनाया जा रहा है। आधुनिक तरीके से यहां उनके जीवनपर्यंत कार्यों को श्रद्धालु देख सकेंगे। यहां उनकी होलोग्राम प्रतिमा भी लगाई जाएगी। 6 फरवरी को स्मारक का गृह मंत्री शाह भूमिपूजन करेंगे। वे जैन संत और भक्तों से भी मुलाकात करेंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए रेखा जैन संपादक की विशेष रिपोर्ट से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>राजनांदगांव.</strong> डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी पर्वत पर दिगंबर जैन आचार्य विद्यासागर महाराज का समाधि स्थल को भव्य स्मारक के रूप से विकसित होगा। इसके लिए राजकट्टा में चंद्रगिरी पर्वत के किनारे साढ़े 4 एकड़ जमीन पर 54 फीट ऊंचा विद्यासागर जी का स्मारक बनेगा। इसी स्थान पर उन्हें समाधि दी गई थी। इस स्मारक के अलावा यहां एक म्यूजियम भी बन रहा है। यहां आकर्षक एम्फीथिएटर होगा, जहां आचार्य विद्यासागर महाराज की होलोग्राम प्रतिमा भी लगाई जाएगी।यहां बैठकर भक्त इस प्रतिमा को निहार सकेंगे। उनके प्रथम समाधि दिवस पर 6 फरवरी को स्मारक का गृह मंत्री शाह भूमिपूजन करेंगे।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73791" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0080.jpg" alt="" width="383" height="599" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0080.jpg 383w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0080-192x300.jpg 192w" sizes="(max-width: 383px) 100vw, 383px" />गृहमंत्री अमित शाह 6 फरवरी को चंद्रगिरी तीर्थ पहुंचेंगे </strong></p>
<p>केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 6 फरवरी को छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगे। दोपहर 12.55 बजे डोंगरगढ़ पहुंचेंगे, जहां वे प्रख्यात जैन संत आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव में शामिल होंगे। गृह मंत्री सीधे चंद्रगिरी तीर्थ जाएंगे, जहां वे आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इस अवसर पर देशभर से जैन धर्म के अनुयायी और श्रद्धालु एकत्रित हो रहे हैं। कार्यक्रम में अमित शाह संत समाज और स्थानीय लोगों से मुलाकात भी करेंगे।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73792" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0079.jpg" alt="" width="519" height="224" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0079.jpg 519w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0079-300x129.jpg 300w" sizes="(max-width: 519px) 100vw, 519px" />अष्टधातु की चरण चिन्ह 108 मंदिरों में जाएंगी</strong></p>
<p>आचार्य विद्यासागर महाराज की चरण चिन्ह अष्टधातु से निर्मित की गई है। ये स्मारक के मध्य में स्थापित होगी। एक चरण चिन्ह का वजन करीब 100 किलो है। ऐसी 108 चरण पादुकाएं बनाई गई हैं। अनावरण के बाद देशभर के दिगंबर जैन मंदिरों में स्थापित की जाएंगी। 18 फरवरी तक यह सिलसिला चलेगा।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73793" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0078.jpg" alt="" width="690" height="246" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0078.jpg 690w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0078-300x107.jpg 300w" sizes="(max-width: 690px) 100vw, 690px" />म्यूजियम में दीक्षा से समाधि तक की यात्रा के दर्शन</strong></p>
<p>म्यूजियम में आचार्यश्री के जन्म से लेकर दीक्षा, आचार्य पदारोहण और समाधि तक की जीवन यात्रा को शामिल किया जाएगा। समाधिस्थल मंदिर की तरह बनाया जाएगा।</p>
<p><strong>100 रुपए के सिक्के का विमोचन</strong></p>
<p>समाधि स्मारक समिति विद्यायतन के महामंत्री मनीष जैन ने बताया कि जैनाचार्य के नाम से 100 रुपए का सिक्का जारी किया जाएगा। इसका वजन 35 ग्राम है। एक पहलू में ध्यान में लीन आचार्यश्री दिखेंगे। दूसरे में सत्यमेव जयते के साथ अशोक स्तंभ और 100 रुपए लिखा होगा। डाक विभाग ने भी एक कवर पेज आचार्य श्री के नाम पर बनाया है।</p>
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		<title>क्षेत्र में संचालित है पाठशाला, गौशाला और हथकरघा उद्योग : आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की चातुर्मास कलश स्थापना 2 जुलाई को </title>
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		<pubDate>Tue, 27 Jun 2023 07:07:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के ससंघ के चातुर्मास की मंगल कलश स्थापना 2 जुलाई को दोपहर 2 बजे से होगी। क्षेत्र में महामहिम आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी की विशेष कृपा एवं आशीर्वाद से अतिशय तीर्थ क्षेत्र चंद्रगिरी डोंगरगढ़ मंदिर निर्माण का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के ससंघ के चातुर्मास की मंगल कलश स्थापना 2 जुलाई को दोपहर 2 बजे से होगी। क्षेत्र में महामहिम आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी की विशेष कृपा एवं आशीर्वाद से अतिशय तीर्थ क्षेत्र चंद्रगिरी डोंगरगढ़ मंदिर निर्माण का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़)।</strong> आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के ससंघ के चातुर्मास की मंगल कलश स्थापना 2 जुलाई को दोपहर 2 बजे से होगी। क्षेत्र में महामहिम आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी की विशेष कृपा एवं आशीर्वाद से अतिशय तीर्थ क्षेत्र चंद्रगिरी डोंगरगढ़ मंदिर निर्माण का कार्य तीव्र गति से चल रहा है और यहां प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ में कक्षा चौथी से बारहवीं तक सीबीएसई पाठ्यक्रम में विद्यालय संचालित है। इस वर्ष से कक्षा एक से पांचवी तक डे स्कूल भी संचालित हो चुका है| यहां गौशाला का भी संचालन किया जा रहा है, जिसका शुद्ध और सात्विक दूध और घी भरपूर मात्रा में उपलब्ध रहता है।</p>
<p>यहां हथकरघा उद्योग का संचालन भी वृहद रूप से किया जा रहा है, जिससे जरूरतमंद लोगों को रोजगार मिल रहा है। यहां बनने वाले वस्त्रों की मांग दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। यहां वस्त्रों को पूर्ण रूप से अहिंसक पद्धति से बनाया जाता है, जिसका वैज्ञानिक दृष्टि से उपयोग कर्त्ता को बहुत लाभ होता है। महामहिम आचर्य श्री के दर्शन के लिए दूर-दूर से उनके भक्त आ रहे हैं। चातुर्मास कलश स्थापना में इंदौर से भी सैकड़ों गुरु भक्त परिवार स्थापना समारोह में पहुंच रहे हैं। बाहर अन्य प्रदेशों से आने वाले समाजजनों की रुकने और भोजन की व्यवस्था ट्रस्ट कमेटी द्वारा की गई है।</p>
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