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	<title>गुरुकुलम् &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>लंदन के राजेश जैन ने जैन तीर्थ नवागढ़ में मनाया जन्मदिन : गायों को गुड़ खिलाकर अपने मंगलमय एवं स्वस्थ जीवन की कामना की </title>
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		<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 07:45:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में एक विशेष आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला जब हैरो लंदन (यूके) में निवासरत भारत प्रवासी राजेश जैन ने अपनी माताजी चंद्रकांता जैन के साथ अपना जन्मदिन मनाया। जैन पिछले कई वर्षों से लंदन में निवास कर रहे हैं। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना/नवागढ़। प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में एक विशेष आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला जब हैरो लंदन (यूके) में निवासरत भारत प्रवासी राजेश जैन ने अपनी माताजी चंद्रकांता जैन के साथ अपना जन्मदिन मनाया। जैन पिछले कई वर्षों से लंदन में निवास कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/नवागढ़</strong>। प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में एक विशेष आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला जब हैरो लंदन (यूके) में निवासरत भारत प्रवासी राजेश जैन ने अपनी माताजी चंद्रकांता जैन के साथ अपना जन्मदिन मनाया। जैन पिछले कई वर्षों से लंदन में निवास कर रहे हैं लेकिन, अपनी जड़ों से जुड़े रहने की भावना ने उन्हें भारत की तीर्थयात्रा के लिए प्रेरित किया। ललितपुर के प्रसिद्ध जैन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में पहुंचकर उन्होंने श्रद्धा भाव से भगवान अरनाथ के दर्शन किए और मंदिर परिसर में विशेष पूजन-अर्चन भी किया। आपने हेरो लंदन में अपने निवास पर भगवान शांतिनाथ सहित पांच बिंबों की स्थापना क्षेत्र निर्देशक ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत भैया जी के निर्देशन में संपन्न कराकर सभी जैन प्रवासियों को जिन दर्शन, पूजा का सौभाग्य प्रदान किया है। आपकी दिनचर्या लंदन जैसे शहर में भी व्रतियों के समान है। आप शनिवार एवं रविवार को एकासन तथा प्रतिदिन अभिषेक, पूजा करने के बाद ही भोजन करने का संकल्प लिए हैं । आपकी पुत्री अनन्या, मीता जैन तथा पुत्र अरिहंत भी लंदन में रहकर अपनी चर्या जैन श्रावकों के अनुसार कर रहे हैं। राजेश एवं नीता ने अपने गृह चैत्यालय के माध्यम से सभी को देव दर्शन, देव पूजन स्वाध्याय, सामाजिक आदि सम्यक क्रियायों में संलग्न किया है । बालक बालिकाओं को पानी छानना द्रव्य बनाना तथा पूजा करना सिखाकर जैन संस्कारों का बीजारोपण किया है। आज जहां लोग अपना जन्मदिन मनाने होटल, गार्डन आदि जगहों में जाते है, मौज मस्ती करते है, वहीं इतने वर्ष विदेश में रहने के बाद भी उन्होंने अपना जन्मदिन पावन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में सादगी एवं धार्मिक भावनाओं के साथ मनाया।</p>
<p><strong>गुरुकुल परंपरा की अनिवार्यता</strong></p>
<p>इस अवसर पर उन्होंने गुरुकुलम् के विद्यार्थियों के साथ समय बिताया। आपने अपने वक्तव्य में कहा कि जैन धर्म को संरक्षित करने के लिए निशांत भैया जो प्रयास कर रहे हैं, वह अनुकरणीय हैं। यदि हम गुरुकुल परंपरा को जीवंत नहीं करेंगे तो कुछ ही वर्षों में जैन धर्म खतरे में पड़ जाएगा। हमारे संस्थानों, क्षेत्र एवं मंदिरों का संरक्षण अत्यंत जटिल हो जाएगा । अतिक्रमण रोकना संभव नहीं हो सकेगा। मैं अनुरोध करता हूं कि प्रवासी जैन बंधु जब भी भारत आए नवागढ़ की वंदना अवश्य करें। यहां भगवान अरनाथ स्वामी के दर्शन से मानसिक शांति एवं उल्लास की अनुभूति होती है।</p>
<p><strong>विलक्षण संयोग</strong></p>
<p>राजेश के साथ सागर निवासी इंजीनियर डीके जैन के सुपुत्र प्रेमदीप प्रतिवर्ष अपना जन्मदिन यहां मानते हैं तथा श्री नवागढ़ गुरुकुलम के छात्र संस्कार का भी जन्मदिन आज गौशाला में सामूहिक रूप से मनाया गया। इस अवसर पर जैन ने गायों को गुड़ खिलाकर अपने मंगलमय एवं स्वस्थ जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि गौसेवा से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गुरुकुलम् के छात्रों ने भी उनके साथ इस पुण्य अवसर में सहभागिता की और उनके दीर्घायु व उज्ज्वल भविष्य की कामना की। आपने नवागढ़ के इतिहास एवं पुरा संपदा का दर्शन करके जैन दर्शन की प्राचीनता व्यक्त करते हुए यहां संचालित गुरुकुलम में शिक्षारत छात्रों के बीच अपने बचपन को याद किया।</p>
<p>इस अवसर पर श्री राजेश जैन ने कहा कि भले ही मैं विदेश में रहता हूं, पर मेरी आत्मा की शांति भारत के इन पवित्र स्थलों से ही जुड़ी है। नवागढ़ क्षेत्र वास्तव में आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है। और यही वह भावना है की जिसके वशीभूत होकर मुझे अपना जन्मदिन इस पावन क्षेत्र पर मनाने की भावना हुई। क्षेत्र संचालक ब्र. जय निशांत जी ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए बताया कि विदेशी भूमि से प्रवासी भारतीयों का इस प्रकार का जुड़ाव भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है। महामंत्री श्री वीरचंद्र जैन तथा गौशाला के संयोजक सुरेंद्र सोजना के साथ ब्रह्मचारी निशांत भैया के सानिध्य में ब्रह्मचारी संध्या दीदी,अनुराग जैन, रौनक जैन, प्रवीण जैन, विनीत सर, संजय सर ने सभी का भाव भीना स्वागत करते हुए पुनः आगमन का आमंत्रण दिया।</p>
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		<title>राहतगढ़ में पंच कल्याणक महा महोत्सव 27 नवंबर से : मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने सफलता के लिए सार्थकता और नैतिकता जरूरी बताई  </title>
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		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 11:07:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि जीवन का सवाल सफलता का नहीं, बल्कि सार्थकता का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग सफलता के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि जीवन की सार्थकता और नैतिकता को ही खो बैठे हैं। अवधपुरी से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि जीवन का सवाल सफलता का नहीं, बल्कि सार्थकता का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग सफलता के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि जीवन की सार्थकता और नैतिकता को ही खो बैठे हैं। <span style="color: #ff0000">अवधपुरी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अवधपुरी।</strong> मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि जीवन का सवाल सफलता का नहीं, बल्कि सार्थकता का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग सफलता के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि जीवन की सार्थकता और नैतिकता को ही खो बैठे हैं। मुनि श्री ने कहा कि हर व्यक्ति को सबसे पहले अपनी कमियों और कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। जब व्यक्ति अपने दायित्वों को सही ढंग से निभाता है, तभी जीवन सार्थक होता है। उन्होंने पिता के कर्तव्यों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जब आप पिता बनते हैं, तो आपके ऊपर बहुत-सी जिम्मेदारियां आ जाती हैं। बच्चों को संस्कारित बनाना, उन्हें उत्तम शिक्षा दिलाना और सेवा-भाव जगाना यही सच्चे पिता का धर्म है।</p>
<p><strong>श्रद्धा की आंख में कोई प्रश्न नहीं होता</strong></p>
<p>एक प्रश्न के उत्तर में मुनि श्री ने कहा सरलता को समझने के लिए व्यक्ति का भीतर और बाहर दोनों से सरल होना आवश्यक है। जिसका जीवन खुली किताब की तरह होता है, उसे पढ़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने श्रद्धा और समर्पण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रद्धा की आंख में कोई प्रश्न नहीं होता, बल्कि वह समर्पण के भाव से भरकर काम को त्वरित गति से करती है। युवाओं को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि जीवन को सार्थक बनाने के लिए पहले लक्ष्य बनाओ, फिर पुरुषार्थ जगाओ, और पुरुषार्थ में कभी कमी मत आने दो। हमारा पुरुषार्थ तभी फलता है जब हम उसे पूरी शक्ति और निष्ठा से करते हैं।</p>
<p><strong>गुरु को हृदय में स्थान दो, सदा तुम्हारे साथ रहेंगे</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ इन दिनों अवधपुरी में विराजमान हैं। 27 नवंबर से राहतगढ़ में श्री 1008 भगवान जिनेंद्र के पंच कल्याणक महा महोत्सव का आयोजन ससंघ सान्निध्य में होगा। जिसके लिए शीघ्र ही मुनिसंघ का विहार राहतगढ़ की ओर संभावित है। गुरुकुलम् के 180 छात्र मुनि श्री के सान्निध्य में रह रहे हैं, उनके संभावित विहार से भावुक दिखाई दिए। मुनि श्री ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि गुरु से राग होना अच्छा है, लेकिन मोह नहीं होना चाहिए। साधु आपके पास कुछ समय के लिए आते हैं, फिर उन्हें आगे बढ़ना ही होता है। गुरु को हृदय में स्थान दो, तो वे सदा तुम्हारे साथ रहेंगे। उन्होंने सभी छात्रों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने गुरुकुल तथा गुरुदेव की मान-मर्यादा का सदैव ध्यान रखें।</p>
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		<title>भोपाल में दीपावली मिलन समारोह में “गुरुकुलम्” का शुभारंभ : मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने भोपाल को सौभाग्य बताते हुए युवाओं को प्रतिभा विकास हेतु प्रेरित किया </title>
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		<pubDate>Sun, 26 Oct 2025 17:06:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भोपाल में गुणायतन द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने “विद्याप्रमाण गुरुकुलम्” के शुभारंभ पर आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह संस्था समाज की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और जैनत्व संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट… भोपाल। गुणायतन भोपाल द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भोपाल में गुणायतन द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने “विद्याप्रमाण गुरुकुलम्” के शुभारंभ पर आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह संस्था समाज की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और जैनत्व संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> गुणायतन भोपाल द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि “गुरुकुलम्” का शुभारंभ नये स्वरूप में होगा। मुनि श्री ने बताया कि यह आयोजन न केवल भारत बल्कि विश्व भर से बड़ी विभुतियों को जोड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि गुरुकुलम् की योजना इंदौर में बनी, लेकिन इसकी शुरुआत का सौभाग्य भोपाल को मिला है।</p>
<p>मुनि श्री ने इस अवसर पर समाज को संदेश देते हुए कहा कि मंदिर बनाना सरल है, लेकिन ऐसे संस्थान बनाना कठिन है। समाज में जैनत्व को सुरक्षित रखना और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना आज आवश्यक है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि छोटे-छोटे योगदान भी समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं, जैसे राम सेतु निर्माण में रेत गिराने वाली गिलहरी का योगदान।</p>
<p>कार्यक्रम का संचालन विद्याप्रमाण गुरुकुलम् भोपाल के महामंत्री अनुभव सराफ ने किया। इस अवसर पर मध्यभारत गुणायतन के अध्यक्ष नरेन्द्र जैन टोंग्या, दि. जैन पंचायत भोपाल के अध्यक्ष मनोज बांगा, गुरुकुलम् के अध्यक्ष विनीत गोधा, राजेश जैन भारिल्ल, रोहित सुगंधि लाल जैन, अमर जैन अभिताभ मन्या, विनोद एम.पी.टी., अनुपम पंडित, संदीप गोधा, दयोदय महासंघ अध्यक्ष प्रेमचंद्र प्रेमी, पंकज सुपारी सहित अन्य वक्ताओं ने उपस्थित रहकर मुनि श्री के प्रति कृतज्ञता अर्पित की।</p>
<p>इस कार्यक्रम में भोपालवासियों की सहभागिता और उत्साह देखकर यह स्पष्ट हुआ कि “गुरुकुलम्” की इस नई पहल से समाज में शिक्षा, प्रतिभा और जैन मूल्यों का प्रसार और सशक्त होगा।</p>
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		<title>अपने अंदर की बुराइयों की आहुति ही वास्तविक हवन है – मुनि श्री प्रमाण सागर : रथयात्रा के साथ सम्पन्न हुआ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन </title>
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		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 14:25:16 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[सिद्धचक्र महामंडल विधान]]></category>
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					<description><![CDATA[अवधपुरी स्थित विद्याप्रमाण “गुरुकुलम्” में आयोजित आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन भगवान जिनेन्द्र देव की भव्य रथयात्रा और हवन के साथ हुआ। मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने कहा कि वास्तविक हवन वह है जिसमें व्यक्ति अपनी बुराइयों की आहुति दे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… अवधपुरी स्थित विद्याप्रमाण “गुरुकुलम्” में विगत आठ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अवधपुरी स्थित विद्याप्रमाण “गुरुकुलम्” में आयोजित आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन भगवान जिनेन्द्र देव की भव्य रथयात्रा और हवन के साथ हुआ। मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने कहा कि वास्तविक हवन वह है जिसमें व्यक्ति अपनी बुराइयों की आहुति दे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
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<p>अवधपुरी स्थित विद्याप्रमाण “गुरुकुलम्” में विगत आठ दिनों से चल रहे 1008 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन जाप, हवन और भगवान जिनेन्द्र देव की भव्य रथयात्रा के साथ हुआ। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रातःकाल भगवान जिनेन्द्र देव का अभिषेक, शांतिधारा और नित्यनियम पूजन के पश्चात मंत्रोच्चारण के साथ अग्निकुंड में आहुतियाँ दी गईं।</p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि “यदि श्रद्धा सच्ची है, तो व्यक्ति के भीतर की बुराइयाँ स्वयं मिट जाती हैं। केवल धुआँ उड़ाना हवन नहीं है, बल्कि अपनी बुराइयों और पापों की आहुति देना ही वास्तविक हवन है।” उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को स्वयं चिंतन करना चाहिए कि विधान के पहले उसके जीवन में क्या प्रवृत्तियाँ थीं और अब उनमें कितना परिवर्तन आया है।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि धार्मिक आयोजन से पुण्य का संचय और पाप का क्षय तो होता है, परंतु इसका वास्तविक मापदंड यह है कि इन दिनों में आपके भीतर कितनी भौतिक आकांक्षाएँ घटीं और कितनी आध्यात्मिक चेतना जागृत हुई। उन्होंने आशीर्वाद स्वरूप कहा कि “भौतिकता के प्रति उदासीनता और भगवान के प्रति आराधना ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है।”</p>
<p>कार्यक्रम के अंत में भगवान जिनेन्द्र देव की विशाल रथयात्रा निकाली गई, जिसमें जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। मंच पर मुनि श्री संधान सागर जी महाराज सहित समस्त क्षुल्लक विराजमान रहे। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मचारी अशोक भैया और ब्रह्मचारी अभय भैया ने किया।</p>
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