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	<title>गुणायतन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>गुणायतन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सिद्धों की भूमि सम्मेद शिखरजी में 108 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ : ध्वजारोहण के साथ शुरू हुई नौ दिवसीय सिद्ध आराधना </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 17:08:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के सर्वोच्च सिद्धक्षेत्र सम्मेद शिखरजी में परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में 108 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण, अभिषेक एवं सिद्धभक्ति के साथ हुआ। देशभर से श्रद्धालु आराधना में सहभागी बने। पढ़िए श्रीफल साथी उदयभान जैन की यह रिपोर्ट। सम्मेद शिखरजी। जैन धर्म के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के सर्वोच्च सिद्धक्षेत्र सम्मेद शिखरजी में परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में 108 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण, अभिषेक एवं सिद्धभक्ति के साथ हुआ। देशभर से श्रद्धालु आराधना में सहभागी बने। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी उदयभान जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सम्मेद शिखरजी।</strong> जैन धर्म के सर्वोच्च तीर्थ एवं सिद्धों की पावन भूमि सम्मेद शिखरजी में अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में 108 मंडलीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य शुभारंभ 21 जुलाई को ध्वजारोहण एवं मांगलिक क्रियाओं के साथ श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>भव्य मंगलाचरण एवं ध्वजारोहण</strong></p>
<p>अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने बताया कि विधान में सहभागी सभी इंद्र-इंद्राणियां सर्वप्रथम गुणायतन में एकत्रित हुए। वहां से 108 जिनप्रतिमाओं एवं मंगल कलशों के साथ शोभायात्रा के रूप में कार्यक्रम स्थल पहुंचे। यहां ध्वजारोहण, पंडाल उद्घाटन तथा मुख्य मंडल सहित सभी 108 मंडलों पर भगवान की प्रतिमाएं विराजमान कर अभिषेक की मंगल क्रियाएं सम्पन्न कराई गईं।</p>
<p><strong>मुनि श्री प्रमाण सागर जी का प्रेरक संदेश</strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने सिद्धभक्ति कराते हुए अपने मंगल प्रवचन में कहा कि सिद्धक्षेत्र पर सिद्धचक्र महामंडल विधान करना अत्यंत पुण्यदायी आराधना है। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान करते हुए कहा कि अष्टान्हिका महापर्व जैन धर्म का महान आध्यात्मिक पर्व है, जिसमें सिद्धों की आराधना से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।</p>
<p><strong>प्रथम दिवस 8 अर्घ्य समर्पित</strong></p>
<p>प्रवचन के उपरांत संस्कृत विधि-विधान के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने प्रथम दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ 8 अर्घ्य समर्पित कर सिद्ध परमेष्ठियों की आराधना की। देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों श्रावक-श्राविकाएं विधान में सहभागी बने।</p>
<p><strong>विभिन्न स्थलों पर भी हो रहे विधान</strong></p>
<p>सम्मेद शिखरजी स्थित विभिन्न जिनालयों में भी सिद्धचक्र महामंडल विधान आयोजित किए जा रहे हैं। शांति सागर धाम में प्रतिष्ठाचार्य पंडित विमल जी बनेठा वाले के निर्देशन में विधान सम्पन्न हो रहा है, जिसमें जयपुर से अनिल जैन पाटनी काशीपुर वाले के नेतृत्व में सैकड़ों श्रद्धालु सहभागिता कर रहे हैं।</p>
<p>वहीं तेरहपंथी कोठी स्थित सिद्धाचलम में परम पूज्य उपाध्याय श्री वृषभानन्दी जी महाराज एवं मुनि श्री वैराग्यनन्दी जी महाराज के सान्निध्य में भी सिद्धचक्र महामंडल विधान आयोजित किया जा रहा है। महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु तथा भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा की ज्योति पाटनी अपनी टीम के साथ आराधना में सहभागी बनीं। गुणायतन में जयपुर से गुणमाला, सुनील-लता सोगाणी सहित अनेक परिवारों ने विधान में सहभागिता की।</p>
<p><strong>महाआरती एवं आगामी कार्यक्रम</strong></p>
<p>रात्रि में महाआरती एवं सामूहिक जाप का आयोजन भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुआ। उदयभान जैन ने बताया कि 22 जुलाई को प्रातः 5:30 बजे मांगलिक क्रियाएं एवं 7:30 बजे सिद्धभक्ति के पश्चात विधान के द्वितीय दिवस 16 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।</p>
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		<title>सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, शुद्धि, सद्बुद्धि और सिद्धि का महापर्व है : राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 16:44:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मधुबन स्थित गुणायतन में राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण एवं मंडप उद्घाटन के साथ हुआ। मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि, विवेकपूर्ण श्रद्धा और धर्ममय जीवन का संदेश दिया। पढ़िए श्रीफल साथी राजकुमार जैन अजमेरा की विशेष रिपोर्ट। मधुबन (गिरिडीह)। अष्टान्हिका [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मधुबन स्थित गुणायतन में राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण एवं मंडप उद्घाटन के साथ हुआ। मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि, विवेकपूर्ण श्रद्धा और धर्ममय जीवन का संदेश दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजकुमार जैन अजमेरा की विशेष रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मधुबन (गिरिडीह)।</strong> अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर गुणायतन में विराजमान राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज एवं मुनि श्री 108 संधान सागर महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण एवं मंडप उद्घाटन के साथ श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।</p>
<p>राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन &#8216;विद्यावाणी&#8217; ने बताया कि इस भव्य विधान में देश के विभिन्न राज्यों तथा विदेशों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने 108 मंडलों के साथ आराधना प्रारंभ की।</p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि &#8220;श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, शुद्धि, सद्बुद्धि और सिद्धि की साधना का महापर्व है। यह केवल बाहरी अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मजागरण और आत्मपरिवर्तन का श्रेष्ठ माध्यम है।&#8221;</p>
<p>उन्होंने कहा कि विधान में अंधश्रद्धा नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण श्रद्धा आवश्यक है। अनेक लोग सांसारिक सफलता, समृद्धि एवं बाधाओं के निवारण की भावना से यह विधान करते हैं, जबकि इसका वास्तविक उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और जीवन का सकारात्मक रूपांतरण है। विधान की सफलता उसकी भव्यता से नहीं, बल्कि साधक के जीवन में आए आध्यात्मिक परिवर्तन से मापी जानी चाहिए।</p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में पंचपरमेष्ठी एवं नवदेवताओं की आराधना की जाती है। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र और तप ही मोक्षमार्ग के आधार हैं। यदि ये गुण जीवन में विकसित हो जाएँ तो साधक सिद्धि के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान से धन-वैभव के स्थान पर सद्बुद्धि की कामना करने का संदेश दिया।</p>
<p>ध्वजारोहण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुनिश्री ने कहा कि प्रत्येक धार्मिक आयोजन का शुभारंभ ध्वजारोहण से इसलिए किया जाता है क्योंकि यह धर्म को जीवन में सर्वोच्च स्थान देने का संदेश देता है। ध्वज चारों दिशाओं से आने वाली हवाओं के साथ लहराता है, किंतु उसका ध्वजदंड अटल रहता है। इसी प्रकार परिस्थितियाँ कैसी भी हों, धर्म के प्रति श्रद्धा अडिग रहनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने सरल उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे बच्चा खंभे को पकड़कर उसके चारों ओर घूमता रहता है और खंभा नहीं छोड़ता तो गिरता नहीं, उसी प्रकार जो व्यक्ति धर्मरूपी आधार को नहीं छोड़ता, वह जीवन की विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता।</p>
<p>मुनिश्री ने श्रद्धालुओं से विधान के दौरान भावों की पवित्रता बनाए रखने, धैर्य, सहयोग और प्रसन्नता के साथ आराधना करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि प्रारंभिक दिनों में व्यवस्था में कहीं कमी रह जाए तो उसे सहज भाव से स्वीकार करें और सामूहिक सहयोग से उसे दूर करें</p>
<p>उन्होंने गुणायतन एवं श्री सेवायतन की संपूर्ण टीम तथा स्वयंसेवकों की सेवाभावना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे विराट आयोजन सामूहिक समर्पण और अनुशासन से ही सफल होते हैं। उन्होंने सभी सेवाधर्मियों एवं धार्मिक सेवाओं का सौभाग्य प्राप्त करने वाले परिवारों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
<p>प्रवचन के उपरांत मुनिश्री के मंगल निर्देशन में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की विधिवत आराधना प्रारंभ हुई। अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर संपूर्ण गुणायतन परिसर मंत्रोच्चार, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से गुंजायमान हो उठा।</p>
<p>कार्यक्रम में झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, गुजरात, उत्तरप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाज के गणमान्यजन एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी का अवतरण दिवस श्रद्धा-भक्ति से मनाया गया : विशेष प्रवचन एवं धार्मिक कार्यक्रमों का हुआ आयोजन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 08:56:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर में विश्व प्रसिद्ध गुणायतन जनक परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज का अवतरण दिवस श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विशेष प्रवचन एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट। इंदौर। शंका समाधान प्रणेता एवं विश्व प्रसिद्ध गुणायतन जनक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>इंदौर में विश्व प्रसिद्ध गुणायतन जनक परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज का अवतरण दिवस श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विशेष प्रवचन एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। शंका समाधान प्रणेता एवं विश्व प्रसिद्ध गुणायतन जनक परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज का अवतरण दिवस श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर गुरुदेव के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।</p>
<p><strong>संयम और सदाचार का संदेश</strong></p>
<p>धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनि श्री का संपूर्ण जीवन संयम, तप, त्याग और करुणा की प्रेरणा देता है। उनके उपदेश समाज को अहिंसा, सत्य, सदाचार और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।</p>
<p><strong>विशेष प्रवचन एवं धार्मिक आयोजन</strong></p>
<p>अवतरण दिवस के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध तीर्थ गुणायतन में विशेष प्रवचन, धार्मिक अनुष्ठान एवं विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के सान्निध्य में धर्मलाभ प्राप्त करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले संत</strong></p>
<p>वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन ने कहा कि मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज के प्रवचन श्रद्धालुओं की शंकाओं का समाधान करते हैं और आत्मज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। उनका आध्यात्मिक मार्गदर्शन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।</p>
<p><strong>धर्म से जुड़ने का मिला संदेश</strong></p>
<p>राजेश जैन दद्दू ने कहा कि मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज का आशीर्वाद सदैव समाज पर बना रहे। उनका आदर्श जीवन सभी के लिए प्रेरणा है। ऐसे पावन अवसर व्यक्ति को धर्म, आत्मचिंतन और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।</p>
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		<title>सम्मेदशिखर में होगा जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव : 18 अप्रैल को मुनिश्री प्रमाणसागरजी देंगे शिष्यों को दीक्षा  </title>
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		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 11:03:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शाश्वत सिद्धक्षेत्र सम्मेदशिखर की पावन वंदनीय धरा एक बार फिर त्याग, तपस्या और आत्म जागरण का अद्भुत दृश्य देखने जा रही है। 18 अप्रैल शनिवार का वह पावन दिवस, जब मुनि प्रमाण सागर अपने शिष्यों को जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान करेंगे। केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्म परिवर्तन का युगांतकारी क्षण होगा। इंदौर से पढ़िए, यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शाश्वत सिद्धक्षेत्र सम्मेदशिखर की पावन वंदनीय धरा एक बार फिर त्याग, तपस्या और आत्म जागरण का अद्भुत दृश्य देखने जा रही है। 18 अप्रैल शनिवार का वह पावन दिवस, जब मुनि प्रमाण सागर अपने शिष्यों को जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान करेंगे। केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्म परिवर्तन का युगांतकारी क्षण होगा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> शाश्वत सिद्धक्षेत्र सम्मेदशिखर की पावन, वंदनीय धरा एक बार फिर त्याग, तपस्या और आत्मजागरण का अद्भुत दृश्य देखने जा रही है। 18 अप्रैल शनिवार का वह पावन दिवस, जब मुनि प्रमाण सागर अपने शिष्यों को जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान करेंगे, केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्म परिवर्तन का युगांतकारी क्षण होगा। ऐसा प्रतीत होता है मानो 1968 का स्वर्णिम इतिहास पुनः जीवंत हो उठेगा, जब मुनिश्री ज्ञानसागरजी महाराज ने एक ऐसे संत को दीक्षा दी थी, जिन्होंने आगे चलकर पूरे भारत में संयम की अलख जगाई और सैकड़ों मुनि-आर्यिकाओं को दीक्षित कर धर्मध्वजा को ऊंचा किया। उसी महान परंपरा के संवाहक मुनिश्री प्रमाण सागरजी का जीवन स्वयं त्याग और तपस्या की प्रेरक गाथा है।</p>
<p><strong>मुनिश्री ने मध्यप्रदेश को कर्मस्थली बनाया</strong></p>
<p>राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं स्थानीय मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने नवीन कुमार के रूप में हजारीबाग की धरती पर सेठी परिवार में जन्म लिया। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में बाल्यकाल बिताते हुए वे गुरुदेव आचार्य विद्यासागर के दिव्य व्यक्तित्व से अत्यंत प्रभावित होकर मात्र 18 वर्ष की आयु में उन्होंने ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर लिया। युवावस्था के सपनों का त्याग कर आत्म कल्याण की राह चुनना ही उनके जीवन की दिशा बन गया। सन् 1988 में सिद्धक्षेत्र सोनागिर की पवित्र भूमि पर उन्होंने भव्य जैनेश्वरी दीक्षा लेकर संसार से विरक्ति का सशक्त संदेश दिया। दीक्षा के बाद वर्षों तक मध्यप्रदेश को कर्मस्थली बनाकर उन्होंने भगवान महावीर के अहिंसा और करुणा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया।</p>
<p><strong>15 अप्रैल को सम्मेद शिखर में मंगल प्रवेश </strong></p>
<p>वर्ष 2005 में सम्मेदशिखर की तलहटी में गुणायतन और सेवायतन की स्थापना कर धर्म को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ने का अभिनव प्रयास किया। लाखों श्रद्धालुओं के जीवन में उन्होंने समाधान, प्रेरणा और आस्था का दीप प्रज्ज्वलित किया। शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान अत्यंत प्रेरणादायक रहा। इंदौर और भोपाल के ऐतिहासिक चातुर्मासों के माध्यम से उन्होंने समाज के बच्चों को संस्कार, संयम और राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया तथा विद्या प्रमाण गुरुकुलम की स्थापना कर भविष्य की पीढ़ी को दिशा प्रदान की। अब वही गुरुवर वर्ष 2026 में एक नया अध्याय लिखने जा रहे हैं, जब वे 15 अप्रैल को अपने शिष्यों एवं संसघ सहित सम्मेदशिखर की पवित्र भूमि पर मंगल प्रवेश करेंगे और उन्हें संयम जीवन की ओर अग्रसर करेंगे। यह क्षण केवल दीक्षा का नहीं, आत्मजागरण का है। यह अवसर केवल देखने का नहीं, अनुभव करने का है। यह आयोजन केवल इतिहास नहीं, भावनाओं का महासंगम होगा। जहां त्याग की गंगा बहेगी, वैराग्य का दीप जलेगा और हजारों श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति के आंसू झिलमिलाएंगे। नमोस्तु शासन जयवंत हो।</p>
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		<title>गुरु भाइओं का मंगल मिलन शीतलधाम में : मुनि श्री प्रमाण सागरजी ससंघ का मंगल प्रवेश दोपहर तीन बजे    </title>
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		<pubDate>Sun, 16 Nov 2025 11:55:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शंका समाधान एवं गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी ससंघ का मंगल विहार विदिशा की ओर चल रहा है। मुनिसंघ की आहार चर्या ज्ञानोदय तीर्थ दीवान गंज में संपन्न हुई। विदिशा से पढ़िए, अविनाश जैन की यह खबर&#8230;  विदिशा। शंका समाधान एवं गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी ससंघ का मंगल विहार विदिशा की ओर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शंका समाधान एवं गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी ससंघ का मंगल विहार विदिशा की ओर चल रहा है। मुनिसंघ की आहार चर्या ज्ञानोदय तीर्थ दीवान गंज में संपन्न हुई। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, अविनाश जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> विदिशा।</strong> शंका समाधान एवं गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी ससंघ का मंगल विहार विदिशा की ओर चल रहा है। मुनिसंघ की आहार चर्या ज्ञानोदय तीर्थ दीवान गंज में संपन्न हुई एवं शंका समाधान तथा रात्रि विश्राम पारस गार्डन सलामतपुर में होकर रविवार को प्रातः प्रवचन सांची दिगंबर जैन मंदिर में प्रातः8:30 बजे हुए। आहार चर्या उपरांत दोपहर एक बजे सांची से मंगल विहार होकर तीन बजे ईदगाह चौराहे से सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा मंगल अगवानी की जाएगी। मुनिसंघ शीतलधाम पर पहुंचेंगे एवं विदिशा नगर में विराजमान</p>
<p>मुनि श्री सम्भवसागर महाराज ससंघ के साथ गुरु भाईओं का मंगल मिलन होगा। सांयकालीन विश्वप्रसिद्ध शंकासमाधान 6:20 से 7.15 बजे तक शीतलधाम पर होगा।</p>
<p><strong>हमें अपने आत्मस्वरूप का ज्ञान और बोध ही नहीं</strong></p>
<p>इधर, ज्ञानोदय तीर्थ दीवानगंज में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि जीवन उन्हीं का ऊंचा उठता है,जो अपने आपको आगे बढ़ाने के लिये संघर्ष करते हैं। उन्होंने कहा कि अपने आपसे प्रश्न करो मैं कौन हूं, मेरा क्या है? मैं क्या कर रहा हूं? और मुझे क्या करना चाहिये? उन्होंने कहा कि हमें अपने आत्मस्वरूप का ज्ञान और बोध ही नहीं है। इसलिये जो मैं हूं इसे जानते नहीं, बहुत थोड़े से लोग है, जो अपने जीवन और जीवन के मर्म को पहचानते हैं।</p>
<p><strong>यह शरीर एक चोले के समान है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि आचार्य कुंद-कुंद स्वामी कहते है कि मैं एक शुद्ध चेतन आत्मा हूं, यह शरीर एक चोले के समान है। यह जो परिचय दिया जा रहा है, वह मैं नहीं वह संसार को भटकाने वाला है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे व्यक्ति नशे की हालत में होता है तो उसे कोई सुधबुध नहीं रहती। उससे भी खराब नशा मोह का होता है, जिसमें मनुष्य अपनी सुधबुध भूल जाता है।</p>
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		<title>मुनि श्री प्रमाणसागर जी का विदिशा में मंगल प्रवेश 16 नवंबर को : रविवार को आहारचर्या सांची दिगंबर जैन मंदिर में होगी </title>
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		<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 05:49:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य विद्या प्रमाण गुरुकुलम के जनक गुणायतन शंका समाधान के प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने राजधानी भोपाल में 8 माह तक लगातार प्रवास कर तथा भोपाल को एक नई सौगात विद्या प्रमाण गुरुकुलम् के रूप में देकर विदिशा की ओर मंगल विहार किया। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य विद्या प्रमाण गुरुकुलम के जनक गुणायतन शंका समाधान के प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने राजधानी भोपाल में 8 माह तक लगातार प्रवास कर तथा भोपाल को एक नई सौगात विद्या प्रमाण गुरुकुलम् के रूप में देकर विदिशा की ओर मंगल विहार किया। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य विद्या प्रमाण गुरुकुलम के जनक गुणायतन शंका समाधान के प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने राजधानी भोपाल में 8 माह तक लगातार प्रवास कर तथा भोपाल को एक नई सौगात विद्या प्रमाण गुरुकुलम् के रूप में देकर विदिशा की ओर मंगल विहार किया। सकल दिगंबर जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री का संघ सहित रात्रि विश्राम सूखी सिंवनिया में होगा एवं 15 नवंबर शनिवार की आहार चर्या ज्ञानोदय तीर्थ दीवानगंज में होगी तथा 16 नवंबर को आहारचर्या सांची दिगंबर जैन मंदिर में होकर दोपहर पश्चात विदिशा नगर में मंगल प्रवेश होगा।</p>
<p><strong>यह इस धरती का ही कोई सुयोग्य था&#8230;</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया भोपाल के लोग गुरु विछोह की वेदना को महसूस कर रहे हैं। वहीं विदिशा नगर वासियों में अपार उत्साह है अपने गुरुदेव की मंगल अगवानी का। श्री दिगंबर जैन शीतलविहार न्यास श्री सकल दिगंबर जैन समाज एवं मुनि सेवक संघ के सभी सदस्यों में उत्साह का वातावरण है। इधर, जब विद्यासागर विज्ञान संस्थान एवं विद्याप्रमाण गुरुकुलम् के पदाधिकारियों एवं स्कूल के नन्हे मुन्ने बालकों ने सजल नेत्रों से भावभीनी विदाई दी। तब मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि यह इस धरती का ही कोई सुयोग्य था कि 1995 के बाद जब यहां आना हुआ तो इसका अभयोदय काल आ गया और हम निमित्त बन गए।</p>
<p><strong>अंकुरण के उपरांत अब जिम्मेदारी और ज्यादा है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने अपने गुरु आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को याद करते हुए कहा कि उन्हीं की प्रेरणा से गुरुकुलम् का यह स्वरूप निखर कर आया है। मुनि श्री ने सभी पदाधिकारियों को आशीर्वाद देते कहा कि भावना से ऊपर उठकर कर्तव्य बोध के साथ कार्य करना चाहिए। अब आप लोगों के ऊपर यह एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी और बढ़ गई है। खेत में बीज बोया गया उसका अंकुरण हो गया है। अंकुरण के उपरांत अब जिम्मेदारी और ज्यादा है, खरपतवार से उस अंकुरण को बचाने की तथा समय-समय पर खाद-पानी देकर इसे पुष्ट करने की। उन्होंने कहा कि विगत दिनों आप लोगों ने जो कुछ सीखा और समझा और ग्रहण किया। अब उन सबके प्रयोग करने का समय आ गया है। उसमें सभी को मिल जुलकर के फलवान बनाना है।</p>
<p><strong>निश्चित शुरुआत में कठनाइयां ज्यादा आती हैं</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि मुझे इस बात की बेहद प्रसन्नता है कि गुरुकुलम् हमारी कल्पना के अनुरूप आकार ले रहा है तथा आने वाले दिनों में एक वृहद स्वरूप प्राप्त करेगा तथा ये नन्हे मुन्ने बच्चों के भविष्य को संवरेगा। उन्होंने कहा कि यह इन बच्चों का पहला साल है और निश्चित शुरुआत में कठनाइयां ज्यादा आती हैं। गुरुदेव ने मूक माटी लिखा है कि कितना भी कुशल पाक शास्त्री हो उसकी पहली रोटी कच्ची हो ही जाती है। उन्होंने कहा कि यह भले ही यह पहली रोटी है लेकिन, तवा गरम है और अब दनादन रोटियां सिकेंगी और सभी रोटियां फूली-फूली होगी, जो सभी के हृदय को और और आल्हादित करेगी।</p>
<p><strong>आपसी तालमेल को बनाए रखें</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि हम जो छोड़कर जा रहे हैं। उसे आप सभी लोग मिलकर और बड़ा कीजिए। उन्होंने भोपाल गुरुकुलम् की पूरी टीम को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आप लोगों की आपस की एकता सदभाव और समन्वय बना रहना चाहिए। आपसी तालमेल को बनाए रखें तथा गुरुकुलम के नाम पर सभी अपना ईगो को गुरु चरणों में रखकर इस कार्य को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि आप सभी का एक ही संकल्प रखें कि हमें अपने इस मिशन को आगे बढ़ाना है।</p>
<p><strong> जितना सानिध्य मिला है, उसमें संतोष करो</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि हमें आप सभी लोगों की भावना और भक्ति में कोई संशय नहीं है। आप लोगों को जितना सानिध्य मिला है, उसमें संतोष करो अब और रुकना संभव नहीं है। आप सभी जानते है कि जैन मुनियों का जीवन शास्त्रों से बंधा हुआ होता है तथा शास्त्रों की आज्ञानुसार ही जीवन आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि दूरी मन की होती है,बाहर की नहीं, आप सभी लोग तो मन से इतने निकट आ चुके हो कि हमें अपने से कहीं दूर जाने ही नहीं दोगे इस अवसर पर महामंत्री अनुभव सराफ ने कहा कि आपने आशीर्वाद दिया और हम लोग इकट्ठे हुए और उसे गुरुकुलम् परिवार का रूप मिला। गुरुदेव अभी तक तो आप थे लेकिन, अब वह समय आ गया है कि हमें आपके बिना इसे आगे बढ़ाना होगा।</p>
<p><strong>टीम भावना के साथ काम करने की भावना व्यक्त की</strong></p>
<p>8 माह का समय कब निकल गया पता ही नहीं चला। उन्होंने गुरुकुलम् परिवार की भावना को सजल नेत्रों से व्यक्त करते हुए कहा कि आप हम सभी को ऐसा आशीर्वाद प्रदान करें कि हम सभी आपकी भावना में खरे उतरें। इस अवसर पर सुरेश जैन आइएएस, राजेश जैन, विनीत गोधा, सैज के प्रशांत जैन, नरेन्द्र जैन टोंग्या, रचना पारख आदि सभी टीम सदस्यों ने टीम भावना के साथ काम करने की भावना व्यक्त की तथा कहा कि हम आपकी भावनाओं पर खरे उतरेंगे।</p>
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		<title>भोपाल में शिक्षा, समाज और साधना के क्षेत्र में गुणायतन गौरव कार्यक्रम का आगाज : विद्या प्रमाण गुरुकुलम बनेगा देश के जैन बालकों का प्रेरणा केंद्र, 7 से 9 नवंबर तक तीन दिवसीय आयोजन </title>
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		<pubDate>Sun, 02 Nov 2025 14:36:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भोपाल में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के सान्निध्य में 7 से 9 नवंबर तक तीन दिवसीय “गुणायतन गौरव कार्यक्रम” आयोजित होगा। विद्यासागर गुरुदेव की प्रेरणा से स्थापित “विद्या प्रमाण गुरुकुलम्” अब जैन बच्चों के सर्वांगीण विकास का केंद्र बनकर उभर रहा है। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट… भोपाल। संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भोपाल में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के सान्निध्य में 7 से 9 नवंबर तक तीन दिवसीय “गुणायतन गौरव कार्यक्रम” आयोजित होगा। विद्यासागर गुरुदेव की प्रेरणा से स्थापित “विद्या प्रमाण गुरुकुलम्” अब जैन बच्चों के सर्वांगीण विकास का केंद्र बनकर उभर रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज की प्रेरणा से गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने गत वर्ष इंदौर चातुर्मास में जैन समाज के बालकों और युवाओं के लिए एक आदर्श गुरुकुलम् की स्थापना का संकल्प दिया था। उसी प्रेरणा के परिणामस्वरूप भोपाल के अवधपुरी स्थित श्री विद्यासागर इंस्टीट्यूट में “विद्या प्रमाण गुरुकुलम्” की स्थापना की गई, जहाँ समूचे भारतवर्ष से 180 प्रतिभावान बच्चों का चयन कर उन्हें आवास, शिक्षा और संस्कार की समग्र व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।</p>
<p>मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने इन बालकों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के उद्देश्य से 2025 का चातुर्मास भी यहीं करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बच्चों में यह भावना जगाई कि वे केवल संस्कारित नहीं बल्कि देश के “आइकॉन” बनें जो समाज और राष्ट्र दोनों का गौरव बढ़ाएँ।</p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि 7 नवंबर को गुरुकुलम् के विभिन्न प्रकल्पों का शिलान्यास, 8 नवंबर को गुणायतन का अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन, तथा 9 नवंबर को मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर महाराज ससंघ की उपस्थिति में पिच्छिका परिवर्तन समारोह संपन्न होगा। इस अवसर पर देश-विदेश से गुणायतन परिवार की प्रमुख विभूतियाँ उपस्थित रहेंगी जो ज्ञान और संसाधनों से गुरुकुलम् को समृद्ध करेंगी।</p>
<p>3 नवंबर को चूना भट्टी, भोपाल में मुनि श्री प्रमाणसागर और मुनि श्री निर्वेग सागर महाराज ससंघ का मंगल मिलन हुआ। इसके अतिरिक्त सोमवार, 4 नवंबर को बाबड़िया कला में साधु वाटिका का शिलान्यास प्रवचन उपरांत किया जाएगा। गुणायतन परिवार ने समस्त जैन समाज से इस स्वर्णिम आयोजन में भाग लेने का आह्वान किया है।</p>
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		<title>भोपाल में दीपावली मिलन समारोह में “गुरुकुलम्” का शुभारंभ : मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने भोपाल को सौभाग्य बताते हुए युवाओं को प्रतिभा विकास हेतु प्रेरित किया </title>
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		<pubDate>Sun, 26 Oct 2025 17:06:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भोपाल में गुणायतन द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने “विद्याप्रमाण गुरुकुलम्” के शुभारंभ पर आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह संस्था समाज की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और जैनत्व संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट… भोपाल। गुणायतन भोपाल द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भोपाल में गुणायतन द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने “विद्याप्रमाण गुरुकुलम्” के शुभारंभ पर आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह संस्था समाज की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और जैनत्व संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> गुणायतन भोपाल द्वारा आयोजित दीपावली मिलन समारोह में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने अपने उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि “गुरुकुलम्” का शुभारंभ नये स्वरूप में होगा। मुनि श्री ने बताया कि यह आयोजन न केवल भारत बल्कि विश्व भर से बड़ी विभुतियों को जोड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि गुरुकुलम् की योजना इंदौर में बनी, लेकिन इसकी शुरुआत का सौभाग्य भोपाल को मिला है।</p>
<p>मुनि श्री ने इस अवसर पर समाज को संदेश देते हुए कहा कि मंदिर बनाना सरल है, लेकिन ऐसे संस्थान बनाना कठिन है। समाज में जैनत्व को सुरक्षित रखना और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना आज आवश्यक है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि छोटे-छोटे योगदान भी समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं, जैसे राम सेतु निर्माण में रेत गिराने वाली गिलहरी का योगदान।</p>
<p>कार्यक्रम का संचालन विद्याप्रमाण गुरुकुलम् भोपाल के महामंत्री अनुभव सराफ ने किया। इस अवसर पर मध्यभारत गुणायतन के अध्यक्ष नरेन्द्र जैन टोंग्या, दि. जैन पंचायत भोपाल के अध्यक्ष मनोज बांगा, गुरुकुलम् के अध्यक्ष विनीत गोधा, राजेश जैन भारिल्ल, रोहित सुगंधि लाल जैन, अमर जैन अभिताभ मन्या, विनोद एम.पी.टी., अनुपम पंडित, संदीप गोधा, दयोदय महासंघ अध्यक्ष प्रेमचंद्र प्रेमी, पंकज सुपारी सहित अन्य वक्ताओं ने उपस्थित रहकर मुनि श्री के प्रति कृतज्ञता अर्पित की।</p>
<p>इस कार्यक्रम में भोपालवासियों की सहभागिता और उत्साह देखकर यह स्पष्ट हुआ कि “गुरुकुलम्” की इस नई पहल से समाज में शिक्षा, प्रतिभा और जैन मूल्यों का प्रसार और सशक्त होगा।</p>
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		<title>विद्याप्रमाण गुरुकुलम् के विस्तार पर भोपाल में राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न : मुनि प्रमाण सागर बोले– बड़े उद्देश्य के लिए आगे बढ़ रही है ‘विद्याप्रमाण गुरुकुलम्’ </title>
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		<pubDate>Sun, 21 Sep 2025 13:47:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भोपाल के संस्कार उपवन में जैन इन्फिनिटी और गुणायतन के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न हुई। इसमें भारत सहित विदेशों से शिक्षाविद और मुनिभक्त शामिल हुए। मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि बड़े उद्देश्य को पाने के लिए हमें निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… भोपाल (संस्कार उपवन)। विगत दो दिनों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भोपाल के संस्कार उपवन में जैन इन्फिनिटी और गुणायतन के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न हुई। इसमें भारत सहित विदेशों से शिक्षाविद और मुनिभक्त शामिल हुए। मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि बड़े उद्देश्य को पाने के लिए हमें निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल (संस्कार उपवन)</strong>। विगत दो दिनों से राजधानी भोपाल के संस्कार उपवन में ‘विद्याप्रमाण गुरुकुलम्’ के विस्तार हेतु जैन इन्फिनिटी और गुणायतन द्वारा राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें देशभर और विदेशों से शिक्षाविद, गुणायतन पदाधिकारी और मुनिभक्तों ने भाग लिया।</p>
<p>संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महामुनिराज के आशीर्वाद से मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने बताया कि विद्याप्रमाण गुरुकुलम् एक बड़े उद्देश्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा– “जब हम किसी बड़े लक्ष्य के लिए चलना शुरू करते हैं तो राह की कठिनाइयाँ महत्वहीन हो जाती हैं, केवल उद्देश्य ही हमारे सामने रहता है।”</p>
<p>गुरुकुलम् की स्थापना वर्ष 2025 में श्री विद्यासागर प्रवधकीय संस्थान, भोपाल में गुणायतन के सहयोग से की गई थी। लगभग 1600 बच्चों में से 180 का चयन कर उन्हें आवास, भोजन और संस्कार की व्यवस्था गुरुकुल में की गई है। शिक्षा की जिम्मेदारी ‘सैज इंटरनेशनल’ द्वारा संभाली जा रही है।</p>
<p>इस कार्यशाला में मुनि श्री प्रमाण सागर ने कहा कि “यह केवल मंगलाचरण है, अभी हमें और व्यापक स्तर पर नीतियों का निर्धारण और क्रियान्वयन करना होगा।” उन्होंने शिकागो से आए डॉ. दीपक जैन और उनकी टीम को विशेष रूप से सराहा और आगे की दिशा में मार्गदर्शन देने का आग्रह किया</p>
<p><strong>गुरुजी के सपनों को साकार कर देश का आइकॉन बनना</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि सभी अतिथियों ने बच्चों की पढ़ाई, आवास और भोजन व्यवस्था का निरीक्षण किया। बच्चों ने एक स्वर में कहा– “हमें गुरुजी के सपनों को साकार कर देश का आइकॉन बनना है।” यह सुनकर सभी अतिथिगण अत्यंत प्रसन्न हुए।कार्यक्रम में गुणायतन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद काला, अध्यक्ष विनीत गोधा, महामंत्री अनुभव सराफ, संस्कार उपवन के अनुपम पंडित, कार्याध्यक्ष एन.सी. जैन सहित देशभर से आए संरक्षक, ट्रस्टी और समाजजन उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का आभार विद्याप्रमाण गुरुकुलम् की ओर से रचना पारिख ने व्यक्त किया।</p>
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		<title>जो दिख रहा है वह सत्य नहीं, जो देख रहा है वह सत्य है: मुनि श्री प्रमाणसागर ने कहा- जीवन की असली सच्चाई यह है कि जन्म लेने वाले की मृत्यु निश्चित  </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 13:29:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने अपने प्रवचन में जीवन के परम सत्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य पूरी उम्र असत्य के मोहजाल में उलझा रहता है और सत्य की अनुभूति से दूर बना रहता है। भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; भोपाल। मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने अपने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने अपने प्रवचन में जीवन के परम सत्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य पूरी उम्र असत्य के मोहजाल में उलझा रहता है और सत्य की अनुभूति से दूर बना रहता है। भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने अपने प्रवचन में जीवन के परम सत्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य पूरी उम्र असत्य के मोहजाल में उलझा रहता है और सत्य की अनुभूति से दूर बना रहता है। उन्होंने प्रश्न किया-किसके साथ राग कर रहे? किसके साथ द्वेष? हम भोगों के पीछे भागते हैं और भोक्ता की उपेक्षा करते हैं। मुनि श्री ने कहा कि संत सदैव दृश्य की नहीं, दृष्टा की ओर देखने की प्रेरणा देते हैं। भोग की ओर नहीं, भोक्ता की ओर देखो। शब्द की ओर नहीं, श्रोता की ओर देखो। अनुभव की ओर नहीं, अनुभोक्ता को पहचानो। उन्होंने चार सूत्र दिए-जानो, मानो, ध्याओ और पाओ। सत्य पर बल देते हुए कहा-सत्य कथ्य नहीं, अकथ्य है। सत्य बोलने की बात नहीं, यह तो अनुभव और साधना का विषय है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-89364" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045.jpg" alt="" width="1600" height="1065" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-1536x1022.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-990x659.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250901-WA0045-1320x879.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />कविता के माध्यम से सत्य का बोध </strong></p>
<p>मुनि श्री ने मिश्रीलाल जैन की कविता अरिहंत नाम सत्य है, सिद्ध नाम सत्य है सुनाकर समझाया कि जीवन की असली सच्चाई यह है कि जन्म लेने वाले की मृत्यु निश्चित है। उन्होंने कहा-“न कुछ लेकर आए, न कुछ लेकर जाएंगे। जैसा करेंगे, वैसा भरेंगे। मेरा केवल ‘मैं’ हूँ, बाकी सभी संबंध संयोग हैं। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि</p>
<p>“आप अकेला अव तरे, मरे अकेला होय,</p>
<p>क्या कहूँ इस जीव को, साथी सगा न कोय।”</p>
<p><strong>जीवन की अनित्यता पर बल</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा-“बाल पक गए, कमर झुक गई, कितनी बार अस्पताल और श्मशान देख आए, फिर भी मोह-माया नहीं छूटा। जब तक जीवन की सच्चाई को अंतर्मन से स्वीकार नहीं करेंगे, तब तक जीवन की दिशा और दशा नहीं बदल सकती। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब मनुष्य आत्मा के स्वभाव को पहचान लेता है, तब उसकी प्रवृत्ति में सरलता, परिणामों में निर्मलता, भावों में उज्जवलता और व्यवहार में शालीनता आ जाती है। अविनाश जैन ने बताया कि मंगलवार को उत्तम संयम और बुधवार को धूप दशमी के अवसर पर उत्तम त्याग पर विशेष प्रवचन होंगे। साथ ही “गुणायतन” के संदर्भ में भी जानकारी दी जाएगी। प्रतिदिन सायंकालीन शंका समाधान में श्रावकों की सभी शंकाओं का समाधान मुनि श्री के मुखारविंद से हो रहा है।</p>
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