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	<title>गिरार जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>गिरार जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>कार्यशाला में प्रतिभागियों का द्वितीय शैक्षणिक भ्रमण: प्राकृत भाषा की जीवंत परंपरा, भारतीय स्थापत्य कला की विशिष्टता जानी  </title>
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		<pubDate>Mon, 05 Jan 2026 12:52:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बकस्वाहा तहसील अंतर्गत जैन तीर्थ नैनागिरि में आयोजित 21 दिवसीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला (25 दिसंबर से 14 जनवरी) के अंतर्गत द्वितीय शैक्षणिक भ्रमण अत्यंत सफलतापूर्वक हुआ। नैनागिरि/बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230; नैनागिरि/बकस्वाहा। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बकस्वाहा तहसील अंतर्गत जैन तीर्थ नैनागिरि में आयोजित 21 दिवसीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला (25 दिसंबर से 14 जनवरी) के अंतर्गत द्वितीय शैक्षणिक भ्रमण अत्यंत सफलतापूर्वक हुआ। <span style="color: #ff0000">नैनागिरि/बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नैनागिरि/बकस्वाहा।</strong> केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बकस्वाहा तहसील अंतर्गत जैन तीर्थ नैनागिरि में आयोजित 21 दिवसीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला (25 दिसंबर से 14 जनवरी) के अंतर्गत द्वितीय शैक्षणिक भ्रमण अत्यंत सफलतापूर्वक हुआ। यह शैक्षणिक यात्रा नैनागिरि से प्रारंभ होकर श्री नेमगिरि, पजनारी, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक नगरी धामोनी, मदनपुर, गिरार जी तथा अवार माता तक हुई। भ्रमण का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को प्राकृत भाषा की जीवंत परंपरा, भारतीय स्थापत्य कला की विशिष्टता, धार्मिक आस्था के केंद्रों तथा सांस्कृतिक-पुरातात्विक धरोहरों से प्रत्यक्ष रूप में परिचित कराना रहा।</p>
<p><strong>प्रतिभागियों का बौद्धिक क्षितिज विस्तृत हुआ</strong></p>
<p>कार्यशाला के मीडिया प्रभारी राजेश रागी ने बताया कि भ्रमण के दौरान प्रत्येक स्थल पर उसके ऐतिहासिक, भाषिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर विद्वानों ने सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किए। जिससे प्रतिभागियों का बौद्धिक क्षितिज विस्तृत हुआ। दल का मार्गदर्शन प्रो. कमलेश जैन (जयपुर), डॉ. धर्मेंद्र जैन एवं डॉ. प्रभातकुमार दास ने किया। कार्यशाला के संयोजक डॉ. आशीष जैन आचार्य (शाहगढ़, सागर) के सुव्यवस्थित संयोजन एवं नेतृत्व में यह शैक्षणिक यात्रा अत्यंत अनुशासित, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुई। इस भ्रमण ने प्रतिभागियों में प्राकृत भाषा एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति नई चेतना, उत्साह और शोधाभिमुख दृष्टि का सशक्त संचार किया।</p>
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		<title>तप कल्याणक : जिससे आत्मा पवित्र होती है उसका नाम पुण्य है : आचार्य विशुद्ध सागर जी </title>
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		<pubDate>Mon, 20 Feb 2023 14:14:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ग्राम गिरार में श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में चौथे दिन प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशांत भैया व पं सनत कुमार, विनोद कुमार के द्वारा विधि-विधान पूर्वक तप कल्याणक की क्रियाओं को सम्पन्न कराया गया। पढ़िए प्रियंक जैन सर्राफ की रिपोर्ट&#8230; मड़ावरा। ग्राम गिरार के अतिशयकारी आदिनाथ भगवान की छत्रछाया व चर्याशिरोमणी आचार्य विशुद्ध सागर जी सहित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ग्राम गिरार में श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में चौथे दिन प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशांत भैया व पं सनत कुमार, विनोद कुमार के द्वारा विधि-विधान पूर्वक तप कल्याणक की क्रियाओं को सम्पन्न कराया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए प्रियंक जैन सर्राफ की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मड़ावरा।</strong> ग्राम गिरार के अतिशयकारी आदिनाथ भगवान की छत्रछाया व चर्याशिरोमणी आचार्य विशुद्ध सागर जी सहित 27 श्रमण मुनियों के मंगल सानिध्य में भक्तिभाव पूर्वक आयोजित किये जा रहे श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में चौथे दिन प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशांत भैया व पं सनत कुमार, विनोद कुमार के द्वारा विधि-विधान पूर्वक तप कल्याणक की क्रियाओं को सम्पन्न कराया गया। महोत्सव में प्रतिदिन ही हजारों श्रद्धालुओं द्वारा अतिशयकारी आदिनाथ भगवान के दर्शन कर पंचकल्याणक महोत्सव में पुण्य का संचय किया जा रहा है।</p>
<p><strong>निकली आदिकुमार की भव्य बारात</strong></p>
<p>चौथे के आयोजन में सुबह से ही श्रद्धालुओं का गिरार जी में आने का क्रम प्रारम्भ हो गया थ। प्रातःकालीन बेला में प्रतिदिन की भांति भगवान जिनेन्द्र देव की प्रतिमा के अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजा आदि के उपरांत तपकल्याणक की क्रियाओं का विधिविधान पूर्वक प्रारम्भ किया गया। दिल्ली से आये प्रसिद्ध मंच कलाकार मनोज शर्मा एंड पार्टी द्वारा धार्मिक नाटिकाओं के माध्यम से माहौल को धर्ममय बनाने का प्रयास किया। इसके बाद दोपहर में आदिकुमार की भव्य बारात निकाली गई, जो अयोध्या नगरी की परिक्रमा करके वापिस महोत्सव स्थल पहुंची। बारात में शामिल इंद्र-इंद्राणियों द्वारा भक्ति गीतों पर नृत्य किया गया। इसके साथ ही जैन नवयुवक अपने-अपने दिव्यघोषों को गुंजायमान करते हुए प्रदर्शन कर रहे थे। महोत्सव में दूर-दूर से आए अतिथि महानुभावों का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति द्वारा स्वागत-सम्मान किया गया। युवराज आदिनाथ का विवाह राज्यभिषेक व वैराग्य संपन्न हुआ।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-38463" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230220-WA0018.jpg" alt="" width="1060" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230220-WA0018.jpg 1060w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230220-WA0018-248x300.jpg 248w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230220-WA0018-848x1024.jpg 848w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230220-WA0018-768x927.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230220-WA0018-990x1195.jpg 990w" sizes="(max-width: 1060px) 100vw, 1060px" /></p>
<p><strong>बालक आदिकुमार को हुआ वैराग्य</strong></p>
<p>मज्जिनेन्द्र जिन बिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में पहले बालक आदिनाथ का विवाह महारानी नंदा- सुनंदा से हुआ, फिर एक दिन राजा नाभिराय ने शुभ घड़ी देखकर युवराज आदिनाथ का राज्याभिषेक किया। देवराज इंद्र स्वर्ग से नये वस्त्र आभूषण लेकर अयोध्या नगरी पहुंचे और युवराज को भेंट किए। इसके अलावा आर्य खण्ड के सभी 32 हजार राज्यों के महाराजा हीरे-जवाहरात की भेंट लेकर अयोध्या नगरी में पहुंचे। फिर आदिनाथ का परिवार बढ़ता है उनके युवा पुत्रों बाहुबली एवं भरत तथा पुत्रियां राजकुमारी ब्रह्मी एवं सुंदरी का जन्म होता है। महाराज के दरबार में एक दिन भरी सभा में नीलांजना नाम की नर्तकी नृत्य कर रही थी। उसी दौरान नृत्य करते-करते उसके प्राण पखेरू उड़ गये। देवराज इंद्र ने अपनी लीला से उसी क्षण दूसरी नर्तकी की भेज देते हैं लेकिन आदिनाथ को पता चल जाता है। मन पर्याय ज्ञान अवधिज्ञान उत्पन्न होकर वैराग्य हो जाता है। उनके माता पिता व परिवार जन द्वारा उन्हें लाख समझाने के बाद भी वह वन में प्रस्थान कर जाते हैं। महोत्सव के दौरान जब वैराग्य का प्रसंग हुआ तो श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। आदिकुमार को जैसे ही वैराग्य उत्पन्न हुआ, आदिकुमार द्वारा मुनिदीक्षा लेने का मन बना लिया गया। आचार्य भगवन विशुद्ध सागर जी ने बालक आदिकुमार की प्रतिमा के ऊपर बीजाक्षर मन्त्रों का लेखन कर दीक्षा संस्कार विधि संपन्न की।</p>
<p><strong>जिससे आत्मा पवित्र होती उसका नाम पुण्य</strong></p>
<p>आचार्य विशुद्ध सागर जी मुनिराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिससे आत्मा पवित्र होती है, उसका नाम पुण्य है। जो क्रिया तुमको मधुरता देती है लेकिन करने के बाद तुम्हें उदास कर देती हो, उसका नाम पाप है। व्यक्ति झूठ बोलने की तैयारी करता है, बोलता है लेकिन उसके बाद पछताता है। एक झूठ छिपाने के लिए हजारों झूठ बोलने पड़ते हैं। पुण्य से वो बच रहे, जिन्हें पाप से डर नहीं लगता। कर्म की डांट का पता आंख बंद होने के बाद पता चलेगा।पंचकल्याणक महोत्सव में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति व अतिशय क्षेत्र गिरार जी प्रबन्धकारणी समिति द्वारा पूर्ण मनोयोग से सर्व सुविधायुक्त व्यवस्थाओं का प्रबंध किया जा रहा है। महोत्सव में पुलिस कर्मियों द्वारा समारोह स्थल की सुरक्षा व्यवस्था अच्छे से संभाली जा रही है।</p>
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