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	<title>गिरनारजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>गिरनारजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जब तक प्राकृत भाषा जीवित है तब तक संस्कृति जीवित है : आचार्य श्री सुनीलसागर जी के सानिध्य में गिरनारजी में हुआ त्रिदिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा विद्वत्त संवाद  </title>
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		<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 15:51:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान श्री नेमिनाथ स्वामी की निर्वाण स्थली गिरनारजी में आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य से प्राकृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार के उद्देश्य से आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा विद्वत्संवाद अत्यंत भव्यता, गरिमा एवं विद्वत् वातावरण प्राकृत भाषा-साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। गिरनारजी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान श्री नेमिनाथ स्वामी की निर्वाण स्थली गिरनारजी में आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य से प्राकृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार के उद्देश्य से आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा विद्वत्संवाद अत्यंत भव्यता, गरिमा एवं विद्वत् वातावरण प्राकृत भाषा-साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। <span style="color: #ff0000">गिरनारजी से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>   गिरनार जी</strong>। जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान श्री नेमिनाथ स्वामी की निर्वाण स्थली गिरनारजी में आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य से प्राकृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार के उद्देश्य से आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा विद्वत्संवाद अत्यंत भव्यता, गरिमा एवं विद्वत् वातावरण प्राकृत भाषा-साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। यह आयोजन श्री समवसरण, निर्मल ध्यान केन्द्र, गिरनारजी (जूनागढ़, गुजरात) में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इस मौके पर आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ने उद्बोधन में कहा कि प्राकृत भाषा केवल ग्रंथों में की भाषा नहीं, यह आत्मा की भाषा है। इसी भाषा में तीर्थंकरों की वाणी प्रवाहित हुई, जिसने मानव को अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाया। आज आवश्यकता है कि हम प्राकृत को केवल अध्ययन की वस्तु न बनाकर जीवन की भाषा बनाएं। उन्होंने कहा कि जब तक भाषा जीवित है, तब तक संस्कृति जीवित रहती है। प्राकृत भाषा का संरक्षण वास्तव में भारतीय आध्यात्मिक चेतना का संरक्षण है। गिरनार जैसी सिद्धभूमि पर इस विद्वत्त संवाद का आयोजन भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक प्रेरक दीप स्तंभ बनेगा।</p>
<p><strong>इन विद्वानों की रही सहभागिता </strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी राजेश जैन रागी ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. लोकमान्य मिश्र, निदेशक, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. ऋषभचंद जैन फौजदार (एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह), डॉ. जिनेंद्र जैन (जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय, लाडनूं), डॉ. जयकुमार उपाध्ये (पूर्व निदेशक, प्राकृत विद्यापीठ श्रवणबेलगोला), डॉ. जयकुमार जैन (अधिष्ठाता, श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर, जयपुर), डॉ. दीनानाथ शर्मा (गुजरात विश्वविद्यालय) तथा ब्र. सुमत भैया (अधिष्ठाता, निर्मल ध्यान केन्द्र, गिरनारजी) की उपस्थिति रही। अतिथियों ने अपने संबोधनों में प्राकृत भाषा को भारतीय सांस्कृतिक चेतना की आत्मा बताते हुए इसके शैक्षणिक एवं सामाजिक महत्त्व पर प्रकाश डाला। इस राष्ट्रीय विद्वत्त संवाद में देश के 120 से अधिक विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विद्यालयों से पधारे संस्कृत एवं प्राकृत भाषा के मर्मज्ञ, शोधार्थी एवं प्रतिष्ठित विद्वानों ने सक्रिय सहभागिता की।</p>
<p><strong>प्रचार-प्रसार एवं अकादमिक प्रयासों की जानकारी दी</strong></p>
<p>विभिन्न तकनीकी सत्रों में प्राकृत साहित्य, आगमिक परंपरा, भाषावैज्ञानिक दृष्टि, दर्शन, संस्कृति तथा आधुनिक संदर्भों पर आधारित शोध-आलेखों का गहन वाचन एवं विमर्श हुआ। शैक्षणिक सत्रों का कुशल निर्देशन डॉ. धर्मेंद्र कुमार जैन, डॉ. प्रभातकुमार दास एवं डॉ. सतेंद्र जैन (केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय) द्वारा किया गया, जिससे संवाद का स्तर अत्यंत उच्च एवं सारगर्भित रहा। कार्यक्रम का संयोजन महामंत्री डॉ. आशीष जैन आचार्य (राष्ट्रपति सम्मानित) एवं डॉ. आशीष जैन बम्हौरी द्वारा किया गया। समापन सत्र में प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के अध्यक्ष ऋषभचन्द्र जैन फौजदार एवं महामंत्री डॉ. आशीष जैन आचार्य ने विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए संस्था द्वारा किए जा रहे प्राकृत भाषा के संरक्षण, प्रचार-प्रसार एवं अकादमिक प्रयासों की जानकारी दी।</p>
<p><strong>सात विद्वानों को किया सम्मानित </strong></p>
<p>इस अवसर पर फाउंडेशन द्वारा प्राकृत भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वानों को प्राकृत प्रभावना पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मानित विद्वानों में डॉ. शैलेश जैन (उदयपुर), पंडित लोकेश शास्त्री (गनोड़ा), डॉ. निर्मल जैन (ललितपुर), पंडित धर्मेंद्र जैन शास्त्री (उदयपुर), विजय जैन शास्त्री (शाहगढ़), पंडित अनिल जैन शास्त्री (सागर) तथा श्रीमती सुरेखा संजय नरदे (महाराष्ट्र) सम्मिलित रहीं। कुल सात विद्वानों को सम्मानित कर प्राकृत भाषा सेवा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। पुण्यार्जक सौभाग्यमल राजेन्द्र कुमार कटारिया (अहमदाबाद) को विशेष रूप से उपाधि अलंकरण से सम्मानित किया गया।</p>
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		<title>कोडरमा से 71 युवाओं का जत्था गिरनारजी के दर्शन के लिए रवाना : विशेष दर्शन में शामिल होकर अभिषेक, शांतिधारा, पूजन करेंगे </title>
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		<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 13:55:44 +0000</pubDate>
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<p><strong>जहां लोग नया साल में पिकनिक जा रहे हैं। वही दिगंबर जैन समाज कोडरमा के युवा तीर्थ यात्रा कर रहे हैं। युवा संगठन 71 सदस्यों का जत्था जैन युवक समिति के पूर्व अध्यक्ष अभिषेक जैन गंगवाल, मंत्री विकास जैन सेठी के नेतृत्व में जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान की निर्वाण भूमि गिरनार तीर्थ के उजयंत पर्वत में विराजमान साक्षात चरण के दर्शन के लिए रवाना हुआ। <span style="color: #ff0000">झुमरी तिलैया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>झुमरीतिलैया।</strong> जहां लोग नया साल में पिकनिक जा रहे हैं। वही दिगंबर जैन समाज कोडरमा के युवा तीर्थ यात्रा कर रहे हैं। युवा संगठन 71 सदस्यों का जत्था जैन युवक समिति के पूर्व अध्यक्ष अभिषेक जैन गंगवाल, मंत्री विकास जैन सेठी के नेतृत्व में जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान की निर्वाण भूमि गिरनार तीर्थ के उजयंत पर्वत में विराजमान साक्षात चरण के दर्शन के लिए रवाना हुआ। ज्ञात हो कि गुजरात के जूनागढ़ नगरी में पास जैन धर्म का ऐतिहासिक तीर्थ गिरनार है। यह जत्था वहां जाकर जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान के विशेष दर्शन में शामिल होकर अभिषेक, शांतिधारा, पूजन कर सभी अपने जीवन को धन्य बनाएंगे। साथ ही युवा सदस्य आसपास के गुजरात के जैन तीर्थ पावागढ़, देवपुरी, महुवा, घोघा, आदि कई मंदिरों के दर्शन करते हुए तारंगा तीर्थ का दर्शन करेंगे।</p>
<p><strong>साधु-साध्वियों ने दिया मंगल आशीर्वाद </strong></p>
<p>राजिम छत्तीसगढ़ में विराजमान मुनि श्री सुयश सागर जी महामुनिराज ने कहा कि जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर के 5 कल्याणक गिरनार में हुए थे और गिरनार तीर्थ जैन समाज की सबसे पूज्यनीय भूमि है और जैन समाज की शान है। आर्यिका विभा श्री माता जी ने कहा कि तीर्थस्थलों का दर्शन करने से कई गुणा पुण्य अर्जित होता है। सबसे ज्यादा पुण्य तीर्थ का दर्शन करने और कराने में आता है। सभी यात्रियों को मंगल आशीर्वाद दिया। साथ ही समाज के उप मंत्री नरेंद्र जैन झांझरी, सह मंत्री जैन राज छाबड़ा, युवा सुरेश जैन झांझरी, विजय जैन, सुबोध जैन गंगवाल, सरोज जैन पापड़ीवाल, दिलीप जैन छाबड़ा, विजय नीमा जैन छाबड़ा, मुकेश जैन अजमेरा, मैत्री समूह के सदस्य गण, महिला संगठन की मंत्राणी आशा जैन गंगवाल, वार्ड पार्षद पिंकी जैन ,नीलम जैन सेठी आदि ने सभी को मंगलमय यात्रा की बधाई दी। इस यात्रा में विशेष रूप से इस यात्रा में विशेष रूप से विवेक-प्राची जैन सेठी, विवेक-प्रियंका जैन छाबड़ा, शैलेश-दिव्या जैन छाबड़ा, अतुल-अंजलि जैन छाबड़ा, अक्षय-सोना जैन छाबड़ा, रांची से अंकुर-आकांक्षा जैन पापड़ीवाल,कोलकोत्ता से हजारीबाग से भी शामिल हुए। कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा, नवीन जैन ने सभी यात्रियों को बधाई दी।</p>
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