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	<title>गर्भकल्याणक &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>तीर्थंकर माता की हुई गोद भराई : पंचकल्याणक महोत्सव में गर्भ कल्याणक की विधियां सम्पन्न </title>
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		<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 10:22:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगम्बर जैन मंदिर, लार के तत्वाधान में चर्या शिरोमणि, आध्यात्मिक संत आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के विशाल संघ सान्निध्य में ब्र. जय कुमार जी निशांत एवं ब्र. संजय भैया गुणाशीष के प्रतिष्ठाचार्यत्व में आयोजित श्री 1008 जिनेन्द्र पंचकल्याणक, मानस्तंभ जिनबिम्ब प्रतिष्ठा, विश्वशांति महायज्ञ एवं रथोत्सव महोत्सव के अंतर्गत रविवार को गर्भ कल्याणक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगम्बर जैन मंदिर, लार के तत्वाधान में चर्या शिरोमणि, आध्यात्मिक संत आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के विशाल संघ सान्निध्य में ब्र. जय कुमार जी निशांत एवं ब्र. संजय भैया गुणाशीष के प्रतिष्ठाचार्यत्व में आयोजित श्री 1008 जिनेन्द्र पंचकल्याणक, मानस्तंभ जिनबिम्ब प्रतिष्ठा, विश्वशांति महायज्ञ एवं रथोत्सव महोत्सव के अंतर्गत रविवार को गर्भ कल्याणक की उत्तरार्द्ध विधियां भव्यता के साथ सम्पन्न हुईं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मुकेश जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टीकमगढ़।</strong> श्री दिगम्बर जैन मंदिर, लार के तत्वाधान में चर्या शिरोमणि, आध्यात्मिक संत आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के विशाल संघ सान्निध्य में ब्र. जय कुमार जी निशांत एवं ब्र. संजय भैया गुणाशीष के प्रतिष्ठाचार्यत्व में आयोजित श्री 1008 जिनेन्द्र पंचकल्याणक, मानस्तंभ जिनबिम्ब प्रतिष्ठा, विश्वशांति महायज्ञ एवं रथोत्सव महोत्सव के अंतर्गत रविवार को गर्भ कल्याणक की उत्तरार्द्ध विधियां भव्यता के साथ सम्पन्न हुईं।</p>
<p><strong>पूजन, अभिषेक और हवन से हुआ शुभारंभ</strong></p>
<p>प्रातःकाल से ही पात्र शुद्धि, अभिषेक, शांतिधारा, नित्य महापूजन एवं गर्भ कल्याणक पूजन सम्पन्न हुआ। विश्व शांति की कामना से हवन का आयोजन भी किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।</p>
<p><strong>सीमंतनी क्रिया में हुई माता की गोद भराई</strong></p>
<p>दोपहर में सीमंतनी क्रिया के अंतर्गत तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की माता की गोद भराई की रस्म पूर्ण की गई। इस अवसर पर महोत्सव समिति एवं सैकड़ों महिलाओं ने भक्ति भाव से गोद भराई कर धर्म लाभ प्राप्त किया। यह दृश्य देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। मानस्तंभ की भी विधि-विधान से शुद्धि की गई।</p>
<p>इस महोत्सव में भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य सवाई चौधरी ज्ञानचंद्र जैन एवं शोभा जैन को प्राप्त हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने माता-पिता को गोद में उठाकर भक्ति नृत्य किया। बड़ागांव, खरगापुर, दरगुवा, लार सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए महिला मंडलों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की।</p>
<p><strong>पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट और संगीतमयी भक्ति</strong></p>
<p>आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य शांतकुमार-विजय जैन परिवार को तथा शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य अजित जैन वैसा परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>राम कुमार एंड पार्टी की संगीतमयी प्रस्तुतियों के बीच पूजन, भक्ति एवं नृत्य का वातावरण भक्तिमय बना रहा। इस अवसर पर महाआरती भी सम्पन्न हुई।</p>
<p><strong>पंचकल्याणक आत्मा से परमात्मा बनने की प्रक्रिया &#8211; आचार्य श्री</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव आत्मा से परमात्मा बनने की पवित्र प्रक्रिया का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अरिहंत परमात्मा के दर्शन और वंदना से पूर्व जन्मों के कर्मों का क्षय होता है तथा गुरु सेवा से पाप कर्म नष्ट होकर पुण्य की वृद्धि होती है।उन्होंने आगे कहा कि समर्पण से बीज वृक्ष बनता है और बूंद सागर बन जाती है, उसी प्रकार जीव भी तप और साधना से परमात्मा बनता है। आचार्य श्री ने कहा कि सच्चा भक्त और गुरु का सच्चा सेवक सम्मान की इच्छा नहीं रखता, लेकिन उसकी भक्ति और सेवा के कारण वह स्वयं ही सम्मानित हो जाता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भक्ति से मुक्ति मिलती है और सेवा का फल अवश्य प्राप्त होता है।</p>
<p><strong>रात्रि में सजे महाराजा नाभिराय का दरबार</strong></p>
<p>रात्रि में भगवान के माता-पिता का दरबार सजाया गया। इस दौरान 16 स्वप्नों का फल कथन, अष्ट देवियों एवं छप्पन कुमारियों द्वारा सेवा अर्पण, महाराजा नाभिराय का भव्य दरबार तथा राज्य व्यवस्था से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस भव्य आयोजन में शाहगढ़, ललितपुर, टीकमगढ़, बंडा, बुडेरा, हटा, इंदौर, बेंगलुरु, भोपाल, छतरपुर, घुवारा, बड़ागांव, बकस्वाहा, खरगापुर सहित विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में महोत्सव समिति एवं उपसमितियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। समागत अतिथियों एवं समाज के गणमान्यजनों का स्वागत किया गया तथा पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की गई।</p>
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		<title>ध्वजारोहण से शुभारंभ हुआ सलेहा पंचकल्याणक महोत्सव: आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी के सानिध्य में गर्भकल्याणक का जीवंत मंचन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 07:01:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पावन नगरी सलेहा में आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में ध्वजारोहण के साथ भव्य पंचकल्याणक महोत्सव का शुभारंभ हुआ। तीर्थंकरों के जीवन से परिचय पंचकल्याणक के प्रथम दिन पर मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव आत्मा से परमात्मा बनने की क्रियाओं का चित्रण है। सलेहा से पढ़िए, अभिषेक अशोक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पावन नगरी सलेहा में आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में ध्वजारोहण के साथ भव्य पंचकल्याणक महोत्सव का शुभारंभ हुआ। तीर्थंकरों के जीवन से परिचय पंचकल्याणक के प्रथम दिन पर मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव आत्मा से परमात्मा बनने की क्रियाओं का चित्रण है। <span style="color: #ff0000">सलेहा से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सलेहा।</strong> पावन नगरी सलेहा में आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में ध्वजारोहण के साथ भव्य पंचकल्याणक महोत्सव का शुभारंभ हुआ। तीर्थंकरों के जीवन से परिचय पंचकल्याणक के प्रथम दिन पर मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव आत्मा से परमात्मा बनने की क्रियाओं का चित्रण है। वहां तीर्थंकरों के जीवन चरित्र लोगों को परिचित कराया जाता है। पंचकल्याणक के प्रथम दिवस पर पूर्व गर्भकल्याणक की क्रियाओं के अंतर्गत सौधर्म इंद्र, कुबेर इंद्र आगमन, अयोध्या नगरी की रचना, अष्टकुमारियों द्वारा माता की सेवा, सोलह स्वप्न, गर्भकल्याणक की आंतरिक क्रियाओं का जीवंत मंचन किया गया। सलेहा पंचकल्याणक महोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का वातावरण है। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी के मंगल आशीर्वाद एवं सानिध्य में यह दिव्य आयोजन होने जा रहा है।</p>
<p><strong>श्रद्धालुजन सलेहा पहुंचे</strong></p>
<p>यह पंचकल्याणक महोत्सव नव निर्मित जिनालय में अत्यंत श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ किया गया। कार्यक्रम में गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान एवं मोक्ष इन पांचों कल्याणकों की भव्य क्रियाएं होंगी। दूर-दूर से श्रद्धालुजन सलेहा पहुंचकर धर्मलाभ ले रहे हैं।</p>
<p><strong>धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम के रंग छाए </strong></p>
<p>आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज जी के आगमन को लेकर नगर में व्यापक स्तर पर स्वागत की तैयारियां की गईं। मंदिर परिसर को आकर्षक सजावट से सजाया गया तथा विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हं। रांछी से पधारी हुई मनाली पाटणी ने कहा कि यह महोत्सव न केवल सलेहा, बल्कि समस्त विंध्य क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक और अविस्मरणीय क्षण है। धर्म, संयम और साधना की इस पावन धारा में सहभागी बनकर श्रद्धालु अपने जीवन को धन्य कर रहे हैं।</p>
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		<title>9वें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत जी का गर्भकल्याणक 10 फरवरी: तिथि के अनुसार फाल्गुन कृष्ण नवमी को मनाया जाएगा  </title>
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		<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 06:32:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के तीर्थंकरों के कल्याणकों को लेकर दिगंबर जैन मंदिरों में खासतौर पर विशेष आराधना, भक्ति और पूजन, विधान सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं होती हैं। कल्याणकों को लेकर समाजजनों में विशेष उत्साह और अपार उल्लास रहता है। अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य समर्पण, देव-शास्त्र-गुरु के पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया जाता है। श्रीफल जैन न्यूज की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के तीर्थंकरों के कल्याणकों को लेकर दिगंबर जैन मंदिरों में खासतौर पर विशेष आराधना, भक्ति और पूजन, विधान सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं होती हैं। कल्याणकों को लेकर समाजजनों में विशेष उत्साह और अपार उल्लास रहता है। अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य समर्पण, देव-शास्त्र-गुरु के पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया जाता है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष शृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के तीर्थंकरों के कल्याणकों को लेकर दिगंबर जैन मंदिरों में खासतौर पर विशेष आराधना, भक्ति और पूजन, विधान सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं होती हैं। कल्याणकों को लेकर समाजजनों में विशेष उत्साह और अपार उल्लास रहता है। अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य समर्पण, देव-शास्त्र-गुरु के पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया जाता है। भगवान के गर्भ कल्याणक से लेकर मोक्ष कल्याणक का जैन समाज में बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। आराधना के लिए भगवान के कल्याणकों का कोई भी अवसर मंदिरों में छोड़ा नहीं जाता। 10 फरवरी को भगवान पुष्पदंत जी का गर्भ कल्याणक मनाया जाएगा। तिथि के अनुसार गर्भकल्याणक फाल्गुन कृष्ण नवमी को मनाया जाता है। इस बार भी भगवान पुष्पदंत जी का गर्भ कल्याणक शहर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिरों में मनाया जाएगा और विशेष आराधनाएं होंगी। भगवान पुष्पदंत जी (सुविधिनाथ) जैन धर्म के 9वें तीर्थंकर हैं। जिनका गर्भ कल्याणक फाल्गुन कृष्णा नवमी को हुआ था। माता जयरामा (रानी राम) ने गर्भ में आने के समय स्वप्न में ‘पुष्प’ (फूल) देखे थे। इसलिए नाम पुष्पदंत पड़ा। पिता का नाम राजा सुग्रीव और जन्म स्थान काकंदी (उत्तर प्रदेश) था। भगवान पुष्पदंत जी का जन्म कल्याणक मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा (एकम) को मनाया जाता है। भगवान का चिन्ह मगरमच्छ (मकर) है। उनका वर्ण श्वेत (गोरा) है। भगवान पुष्पदंत जी की जन्म नगरी काकंदी (आधुनिक खुखुंदू, देवरिया, उत्तर प्रदेश) है। भगवान पुष्पदंत जी के माता जयरामा ने गर्भ धारण के समय कई दिव्य स्वप्न देखे थे, जिसमें मुख्य रूप से ‘पुष्प’ की अधिकता थी। इस कारण उनका नाम पुष्पदंत रखा गया। चूँकि उनके गर्भ में आने के बाद से ही राज्य में सभी कार्य सुव्यवस्थित (सुविधि) हो गए थे। इसलिए उन्हें ‘सुविधिनाथ’ के नाम से भी जाना जाता है और पूजा जाता है।</p>
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		<title>सूरी मंत्रोच्चार से प्रतिमाएं पंच कल्याणक में प्रतिष्ठित कर पूजनीय होती है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्रीजी के दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, दान के बारे में बताया  </title>
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		<pubDate>Mon, 13 Oct 2025 16:34:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में दिए व्रत नियम के संस्कार आज भलीभूत दिख रहे हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री शांतिनाथ जिनालय बड़ा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में दिए व्रत नियम के संस्कार आज भलीभूत दिख रहे हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री शांतिनाथ जिनालय बड़ा तख्ता मंदिर में श्री जी के विभिन्न द्रव्यों से किए गए पंचामृत अभिषेक के पावन अवसर पर धर्म सभा में प्रकट की। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> भगवान के अभिषेक के बिना पूजन अधूरी होती है। आगम में पुरुष और महिला दोनों को अभिषेक का अधिकार है। श्रावकाचार ग्रंथ पुरुष और महिला दोनों के लिए एक जैसा है। आज अनेक श्रावकों और युवाओं ने श्री जी के अभिषेक के साथ पूजन करने का नियम लिया है। 55 वर्ष पूर्व दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी के सन 1970 चातुर्मास में दिए व्रत नियम के संस्कार आज भलीभूत दिख रहे हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री शांतिनाथ जिनालय बड़ा तख्ता मंदिर में श्री जी के विभिन्न द्रव्यों से किए गए पंचामृत अभिषेक के पावन अवसर पर धर्म सभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि धर्म से नाता, अवलंबन से मनुष्य जीवन में उन्नति होती है। श्रीजी के दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, दान आदि श्रावकों के मुख्य कर्तव्यों में है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रवचन में आगे बताया कि सन 1970 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्म सागर जी के साथ टोंक नगर में चातुर्मास किया था। बाद में पंचकल्याणक हुआ था। इसकी सुखद पुनरावृत्ति सन 2025 में हो रही है। पहले यहां वर्षायोग किया इसके बाद नवंबर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा होगी।</p>
<p><strong>णमोकार मंत्र में पंच परमेष्ठी बतलाए गए हैं </strong></p>
<p>जैन समाज द्वारा जिन मंदिर में नूतन प्रतिमा स्थापित करने के लिए पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य भगवान के सानिध्य में सूरी मंत्रोच्चार के माध्यम से प्राण प्रतिष्ठा कराई जाती है। इन धार्मिक अनुष्ठान को पूर्ण मनोभाव से करने और देखने से असीम पुण्य की प्राप्ति होती है। इन पांच दिवसीय कार्यक्रम में भगवान के जन्म, गर्भकल्याणक, जन्म कल्याणक, दीक्षा तप कल्याणक, ज्ञान कल्याणक और मोक्ष कल्याणक की धार्मिक क्रियाएं होती है। जिसमें ज्ञान और मोक्ष कल्याणक पर भगवान को सूरी मंत्र द्वारा प्रतिष्ठित किया जाता है। णमोकार मंत्र में पंच परमेष्ठी बतलाए गए हैं साधु, उपाध्याय, आचार्य, अरिहंत और सिद्ध भगवान जो वैराग्य धारण कर तप संयम से कर्मों की क्षय निर्जरा करते हुए सिद्धालय पर विराजित होते हैं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-92413" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023.jpg" alt="" width="1200" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023.jpg 1200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-768x1024.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-1152x1536.jpg 1152w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251013-WA0023-990x1320.jpg 990w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" />पंच कल्याणक कार्यक्रम के स्टीकर पोस्टर का विमोचन </strong></p>
<p>सुनील सराफ, पवन कंटान के अनुसार अनुसार आदिनाथ जिनालय से श्री शांतिनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जगह-जगह समाजजनों ने आचार्य श्री की आरती कर चरण प्रक्षालन किए। विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों द्वारा श्री जी का भव्य पंचामृत अभिषेक जल, नारियल रस, विभिन्न फलों के रस, शर्करा, धी, दूध, दही, सर्व औषधि; केशर लाल चंदन सफेद चंदन पुष्प हल्दी,सुगंधित जल आदि से किया। श्रीजी की शांतिधारा हुई। आचार्य श्री संघ सानिध्य में होने वाले पंच कल्याणक कार्यक्रम के स्टीकर पोस्टर का विमोचन समाज के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री सानिध्य में किया। सोमवार को आर्यिका श्री महायश मति जी के केश लोचन हुए।</p>
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		<title>भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी का गर्भ कल्याणक 12 जुलाई को: तिथि के अनुसार श्रावण कृष्ण द्वितीया को आता है </title>
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		<pubDate>Fri, 11 Jul 2025 14:21:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी का गर्भकल्याणक 12 जुलाई को संपूर्ण भारत वर्ष में पारंपरिक धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर भगवान के मंदिरों में आराधना, अभिषेक, शांतिधारा सहित विविध आयोजन किए जाएंगे। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रंृखला में आज श्रावण कृष्ण द्वितीया 12 जुलाई को पढ़िए, उपसंपादक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी का गर्भकल्याणक 12 जुलाई को संपूर्ण भारत वर्ष में पारंपरिक धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर भगवान के मंदिरों में आराधना, अभिषेक, शांतिधारा सहित विविध आयोजन किए जाएंगे। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रंृखला में आज श्रावण कृष्ण द्वितीया 12 जुलाई को पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी का गर्भ कल्याणक इस बार 12 जुलाई को आ रहा है। तिथि के अनुसार यह महोत्सव श्रावण कृष्ण द्वितीया को मनाया जाएगा। इस दिन दिगंबर जैन समाज के सभी जिनालयों और चैत्यालयों में पारंपरिक धार्मिक उल्लास के साथ भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव पर विविध कार्यक्रम विधिविधान के सथ आयोजित किए जाएंगे। जैन धर्म के ग्रंथों के अनुसार भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी का गर्भ कल्याणक श्रावण कृष्ण द्वितीया को मनाया जाता है। यह जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ स्वामी के जीवन का एक महत्वपूर्ण अवसर है। श्रावण कृष्ण द्वितीया को मुनिसुव्रतनाथ स्वामी माता पद्मावती के गर्भ में आए थे। यह दिन जैन धर्मावलंबियों द्वारा बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्त जन भगवान मुनिसुव्रतनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं और उनके उपदेशों का स्मरण करते हैं।</p>
<p><strong>अन्य महत्वपूर्ण तिथियां</strong></p>
<p>भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी का जन्म कल्याणक वैशाख कृष्ण दशमी, तप कल्याणक वैशाख कृष्ण दशमी, ज्ञान कल्याणक वैशाख कृष्ण नवमी, मोक्ष कल्याणक फाल्गुन शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है। मुनिसुव्रतनाथ स्वामी जैन धर्म के 20वें तीर्थंकर हैं। उनके पिता का नाम सुमित्र और माता का नाम पद्मावती था। उनका जन्म राजगृह (राजगीर) में हुआ था। उनका चिन्ह कछुआ है। उनकी आयु 30 हजार वर्ष थी। उन्होंने 15 हजार वर्ष तक राज्य किया था।</p>
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		<title>महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव की पूर्व संध्या पर गर्भकल्याणक मनाया: नाटक का प्रभावी मंचन ने सभी को किया विभोर  </title>
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		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 13:20:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर 7 आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा आगरा में भगवान महावीर के जन्म कल्याणक महोत्सव की पूर्व संध्या में भगवान महावीर के गर्भकल्याणक का सुंदर दृश्य पंडित वाणी भूषण आशुतोष शास्त्री जी के कुशल संचालन एवं निर्देशन में हुआ। जिसमें भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य अनंत कुमार जैन एवं उनकी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर 7 आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा आगरा में भगवान महावीर के जन्म कल्याणक महोत्सव की पूर्व संध्या में भगवान महावीर के गर्भकल्याणक का सुंदर दृश्य पंडित वाणी भूषण आशुतोष शास्त्री जी के कुशल संचालन एवं निर्देशन में हुआ। जिसमें भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य अनंत कुमार जैन एवं उनकी धर्मपत्नी ने प्राप्त किया एवं कुबेर महाराज का नाट्य रूपांतरण संजीव कुमार जैन को प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए राहुल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर 7 आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा आगरा में भगवान महावीर के जन्म कल्याणक महोत्सव की पूर्व संध्या में भगवान महावीर के गर्भकल्याणक का सुंदर दृश्य पंडित वाणी भूषण आशुतोष शास्त्री जी के कुशल संचालन एवं निर्देशन में हुआ। जिसमें भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य अनंत कुमार जैन एवं उनकी धर्मपत्नी ने प्राप्त किया एवं कुबेर महाराज का नाट्य रूपांतरण संजीव कुमार जैन को प्राप्त हुआ। नाटक में बड़े ही सुंदर तरीके से अष्टकुमारियों ने मिलकर के माता को सुंदर-सुंदर श्रृंगार किया एवं माता का स्नान कराया एवं साथ ही साथ माता को 16 सपने देखने को सौभाग्य मिला। जिसका फल महाराज ने अपने सभा में बताया कि आपके उदर में तीर्थंकर बालक का अवतरण हो चुका है। यह सारा नाटक पंडित आशुतोष शास्त्री के निर्देशन में हुआ एवं इस नाटक को श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के तत्वावधान में किया गया। नाटक एवं सभा में पूरा महिला मंडल पुरुष मंडल बालिका मंडल एवं आगरा के गणमान्य लोग उपस्थित थे। आनंद उठाया एवं अंत में माता की गोद भी सभी लोगों ने मिलकर के भरी। जिससे सभी लोगों ने अति उत्साह के साथ भजन संध्या का भी आनंद लिया यह सारा कार्यक्रम संगीतबद्ध तरीके से किया गया।</p>
<p><strong>इस अवसर पर स्वप्नों के फल जाने इन समाजजनों ने </strong></p>
<p>भगवान महावीर के जन्म से पूर्व एक बार महारानी त्रिशला नगर में हो रही अद्भुत रत्नवर्षा के बारे में सोच रही थीं। यह सोचते-सोचते वे ही गहरी नींद में सो गई। उसी रात्रि को अंतिम प्रहर में महारानी ने सोलह शुभ मंगलकारी स्वप्न देखे। वह आषाढ़ शुक्ल षष्ठी का दिन था। रानी त्रिशला ने गर्भस्थिति में यह मंगलकारी शुभ स्वप्न देखें। सुबह जागने पर रानी के महाराज सिद्धार्थ से अपने स्वप्नों की चर्चा की और उसका फल जानने की इच्छा प्रकट की। राजा सिद्धार्थ एक कुशल राजनीतिज्ञ के साथ ही ज्योतिष शास्त्र के भी विद्वान थे। उन्होंने रानी से कहा कि एक-एक कर अपना स्वप्न बताएं। वे उसी प्रकार उसका फल बताते चलेंगे। तब महारानी त्रिशला ने अपने सारे स्वप्न उन्हें एक-एक कर विस्तार से सुनाएं। इस मौके पर अध्यक्ष राजेश बैनाड़ा, मंत्री विजय जैन, अनिल आदर्श जैन, महेश चंद जैन, संजीव जैन, सुशील जैन, दिलीप जैन राकेश जैन पेंट, जितेश जैन, राकेश जैन टीचर, वैभव जैन, मोहित जैन, आलोक जैन, प्रशांत जैन, मनोज जैन, दीपेश जैन मीडिया प्रभारी राहुल जैन और सकल जैन समाज मौजूद थे।</p>
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		<title>नवें तीर्थंकर पुष्पदंतनाथ भगवान का गर्भकल्याणक 22 फरवरी : गर्भकल्याणक तिथि से आता है फाल्गुनी कृष्ण नवमी को </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Feb 2025 10:46:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म की समृद्ध धार्मिक विरासत में नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंतनाथ जी का गर्भ कल्याणक फाल्गुन कृष्ण नवमीं के दिन संपूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 22 फरवरी को आ रही है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा सहित अन्य पूजन विधानादि किए जाएंगे। आइए भगवान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म की समृद्ध धार्मिक विरासत में नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंतनाथ जी का गर्भ कल्याणक फाल्गुन कृष्ण नवमीं के दिन संपूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 22 फरवरी को आ रही है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा सहित अन्य पूजन विधानादि किए जाएंगे। आइए भगवान श्री पुष्पदंतनाथ जी के बारे में श्रीफल जैन न्यूज की अपनी विशेष श्रंखला में पौराणिक जानकारी से अवगत होते हैं। <span style="color: #ff0000">इसमें संयोजन और संकलन उप संपादक प्रीतम लखवाल का है। </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> सुविधिनाथ, जो पुष्पदंतनाथ के नाम से भी जाने जाते हैं। वर्तमान काल के 9वें तीर्थंकर हैं। इनका चिन्ह ‘मगर’ हैं। किसी दिन भूतहित जिनराज की वंदना करके धर्माेपदेश सुनकर विरक्तमना राजा दीक्षित हो गए। ग्यारह अंगरूपी समुद्र का पारगामी होकर सोलह कारण भावनाओं से तीर्थंकर प्रकृति का बंध कर लिया और समाधिमरण के प्रभाव से प्राणांत स्वर्ग का इंद्र हो गए। पंचकल्याणक वैभव-इस जंबूद्वीप के भरत क्षेत्र की काकंदी नगरी में इक्ष्वाकु वंशीय काश्यप गोत्रीय सुग्रीव नाम का क्षत्रिय राजा था, उनकी जयरामा नाम की पट्टरानी थी। उन्होंने फाल्गुन कृष्ण नवमी के दिन ‘प्राणतेंद्र’ को गर्भ में धारण किया और मार्गशीर्ष शुक्ला प्रतिपदा के दिन पुत्र को जन्म दिया। इंद्र ने बालक का नाम ‘पुष्पदंत’ रखा। पुष्पदंतनाथ राज्य करते हुए एक दिन उल्कापात से विरक्ति को प्राप्त हुए। तभी लौकांतिक देवों से स्तुत्य भगवान इंद्र द्वारा लाई गई ‘सूर्यप्रभा’ पालकी में बैठकर मगसिर सुदी प्रतिपदा को दीक्षित हुए। शैलपुर नगर के पुष्पमित्र राजा ने भगवान को प्रथम आहार दान दिया था।</p>
<p><strong>केवल ज्ञान की प्राप्ति</strong></p>
<p>छद्मस्थ अवस्था के चार वर्ष के बाद नाग वृक्ष के नीचे विराजमान भगवान को कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन केवल ज्ञान हुआ। आर्यदेश में विहार कर धर्माेपदेश देते हुए भगवान अंत में सम्मेदशिखर पहुंचकर भाद्रपद शुक्ला अष्टमी के दिन सर्व कर्म से मुक्ति को प्राप्त हो गए।</p>
<p><strong>ऋषभनाथ भगवान की परंपरा को पुनर्स्थापित की</strong></p>
<p>उपलब्ध जानकारी के अनुसार भगवान पुष्पदंत जी की जन्मतिथि विक्रम संवत के मार्गशीर्ष कृष्ण मास की पंचमी तिथि थी। नौवें तीर्थंकर पुष्पदंत भगवान ने ऋषभनाथ भगवान द्वारा शुरू की गई परंपरा में चार-भाग वाले संघ को फिर से स्थापित किया था। पुष्पदंत प्रभु मगरमच्छ प्रतीक, मल्ली वृक्ष, अजिता यक्ष और महाकाली (दिग्गज) और सुतारका (श्वेत) यक्षी से जुड़े हैं।</p>
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		<title>बदनावर वर्द्धमानपुर नगर में भगवान आदिनाथ की कई प्रतिमा नदी किनारे व खेतों से प्राप्त हुई थी :  प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव का गर्भ कल्याणक इस कल्पकाल अथवा कालखंड का प्रथम महोत्सव </title>
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		<pubDate>Sun, 23 Jun 2024 08:55:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अषाढ़ कृष्ण दूज 23 जून रविवार को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का गर्भ कल्याणक जैन धर्मावलंबियों द्वारा सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाएगा। यह इस कल्पकाल अथवा कालखंड का तीर्थंकर सम्बंधित प्रथम महोत्सव था, जिसे देवों द्वारा मनाया गया था। चूंकि यह वर्ष पारस वीर निर्वाण महोत्सव वर्ष भी जिसे पारस वीर सदी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अषाढ़ कृष्ण दूज 23 जून रविवार को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का गर्भ कल्याणक जैन धर्मावलंबियों द्वारा सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाएगा। यह इस कल्पकाल अथवा कालखंड का तीर्थंकर सम्बंधित प्रथम महोत्सव था, जिसे देवों द्वारा मनाया गया था। चूंकि यह वर्ष पारस वीर निर्वाण महोत्सव वर्ष भी जिसे पारस वीर सदी के रूप में मनाया जा रहा है। अतः यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाएगा।<span style="color: #ff0000"> पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बदनावर।</strong> अषाढ़ कृष्ण दूज 23 जून रविवार को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का गर्भ कल्याणक जैन धर्मावलंबियों द्वारा सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाएगा। यह इस कल्पकाल अथवा कालखंड का तीर्थंकर सम्बंधित प्रथम महोत्सव था, जिसे देवों द्वारा मनाया गया था। चूंकि यह वर्ष पारस वीर निर्वाण महोत्सव वर्ष भी जिसे पारस वीर सदी के रूप में मनाया जा रहा है। अतः यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाएगा।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-62478" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM.jpeg" alt="" width="1080" height="1079" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM.jpeg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM-300x300.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM-1024x1024.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM-150x150.jpeg 150w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM-768x767.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM-65x65.jpeg 65w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/WhatsApp-Image-2024-06-23-at-2.08.23-PM-990x989.jpeg 990w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" />विशेष अवसरों से संबंधित</strong></p>
<p>वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि कल्याणक शब्द तीर्थंकर भगवान के जीवन के विशेष अवसरों से संबंधित है। श्रमण संस्कृति के अनुसार हर कालखंड में 24 तीर्थंकर होते हैं। उन सभी के पांच कल्याणक मनाए जाते हैं। जिसमें प्रथम कल्याण गर्भ कल्याण होता है उसके पश्चात जन्म कल्याण तप कल्याण ज्ञान कल्याण और मोक्ष कल्याण। जब कोई महान आत्मा तीर्थंकर प्रकृति का बंध करके गर्भ में आती है तो उस समय देवों द्वारा विशेष उत्सव मनाया जाता है और तीर्थंकर के गर्भ में आने से 6 माह पूर्व और जन्म लेने तक कल 15 मां रत्नों की वृष्टि की जाती है। यह प्रथम उत्सव राजा नाभी राज एवं रानी मरू देवी राज्य अयोध्या नगरी में मनाया गया था। आदिनाथ भगवान इक्ष्वाकु वंश में हुएं उसी वंश में आगे चल कर भगवान राम का जन्म हुआ था। जिसका उल्लेख हमें पुराणों में मिलता है।</p>
<p><strong>समय-समय पर निकलीं जैन प्रतिमाएं</strong></p>
<p>पाटोदी ने बताया कि बदनावर नगर के भूगर्भ से समय-समय जो जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुई उसमें कई प्रतिमाएं भगवान आदिनाथ जी की प्राप्त हुई थी। जो नगर के अलावा भी अन्य नगरों के मंदिर में विराजमान हैं वहीं धार व उज्जैन के संग्रहालय में भी प्रदर्शित हैं। बदनावर नगर में वर्तमान में दिगम्बर श्वेताम्बर दो मंदिर में भगवान आदिनाथ जी की अत्यंत प्राचीन प्रतिमा विराजमान हैं। वही धार नगर के दिगम्बर जैन मंदिर में आदिनाथ भगवान की एक भव्य प्रतिमा विराजमान हैं जो बदनावर नदी किनारे से प्राप्त हुई थी। इसी प्रकार विगत कुछ वर्षों पूर्व बलवंती नदी के गहरी करण के समय आदिनाथ भगवान की एक विशाल खंडित प्रतिमा निकली थी जिसे बाद में उड़िया मंदिर परिसर में पुरातत्व विभाग द्वारा रखा गया था। इसी प्रकार उज्जैन के जयसिंहपुरा जैन संग्रहालय में आदिनाथ दीर्घा में 112 क्रमांक पर प्रदर्शित एक प्रतिमा जिसके प्राप्त स्थान का विवरण उपलब्ध नहीं है सम्भवतः बदनावर से ही प्राप्त हुई थी।</p>
<p><strong>देश में कई जगह है विशाल व प्राचीन जिनबिम्ब</strong></p>
<p>वर्तमान में हम ऋषभदेव आदिनाथ जी की मुर्ति अथवा तीर्थ क्षेत्र के की बात करें तो भगवान ऋषभदेव जी की एक 84 फुट की विशाल प्रतिमा भारत में मध्य प्रदेश राज्य के बड़वानी जिले में बावनगजा नामक स्थान पर अवस्थित है। मांगीतुंगी (महाराष्ट्र ) में भगवान ऋषभदेव की 108 फुट की विशाल प्रतिमा है। ग्वालियर के गोपाचल पर्वत पर उत्कीर्ण हजारों जिनप्रतिमाओं में ऋषभदेव की कई प्रतिमाएं देखी जा सकती है। उदयपुर जिले के एक प्रसिद्ध शहर का नाम भी &#8220;ऋषभदेव&#8221; है जो भगवान ऋषभदेव के नाम पर ऋषभदेव पड़ा। यहां पर भगवान ऋषभदेव का एक विशाल जैन मंदिर विद्यमान है। भगवान आदिनाथ ऋषभदेव की विशाल पद्मासन प्रतिमा मूलनायक के रूप में सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर जिला दमोह में एक विशाल नागौरी शैली में निर्मित लाल पाषाण के मंदिर में विराजमान है। इस प्रतिमा को बड़े बाबा के नाम से जाना जाता है। भारत में अनेकों स्थान पर ऋषभनाथ भगवान के जिनालय विद्यमान हैं। इनमें कुछ अति प्राचीन हैं। बद्रीनाथ में भी ऋषभदेव को शिव रूप में पूजा जाता है। तमिलनाडु कर्नाटक में प्रचुर मात्रा में से पर्वतों पर गुफाओं में जिनप्रतिमाओं का निर्माण हुआ है जो अतिप्राचीन है।<br />
कुछ प्राचीन मंदिरों के नाम भी आदिनाथ के नाम से विख्यात है जैसे आदिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र चांदखेड़ी खानपुर राजस्थान, दिगंबर जैन दर्शनोदय अतिशय क्षेत्र थूबोनजी जिला अशोकनगर मध्य प्रदेश, दिगंबर जैन सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र अमरकंटक आदि प्रमुख हैं। भगवान आदिनाथ का मंदिर खजुराहो का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर पूर्वी मंदिर समूह में स्थित है। इस मंदिर में भगवान आदिनाथ की पत्थर के काले रंग की प्रतिमा देखने के लिए मिलती है, जो बहुत ही खूबसूरत लगती है। देश ही नहीं यहां तक कि विदेश के संग्रहालयों में भी भगवान आदिनाथ की उपस्थिति दर्ज है।</p>
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		<title>भगवान पार्श्वनाथ के गर्भ कल्याणक पर्व पर आयोजन : मासिक णमोकार, सम्मान एवं श्रावकाचार संकल्प-पत्र शुभारम्भ </title>
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		<pubDate>Fri, 26 Apr 2024 10:36:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर चौमूंबाग, सांगानेर में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ के गर्भ कल्याणक पर्व के सुअवसर पर दिगम्बर जैन महासमिति चौमूंबाग इकाई द्वारा आयोजित सामूहिक णमोकार महामंत्र का जाप मुकेश छाबडा एवं कमला अजमेरा के नेतृत्व में किया गया। दीप प्रज्वलन प्रेमचंद बडजात्या, मुकेशकुमार छाबड़ा, नमी गोधा, युगांश, यशवर्धन एवं आर्जव ने किया। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर चौमूंबाग, सांगानेर में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ के गर्भ कल्याणक पर्व के सुअवसर पर दिगम्बर जैन महासमिति चौमूंबाग इकाई द्वारा आयोजित सामूहिक णमोकार महामंत्र का जाप मुकेश छाबडा एवं कमला अजमेरा के नेतृत्व में किया गया। दीप प्रज्वलन प्रेमचंद बडजात्या, मुकेशकुमार छाबड़ा, नमी गोधा, युगांश, यशवर्धन एवं आर्जव ने किया। पढ़िए राजकुमार गोधा की रिपोर्ट&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><strong>  जयपुर।</strong> श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर चौमूंबाग, सांगानेर में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ के गर्भ कल्याणक पर्व के सुअवसर पर दिगम्बर जैन महासमिति चौमूंबाग इकाई द्वारा आयोजित सामूहिक णमोकार महामंत्र का जाप मुकेश छाबडा एवं कमला अजमेरा के नेतृत्व में किया गया। दीप प्रज्वलन प्रेमचंद बडजात्या, मुकेशकुमार छाबड़ा, नमी गोधा, युगांश, यशवर्धन एवं आर्जव ने किया। मंगलाचरण कमला अजमेरा, पुष्पलता बडजात्या, सरोज जैन, सुनीता बडजात्या आदि महिला प्रकोष्ठ द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>श्रावकाचार झांकी के बताए उद्देश्य</strong></p>
<p>सांगानेर संभाग के परामर्शक प्रेमचंद बडजात्या ने भगवान महावीर के 2623वें जन्मकल्याणक पर राजस्थान जैन सभा द्वारा आयोजित भव्य और विशाल जुलूस में दिगम्बर जैन महासमिति अंचल राजस्थान एवं सांगानेर संभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रावकाचार झांकी के उद्देश्य को बताया एवं संबंधित प्रश्न पूछे। सांगानेर संभाग महामंत्री एवं चौमूंबाग इकाई के अध्यक्ष डॉ. अरविन्द कुमार जैन ने झांकी में प्रदर्शित जैन श्रावकाचार का सामान्य परिचय दिया। इस झांकी में शराब, मांस, अंडा, प्याज, लहसुन आदि अभक्ष्य पदार्थों एवं इनसे निर्मित पदार्थों के त्याग का संदेश दिया गया। झांकी में जैनों के तीन लक्षण दिखाये गये- प्रतिदिन देव दर्शन करना, पानी छानकर पीना और रात्रि भोजन का त्याग। साथ ही श्रावक के षट् आवश्यकों को भी प्रकशित किया गया, जिसमें देव पूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप और दान शामिल हैं।</p>
<p><strong>बच्चों को किया पुरस्कृत</strong></p>
<p>उन्होंने बताया कि दिगम्बर जैन महासमिति राजस्थान अंचल द्वारा इस वर्ष श्रावकाचार वर्ष-2024 घोषित किया गया, जिसका उद्देश्य समाज एवं जनसाधारण में जैन आचार के प्रति जागृति लाई जा सके। इसके तहत महासमिति द्वारा प्रथम बार झांकी निकाली गई। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु श्रावकाचार संकल्प-पत्र निकाले गये जिसका शुभारंभ किया गया। अंचल राजस्थान के मुख्य संयोजक कैलाशचन्द मलैया सांगानेर संभाग के अध्यक्ष हैं। सबसे पहले झांकी में भाग लेने वाले बच्चों को अंचल द्वारा पुरुस्कृत किया गया जिसमें युगांश, नमी, यशवर्धन एवं आर्जव जैन को अशोक जैन बाकलीवाल, बाबूलाल लुहाड़िया, महावीर वैद ने गिफ्ट प्रदान कर सम्मानित किया। इसी प्रकार से झांकी में जिनेन्द्र भक्ति नृत्य के माध्यम से विशेष योगदान देने पर लक्ष्मी काला को पुष्पलता बडजात्या एवं कमला अजमेरा ने गिफ्ट देकर सम्मानित किया।</p>
<p><strong>बच्चों ने भरे संकल्प पत्र</strong></p>
<p>झांकी की उपयोगिता एवं बच्चों- महिलाओं के उत्साह को देखकर मन्दिर में संचालित संस्कार पाठशाला के मुख्य समन्वयक प्रेमचंद बडजात्या ने अगली बार वर्ष 2025 में पाठशाला की ओर से झांकी निकालने का सुझाव दिया। श्रावकाचार संकल्प-पत्र सबसे पहले इन्हीं चार बच्चों ने भरे। पहला संकल्प-पत्र युगांश जैन ने भरा। कुल 10 संकल्प पत्र भरकर इस योजना का शुभारंभ प्रेमचंद बडजात्या, कमला अजमेरा एवं इकाई मंत्री राजकुमार गोधा एवं मुकेशकुमार छाबड़ा के हाथों वितरित कर किया गया। चौमूंबाग इकाई में संकल्प प्रभारी आशीष पाटनी, बाबूलाल लुहाड़िया, रेखा पाटनी एवं कमला अजमेरा को बनाया गया। मुख्य समन्वयक प्रेमचंद बडजात्या रहेंगे। इकाई का प्रारंभिक लक्ष्य 125 संकल्प भरवाना है। कार्यकारिणी के सभी सदस्यों को 10-10 संकल्प-पत्र भरवाने का टारगेट दिया गया जो 15 मई तक पूरा करना है। सभी उपस्थित महानुभावों एवं बच्चों का आभार इकाई मंत्री राजकुमार गोधा ने किया। अंत में शान्ति पाठ कर, समापन किया गया।</p>
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		<title>सुमतिधाम का करवाया है निर्माण सुश्रेष्ठ श्रावक दंपती मनीष- सपना गोधा </title>
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		<pubDate>Sun, 10 Mar 2024 08:23:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ मनीष &#8211; सपना गोधा ने बिना किसी से अर्थ सहयोग लिए सिर्फ और सिर्फ अपने स्व-अर्जित धन से गोधा स्टेट गांधीनगर में एक लघु तीर्थ स्वरूप अद्भुत, सुदर्शनीय एवं अतुलनीय एवं भव्याति भव्य जिन प्रासाद(जिनालय) सुमतिधाम का निर्माण और श्रमण संस्कृति के सर्व श्रेष्ठ चर्या एवं आगम शिरोमणी के रूप में प्रख्यात आचार्य श्री विशुद्ध [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> मनीष &#8211; सपना गोधा ने बिना किसी से अर्थ सहयोग लिए सिर्फ और सिर्फ अपने स्व-अर्जित धन से गोधा स्टेट गांधीनगर में एक लघु तीर्थ स्वरूप अद्भुत, सुदर्शनीय एवं अतुलनीय एवं भव्याति भव्य जिन प्रासाद(जिनालय) सुमतिधाम का निर्माण और श्रमण संस्कृति के सर्व श्रेष्ठ चर्या एवं आगम शिरोमणी के रूप में प्रख्यात आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में उसका ऐतिहासिक, आधुनिक एवं सुव्यवस्थित देश का सबसे बड़ा पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव करवारकर देश एवं समाज के समक्ष ऐसा आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए डॉ. जैनेंद्र जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> आज जबकि विविध धार्मिक अनुष्ठान, अभिषेक शांतिधारा, जिनालय निर्माण और पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव जैसे धार्मिक कार्यक्रमों का व्यवसायीकरण होकर धन संग्रह का माध्यम बन गए हों, तब नगर के एक सु -श्रेष्ठ श्रावक दंपत्ति मनीष &#8211; सपना गोधा ने बिना किसी से अर्थ सहयोग लिए सिर्फ और सिर्फ अपने स्व-अर्जित धन से गोधा स्टेट गांधीनगर में एक लघु तीर्थ स्वरूप अद्भुत, सुदर्शनीय एवं अतुलनीय एवं भव्याति भव्य जिन प्रासाद(जिनालय) सुमतिधाम का निर्माण और श्रमण संस्कृति के सर्व श्रेष्ठ चर्या एवं आगम शिरोमणी के रूप में प्रख्यात आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में उसका ऐतिहासिक, आधुनिक एवं सुव्यवस्थित देश का सबसे बड़ा पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव करवारकर देश एवं समाज के समक्ष एक ऐसा आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है जो अद्भुत, अकल्पनीय और दुर्लभतम (रेयर ऑफ रेयरेस्ट) है। इसकी की चर्चा और सराहना देश भर में हो रही है।</p>
<p>पुण्यशाली सौभाग्यशाली मनीष- सपना गोधा ने अपने हृदय की विशालता, उदारता और सरलता का जो देश एवं समाज के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत किया है, उसने उन्हें एक निर्भिमानी महादानी , किंवदंती पुण्य पुरुष के रूप में चर्चित कर दिया है। संप्रति सुमतिधाम के रूप में इंदौर को एक ऐसा जिन प्रासाद मिला है जो युगों युगों तक न केवल नगर के गौरव पीठ के रूप में जैन धर्म की धर्म ध्वजा फहराता रहेगा एवं जिन शासन और नमोस्तु शासन को भी प्राणवंत जयवंत करता रहेगा और सपना मनीष गोधा की उदारता के गीत गाता रहेगा। देश का संपूर्ण दिगंबर जैन समाज गोधा दंपति के इस महनीय कार्य के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दे रहा है और सुमतिधाम की वेदी में विराजित भगवान सुमतिनाथ से भावना भा रहा है कि हे प्रभु! मनीष-सपना गोधा पर आपकी करुणा और आपके आशीर्वाद की वृष्टि सदैव होती रहे और वे याज्जीवन धर्म ,समाज एवं संतों के प्रति समर्पित रहते हुए स्वस्थ, व्यस्त और मस्त रहें, खुश रहें, खुशहाल रहें और रहें मालामाल।</p>
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