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	<title>गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में चिंतन बैठक संपन्न : भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी ने लिए कई निर्णय  </title>
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		<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:31:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शाश्वत तीर्थ अयोध्या में भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगंबर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज में 10 मई को भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की चिंतन बैठक गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के ससंघ सान्निध्य में हुई। शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष को अत्यन्त प्रभावशाली प्रभावनापूर्वक किए जाने के संदर्भ में सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में यह मीटिंग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगंबर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज में 10 मई को भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की चिंतन बैठक गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के ससंघ सान्निध्य में हुई। शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष को अत्यन्त प्रभावशाली प्रभावनापूर्वक किए जाने के संदर्भ में सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में यह मीटिंग की गई। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> शाश्वत तीर्थ अयोध्या में भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगंबर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज में 10 मई को भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की चिंतन बैठक गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के ससंघ सान्निध्य में हुई। शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष को अत्यन्त प्रभावशाली प्रभावनापूर्वक किए जाने के संदर्भ में सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में यह मीटिंग की गई। बैठक का शुभारंभ प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार जैन मंत्री उत्तरप्रदेश-उत्तरांचल तीर्थक्षेत्र कमेटी के मंगलाचरण से शुभारंभ हुआ एवं कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलन उपस्थित वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा किया गया। जिसमें मुख्यरूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन, महामंत्री संतोष पेंढ़ारी, कोषाध्यक्ष अशोक दोशी एवं समस्त आंचलीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों ने किया। जम्बू प्रसाद ने एक सशक्त योजना के द्वारा तीर्थक्षेत्र कमेटी के इस 125 वर्षीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। जिसमें उन्होंने बहुआयामी विविध आयोजनों द्वारा कार्यक्रम को मनाने की एक योजना प्रस्तुत की। जवाहरलाल जैन (चेयरमैन-शतकोत्तर रजत जयंती वर्ष समिति) द्वारा अनेक योजनाएं इस कार्यक्रम को चार-चांद लगा सकती हैं, प्रस्तुत की गई। तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय मंत्री हंसमुख गांधी ने एक विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत की। जिसमें प्रांतीय एवं क्षेत्रीय राष्ट्रीय सभी पदाधिकारी जुड़कर किस प्रकार से इस होने वाले आयोजन को संपन्न कर सकते हैं। उसकी संरचना प्रस्तुत की गई। इसी क्रम में मध्यप्रदेश अंचल के अध्यक्ष डी.के. जैन ने अपने विचार रखे कि हम लोग मध्यप्रदेश में किस प्रकार से इस शतकोत्तर वर्ष के कार्यक्रम कर सकते हैं। डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने तीर्थ चक्रवर्ती बनने की योजना से सभी को अवगत कराया। इस वर्ष के अन्तर्गत तीर्थ चक्रवर्ती बनाए जा रहे हैं, जिसकी राशि 1लाख रुपए रखी गई हैं। इस योजना के माध्यम से हम हर किसी को तीर्थक्षेत्र कमेटी से जोड़ने का उपक्रम चला रहे हैं।</p>
<p><strong>समायोजन की पूरी संरचना प्रस्तुत की</strong></p>
<p>इसी क्रम में शतकोत्तर रजत जयंती वर्ष के चेयरमैन स्थापना वर्ष समिति के प्रदीप जैन, पीएनसी-आगरा ने अपने महत्वपूर्ण वक्तव्य द्वारा होने वाले इस कार्यक्रम में हम किस प्रकार से अपनी सहभागिता कर सकते हैं। इस बात को रखा एवं समायोजन की पूरी संरचना प्रस्तुत की। किस व्यक्ति की क्या भूमिका होनी चाहिए। इस 125 वर्षीय कार्यक्रम के लिए अपने ओजस्वी वक्तव्य के द्वारा सभी को एक प्रेरणामयी वक्तव्य प्रदान किया। महामंत्री संतोष पेंढ़ारी ने कार्यक्रम को प्रभावशाली बनाने के लिए अनेक बिन्दुओं पर प्रकाश डाला कि हम किस प्रकार से अपने स्तर से शतकोत्तर वर्ष के लिए कार्य कर सकते हैं। इसी क्रम में टिकैतनगर महिला मंडल द्वारा एक सुंदर भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया गया। उत्तरप्रदेश के संयोजक श्री आदिश जैन सर्राफ ने भी अपनी बात को रखा एवं संजीव जैन, जैन प्लास्टिक-लखनऊ ने भी तीर्थक्षेत्र कमेटी के इस कार्य का सम्मान किया और सभी से जुड़ने का आह्वान किया।</p>
<p><strong>मुख्यरूप से तीन परिषद का गठन होना चाहिए</strong></p>
<p>गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने कहा कि प्रत्येक कमेटी में मुख्यरूप से तीन परिषद का गठन होना चाहिए। अंतरंग परिषद, बाह्य परिषद एवं सामाजिक परिषद। इस प्रकार से हम अपने कार्यक्रमों का समायोजन करें एवं समाज को जोड़ने का उपक्रम सदैव करें। अपने तीर्थों की सुरक्षा एवं उनका संवर्धन, विकास अवश्य करें। प्राचीन तीर्थों को गति प्रदान करें, उनके विकास के लिए अवश्य योजनाएँ बनाएं एवं तीर्थक्षेत्र कमेटी के इस 125 वर्षीय कार्यक्रम में हमारा मंगल आशीर्वाद है। इसी क्रम में आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने कार्यकर्ताओं को अपना मंगल उद्बोधन प्रदान किया। अयोध्या तीर्थक्षेत्र के यशस्वी पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने कहा कि यह कार्यक्रम ऐसा होना चाहिए कि जिसको सदैव आने वाली पीढ़ियाँ याद रखें। सन् 1989 के अंदर एक कार्यक्रम तीर्थक्षेत्र कमेटी के अधिवेशन का लालकिला-दिल्ली मैदान में किया गया था। जिसमें लगभग 1 लाख लोग सम्मिलित हुए थे, ऐसा ही प्रभावशाली कार्यक्रम होना चाहिए, जिससे तीर्थों के प्रति लोगों की सम्बद्धता बढ़े, जिससे जन-जन को जोड़ा का सके एवं तीर्थों की सशक्त भूमिका बताई जा सके। इस कार्यक्रम उद्घाटन 22 एवं 23अक्टूबर 2026 को मथुरा चौरासी में किया जाना है। उसके पश्चात् 1वर्ष तक सारे देश में एवं प्रदेश में अनेक आयोजनों के द्वारा संपन्न होना है। अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के मंत्री विजयकुमार जैन के अनुसार विनोद बाकलीवाल ने आभार माना।</p>
<p><strong>इन सभी यह उपस्थित रहे</strong></p>
<p>सभी प्रांतों के वरिष्ठ पदाधिकारीगण इस बैठक में सम्मिलित हुए। मुख्य रूप से संजय जैन पापड़ीवाल, प्रद्युम्न जैन, सुुनील जैन सर्राफ, मनोज जैन, राकेश जैन, मनोज कुमार जैन-आगरा, सुनयना जैन, मीनू जैन, रमाकांत जैन, वीरेश जैन सेठ, जयकुमार जैन, राजकुमार जैन कोठारी, संजय जैन ठोलिया, अनिल जैन, प्रीतविहार-दिल्ली, प्रशांत जैन, हेमचंद जैन, संतोष घड़ी, अमरचंद जैन, विनोद जैन बिहारी, संदेश जैन, डॉ. अनुपम जैन, संजीव जैन सराफ, वैहृलाशचंद जैन सर्राफ, शुभचंद जैन, कमल जैन पलवल, रितेश जैन, परमेन्द्र जैन, पारस जैन, निधेश जैन आदि गणमान्य महानुभाव उपस्थित रहे.।</p>
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		<title>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में मनाया गया अक्षय तृतीया महोत्सव : गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने बताया यह आहारदान का पर्व है </title>
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		<pubDate>Mon, 20 Apr 2026 06:07:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री भगवान ऋषभदेव बड़ी मूर्ति दिगंबर जैन मंदिर रायगंज में अक्षय तृतीया का पावन पर्व हर्षाेल्लास से मनाया गया। गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में मुनि श्री सोमदत्त सागर जी महाराज की उपस्थिति में प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन आहारचर्या के लिए भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा को लेकर के निकले। अयोध्या से पढ़िए, उदयभान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री भगवान ऋषभदेव बड़ी मूर्ति दिगंबर जैन मंदिर रायगंज में अक्षय तृतीया का पावन पर्व हर्षाेल्लास से मनाया गया। गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में मुनि श्री सोमदत्त सागर जी महाराज की उपस्थिति में प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन आहारचर्या के लिए भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा को लेकर के निकले। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, उदयभान जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> श्री भगवान ऋषभदेव बड़ी मूर्ति दिगंबर जैन मंदिर रायगंज में अक्षय तृतीया का पावन पर्व हर्षाेल्लास से मनाया गया। गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में मुनि श्री सोमदत्त सागर जी महाराज की उपस्थिति में प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन आहारचर्या के लिए भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा को लेकर के निकले। जैन शास्त्रों के अनुसार भगवान ऋषभदेव के काल में लोगों को जैन साधुओं को आहार देने का ज्ञान नहीं था। आहार कराने की विधि का ज्ञान किसी को भी नहीं था। भगवान को 1 वर्ष 39 दिन तक आहार नहीं प्राप्त हुआ। भगवान हस्तिनापुर नगरी में पहुँचे। हस्तिनापुर नगरी के राजा श्रेयांश को भगवान ऋषभदेव को देखते ही पूर्वभव का जातिय स्मरण हो गया। जाति स्मरण होते ही भगवान को नवद्या भक्ति पूर्वक पड़गाहन करके इछुरस (गन्ने का रस) का आहार दिया। जिससे उस पात्र में रस अक्षय हो गया एवं संपूर्ण नगर में गन्ने का रस का वितरण किया गया। उस इलाके में आज तक गन्ने की सर्वाधिक खेती है। इस अवसर पर गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने बताया कि यह आहारदान का पर्व है। संपूर्ण प्राणी मात्र के लिए ये मंगलकारी है। इस दिन किया गया कार्य अक्षय निधि को प्राप्त होता है। वर्तमान में लोग चांदी सोने के सिक्के एवं वस्तुओं को खरीदकर अक्षय तृतीय पर्व मनाते हैं। प्राचीन परंपरा अनुसार जहां पर जैन साधु विराजमान होते हैं। उन्हें श्रावकजन नवद्याभक्तिपूर्वक पड़गाहन करके इछुरस का आहार देते हैं।</p>
<p><strong>इन्होंने अर्जित किया सौभाग्य </strong></p>
<p>अयोध्या तीर्थ पर राजा श्रेयांस के रूप में सुभाषचंद जैन सर्राफ इंद्रानगर लखनऊ ने भगवान का पड़गाहन करके प्रथम आहारदान देने का सौभाग्य प्राप्त किया। कैलाशचंद जैन सर्राफ चौक लखनऊ, पुखराज पांड्या गोरखपुर, अंजय जैन बाराबंकी, डॉ. राधा जैन, दिनेश जैन लखनऊ, अरिंजय जैन दरियाबाद, डॉ. जीवन प्रकाश जैन आदि भक्तों ने भगवान को आहारदान दिया। आहारदान के बाद पंचाश्चर्य की वृष्टि की गई। जिसमें मुख्य रूप से रत्नवृष्टि, पुष्पवृष्टि, गंधोदक वृष्टि, देवदुंदभी जयजयकार आदि की गई। संपूर्ण कार्यक्रम पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीद्रकीर्ति स्वामी जी के निर्देशन में एवं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माताजी के मार्गदर्शन में किए गए। उपस्थित सभी भक्तजनों को गन्ने के रस का प्रसाद वितरण किया गया।</p>
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		<title>गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में आयोजन: भगवान ऋषभदेव जन्मजयंती हर्षोल्लासपूर्वक सम्पन्न </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 08:38:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान ऋषभदेव की जन्मजयंती हर्षोल्लासपूर्वक एवं प्रभावना के साथ सम्पन्न की गई। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में यह भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। अयोध्या स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज में प्रातःकाल ऐरावत हाथी पर सौधर्म इन्द्र के रूप में अध्यात्म जैन, अर्पिता जैन एवं सम्यक जैन (लखनऊ) द्वारा भगवान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान ऋषभदेव की जन्मजयंती हर्षोल्लासपूर्वक एवं प्रभावना के साथ सम्पन्न की गई। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में यह भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। अयोध्या स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज में प्रातःकाल ऐरावत हाथी पर सौधर्म इन्द्र के रूप में अध्यात्म जैन, अर्पिता जैन एवं सम्यक जैन (लखनऊ) द्वारा भगवान के जन्मकल्याणक को पाण्डुक शिला पर अभिषेक कर मनाया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक अशोक पाटील की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> भगवान ऋषभदेव की जन्मजयंती हर्षोल्लासपूर्वक एवं प्रभावना के साथ सम्पन्न की गई। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में यह भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। अयोध्या स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज में प्रातःकाल ऐरावत हाथी पर सौधर्म इन्द्र के रूप में अध्यात्म जैन, अर्पिता जैन एवं सम्यक जैन (लखनऊ) द्वारा भगवान के जन्मकल्याणक को पाण्डुक शिला पर अभिषेक कर मनाया गया। परम पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ के सानिध्य एवं आचार्य श्री भद्रबाहू सागर जी महाराज ससंघ के मार्गदर्शन में भगवान ऋषभदेव एवं चक्रवर्ती भरत स्वामी की जन्मजयंती का कार्यक्रम अत्यंत भावनापूर्वक सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>हुआ भव्य विधान</strong></p>
<p>कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातःकाल रायगंज मंदिर स्थित पाण्डुक शिला पर भगवान का पंचामृत अभिषेक एवं भगवान ऋषभदेव विधान सम्पन्न किया गया। इसके पश्चात विशाल रथयात्रा अयोध्या तीर्थ के मुख्य मार्गों से होती हुई भगवान ऋषभदेव की जन्मस्थान टोंक पर पहुँची, जहाँ भगवान का पंचामृत अभिषेक सम्पन्न हुआ। जन्मस्थान पर स्थित भगवान के प्राचीन चरणों का भी अभिषेक किया गया।</p>
<p><strong>निकाली गई रथयात्रा</strong></p>
<p>रथयात्रा में ऐरावत हाथी, अवध प्रांत के विभिन्न जैन मंदिरों से विराजमान भगवंतों की झांकियाँ, रथ-बग्गियाँ, साधुगण, मंगल कलश लिए महिलाएँ एवं पुरुष वर्ग पूजन वेशभूषा में बैंड-बाजों के साथ भगवान के अहिंसामयी सिद्धांतों का शंखनाद करते हुए सम्मिलित हुए। रथयात्रा में भगवान को लेकर बैठने का सौभाग्य श्री सुभाषचंद सुयश जैन (लखनऊ, टिकेटनगर) को प्राप्त हुआ, जबकि सारथी के रूप में श्री विनोद कुमार शकुंतला जैन (उत्तमनगर, दिल्ली) रहे। भगवान भरत को लेकर परमेन्द्र जैन परिवार (टिकेटनगर) ने सहभागिता की। धनकुबेर सिद्धार्थ जैन एवं दीप्ति जैन (लखनऊ) भी रथयात्रा में सम्मिलित हुए।</p>
<p>रथयात्रा रामपथ होते हुए तुलसी उद्यान, स्वर्गद्वार स्थित जन्मस्थान टोंक पहुँची। मार्ग में भगवान के जन्मकल्याणक के उपलक्ष्य में नगरवासियों को लड्डू-मिष्ठान का वितरण किया गया तथा पूजन-अभिषेक सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>इन्हें मिला सौभाग्य</strong></p>
<p>मध्याह्न में रायगंज दिगम्बर जैन मंदिर में भगवान ऋषभदेव की 31 फुट ऊँची विशाल प्रतिमा का परम्परागत मस्तकाभिषेक अनेक द्रव्यों से किया गया। सर्वप्रथम कलश करने का सौभाग्य सुभाषचंद शुभम जैन (फैजाबाद) को प्राप्त हुआ। द्वितीय कलश डॉ. राधा जैन एवं दिनेश जैन (लखनऊ), तृतीय कलश श्री राजकुमार जैन (पटना) द्वारा सम्पन्न किया गया।</p>
<p><strong> इसके अतिरिक्त विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक इस प्रकार सम्पन्न हुआ&#8230;</strong></p>
<p>नारियल जल से नितीश कुमार चौक (लखनऊ), इक्षुरस से श्री पुखराज पाण्डया (गोरखपुर), घी से अभिषेक श्री चन्द्रशेखर कासलीवाल, दूध से अभिषेक श्री नितीश जैन (लखनऊ), दही से अभिषेक प्रदीप कुमार एवं अभिषेक जैन (बहराइच), सर्वोषधि से अभिषेक संजय जैन एवं निधेश जैन (टिकेटनगर), हरिद्रा से अभिषेक अनुज जैन एवं अरिहंत जैन (फैजाबाद), लाल चंदन से अभिषेक भरत जैन एवं वर्धमान जैन (टिकेटनगर), चतुष्कोण कलश से अभिषेक अनुज, सोमिल, नीशू एवं रोमा जैन (लखनऊ), विजय कुमार एवं रश्मि जैन (लखनऊ)। मंगल आरती अनिल शरत बाकलीवाल द्वारा सम्पन्न की गई। केसर से अभिषेक योगेश जैन एवं जितेन्द्र जैन (लल्ला भैया, फतेहपुर महमूदाबाद) द्वारा किया गया। पूर्णकलश का सौभाग्य सुरेशचंद जैन (खंडवा) को प्राप्त हुआ। अंत में शांतिधारा जितेन्द्र जैन एवं वैशाली जैन (लल्ला भैया, फतेहपुर) द्वारा सम्पन्न की गई। इसी क्रम में भगवान भरत स्वामी की 31 फुट ऊँची प्रतिमा का सम्पूर्ण पंचामृत अभिषेक नितीश जैन एवं शालिनी जैन (लखनऊ) द्वारा किया गया। सायंकाल 1008 दीपकों द्वारा आरती सम्पन्न की गई तथा भगवान का पालना झुलाने का सौभाग्य अवध प्रांत से आए सभी भक्तों को प्राप्त हुआ। सम्पूर्ण कार्यक्रम प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती के मार्गदर्शन में तथा पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी के कुशल नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>ये भी रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्री अमरचंद जैन, विजय कुमार जैन, डॉ. जीवन प्रकाश जैन, तेजकुमार जैन, अंकुर जैन (बाराबंकी), टिकेटनगर से अतुल जैन, राजन जैन, निधेश जैन, पारस जैन सहित अवध प्रांत, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, लखनऊ, कानपुर आदि स्थानों से आए अनेक भक्तगण उपस्थित रहे।</p>
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		<title>50वें स्वर्ण जयंती स्थापना दिवस पर भव्य समारोह संपन्न: अयोध्या में अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद का हुआ आयोजन  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 14:37:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद का 50वाँ स्वर्ण जयंती स्थापना दिवस दिव्यशक्ति गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के पावन सान्निध्य में 1 जनवरी को शाश्वत तीर्थ में मनाया गया। इस अवसर पर जहाँ पूज्य माताजी द्वारा देश के युवाओं के नाम संदेश एवं मंगल आशीर्वाद प्रदान किया गया। अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230; अयोध्या। अखिल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद का 50वाँ स्वर्ण जयंती स्थापना दिवस दिव्यशक्ति गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के पावन सान्निध्य में 1 जनवरी को शाश्वत तीर्थ में मनाया गया। इस अवसर पर जहाँ पूज्य माताजी द्वारा देश के युवाओं के नाम संदेश एवं मंगल आशीर्वाद प्रदान किया गया। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span><del></p>
<hr />
<p></del></strong></p>
<p><strong>अयोध्या।</strong> अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद का 50वाँ स्वर्ण जयंती स्थापना दिवस दिव्यशक्ति भारतगौरव गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के पावन सान्निध्य में 1 जनवरी को शाश्वत तीर्थ में मनाया गया। इस अवसर पर जहाँ पूज्य माताजी द्वारा देश के युवाओं के नाम संदेश एवं मंगल आशीर्वाद प्रदान किया गया। वहीं युवा परिषद की मार्गदर्शिका आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने 1 जनवरी 2026 से 1 जनवरी 2027 तक ‘‘युवा परिषद स्वर्ण जयंती वर्ष” की घोषणा करके समस्त युवा परिषद को 1 साल इसे विशिष्ट आयोजनों के साथ मनाने की प्रेरणा प्रदान की।</p>
<p><strong>’राष्ट्रीय स्तर पर दीपप्रज्ज्वलन एवं महामस्तकाभिषेक</strong></p>
<p>अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन जयपुर ने अवगत कराया कि समारोह में अयोध्या में विराजमान 31 फुट उत्तुंग भगवान ऋषभदेव प्रतिमा का 1 जनवरी को भव्य दिव्य पंचामृत महामस्तकाभिषेक 50 किलो दूध के साथ अनेक प्रकार की सर्वाेषधियों से संपन्न किया गया एवं शांतिधारा की गयी। जिसका सौभाग्य विशेषरूप से कमल कासलीवाल मुम्बई ने प्राप्त किया। पुनरू इस अवसर पर सामूहिक ऑनलाइन दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से देश की विभिन्न युवा परिषद शाखाओं के पदाधिकारियों और सदस्यों ने भगवान ऋषभदेव जूम चौनल से जुड़कर अपने-अपने स्थानीय जिनमंदिरों, कार्यालय अथवा विभिन्न स्थानों पर एकत्रित होकर दीप प्रज्वलन भी किया।</p>
<p>राष्ट्रीय स्तर पर अयोध्या में माताजी के समक्ष यह दीप प्रज्वलन युवा परिषद के परामर्श प्रमुख कर्मयोगी पीठाधीश स्वस्तिश्री रवींद्रकीर्ति स्वामीजी की गरिमामयी उपस्थिति में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवन प्रकाश जैन के साथ केन्द्रीय संगठन मंत्री निधेश जैन-टिकैतनगर तथा मुम्बई शाखा से विशेष उपस्थित गौरव अध्यक्ष कमल कुमार कासलीवाल, लखनऊ शाखा अध्यक्ष शुभचंद्र जैन सर्राफ, बाराबंकी शाखा महामंत्री तेज कुमार जैन, महमूदाबाद शाखा से योगेश जैन ’पुच्चू’, टिकैतनगर शाखा से प्रिंस जैन, प्रांकुल जैन, प्रांजल जैन, संघ के संघपति श्री अनिल कुमार जैन, प्रीतविहार-दिल्ली तथा लखनऊ से विशिष्ट युवा साथी अध्यात्म-अर्पिता जैन सर्राफ व दिनेश-राधा जैन आदि महानुभावों द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>ऑनलाइन दीप प्रज्वलन में यह रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस अवसर पर ऑनलाइन दीप प्रज्जवलन करने हेतु केन्द्रीय संरक्षक मदन जैन-दिल्ली, विकास जैन-वैशाली, नितिन भाई शाह-न्यूजर्सी (अमेरिका), राष्ट्रीय मुख्य संयोजक विजय कुमार जैन-जम्बूद्वीप, राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन-जयपुर, उपाध्यक्ष पवन जैन-घुवारा व कमलेश भाई शाह-नार्थ कैरोलिना (अमेरिका), उत्तरप्रदेश अध्यक्ष आदीश जैन सर्राफ-लखनऊ, महामंत्री रितेश जैन-लखनऊ, राजस्थान महामंत्री विमल बज-जयपुर, बुन्देलखण्ड अध्यक्ष अंकित जैन-हीरापुर, खण्डवा जिलाध्यक्ष जितेन्द्र-सपना जैन, तेलंगाना महामंत्री गौरव जैन-हैदराबाद, कोल्हापुर कार्याध्यक्ष अभिषेक जैन पाटिल, निमाड़ प्रान्तीय अध्यक्ष एडवोकेट अंजना जैन-बड़वानी, अकोला संयोजक प्रवीण-सारिका बिलाला, जयपुर हेरिटेज शाखा मंत्री नरेश छाबड़ा, तथा प्रीति पाटनी-संभाजीनगर आदि विभिन्न सामाजिक श्रावक-श्राविकाएं भी दीप प्रज्ज्वलन में उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>आशीर्वचन दिए गए</strong></p>
<p>इस अवसर पर पूज्य माताजी ने अपना संदेश देते हुए सभी युवा साथियों को अपनी शक्ति का सदुपयोग समाज और धर्म के विकास में करने की प्रेरणा दी और युवा परिषद के माध्यम से अपने कार्यकलापों को जन-जन तक पहुँचाने का संदेश भी दिया।</p>
<p><strong>आगामी 5 अप्रैल को अयोध्या में भव्य राष्ट्रीय अधिवेशन</strong></p>
<p>इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने अपने उद्बोधन में युवा परिषद की समस्त शाखाओं को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने कार्यकलापों की प्रभावना करने का लक्ष्य रखने की प्रेरणा प्रदान की। आपने स्वर्ण जयंती वर्ष के अन्तर्गत सभी शाखाओं को स्थाई और अस्थाई योजनाओं के माध्यम से स्वर्ण जयंती को चिरस्थाई बनाने का भी आह्वान किया। इसके साथ ही आगामी दिनाँक 5 अप्रैल 2026, रविवार को शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 71वें आर्यिका दीक्षा दिवस एवं युवा परिषद के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय अधिवेशन एवं अवार्ड समर्पण समारोह आदि आयोजन की भी घोषणा की।</p>
<p><strong>इन्होंने विचार रखे</strong></p>
<p>इसी के साथ अध्यक्ष महोदय द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर युवा परिषद के 50 वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन 11 जनवरी को प्रातः 6 से 8 बजे तक भगवान ऋषभदेव ज़ूम चैनल के माध्यम से पारस टीवी चैनल पर सीधा प्रसारण करके ऑनलाइन मनाने की भी घोषणा की गई। समारोह में राष्ट्रीय महामंत्री श्री उदयभान जैन ने भी समस्त शाखा के पदाधिकारियों को बढ़-चढ़कर स्वर्ण जयंती के अवसर पर अपने अपने क्षेत्रों में धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर स्वर्ण जयंती वर्ष मनाने हेतु प्रेरित किया। साथ ही कमल कासलीवाल-मुम्बई, शुभचंद्र जैन सर्राफ-लखनऊ, संजयराजा-मुम्बई, निधेश जैन-टिकैतनगर, श्रेयांस जैन-नागपुर आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।</p>
<p><strong>स्वर्णिम स्थापना दिवस पर अनेक शाखाओं ने किए विविध आयोजन</strong></p>
<p>युवा परिषद के 50वें स्वर्ण जयंती स्थापना दिवस पर अनेक शाखाओं ने स्थानीय स्तर पर विविध आयोजन करके इसे मनाया। दिल्ली प्रदेश शाखा द्वारा आवश्यकमंदों को ठंड में गर्म कपड़ों का वितरण, टिकैतनगर शाखा द्वारा 750 भक्तों को सम्मेदशिखरजी तीर्थ यात्रा, इंदौर शाखा द्वारा 550 भक्तों को सम्मेदशिखरजी तीर्थ यात्रा, तथा इसी प्रकार कामां, कोटा, बुन्देलखंड, हेरिटेज-जयपुर, ऋषभदेव-केशरियाजी, हटा जी आदि विभिन्न स्थानों पर भी स्वर्ण जयंती मनायी गई।</p>
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		<title>आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के जन्म दिवस पर रत्नत्रय महोत्सव जारी: आरा बिहार, टिकैत नगर और बहराइच के भक्त परिवार ने मनाया उत्सव  </title>
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		<pubDate>Tue, 19 Aug 2025 15:24:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव में 40 वें दिवस मंगलवार को दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। आरा बिहार, टिकैत नगर और बहराइच के भक्त परिवार ने अपने घर में यह उत्सव मनाया। आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का रत्नत्रय महोत्सव जगह-जगह मनाया जा रहा है। अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव में 40 वें दिवस मंगलवार को दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। आरा बिहार, टिकैत नगर और बहराइच के भक्त परिवार ने अपने घर में यह उत्सव मनाया। आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का रत्नत्रय महोत्सव जगह-जगह मनाया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव में 40 वें दिवस मंगलवार को दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। आरा बिहार, टिकैत नगर और बहराइच के भक्त परिवार ने अपने घर में यह उत्सव मनाया। आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का रत्नत्रय महोत्सव जगह-जगह मनाया जा रहा है। मंगलवार को रत्नत्रय महोत्सव सरोज देवी जैन, विनीता दीपक प्रकाश जैन, शालिनी धीरज प्रकाश जैन, अनुष्का दिव्यांशु जैन, सेजल, प्रियंका, सम्यक जैन, आरा बिहार, योगेश, विनीत जैन, आदित्य जैन टिकैतनगर, यशोमती जैन, आलोक, मंजू जैन, अरिहंत, खुशबू, संभव जैन, बहराइच में मनाया गया।</p>
<p>इन्होंने अपने घरों में ज्ञानमती माताजी की तस्वीर रखकर उसके सामने सजावट करके अष्टद्रव्य से आचार्य शांतिसागर जी महाराज और आर्यिका ज्ञानमती माताजी का पूजन किया और सभी ने मिलकर भक्ति भाव से आरती की गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी और प्रज्ञाश्रमणी चंदनामती माताजी ने सभी भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
<p><strong>अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन </strong></p>
<p>अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने बताया कि गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं और उनकी संघस्थ सुरभि दीदी ने कहा कि गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 92वें जन्मदिवस एवं 74 वें संयम दिवस शरद पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।</p>
<p><strong>दीक्षास्थल माधोराजपुरा में पदमपुरा अतिशय क्षेत्र का हुआ विकास</strong></p>
<p>सुरभि दीदी ने बताया कि आर्यिका चंदनामती माताजी ने कहा कि आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का कार्य उल्लेखनीय हैं। उनके आर्यिका दीक्षास्थल माधोराजपुरा (राज.) में पदमपुरा अतिशय क्षेत्र के निकट में भी ‘गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती दीक्षा तीर्थ के विकास का कार्य किया जा चुका है।</p>
<p>यहां सुंदर कृत्रिम सम्मेदशिखर पर्वत का निर्माण करके 15 फीट उत्तुंग काले पाषाण वाली भगवान पार्श्वनाथ की खड्गासन प्रतिमा एवं चौबीसी विराजमान की गई है। इस तीर्थ की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा 21 नवंबर से २६ नवंबर 2010 तक पीठाधीश क्षुल्लक श्री मोतीसागर जी महाराज के सान्निध्यएवं कर्मयोगी ब्रह्मचारी रवींद्र कुमार जैन (वर्तमान पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी जी) के निर्देशन में विशेष महोत्सवपूर्वक हुई थी।</p>
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		<title>दिल्ली लखनऊ टिकैतनगर में मनाया गया रत्नत्रय महोत्सव: अष्टद्रव्य से पूजन, आरती कर लिया आचार्यश्री और माताजी का आशीर्वाद  </title>
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		<pubDate>Mon, 18 Aug 2025 12:37:30 +0000</pubDate>
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<p><strong>अयोध्या में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के जन्म दिवस एवं संयम दिवस के अवसर पर 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन चल रहा है। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव’ का शुभारंभ श्रावण कृष्ण एकम 11 जुलाई को हुआ। सोमवार को 39 वां दिवस मनाया गया। अयोध्या में दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। दिल्ली, लखनऊ, टिकैत नगर के भक्त परिवार ने अपने घर में माताजी का रत्नत्रय महोत्सव मनाया। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं। गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की संघस्थ सुरभि दीदी जी ने कहा कि गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 92वें जन्म दिवस एवं 74 वें संयम दिवस शरद पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव चल रहा है। उन्होंने कहा कि गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के अनेक भक्तांे ने अपने मनोगत में कहा कि श्री ज्ञानमती माताजी दीर्घायु हों, माताजी का अधिक से अधिक समय तक हमें धर्म लाभ मिलता रहे। माताजी के सानिध्य में उनकी जन्म शताब्दी मनाने का अवसर मिले, ऐसी भावना व्यक्त की। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव’ का शुभारंभ श्रावण कृष्ण एकम 11 जुलाई को हुआ। सोमवार को 39 वां दिवस मनाया गया। अयोध्या में दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। दिल्ली, लखनऊ, टिकैत नगर के भक्त परिवार ने अपने घर में माताजी का रत्नत्रय महोत्सव मनाया।</p>
<p><strong>सेमवार को इनके घर में मना रत्नत्रय महोत्सव </strong></p>
<p>थ्जनराज मंजू जैन, आयुषी, जीनांशी, कैवल्या जैन, सुरभि जैन, योगेश जैन, मयंक हिमानी जैन, सम्यक जैन रेनु जैन, सिविल लाइन दिल्ली, नरेंद्र किरण जैन, धन्नू ममता जैन, बिजेंद्र तृप्ति जैन, अतिशय सुभागंनि जैन, पारस, तन्मय, शुभ जैन ज्ञान ज्योति परिवार निराला नगर, लखनऊ, अरविंद बीना जैन, पारस मोनिका जैन, विमन्यु दृष्टि जैन, श्रेयश, सम्यक जैन, टिकैत नगर में रत्नत्रय महोत्सव मनाया गया। सभी ने अपने घरो में आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की तस्वीर रखकर उसके सामने सजावट कर अष्टद्रव्य से आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज और आर्यिका ज्ञानमती माताजी का पूजन किया और सभी भक्तांे ने मिलकर भक्ति भाव से आरती की। गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी और प्रज्ञाश्रमणी श्री चंदनामती माताजी ने सभी भक्तांे को आशिर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर आर्यिका श्री चंदनामती माताजी के मुखारविंद से ’तीर्थंकर देशना’ सत्र के अंतर्गत गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी की लेखनी से प्रस्तुत ’कल्याण कल्पतरु स्तोत्र’ जैसी विलक्षण रचना का अध्ययन भी कराया गया।</p>
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		<title>तीर्थंकरों की शाश्वत जन्मभूमि अयोध्या में जिनमंदिरों का निर्माण: गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से हुए मंदिर निर्माण- आर्यिकाश्री चंदनामती माताजी </title>
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		<pubDate>Thu, 14 Aug 2025 10:09:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने कहा कि भगवान मुनिसुव्रतनाथ की जन्मभूमि ‘राजगृही’ में ‘मुनिसुव्रतनाथ जिनमंदिर’ एवं विपुलाचल पर्वत की तलहटी में मानस्तंभ रचना, भगवान महावीर की निर्वाण स्थली पावापुरी में जलमंदिर के समक्ष पांडुकशिला परिसर में भगवान की खड्गासन प्रतिमा सहित भगवान महावीर जिनमंदिर, गौतम गणधर स्वामी की निर्वाण स्थली गुणावां जी में गौतम स्वामी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने कहा कि भगवान मुनिसुव्रतनाथ की जन्मभूमि ‘राजगृही’ में ‘मुनिसुव्रतनाथ जिनमंदिर’ एवं विपुलाचल पर्वत की तलहटी में मानस्तंभ रचना, भगवान महावीर की निर्वाण स्थली पावापुरी में जलमंदिर के समक्ष पांडुकशिला परिसर में भगवान की खड्गासन प्रतिमा सहित भगवान महावीर जिनमंदिर, गौतम गणधर स्वामी की निर्वाण स्थली गुणावां जी में गौतम स्वामी की खड्गासन प्रतिमा सहित जिनमंदिर, श्री सम्मेदशिखर जी में भगवान ऋषभदेव मंदिर आदि निर्माण भी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से ही हुए हैं। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं। आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि -भगवान मुनिसुव्रतनाथ की जन्मभूमि ‘राजगृही’ में ‘मुनिसुव्रतनाथ जिनमंदिर’ एवं विपुलाचल पर्वत की तलहटी में मानस्तंभ रचना, भगवान महावीर की निर्वाण स्थली पावापुरी में जलमंदिर के समक्ष पांडुकशिला परिसर में भगवान की खड्गासन प्रतिमा सहित भगवान महावीर जिनमंदिर, गौतम गणधर स्वामी की निर्वाण स्थली गुणावां जी में गौतम स्वामी की खड्गासन प्रतिमा सहित जिनमंदिर, श्री सम्मेदशिखर जी में भगवान ऋषभदेव मंदिर आदि समस्त निर्माण भी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से ही हुए हैं। तीर्थंकर जन्मभूमि विकास की श्रृंखला में भगवान पुष्पदंतनाथ की जन्मभूमि काकंदी में श्री पुष्पदंतनाथ जिनमंदिर का निर्माण कार्य होकर उसमें भगवान पुष्पदंतनाथ की विशाल सवा 9 फीट की उत्तुंग पद्मासन प्रतिमा पंचकल्याणक प्रतिष्ठापूर्वक विराजमान हो चुकी है।</p>
<p>तीर्थंकरों की शाश्वत जन्मभूमि अयोध्या में वर्तमानकालीन वहां जन्में पांच तीर्थंकरों की जन्मभूमि की टोकों पर जिनमंदिर निर्माण की प्रेरणा प्रदान कर आपने संस्कृति को जीवंत करने का अभूतपूर्व प्रयास किया है। उस श्रृंखला में प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की टोंक पर सन् 2011 में सुंदर कलात्मक मंदिर बनकर उसमें सवा चार फीट पद्मासन श्वेत प्रतिमा विराजमान हुई है तथा सरयू नदी के तट पर जून 2013 में भगवान अनंतनाथ के मंदिर का निर्माण होकर वेदी में भगवान की सवा दस फीट की उत्तुंग पद्मासन प्रतिमा विराजमान की गई है। इसी प्रकार जून 2014 में भगवान अजितनाथ की टोंक पर विशाल जिनमंदिर का निर्माण तथा दिसंबर 2014 में भगवान अभिनंदननाथ की टोंक पर विशाल जिनमंदिर का निर्माण करके वेदी में 5-5 फीट की सुंदर पद्मासन प्रतिमाएं विराजमान की गई हैं और भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठाएं हुई हैं।</p>
<p>साथ ही वहां निर्मित भरत-बाहुबली टोंक का भी नवनिर्माण होकर आज अयोध्या तीर्थ एक विकसित स्वरूप में जनमानस के आकर्षण का केंद्र बन गया है। उसी श्रृंखला में श्री सुमतिनाथ भगवान की टोंक पर भी सन् 2019 में पंचकल्याणक करके भव्य मंदिर निर्माण किया गया है। अनेक वर्षों से अड़चनों को प्राप्त हो रही भगवान श्रेयांसनाथ की जन्मभूमि सिंहपुरी-सारनाथ में भगवान की विशाल प्रतिमा का पंचकल्याणक महोत्सव जनवरी 2005 में सानंद हुआ। भगवान वासुपूज्य की जन्मभूमि चम्पापुरी में भगवान वासुपूज्य की लाल ग्रेनाइट की 31 फीट की विशाल खड्गासन प्रतिमा माताजी की प्रेरणा का ही सुफल है। वर्तमान में भगवान शीतलनाथ की जन्मभूमि भद्दिलपुर-भद्रिकापुरी का विकास कार्य माताजी के विशेष आशीर्वाद से अविरल गति से चल रहा है और भगवान मल्लिनाथ-नमिनाथ की जन्मभूमि मिथिलापुरी के विकास का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है।</p>
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		<title>भक्तों ने अपने घरों में आर्यिका ज्ञानमती माताजी का रत्नत्रय महोत्सव मनाया : आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने कल्याण कल्पतरू रचना का पाठ करवाया  </title>
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		<pubDate>Tue, 12 Aug 2025 13:46:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या (उ.प्र.) में विराजमान हैं। सुरभि दीदी ने कहा कि गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 92वें जन्म दिवस एवं 74 वें संयम दिवस शरद पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन किया है। अयोध्या से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230; अयोध्या। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या (उ.प्र.) में विराजमान हैं। सुरभि दीदी ने कहा कि गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 92वें जन्म दिवस एवं 74 वें संयम दिवस शरद पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन किया है। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या (उ.प्र.) में विराजमान हैं। सुरभि दीदी ने कहा कि गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 92वें जन्म दिवस एवं 74 वें संयम दिवस शरद पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन किया है। आज 33 वां दिवस है। घर-घर हो रत्नत्रय महोत्सव। ज्ञानमती मां का जन्मोत्सव।। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव’ का शुभारंभ श्रावण कृष्ण एकम 11 जुलाई से प्रारंभ हो चुका है। इसके तहत मंगलवार को दिल्ली की राशि जैन और पारुल जैन ने अयोध्या में दीप प्रज्वलन किया। दिल्ली के भक्त परिवार ने अपने घर में माताजी का रत्नत्रय महोत्सव मनाया। मंगलवार को इनके घर में रत्नत्रय महोत्सव संपन्न हुआ।</p>
<p>अनिल-अनिता जैन, निकुंज-अनामिका, दिव्यांश, मानव-अंतिमा जैन, आगम, सिद्धांत, अतिशय-सुरभि जैन, देशना जैन (संघपति परिवार) प्रीत विहार दिल्ली। रवि-भारती जैन, अभिषेक-सोनल जैन, शांति विहार दिल्ली। राकेश-अल्पना जैन, लोटस कॉपी वाले, प्रीत विहार दिल्ली। अपने घरों में ज्ञानमती माताजी की तस्वीर रखकर उसके सामने सजावट करके भक्तों ने अष्टद्रव्य से आचार्य शांतिसागर जी महाराज और ज्ञानमती माताजी का पूजन किया और सभी भक्तों ने मिलकर भक्ति भाव से आरती की।</p>
<p>गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी और प्रज्ञा श्रमणी चंदनामती माताजी ने सभी भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया। उसके पश्चात आर्यिका श्री चंदनामती माताजी के मुखारविंद से ’तीर्थंकर देशना’ सत्र के तहत गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी की लेखनी से प्रस्तुत ’कल्याण कल्पतरु स्तोत्र’ जैसी विलक्षण रचना का अध्ययन भी कराया गया।</p>
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		<title>कोल्हापुर भक्त परिवार ने मनाया रत्नत्रय महोत्सव: गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी का किया पूजन  </title>
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		<pubDate>Tue, 29 Jul 2025 14:23:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 92वें जन्मदिवस एवं 74 वें संयम दिवस शरद पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन किया है। मंगलवार को रत्नत्रय महोत्सव का 19 वां दिवस भगवान महावीर जिनमंदिर में कोल्हापुर के भक्त परिवार ने मनाया। कोल्हापुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; कोल्हापुर। गणिनीप्रमुख श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 92वें जन्मदिवस एवं 74 वें संयम दिवस शरद पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन किया है। मंगलवार को रत्नत्रय महोत्सव का 19 वां दिवस भगवान महावीर जिनमंदिर में कोल्हापुर के भक्त परिवार ने मनाया। <span style="color: #ff0000">कोल्हापुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोल्हापुर।</strong> गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 92वें जन्मदिवस एवं 74 वें संयम दिवस शरद पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन किया है। मंगलवार को रत्नत्रय महोत्सव का 19 वां दिवस भगवान महावीर जिनमंदिर में कोल्हापुर के भक्त परिवार ने मनाया। घर-घर हो रत्नत्रय महोत्सव। ज्ञानमती मां का जन्मोत्सव। गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 92वें जन्मदिवस एवं 74वें संयम दिवस पर शाश्वत तीर्थ अयोध्या में रत्नत्रय महोत्सव’ का शुभारंभ 12 जुलाई से प्रारंभ हो चुका है। भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर रूईकर कॉलोनी कोल्हापुर में अभिषेक अशोक पाटिलए मीनाक्षी नकाते, नंदिनी कमते, विजया पाटील, शैला पाटील, सोनाली उपाध्ये, राहुल बागे, कोल्हापुर सभी ने मिलकर रत्नत्रय महोत्सव की तैयारी की।</p>
<p>इस अवसर पर शिल्पा पाटील, सुजाता रोटे, प्रतिभा पाटील, संध्या बागी, श्यामला टक्कळकी, कांचन मुरचिट्टे, पुष्पा बोगर, जंगटे, लडगे, राजश्री पाटील, सुनीता कलंत्रे, रेयांश पाटील आदि श्रावक-श्राविका उपस्थित थे। अष्टद्रव्य से आचार्य शांतिसागर जी महाराज और ज्ञानमती माताजी का पूजन किया और सभी भक्तों ने मिलकर भक्ति भाव से आरती की।गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी और प्रज्ञाश्रमणी चंदनामती माताजी ने सभी भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया। आर्यिकारत्न श्री चन्दनामती माताजी के मुखारविंद से तीर्थंकर देशना सत्र के अंतर्गत गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी की लेखनी से प्रस्तुत ’कल्याण कल्पतरु स्तोत्र जैसी विलक्षण रचना का अध्ययन भी कराया गया।</p>
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		<title>मूलाचार का मार्ग दिखा, जीवन को अर्थ दिलाया : प्रथमाचार्य शांतिसागरजी को मुनिराज ने भी किया स्मरण  </title>
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		<pubDate>Tue, 17 Jun 2025 13:09:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विदिशा में विराजित मुनिश्री सर्वार्थसागरजी ने आचार्यश्री के जन्म जयंती पर स्मरण कर उनका गुणानुवाद किया। उन्हें संयम, शील और साधना का अमर पुंज बताया। मंगलवार को अपने प्रवचनों के दौरान आचार्य श्री की वंदना कर धर्मप्रेमी जनता ने भी पुण्यलाभ लिया। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ विदिशा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विदिशा में विराजित मुनिश्री सर्वार्थसागरजी ने आचार्यश्री के जन्म जयंती पर स्मरण कर उनका गुणानुवाद किया। उन्हें संयम, शील और साधना का अमर पुंज बताया। मंगलवार को अपने प्रवचनों के दौरान आचार्य श्री की वंदना कर धर्मप्रेमी जनता ने भी पुण्यलाभ लिया। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ विदिशा में विराजमान हैं। उनके शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी ने विदिशा में अपने प्रवचन में कहा कि आचार्य शांतिसागर, तप के ज्योतिर्मय प्रणेता, संयम, शील और साधना के अमर पुंज विधाता।</p>
<p>बीसवीं सदी में धर्म का दीप पुनः जलाया, मूलाचार का मार्ग दिखा, जीवन को अर्थ दिलाया।</p>
<p>चरणों में जिनके झुकता है समय भी नतमस्तक, गुरुता की प्रतिमा बने, जिनका आभास अलौकिक।</p>
<p>संन्यास में जिनकी महिमा रही चिर अमर अपार, उन प्रथमाचार्य को बारंबार वंदन अपार।</p>
<p>ध्यान, तप और त्याग की साक्षात मूर्ति बने, संयम पथ पर चलकर जग को दीपक जैसे तले।</p>
<p>प्रथमाचार्य का गौरव जिनसे फिर जाग उठा, जैन धर्म का स्वाभिमान जिनसे फिर भाग उठा।</p>
<p>गर्भ में भी तप की थी जिनकी पावन झलक, ऐसे संत थे वे, जैसे भगवान की कोई झलक।</p>
<p>मूलाचार के अनुशासन को जीवन बना डाला, धरा पर चलती साधना को स्वरूप बना डाला।</p>
<p>इधर, अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद, कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने बताया कि गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं। आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी के साक्षात तीन बार दर्शन करने वाली हैं गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी। गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी, जिन्होने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी के तीन बार दर्शन किए हैं। 1. नीरा (महाराष्ट्र ) में सन् 1954 में, 2. बारामती (महा.) में सन् 1955 में,3 कुंथलगिरि सिद्धक्षेत्र (महा.) में सन् 1955 में संल्लेखना के समय। सन् 1955 में आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी ने कुंथलगिरि में देशभूषण-कुलभूषण जी की प्रतिमा के समक्ष 12 वर्ष की संल्लेखना ली थी। दिगम्बर साधु संत परम्परा में वर्तमान युग में अनेक तपस्वी, ज्ञानी ध्यानी संत हुए। उनमें आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज एक ऐसे प्रमुख संत श्रेष्ठ तपस्वी रत्न हुए हैं, जिनकी अगाध विद्वता, कठोर तपश्चर्या, प्रगाढ़ धर्म श्रद्धा, आदर्श चरित्र और अनुपम त्याग ने धर्म की ज्योति प्रज्वलित की है। आपने जो किया वह अभूतपूर्व है।</p>
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