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	<title>गणाचार्य श्री विराग सागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>भिंड में आर्यिका विजिज्ञासा श्री माता जी ससंघ का ऐतिहासिक मंगल प्रवेश: उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब </title>
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		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 16:01:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के धार्मिक इतिहास में आज का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में जुड़ गया। समाधि सम्राट गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज की परम विदुषी शिष्या, आर्यिका श्री विजिज्ञासा श्री माता जी ससंघ का सोमवार को प्रातः काल भिंड नगरी में भव्य और ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ। भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के धार्मिक इतिहास में आज का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में जुड़ गया। समाधि सम्राट गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज की परम विदुषी शिष्या, आर्यिका श्री विजिज्ञासा श्री माता जी ससंघ का सोमवार को प्रातः काल भिंड नगरी में भव्य और ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ। <span style="color: #ff0000">भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> नगर के धार्मिक इतिहास में आज का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में जुड़ गया। समाधि सम्राट गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज की परम विदुषी शिष्या, आर्यिका श्री विजिज्ञासा श्री माता जी ससंघ का सोमवार को प्रातः काल भिंड नगरी में भव्य और ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ। इस पुनीत अवसर पर पूरी जैन समाज श्रद्धा और उत्साह के सागर में डूब गई। माता जी के नगर आगमन की प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। सुबह ठीक 7 बजे जैसे ही माता जी ससंघ का लहार चुंगी पर आगमन हुआ, उपस्थित सकल जैन समाज ने जयकारों के साथ उनकी अगवानी की। भक्तों ने पाद प्रक्षालन और आरती उतारकर माता जी के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा व्यक्त की। पूरा वातावरण गुरुवर विराग सागर जी महाराज की जय और आर्यिका विजिज्ञासा श्री माता जी की जय के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। लहार चुंगी पर अगवानी के बाद माता जी का मंगल विहार नगर के प्रमुख मार्गों की ओर बढ़ा। यह भव्य जुलूस श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर किला गेट से प्रारंभ होकर बजरिया, गोल मार्केट और सदर बाजार होते हुए आगे बढ़ा। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों के बाहर रंगोली सजाकर, पलक-पावड़े बिछाकर माताजी ससंघ का स्वागत किया और आशीर्वाद लिया।</p>
<p><strong>परेड चौराहे पर हुआ ऐतिहासिक महामिलन</strong></p>
<p>इस मंगल प्रवेश का सबसे अलौकिक और भावुक कर देने वाला क्षण सुबह 7.30 बजे परेड चौराहे पर देखने को मिला। यहां पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज और आर्यिका विजिज्ञासा श्री माता जी ससंघ का ‘भाव मंगल मिलन‘ हुआ। इस पावन वेला में आर्यिका माता जी ने पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के चरणों में वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। दो महान आध्यात्मिक विभूतियों के इस अलौकिक मिलन और चरण वंदन के दृश्य को देखकर वहां उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं। इस दृश्य ने हर जैन धर्मावलंबी के हृदय को असीम आनंद से भर दिया। इस भव्य मंगल प्रवेश और संतों के महामिलन से संपूर्ण भिंड जैन समाज में हर्ष और उत्साह का माहौल है। धर्म नगरी भिंड में अब आगामी दिनों में माता जी के सानिध्य में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, तत्व चर्चा और मांगलिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे संपूर्ण क्षेत्र का वातावरण धर्ममय हो उठेगा।</p>
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		<title>आत्म साधना में गुरुओं का उपदेश, ध्यान, साधना आवश्यक : आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने धर्मसभा में जीवन के सत्य और वास्तविक उद्देश्य से परिचित करवाया  </title>
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		<pubDate>Wed, 27 May 2026 13:20:48 +0000</pubDate>
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<p><strong>दिगंबर जैन धर्मशाला, शामली उप्र में गणाचार्य श्री विराग सागर जी के शिष्य आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने कहा कि मनुष्य का वास्तविक स्वरूप उसकी आत्मा का शुद्ध स्वरूप माना गया है। यही आत्म स्वरूप व्यक्ति को जीवन के सत्य और वास्तविक उद्देश्य से जोड़ता है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> दिगंबर जैन धर्मशाला, शामली उप्र में गणाचार्य श्री विराग सागर जी के शिष्य आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने कहा कि मनुष्य का वास्तविक स्वरूप उसकी आत्मा का शुद्ध स्वरूप माना गया है। यही आत्म स्वरूप व्यक्ति को जीवन के सत्य और वास्तविक उद्देश्य से जोड़ता है। इसकी प्राप्ति सहज नहीं होती, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने आत्मिक कल्याण और उन्नति के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। गुरुजनों के उपदेश, साधना और ध्यान इस मार्ग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कोई भी व्यक्ति जन्म से पूर्ण ज्ञान लेकर नहीं आता, बल्कि निरंतर अभ्यास और प्रयास के माध्यम से अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है। मनुष्य सदैव सुख चाहता है और दुःख से दूर रहना चाहता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक योजनाएं बनाता है तथा सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने का प्रयास करता है लेकिन, कई बार मनुष्य यह चाहता है कि वह पाप कर्मों से जुड़ा रहे और उसे पुण्य का फल प्राप्त होता रहे, जबकि प्रकृति का नियम स्पष्ट है कि मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार ही फल मिलता है। श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ किए गए कार्य व्यक्ति के जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं।</p>
<p><strong>शुभ कर्म सुख और शांति देते हैं</strong></p>
<p>ध्यान का जीवन में विशेष महत्व है। व्यक्ति को अपने प्रत्येक कर्म के प्रति जागरूक रहना चाहिए, क्योंकि जो भी कर्म किए जाते हैं। उनका परिणाम अवश्य प्राप्त होता है। यदि हम हिंसा, झूठ, चोरी या अन्य अनुचित कार्य करते हैं तो उनके परिणाम भी हमें ही भोगने पड़ते हैं। शुभ कर्म सुख और शांति देते हैं, जबकि अशुभ कर्म दुःख और कष्ट का कारण बनते हैं। इसलिए व्यक्ति को अपने जीवन में अशुभ कर्मों को कम करने और शुभ कर्मों को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में किसी भी कार्य को करने से पहले सोच-विचार आवश्यक है। बिना विचार के किए गए कार्य कई बार समस्याओं और दुःख का कारण बन जाते हैं। अच्छे विचार, श्रेष्ठ आचरण और सत्कर्म ही जीवन को महान बनाते हैं। आज के समय में यह भी आवश्यक है कि व्यक्ति स्वयं विचार करे कि वह किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। आधुनिक जीवन में लोग अपने मूल्यों और आत्मिक चेतना से दूर होकर मोबाइल तथा भौतिक आकर्षणों में अधिक उलझते जा रहे हैं। इसलिए जीवन में संतुलन, संयम और आत्मचिंतन को अपनाकर ही वास्तविक सुख और शांति प्राप्त की जा सकती है।</p>
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		<title>चावल पर सूक्ष्म लेखन की कृति ‘कलश’ का विमोचन: गणाचार्य श्री विराग सागर के अंतिम उपदेश हैं अंकित  </title>
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		<pubDate>Mon, 05 May 2025 12:46:16 +0000</pubDate>
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<p><strong>पट्टाचार्य महोत्सव के अवसर पर सुमति धाम इंदौर स्थित सभा मंडप में चावल के दानों पर जयपुर की नीरू छाबड़ा के सूक्ष्म लेखन द्वारा निर्मित अनोखी कृति ‘कलश’ का भव्य विमोचन हुआ। इस कृति में चावल पर सूक्ष्म लेखन कलाकार नीरू छाबड़ा ने गणाचार्य श्री विराग सागर गुरुदेव के अंतिम उपदेश को 481 चावलों पर अंकित किया है। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। पट्टाचार्य महोत्सव के अवसर पर सुमति धाम इंदौर स्थित सभा मंडप में चावल के दानों पर जयपुर की नीरू छाबड़ा के सूक्ष्म लेखन द्वारा निर्मित अनोखी कृति ‘कलश’ का भव्य विमोचन हुआ। इस कृति में चावल पर सूक्ष्म लेखन कलाकार नीरू छाबड़ा ने गणाचार्य श्री विराग सागर गुरुदेव के अंतिम उपदेश को 481 चावलों पर अंकित किया है। इस उत्कृष्ट कृति का विमोचन आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के करकमलों से हुआ। इस अवसर पर कलाकार नीरू छाबड़ा, प्रदीप छाबड़ा, प्रतीक गंगवाल, सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मुनिश्री समत्व सागर ने आचार्य श्री को कृति में लिखे गए उपदेशों की जानकारी दी। जिसे सुनकर आचार्य श्री ने कलाकार नीरू छाबड़ा को आशीर्वाद प्रदान किया। संघ के समस्त मुनियों ने भी इस अद्भुत कृति का अवलोकन किया और सराहना की।</p>
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		<title>चावल पर उकेरा आचार्य श्री विराग सागर जी का संदेश : नीरू छाबड़ा ने अंतिम संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का लिया संकल्प </title>
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		<pubDate>Fri, 25 Apr 2025 11:49:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[माइक्रो आर्टिस्ट नीरू छाबड़ा ने चावलों पर गणाचार्य श्री विराग सागर जी का अंतिम उपदेश लिखा है। जैन श्रावकों और युवा पीढ़ी को जैन धर्म की महिमा और साधुओं की कठोर चर्या बताने की सराहनीय पहल की है। नीरू ने इसके 541 चावल का उपयोग किया। उनके माइक्रो आर्ट की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>माइक्रो आर्टिस्ट नीरू छाबड़ा ने चावलों पर गणाचार्य श्री विराग सागर जी का अंतिम उपदेश लिखा है। जैन श्रावकों और युवा पीढ़ी को जैन धर्म की महिमा और साधुओं की कठोर चर्या बताने की सराहनीय पहल की है। नीरू ने इसके 541 चावल का उपयोग किया। उनके माइक्रो आर्ट की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> देश की पहली महिला माइक्रो आर्टिस्ट नीरू छाबड़ा ने चावलों पर गणाचार्य श्री विराग सागर जी का अंतिम उपदेश लिखकर जैन श्रावकों और युवा पीढ़ी को जैन धर्म की महिमा और साधुओं की कठोर चर्या बताने की शानदार पहल की है। प्रदीप छाबड़ा ने बताया कि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री समत्व सागर जी ने अपने जयपुर चातुर्मास के दौरान कलाकार नीरू छाबड़ा को आशीर्वाद देते हुए आचार्य श्री के अंतिम संदेश को चावलों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने की बात कही। उल्लेखनीय है कि गणाचार्य विराग सागर जी ने अपना अंतिम उपदेश अपनी समाधि से एक दिन पूर्व 3 जुलाई 2024 को दिया था। जिसमें उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपने 500 शिष्यों, प्रशिष्यों के विराट संघ के संचालन की जिम्मेदारी अपने सबसे योग्य और शिष्य श्रमणाचार्य विशुद्ध सागर महाराज को सौंपी थी और अपने संदेश में उन्होंने विशुद्ध सागर को अपने शिष्यों और कनिष्ठ साधुओं का प्रेम और वात्सल्यपूर्वक ध्यान रखने की बात कही।</p>
<p>अपने गुरु आचार्य श्री विमल सागर जी की परंपराओं को बिना कोई शिथिलाचार अपनाएं पालन करने की सलाह दी। कलाकार नीरू छाबड़ा ने यह संदेश लिखने के लिए 541 चावलों का प्रयोग किया और चावलों की सुंदर कृति तैयार कर उसे कलश के डिजाइन में ढाला है। जानी मानी आर्टिस्ट नीरू छाबड़ा इससे पहले भक्तामर स्तोत्र, गायत्री मंत्र, महावीर स्तंभ, गीता सार और एक चावल पर णमोकार मंत्र जैसे हर धर्म के सार तथा मंत्रों को भी अपने चावल रूपी कैनवास पर सजाकर धर्म प्रभावना कर चुकी हैं और इनके इस कार्य की समय-समय पर देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्रियों, देश विदेश की बड़ी हस्तियों ने सराहना की है।</p>
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