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	<title>गणाचार्य विराग सागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>गणाचार्य विराग सागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य श्री विनम्र सागर जी का मनाया 16 वां आचार्य पदारोहण दिवस : 84 फिट उत्तुंग भगवान के चरणों में की शांति सहस्त्रधारा </title>
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		<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 07:41:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़वानी के निकट स्थित दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र श्री बावनगजा पर गणाचार्य विराग सागर जी महाराज जी के शिष्य आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज का आज 16 वां आचार्य पदारोहण कार्यक्रम मनाया गया। आज प्रातः हजारों गुरु भक्तों के साथ आचार्य संघ भगवान आदिनाथ के चरणों में पहुंचा। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बड़वानी के निकट स्थित दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र श्री बावनगजा पर गणाचार्य विराग सागर जी महाराज जी के शिष्य आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज का आज 16 वां आचार्य पदारोहण कार्यक्रम मनाया गया। आज प्रातः हजारों गुरु भक्तों के साथ आचार्य संघ भगवान आदिनाथ के चरणों में पहुंचा। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> बड़वानी के निकट स्थित दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र श्री बावनगजा पर गणाचार्य विराग सागर जी महाराज जी के शिष्य आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज का आज 16 वां आचार्य पदारोहण कार्यक्रम मनाया गया। आज प्रातः हजारों गुरु भक्तों के साथ आचार्य संघ भगवान आदिनाथ के चरणों में पहुंचा। जहां 84 फिट की प्रतिमा के चरणाभिषेक और सहस्त्र शांतिधारा आचार्य श्री के मुखारविंद और मंत्रोच्चार के बीच हुई। सारी मांगलिक क्रियाएं ब्रह्मचारी सुरेश मलैया और मौसम शास्त्री ने कराई। आज की शांतिधारा और प्रथम अभिषेक का सौभाग्य शलभ सरिता इंदौर को प्राप्त हुआ। तलहटी में आचार्य श्री संघ की आहार चर्या सामायिक संपन्न हुई। दोपहर के सत्र में आचार्य संघ को बावनगजा ट्रस्ट कमेटी ने श्रीफल भेंटकर मंचासीन किया गया। बाहर से आए अतिथियों, बावनगजा ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलन कर भगवान आदिनाथ और आचार्य श्री विराग सागर जी के चित्र का अनावरण किया। साथ ही मंगलाचरण हरसुख छात्रावास के छोटे छोटे बच्चे गौरव और कार्तिक जेन ने किया। रिद्धि जैन द्वारा गुरु वंदना नृत्य प्रस्तुत किया गया। गुरु भक्तों ने आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन धर्मेंद्र जैन विजय नगर और अन्य भक्तों ने कर शास्त्र भेंट किए। क्षुल्लिका प्रभा श्री माताजी का भी आज दीक्षा दिवस है। उन्होंने भी आचार्य श्री को शास्त्र भेंट किया और अशोक कुमार सतना वालों ने भी शास्त्र भेंट किए। बावनगजा ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष विनोद दोशी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया और बाहर से आए अतिथियों का ट्रस्ट कमेटी ने और चातुर्मास कमेटी ने सम्मान पगड़ी, अंगवस्त्र, मोतियों की माला और तिलक लगा कर किया। चातुर्मास कमेटी ने बावनगजा ट्रस्ट कमेटी का भी सम्मान किया। बाहर से आए गुरु भक्तों ने श्रीफल चढ़ाकर चतुर्विध संघ का आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य श्री का पूजन माताजी एवं संघस्थ दीदियों के मुखारविंद और इंदौर से संगीतकार अनुभव जैन के सुमधुर भजन और स्वर लहरियों के बीच हुई। चातुर्मास कमेटी विजय नगर इंदौर द्वारा ताम्रपत्र पर रचित शास्त्र उच्चारणाचार्य चरित्र का भी विमोचन किया गया।</p>
<p><strong>साक्षात देखने पर आनंद और आश्चर्य की अनुभूति होगी</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने धर्मसभा में कहा कि व्यक्ति को आश्चर्य ही सम्यक दर्शन प्राप्त करा सकता है। जिस दिन हमे आश्चर्य होता है हम उत्साह और उमंग से भर जाते है वैसे ही हमने बावनगजा जी के दर्शन अभी तक फोटो, वीडियो मेंमोबाइल पर देखा करते थे किंतु, कल जब हमने साक्षात दर्शन किए आनंद आ गया और आश्चर्य से भर गए कि इतनी विशाल प्रतिमा का निर्माण इतनी सुंदरता से किया गया है। आप कोई भी चीज टीवी,वीडियो ,फोटो में देखो आपको आनंद नहीं आता। साक्षात देखने पर अत्यंत आनंद और आश्चर्य की अनुभूति होगी। जब पहली बार जब कोई चीज देखते है तो जो आनंद की अनुभूति होती है वो अलग ही होती है। हमने और हमारे संघ के साधुओं ने भी पहली बार इस सिद्ध भूमि के दर्शन किए ,दर्शन कर मन अति आनंदित हुआ और सारी थकान दूर हो गई और इस सिद्ध भूमि पर सभी श्रावकों को कोई ना कोई विधान अवश्य करना चाहिए। यहां की सकारात्मकता अलग ही अनुभव करने वाली है।</p>
<p><strong>भविष्य में परंपरा का सही तरीके से निर्वहन करेगा</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने बताया कि इस सृष्टि में सबसे ज्यादा उपवास भगवान महावीर स्वामी ने किए है। भगवान महावीर ने 20 वर्ष में मात्र 364 आहार ग्रहण किए थे। भगवान आदिनाथ को भी 6, माह आहार नहीं मिला था। और भगवान बाहुबली को भी 1 वर्ष तक कठोर तप किया था। आचार्य श्री ने अपने गुरु आचार्य श्री विराग सागर जी का स्मरण करते हुए कहा कि गुरु अपने शिष्यों को परख लेते है कि ये भविष्य में परंपरा का सही तरीके से निर्वहन करेगा। ऐसे शिष्यों को गुरु आचार्य पद प्रदान करते हैं। उसके बाद भी गुरु जी ने हमें संघ से नहीं छोड़ा क्योंकि, जब तक आचार्य संहिता नहीं पढ़ाई जाती तब तक आचार्य पद अधूरा है। आचार्य श्री विराग सागर जी ने हमे और हमारे गुरु भाई आचार्य विमर्श सागर जी को सारी क्लास छोड़ कर 4 घंटे तक लगातार पढ़ाया और जिसने आचार्य संहिता नहीं पढ़ी वो आचार्य पद के योग्य नहीं होता। आचार्य संहिता पढ़ाने के बाद गुरु जी ने कहा कि जाओ अब आप धर्म की खूब प्रभावना करो। शिक्षा-दीक्षा दो।इस अवसर पर पूरे प्रदेश और देश भर से कई श्रावक श्राविका गुरु भक्त इकट्ठे हुए और इस सुंदर और मनोज्ञ तीर्थ के दर्शन कर पूजा अर्चना की ,शाम को आचार्य संघ का प्रतिक्रमण, गुरुभक्ति हुई,शाम को भगवान की और आचार्य श्री की आरती हुई। ट्रस्टी धर्मेंद्र जैन ने सभी अतिथियों का आभार माना। यह जानकारी मनीष जैन ने दी।</p>
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		<title>प्रथम समाधि दिवस पर 75 साधुओं का सानिध्य मिला: नेमीनगर में मना आचार्यश्री विरागसागर जी का समाधि दिवस </title>
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		<pubDate>Sun, 06 Jul 2025 09:37:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणाचार्य विराग सागर जी महाराज का प्रथम समाधि दिवस नेमी नगर में मनाया गया। प्रातःकाल आचार्य विनम्र सागर जी महाराज विजयनगर से, आचार्य श्री विशद सागरजी महाराज सुदामा नगर से, सुयश सागर जी रामचंद्र नगर से मंगल विहार कर इंद्रलोक कॉलोनी जिनालय पर एकत्रित हुए। यहां से शोभायात्रा बैंडबाजे के साथ नेमी नगर के लिए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणाचार्य विराग सागर जी महाराज का प्रथम समाधि दिवस नेमी नगर में मनाया गया। प्रातःकाल आचार्य विनम्र सागर जी महाराज विजयनगर से, आचार्य श्री विशद सागरजी महाराज सुदामा नगर से, सुयश सागर जी रामचंद्र नगर से मंगल विहार कर इंद्रलोक कॉलोनी जिनालय पर एकत्रित हुए। यहां से शोभायात्रा बैंडबाजे के साथ नेमी नगर के लिए प्रारंभ हुई। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> इंदौर।</strong> गणाचार्य विराग सागर जी महाराज का प्रथम समाधि दिवस नेमी नगर में मनाया गया। प्रातःकाल आचार्य विनम्र सागर जी महाराज विजयनगर से, आचार्य श्री विशद सागरजी महाराज सुदामा नगर से, सुयश सागर जी रामचंद्र नगर से मंगल विहार कर इंद्रलोक कॉलोनी जिनालय पर एकत्रित हुए। यहां से शोभायात्रा बैंडबाजे के साथ नेमी नगर के लिए प्रारंभ हुई। जगह-जगह साधुओं के पाद प्रक्षालन किए गए। आरती उतारी गईं। सभी साधुओं की मंगल अगवानी एवं मंगल मिलन आचायश्री विभव सागर जी महाराज ने नेमीनगर गेट पर की। मंदिर पर सभी संतों के पाद प्रक्षालन किए गए। धर्म सभा में मंगलाचरण दीदी द्वारा किया गया एवं दीप प्रज्वलन समाज श्रेष्ठियों द्वारा किया गया। गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के चरण स्थापित कर प्रक्षालन का सौभाग्य आकाश, विकास, निर्मल पांड्या परिवार को प्राप्त हुआ। आचार्यश्री विशद सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य अशोक आलोक जैन गंजबासौदा वालों को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य सुरेश सेठी एवं पुलक मंच परिवार इंदौर को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य धर्मेंद्र सीनकाम एवं विजय नगर चातुर्मास समिति को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट का सौभाग्य संदीप गंगवाल पदमा गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-84455" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0029.jpg" alt="" width="854" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0029.jpg 854w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0029-200x300.jpg 200w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0029-683x1024.jpg 683w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0029-768x1151.jpg 768w" sizes="(max-width: 854px) 100vw, 854px" />आचार्यों और मुनिराजों ने किया गुणानुवाद </strong></p>
<p>इस अवसर पर पूज्य आचार्य विनम्र सागर जी ने कहा कि आचार्य श्री विराग सागर जी अत्यंत दूर दृष्टि वाले थे। उन्होंने अपने साथ जहां बच्चों को शिक्षित किया तो बुजुर्गाे को दीक्षा प्रदान कर उनके जीवन को धन्य किया। आचार्य श्री ने कहा कि मैं विराग सागरजी अनुकंपा से ही आज संस्कृत सीख पाया हूं और जीवन में पानी की बूंद के 2006 छंद लिखकर समाज को समर्पित किया है। आचार्य श्री विशदसागर जी ने भी कहा कि उन्होंने हमें बच्चों जैसा पाल कर आगे बढ़ाया है। वही विभव सागर जी महाराज ने उनके जैसी उत्कृष्ट समाधी इस पंचमकाल मंे किसी साधु की नहीं हो पाई है। उन्होंने बालकों को पहचान कर शिक्षित कर समाज के उद्धार के लिए समाज को सौंपा है। आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी, विभव सागर जी, विनम्र सागर जी, विहर्ष सागर जी जैसे रतन उन्होंने समाज को प्रदान किए हैं।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-84457" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0027.jpg" alt="" width="1280" height="854" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0027.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0027-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0027-1024x683.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0027-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0027-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0027-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0027-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0027-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0027-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250706-WA0027-990x661.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /> जिनके माध्यम से आज समाज धर्म मार्ग पर चलते हुए उत्कृष्टता को प्राप्त हो रहा है। इस अवसर पर पंडित अर्पित वाणी, पुलक मंच के प्रदीप बड्जत्या ने विरागसागर जी के प्रति अपने संस्मरण प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि वर्षायोग 2013 में आचार्यश्री विराग सागरजी का चातुर्मास इंदौर में छत्रपति नगर में पुलक मंच के माध्यम से हुआ था। संचालन महामंत्री गिरीश पाटोदी ने किया। आभार समाज अध्यक्ष कैलाश लुहाडिया ने माना।</p>
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		<title>पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी का पथरिया में चातुर्मास : पट्टाचार्य पद ग्रहण के बाद पहला चातुर्मास </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Jun 2025 08:40:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज वर्ष 2025 का चातुर्मास अपने समाधिस्थ दीक्षा गुरु गणाचार्य विराग सागर जी की जन्मभूमि पथरिया में करेंगे। पट्टाचार्य पद ग्रहण करने के बाद यह उनका पहला चतुर्मास होगा। इंदौर से पढ़िए, यह खबर... इंदौर। हाल ही में पट्टाचार्य पद ग्रहण करने के बाद आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज वर्ष 2025 का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज वर्ष 2025 का चातुर्मास अपने समाधिस्थ दीक्षा गुरु गणाचार्य विराग सागर जी की जन्मभूमि पथरिया में करेंगे। पट्टाचार्य पद ग्रहण करने के बाद यह उनका पहला चतुर्मास होगा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर.</span>..</strong></p>
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<p><strong>इंदौर।</strong> हाल ही में पट्टाचार्य पद ग्रहण करने के बाद आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज वर्ष 2025 का चातुर्मास अपने समाधिस्थ दीक्षा गुरु गणाचार्य विराग सागर जी की जन्मभूमि पथरिया में उनकी ही प्रेरणा एवं आशीर्वाद से नव निर्मित विरागोदय तीर्थ में चातुर्मास स्थापित करेंगे। आचार्य श्री का यह 34 वां चातुर्मास है लेकिन, पट्टाचार्य पद से सुशोभित होने के बाद पथरिया में यह उनका पहला चातुर्मास है। पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज सागर से ससंघ(25 पिच्छिका) पद विहार करते हुए 2 जुलाई बुधवार को पथरिया एवं 5 जुलाई को विरागोदय तीर्थ पथरिया में मंगल प्रवेश करेंगे।</p>
<p>राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यहां चातुर्मास मंगल कलश स्थापना के पूर्व 10 जुलाई को आचार्य श्री के सानिध्य में गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं 11 जुलाई को वीर शासन जयंती मनाई जाएगी एवं शनिवार 12 जुलाई को दोपहर में विराग विशुद्ध चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना विधि विधान के साथ होगी। समारोह में देशभर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पथरिया पहुंचेंगे। इंदौर से भी बड़ी संख्या में गुरु भक्त चातुर्मास मंगल कलश स्थापना में पहुंचेंगे।</p>
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