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	<title>गणधर वलय विधान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>गणधर वलय विधान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भक्ति भाव से संपन्न हुआ गणधर वलय विधान : आर्यिका विज्ञमति माताजी ने प्रेम और सेवा का दिया संदेश </title>
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		<pubDate>Sun, 21 Jun 2026 07:41:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में एम.डी. जैन इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित विश्व शांति महायज्ञ के छठवें दिन गणधर वलय विधान भक्ति एवं श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। धर्मसभा में संतों ने प्रेम, सेवा और धर्म साधना का संदेश दिया। पढ़िए श्रीफल साथी राहुल जैन की यह रिपोर्ट। आगरा। आगरा दिगंबर जैन परिषद [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में एम.डी. जैन इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित विश्व शांति महायज्ञ के छठवें दिन गणधर वलय विधान भक्ति एवं श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। धर्मसभा में संतों ने प्रेम, सेवा और धर्म साधना का संदेश दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राहुल जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में एम.डी. जैन इंटर कॉलेज फील्ड हॉल, हरीपर्वत में आयोजित विश्व शांति महायज्ञ के छठवें दिन आचार्य 108 श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं सिद्धांत रत्न, भारत गौरव, गणिनी शिरोमणि आर्यिका 105 श्री विशुद्धमति माताजी तथा आर्यिका विज्ञमति माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य में गणधर वलय विधान का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया।</p>
<p><strong>भजनों पर झूमे श्रद्धालु</strong></p>
<p>संगीतकार ऋषि एंड पार्टी द्वारा प्रस्तुत भजनों की मधुर स्वरलहरियों पर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए। विधान के दौरान भक्तजन नृत्य एवं भक्ति के माध्यम से धर्म आराधना का आनंद लेते रहे।</p>
<p><strong>शांतिधारा और अभिषेक के साथ हुआ विधान</strong></p>
<p>बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया जी के निर्देशन में भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। इसके पश्चात सौधर्म इन्द्र यतेंद्र कुमार-अभिलाषा जैन, कुबेर राजेंद्र कुमार जैन-नीलम जैन लुहाड़िया, यज्ञनायक इन्द्र सुरेश कुमार-माया जैन, ईशान इन्द्र जिनेंद्र कुमार-अनीता जैन सहित अनेक पुण्यार्जकों ने संगीतमय वातावरण में अर्घ समर्पित कर पूजा-अर्चना की।</p>
<p><strong>प्रेम से आती है सफलता</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विज्ञमति माताजी ने कहा कि जहां प्रेम होता है, वहां सफलता और समृद्धि स्वयं पीछे-पीछे चली आती है। परिवार और समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और सहयोग ही वास्तविक सुख और उन्नति का आधार है।</p>
<p><strong>चिड़िया की प्रेरक कथा सुनाई</strong></p>
<p>माताजी ने एक प्रेरक दृष्टांत सुनाते हुए कहा कि जब झोपड़ी में आग लगी तो एक छोटी चिड़िया अपनी चोंच में पानी भरकर आग बुझाने का प्रयास करती रही। लोगों के उपहास करने पर चिड़िया ने कहा कि इतिहास में उसका नाम आग बुझाने वालों में लिखा जाएगा, तमाशा देखने वालों में नहीं। माताजी ने कहा कि समाज और धर्म के कार्यों में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।</p>
<p><strong>आचार्य श्री ने भी किया मार्गदर्शन</strong></p>
<p>आचार्य श्री इन्द्रनंदी महाराज ने भी धर्मसभा को संबोधित कर धर्म, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उपस्थित श्रद्धालुओं ने संतों के उपदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>समापन की ओर विश्व शांति महायज्ञ</strong></p>
<p>विश्व शांति महायज्ञ के अंतर्गत प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं में महायज्ञ को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।</p>
<p><strong>बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित</strong></p>
<p>कार्यक्रम में परिषद अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार, अर्थमंत्री राकेश जैन परदे वाले, उपमंत्री विमल जैन, अनंत जैन, प्रचार मंत्री आशीष जैन मोनू, प्रदीप जैन कागज वाले, मनीष जैन लवली, कुमार मंगलम जैन, प्रवीण जैन, पंकज जैन, सचिन जैन, शेखर जैन, प्रांजल जैन, बीना बैनाड़ा, सपना जैन, नूतन जैन, प्रभा जैन, अनीता जैन, दीपा जैन सहित बड़ी संख्या में सकल जैन समाज उपस्थित रहा। धर्मसभा का संचालन महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार ने किया।</p>
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		<title>श्रुत पंचमी महोत्सव पर भक्ति से सराबोर हुआ गणधर वलय विधान : आर्यिका विज्ञमति माताजी बोलीं— जिनवाणी ही आत्मज्ञान और मोक्षमार्ग की आधारशिला </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:13:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में एम.डी. जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत में आयोजित गणधर वलय विधान के पांचवें दिन श्रुत पंचमी महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। आचार्य इन्द्रनंदी महाराज एवं आर्यिका संघ के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने जिनवाणी माता की आराधना कर गणधरों को अर्घ समर्पित किए। पढ़िए राहुल जैन की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में एम.डी. जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत में आयोजित गणधर वलय विधान के पांचवें दिन श्रुत पंचमी महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। आचार्य इन्द्रनंदी महाराज एवं आर्यिका संघ के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने जिनवाणी माता की आराधना कर गणधरों को अर्घ समर्पित किए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राहुल जैन की यह रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा</strong>। आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में एम.डी. जैन इंटर कॉलेज फील्ड के हॉल, हरीपर्वत में आयोजित गणधर वलय विधान के पांचवें दिन श्रुत पंचमी महा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम आचार्य 108 श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं 57 वर्षीय संयम साधना से साधित सिद्धांत रत्न, भारत गौरव, गणिनी शिरोमणि आर्यिका 105 श्री विशुद्धमति माताजी तथा विज्ञमति माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य में सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>भक्ति गीतों पर झूमे श्रद्धालु</strong></p>
<p>संगीतकार ऋषि एंड पार्टी द्वारा प्रस्तुत भजनों की मधुर स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भक्ति गीतों पर नृत्य करते हुए धर्म आराधना का आनंद लेते नजर आए।</p>
<p><strong>विधि-विधान से सम्पन्न हुआ गणधर वलय विधान</strong></p>
<p>बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया जी के निर्देशन में भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न हुई। इसके पश्चात इंद्र-इंद्राणी सहित विधान के प्रमुख पात्रों ने संगीतमय वातावरण में पूजा-अर्चना कर अर्घ समर्पित किए।</p>
<p>विधान में सौधर्म इन्द्र यतेंद्र कुमार-अभिलाषा जैन, कुबेर राजेंद्र कुमार जैन-नीलम जैन लुहाड़िया, यज्ञनायक इन्द्र सुरेश कुमार-माया जैन, ईशान इन्द्र जिनेन्द्र कुमार-अनीता जैन, चक्रवर्ती इन्द्र सुबोध पाटनी-शची पाटनी, मोहन स्वरूप-नूतन जैन, रवि कुमार-बीना जैन, पदमचंद-प्रेमलता जैन, इन्द्र जितेंद्र कुमार-अंशु जैन, रमेशचंद-मधुलता जैन, वीरेन्द्र कुमार-पूनम जैन तथा राजेंद्र कुमार-विमलेश जैन परिवार ने विधान में सहभागिता निभाई।</p>
<p><strong>नौ तीर्थंकरों के गणधरों को समर्पित किए अर्घ</strong></p>
<p>श्रुत पंचमी महोत्सव के अवसर पर आयोजित गणधर वलय विधान में नौ तीर्थंकर भगवानों के गणधरों को श्रद्धापूर्वक अर्घ समर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने जिनवाणी माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धर्म आराधना की।</p>
<p><strong>जिनवाणी आत्मज्ञान का अमूल्य स्रोत</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विज्ञमति माताजी ने कहा कि श्रुत पंचमी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र है। आज ही के दिन आचार्य पुष्पदंत एवं आचार्य भूतबली द्वारा रचित षट्खण्डागम ग्रंथ की रचना पूर्ण हुई थी। इसी कारण जैन समाज इस दिन को जिनवाणी माता के महापर्व के रूप में मनाता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों की दिव्य वाणी ही जिनवाणी है, जिससे आचार्य, साधु और आर्यिकाएं ज्ञान प्राप्त कर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जिनवाणी का अध्ययन जीवन में सम्यक ज्ञान और सही दिशा प्रदान करता है।</p>
<p><strong>आचार्य इन्द्रनंदी महाराज ने भी किया संबोधित</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री इन्द्रनंदी महाराज ने भी धर्मसभा को संबोधित करते हुए धर्म, संयम और स्वाध्याय के महत्व पर प्रकाश डाला। धर्मसभा का कुशल संचालन परिषद के महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>अनेक समाजजन रहे उपस्थित</strong></p>
<p>कार्यक्रम में पूर्व डिप्टी मेयर अशोक जैन, परिषद अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार, अर्थमंत्री राकेश जैन परदे वाले, उपमंत्री विमल जैन, अनंत जैन, प्रचार मंत्री आशीष जैन मोनू, प्रदीप जैन कागज वाले, मनीष जैन लवली, दीपक जैन, कुमार मंगलम जैन, प्रवीण जैन, पंकज जैन, सचिन जैन, शेखर जैन, प्रांजल जैन, बीना बैनाड़ा, सपना जैन, नूतन जैन, प्रभा जैन, अनीता जैन, दीपा जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित सकल जैन समाज बड़ी संख्या में उपस्थित रहा।</p>
<p><strong>20 जून को होगा विश्व शांति महायज्ञ का समापन</strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि 20 जून 2026 को प्रातः 7 बजे से मुनि संघ एवं आर्यिका संघ के सानिध्य में गणधर वलय विधान, शांतिधारा तथा विश्व शांति महायज्ञ का समापन समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।</p>
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		<title>आचार्य इन्द्रनंदी महाराज एवं आर्यिका संघ के सानिध्य में भक्ति भाव से सम्पन्न हुआ गणधर वलय विधान : 350 श्रद्धालुओं ने लिया विधान का पुण्य लाभ, श्रुत पंचमी महोत्सव की तैयारियां तेज </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:56:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में एम.डी. जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत में गणधर वलय विधान का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। आचार्य इन्द्रनंदी महाराज एवं आर्यिका संघ के सानिध्य में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने विधान में भाग लिया। पढ़िए राहुल जैन की यह रिपोर्ट आगरा। आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में एम.डी. जैन इंटर कॉलेज, हरीपर्वत में गणधर वलय विधान का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। आचार्य इन्द्रनंदी महाराज एवं आर्यिका संघ के सानिध्य में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने विधान में भाग लिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राहुल जैन की यह रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में एम.डी. जैन इंटर कॉलेज फील्ड के हॉल, हरीपर्वत में आयोजित धार्मिक महोत्सव के चतुर्थ दिवस पर आचार्य 108 श्री इन्द्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं 57 वर्षीय संयम साधना से साधित, प.पू. सिद्धांत रत्न, भारत गौरव, गणिनी शिरोमणि आर्यिका 105 श्री विशुद्धमति माताजी तथा आर्यिका विज्ञमति माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य में गणधर वलय विधान श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>350 श्रद्धालुओं ने लिया विधान का पुण्य लाभ</strong></p>
<p>विधान में लगभग 350 श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तगण भक्ति गीतों और संगीतमय प्रस्तुतियों के साथ नृत्य करते हुए धर्म आराधना का आनंद लेते नजर आए। पूरे परिसर में भक्ति और उत्साह का वातावरण बना रहा।</p>
<p><strong>शांतिधारा एवं अभिषेक के साथ हुआ शुभारंभ</strong></p>
<p>बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया जी के सानिध्य में भगवान की शांतिधारा एवं अभिषेक सम्पन्न हुआ। इसके पश्चात इन्द्र-इन्द्राणी सहित विधान के प्रमुख पात्रों द्वारा संगीतमय स्वरलहरियों के मध्य पूजन-अर्चन कर अर्घ्य समर्पित किए गए।</p>
<p><strong>इन परिवारों ने निभाई प्रमुख भूमिकाएं</strong></p>
<p>सौधर्म इन्द्र यतेंद्र कुमार-अभिलाषा जैन, कुबेर राजेंद्र कुमार जैन-नीलम जैन लुहाड़िया, यज्ञनायक इन्द्र सुरेश कुमार-माया जैन, ईशान इन्द्र जिनेन्द्र कुमार-अनीता जैन, चक्रवर्ती इन्द्र सुबोध पाटनी-शची पाटनी, मोहन स्वरूप-नूतन जैन, रवि कुमार-बीना जैन, पदमचंद-प्रेमलता जैन, इन्द्र जितेंद्र कुमार-अंशु जैन, रमेशचंद-मधुलता जैन, वीरेन्द्र कुमार-पूनम जैन तथा राजेंद्र कुमार-विमलेश जैन परिवार ने विधान में प्रमुख पात्रों की भूमिका निभाते हुए पूजा-अर्चना की।</p>
<p><strong>गणधर भगवान की दिव्य वाणी के संवाहक हैं</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विज्ञमति माताजी ने कहा कि परमेष्ठी वे होते हैं जिन्होंने संपूर्ण ज्ञान की प्राप्ति की हो। आचार्य परमेष्ठी मुनियों को शिक्षित करते हैं तथा साधुओं का कार्य धर्म प्रभावना एवं चिंतन करना है। उन्होंने कहा कि गणधर भगवान की दिव्यध्वनि को ग्रहण कर उसे जन-जन तक पहुंचाते हैं। भगवान के मुख से निकली वाणी ही जिनवाणी कहलाती है। आज शीतलनाथ, श्रियांशनाथ, धर्मनाथ, विमलनाथ एवं अनंतनाथ भगवान के गणधरों की पूजा-अर्चना की गई।</p>
<p><strong>आचार्य श्री ने भी दिए धर्मोपदेश</strong></p>
<p>आचार्य 108 श्री इन्द्रनंदी महाराज जी ने भी धर्मसभा को संबोधित करते हुए धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला तथा श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण और जिनवाणी के अध्ययन के लिए प्रेरित किया।</p>
<p><strong>श्रुत पंचमी महोत्सव आज</strong></p>
<p>धर्मसभा का संचालन परिषद के महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार ने किया। कार्यक्रम में परिषद के महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार, अर्थ मंत्री राकेश जैन परदे वाले, उपमंत्री विमल जैन, अनंत जैन, प्रचार मंत्री आशीष जैन मोनू, दीपक जैन, कुमार मंगलम जैन, प्रवीण जैन, पंकज जैन, सचिन जैन, शेखर जैन, प्रांजल जैन, उषा जैन, सपना जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित सकल जैन समाज उपस्थित रहा।</p>
<p>मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि 19 जून 2026 को श्रुत पंचमी पर्व का महा महोत्सव मनाया जाएगा। प्रातः 7 बजे से मुनि संघ एवं आर्यिका संघ के सानिध्य में गणधर वलय विधान एवं विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>
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		<title>एमडी जैन कॉलेज में भक्ति-भाव से हुआ गणधर वलय विधान : 350 इंद्र-इंद्राणियों ने किया पुण्यार्जन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 12:26:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में हरिपर्वत स्थित एमडी जैन इंटर कॉलेज के आचार्य श्री शांति सभागार में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के तीसरे दिन अत्यंत भक्ति-भाव के साथ गणधर वलय विधान किया गया। आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह खबर&#8230; आगरा। आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में हरिपर्वत स्थित एमडी जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में हरिपर्वत स्थित एमडी जैन इंटर कॉलेज के आचार्य श्री शांति सभागार में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के तीसरे दिन अत्यंत भक्ति-भाव के साथ गणधर वलय विधान किया गया। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में हरिपर्वत स्थित एमडी जैन इंटर कॉलेज के आचार्य श्री शांति सभागार में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के तीसरे दिन अत्यंत भक्ति-भाव के साथ गणधर वलय विधान किया गया। यह भव्य विधान आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ तथा आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी व विज्ञमति माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य में संपन्न हुआ। विधान में लगभग 350 इंद्र-इंद्राणियों ने सम्मिलित होकर पुण्यार्जन किया और अष्ट कर्मों को दूर करने के लिए प्रभु के समक्ष अर्घ्य समर्पित किए। भक्तगण बड़े ही उत्साह के साथ नृत्य करते हुए भक्ति के आनंद में डूबे नजर आए।</p>
<p><strong>प्रमुख पात्रों द्वारा 520 अर्घ्य समर्पित</strong></p>
<p>बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया जी के निर्देशन में भगवान की शांतिधारा और अभिषेक के साथ विधान की शुरुआत हुई। आर्यिका विज्ञमति माताजी के श्रीमुख से उच्चारित श्गणधर वलय विधानश् में 100 सौधर्म इंद्रों ने अपने साथी इंद्र-इंद्राणियों के साथ नृत्य कर प्रभु की आराधना की।</p>
<p><strong>यह है विधान के प्रमुख पात्र </strong></p>
<p>विधान के प्रमुख पात्रों ने संगीतमय स्वरलहरियों के बीच पूजा-अर्चना कर 520 अर्घ्य समर्पित किए। इनमें मुख्य रूप से सौधर्म इंद्र यतेंद्र कुमार अभिलाषा जैन, कुबेर राजेंद्र कुमार जैन नीलम जैन लुहाड़िया, यज्ञनायक इंद्र सुरेश कुमार माया जैन, ईशान इंद्र जिनेंद्र कुमार अनीता जैन और चक्रवर्ती इंद्र सुबोध पाटनी शची पाटनी शामिल रहे। इनके अतिरिक्त मोहन स्वरुप नूतन जैन, रवि कुमार बीना जैन, पदम चंद प्रेमलता जैन, इंद्र जितेंद्र कुमार अंशु जैन, रमेशचंद मधुलता जैन, वीरेंद्र कुमार पूनम जैन और राजेंद्रकुमार विमलेश जैन परिवार ने भी इंद्र इंद्राणी के रूप में पूजा-अर्चना कर विधान के अर्घ्य समर्पित किए।</p>
<p><strong>पापों और दोषों से मुक्त करता है यह विधानः विज्ञमति माताजी</strong></p>
<p>इस पावन अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका विज्ञमति माताजी ने कहा कि 24 तीर्थंकरों के गणधरों की भक्ति और अर्चना करने से व्यक्ति के सभी रोग, शोक, भय और ऋण दूर हो जाते हैं। यह विधान जीवन को सभी प्रकार के दोषों और पापों से मुक्त करने वाला एक महान अनुष्ठान है।</p>
<p><strong>महाआरती और मंच संचालन</strong></p>
<p>सायंकाल 7 बजे से प्रभु की महाआरती की गई और संतों के मंगल प्रवचन हुए, जिसका उपस्थित श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया। इस पूरी धर्मसभा का संचालन आगरा दिगंबर जैन परिषद के महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार ने किया। धर्मसभा मे मुख्य रूप से परिषद महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार, अर्थ मंत्री राकेश जैन परदे वाले,उपमंत्री विमल जैन, प्रचार मंत्री आशीष जैन मोनू, दीपक जैन, कुमार मंगलम जैन, प्रवीण जैन, पंकज जैन, मनीष जैन लवली, सचिन जैन, अनुज जैन क्रांति, उषा जैन, सपना जैन आशा जैन, अनिता जैन उपस्थित रहे।</p>
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		<title>आचार्य श्री इंद्रनंदी जी के सानिध्य में गणधर वलय विधान आयोजित: भक्तों ने समर्पित किए 520 अर्घ्य </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:17:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ एवं आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ के मंगल पावन सानिध्य में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ गणधर वलय विधान संपन्न हुआ। आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह रिपोर्ट&#8230; आगरा। दिगंबर जैन परिषद के तत्वाधान में हरीपर्वत स्थित एम.डी. जैन इंटर कॉलेज फील्ड के आचार्य श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ एवं आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ के मंगल पावन सानिध्य में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ गणधर वलय विधान संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> दिगंबर जैन परिषद के तत्वाधान में हरीपर्वत स्थित एम.डी. जैन इंटर कॉलेज फील्ड के आचार्य श्री शांति सभागार में भव्य धार्मिक आयोजन गतिमान है। कार्यक्रम के दूसरे दिन आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ एवं आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ के मंगल पावन सानिध्य में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ गणधर वलय विधान संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया जी के कुशल निर्देशन में भगवान की शांतिधारा और पवित्र अभिषेक की क्रियाएं संपन्न की गईं। संगीतमय स्वरलहरियों के बीच इंद्र-इंद्राणी सहित विधान के प्रमुख पात्रों ने पूजा-अर्चना की।</p>
<p><strong>यह हुए विधान में शामिल</strong></p>
<p>विधान में सौधर्म इन्द्र यतेंद्र कुमार व अभिलाषा जैन, कुबेर राजेंद्र कुमार जैन व नीलम जैन लुहाड़िया, यज्ञनायक इन्द्र सुरेश कुमार व माया जैन, ईशान इन्द्र जिनेन्द्र कुमार व अनीता जैन तथा चक्रवर्ती इन्द्र सुबोध पाटनी व शची पाटनी शामिल हुए। इसके साथ ही मोहन स्वरुप व नूतन जैन, रवि कुमार व बीना जैन, पदम चंद व प्रेमलता जैन, इन्द्र जितेंद्र कुमार व अंशु जैन, रमेश चंद व मधुलता जैन, वीरेन्द्र कुमार व पूनम जैन और राजेंद्र कुमार व विमलेश जैन परिवार ने मुख्य भूमिका निभाते हुए देव-शास्त्र-गुरु की आराधना की।</p>
<p><strong>भक्ति रस में सराबोर</strong></p>
<p>विधान के इस द्वितीय दिन सभी भक्तों ने मिलकर गणधर गुरुओं को 520 अर्घ्य समर्पित किए। इस भव्य धार्मिक महोत्सव में लगभग 350 श्रद्धालु विधान की वेदियों पर बैठे हुए हैं और सभी भक्तगण भक्ति रस में सराबोर होकर नृत्य करते हुए धर्म लाभ ले रहे हैं।</p>
<p><strong>ऋजुमति और विपुलमति को धारण किया</strong></p>
<p>आर्यिका विज्ञमति माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए जैसे एक सुंदर महिला अपने रसोई को संभाल करके रखती है, कोष्ठ को संभाल करके रखती है, ठीक उसी प्रकार तीर्थंकर के ये सचिव, जिनको हम गणधर कहके बुलाते हैं, गणाधिपति कहके बुलाते हैं, गणीश कहते हैं, तमाम नामों के द्वारा उनका परिचय अभी आपको स्तवन के द्वारा सुनने को मिलेगा। तो ओ गणधर देव उन बुद्धि-ऋद्धि के माध्यम से, चार बुद्धियों को जिन्होंने अपने अंदर समाहित किया है, मनःपर्यय ज्ञान से उन्होंने ऋजुमति और विपुलमति को धारण किया है।</p>
<p><strong> सभा अब साधारण सभा नहीं</strong></p>
<p>आने वाला भक्त किस प्रकार का है, उसका चेहरा पढ़ा जा सकता है। परीक्षक है अथवा परीक्षा में बैठने आया है? यहाँ भी तमाम लोग बैठे हैं, कुछ इसलिए बैठे हैं कि क्या बोला जा रहा है, क्या पढ़ा जा रहा है, वो सही है अथवा गलत है। अगर गलत है तो उसको हम कुछ बोलने का अवसर ढूँढेंगे। मित्रों, ये सभा अब साधारण सभा नहीं है। इस सभा को अब गणधर की सभा कहिए, जिसमें 1492 गणधर का हमने यहाँ स्थापना करने का मन बनाया है।आचार्य इंद्र नंदी महाराज जी ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। धर्म सभा का कुशल संचालन महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार ने किया।</p>
<p><strong>यह समाजजन रहे मौजूद</strong></p>
<p>धर्मसभा में मुख्य रूप से जितेंद्र जैन, पूर्व मंत्री सुनील जैन ठेकेदार, मनोज जैन बाकलीवाल,परिषद के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार, उपमंत्री विमल जैन, अर्थ मंत्री राकेश जैन परदे वाले, प्रचार मंत्री आशीष जैन मोनू, अनन्त जैन, सतेंद्र जैन, दीपक जैन, कुमार मंगलम जैन, सुबोध जैन,प्रवीण जैन, पंकज जैन,सचिन जैन, प्रांजल जैन, उषा जैन, बीना बैनाड़ा, सपना जैन सहित सकल जैन समाज मौजूद था। 17 जून प्रातः 7 बजे से मुनि संघ एवं आर्यिका के सानिध्य में गणधर वलय विधान में अर्घ्य समर्पण शांतिसागर सभागार, हरिपर्वत आगरा में होंगे।</p>
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		<title>गणधर वलय विधान का घटयात्रा निकालकर किया शुभारंभ : बैंडबाजों और भजनों की धुन पर भक्ति नृत्यों में लीन रहीं महिलाएं   </title>
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		<pubDate>Tue, 16 Jun 2026 07:31:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सभागार में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य में नगर के इतिहास में पहली बार गणधर वलय विधान का शुभारंभ हुआ। श्री पल्लीवाल दिगम्बर जैन मंदिर धूलियागंज से घटयात्रा भगवान महावीर के जयकारों के साथ निकाली गई। आगरा से पढ़िए, राहुल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांति सभागार में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य में नगर के इतिहास में पहली बार गणधर वलय विधान का शुभारंभ हुआ। श्री पल्लीवाल दिगम्बर जैन मंदिर धूलियागंज से घटयात्रा भगवान महावीर के जयकारों के साथ निकाली गई। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में एमडी जैन इंटर कॉलेज फील्ड के हॉल, हरीपर्वत में आचार्य श्री शांति सभागार में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी, विज्ञमति माताजी ससंघ के मंगल सानिध्य में नगर के इतिहास में पहली बार गणधर वलय विधान का शुभारंभ हुआ। श्री पल्लीवाल दिगम्बर जैन मंदिर धूलियागंज से घटयात्रा भगवान महावीर के जयकारों के साथ निकाली गई। धूलियागंज से घटिया होते एमडी जैन, हरिपर्वत पर संपन्न हुई घटयात्रा में ढोल- नगाडों के साथ महिलाएं 200 कलश लेकर चल रही थीं और सभी इंद्र-इंद्राणी बग्गियों पर सवार थे। सौधर्म इंद्र यतेंद्र कुमार अभिलाषा जैन, कुबेर राजेंद्र कुमार जैन नीलम जैन, लुहाड़िया, यज्ञनायक इंद्र सुरेश कुमार माया जैन, ईशान इंद्र जिनेंद्र कुमार अनिता जैन, चक्रवर्ती इंद्र सुबोध पाटनी शचि पाटनी, मोहन स्वरुप नूतन जैन, रवि कुमार बीना जैन, पदम चंद प्रेमलता जैन, इंद्र जितेंद्र कुमार अंशु जैन, रमेश चंद मधुलता जैन, वीरेंद्र कुमार पूनम जैन, राजेंद्र कुमार विमलेश जैन घटयात्रा में शामिल रहीं।</p>
<p><strong>इन सौभाग्यशालियों ने किया ध्वजारोहण और चित्र अनावरण आदि </strong></p>
<p>बैंडबाजों की मधुर ध्वनि पर श्रद्धालुजन नृत्य करते हुए चल रहे थे। भक्ति संगीत पर महिलाएं झूम रही थीं। इसके बाद बाल ब्रह्मचारी आशीष भैया जी ने धार्मिक क्रियाएं एवं ध्वजारोहण प्रदीप जैन पीएनसी परिवार और पंडाल उद्घाटन विमलेश कुमार उषा जैन मार्शंस, हीरालाल बैनाड़ा बीना बैनाड़ा परिवार ने किया। मंडप उद्घाटन निर्मल मोठ्या विमल जैन मोठ्या परिवार ने किया। चित्र अनावरण जितेंद्रकुमार जैन, पुष्पेंद्र जैन पथिक, अशोक जैन पूर्व डिप्टी मेयर ने किया और दीप प्रज्वलन विमल कुमार सिंघई, राकेश जैन पार्षद, मनोज जैन बाकलीवाल, सुनील जैन ठेकेदार ने किया।</p>
<p><strong>बहुत सुंदर अवसर हम सब के बीच में हैं</strong></p>
<p>आर्यिका विज्ञमति माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिनसे बात करेंगे, वे उन विश्व गुरु की, जो विश्व गुरु तारणहार हैं। उस काट की नौका पर बैठे हैं, जो स्वयं भी किनारे बहेंगे और उस नौका में जो भी सवार होंगे, उनको भी किनारे कर देंगे। बहुत सुंदर अवसर हम सब के बीच में हैं। संपूर्ण महा विद्याओं के पारगामी प्रत्यक्ष ज्ञान के स्वामी बन करके उन आठ ऋद्धियों को प्राप्त किया, जो ऋद्धियां आसानी से प्राप्त नहीं हुआ करती हैं। उग्र तप करके जिन्होंने अपने आप को देशावधि, परमावधि, सर्वावधि ज्ञान से सुसंस्कृत किया।</p>
<p><strong> स्तवन हमारे ज्ञान के ऊपर जो अज्ञान को खत्म करता है</strong></p>
<p>चार बुद्धियां जिनके पास में चरणचेरी बनकर के प्रति समय विद्यमान रहती हैं। ऐसे गंधार देव जो संपूर्ण मुनि संघ के अधिपति हुआ करते थे। उन 1492 गणधर का आज हम ऐसा स्तवन करने चल रहे हैं, जो स्तवन हमारे ज्ञान के ऊपर जो अज्ञान पटल है, उसको उघाड़ने में ऐसा कार्य करना होगा। उनके पास जो बीज बुद्धि है, उनके पास जो पादानुसारी ऋद्धि है, उनके पास जो संभिन्नश्रोत बुद्धि है, यह बुद्धियां अगर उनके पास ना हो, तो निश्चित है वो भगवान की वाणी को कभी झेलने में समर्थ नहीं हो सकते। कोष्ठ बुद्धि उसी प्रकार है, जैसे हम अपने स्टोर में हर चीज़ को स्टोर करके रखते हैं कि आपत्ति काल में अथवा जब आवश्यकता होगी, तो तुरंत हर बाज़ार में नहीं जाना पड़ेगा।</p>
<p><strong>इन समाजजनों की मौजूदगी से सभा रही गर्वित </strong></p>
<p>धर्मसभा में मुख्य रूप से प्रदीप जैन पी.एन. सी, जितेंद्र जैन, हीरालाल बैनाड़ा, निर्मल मोठ्या, सुशील जैन सघई, सुनील जैन संघई संगीत, पन्नालाल बैनाड़ा, पूर्व मंत्री सुनील जैन ठेकेदार, अशोक जैन पूर्व डिप्टी मेयर, परिषद के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद जैन, महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार, अर्थ मंत्री राकेश जैन परदे वाले, उपमंत्री विमल जैन, पवन जैन, प्रचार मंत्री आशीष जैन मोनू, अनन्त जैन, मनीष जैन लवली, पारस जैन, कुमार मंगलम जैन, अनुज जैन क्रांति, दीपक जैन, रवि जैन, मयंक जैन, अविनाश जैन, पंकज जैन, प्रांजल जैन, सुबोध जैन, रमेश जैन, सचिन जैन,रमेश जैन, राजेश जैन सहित सकल जैन समाज मौजूद था। धर्मसभा का संचालन महामंत्री मनीष जैन ठेकेदार ने किया।</p>
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		<title>गणधर वलय विधान में भक्तों ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया: मुनि श्री जयंतसागर जी के तृतीय मुनि दीक्षा दिवस भक्तिमय तरीके से मनाया </title>
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		<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 13:20:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सारस्वतसागर जी महाराज, मुनि श्री जयंतसागर जी और मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज रुकडी के श्री आदिनाथ भगवान दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। यहां बुधवार को श्री आदिनाथ भगवान दिगंबर जैन मंदिर में श्री भगवान महावीर मनोकामना सिद्धि विधान और गुरुवार को लघु गणधर वलय महामंडल विधान किया गया। रुकड़ी से पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री सारस्वतसागर जी महाराज, मुनि श्री जयंतसागर जी और मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज रुकडी के श्री आदिनाथ भगवान दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। यहां बुधवार को श्री आदिनाथ भगवान दिगंबर जैन मंदिर में श्री भगवान महावीर मनोकामना सिद्धि विधान और गुरुवार को लघु गणधर वलय महामंडल विधान किया गया। <span style="color: #ff0000">रुकड़ी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>रुकडी(महाराष्ट्र)।</strong> आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वतसागर जी महाराज, मुनि श्री जयंतसागर जी और मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज रुकडी के श्री आदिनाथ भगवान दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। यहां बुधवार को श्री आदिनाथ भगवान दिगंबर जैन मंदिर में श्री भगवान महावीर मनोकामना सिद्धि विधान और गुरुवार को लघु गणधर वलय महामंडल विधान किया गया। मुनिश्री सारस्वतसागर जी ने अपने प्रवचन में अहिंसा का महत्व बताया। मुनि श्री जयंतसागर जी ने 2023 में बड़ौत, 2024 में सोलापुर और 2025 में नांद्रे में चातुर्मास किया है। उन्होंने पाठशाला के बच्चों को संस्कारित करने का कार्य किया है। मुनिश्री सिद्धसागर जी ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांत अहिंसा, सत्य, अचौर्य अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य एवं अनेकांतवाद पर आधारित हैं। भगवान महावीर स्वामी ने सभी जीवों पर दया करने का संदेश दिया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक पाटील ने बताया कि जैन धर्म में मुनि दीक्षा लेकर आचार्य गुरु के मार्गदर्शन में अपना जीवन समर्पित करना है। सांसारिक जीवन से बाहर निकलकर मोक्ष मार्ग पर चलने के लिए मुनि दीक्षा लेते हैं। मुनि दीक्षा दिन का भी बडा महत्त्व है।</p>
<p>गुरुवार को शत तारका लॉन में मुनि श्री जयंतसागर जी का तृतीय मुनि दीक्षा दिवस भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। आहारचर्या, गुरु पूजा, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट और मुनिराज के प्रवचन हुए। वीर सेवा दल, वीर महिला मंडल, महावीर तरुण मंडल ने संपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया था। कार्यक्रम में सोलापुर, कोल्हापुर, नांदणी, सांगली, नांद्रे, जयसिंगपुर माणगाव, रुई, हुपरी, इचलकरंजी, भिंड से श्रावक-श्राविकाएं और मुनिश्री के भक्त बडी संख्या में उपास्थित थे।</p>
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		<title>मुनिसंघ के सान्निध्य में एक नवंबर को झिरनो में गणधर वलय विधान होगा: मुनिश्री प्रमाणसागर जी ने बताया छोटे दान का बड़ा महत्व  </title>
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		<pubDate>Wed, 29 Oct 2025 13:27:10 +0000</pubDate>
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<p><strong>गरीबी की दशा में यदि व्यक्ति दान करता है तो उसका प्रभाव असाधारण पड़ता है। यह जरुरी नहीं कि संपन्न व्यक्ति ही दान करे। दान देने के लिए गरीबी और आर्थिक संपन्नता के स्थान पर उदारता का होना आवश्यक है। यह यह उदगार गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>भोपाल।</strong> गरीबी की दशा में यदि व्यक्ति दान करता है तो उसका प्रभाव असाधारण पड़ता है। यह जरुरी नहीं कि संपन्न व्यक्ति ही दान करे। दान देने के लिए गरीबी और आर्थिक संपन्नता के स्थान पर उदारता का होना आवश्यक है। यह यह उदगार गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में व्यक्त किए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि मुनिश्री 31 अक्टूबर को एमए सिटी (मेनिट) महाविधालय में छात्र-छात्राओं को संबोधित करेंगे एवं 1 नवंबर को मुनिसंघ का दिगंबर जैन मंदिर झिरनों में पदार्पण होगा तथा यहां गणधर वलय विधान किया जा रहा है। मुनि श्री ने प्रातःकालीन धर्म सभा में कहा कि जीवन में चार चीजें अत्यंत दुर्लभ है दरिद्र का दान, समर्थ की क्षमा, यौवन अवस्था में इंद्रिय निग्रह, सत्वशील का तप।</p>
<p>मुनिश्री प्रमाणसागरजी ने सबसे पहले दान की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जरुरी नहीं कि संपन्न व्यक्ति ही दान करे उन्होंने कहा कि दान के लिए गरीबी और आर्थिक संपन्नता के स्थान पर उदारता जरूरी है। देखा गया है कि आर्थिक रूप से दरिद्र व्यक्ति कदाचित रूप से दान कर देता है लेकिन, जो आर्थिक रूप से मजबूत है लेकिन, वैचारिक रूप से दरिद्र है वह तो सपने में भी दान नहीं कर सकता। ऐसा व्यक्ति धन से समृद्ध होते हुए भी उस गरीब व्यक्ति की तुलना में काफी कृपण है। उन्होंने कहा कि हमने ऐसे अनेक लोगों को देखा जिनके जीवन की शुरुआत गरीबी की दशा से हुई लेकिन, उनके छोटे से दान से आज समृद्धि के शिखर पर पहुंच गए। उन्होंने वर्ष 2009 में श्री सम्मेदशिखर जी प्रवास की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि दशलक्षण पर्व के शिविर में सोला का भोजन बनाने आई एक बहन की इच्छा गुणायतन मंदिर शिलान्यास में एक शिला रखने की हुई। फलस्वरूप उसने अपनी पायल देने का भाव रखा। कमेटी की ओर से जब प्रस्ताव हमारे पास आया तो हमने कहा कि ऐसी बहन का तो मंच पर सम्मान करना चाहिए। सवाल उनकी राशि का नहीं। सवाल उसकी भावना का है। अल्प समर्थ होते हुए भी किया गया दान बड़े-बड़े दानियों को भी आश्चर्य में डाल देता है।</p>
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		<title>श्री विरागोदय तीर्थ में जिनबिंब महास्तकाभिषेक महोत्सव 2025: पांच दिवसीय आयोजन 19 से 23 अक्टूबर तक किया जाएगा  </title>
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		<pubDate>Wed, 15 Oct 2025 08:18:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणाचार्य विराग सागर के शिष्य पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महामुनिराज ससंघ के मंगलमय सानिध्य में महामस्तकाभिषेक 19 से 23 अक्टूबर तक होगा। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि महामस्तकाभिषेक सुबह 7 से 10 बजे तक होगा। पथरिया से पढ़िए, यह खबर&#8230; पथरिया। गणाचार्य विराग सागर के शिष्य पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महामुनिराज ससंघ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणाचार्य विराग सागर के शिष्य पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महामुनिराज ससंघ के मंगलमय सानिध्य में महामस्तकाभिषेक 19 से 23 अक्टूबर तक होगा। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि महामस्तकाभिषेक सुबह 7 से 10 बजे तक होगा। <span style="color: #ff0000">पथरिया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पथरिया।</strong> गणाचार्य विराग सागर के शिष्य पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महामुनिराज ससंघ के मंगलमय सानिध्य में महामस्तकाभिषेक 19 से 23 अक्टूबर तक होगा। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि</p>
<p>महामस्तकाभिषेक सुबह 7 से 10 बजे तक होगा। 21 अक्टूबर 2025 वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण महोत्सव (दीपावली) उत्सव एवं ध्वजारोहण समारोह 22 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे से गणधर वलय विधान होगा। 23 अक्टूबर गुरु मंदिर शुद्धि एवं मंदिर में गणाचार्य विराग सागर जी की मूर्ति प्रतिष्ठा होगा एवं दोपहर 1 बजे से आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ससंघ का भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह भी होगा। यह आयोजन सकल जैन समाज पथरिया एवं वर्षायोग समिति के तत्वावधान में होगा।</p>
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		<title>दीक्षार्थी अवनीश भाई की अनुमोदना कर गोद भराई की रस्म की : दीक्षार्थी ने गणधर वलय विधान की पूजा की, 9 दिवसीय अखंड णमोकार मंत्र पाठ का हुआ समापन </title>
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		<pubDate>Wed, 01 Oct 2025 14:17:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धार्मिक णमोकार मंत्र के जाप से पाप नष्ट होते हैं, कर्मों का क्षय होता है तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने यह मंगल देशना बुधवार को धर्मसभा में दिए। टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; टोंक। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित अतिशय क्षेत्र टोंक में विराजित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धार्मिक णमोकार मंत्र के जाप से पाप नष्ट होते हैं, कर्मों का क्षय होता है तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने यह मंगल देशना बुधवार को धर्मसभा में दिए। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित अतिशय क्षेत्र टोंक में विराजित हैं। आचार्य श्री के सानिध्य में बुधवार को अनेक धार्मिक अनुष्ठान सुबह से लेकर रात्रि तक हुए। जिसमें सुबह दीक्षार्थी अवनीश भाई द्वारा श्रीजी का पंचामृत अभिषेक किया गया। आचार्य श्री के प्रवचन के बाद 9 दिवसीय अखंड णमोकार मंत्र पाठ का समापन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में हुआ। अचार्य संघ की आहारचार्य के बाद दीक्षार्थी अवनीश भाई द्वारा कर पात्र में भोजन ग्रहण किया गया। दोपहर में संघ सानिध्य में वृहद प्रतिक्रमण प्रत्ययाखान कर दीक्षार्थी द्वारा गणधर वलय विधान की पूजन की गई। शाम को संपूर्ण समाज द्वारा बिनौरी शोभायात्रा निकाली जाकर दीक्षा की अनुमोदना के लिए श्रीफल,सूखे मेवे आदि से गोद भरी गई।</p>
<p><strong>आयु परिवर्तन का महत्व समझना जरूरी</strong></p>
<p>प्रातः काल आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि जीवन परिवर्तनशील है। संसारी प्राणी जन्म लेता है, शरीर में आयु अनुसार बालपन, किशोर अवस्था ,युवक अवस्था प्रौढ़ और बुढ़ापा क्रम से आता है। इसलिए जीवन में आयु परिवर्तन का महत्व समझना जरूरी है कि हर पल हर क्षण हमारी आयु कम हो रही है। कल भव्य प्राणी दीक्षा ले रहे हैं। दीक्षा व्यक्ति तभी लेता है जब वह संसार के दुखों से थक जाता है। संसार उसे कष्टमय लगता है। संसार के डॉक्टर जवाब दे देते हैं, तब व्यक्ति अपनी जिन धर्म पर आस्था के कारण सबसे बड़े गुरु आचार्य परमेष्ठी के पास आता है और निवेदन करता है कि आप मुझे दीक्षा देकर जन्म मरण के रोग से छुटकारा दिला दो। मैं दीक्षा लेना चाहता हूं। दीक्षा जीवन में आमूल चूल परिवर्तन है, दीक्षा लेने से ड्रेस, एड्रेस और लंच बदल जाता है। यह मंगल देश नाम आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने प्रथम आचार्य शांति सागर जी प्रवचन माला के अंतर्गत धर्म सभा में प्रकट की।</p>
<p><strong>संयम दीक्षा रूपी बांध से पुण्य रूपी ऊर्जा की प्राप्ति</strong></p>
<p>श्री ने आगे बताया कि अतिशय क्षेत्र टोंक नगर में 9 दिन अखंड श्री णमोकार मंत्र का पाठ संपूर्ण समाज ने आचार्य संघ सानिध्य में किया है। इससे पाप कर्म से आप बचते हैं ,कर्मों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज ने भी अपने जीवन में 18 करोड़ से अधिक मंत्रों का जाप किया। मंत्र जाप से मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर होता है। जिस प्रकार पानी को रोक कर बांध बनाया जाता है। उसे ऊर्जा प्राप्त होती है। उसी प्रकार इस जीवन में संयम दीक्षा रूपी बांध से हमें पुण्य रूपी ऊर्जा की प्राप्ति होती है। बांध बनने से नदी का जलस्तर ऊंचा हो जाता है। उसी प्रकार संयम धारण करने से हमारे जीवन में भी उन्नति प्राप्त होती है जिस प्रकार आप पानी को नीचे से ऊपर विद्युत पंप से चढ़ाते हैं। उसी प्रकार जीवन में संयम रत्नत्रय धर्म रूपी विद्युत पंप से जीवन उन्नति को प्राप्त होता है। व्रत नियम से जीवन में उन्नति होती है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया</strong></p>
<p>समाज प्रवक्ता पवन कंटान व विकास जागीरदार ने बताया कि इस अवसर पर मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने उपदेश मैं बताया कि 84 लाख मित्रों का राजा णमोकार मंत्र है। भावपूर्वक स्मरण सुनने करने से कुत्ता, बैल और अंजन चोर देवगती को प्राप्त हुए। बुधवार की धर्मसभा में प्रसिद्ध भामाशाह आरके मार्बल ग्रुप किशनगढ़ की 6 व्रत प्रतिमाधारी सुशीला अशोक पाटनी ने आचार्य श्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रीजी एवं आचार्य शांति सागर जी के एवं पूर्वाचार्यों के चित्र के समक्ष दीप प्रवज्जलन कर आचार्य श्री को जिनवाणी भेंटकर पूजन करने का सौभाग्य नमीष जैन अध्यक्ष पोरवाड़ समाज इंदौर, निर्मल छाबड़ा रायपुर, राजेश पंचोलिया इंदौर पवन धनोते सनावद को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>दीक्षार्थी का केशलोच 2 अक्टूबर को</strong></p>
<p>2 अक्टूबर को प्रातः दीक्षार्थी के 5 बजे केशलोच पश्चात मंगल स्नान होगा। श्री जी का अभिषेक करेंगे। संघ के आहार के बाद प्राप्त 10:00 बजे दीक्षा संस्कार किया जाकर दीक्षार्थी का नया नाम करण किया जाएगा।सौभाग्य की बात है कि संघ के मुनि श्री हितेंद्र सागर जी , आर्यिका श्री निर्मोह मति, श्री पद्मयश मति ,श्री दिव्ययश मती का भी विजयदशमी को दीक्षा दिवस है।</p>
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