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	<title>गंधोदक &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>गंधोदक &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>नव दीक्षित साधुओ की आहार चर्या देखने भक्तों की उमड़ी भीड़ : प्रतिदिन होगा श्री भक्तावर महा मंडल विधान  </title>
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		<pubDate>Tue, 25 Nov 2025 08:11:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री सुधा सागरजी ने कहा कि तुम्हें दुःखी देखा नहीं कि मैं दुःखी हो जाता हूं कि मेरा भक्त परेशान हो। वही विजय धुर्रा ने कहा कि असीम क़ालीन भक्तावर के रूप में भक्तों को एक रक्षा कवच मिला है। थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; थूवोनजी। तुम्हें दुःखी देखा नहीं कि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनिश्री सुधा सागरजी ने कहा कि तुम्हें दुःखी देखा नहीं कि मैं दुःखी हो जाता हूं कि मेरा भक्त परेशान हो। वही विजय धुर्रा ने कहा कि असीम क़ालीन भक्तावर के रूप में भक्तों को एक रक्षा कवच मिला है। <span style="color: #ff0000">थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>थूवोनजी।</strong> तुम्हें दुःखी देखा नहीं कि मैं दुःखी हो जाता हूं कि मेरा भक्त परेशान हो मेरा भक्त होकर ग़रीब है। भगवान इसकी कैसे भी गरीबी दूर करो। कुछ तो पुण्य का उदय रहता है कि छोटा सा बालक है अभी तो गोदी में ही है और उसे महाराज के दर्शन करने तुम लेकर आ गए तो मैं बहुत खुश होता हूं। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सोचता हूं कि ये जन्म-जन्म का धर्मात्मा है, अभी पैदा ही हुआ है और परिवार वाले तीर्थ क्षेत्र के दर्शन कराने ले आए गुरु महाराज के चरणों में लाकर समर्पित कर दिया। ऐसा सहयोग भी बहुत पुण्य के योग से मिलता है। धर्म कराने के तरीके हैं जिस-जिस के दान के पीछे पड़ूं तो समझ लेना कि उसका पैसा पुण्य के उदय से आया है। ड़ाकू और साधु की एक ही जाति है ड़ाकू को पता चले कि सेठ पर माल है ऐसे ही साधु को पता चले तो वह उसे दान के लिए प्रेरित करने लगता है साधु सोचते हैं कि मेरा भक्त इतना पुण्य आत्मा है सब कुछ करके भी दो पैसे बचे हैं तो आगे भी उसका भला होता रहें, इसलिए उसको दान की प्रेरणा दे देता है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-95302" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0015.jpg" alt="" width="642" height="839" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0015.jpg 642w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251125-WA0015-230x300.jpg 230w" sizes="(max-width: 642px) 100vw, 642px" />विश्व शांति महायज्ञ प्रतिदिन होंगी आहुतियां </strong></p>
<p>इस दौरान क्षेत्र कमेटी के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी आने वाले भक्तों के लिए असीम क़ालीन भक्तामर के रूप में एक ऐसा रक्षा कवच प्रदान किया है, जो आपकी रक्षा घर के बाहर रहने पर करेगा। गुरु ने कहा था कि जब आप घर से बाहर रहते हैं तो ये जो विधान कर रहे हैं। यही आपके लिए सुरक्षा चक्र का कार्य करेगा। ऐसे असीम क़ालीन भक्तामर महामंडल विधान का महा मंगल कलश अजयकुमार विजयकुमार कटारिया जयपुर एवं विधान कलश श्राविका शिरोमणि सुशीला पाटनी आरके मार्वल किशनगढ़ ने स्थापित किया।</p>
<p><strong>प्रमुख पात्र बनकर भक्तों ने की शांतिधारा</strong></p>
<p>इस दौरान जगत कल्याण की कामना के लिए शांतिधारा के पात्रों का चयन प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भइया ने करते हुए कहा कि दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के खड़े बाबा का महाभिषेक करने वाले पात्रों को एक साथ चार लाभ मिल रहे हैं। ऐसे परिवार का नाम गुरु मुख से होगा। परिवार जनों के नाम शांतिधारा में आ रहे हैं। उन्हें गंधोदक से परिपूर्णित रजत कलश एवं खड़े बाबा का विशाल चित्र सम्मान स्वरूप कमेटी द्वारा भेंट किया जा रहा है। महा शांतिधारा करने का सौभाग्य संदीप गोधा मकराना, संजय जैन नेयेडा, शीला विनोदकुमार मुज्जफरनगर, ज्ञानेंद्र गदिया, सूरज सहित अन्य भक्तों को मिला। इनका सम्मान थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव श्रागर, धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव जैन, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप रानी, जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, उपाध्यक्ष अजीत बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार सहित अन्य प्रमुखजनों ने अभिनंदन किया।</p>
<p><strong>बचें हुए पैसे को धर्म कार्य में लगा कर यश कीर्ति अर्जित करें </strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि बचे हुए पैसे को धर्म कार्य में लगा कर यश कीर्ति अर्जित करें, ये जो पैसा बचा है, जो किसी ना किसी धर्म के वृक्ष पर लगा हुआ फल है। बचे हुए पैसे से पाप मत करना। वो तुम्हारे महान पुण्य का फल है। जाओ ये तुम्हारे जन्म-जन्म के पुण्य का फल है। मेरे भक्त के पास पैसा बढ़ता है। मेरे भक्त का व्यापार बढ़ता है तो मेरा सीना छप्पन इंच का हो जाता है। ये जन्म-जन्म का पुण्यात्मा है तो आज संपन्नता की जिंदगी जी रहे। अब आपको आगे इसे आगे बनाए रखने के लिए सतत् पुरुषार्थ करते रहना चाहिए।</p>
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		<title>वार्षिक महोत्सव का कलशाभिषेक जरूर करना चाहिए: मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने राघौगढ़ में अभिषेक की महिमा बताई  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 29 Jun 2025 13:41:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों राघौगढ़ में विराजित हैं। यहां उनके प्रवचन हो रहे हैं। इसका बड़ी संख्या में धर्मावलंबी भाग लेकर लाभ उठा रहे हैं। राघौगढ़ से राजीव सिंघई की पढ़िए, यह खबर&#8230; राघौगढ़। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों राघौगढ़ में विराजित हैं। यहां उनके प्रवचन हो रहे हैं। इसका बड़ी संख्या [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनिश्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों राघौगढ़ में विराजित हैं। यहां उनके प्रवचन हो रहे हैं। इसका बड़ी संख्या में धर्मावलंबी भाग लेकर लाभ उठा रहे हैं। <span style="color: #ff0000">राघौगढ़ से राजीव सिंघई की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>राघौगढ़।</strong> मुनिश्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों राघौगढ़ में विराजित हैं। यहां उनके प्रवचन हो रहे हैं। इसका बड़ी संख्या में धर्मावलंबी भाग लेकर लाभ उठा रहे हैं। मुनिश्री ने कहा कि उमा स्वामी ने तत्त्वार्थसूत्र में कहा- तुम्हें किसी भी वस्तु से तभी मिलेगा जब क्या उसने तुम्हारे लिए कुछ किया है। जिसने अभिषेक मात्र अपने लिए किया है, वह गंधोदक मात्र उसी के काम आएगा तो अभिषेक करते समय आपको संकल्प करना पड़ेगा। ये अभिषेक आप किसके लिए कर रहे है? जिसके लिए कर रहे हैं, वो गंधोदक की एनर्जी उसके पास पहुंच जाएगी, चाहे भले ही वह अस्पताल में कोमा में क्यों न पड़ा हो।</p>
<p><strong>नौकरी है तो एक छुट्टी बचाकर रखना</strong></p>
<p>वार्षिक महोत्सव में जो अभिषेक करते हैं, वह गंधोदक भली एक व्यक्ति बनाये लेकिन, पूरी समाज के एक-एक बच्चे को वह गंधोदक लेना चाहिए। सालभर में तुम किसी दिन आओ या न आओ अभिषेक में, सालभर गंधोदक लो या न लो, उस दिन जरूर आना क्योंकि उस दिन जो कुछ भी होगा, वो पूरी समाज के लिए होगा। वो गंधोदक तुम्हें सालभर में इतनी एनर्जी देगा कि तुम किसी व्यक्ति विशेष के गंधोदक को पूरी सालभर भी लोगे तो उतना काम नहीं करेगा, जो वार्षिक महोत्सव का गंधोदक काम करता है। उस महोत्सव में उस दिन महानुभाव आप अपना घर छोड़कर मत जाना, मात्र जाना है तो इससे बड़ा कोई धर्म कार्य हो जैसे सम्मेद शिखर, आहारदान आदि हो। नौकरी है तो एक छुट्टी बचाकर रखना, यात्रा की एक छुट्टी रखना।</p>
<p><strong>उस दिन के भगवान तुम्हारे लिए उठे हैं</strong></p>
<p>आज पूरे समाज के लिए भगवान बाहर आयंेगे, पूरी समाज के लिए भगवान पांडुकशिला पर बैठेंगे, आज पूरे समाज के लिए गंधोदक बनेगा। उस दिन का गंधोदक प्रत्येक समाज के माथे पर जाना चाहिए। पूरी समाज यदि उस गंधोदक को लगा लेती है, कल आप देखना पूरी समाज में ऐसे अच्छे कार्य होंगे क्योंकि पूरी समाज ने वह गंधोदक लगाया जो पूरी समाज के लिए बनाया गया था। सालभर में कभी अभिषेक करो या न करो, दशलक्षण पर्व में भी अभिषेक करों या न करो लेकिन समाज के प्रत्येक पुरूष वर्ग को वार्षिक महोत्सव का कलशाभिषेक जरूर करना चाहिए क्योंकि उस दिन के भगवान तुम्हारे लिए उठे हैं। ये मूर्ति भक्त के नमोस्तु के अनुसार रंग बदलती है, आज भगवान को किसलिए उठाया है, बस भगवान उतना ही काम करेंगे। महिलाओं से मेरा कहना है और किसी दिन का अभिषेक देखो या न देखो लेकिन, उस दिन का अभिषेक जरूर देखना वह तुम्हारे लिए है। उस दिन का गंधोदक जरूर लगाना।</p>
<p><strong>पारसनाथ अपना सब कुछ छोड़कर बचाने पहुँच गए</strong></p>
<p>जिसने ये भावना भायी है कि संसार का प्रत्येक व्यक्ति सुखी रहे, संसार के प्रत्येक व्यक्ति का हंसता हुआ चेहरा रहें, सारा संसार हरा भरा रहे, किसी की आंख में आंसू न आए, कोई दुखी न रहें, ऐसी भावना भाई है जिन्होंने और इसी भावना से जिन्होंने अभिषेक किया है, जिसने साधना की है, ऐसा जो जीव है, उसी का नाम तीर्थंकर है और उन्ही के मंदिर बनते हैं। तीर्थंकर की पूजा करने से तुम्हारे संकट दूर होंगे क्योंकि, तीर्थंकर बनते समय उन्होंने यही भावना भायी थी कि मैं सारे जगत को सुखी कर सकूँ। पारसनाथ को संकट मोचक दुनिया इसीलिए कहती है क्योंकि, सारी दुनिया देखकर जिन्हें मारती है, उन्हें बचाने के लिए पारसनाथ अपना सब कुछ छोड़कर बचाने पहुँच गए।</p>
<p><strong>तुम्हारी गोदी में तीर्थंकर, तद्भव मोक्षगामी, चक्रवर्ती खेलेंगे</strong></p>
<p>घर से शुरू करो- मम्मी पापा किसके लिए? मेरे लिए, जो मम्मी पापा तेरे काम तो आ जाएंगे लेकिन, तू कभी अच्छे बेटों के बाप नहीं बन पाएगा क्योंकि तूने मम्मी पापा को अपने लिए माना है, मम्मी पापा की सेवा कर रहा है अपने लिए। मकान बना रहा है अपने लिए, जाओ मकान कभी किसी और के काम नहीं आएगा, उस घर में तू अकेला रहेगा, परिवार के लोग भी नहीं रह पाएंगे, वह मकान बेटों को भी नहीं फलेगा। धन कमाया किसके लिए? अपने लिए, वह धन तुम्हारा काम आएगा और तुम्हारे साथ ही खत्म हो जाएगा। अब थोड़ा सा परिवर्तन करों- मम्मी पापा मेरे लिए नहीं है, मैं मम्मी पापा के लिए हूँ, जैसे ही तुम यह भाव करोगे, एक दिन तुम्हारी गोदी में तीर्थंकर, तद्भव मोक्षगामी, चक्रवर्ती खेलेंगे। मकान बनाते समय चाहिए कि यह मकान मैं अपने परिवार के लिए बना रहा और हो सके तो ये मकान मैं मुनिराज के आहार कराने के लिए बना रहा हूँ।</p>
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		<title>जब भी धर्म का कार्य आएगा, हम सब मिलकर करेंगे:  मुनिश्री सुधासागर जी महाराज की धर्मसभा में धर्म और कर्म जीवन की चर्याओं पर चर्चा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 May 2025 07:42:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों धर्मसभा में अपने प्रवचनों के माध्यम से जो उपदेश प्रदान कर रहे हैं। उनका समाजजनों पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। उनकी वाणी से धर्म प्रभावना बढ़ रही है। उनके प्रवचनों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित हो रहे हैं। शनिवार को दिए प्रवचन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों धर्मसभा में अपने प्रवचनों के माध्यम से जो उपदेश प्रदान कर रहे हैं। उनका समाजजनों पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। उनकी वाणी से धर्म प्रभावना बढ़ रही है। उनके प्रवचनों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित हो रहे हैं। <span style="color: #ff0000">शनिवार को दिए प्रवचन की पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कटनी।</strong> मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने यहां धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक वस्तु, प्रत्येक गुण का, प्रत्येक पर्याय का स्वतंत्र अपना अपना अधिकार होता है। सभी क्षेत्र एक समान नहीं होते, कोई द्रव्य एक समान नहीं होता, कितने द्रव्य हैं वे सभी अपनी स्वतंत्र सत्ता रखते हैं, किंचित मात्र से उनकी सत्ता पराधीन नहीं है, स्वचतुष्टय स्वतंत्र होता है। जितने क्षेत्र है हर क्षेत्र भिन्न भिन्न है, सभी क्षेत्रों का एक समान नेचर नहीं है। हर कदम की एनर्जी अलग अलग है, पूरा क्षेत्र एक समान नहीं हो सकता, बहुत ताकतवान एनर्जी भी किसी स्थान पर मिलती है। एक एक पत्थर का नेचर अलग अलग है। पत्थर सेंड स्टोन भी है और मार्बल भी। मार्बल के पत्थर से दही जम जाए और सेंड स्टोन के पत्थर से दही फट जाए। वही पृथ्वीकाय है जिसका सेंडस्टोन बन रहा है, वही थोड़ा अच्छा बन जाये तो डायमंड बन जाये। एक रेत के कारण की एनर्जी स्वतंत्र होती है। एक कौवा पूर्व की दिशा की ओर सुबह-सुबह बोल जाए तो समझ लेना शुभ समाचार आ रहा है और वह कौवा थोड़ा सा उत्तर की तरफ बोल जाए, समझ लेना बुरा समाचार आ रहा है, अब समझिए दिशा का महत्व कितना है।</p>
<p><strong>भव की भी भिन्न भिन्न एनर्जी है </strong></p>
<p>यह मत समझना कि आज का दिन बुरा है तो कल का दिन भी बुरा होगा, नहीं कल का दिन बहुत अच्छा हो सकता है। काल स्वतंत्र है। भव की भी भिन्न भिन्न एनर्जी है। जीव एक ही है, देव भव अलग है, मनुष्य, तिर्यंच भव अलग है, इसमे भी भेद करो, आर्यखण्ड का भव अलग है, म्लेच्छ खण्ड का भव अलग है। इसमे भी भारत व विदेश का भेद करो। इसमे प्रान्त, नगर, मुहल्ले के भेद करो। इसी तरह शरीर के प्रत्येक अंग में अलग-अलग एनर्जी है, आत्मा एक ही है, शरीर एक ही व्यक्ति का है लेकिन नाखुन से लेकर सिर तक एक एक इंच की एनर्जी अलग अलग है। सिर या हाथों का गंधोदक नहीं, पैरो का ही बनता है। आशीर्वाद पैरों से हाथों से बनता है। गंधोदक की ताकत पैरों में है लेकिन आशीर्वाद की ताकत हाथों में है।</p>
<p><strong>विपरीतता बने तो थोड़ा क्षेत्र टाल दो</strong></p>
<p>तिल, भौरी और मसा बसे दाहिने अंग, चाह फिरे वनखंड में, तहां न छोड़े लक्ष्मी संग। ज्योतिष शास्त्र में शरीर के अंग में फड़कन हो तो बहुत बड़े शुभ-अशुभ के संकेत हैं। पुरुष की दाई आंख फड़कना शुभ है और बाई आंख फड़कना अशुभ। स्त्री की बाई आंख फड़के तो शुभ है और दाई आंख फड़के तो अशुभ है। रावण की बाई फड़की तो उसे अशुभ के समाचार मिलने लगे और सीता जी की बाई आंख फड़की तो उन्हें शुभ समाचार मिलने लगे। जब हमारे शरीर मे इतना भेद है तो अन्य वस्तुओं में हम कितना भेद करे। क्षेत्र, काल, भव सबके अपने अपने प्रभाव होते है, कभी तुम्हारे लिए विपरीतता बने तो थोड़ा क्षेत्र टाल दो, थोड़ा काल टाल दो, थोड़ा सा स्थानांतरित करों, कोई न कोई फल मिलता है।</p>
<p><strong>चूहे के समान कपड़े काटोगे तो द्वेष हो जाएगा </strong></p>
<p>किसान ने साल भर मेहनत करके खेत को बोया, बोने के बाद बरसात नहीं हुई तो बीज गया या नहीं। अंकुर आ गया, उजाड़ हो गया तो। फल आ गया, ओले गिर गए तो ये रिस्क है बीज बोने में। फिर फसल काटकर खिलहान में गेंहू लाओ, पीसो, फिर बनाओ तब कंही दो रोटियों का आनंद आता है। बस व्यवहार ऐसा ही है, व्यवहार के लिए बहुत समय चाहिए, बहुत रिस्क है लेकिन व्यवहार के बिना निश्चय का आनंद नहीं सकता, जैसे रोटी बनाए बिना रोटी का आनंद नहीं आ सकता। गाड़ी से एक्सीडेंट होने के बाद भी आज तक गाड़ियां चलना बंद नहीं हुई। जिस जिसमें कष्ट है जरूरी नहीं कि वह त्यागने योग्य है। बस एक कला सीखना है, टेलर बनना है, चूहा नहीं। चूहे के समान कपड़े काटोगे तो द्वेष हो जाएगा, वस्तु मूल्यहीन हो जाएगी और सामने वाला दवाई डालकर तुम्हे मार डालेगा। इस दुनिया या परिवार को चूहा बनकर मत काटना। एक विचार बनाओ कि जब भी धर्म का कार्य आएगा, हम सब मिलकर करेंगे।</p>
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		<title>ऐसा पाप मत करना जिससे राष्ट्र कलंकित हो: मुनिश्री के प्रवचनों में जीवन से जुड़े गुढ़ रहस्य का मिल रहा लाभ  </title>
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		<pubDate>Sat, 19 Apr 2025 16:43:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों बहोरीबंद अतिशय क्षेत्र में विराजमान होकर धर्म प्रभावना कर रहे हैं। उनके उपदेश सुनने के लिए आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रावक यहां पहुंच रहे हैं। शनिवार को उन्होंने प्रवचन में कई महत्वपूर्ण उपदेश दिए।  कटनी। बहोरीबंद अतिशय क्षेत्र में अपने प्रवचन में मुनिश्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज इन दिनों बहोरीबंद अतिशय क्षेत्र में विराजमान होकर धर्म प्रभावना कर रहे हैं। उनके उपदेश सुनने के लिए आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रावक यहां पहुंच रहे हैं। <span style="color: #ff0000">शनिवार को उन्होंने प्रवचन में कई महत्वपूर्ण उपदेश दिए। </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कटनी।</strong> बहोरीबंद अतिशय क्षेत्र में अपने प्रवचन में मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि जीव के अंदर एक चाहत होती है कि सारी दुनिया मेरे लिए हो और जो कुछ भी करता है सब अपने लिए करता है, इसका परिणाम ये निकलता है कि वह कभी भी अपनी इच्छाओं को पूरा नहीं कर पाता, अभी वह सारी दुनिया को अपना नहीं बना पाता और एक दिन ऐसा आता है कि जब अपने भी पराए हो जाते है, यहाँ तक भी अपनी किस्मत, अपना शरीर, ज्ञान, ध्यान और भगवान भी साथ नहीं देते। सारी दुनिया में दवाई कर ली, कोई इलाज ही नहीं लग रहा है, ये ऐसे यक्ष प्रश्न है जिनके समाधान तो है नहीं लेकिन खोजना पड़ेगा। समस्या है तो समाधान भी कंही न कंही है, बीमारी है अर्थात उसका निदान भी है, ये निश्चित समझना। जैसे डाकू है तो इसका अर्थ है दुनिया में साधु भी है, जहाँ पाप है तो पुण्य जरूर दुनिया में है, विपदा आई है तो उसे दूर करने का उपाय जरूर है।</p>
<p><strong>दःख आया है तो घबराओ मत सुख का नंबर आने ही वाला है</strong></p>
<p>ऐसे ही हम अपनी जिंदगी में समझे बुरे दिन आ रहे है तो इसका अर्थ है अच्छा दिन जरूर आएगा ही आएगा। हम अपने अनुभव को अनुमान बनाये और उसका निर्णय करें जो हमारे अनुभव में नहीं आ रहा है, ऐसा ज्ञान जब हमारे अंदर हो जाता है तो हमारी घबराटे खत्म हो जाती है। दुख आया है तो घबराओ मत सुख का नंबर आने ही वाला है। दुख आया है तो ज्यादा अहंकार मत करो, दुख आने में ज्यादा देरी नहीं लगना। जब भी अच्छी कार्य करने की बात आती है तुम तुरंत हा नहीं कहते, आपके मुँह से न निकलता है, यही शब्द बता रहा है कि अभी हमारा कल्याण बहुत दूर है, हम आसन्न भव्य नहीं है। मेरे जीवन में अच्छे दिन कब आएंगे, मैं भगवान कब बनूँगा आदि किसी अच्छी चीज से यदि प्रभावित हो रहे हो कि यह मेरे जीवन में कब आएगा, पहला यदि कोई अच्छी बात कहे तो बिना विचारे आपके मुंह से हां निकालना चाहिए। जितनी अपन भगवान की प्रशंसा करते हैं कि भगवन आप धन्य है, यदि उसका दसवां हिस्सा भी भाव कर ले कि जितनी अपन भगवान की पूजा कर रहे है, उतना स्वयं भगवान बनने का प्रयास कर ले भगवान के स्थान पर तू खुद भगवान बन जाएगा।</p>
<p><strong>तुम गुरु को डाकू समझ रहे हो?</strong></p>
<p>तुम्हें डर लग रहा है कि गुरु के सामने जाऊंगा तो गुरु गुटखा छुड़ा देंगे, मुझे मंदिर जाने का नियम लेना पड़ेगा। इसलिए मैं तो महाराज के पास जाता ही नहीं तो इसका अर्थ है कि तुम गुरु को डाकू समझ रहे हो, क्योंकि डरा तो डाकू से जाता है। कितने ही बड़े पापी हो तुम, कितना ही बड़ा तुम्हे डर लग रहा हो, उस पाप को मत करना जिसको करते हुए तुम्हे मम्मी पापा का डर लगे। यदि तुम्हारे काले कारनामों के कारण मां-बाप की नजर झुक गयी, उनकी आंख में आंसू आ गया, कहां का मैंने ऐसा बेटा पैदा किया, इसने पूर्वजों की सारी इज्जत धूल में मिला दी, एक बार भी यह परिणाम आ गया तो जाओ इससे बड़ा अभिशाप तुम्हारी जिंदगी में नहीं होगा, तुम सैकड़ो भवों तक गंदे मां-बाप के यहां पैदा होंगे, पहली बात तो मां बाप मिलेंगे ही नहीं, अनाथ पैदा होंगे। गर्भ में आओगे ही नहीं, समुर्छनो में पैदा होंगे।</p>
<p><strong>अभिषेक करके गंधोदक लगाओ </strong></p>
<p>कुछ ऐसे कृत्य हैं जहां णमोकार मंत्र की शक्ति भी फेल हो जाती है, जब तुमने ऐसा कृत्य किया और तुम्हारे उपकारी के मन में खेद हो गया, पाप तुमने किया और आंसू मां-बाप के आ गए, नजर उनकी झुक गई, कुल कलंकित हो गया। यदि तुम्हारे कारण से राष्ट्र कलंकित हुआ है तो तुम म्लेच्छ खंड में जन्म लोगे क्योंकि पाप तुमने किया है देश कलंकित हुआ है। आतंकवादी का पाप इसलिए बड़ा है कि आतकंवादी के कारण देश बदनाम होता है कि ये आतंकवादी पैदा करता है। आप जैन है ऐसे पाप मत करना जिससे लोग कहने लगे कि जैनी लोग भी ऐसा पाप करने लगे, करोगे तुम और बदनाम होगी जैन जाति। कोई ऐसा पाप मत करना जिससे तुम्हारा भगवान का अभिषेक करना छूट जाए, गुरुओ को आहारदान देना छूट जाए। आप लिस्ट बनाओ जो पाप तुमने अभिषेक के कारण छोड़ दिए कि मैं भगवान को छूने लायक नहीं रहूंगा, छोड़कर दिखाओ, फिर अभिषेक करके गंधोदक लगाओ तो जाओ कौन सी बीमारी है जो दूर नहीं होगी।</p>
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		<title>थाली में अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागर महाराज के चरण अंकित हुएः प्रत्येक अमावस्या को एक देव शक्ति आती हैं  </title>
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		<pubDate>Thu, 13 Mar 2025 14:35:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़वाह से सिद्धवरकूट विहार कर रहे अंतर्मुखी मुनि श्रीपूज्य सागरजी महाराज के रास्ते में श्रावकों द्वारा पाद प्रक्षालन किया गया, तो उसी थाली में मुनिश्री के चरण अंकित हो गए। सिद्धवरकूट विहार के दौरान बड़वाह के श्रावक ने अपने घर व प्रतिष्ठान पर पाद प्रक्षालन किया। पढ़िए सनावद की यह पूरी खबर&#8230; बड़वाह। साधना, त्याग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बड़वाह से सिद्धवरकूट विहार कर रहे अंतर्मुखी मुनि श्रीपूज्य सागरजी महाराज के रास्ते में श्रावकों द्वारा पाद प्रक्षालन किया गया, तो उसी थाली में मुनिश्री के चरण अंकित हो गए। सिद्धवरकूट विहार के दौरान बड़वाह के श्रावक ने अपने घर व प्रतिष्ठान पर पाद प्रक्षालन किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सनावद की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><iframe title="EB133।थाली में,अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागर महाराज के चरण अंकित हुए।सिद्धवरकूट सहित अनेक न्यूज।" width="1320" height="743" src="https://www.youtube.com/embed/SZIcJ20rxdM?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
<p><strong>बड़वाह।</strong> साधना, त्याग और तप की महिमा आज भी देखने को मिलती है। बड़वाह से सिद्धवरकूट विहार कर रहे अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज के रास्ते में श्रावकों द्वारा पाद प्रक्षालन किया गया, तो उसी थाली में मुनिश्री के चरण अंकित हो गए। अंतर्मुखी मुनि श्रीपूज्य सागरजी महाराज के सिद्धवरकूट विहार के दौरान बड़वाह के श्रावक पूर्णिमा संजय जैन, मोहना वाले बड़वाह और ऋषभ जैन, ओंकारेश्वर रोड ने अपने घर व प्रतिष्ठान पर पाद प्रक्षालन किया। उसके बाद गंधोदक को थाली से निकाल दिया और विहार में वापस शामिल हो गए।</p>
<p><strong>मुनिश्री के चरण चिन्ह थाली में अंकित थे </strong></p>
<p>विहार के बाद श्रावक पूर्णिमा संजय जैन ने घर जाकर देखा तो मुनिश्री के चरण चिन्ह थाली में अंकित थे। उसी प्रकार जब श्रावक ऋषभ जैन ने भी अपनी प्रतिष्ठान में देखा तो उनके यहां भी थाली में चरण चिन्ह अंकित थे।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-76574" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0060.jpg" alt="" width="652" height="1156" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0060.jpg 652w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0060-169x300.jpg 169w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250313-WA0060-578x1024.jpg 578w" sizes="(max-width: 652px) 100vw, 652px" />प्रत्येक अमावस्या को एक देव शक्ति आती हैं </strong></p>
<p>मुनिश्री को ढाई वर्षों से प्रत्येक अमावस्या को अंतरंग में एक देव शक्ति आती हैं उस समय वह श्रावकों के प्रश्नों के उत्तर देते हैं। यह शक्ति 5 से 10 मिनिट के लिए ही आती है।</p>
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		<title>जल का उपयोग करते हो तो उसे पूज्य बनाओ : सुधासागर जी महाराज: मुनि श्री ने बताई जल की शुद्धता का महत्व </title>
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		<pubDate>Fri, 22 Nov 2024 05:56:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सागर में विराजित निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। 21 नवंबर को मुनि श्री ने अपने प्रबोधन में जल की शुद्धता की महत्ता पर प्रकाश डाला। पढ़िए सागर से यह खबर&#8230; सागर। तुम अपनी हर चीज की कमाई का 50 प्रतिशत दान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सागर में विराजित निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। 21 नवंबर को मुनि श्री ने अपने प्रबोधन में जल की शुद्धता की महत्ता पर प्रकाश डाला। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सागर से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> तुम अपनी हर चीज की कमाई का 50 प्रतिशत दान करो। धन, समय, शरीर, पुण्य सबका 50 प्रतिशत दान करो, आंखों से 50 प्रतिशत संसार देखोगे और 50 प्रतिशत परमार्थ देखोगे। 50 प्रतिशत कानों से संसार की बाते सुनोगे तो इतने ही प्रतिशत परमार्थ की बात सुनोगे 12-12 घंटे। यह प्रबोधन निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने सागर में चल रही धर्मसभा में अपने प्रवचन के दौरान दिए। मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि गृहस्थ को कैसे इन पापों से बचाएं। लेकिन, वह पूर्ण धर्म को अंगीकार नहीं कर सकता।</p>
<p>हर कोई मुनि नहीं बन सकता। प्रतिमाएं नहीं ले सकता क्योंकि, उसके लिए शक्ति और साहस चाहिए। वह अपना विनाश देख सकते हैं लेकिन, अपनी कषायों का बलिदान नहीं कर सकते। संसार में देखो शराब पीने वाले स्वयं का पतन देखते हैं लेकिन, उसे छोड़ते नही।इसलिए ऐसा गृहस्थों का उपाय मिले जिसमें उनकी पूंजी में न लगे और कोई बहाना भी न मिले, वो है जिनेंद्रदेव का अभिषेक।</p>
<p><strong>कैसे मिला तुम्हें जैन कुल: मुनि श्री</strong></p>
<p>गृहस्थ जितनी भी क्रियाएं करता है।उनमें सबसे ज्यादा पुण्य का बंध अभिषेक के समय होता है। एक आचार्य दीक्षा देकर मुनि बनाते हैं और तुम श्रावक हो तुम गंधोदक बनाते हो तो एक आचार्य से ज्यादा पूज्य गंधोदक बनाने का सौभाग्य तुम्हें मिला है। जिसे आचार्य भी अपने मस्तक पर धारण करते हैं और उस अधिकार को भी तुम खो देते हो। कैसे मिला तुम्हें जैनकुल- मरते समय तुमने भाव किया होगा कि हे भगवन! मुझे ऐसा कुल मिले जहां मैं जिनेंद्र भगवान को छू सकूं मुनि की अंजलि में आहार दे सकूं।</p>
<p>पांच लोग हैं जिन्हें अभिषेक करने का अधिकार नही है- तिर्यंच, कुंदकुंद की मूल परम्परा के अनुसार स्त्री, कोड़ी-कुष्ठी, जिसने ऐसे कुल में जन्म में लिया है जो मंदिर नहीं जा सकते या कोई ऐसा पाप किया है जिसके कारण समाज से बहिष्कृत हैं। जैनियों को आरक्षण नहीं होता है क्योंकि, जैनी जन्म-जन्म के किस्मत वाले होते हैं। यदि तुम्हें जो अधिकार मिला है इस अधिकार का उपयोग नहीं करोगे तो डायरी में लिख लो, तुम्हारा इन पांच में से कोई एक में जन्म होगा।</p>
<p><strong>बिना नहाए अभिषेक नहीं करना चाहिए</strong></p>
<p>तुम पवित्र जल को गंदा कर देते हो, दूसरा अनछने पानी की एक बूंद में 36 हजार 450 जीव होते हैं तो एक लीटर बाल्टी पानी में कितने जीव होंगे? प्रतिदिन कितने जीवों की हत्या करते हो तो अब उससे बचने का एक ही तरीका है कि या तो इतने पवित्र हो जाओ कि जल तुम्हारे शरीर को छुए और गंधोदक बन जाए। अन्यथा ये जल तुम्हें अभिशाप देगा और डायलिसिस कराना पड़ेगा। अब दूसरा कहना कि मैंने तुझे गंदा नहीं किया है, मैंने तो अभिषेक का नियम लिया है और जिनवाणी ने कहा है कि बिना नहाए अभिषेक नहीं करना तो मैं तो जिनवाणी की आज्ञा मान रहा हूं, इसलिए नहाने के पहले संकल्प करो कि मैं अभिषेक के लिए नहा रहा हूं। वास्तु कहता है किसी भी चीज का तुम उपयोग करते हो तो उसे पूज्य बना दो, मकान का उपयोग करते हो तो कुछ स्थान को, एक आले को पूज्य बना दो। जल का उपयोग करते हो तो उसे पूज्य बना दो। वो जल कहेगा कि इसने मुझे इतना पवित्र बना दिया कि भगवान के मस्तिष्क पर पहुंचा दिया। अब भवान्तरों में तुम जल को नहीं तरसोगे।</p>
<p><strong>गरीबी आए तो मां से भीख मांग लेना</strong></p>
<p>गरीबी आ जाए तो अपनी मां से भीख मंगवा लेना यदि आपकी मां जिंदा है और आप घर में हैं तो मंदिर में आपकी मां दूसरे के बेटे से गंधोदक की भीख न मांग ले। जो बेटा अपनी मांको गंधोदक लाकर देता है। उस समय देवता भी उस मां और बेटे को नमस्कार करते हैं, अन्यथा भवों-भवों तक तुम अनाथ बनोगे। जैन नारी शादी इसलिए करती है कि जवानी में मुझे पति अपने हाथ से बना गंधोदक दे और बेटा इसलिए पैदा करती है कि बुढ़ापे में मेरा बेटा मुझे गंधोदक दे। मंदिर से कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए, मंदिर से एक छोटी सी कलशियां भरकर ले जाओ, एक जल से भरा जब मांगलिक होता है। गंधोदक से भरा हो तब तो बात ही अलग। एक हजार मुनिराजों के आशीर्वाद से भी अधिक प्रभावकारी पालने में लेटे बेटे और बिटिया के मस्तिष्क पर पिता के हाथ से लगाया गया गंधोदक है।ये आठ वर्ष तक करिये बाकी उसकी जिंदगी देखिए उसको कभी दुर्दिन नहीं देखने पड़ेंगे।</p>
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