<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>खड़गासन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%96%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A8/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Wed, 26 Feb 2025 07:40:33 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>खड़गासन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>आचार्य शांति सागरजी के प्रेरणा से अतिशय क्षेत्र बाहुबली (कुंभोज) में 28 फिट उत्तुंग भगवान बाहुबली की खडगासन प्रतिमा का निर्माणः प्रतिमा को ‘‘द स्टेचू ऑफ अहिंसा’’ का नाम दिया गया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/with_the_inspiration_of_acharya_shanti_sagarji_a_28_feet_tall_statue_of_lord_bahubali_was_constructed_in_the_bahubali_area/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/with_the_inspiration_of_acharya_shanti_sagarji_a_28_feet_tall_statue_of_lord_bahubali_was_constructed_in_the_bahubali_area/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Feb 2025 07:40:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyashree Shantisagar Sammed Shikhar Jyoti Rath]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyashree Shantisagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Ajitnathji]]></category>
		<category><![CDATA[Amarkriti]]></category>
		<category><![CDATA[Annual Festival]]></category>
		<category><![CDATA[Atishyakshetra Bahubali]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Elevated Bhagwan Bahubali]]></category>
		<category><![CDATA[Huge Statue]]></category>
		<category><![CDATA[Indore श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jambudweep-Hastinapur]]></category>
		<category><![CDATA[Khadgasan]]></category>
		<category><![CDATA[Kumbhoj]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Shantinath]]></category>
		<category><![CDATA[Mangi-Tungi]]></category>
		<category><![CDATA[Mokshagami Bhagwan]]></category>
		<category><![CDATA[Munishri Samantabhadraji]]></category>
		<category><![CDATA[Prathmacharya Shri Shantisagar Year]]></category>
		<category><![CDATA[Pujya Gyanmati Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Influence]]></category>
		<category><![CDATA[Seth Balchand Devchandji]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Bahubali Bhagwan]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Splendour]]></category>
		<category><![CDATA[अजितनाथजी]]></category>
		<category><![CDATA[अतिशयक्षेत्र बाहुबली]]></category>
		<category><![CDATA[अध्यात्म वैभव]]></category>
		<category><![CDATA[अमरकृति]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री शांतिसागर सम्मेद शिखर ज्योति रथ]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री शांतिसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तुंग भगवान बाहुबली]]></category>
		<category><![CDATA[कुंभोज]]></category>
		<category><![CDATA[खड़गासन]]></category>
		<category><![CDATA[जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म प्रभावना]]></category>
		<category><![CDATA[पूज्य ज्ञानमती माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शांतिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[मांगी-तुंगी]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री समंतभद्रजी]]></category>
		<category><![CDATA[मोक्षगामी भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[वार्षिकोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[विशाल मूर्ति]]></category>
		<category><![CDATA[श्री बाहुबली भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[सेठ बालचंद देवचंदजी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=75389</guid>

					<description><![CDATA[प्रथमानुयोगी जनमानस के लिए एक भगवान का दर्शन ही अच्छा निमित्त हो सकता है। इसी उद्देश्य को लेकर किसी अच्छे स्थान पर विशालकाय श्री बाहुबली भगवान की विशाल मूर्ति खड़ी कराने का प्रशस्त विकल्प जहाँ कहीं भी आचार्यश्री शांतिसागरजी पहुँचते थे, प्रकट करते थे। योगायोग से इसी समय अतिशयक्षेत्र बाहुबली (कुंभोज) में वार्षिकोत्सव होने वाला [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>प्रथमानुयोगी जनमानस के लिए एक भगवान का दर्शन ही अच्छा निमित्त हो सकता है। इसी उद्देश्य को लेकर किसी अच्छे स्थान पर विशालकाय श्री बाहुबली भगवान की विशाल मूर्ति खड़ी कराने का प्रशस्त विकल्प जहाँ कहीं भी आचार्यश्री शांतिसागरजी पहुँचते थे, प्रकट करते थे। योगायोग से इसी समय अतिशयक्षेत्र बाहुबली (कुंभोज) में वार्षिकोत्सव होने वाला था। 18 मील का विहार वृद्धावस्था में पूरा करते हुए नांद्रे से आचार्यश्री शांतिसागरजी श्री क्षेत्र बाहुबली पर संध्या में पहुँचे। पवित्र आनन्दोल्लास का वातावरण पैदा हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए कुंभोज से अभिषेक अशोक पाटील की यह पूरी खबर&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंभोज।</strong> विशालकाय श्री बाहुबली भगवान की मूर्ति कम से कम 25 फीट की खड़ी कराने का प्रशस्त विकल्प जहाँ कहीं भी आचार्यश्री शांतिसागरजी पहुँचते थे, प्रकट करते थे। ‘भावावश्यं भवेदेव न हि केनापि रुध्यते’ होनहार होकर ही रहती है। योगायोग से इसी समय अतिशयक्षेत्र बाहुबली (कुंभोज) में वार्षिकोत्सव होने वाला था। ‘संभव है सत्य संकल्प की पूर्ति हो जाये’ इसी सदाशय से आचार्यश्री के चरण बाहुबली की ओर यकायक बढ़े। 18 मील का विहार वृद्धावस्था में पूरा करते हुए नांद्रे से आचार्यश्री शांतिसागरजी श्री क्षेत्र बाहुबली पर संध्या में पहुँचे। संस्था के मंत्री सेठ बालचंद देवचंदजी और मुनिश्री समंतभद्रजी से संबोधन करते हुए भरी सभा में आचार्यश्री शांतिसागरजी महाराज का निम्न प्रकार समयोचित और समुचित वक्तव्य हुआ। जो आचार्यश्री की पारगामी दृष्टि-सम्पन्नता का पूरा सूचक था।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-75391" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250226-WA0008.jpg" alt="" width="1280" height="856" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250226-WA0008.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250226-WA0008-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250226-WA0008-1024x685.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250226-WA0008-768x514.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250226-WA0008-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250226-WA0008-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250226-WA0008-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250226-WA0008-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250226-WA0008-990x662.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />मुनियों को विहार करते रहना चाहिए </strong></p>
<p>आपकी आंतरिक पवित्र इच्छा है कि यहाँ पर हजारों विद्यार्थी धर्माध्ययन करते रहें इसका मुझे परिचय है। यह कल्पवृक्ष खड़ा करके जा रहा हूँं। भगवान का दिव्य अधिष्ठान सब काम पूरा कराने में समर्थ है। यथासंभव बड़े पाषाण को प्राप्त कर इस कार्य को पूरा कर लीजिये।’’ मुनिश्री समंतभद्रजी की ओर दृष्टि कर संकेत किया-‘‘आपकी प्रकृति (स्वभाव) को बराबर जानता हूँ। यह तीर्थभूमि है। मुनियों को विहार करते रहना चाहिए, इस प्रकार सर्वसामान्य नियम है। फिर भी विहार करते हुए जिस प्रयोजन की पूर्ति करनी है, उसे एक स्थान में यहीं पर रहकर कर लो। जिस प्रकार से कार्य शीघ्र पूरा हो सके पूरा प्रयत्न करना। कार्य अवश्य ही पूरा होगा। सुनिश्चित पूरा होगा। आप सबको हमारा शुभाशिर्वाद है।’’</p>
<p><strong>संस्था का अध्यात्म वैभव बढ़ा है</strong></p>
<p>पूर्णिमा का शुभ मंगल दिन था। शुभ संकेत के रूप में पच्चीस हजार रुपयों की स्वीकृति भी तत्काल हुई। काम लाखों का था। यथाकाल सब काम पूर्ण हुआ। ‘‘पयसा कमलं कमलेन पयरू पयसा कमलेन विभाति सररू।’’ पानी से कमल, कमल से पानी और दोनों से सरोवर की शोभा बढ़ती है। ठीक इस कहावत के अनुसार भगवान् की मूर्ति से संस्था का अध्यात्म वैभव बढ़ा ही है। महाराज का आशीर्वाद ऐसे फलित हुआ। आचार्यश्री शांतिसागरजी के प्रेरणा से अतिशय क्षेत्र बाहुबली (कुंभोज) में 28 फिट उत्तुंग भगवान बाहुबली की खडगासन प्रतिमा का निर्माण हुआ।</p>
<p><strong>प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर वर्ष’ मनाने की प्रेरणा</strong></p>
<p>बीसवीं सदी के प्रथम दिगम्बर जैनाचार्य चारित्र चक्रवर्ती श्री शांतिसागरजी महाराज के महान उपकारों से जन-जन को परिचित कराने के उद्देश्य से पूज्य ज्ञानमती माताजी ने वर्ष 2010 को ‘‘प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर वर्ष’’ के रूप में मनाने की प्रेरणा समस्त समाज को प्रदान की। इस वर्ष का उद्घाटन ज्येष्ठ कृ. चतुर्दशी, 11 जून 2010 को जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर में भगवान शांतिनाथ जन्म-दीक्षा एवं निर्वाणकल्याणक के शुभ दिवस किया गया तथा ज्येष्ठ कृ. चतुर्दशी, 31 मई 2011 तक यह वर्ष पूरे देश के विभिन्न अंचलों में अनेक धर्मप्रभावनात्मक कार्यक्रमों के साथ विभिन्न आयोजनपूर्वक मनाया गया।</p>
<p><strong>ऐतिहासिक स्मारक का किया निर्माण</strong></p>
<p>शाश्वत सिद्धक्षेत्र सम्मेदशिखर में ‘‘आचार्यश्री शांतिसागर धाम’’-आचार्यश्री शांतिसागरजी द्वारा सन् 1927-28 में की गई सम्मेदशिखर यात्रा की स्मृति को दिग्दिगंत व्यापी बनाने हेतु पूज्य माताजी की प्रेरणा से शाश्वत सिद्धक्षेत्र सम्मेद शिखरजी में ‘‘आचार्यश्री शांतिसागर धाम’’ नामक ऐतिहासिक स्मारक का निर्माण किया गया है। यहाँ सम्मेदशिखर जी से प्रथम मोक्षगामी भगवान अजितनाथ जी की 31 फुट उत्तुंग विशाल खड्गासन प्रतिमा विराजमान हो चुकी है, मंदिर में नवग्रह अरिष्ट निवारक 24 तीर्थंकरों की प्रतिमा विराजमानपूर्वक आचार्यश्री के जीवन दर्शन को प्रदर्शित करता भव्य स्मारक के साथ ही विशाल धर्मशालाएं आदि भी उपलब्ध हैं ।</p>
<p><strong>दक्षिण भारत में ‘‘आचार्यश्री शांतिसागर सम्मेद शिखर ज्योति रथ’’ का भ्रमण </strong></p>
<p>रथ प्रवर्तन प्रेरणा के क्रम में श्री शांतिसागरजी के गुणानुवादरूप सन् 2014 में ‘‘आचार्यश्री शांतिसागर सम्मदेशिखर ज्योति रथ’’ का भ्रमण दक्षिण भारत में हुआ। सन् 2015 में मांगीतुंगी तीर्थ पर निर्मित हुई भगवान ऋषभदेव की 108 फुट उत्तुंग प्रतिमा को बताकर जैनधर्म की प्राचीनता, सार्वभौमिकता एवं व्यापकता आदि सिद्धान्तों के प्रचार-प्रसार हेतु ‘‘भगवान ऋषभदेव विश्वशांति कलश यात्रा रथ’’ नाम से दो रथों का सम्पूर्ण भारत में अपूर्व प्रभावनापूर्वक भ्रमण पूज्य ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा और आशीर्वाद से संपन्न हुआ।</p>
<p><strong>अमरकृति के निर्माण की प्रेरणा</strong></p>
<p>अपने सर्वाेदायी व्यक्तित्व के द्वारा पूज्य ज्ञानमती माताजी ने जैन संस्कृति के संरक्षण हेतु ऐसे ‘‘अमरकृति’’ के निर्माण की प्रेरणा समाज को प्रदान की। जिसकी इस संसार में कोई मिसाल नहीं है। आज मांगी पर्वत के अखण्ड पाषाण में निर्मित 108 फुट उत्तुंग भगवान ऋषभदेव की यह प्रतिमा विश्व के लिए एक महान आश्चर्य है।</p>
<p><strong>प्रतिमा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज</strong></p>
<p>लंदन जैन समाज ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में ‘‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड-लंदन’’ ने इस प्रतिमा को अपने रिकॉर्ड में दर्ज करके यह सिद्ध कर दिया है कि इस प्रतिमा के समान अन्य कोई प्रतिमा नहीं है। शास्त्रीय प्रमाण के अनुसार यह प्रतिमा श्री आचार्य वसुनन्दि प्रतिष्ठा पाठ के आधार से पूरे माप के साथ अंगूठे से लेकर ललाट तक 108 फुट उत्तुंग बनाई गई है।</p>
<p><strong>प्रतिमा को ‘‘द स्टेचू ऑफ अहिंसा’’ का नाम दिया गया </strong></p>
<p>इस वीतराग प्रतिमा के निमित्त से सम्पूर्ण विश्व के पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों को जैनधर्म में वर्णित अहिंसा-अपरिग्रह का पाठ पढ़ाने हेतु प्रतिमा को ‘‘द स्टेचू ऑफ अहिंसा’’ का नाम दिया गया है। इस तरह पूज्य ज्ञानमती माताजी की अमर कृति के रूप में यह प्रतिमा युगों-युगों तक जिनशासन की महिमा को विकसित करके जैन संस्कृति के विशाल व्यक्तित्व का परिचय जनमानस को प्रदान करेगी और ‘‘विश्वशांति’’ हेतु सम्पूर्ण विश्व के राजा व प्रजा को अहिंसा धर्म के पालन हेतु प्रेरित करती रहेगी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/with_the_inspiration_of_acharya_shanti_sagarji_a_28_feet_tall_statue_of_lord_bahubali_was_constructed_in_the_bahubali_area/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शांतिनाथ के जयकारों से गूंजायमान जैन तीर्थ टिकटोलीः स्वर्ण कलशों से हुआ महामस्तकाभिषेक </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/parmoday_jain_tirtha_tiktoli_reverberates_with_the_chants_of_lord_shantinath/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/parmoday_jain_tirtha_tiktoli_reverberates_with_the_chants_of_lord_shantinath/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jan 2025 12:53:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Anjana Bansal]]></category>
		<category><![CDATA[Arahnathji]]></category>
		<category><![CDATA[Bhagwan Shantinath]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Mitra Mandal]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[jain teerth tiktoli]]></category>
		<category><![CDATA[Kailaras]]></category>
		<category><![CDATA[Khadgasan]]></category>
		<category><![CDATA[Kunthnath]]></category>
		<category><![CDATA[Mahamastakabhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Morena श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Sanjay Bhaiyaji]]></category>
		<category><![CDATA[Shantinath]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Swarn Kalash]]></category>
		<category><![CDATA[Vimanotsav]]></category>
		<category><![CDATA[अंजना बंसल]]></category>
		<category><![CDATA[अरहनाथजी]]></category>
		<category><![CDATA[कुंथनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[कैलारस]]></category>
		<category><![CDATA[खड़गासन]]></category>
		<category><![CDATA[जैन तीर्थ टिकटोली]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मित्र मंडल]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शांतिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[महामस्तकाभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना]]></category>
		<category><![CDATA[विमानोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[संजय भैयाजी]]></category>
		<category><![CDATA[स्वर्ण कलश]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=71914</guid>

					<description><![CDATA[वार्षिक जैन मेला, विमानोत्सत्व, महामस्तकाभिषेक के अवसर पर परमोदय जैन तीर्थ टिकटोली भगवान शांतिनाथ के जयकारों से गुंजायमान हुआ। पढ़िए मुरैना से मनोज जैन नायक की पूरी खबर&#8230; मुरैना। मुरैना जिले की जौरा तहसील के ग्राम टिकटोली में एक पहाड़ी की तलहटी में एक हजार वर्ष से भी अधिक प्राचीन जैन मंदिर स्थित है। जिसमें [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वार्षिक जैन मेला, विमानोत्सत्व, महामस्तकाभिषेक के अवसर पर परमोदय जैन तीर्थ टिकटोली भगवान शांतिनाथ के जयकारों से गुंजायमान हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मुरैना से मनोज जैन नायक की पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> मुरैना जिले की जौरा तहसील के ग्राम टिकटोली में एक पहाड़ी की तलहटी में एक हजार वर्ष से भी अधिक प्राचीन जैन मंदिर स्थित है। जिसमें अति प्राचीन मूलनायक भगवान शांतिनाथ, कुंथनाथ, अरहनाथजी की खड़गासन प्रतिमाएं स्थापित हैं, साथ ही पाषाण की शिला पर भगवान पार्श्वनाथ एवम मानस्तंभ भी देखने को मिलता है। यहाँ वार्षिक जैन मेला, विमानोत्सत्व, महामस्तकाभिषेक के अवसर पर परमोदय जैन तीर्थ टिकटोली भगवान शांतिनाथ के जयकारों से गुंजायमान हुआ।</p>
<p><strong>वार्षिक जैन मेले का आयोजन </strong></p>
<p>परमोदय जैन तीर्थ टिकटोली के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी एवम महामंत्री ओमप्रकाश जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी नववर्ष की पावन बेला में वार्षिक जैन मेले का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्री जी का विमानोत्सव निकालकर स्वर्ण कलशों से भगवान शांतिनाथ का मस्तकाभिषेक किया गया। आयोजन में जैन मित्र मंडल मुरैना एवम अतिशय मित्र मंडल जौरा का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>नगर पालिका की अध्यक्षा अंजना बंसल ने शुभारंभ किया</strong></p>
<p>कार्यक्रम के शुभारंभ में नगर के उद्यमी पवन जैन, महेशचंद बंगाली, ऋषभ इंटर प्राइजेज मुरैना ने अपने परिजनों के साथ ध्वजारोहण किया। बाहर से पधारे हुए अतिथियांे द्वारा चित्र अनावरण के पश्चात कैलारस नगर पालिका की अध्यक्षा अंजना बंसल ने समाज के श्रेष्ठिवर्ग के साथ दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी के निर्देशन एवम बा. ब्र. बहिन अनीता दीदी, ललिता दीदी के पावन सान्निध्य में श्री जी की शांतिधारा करने का सौभाग्य एडवोकेट धर्मेंद्र जैन अक्षत जैन नायक, ओमप्रकाश जैन गोपालपुरा, को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>ड्रॉ द्वारा स्वर्ण कलशों से महामस्तकाभिषेक </strong></p>
<p>ड्रॉ द्वारा स्वर्ण कलशों से महामस्तकाभिषेक करने का सौभाग्य ऋषभ जैन परीक्षा, ब्रजेश जैन दादा, मनोज जैन नायक, राकेश जैन, महेश जैन, पारस जैन मुरैना, धर्मेंद्र जैन पटेल, महावीर जैन पुजारी, हरिश्चंद जैन, धर्मचंद जैन मुरार, रविंद्र जैन अंबाह, पदमचंद जैन, दीपक जैन, जयचंद जैन राहुल बिहार आगरा, संजय भैयाजी कुल 16 व्यक्तियों को प्राप्त हुआ। स्वर्ण कलश से इन्द्रो द्वारा जैसे ही भगवान शांतिनाथ पर जलधारा छोड़ी गई तो सभी लोग जय-जयकार करने लगे।</p>
<p><strong>विमानोत्सव शोभायात्रा निकाली गई </strong></p>
<p>विमानोत्सव के लिए श्री जिनेंद्र प्रभु को ससुज्जित पालकी में विराजमान कर भव्य शोभा यात्रा निकाली गई । विमानोत्सव शोभायात्रा ने सम्पूर्ण क्षेत्र की परिक्रमा की। शोभायात्रा में समाज के सभी नर-नारी एवं युवक-युवतियां भक्तिमय भजनों पर नृत्य कर रहे थे। चहूंओर भगवान शांतिनाथ के जयकारे गूंज रहे थे। संपूर्ण भारत से आए हुए लगभग दो हजार धर्मानुरागी बंधुओं का उत्साह देखते ही बनता था। सभी के लिए मुरैना से निःशुल्क वाहन एवं स्वल्पाहार की व्यवस्था जैन मित्र मंडल मुरैना एवम वात्सल्य भोज की व्यवस्था अतिशय मित्र मंडल जोरा के माध्यम से की गई थी।</p>
<p><strong>जैन मित्र मंडल, मुरैना ने पहली बार संभाली कमान</strong></p>
<p>ये प्रथम अवसर था जब जैन मित्र मंडल मुरैना ने इस वर्ष अतिशय क्षेत्र टिकटोली मेले की कमान सम्हाली थी। जैन मेले में इस बार ऐतिहासिक भीड़ मौजूद थी। केवल मुरैना से ही 09 बसें टिकटोली गई थी। इस बार जैन मित्र मंडल ने घर- घर पीले चावल देकर ससम्मान सभी को टिकटोली आगमन हेतु आमंत्रण दिया था। उसी के फलस्वरूप टिकटोली में लगभग 2000 लोगों की उपस्थिति से जंगल में मंगल का नजारा दिखाई दे रहा था।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-71917" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250102-WA0016.jpg" alt="" width="1280" height="720" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250102-WA0016.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250102-WA0016-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250102-WA0016-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250102-WA0016-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250102-WA0016-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250102-WA0016-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250102-WA0016-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250102-WA0016-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250102-WA0016-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />दूर-दूर से आये श्रद्धालुजन</strong></p>
<p>नववर्ष की शुभ प्रभात बेला में अतिशय क्षेत्र टिकटोली में मुरैना, अंबाह, बानमोर, पोरसा, जोरा, धौलपुर, मनियां, आगरा, मुरार, लश्कर, ग्वालियर, राजाखेड़ा, फिरोजाबाद, शमशाबाद सहित सम्पूर्ण भारतवर्ष से हजारों की संख्या में जैन धर्मानुरागी बंधु, माता बहिन एवम युवा साथी उपस्थिति थे ।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/parmoday_jain_tirtha_tiktoli_reverberates_with_the_chants_of_lord_shantinath/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
