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	<title>कोडरमा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जैन मंदिर में श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ आयोजन : मुनि श्री प्रांजल सागर जी का अवतरण दिवस मनाया गया </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Mar 2026 05:21:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[झुमरी तिलैया के जैन मोहल्ला में जन्मे जैन संत, नगर गौरव परम पूज्य गुरुदेव श्रमण मुनि श्री प्रांजल सागर जी महाराज का अवतरण दिवस जैन मंदिर में श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाया गया। यह आयोजन जैन संत मुनि श्री पुण्यानंदी जी महाराज एवं मुनि श्री शुभानंदी जी महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>झुमरी तिलैया के जैन मोहल्ला में जन्मे जैन संत, नगर गौरव परम पूज्य गुरुदेव श्रमण मुनि श्री प्रांजल सागर जी महाराज का अवतरण दिवस जैन मंदिर में श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाया गया। यह आयोजन जैन संत मुनि श्री पुण्यानंदी जी महाराज एवं मुनि श्री शुभानंदी जी महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजकुमार जैन अजमेरा एवं नवीन जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोडरमा / झुमरी तिलैया।</strong> झुमरी तिलैया के जैन मोहल्ला में जन्मे जैन संत, नगर गौरव परम पूज्य गुरुदेव श्रमण मुनि श्री प्रांजल सागर जी महाराज का अवतरण दिवस जैन मंदिर में श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाया गया। यह आयोजन जैन संत मुनि श्री पुण्यानंदी जी महाराज एवं मुनि श्री शुभानंदी जी महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत श्री 1008 आदिनाथ भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुई। इसके पश्चात मुनि श्री का संगीतमय पूजन सुरेन्द्र जैन काला, आशा जैन गंगवाल एवं नीलम जैन सेठी के निर्देशन में किया गया। समाज के सदस्यों के साथ विद्यासागर जैन पाठशाला के बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और भक्ति भाव से पूजन किया।</p>
<p><strong>वैराग्य से दीक्षा तक की प्रेरक यात्रा</strong></p>
<p>ज्ञात हो कि मुनि श्री प्रांजल सागर जी महाराज को लगभग 15 वर्ष पूर्व आर्यिका विभा श्री के सान्निध्य में वैराग्य की प्रेरणा मिली। इसके पश्चात उन्होंने जैन संत गुरु आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी महाराज के मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने 10 मार्च 2011 को सम्मेद शिखर जी की पवित्र भूमि पर जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण की। तब से वे अपने आचार्य के साथ पूरे भारत में पदयात्रा करते हुए धर्म प्रभावना में संलग्न हैं। वर्तमान में आचार्य संघ मेरठ (उत्तर प्रदेश) में विराजमान है।</p>
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<p><strong>जैन संत का जीवन अत्यंत कठिन — मुनि श्री पुण्यानंदी</strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री पुण्यानंदी जी महाराज ने कहा कि वह नगरी धन्य होती है, जहाँ जैन संत का जन्म होता है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिक युग में जैन संत बनना अत्यंत कठिन साधना है। उन्होंने बताया कि जैन संत एक समय हाथों में आहार ग्रहण करते हैं, पूरे देश में पैदल विहार करते हैं, स्नान नहीं करते, केश लोचन (हाथों से बाल उखाड़ना) करते हैं, ये सभी कठोर संयम साधना के अंग हैं, जिन्हें निभाना अत्यंत कठिन है।</p>
<p><strong>समाजजनों ने व्यक्त किए श्रद्धाभाव</strong></p>
<p>कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारीगण एवं श्रद्धालुओं ने भी मुनि श्री के प्रति अपने श्रद्धाभाव व्यक्त किए। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा</strong></p>
<p>स्थानीय जैन समाज द्वारा 30 अप्रैल को मुनि श्री के सान्निध्य में भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। इसके अंतर्गत 28 अप्रैल को जैन महिला समाज एवं आचार्य विद्यासागर पाठशाला के बच्चों द्वारा गौशाला में जाकर गायों को चारा, चोकर, गुड़ एवं रोटी खिलाने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।</p>
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		<title>संसार में सबसे मूल्यवान स्वयं का मूल्य : आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने में दर्शन किए </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 06:57:56 +0000</pubDate>
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<p><strong>आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महामुनिराज सेनवासा पहुँचे। जहाँ मंदिर जी के दर्शन कर धर्म सभा में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए ने कहा कि आश्चर्य तो तब होता है, जब सब चीजों का मूल्य बढ़ रहा है और आदमी का मूल्य घटता जा रहा है। <span style="color: #ff0000">सेनवासा/कोडरमा से राजकुमार जैन अजमेरा की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सेनवासा/कोडरमा।</strong> आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महामुनिराज सेनवासा पहुँचे। जहाँ मंदिर जी के दर्शन कर धर्म सभा में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए ने कहा कि आश्चर्य तो तब होता है, जब सब चीजों का मूल्य बढ़ रहा है और आदमी का मूल्य घटता जा रहा है। आज के समय में सबसे सस्ता यदि कुछ है, तो वह है-आदमी और उसकी जान। आज का आदमी स्वार्थ और पैसे में ही बिक रहा है। पैसा सुविधा दे सकता है, परन्तु सुख नहीं। शरीर सुख तो मिला, पर मन की शांति खत्म हो गई। मैं मानता हूँ, धन कुछ हो सकता है, कुछ-कुछ हो सकता है, बहुत कुछ हो सकता है, पर धन सब कुछ नहीं हो सकता। हमने यही गलती की धन को ही सब कुछ मान लिया और स्वयं से बेखबर हो गए।</p>
<p>कभी परमात्मा से कुछ मांगना पड़े तो पैसा नहीं- पुण्य मांगना, बुद्धि नहीं &#8211; नसीब मांगना क्योंकि, अच्छे-अच्छे बुद्धिमानों को हमने नसीब वालों के यहां पानी भरते देखा है। अकबर नसीब वाला था और बीरबल बुद्धिमान। आप क्या हो? मेहनत से कमाइए, पसीने की कमाई खाइये। पाँव उतने ही फैलाइये, जितनी लम्बी चादर हो। ऋण लेकर झूठी शान-शौकत से बचें और शुकून से जीवन जिएं।</p>
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		<title>कोडरमा से 71 युवाओं का जत्था गिरनारजी के दर्शन के लिए रवाना : विशेष दर्शन में शामिल होकर अभिषेक, शांतिधारा, पूजन करेंगे </title>
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		<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 13:55:44 +0000</pubDate>
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<p><strong>जहां लोग नया साल में पिकनिक जा रहे हैं। वही दिगंबर जैन समाज कोडरमा के युवा तीर्थ यात्रा कर रहे हैं। युवा संगठन 71 सदस्यों का जत्था जैन युवक समिति के पूर्व अध्यक्ष अभिषेक जैन गंगवाल, मंत्री विकास जैन सेठी के नेतृत्व में जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान की निर्वाण भूमि गिरनार तीर्थ के उजयंत पर्वत में विराजमान साक्षात चरण के दर्शन के लिए रवाना हुआ। <span style="color: #ff0000">झुमरी तिलैया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>झुमरीतिलैया।</strong> जहां लोग नया साल में पिकनिक जा रहे हैं। वही दिगंबर जैन समाज कोडरमा के युवा तीर्थ यात्रा कर रहे हैं। युवा संगठन 71 सदस्यों का जत्था जैन युवक समिति के पूर्व अध्यक्ष अभिषेक जैन गंगवाल, मंत्री विकास जैन सेठी के नेतृत्व में जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर नेमिनाथ भगवान की निर्वाण भूमि गिरनार तीर्थ के उजयंत पर्वत में विराजमान साक्षात चरण के दर्शन के लिए रवाना हुआ। ज्ञात हो कि गुजरात के जूनागढ़ नगरी में पास जैन धर्म का ऐतिहासिक तीर्थ गिरनार है। यह जत्था वहां जाकर जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान के विशेष दर्शन में शामिल होकर अभिषेक, शांतिधारा, पूजन कर सभी अपने जीवन को धन्य बनाएंगे। साथ ही युवा सदस्य आसपास के गुजरात के जैन तीर्थ पावागढ़, देवपुरी, महुवा, घोघा, आदि कई मंदिरों के दर्शन करते हुए तारंगा तीर्थ का दर्शन करेंगे।</p>
<p><strong>साधु-साध्वियों ने दिया मंगल आशीर्वाद </strong></p>
<p>राजिम छत्तीसगढ़ में विराजमान मुनि श्री सुयश सागर जी महामुनिराज ने कहा कि जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर के 5 कल्याणक गिरनार में हुए थे और गिरनार तीर्थ जैन समाज की सबसे पूज्यनीय भूमि है और जैन समाज की शान है। आर्यिका विभा श्री माता जी ने कहा कि तीर्थस्थलों का दर्शन करने से कई गुणा पुण्य अर्जित होता है। सबसे ज्यादा पुण्य तीर्थ का दर्शन करने और कराने में आता है। सभी यात्रियों को मंगल आशीर्वाद दिया। साथ ही समाज के उप मंत्री नरेंद्र जैन झांझरी, सह मंत्री जैन राज छाबड़ा, युवा सुरेश जैन झांझरी, विजय जैन, सुबोध जैन गंगवाल, सरोज जैन पापड़ीवाल, दिलीप जैन छाबड़ा, विजय नीमा जैन छाबड़ा, मुकेश जैन अजमेरा, मैत्री समूह के सदस्य गण, महिला संगठन की मंत्राणी आशा जैन गंगवाल, वार्ड पार्षद पिंकी जैन ,नीलम जैन सेठी आदि ने सभी को मंगलमय यात्रा की बधाई दी। इस यात्रा में विशेष रूप से इस यात्रा में विशेष रूप से विवेक-प्राची जैन सेठी, विवेक-प्रियंका जैन छाबड़ा, शैलेश-दिव्या जैन छाबड़ा, अतुल-अंजलि जैन छाबड़ा, अक्षय-सोना जैन छाबड़ा, रांची से अंकुर-आकांक्षा जैन पापड़ीवाल,कोलकोत्ता से हजारीबाग से भी शामिल हुए। कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा, नवीन जैन ने सभी यात्रियों को बधाई दी।</p>
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		<title>कोडरमा के युवाओं ने 251 यात्रियों को सम्मेदशिखर जी पर्वत की यात्रा करवाई : महावंदना ग्रुप के 40 सदस्यों को सम्मानित किया </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Nov 2025 13:23:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर जैन समाज की ओर से एक भव्य कार्यक्रम में सम्मेद शिखर की पैदल वंदना कराने वाले महावंदना ग्रुप के 40 सदस्यों को सम्मानित किया गया। समाज के पदाधिकारी द्वारा प्रशस्ति पत्र दिया गया एवं सभी को साफा पहनाकर अंग वस्त्र देकर तिलक लगाया गया। झुमरी तिलैया से पढ़िए, यह खबर&#8230; झुमरी तिलैया। श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगंबर जैन समाज की ओर से एक भव्य कार्यक्रम में सम्मेद शिखर की पैदल वंदना कराने वाले महावंदना ग्रुप के 40 सदस्यों को सम्मानित किया गया। समाज के पदाधिकारी द्वारा प्रशस्ति पत्र दिया गया एवं सभी को साफा पहनाकर अंग वस्त्र देकर तिलक लगाया गया। <span style="color: #ff0000">झुमरी तिलैया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>झुमरी तिलैया।</strong> श्री दिगंबर जैन समाज की ओर से एक भव्य कार्यक्रम में सम्मेद शिखर की पैदल वंदना कराने वाले महावंदना ग्रुप के 40 सदस्यों को सम्मानित किया गया। समाज के पदाधिकारी द्वारा प्रशस्ति पत्र दिया गया एवं सभी को साफा पहनाकर अंग वस्त्र देकर तिलक लगाया गया। समाज के मंत्री नरेंद्र जैन झांझरी ने युवाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह अद्भुत एवं ऐतिहासिक कार्य था। 251 बुजुर्ग महिला-पुरुष को झारखंड के सबसे ऊंचे पहाड़ जैन धर्म का सर्वाेच्च तीर्थ सम्मेद शिखर पर्वत के 27 किमी पर्वत की पैदल वंदना कराना एक कठिन कार्य है लेकिन, समाज के युवाओं ने इसका बीड़ा उठाया और इस कार्य को संपन्न किया। इस मौके पर वार्ड पार्षद पिंकी जैन ने कहा कि बुजुर्ग हमारे माता-पिता के समान हैं। वृद्धावस्था में उन्हें तीर्थ की यात्रा कराना सबसे बड़ा पुण्य और धर्म का कार्य है। संगठन में बहुत बड़ी शक्ति होती है और यदि युवा धर्म के रथ को खींचे तो हमें यह समझ जाना चाहिए कि हमारा परिवार समाज राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित है।</p>
<p><strong>10 सालों से करवा रहे सीनियर सिटीजन को यात्रा </strong></p>
<p>महावंदना ग्रुप के फाउंडर लोकेश जैन पाटोदी, रौनक जैन कासलीवाल, जैन युवक समिति के मंत्री सुमित जैन सेठी ने कहा कि जैन धर्म में कहा गया है कि सम्मेद शिखर की एक बार भाव सहित वंदना करने पर मनुष्य को नरक गति नहीं मिलती है । पर्वत की वंदना आमजन युवा बच्चे लोग तो कर लेते हैं परंतु सीनियर सिटीजन वृद्ध महिला-पुरुष को 27 किमी पर्वत का दर्शन वंदन बहुत कठिन होता है। हम सभी 40 युवाओं का ग्रुप पिछले 10 वर्षों में चौथी बार वृद्ध महिला पुरुषों को सम्मेद शिखर पर्वत की वंदना के लिए लेकर गया। जो की एक बहुत ही पुण्य का कार्य है। सभी लोगों के आने-जाने की व्यवस्था धर्मशाला में ठहरने, खाने-पीने का प्रबंध पर्वत पर पालकी डोली से चढ़ने का प्रबंध बहुत ही अच्छी तरह से महावंदना ग्रुप के युवा साथी ने किया है।</p>
<p><strong>इन समाजजनों ने की युवाओं की सराहना </strong></p>
<p>समाज के सह मंत्री राज जैन छाबड़ा, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र जैन, काला भंडारी, सुनील जैन सेठी, पूर्व अध्यक्ष जय कुमार जैन गंगवाल, ललित जैन सेठी, सुशील जैन छाबड़ा, सुरेश जैन झांझरी, किशोर जैन पांडया, प्रदीप जैन छाबड़ा, सुरेश जैन पांडया, सुरेश जैन सेठी, कमल जैन सेठी, सुनील जैन छाबड़ा, महिला समाज की अध्यक्ष नीलम जैन सेठी, मंत्री आशा जैन गंगवाल, पंडित अभिषेक जैन शास्त्री ने युवाओं के इस अद्भुत धार्मिक कार्य की सराहना की।</p>
<p><strong>इन्होंने यात्रा को सफल बनाया </strong></p>
<p>इस महावंदना यात्रा में हजारीबाग, रांची, पेटरवार, नवादा, गिरिडीह, पटना, कोलकाता, अड़ंगाबाद, बरहमपुर, दिल्ली , अजमेर, जबलपुर, हैदराबाद, पुना, बंगलौर, मुंबई के श्रद्धालु भक्तजन ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से राजीव जैन छाबड़ा, आनंद जैन पांड्या, अमित जैन गंगवाल, अमित जैन सेठी, संजय जैन ठोलया ,मनीष जैन गंगवाल, प्रशम जैन सेठी, कुणाल जैन ठोलया संजय जैन छाबड़ा, विकास जैन सेठी, राहुल जैन छाबड़ा, अक्षय जैन गंगवाल, ईशान जैन कासलीवाल, ईशान जैन सेठी, विकास जैन कासलीवाल, ऋषभ जैन पहाड़िया, जॉन्टी जैन काला, आयुष जैन गंगवाल, नमन जैन सेठी, बाबू जैन काला, अभिषेक जैन, अंकित जैन ठोलया सिद्धांत जैन सेठी, आशिका जैन कासलीवाल,गुंजन जैन पाटोदी, दीपाली जैन सेठी, अंकिता जैन सेठी, शिल्पा जैन ठोल्या ज्योति जैन पहाड़िया, ऋतु जैन सेठी, मोनिका जैन गंगवाल, प्रिया जैन छाबड़ा, प्रिया जैन पांड्या, ज्योति जैन पहाड़िया, नेहा जैन गंगवाल का सहयोग प्राप्त हुआ। यह जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी व्यवस्था प्रचार संयोजक नवीन जैन एवं राजकुमार जैन अजमेरा ने दी।</p>
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		<title>तेरापंथी कोठी में संत निवास एवं गुरु चरण मंदिर का हुआ शिलान्यास आचार्य विद्यासागर जी और शांतिसागर जी महाराज के चरण होंगे प्रतिष्ठित </title>
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		<pubDate>Mon, 03 Nov 2025 14:03:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सम्मेद शिखर जी के तेरापंथी कोठी परिसर में आज संत निवास एवं गुरु चरण मंदिर का शिलान्यास भव्य रूप से संपन्न हुआ। यह आयोजन संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से संपन्न हुआ। पढ़िए जैन राज अजमेरा की रिपोर्ट… सम्मेद शिखर जी स्थित तेरापंथी कोठी में आज एक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सम्मेद शिखर जी के तेरापंथी कोठी परिसर में आज संत निवास एवं गुरु चरण मंदिर का शिलान्यास भव्य रूप से संपन्न हुआ। यह आयोजन संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जैन राज अजमेरा की रिपोर्ट…</span></strong></p>
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<p><strong>सम्मेद शिखर</strong> जी स्थित तेरापंथी कोठी में आज एक ऐतिहासिक अवसर पर संत निवास एवं गुरु चरण मंदिर का शिलान्यास किया गया। यह पवित्र कार्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज और आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के सान्निध्य एवं आशीर्वाद से सम्पन्न हुआ।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर महाराज, मुनि श्री पवित्र सागर महाराज, मुनि श्री पूज्य सागर महाराज, मुनि श्री अतुल सागर महाराज तथा आर्यिका रत्न गुरुमति माताजी और दृढ़मति माताजी ससंघ उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि इस गुरु चरण मंदिर में आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज और आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के पवित्र चरण प्रतिष्ठित किए जाएंगे। इस दिव्य आयोजन का भामाशाह अशोक जी सुशीला पाटनी (आर.के. मार्वल) एवं राजेन्द्र प्रसाद प्रशांत जैन, मुंबई ने विशेष पुण्य भावना से संपादन किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने धर्म, संयम और आचार्यों के प्रति असीम श्रद्धा व्यक्त की। संकलनकर्ता कोडरमा मीडिया प्रभारी जैन राज अजमेरा ने बताया कि यह शिलान्यास समारोह समाज के लिए प्रेरणादायी और ऐतिहासिक अध्याय सिद्ध होगा।</p>
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		<title>जीवन में दो ही चीजें उपयोगी है समय और सांस: आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी ने धर्म देशना में समय और सांस की बताई अहमियत  </title>
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		<pubDate>Tue, 26 Aug 2025 13:03:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महामुनिराज एवं उपाध्याय श्री पियूष सागरजी महाराज ससंघ तरुणसागरम तीर्थ में वर्षायोग के लिए विराजमान हैं। उनके सानिध्य में धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं। अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने बताया कि दोनों सीमित हैं क्योंकि जो फ्री है, वही सबसे ज्यादा कीमती है जैसे- हवा, पानी, नींद, समय, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महामुनिराज एवं उपाध्याय श्री पियूष सागरजी महाराज ससंघ तरुणसागरम तीर्थ में वर्षायोग के लिए विराजमान हैं। उनके सानिध्य में धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं। अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने बताया कि दोनों सीमित हैं क्योंकि जो फ्री है, वही सबसे ज्यादा कीमती है जैसे- हवा, पानी, नींद, समय, सांसे, मन की शांति और चेहरे की प्रसन्नता। <span style="color: #ff0000">कोडरमा से पढ़िए, जैन राजकुमार अजमेरा की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>तरुणसागरम तीर्थ कोडरमा।</strong> आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महामुनिराज एवं उपाध्याय श्री पियूष सागरजी महाराज ससंघ तरुणसागरम तीर्थ में वर्षायोग के लिए विराजमान हैं। उनके सानिध्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं। उसी श्रृंखला में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने बताया कि दोनों सीमित हैं क्योंकि जो फ्री है, वही सबसे ज्यादा कीमती है जैसे- हवा, पानी, नींद, समय, सांसे, मन की शांति और चेहरे की प्रसन्नता। उन्होंने कहा कि मैं देख रहा हूं कि लोग अपने कल को अच्छा बनाने के लिए आज को गाली दे रहे हैं, आज का अपमान कर रहे हैं और आज को कोस रहे हैं। जो अपने वर्तमान को कोसते हैं और कहते हैं कि आज बहुत बुरा है। आप स्वयं सोचे कि हम अच्छे कल की इमारत बनाना चाहते हैं और आज की यानि वर्तमान की बुराइयां, निंदा तथा आलोचना की नींव खोद रहे हैं।</p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि जिसे हम कोस रहे हैं, ऐसे में भविष्य का निर्माण कैसे और कैसा होगा? जो आज को लेकर दुखी परेशान है। हमारा दिन, हफ्ता, महीना, साल सब खराब हो रहा है क्योंकि, हम लोगों की नजर में बेचारे हैं, बुरे वक्त में फंसे हुए हैं। कोई पूछता है कैसे हो भाई? हम कहते हैं क्या बताऊं बाबू? दिन काट रहे हैं ज़िन्दगी के।</p>
<p><strong>हमारे पास वितृष्णा, असंतोष और गुस्सा के अलावा कुछ नहीं</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि ध्यान रखना, कई वर्तमान मिलकर एक भविष्य का निर्माण करते हैं। भविष्य अचानक से उतर कर नहीं आता। भविष्य का निर्माण हमें रोज सकारात्मकता की सोच के साथ करना है और उसकी शुरुआत होती है मन की शांति से, चेहरे की प्रसन्नता और आत्म संतोष से। अगर हम लगातार अपने वर्तमान को कोसते हैं या नकारते हैं तो हम अपनी ऊर्जा को बहुत आगे बढ़ जाने के मार्ग को अविरुद्ध करते हैं। भविष्य की शुरुआत आज अभी इसी वक्त के दौर से होती है। जब हम अपने आज को ऐसे नकारात्मक माहौल से सजाते हैं तो हमारे पास वितृष्णा, असंतोष और गुस्सा के अलावा कुछ नहीं होता।</p>
<p><strong>आज को धन्यवाद दो, शुक्रिया अदा करो</strong></p>
<p>आपको आज से ही अपने अंदर कुछ ऐसा नया जुनून पैदा करना है, जो भविष्य की मंजिल की ओर ले जाए। जब सुख सौभाग्य, सौहार्द की शुरुआत होगी तो आज अभी इसी वक्त के दौर से ही होगी। आज को धन्यवाद दो, शुक्रिया अदा करो तो वह आपको अपने गले लगाएगा और भविष्य का निर्माण करेगा। इसलिए आज से आज को कोसना बंद करो और धन्यवाद देना शुरू करो। फिर देखो आज का चमत्कार।</p>
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		<title>धर्मसभा में दिए प्रवचन : पर्युषण पर्व में संत का जीवन जीकर देखो-आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी </title>
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		<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 06:52:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ने कहा कि पर्युषण पर्व में एक बार संत का जीवन जीकर देखो, तब समझ आएगा कि वास्तव में संतजीवन क्या होता है और चर्या किसे कहते हैं। आचार्य श्री ने श्री तरूणसागरम् पार्श्वनाथ धाम, गाजियाबाद के धर्म परिसर में भक्तों को जीवन संस्मरण सुना रहे थे। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ने कहा कि पर्युषण पर्व में एक बार संत का जीवन जीकर देखो, तब समझ आएगा कि वास्तव में संतजीवन क्या होता है और चर्या किसे कहते हैं। आचार्य श्री ने श्री तरूणसागरम् पार्श्वनाथ धाम, गाजियाबाद के धर्म परिसर में भक्तों को जीवन संस्मरण सुना रहे थे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राज कुमार अजमेरा की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>गाजियाबाद/कोडरमा।</strong> भारत गौरव अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ने कहा कि पर्युषण पर्व में एक बार संत का जीवन जीकर देखो, तब समझ आएगा कि वास्तव में संतजीवन क्या होता है और चर्या किसे कहते हैं। आचार्य श्री ने श्री तरूणसागरम् पार्श्वनाथ धाम, गाजियाबाद के धर्म परिसर में भक्तों को जीवन संस्मरण सुनाते हुए कहा, “शुरुआत तुम करो, अंत परमात्मा करेगा। परमात्मा और गुरु की भक्ति करते रहो। जिसने दांत दिए हैं, वह दाना भी देगा।</p>
<p>लेकिन आज का जीवन देखो—खाओ, पियो, ऐश करो, होटल में रहो और हॉस्पिटल में मरो। यही चल रहा है। जबकि अच्छे स्वास्थ्य और पेट भरने के लिए दो रोटी-सब्ज़ी काफी है। लेकिन स्वाद के लिए छप्पन पकवान भी कम पड़ जाते हैं। आज इंसान स्वास्थ्य के लिए नहीं, बल्कि स्वाद के लिए खा-पी रहा है।” उन्होंने कहा,“खिचड़ी दो तरह की होती है। अगर रसोईघर में पके तो आरोग्यता देती है, और अगर दिमाग में पके तो बीमारी देती है।” पर्यूषण पर्व पर आचार्य श्री ने श्रावकों से कहा, “इस बार दस दिन संत का जीवन जीकर देखो। चटाई पर सोना, उपवास करना, एकासन करना, प्रतिदिन प्रतिक्रमण और सामायिक करना, देव वंदना और अभिषेक करना, उबला हुआ और बिना नमक का भोजन करना, मीठा और फल का त्याग करना—तभी पता चलेगा संत कैसे जीते हैं।”</p>
<p>उन्होंने समझाया, “संत का जीवन असिधारा है, यानी तलवार की धार पर चलने जैसा कठिन। आज श्रावक धर्म तो कर रहा है, लेकिन मन से विकार नहीं निकाल पा रहा। सामायिक का अर्थ केवल बैठना नहीं, बल्कि परिणामों की एकाग्रता है। विकारों का नाम सामायिक नहीं है।” आचार्य श्री ने स्पष्ट किया, “आप मुझसे नहीं, हमारी साधना से प्रभावित हैं। लेकिन मैं आपसे प्रभावित नहीं हूँ, क्योंकि संत का जीवन प्रभावित करने का नहीं, प्रकाशित करने का होता है। आप हमारे पास प्रभावित होकर आएंगे, लेकिन संत आपको प्रकाशित करके भेजेंगे।” उन्होंने कहा, “जीवन में मरने से पहले एक बार दस उपवास ज़रूर करना। अगर समता नहीं हो तो जल लेकर करना, पर करना ज़रूर। मैं लिखकर दे सकता हूँ, आप मरेंगे नहीं।” अंत में आचार्य श्री ने दसलक्षण महापर्व का महत्व बताते हुए कहा, “इस महापर्व पर पूरे देश में साधु और श्रावक त्याग व संयम को धारण कर पुण्य का संचय करते हैं।”</p>
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		<title>मुनि श्री सुयश सागर जी के दर्शन किए: कोडरमा आगमन का निवेदन किया </title>
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		<pubDate>Wed, 23 Jul 2025 13:36:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सुयश सागर जी के दर्शन करने कोडरमा से 11 श्रद्धालु भक्तों का समूह इंदौर के लिए 21 जुलाई के रात में निकला। सभी यात्रियों ने बुधवार को इंदौर पहुंचकर मुनि श्री के चरणों में श्री फल अर्पित करते हुए कोडरमा आगमन का निवेदन किया। झुमरी तिलैया [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सुयश सागर जी के दर्शन करने कोडरमा से 11 श्रद्धालु भक्तों का समूह इंदौर के लिए 21 जुलाई के रात में निकला। सभी यात्रियों ने बुधवार को इंदौर पहुंचकर मुनि श्री के चरणों में श्री फल अर्पित करते हुए कोडरमा आगमन का निवेदन किया। <span style="color: #ff0000">झुमरी तिलैया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>झुमरीतिलैया।</strong> आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सुयश सागर जी के दर्शन करने कोडरमा से 11 श्रद्धालु भक्तों का समूह इंदौर के लिए 21 जुलाई के रात में निकला। दल का नेतृत्व विकास खुशबू जैन सेठी कर रहे थे। सभी यात्री बुधवार को इंदौर पहुंचकर मुनि श्री के चरणों में श्री फल अर्पित करते हुए कोडरमा आगमन का निवेदन किया। इस दल को मुनि श्री सुयश सागर जी ने मंगल आशीर्वाद दिया और कहा कि संत का दर्शन करने से सातिशय पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने आगे कहा कि पुण्य के उदय में पुण्य का कार्य करने और गुरु दर्शन का भाव विरलों को होता है। कब पुण्य का स्टाक खत्म हो जाए और कब पाप का उदय हो जाए,पता नहीं।</p>
<p>इसलिए तीर्थयात्रा, गुरु दर्शन, दान आदि समय रहते कर लेना चाहिए। ये सौभाग्य पुण्यशाली लोग ही कर सकते हैं। इस वर्ष का मंगल चातुर्मास मुनि श्री का इंदौर नगरी में हो रहा है। इस यात्रा में विशेष रूप से अभिषेक शिखा जैन गंगवाल, विवेक प्रियंका जैन छाबड़ा आदि शामिल है। इनकी यात्रा को राजकुमार जैन राज अजमेरा, नवीन जैन, विजय जैन सेठी,सुबोध आशा जैन गंगवाल, विजय नीमा जैन छाबड़ा, मनीष, आदि समाज के लोगों ने यात्रा की बधाई दी।</p>
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		<title>हरिद्वार में आध्यात्मिक समागम : पतंजलि विश्वविद्यालय में आचार्य प्रसन्नसागर जी का भव्य स्वागत </title>
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		<pubDate>Sat, 07 Jun 2025 15:12:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थराज सम्मेदशिखर जी की पुण्यभूमि में ऐतिहासिक चातुर्मास और तप की चरम साधना पूर्ण करने के बाद, जैन धर्म के प्रखर चिंतक और दिगंबर परंपरा के तेजस्वी संत आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी महाराज ने हजारों किलोमीटर की पदयात्रा पूर्ण कर बद्रीनाथ में भगवान आदिनाथ की निर्वाण स्थली का दर्शन किया। यात्रा के अगले चरण में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थराज सम्मेदशिखर जी की पुण्यभूमि में ऐतिहासिक चातुर्मास और तप की चरम साधना पूर्ण करने के बाद, जैन धर्म के प्रखर चिंतक और दिगंबर परंपरा के तेजस्वी संत आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी महाराज ने हजारों किलोमीटर की पदयात्रा पूर्ण कर बद्रीनाथ में भगवान आदिनाथ की निर्वाण स्थली का दर्शन किया। यात्रा के अगले चरण में उनका आगमन हरिद्वार स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय में हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजकुमार जैन अजमेरा की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>हरिद्वार/कोडरमा (झारखंड)।</strong> तीर्थराज सम्मेदशिखर जी की पुण्यभूमि में ऐतिहासिक चातुर्मास और तप की चरम साधना पूर्ण करने के बाद, जैन धर्म के प्रखर चिंतक और दिगंबर परंपरा के तेजस्वी संत आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी महाराज ने झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश होते हुए हजारों किलोमीटर की पदयात्रा पूर्ण कर बद्रीनाथ में भगवान आदिनाथ की निर्वाण स्थली का दर्शन किया।</p>
<p>यात्रा के अगले चरण में उनका आगमन हरिद्वार स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय में हुआ, जहां स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने उनका अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ स्वागत किया। यह अवसर आध्यात्मिक, दार्शनिक और धार्मिक संवाद का एक अनुपम दृश्य बन गया।</p>
<p><strong>गर्मी और कठिनाई के बावजूद तपस्वी संन्यासी का भारत भ्रम</strong></p>
<p>स्वामी रामदेव जी ने इस अवसर पर कहा, &#8220;यह हमारे पतंजलि परिवार का सौभाग्य है कि गुरुदेव के चरण यहाँ पड़े हैं। जैन संत इस भीषण गर्मी में भी नंगे पैर पूरे भारत में पदयात्रा करते हैं। यह त्याग और तपस्या की पराकाष्ठा है।&#8221;</p>
<p><strong>जैन मुनि ने योग-आयुर्वेद की प्रशंसा की</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य प्रसन्नसागर जी महाराज ने कहा, &#8220;स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण मानवता, स्वास्थ्य, सामाजिक समृद्धि और वैश्विक सद्भाव के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने ऋषियों की परंपरा में प्रकृति, संस्कृति और विकृति का समन्वय समझाया है।&#8221;</p>
<p><strong>उन्होंने आगे कहा,</strong></p>
<p>&#8220;यदि जीवन प्रकृति और संस्कृति के अनुरूप नहीं है तो विकृति में जीना ही दरिद्रता है।&#8221;</p>
<p><strong>&#8220;जैन धर्म, सनातन का शुद्धतम रूप&#8221; — स्वामी रामदेव</strong></p>
<p>स्वागत समारोह में बोलते हुए स्वामी रामदेव ने कहा, &#8220;आचार्य प्रसन्नसागर जी का आगमन केवल एक जैन संत का आगमन नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन की शुद्धतम चेतना का प्रकटीकरण है। जैन धर्म तप, संयम, अहिंसा और आत्म-जागरूकता का मार्ग है। आचार्यश्री का जीवन विनम्रता, धैर्य और संयम की मिसाल है। दिगंबर बनना केवल वस्त्र त्याग नहीं, बल्कि समस्त भ्रमों का त्याग है।&#8221;</p>
<p><strong>संस्कृत में गूंजे श्लोक, भावविभोर हुआ मंच</strong></p>
<p>पंतजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने आचार्यश्री के प्रति आभार प्रकट करते हुए संस्कृत में रचित आठ श्लोकों का वाचन किया। यह काव्यात्मक श्रद्धांजलि श्रोताओं के हृदय को छू गई और हॉल में भक्ति की तरंगें भर गईं।</p>
<p><strong>सम्मान और कृतज्ञता के पल</strong></p>
<p>इस अवसर पर जैन समुदाय की ओर से स्वामी रामदेव को प्रशंसा पत्र भेंट किया गया। कार्यक्रम में मनीष जैन भिड़, प्रदीप जैन (कानपुर), मनोज चौधरी (हैदराबाद), विवेक जैन (कोलकाता), शिवम सोनी, विकल्प सेठी, गणेश भाई, सत्यम जैन, डॉ. जैन, सुमित जैन समेत हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे।</p>
<p><strong>दिल्ली में 8 जून को होगा भव्य मंगल प्रवेश</strong></p>
<p>हरिद्वार में संपन्न इस आध्यात्मिक मिलन के बाद आचार्यश्री का भव्य मंगल प्रवेश 8 जून को भारत की राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित है, जिसकी तैयारियों में दिल्ली जैन समाज पूरी निष्ठा से जुटा हुआ है।</p>
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		<title>कोडरमा जैन मंदिर में आयोजन : आचार्य श्री भद्रबाहु सागर जी मुनिराज के सानिध्य में मनाया गया श्रुत पंचमी महापर्व  </title>
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		<pubDate>Sun, 01 Jun 2025 04:42:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज के श्रद्धालु भक्तों ने आचार्य श्री 108 भद्रबाहु सागर मुनिराज ससंघ के पावन सानिध्य में ज्ञान आराधना का महान पर्व श्रुत पंचमी श्रद्धा और उल्लासपूर्वक मनाया। इस अवसर पर प्रातः जैन मंदिर में श्रुत स्कंध यंत्र का अभिषेक एवं गुरुमुख से शांतिधारा संपन्न हुई। पढ़िए यह राजकुमार अजमेरा की विशेष रिपोर्ट&#8230; झुमरी तिलैया। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज के श्रद्धालु भक्तों ने आचार्य श्री 108 भद्रबाहु सागर मुनिराज ससंघ के पावन सानिध्य में ज्ञान आराधना का महान पर्व श्रुत पंचमी श्रद्धा और उल्लासपूर्वक मनाया। इस अवसर पर प्रातः जैन मंदिर में श्रुत स्कंध यंत्र का अभिषेक एवं गुरुमुख से शांतिधारा संपन्न हुई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह राजकुमार अजमेरा की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>झुमरी तिलैया।</strong> जैन समाज के श्रद्धालु भक्तों ने आचार्य श्री 108 भद्रबाहु सागर मुनिराज ससंघ के पावन सानिध्य में ज्ञान आराधना का महान पर्व श्रुत पंचमी श्रद्धा और उल्लासपूर्वक मनाया। इस अवसर पर प्रातः जैन मंदिर में श्रुत स्कंध यंत्र का अभिषेक एवं गुरुमुख से शांतिधारा संपन्न हुई। इसका सौभाग्य क्रमशः हनुमान प्रवीण जैन पाटनी, सुरेन्द्र–सौरभ जैन काला, सुरेश–नरेंद्र जैन झांझरी परिवार को तथा नए मंदिर में कमल–पीयूष जैन कासलीवाल को प्राप्त हुआ।</p>
<p>इसके पश्चात् प्रभात फेरी के रूप में श्रुत पालकी यात्रा निकाली गई, जिसमें जैन समाज के युवक व महिलाएं केसरिया परिधान में, गाजे-बाजे और जयघोषों के साथ भावविभोर होकर सहभागी बने। यह शोभायात्रा नगर भ्रमण करती हुई मंदिर सभागार पहुंची, जहाँ नित्य पूजन के उपरांत श्रुत स्कंध विधान श्री सुबोध जी गंगवाल के निर्देशन में संगीतमय रूप से संपन्न हुआ।</p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री को शास्त्र भेंट एवं चरण पखारने का सौभाग्य अशोक–विकास जैन पाटोदी एवं ललित–सिद्धांत जैन सेठी परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>आचार्य श्री भद्रबाहु सागर मुनिराज ने धर्मसभा में श्रुत पंचमी पर प्रकाश डालते हुए बताया:</strong></p>
<p>&#8220;दिगंबर जैन परंपरा के अनुसार आज ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को ‘श्रुत पंचमी पर्व’ मनाया जाता है। लगभग 2100 वर्ष पूर्व गिरनार पर्वत की चंद्रगुफा में आचार्य धरसेन ने आत्म आराधना करते हुए देखा कि उनका शरीर अल्पायु का है और जिनवाणी लोप होने के संकट में है। तब उन्होंने मुनि सुबुद्धि (आचार्य पुष्पदंत) और मुनि नरवाहन (आचार्य भूतबली) को बुलाकर षट्खंडागम का दिव्य ज्ञान प्रदान किया।&#8221;</p>
<p>आचार्य पुष्पदंत ने ताड़पत्र पर पहला खंड ‘जीवस्थान’ लिखा, जिसकी शुरुआत णमोकार महामंत्र से हुई। शेष पाँच खंड—खुद्दबंध, बंधस्वामित्वविचय, वेदना खंड, वर्गणा खंड और महाबंध—आचार्य भूतबली ने लिपिबद्ध किए। ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को ही अंकलेश्वर (गुजरात) में चतुर्विध संघ के समक्ष इन ग्रंथों की महा पूजा और आराधना हुई, जो आज भी श्रुत पंचमी पर्व के रूप में मनाई जाती है।</p>
<p><strong>पाठशाला व सांस्कृतिक प्रस्तुति:</strong></p>
<p>इस पर्व के उपलक्ष्य में आचार्य विद्यासागर जैन पाठशाला द्वारा संध्या महाआरती के उपरांत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसमें जिनवाणी ग्रंथों का महत्व और विशेषताएं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत की गईं।</p>
<p>कार्यक्रम में समाज उपमंत्री नरेंद्र जैन झांझरी, सह मंत्री राज जैन छाबड़ा, सुरेन्द्र जैन काला, सुनील जैन सेठी, आशा जैन गंगवाल, अजय जैन सेठी सहित समाज के अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।</p>
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