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	<title>कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>पैरामेडिकल कॉलेज की गोल्डन गुडबाय में संजोईं स्वर्णिम स्मृतियां : गोल्डन गुडबाय में अंतिम वर्ष के स्टूडेंट्स ने रैंप वॉक कर अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व का किया बेजोड़ प्रदर्शन   </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 07:17:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज की फेयरवेल पार्टी गोल्डन गुडबाय में अंतिम वर्ष के स्टूडेंट्स ने रैंप वॉक कर अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व का बेजोड़ प्रदर्शन किया। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसंुदर भाटिया की यह रिपोर्ट&#8230; मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज की फेयरवेल पार्टी गोल्डन गुडबाय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज की फेयरवेल पार्टी गोल्डन गुडबाय में अंतिम वर्ष के स्टूडेंट्स ने रैंप वॉक कर अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व का बेजोड़ प्रदर्शन किया। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसंुदर भाटिया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद।</strong> तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज की फेयरवेल पार्टी गोल्डन गुडबाय में अंतिम वर्ष के स्टूडेंट्स ने रैंप वॉक कर अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व का बेजोड़ प्रदर्शन किया। साथ ही सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मेहमानों समेत अपने जूनियर्स का मन मोह लिया। हरियाणवी, पंजाबी, राजस्थानी और बॉलीवुड गीतों पर स्टूडेंट्स ने आकर्षक नृत्य और गायन की प्रस्तुति से पूरा वातावरण उत्साह से भर दिया। फेयरवेल टाइटल्स के लिए अंतिम चयन टैलेंट राउंड के जरिए किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियां दीं। प्रतिभागियों से प्रश्न भी पूछे गए और उनके समग्र प्रदर्शन के आधार पर अंतिम निर्णय लिया गया। इससे पूर्व मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके आडिटोरियम में फेयरवेल पार्टी- गोल्डन गुडबाय का शंखनाद हुआ। इस अवसर पर टीएमयू मेडिकल कॉलेज में बायोकैमिस्ट्री के प्रोफेसर डॉ. उमर फारुख बतौर मुख्य अतिथि, कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंस के प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार, मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी की एचओडी प्रो. रुचि कांत, फॉरेंसिक साइंस के एचओडी रवि कुमार, ऑप्टोमेट्री के एचओडी डॉ. राकेश यादव, डॉ. योगेश कुमार आदि मौजूद रहे। निर्णायक मंडल में डॉ. रेनू चौधरी, श्रीमती प्रियंका सिंह, डॉ. पिनाकी अदक, श्रीमती सौम्या त्रिपाठ आदि शामिल रहे। प्रो. नवनीत कुमार ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। संचालन श्रीमती सौम्या त्रिपाठी ने किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-107983" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260612-WA0005-300x187.jpg" alt="" width="300" height="187" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260612-WA0005-300x187.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260612-WA0005-1024x639.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260612-WA0005-768x479.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260612-WA0005-320x200.jpg 320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260612-WA0005-990x618.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260612-WA0005.jpg 1122w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>स्वयं के प्रयासों के साथ शिक्षकों का भी होता है योगदान </strong></p>
<p>मुख्य अतिथि डॉ. उमर फारुख ने कहा कि स्टूडेंट्स की यात्रा आसान नहीं होती और यहां तक पहुंचने में उनके स्वयं के प्रयासों के साथ-साथ उनके शिक्षकों का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एआई का सही उपयोग करके हम स्वयं को और बेहतर बना सकते हैं। उन्होंने कहा, हमें कभी सीखना बंद नहीं करना चाहिए। डिग्री के साथ-साथ कौशल भी आवश्यक हैं। उन्होंने अपना संबोधन एक शेर के संग समाप्त किया। ऑप्टोमेट्री विभाग के शेख भाजी को मिस्टर पैरामेडिकल और फॉरेंसिक साइंस विभाग की सलोनी को मिस पैरामेडिकल चुना गया। मिस्टर ईवनिंग का खिताब आरआईटी विभाग के समीर ने जीता, जबकि मिस ईवनिंग का खिताब एमएलटी विभाग की वर्तिका को प्रदान किया गया। इसी क्रम में बी. ऑप्टोमेट्री में मिस्टर फेयरवेल का खिताब गुलशन और मिस फेयरवेल का खिताब सानिब सैफी को मिला, जबकि एम. ऑप्टोमेट्री में प्रीति रानी को मिस फेयरवेल चुना गया। एमएलटी में आकाश को मिस्टर फेयरवेल और नंदिनी को मिस फेयरवेल से सम्मानित किया गया। फॉरेंसिक साइंस में अलीम और त्रिप्ती, एमआरआईटी विभाग में प्रलय और पलक और आरआईटी विभाग में मयंक और मिस्बाह को क्रमशः मिस्टर और मिस फेयरवेल के खिताब से नवाजा गया।</p>
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		<title>ऑप्टोमेट्री स्टूडेंट्स ने समझीं लैंस निर्माण की बारीकियां : स्टूडेंट्स ने कार्ल ज़ाइस लेंस लैब दिल्ली का किया औद्योगिक भ्रमण  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 May 2026 14:25:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के ऑप्टोमेट्री थर्ड ईयर के स्टूडेंट्स ने कार्ल ज़ाइस लेंस लैब दिल्ली का औद्योगिक भ्रमण किया। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह रिपोर्ट&#8230; मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के ऑप्टोमेट्री थर्ड ईयर के स्टूडेंट्स ने कार्ल ज़ाइस लेंस लैब [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के ऑप्टोमेट्री थर्ड ईयर के स्टूडेंट्स ने कार्ल ज़ाइस लेंस लैब दिल्ली का औद्योगिक भ्रमण किया। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद</strong>। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के ऑप्टोमेट्री थर्ड ईयर के स्टूडेंट्स ने कार्ल ज़ाइस लेंस लैब दिल्ली का औद्योगिक भ्रमण किया। कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल के प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार ने बताया, इस औद्योगिक भ्रमण से स्टूडेंट्स को न केवल लैंस निर्माण की तकनीकी प्रक्रियाओं की बारीकियां समझीं। लैब के एक्सपर्ट विख्यात सिंह ने स्टूडेंट्स को बताया, प्रत्येक लैंस के निर्माण में क्वालिटी कंट्रोल अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। हर चरण पर लैंस की जांच की जाती है ताकि पॉवर, मोटाई, पारदर्शिता और फिनिशिंग में कोई त्रुटि न रहे। आधुनिक लैब में स्वचालित मशीनों और कंप्यूटर आधारित तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे सटीकता और गुणवत्ता सुनिश्चित होती है। एक्सपर्ट ने प्रत्येक चरण की तकनीकी बारीकियों को सरल भाषा में समझाते हुए छात्रों के प्रश्नों के उत्तर दिए। विजिट में फैकल्टीज़ शिवम पांडेय और विवेचना के साथ 45 छात्र-छात्राएं शामिल रहे।</p>
<p><strong>ऐसे होता है लैंस निर्माण</strong></p>
<p>लैंस निर्माण की शुरुआत कच्चे ब्लैंक से होती है, जिसे विशेष मशीनों की सहायता से आवश्यक पॉवर के अनुसार तैयार किया जाता है। सर्फेसिंग प्रक्रिया में लैंस की सतह को आकार दिया जाता है। इसके बाद ग्राइंडिंग करके अधिक सटीक रूप दिया जाता है। पॉलिशिंग से लैंस की सतह को चिकना और पारदर्शी बनाया जाता है, ताकि दृष्टि स्पष्ट हो सके। लैंस पर एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग, हार्ड कोटिंग और यूवी प्रोटेक्शन कोटिंग की जाती हैं, जो लैंस की गुणवत्ता और उपयोगिता को बढ़ाती हैं। अंत में एजिंग प्रक्रिया में लैंस को फ्रेम के आकार के अनुसार काटा और फिट किया जाता है। सिंगल विज़न लैंस एक ही पावर के होते हैं और सामान्य दृष्टि दोष जैसे मायोपिया या हाइपरोपिया के लिए उपयोग किए जाते हैं। बाइफोकल लैंस में दो अलग-अलग पावर होती हैं, जिससे व्यक्ति दूर और पास दोनों दूरी पर स्पष्ट देख सकता है। प्रोग्रेसिव लैंस आधुनिक लेंस होते हैं, जिनमें बिना किसी स्पष्ट रेखा के दूर, मध्य और पास की दृष्टि के लिए अलग-अलग पॉवर क्रमिक रूप से मिलती है, जिससे दृष्टि अधिक प्राकृतिक महसूस होती है।</p>
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		<item>
		<title>अनजान कॉल, संदेश या लिंक पर तुरंत भरोसा न करें : साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एंड प्रिवेंशनः ए फॉरेंसिक पर्सपेक्टिव पर अवेयरनेस कैंपेन  </title>
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		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 09:58:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज की ओर से साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एंड प्रिवेंशनः ए फॉरेंसिक पर्सपेक्टिव पर अवेयरनेस कैंपेन में पैरामेडिकल साइंसेज के संग-संग लॉ कॉलेज और तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के स्टूडेंट्स ने शिरकत की। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्याम सुंदर भाटिया की यह खबर&#8230; मुरादाबाद। साइबर एक्सपर्ट शिवम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज की ओर से साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एंड प्रिवेंशनः ए फॉरेंसिक पर्सपेक्टिव पर अवेयरनेस कैंपेन में पैरामेडिकल साइंसेज के संग-संग लॉ कॉलेज और तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के स्टूडेंट्स ने शिरकत की। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्याम सुंदर भाटिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद।</strong> साइबर एक्सपर्ट शिवम तायल ने कहा कि आज के समय में साइबर अपराधी विभिन्न तकनीकों का उपयोग करके लोगों को आसानी से ठगी का शिकार बना लेते हैं। उन्होंने सोशल इंजीनियरिंग, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, एटीएम एवं डेटाबेस हैकिंग और तथाकथित डिजिटल अरेस्ट सरीखे मामलों का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार अपराधी लोगों की भावनाओं और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। तायल ने स्टूडेंट्स को सावधान करते हुए कहा कि किसी भी अनजान कॉल, संदेश या लिंक पर तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए। यदि कोई संदेश आकर्षक या भय उत्पन्न करने वाला हो तो उसकी सत्यता की जांच करना अत्यंत आवश्यक है। साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता और सतर्कता है। साथ ही मजबूत पासवर्ड का उपयोग, समय-समय पर पासवर्ड बदलना और दो-स्तरीय प्रमाणीकरण जैसे उपायों को अपनाने जरूरी है। तायल तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज की ओर से साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एंड प्रिवेंशनः ए फॉरेंसिक पर्सपेक्टिव पर अवेयरनेस कैंपेन में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-105801" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260428-WA0027-300x160.jpg" alt="" width="300" height="160" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260428-WA0027-300x160.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260428-WA0027-768x410.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260428-WA0027.jpg 812w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>इन्होंने रखे विचार</strong></p>
<p>इससे पूर्व साइबर एक्सपर्ट शिवम तायल, कॉलेज ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित, तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्राचार्य प्रो. नवनीत कुमार, डॉ. सुशील कुमार, रेडियोइमेजिंग टेक्नोलॉजी की एचओडी डॉ. रुचिकांत, फॉरेंसिक साइंस के एचओडी रविकुमार आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन करके कार्यक्रम का आगाज किया। कॉलेज ऑफ लॉ के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित ने साइबर अपराध के सामाजिक और न्यायिक प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साइबर अपराध के प्रति जागरूकता समाज के सुदृढ़ और सुरक्षित निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।</p>
<p><strong>साइबर अपराधों को लेकर सजगता की चर्चा</strong></p>
<p>उन्होंने बताया कि न्याय प्रणाली केवल अपराधियों को दंडित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में नैतिक मूल्यों और अनुशासन को स्थापित करने का कार्य भी करती है। साइबर एक्सपर्ट प्रशांत सिंह ने वित्तीय लेन-देन से जुड़े साइबर अपराधों को लेकर सजगता की विस्तार से चर्चा की। प्रो. नवनीत कुमार ने स्टूडेंट्स को सचेत करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय छोटी-छोटी असावधानियां भी गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकती हैं, इसलिए सतर्कता और जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। एचओडी रवि कुमार ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी के प्रो. प्रमोद डोडे, अमित बिष्ट के साथ पैरामेडिकल साइंसेज के लॉ कॉलेज और तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के स्टूडेंट्स मौजूद रहे।</p>
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		<title>एंटीबायोटिक प्रतिरोध दुनिया में गंभीर स्वास्थ्य संकट : प्रतिरोधी संक्रमणों की वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा, खतरे से लड़ने के लिए उन्नत निदान रणनीतियों पर जोर </title>
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		<pubDate>Mon, 05 Jan 2026 13:23:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[टीएमयू मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में बायो केमिस्ट्री की एचओडी प्रो. पथु उषा किरण ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिरोधी संक्रमणों की वैश्विक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए इस खतरे से लड़ने के लिए उन्नत निदान रणनीतियों पर जोर दिया। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230; मुरादाबाद। टीएमयू मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>टीएमयू मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में बायो केमिस्ट्री की एचओडी प्रो. पथु उषा किरण ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिरोधी संक्रमणों की वैश्विक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए इस खतरे से लड़ने के लिए उन्नत निदान रणनीतियों पर जोर दिया। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुरादाबाद।</strong> टीएमयू मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर में बॉयो केमिस्ट्री की एचओडी प्रो. पथु उषा किरण ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिरोधी संक्रमणों की वैश्विक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए इस खतरे से लड़ने के लिए उन्नत निदान रणनीतियों पर जोर दिया। डॉ. किरण ने प्रतिरोधी संक्रमणों की वैश्विक चुनौतियों पर कहा कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है, जो विश्व स्तर पर लाखों मौतों का सबब बन रहा है। इस खतरे से लड़ने के लिए उन्होंने उन्नत निदान रणनीतियों तेज़ और सटीक आणविक परीक्षण विधियों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सहयोगात्मक प्रयासों की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि ऐसे में शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और नीति-निर्माताओं के एकजुट होने की दरकार है। प्रो. पथु तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज के मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी विभाग में ट्रेनिंग एंड डवलपमेंट सेल के तहत वॉर अगेन्स्ट रेसिस्टेंसः माइक्रोबियल थ्रेट्स एंड जीनोमिक प्रोफाइलिंग पर फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम- एफडीपी एवं वर्कशॉप में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहीं थीं। इससे पूर्व डॉ. किरण ने बतौर मुख्य अतिथि, सीटीएलडी के निदेशक प्रो. पंकज कुमार सिंह, कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल के प्रधानाचार्य प्रो. नवनीत कुमार, एमएलटी की विभागाध्यक्षा प्रो. रुचि कांत आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सभी प्रतिभागियों को ई-सर्टिफिकेट प्रदान किए गए।</p>
<p><strong>बैक्टीरियल आइसोलेट की सही पहचान करने का तरीका बताया</strong></p>
<p>दूसरी ओर वर्कशॉप के तहत प्रतिभागियों को एस्पेटिक सैंपल हैंडलिंग, न्यूट्रियंट एगर, ब्लड एगर, मैककांकी एगर पर कल्चर तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। ग्राम स्टेनिंग की मदद से बैक्टीरिया की पहचान करना भी सिखाया गया। प्रतिभागियों ने कैटालेज, ऑक्सीडेज, इंडोल, यूरियेज़ और ट्रिपल शुगर आयरन टीएसआई सरीखे जैव रासायनिक परीक्षणों को करके बैक्टीरियल आइसोलेट की सही पहचान करने का तरीका बताया गया। क्लिनिकल एंड लैबोरेटरी स्टैंडर्ड्स इंस्टीट्यूट सीएलएसआई के दिशानिर्देशों के अनुसार किर्बी-बाउर डिस्क डिफ्यूजन विधि का उपयोग कर एंटीबायोटिक संवेदनशीलता परीक्षण का प्रशिक्षण भी प्रतिभागियों को दिया गया।</p>
<p><strong>प्रतिभागियों को जीनोमिक पैटर्न की व्याख्या करने के महत्वपूर्ण टूल बताए </strong></p>
<p>दूसरे सत्र में आणविक निदान तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करते हुए बैक्टीरियल सेल लाइसिस, रासायनिक एवं अल्कोहल आधारित डीएनए निष्कर्षण, एगरोज जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस और यूवी लाइट के तहत डीएनए बैंड्स का अवलोकन शामिल रहा। इन तकनीकों ने प्रतिभागियों को जीनोमिक पैटर्न की व्याख्या करने के महत्वपूर्ण कौशल प्रदान किए, जो नैदानिक निर्णय लेने और संक्रमणों से लड़ने में सहायक हैं। तकनीकी सत्रों का संचालन डॉ. शिव शरण सिंह, सुश्री विवेचना, डॉ. वर्षा राजपूत, सुश्री साक्षी बिष्ट, और सुश्री शिखा पालीवाल ने किया। कार्यक्रम में श्री अमित बिष्ट, श्री रवि कुमार, श्री राकेश कुमार यादव, श्री शिवम अग्रवाल, श्री बैजनाथ दास, श्रीमती अर्चना जैन, सुश्री अदिति त्यागी मौजूद रहे।</p>
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