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	<title>केशलोंच &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>केशलोंच &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि श्री निष्पक्ष सागरजी महाराज के हुए केशलोच : पंचम युग में ऐसी साधना सहज नहीं है </title>
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		<pubDate>Mon, 02 Mar 2026 06:18:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज ने सोमवार प्रातः बेला में अपने केशो का लोचन किया। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री निष्पक्ष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज ने सोमवार प्रातः बेला में अपने केशो का लोचन किया। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज ने सोमवार प्रातः बेला में अपने केशो का लोचन किया। केशलोच एक साधना तपस्या है जो केवल दिगंबर संत ही कर सकता है। पंचम युग में ऐसी साधना सहज नहीं है। बिना किसी उपकरण के अपने हाथों से केश का उखाड़ना केवल बानी एवं राख का उपयोग करते हुए। मुनिश्री निष्पक्ष सागर महाराज साधना तपस्या के सतत प्रहरी हैं।</p>
<p>केशलोच प्रक्रिया: जैन साधु उस्तरा या मशीन का उपयोग नहीं करते। वे अपने बाल स्वयं हाथों से उखाड़ते हैं (केशलोच), जो शरीर के प्रति मोह और वेदना पर विजय का प्रतीक है।</p>
<p>चारित्रिक शुद्धि: केशलोच की प्रक्रिया मुनियों के वैराग्य, संयम और शारीरिक पीड़ा सहन करने की क्षमता का प्रतीक मानी जाती है।</p>
<p><strong>  साधुओं के 28 मूलगुणों में कैशलोच होता है </strong></p>
<p>&#8216;इक बार दिन में ले आहार खड़े अलप निज ध्यान में</p>
<p>कच लाँच करत न डरत परिषह सो लगे निज ध्यान में&#8217;</p>
<p>केशलोच के विषय में बता दे कि दिगंबर संत स्वावलंबी होते है, वे किसी को भी कष्ट न देते हुए स्वयं की साधना करते हैं। चाहे कैसा भी कष्ट क्यों न हो, वे समभाव मेंउसे सहन करते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होते है। साधना साधना के रास्ते कामना के वास्ते चल दे राही चल जैन संत अहिंसा व्रत के पालन के साथ ही शरीर से राग भाव को भी हटाते हैं। जब जैन संत स्वयं के हाथों केशलोच करते है तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट देखने को मिलती है। जो अपने आप में पंचम युग में एक उत्कृष्ट साधना है।</p>
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		<title>मुनि श्री योगसागरजी ने श्री राणपुर जिनालय के दर्शन किए : अभिभूत हो समाज बंधुओ की तारीफ  </title>
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		<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 11:02:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री 108योगसागर जी महाराज ससंघ का राणपुर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जगपुरा से विहार कर मुनिश्री ससंघ (12 पिच्छी) का ग़ाजों बाजों के साथ रानपुर में विहार के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा मुनि श्री के पाद प्रक्षालन किए गए। कोटा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; कोटा। मुनि श्री 108योगसागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री 108योगसागर जी महाराज ससंघ का राणपुर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जगपुरा से विहार कर मुनिश्री ससंघ (12 पिच्छी) का ग़ाजों बाजों के साथ रानपुर में विहार के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा मुनि श्री के पाद प्रक्षालन किए गए। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा</strong>। मुनि श्री 108योगसागर जी महाराज ससंघ का राणपुर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जगपुरा से विहार कर मुनिश्री ससंघ (12 पिच्छी) का ग़ाजों बाजों के साथ रानपुर में विहार के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा मुनि श्री के पाद प्रक्षालन किए गए। मंगल आगवानी की गई। गांव के मंदिर पहुंचने पर गुरुदेव ने मंदिर के दर्शन किए और वह अभिभूत हुए। शुभम जैन ने बताया कि इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि इतने कम समाज के घर होने पर भी भव्य मंदिर बनाया है, ये बहुत अच्छी बात है। मनोज जैन आदिनाथ ने बताया कि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के शिष्य एवं आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती मुनिश्री 108 योग सागर जी महाराज, मुनि श्री निरोग सागर जी, मुनि श्री निर्मोह सागर जी, मुनि श्री निरामय सागर जी, मुनि श्री निर्भीक सागरजी महाराज, पंच ऐलक महाराज एवं क्षुल्लक द्वय का विहार मंगलवार दोपहर दो बजे जगपुरा विमल वर्धमान फ़ार्म हाउस से राणपुर की ओर हुआ। जहां मार्ग को दुल्हन की तरह सजाया गया। जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए थे। जहाँ संतों का पाद प्रक्षालन किया।</p>
<p>सकल दिगम्बर जैन समाज समिति के अध्यक्ष प्रकाश बज ने बताया कि विशाल मुनि संघ में मुनिश्री योग सागरजी महाराज का प्रातः 8 बजे केवलनगर स्थित महावीर भवन से 8 किमी का विहार जगपुरा स्थित विमल वर्धमान फ़ार्म हाउस की ओर हुआ।</p>
<p><strong>मुनिराज के केशलोच हुए</strong></p>
<p>कार्याध्यक्ष मनोज जैन आदिनाथ ने बताया कि विशाल मुनि संघ की आहार चर्या फ़ार्म हाउस पर हुई। विहार के दौरान मुनिराज के केशलोच हुए। संघस्थ मुनि श्री निरामय सागर महाराज ने जगपुरा पहुंचकर केशलोच किए। दिगम्बर साधु संत हर ढाई से तीन माह के उत्कृष्ट काल में अपने सिर, दाढ़ी एवं मूंछ के बालों को स्वयं के ही हाथों से घासफूंस की तरह उखाड़ कर फेंक देते हैं और उसी दिन निर्जल उपवास धारण कर लेते हैं।</p>
<p><strong>कोटा में मंगल आगवानी रविवार को</strong></p>
<p>मुनि श्री योग सागरजी महाराज ससंघ में शामिल 5 मुनिराज, 5 ऐलक महाराज एवं 2 क्षुल्लक महाराज मध्यप्रदेश के गुना से पद विहार कर कोटा नगर में 47 वर्षों के अंतराल के बाद आ रहे है। त्रिकाल चौबीसी जिनालय समिति आरके पुरम के अध्यक्ष अंकित जैन ने बताया कि कोटा शहर का पूरा समाज पलक पाँवड़े बिछाकर विशाल संघ की आगवानी को आतुर हैं। इस बार विशाल संघ की आगवानी का अवसर नए कोटा के आरके पुरम जैन समाज को मिला है तो सभी वर्गों में उत्साह काफ़ी अधिक है। मुनि संघ की आगवानी सकल दिगम्बर जैन समाज के निवेदन पर आरके पुरम स्थित त्रिकाल चौबीसी मंदिर में रविवार 8 फ़रवरी को प्रातः होगी।</p>
<p><strong>पद विहार में सैकड़ों श्रद्धालु रहे शामिल</strong></p>
<p>राणपुर मंदिर समिति के अध्यक्ष नवीन दौराया ने बताया कि शुक्रवार को मुनि संघ के पद विहार में सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष प्रकाश बज, कार्याध्यक्ष पारस सोगानी, मनोज जैसवाल, जगदीश जिंदल, पूर्व महामंत्री विनोद टोरड़ी, त्रिकाल चौबीसी आरके पुरम के अध्यक्ष अंकित जैन, नसिया जैन मंदिर के अध्यक्ष जम्बू सराफ, हुकम जैन काका, नरेश वैद, दीपक डीसीएम, संजय निर्माण, नवीन दौराया, अजमेरा सहित सैकड़ों महिला, पुरुष,युवा आदि शामिल रहे। संभवतः शनिवार को मुनि संघ का 12 किमी दूरी का विहार आरोग्य नगर स्थित जैन जन उपयोगी भवन के लिए दोपहर डेढ़ बजे होगा।</p>
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		<title>मुनिश्री योगसागरजी महाराज का हुआ केशलोच : मुनियों के 28 मूलगुणों में से एक अनिवार्य क्रिया  </title>
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		<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 05:57:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज के शिष्य आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री योगसागर महाराज ने भीषण शीतलहर के बीच अपने केशों का लोचन किया। आज गुरुदेव का उपवास भी रहेगा। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज के शिष्य आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज के शिष्य आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री योगसागर महाराज ने भीषण शीतलहर के बीच अपने केशों का लोचन किया। आज गुरुदेव का उपवास भी रहेगा। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज के शिष्य आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री योगसागरजी महाराज ने भीषण शीतलहर के बीच अपने केशों का लोचन किया। आज गुरुदेव का उपवास भी रहेगा। दिगंबर जैन परंपरा के अनुसार अपने केशलोच (बालों को हाथ से उखाड़ना) की प्रक्रिया पूर्ण करते हैं। यह मुनियों के 28 मूलगुणों में से एक अनिवार्य क्रिया है, जो शरीर के प्रति अनासक्ति, आध्यात्मिक बल और सहनशीलता का प्रतीक है।</p>
<p><strong>केशलोच सहज साधना नहीं </strong></p>
<p>केशलोच प्रक्रिया के मुख्य बिंदु के तहत अनिवार्य नियम- दिगंबर साधु हर 2 से 4 महीने में अनिवार्य रूप से अपने बाल उखाड़ते हैं। यह एक उत्कृष्ट साधना है पंचम युग में केवल दिगंबर संत ही कर सकता है। बिना किसी औजार के बालों को उखाड़ना यह एक बिरला साधक ही कर सकता है। इन भाव विहल दृश्यों को जो भी देखता है वह भावुक हो उठता है। यह कोई सहज साधना नहीं है।</p>
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		<title>मुनि श्री निराकुल सागर जी ने किए केशलोचन : दिगंबर मुनि महाव्रती होते हैं और 22 परिषह को सहज ही सहन करते हैं  </title>
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		<pubDate>Wed, 10 Dec 2025 09:47:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में शीतकालीन वाचना कर रहे मुनि श्री निराकुल सागर जी ने केशलोचन किया। सन्मति काका ने बताया की चूंकि दिगंबर साधु समस्त परिग्रह से रहित होते हैं तथा अपने पास केवल एक मयूर पंख से बनी पिच्छी रखते हैं। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; सनावद। नगर में शीतकालीन वाचना कर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में शीतकालीन वाचना कर रहे मुनि श्री निराकुल सागर जी ने केशलोचन किया। सन्मति काका ने बताया की चूंकि दिगंबर साधु समस्त परिग्रह से रहित होते हैं तथा अपने पास केवल एक मयूर पंख से बनी पिच्छी रखते हैं। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद</strong>। नगर में शीतकालीन वाचना कर रहे मुनि श्री निराकुल सागर जी ने केशलोचन किया। सन्मति काका ने बताया की चूंकि दिगंबर साधु समस्त परिग्रह से रहित होते हैं तथा अपने पास केवल एक मयूर पंख से बनी पिच्छी रखते हैं। अतः बालों को हटाने के लिए वे उस्तरा आदि अपने पास नहीं रख सकते और ना ही इनका प्रयोग कर सकते और चूंकि साधु स्वावलंबी होते हैं और उनकी चर्या सिंह के समान होती है। इसलिए बाल हटाने के लिए किसी का सहारा भी नहीं लेते। इसलिए वे अपने हाथों से बालों को नोंच कर उखाड़ते हैं। इस क्रिया को केशलोच कहते हैं। वैसे केशलोच परिषह सहन करने के लिए भी जरूरी होता है। दिगंबर मुनि महाव्रती होते हैं और 22 परिषह को सहज ही सहन करते हैं तथा 28 मूल गुणों का पालन करते हैं। जिसमंे हाथों से केशलोच करना एक आवश्यक क्रिया है और चूंकि केशलोच करने से भी अनेक परजीवी छोटे जीवों की विराधना होती हैं, जिसके प्रायश्चित स्वरूप माताजी और महाराज जी उस दिन निराहार रह कर उपवास भी रखते हैं। अतः दिगंबर मुनि अहिंसा की जीवंत छवि होते हैं। जिनसे किसी भी जीव को किसी तरह का कोई भय नहीं रहता है। मुनि स्वयं भी अभय होते हैं और दूसरों को भी अभय ही प्रदान करते हैं। इस शुभ अवसर पर प्रशांत चौधरी, अचिंत्य जैन, राजू जैन, डॉ यतीश जैन, अंजू पाटनी, मीना जटाले सहित अनेक समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>ब्रह्मचारी सुमन दीदी बनी — आर्यिका विवर्णमति माताजी: गणिनी गुरु मा विशुद्धमति माताजी के कर कमलों से हुआ दिव्य दीक्षा संस्कार  </title>
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		<pubDate>Mon, 24 Nov 2025 14:16:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सवाईमाधोपुर स्थित चमत्कार जी अतिशय क्षेत्र पर ब्रह्मचारी सुमन दीदी ने संसार त्यागकर संयम मार्ग को अपनाते हुए गणिनी गुरु मा 105 विशुद्धमति माताजी के कर कमलों से आर्यिका दीक्षा ग्रहण की। भावनात्मक क्षणों और केशलोच के दृश्य ने भक्तों को भावविभोर किया श्रीफल साथी अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट  सवाईमाधोपुर। सवाईमाधोपुर के चमत्कार जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सवाईमाधोपुर स्थित चमत्कार जी अतिशय क्षेत्र पर ब्रह्मचारी सुमन दीदी ने संसार त्यागकर संयम मार्ग को अपनाते हुए गणिनी गुरु मा 105 विशुद्धमति माताजी के कर कमलों से आर्यिका दीक्षा ग्रहण की। <span style="color: #ff0000">भावनात्मक क्षणों और केशलोच के दृश्य ने भक्तों को भावविभोर किया श्रीफल साथी अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सवाईमाधोपुर</strong>। सवाईमाधोपुर के चमत्कार जी अतिशय क्षेत्र में परम पूज्य भारत गौरव गणिनी गुरु मा 105 विशुद्धमति माताजी द्वारा ब्रह्मचारी सुमन दीदी को आर्यिका दीक्षा प्रदान की गई।</p>
<p>दोपहर में शुरू हुए समारोह में दीक्षार्थी दीदी को डोली में बिठाकर बैंड-बाजों के साथ दीक्षा स्थल लाया गया, जहाँ पारंपरिक चौक पुराया गया।</p>
<p><strong>दीक्षार्थी सुमन दीदी का भावुक निवेदन</strong></p>
<p>दीक्षार्थी ने सर्वप्रथम सभी से क्षमा मांगते हुए कहा —</p>
<p>“वर्षों से इच्छा रही है कि मैं जैनेश्वरी दीक्षा लेकर समाधि मरण को प्राप्त करूं। संसार से अब कोई राग नहीं। गुरु मा, मुझे दीक्षा प्रदान करें।”</p>
<p>गुरु मा ने तीन बार विचार करने को कहा, पर दीदी अडिग रहीं — &#8220;अब मैं संयम मार्ग ही चाहती हूँ&#8221;।</p>
<p><strong>केशलोच का दृश्य… जिसने हर आंख को नम कर दिया</strong></p>
<p>मंच पर भक्ति गूँजी और उसके बाद गुरु माँ ने बिना किसी औजार के हाथों से केशलोच किया।</p>
<p>भक्तों की नजरें रुकी रह गईं… वातावरण शांत था… लेकिन दिलों में भक्ति, भाव और करुणा उमड़ रही थी।</p>
<p>कार्यक्रम में दीक्षा सेवाओं और पुण्यशाली परिवारों का सम्मान किया गया। पिच्छिका, कमंडल, शास्त्र व माला भेंट की गई।</p>
<p><strong> त्याग का संदेश — जो मन को झकझोर गया</strong></p>
<p>प्रज्ञा पद्मनी पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी ने कहा —</p>
<p>“दीक्षा समारोह देखने आए हो, कुछ न कुछ त्याग करके जाओ। कम से कम आज से शैंपू छोड़ दो।”</p>
<p><strong>उन्होंने कहा —</strong></p>
<p>“जिन चमकीले बालों पर हम इतराते हैं, वही भाव-बंधन बन जाते हैं। त्याग का मार्ग ही मोक्ष का मार्ग है।”</p>
<p><strong> नए नाम की घोषणा और पूरा पंडाल जयकारों से गूँज उठा</strong></p>
<p>जैसे ही सुमन दीदी के लिए नया नाम घोषित हुआ —</p>
<p>‘आर्यिका 105 विवर्णमति माताजी’</p>
<p>पूरा पंडाल जयकारों से थर्रा उठा। दूर-दराज से आए भक्तों ने इस अद्भुत क्षण को अपनी आंखों में संजो लिया।</p>
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		<title>परम पूज्य आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज का केशलोच : रामगंजमंडी में 14 अगस्त की प्रातः बेला में हुआ अद्वितीय तप का प्रदर्शन </title>
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		<pubDate>Thu, 14 Aug 2025 08:04:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रामगंजमंडी में 14 अगस्त की प्रातः बेला में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने अपने हाथों से केशलोच कर अद्वितीय साधना का प्रदर्शन किया। दिगंबर परंपरा के इस मूलगुण के अंतर्गत बिना किसी औजार के केश उखाड़ना कठिन तपस्या मानी जाती है। पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की खास रिपोर्ट… रामगंजमंडी — 14 अगस्त की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रामगंजमंडी में 14 अगस्त की प्रातः बेला में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने अपने हाथों से केशलोच कर अद्वितीय साधना का प्रदर्शन किया। दिगंबर परंपरा के इस मूलगुण के अंतर्गत बिना किसी औजार के केश उखाड़ना कठिन तपस्या मानी जाती है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की खास रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी</strong> — 14 अगस्त की प्रातः बेला में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने अपने हाथों से केश लोचन किया। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए गहन प्रेरणादायी रहा।</p>
<p>केशलोच के विषय में प्रकाश डालते हुए आपको बता दें कि दिगंबर संत स्वावलंबी होते हैं। वे किसी को भी कष्ट न देते हुए स्वयं की साधना करते हैं। चाहे कैसा भी कष्ट क्यों न हो, वे समभाव में उसे सहन करते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होते हैं। केशलोच एक साधना और तपस्या है। बिना किसी औजार के हाथों से केश उखाड़ना सहज नहीं होता।</p>
<p><strong>मूलगुणों में यह एक प्रमुख गुण</strong></p>
<p>जैन संतों के मूलगुणों में यह एक प्रमुख गुण है। स्वयं के हाथों, बिना किसी अस्त्र के, अपने केशों को घास-फूस की तरह निकालना अपने आप में एक उत्कृष्ट साधना मानी जाती है।</p>
<p>साधना के मार्ग पर चलते हुए जैन संत अहिंसा व्रत के पालन के साथ ही शरीर से राग भाव को भी हटाते हैं। जब जैन संत स्वयं के हाथों केशलोच करते हैं, तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट देखने को मिलती है, जो पंचम युग में एक दुर्लभ और अद्वितीय साधना का प्रमाण है।</p>
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		<title>‘संतान को जन्म देना एक क्रिया नहीं, एक साधना है’ : श्रावक संस्कार शिविर में प्रतिदिन प्रातः भावनायोग होगा  </title>
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		<pubDate>Mon, 11 Aug 2025 09:48:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अवधपुरी में सोमवार प्रातः मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने केशलोच कर मौन उपवास के साथ दिन व्यतीत किया। विगत सांयकालीन शंका-समाधान कार्यक्रम में मुनि श्री ने अनेक प्रश्नों का समाधान किया। अवधपुरी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; अवधपुरी। अवधपुरी में सोमवार प्रातः मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने केशलोच कर मौन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अवधपुरी में सोमवार प्रातः मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने केशलोच कर मौन उपवास के साथ दिन व्यतीत किया। विगत सांयकालीन शंका-समाधान कार्यक्रम में मुनि श्री ने अनेक प्रश्नों का समाधान किया। <span style="color: #ff0000">अवधपुरी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अवधपुरी।</strong> अवधपुरी में सोमवार प्रातः मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने केशलोच कर मौन उपवास के साथ दिन व्यतीत किया। विगत सांयकालीन शंका-समाधान कार्यक्रम में मुनि श्री ने अनेक प्रश्नों का समाधान किया। इसी क्रम में एक महिला ने प्रश्न किया कि स्त्री के जीवन में मां बनना एक गर्व की अनुभूति है, इस अनुभूति को कैसे सार्थक करें ? मुनि श्री ने उत्तर देते हुए कहा- आपके माध्यम से सभी गर्भवती महिलाओं को कहना चाहता हूं कि प्रतिदिन नौ मिनट का भावनायोग अवश्य करें और यदि संभव हो तो दिन में तीन बार। यह प्रयोग आपकी कोख से जन्म लेने वाली संतान को शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाएगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि गर्भवती स्त्री को अपना जीवन संयम और ब्रह्मचर्य के साथ बिताना चाहिए। इस समय ललित कलाओं, महापुरुषों के चरित्र चिंतन और प्रेरणादायी साहित्य से जुड़ना चाहिए। नकारात्मक बातें, क्लेश, झगड़े और टीवी के अशांतिदायक कार्यक्रमों से दूर रहना जरूरी है। मुनि श्री ने समझाया- मां बनने के समय आपके मन का हर्ष, प्रसन्नता और सकारात्मकता सीधा बच्चे पर प्रभाव डालती है। यदि आपने यह साधना पूरी निष्ठा से की तो आप मात्र एक संतान को जन्म नहीं देंगी, बल्कि एक श्रेष्ठ मां बनकर इस धरती के भूषण को जन्म देने का सौभाग्य पाएंगी। आगामी दशलक्षण पर्व की चर्चा करते हुए मुनिश्री ने कहा कि इन दस दिनों में सुबह से शाम तक केवल औपचारिक धार्मिक क्रियाएं करने के बजाय कुछ विशेष प्रयोग अपनाएं तो जीवन में बड़ा परिवर्तन संभव है।</p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि अवधपुरी में आयोजित श्रावक संस्कार शिविर में प्रतिदिन प्रातः 5.45 बजे भावनायोग कराया जाएगा। जिसका लाइव प्रसारण ‘प्रमाणिक एप’ पर होगा। उन्होंने बताया कि इन 10 दिनों में व्यापारियों, उद्यमियों और बच्चों के लिए अलग-अलग विशेष सत्र होंगे। मुनि श्री ने श्रावकों से आग्रह किया कि जो लोग शिविर में प्रत्यक्ष आकर लाभ नहीं ले सकते, वे घर पर भी नियमित साधना करें और इस पावन अवसर का अधिकतम लाभ उठाएं।</p>
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		<title>मुनिश्री विलोक सागर ने किए केशलोच सिर, दाढ़ी मूंछों के बाल हाथों से उखाड़े : केशलोच के समय भक्तों ने महामंत्र नमोकार का जाप श्री जिनेंद्र प्रभु की स्तुति की  </title>
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		<pubDate>Fri, 01 Aug 2025 10:25:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन संतों साध्वियों की चर्या बहुत ही कठिन और कष्ट साध्य है। यहां तक कि वे अपने सिर, दाढ़ी, मूंछों के वालों को भी हाथ से उखाड़कर फैंकते हैं। नगर में चातुर्मासरत मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज प्रतिदिन बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा के दौरान प्रवचनों और कक्षाओं के माध्यम से धर्मप्रभावना कर रहे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन संतों साध्वियों की चर्या बहुत ही कठिन और कष्ट साध्य है। यहां तक कि वे अपने सिर, दाढ़ी, मूंछों के वालों को भी हाथ से उखाड़कर फैंकते हैं। नगर में चातुर्मासरत मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज प्रतिदिन बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा के दौरान प्रवचनों और कक्षाओं के माध्यम से धर्मप्रभावना कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रातःकालीन वेला में मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने केशलोच किए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन संतों साध्वियों की चर्या बहुत ही कठिन और कष्ट साध्य है। यहां तक कि वे अपने सिर, दाढ़ी, मूंछों के वालों को भी हाथ से उखाड़कर फैंकते हैं। नगर में चातुर्मासरत मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज प्रतिदिन बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा के दौरान प्रवचनों और कक्षाओं के माध्यम से धर्मप्रभावना कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रातःकालीन वेला में मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने केशलोच किए। केशलोच जैन संतों के चर्या का एक हिस्सा है। वे अपने सिर, दाढ़ी, मूंछ के बाल निकालने के लिए किसी भी प्रकार के उपकरण कैंची, उस्तरा या ब्लैड आदि का उपयोग नहीं करते हैं, बल्कि वे उन वालों को प्रत्येक 45 दिनों अथवा दो माह के अंतराल में अपने हाथों से उखाड़कर साफ करते हैं। बालों को हाथों से उखाड़कर फैंकने की क्रिया को ही केशलोच कहा जाता है। यह उनके तपोबल का ही परिणाम है कि वे इस कठिन कार्य को करने पर भी तनिक विचलित नहीं होते। केशलोच की क्रिया जैन साधु की सबसे कठिन क्रियाओं में मानी जाती है। कभी-कभी केशलोच करते समय बालों के उंगलियों से फिसलने एवं खून के रिसने की भी आशंका रहती है, इसके लिए साधुगण शुद्ध राख का उपयोग करते हैं।</p>
<p><strong>जैन मुनि समस्त परिग्रह से रहित होते हैं       </strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनिश्री विबोधसागर महाराज ने बताया कि जैन मुनि समस्त परिग्रह से रहित होते हैं तथा अपने पास केवल एक मयूर पंख से बनी पीछी रखते है। अतः बालों को हटाने के लिए वे उस्तरा, कैंची आदि अपने पास नहीं रख सकते और ना ही इनका प्रयोग कर सकते। जैन मुनि स्वावलंबी होते है और उनकी चर्या सिंह के समान होती है। इस लिए बाल हटाने के लिए किसी का सहारा भी नही लेते। इस लिए वे अपने हाथों से बालों को नोंच कर उखाड़ते हैं। इस क्रिया को केश लोंच कहते हैं। वैसे केशलोच परिषह सहन करने के लिए भी जरूरी होता है। दिगंबर मुनि महाव्रती होते हैं और 22 परिषह को सहज ही सहन करते हैं तथा 28 मूल गुणों का पालन करते हैं जिसमे हाथों से केशलोच करना एक आवश्यक क्रिया है और चूंकि केशलोच करने से भी अनेक परजीवी छोटे जीवों की विराधना होती है, जिसके प्राश्चियत स्वरूप मुनि उस दिन निराहार रह कर उपवास भी रखते हैं। अतः दिगंबर मुनि अहिंसा की जीवंत छवि होते हं,ै जिनसे किसी भी जीव को किसी तरह का कोई भय नही रहता है। मुनि स्वयं भी अभय होते हैं और दूसरों को भी अभय ही प्रदान करते हैं। जिस समय मुनिश्री विलोक सागर महाराज शांत मुद्रा में मधुर मुस्कान के साथ केशलोच कर रहे थे उस समय प्रकाशचंद साहुला, अनूप भंडारी, मनोज जैन नायक, बृजेश जैन दादा, सुनील जैन, दीपक जैन एवं अन्य साधर्मी बंधु मुनिश्री के समक्ष महामंत्र नमोकार का जाप एवं श्री जिनेंद्र प्रभु की स्तुति कर रहे थे।</p>
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		<title>मुनि श्री प्रवीर सागर महाराज ने किया केशलोच : केशलोच उत्कृष्ट साधना होती है </title>
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		<pubDate>Thu, 24 Jul 2025 13:41:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के शिष्य मुनि श्री प्रवीर सागर महाराज ने बुधवार को केशलोच किया, इस दौरान मुनि श्री का उपवास रहा। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के शिष्य मुनि श्री प्रवीर सागर महाराज ने बुधवार को केशलोच किया, इस दौरान मुनि श्री का उपवास [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के शिष्य मुनि श्री प्रवीर सागर महाराज ने बुधवार को केशलोच किया, इस दौरान मुनि श्री का उपवास रहा। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के शिष्य मुनि श्री प्रवीर सागर महाराज ने बुधवार को केशलोच किया, इस दौरान मुनि श्री का उपवास रहा। केश लोच के बारे में विदित है कि स्वयं के हाथों बिना किसी अस्त्र के अपने हाथों से घास फूस की तरह संत केशों को निकालते हैं, जो अपने आप में एक उत्कृष्ट साधना होती है। गुरुदेव बिना कुछ खाए पिए भूख और प्यास को सहन करते हुए आज उपवास पर रहेंगे, जो अपने आप में एक उत्कृष्ट तप साधना के रास्ते कामना के वास्ते चल दे राही चल। यदि इसके बारे में जाने तो यह करना कोई साधारण बात नहीं है, यह जैन संतों का सबसे कठोर तप माना गया है। आम आदमी के जीवन में यदि एक बार गलती से बाल उखड़ जाए तो वह दर्द के मारे कांपने लगता है लेकिन, जैन संत तो बिना किसी औजार के सीधे अपने हाथों से बालों को खींचकर निकाल देते हैं। जैन संत सदा स्वावलंबी होते हैं, वे किसी को भी कष्ट न देते हुए स्वयं की साधना करते हैं।</p>
<p>चाहे कैसा भी कष्ट क्यों ना हो। वे समभाव में उसे सहन करते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होते हैं। जैन संत अहिंसा व्रत के पालन के साथ ही शरीर से राग भाव को भी हटाते हैं। साधु शरीर की सुंदरता को नष्ट करने के लिए अहिंसा धर्म का पालन करते हुए केशलोच करते है। जब जैन संत स्वयं के हाथों केशलोच करते है तो उनके चेहरे पर मुस्कुराहट देखने को मिलती है। जो अपने आप में पंचम युग में एक उत्कृष्ट साधना है।</p>
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		<title>मुनि श्री सिद्ध सागर महाराज जी ने किया केशलोच : आध्यात्मिक बल तथा शरीर के उपेक्षा भाव की परीक्षा होती है </title>
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		<pubDate>Thu, 17 Jul 2025 08:07:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज ने 16 जुलाई को प्रात: केशलोंच की प्रक्रिया पूर्ण की। इस दौरान भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर नांद्रे में समाज के वरिष्ठजन एवं श्रद्धालुगण बड़ी संख्या में मौजूद थे और केशलोच की पूर्ण प्रक्रिया के दौरान मंत्रों का जाप कर रहे थे। नांद्रे से पढ़िए अभिषेक अशोक पाटिल की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज ने 16 जुलाई को प्रात: केशलोंच की प्रक्रिया पूर्ण की। इस दौरान भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर नांद्रे में समाज के वरिष्ठजन एवं श्रद्धालुगण बड़ी संख्या में मौजूद थे और केशलोच की पूर्ण प्रक्रिया के दौरान मंत्रों का जाप कर रहे थे। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>नांद्रे।</strong> पट्टाचार्य विशुद्धसागर जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्रुतसागर महाराज जी भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। मुनि श्री सिद्ध सागर जी के भक्त नवीनकुमार पाटील ने कहा कि बुधवार को मुनि श्री सिद्ध सागर महाराज के केशलोच पर आइए जानते हैं उनके जीवन की कुछ खास बात ।आज से 23 वर्ष पूर्व मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड जिला के रूर ग्राम में 7 सितम्बर 2002 में हुआ। इस नगर से अनेक मुनि, आर्यिका और व्रती बन चुके हैं। मुनि सिद्ध सागर महाराज कहते है कि मेरा सौभाग्य रहा कि जिस ग्राम रूर में जिस परिवार में आचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज जी का जन्म हुआ। उसी घर में मेरा भी जन्म हुआ। साधु के 28 मूलगुणों में से एक गुण केशलौच भी है।</p>
<p>जघन्य 4 महीने, मध्यम तीन महीने और उत्कृष्ट दो महीने के पश्चात् वह अपने बालों को अपने हाथ से उखाड़कर फेंक देते हैं। इस पर से उसके आध्यात्मिक बल तथा शरीर पर से उपेक्षा भाव की परीक्षा होती है। मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज ने 16 जुलाई को प्रात: केशलोंच की प्रक्रिया पूर्ण की। इस दौरान भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर नांद्रे में समाज के वरिष्ठजन एवं श्रद्धालुगण बड़ी संख्या में मौजूद थे और केशलोच की पूर्ण प्रक्रिया के दौरान मंत्रों का जाप कर रहे थे ।</p>
<p>प्रकिया को बारीकी से देखने के लिए विनय पाचोरे, सुमित पाटील, शुभम पाचोरे, प्रितम पाटील, प्रतिक चौगुले, सुधीर भोरे, दादासाहेब पाटील, प्रमोद उपाध्ये और जैन समाज के लोग जुटे रहे। विनय पाचोरे,नांद्रे ने कहा कि दिगम्बर जैन साधु की चर्या अद्भुत होती है। धन्य है ऐसे दिगंबर मुनि सिद्धसागर जी महाराज इनके चरणों में अनंत बार नमन।</p>
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