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	<title>कुंदकुंद ज्ञानपीठ इंदौर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>कुंदकुंद ज्ञानपीठ इंदौर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>दीपाली जैन ने कंकड़ों से बनाई टाइगर की अनोखी कलाकृति: बाघ दिवस पर अर्जित की ऐतिहासिक उपलब्धि बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड </title>
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		<pubDate>Mon, 11 Aug 2025 09:39:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बम्हौरी निवासी दिनेशकुमार व साधना जैन की सुपुत्री एवं दीपेश जैन की बहन दीपाली जैन की कलाकृतियां निरंतर ख्याति प्राप्त कर अपने परिवार ही नहीं अपितु समाज ग्राम क्षेत्र को गौरवान्वित कर रही हैं। बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230; बकस्वाहा। तहसील अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र के ग्राम बम्हौरी निवासी दिनेशकुमार व साधना [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बम्हौरी निवासी दिनेशकुमार व साधना जैन की सुपुत्री एवं दीपेश जैन की बहन दीपाली जैन की कलाकृतियां निरंतर ख्याति प्राप्त कर अपने परिवार ही नहीं अपितु समाज ग्राम क्षेत्र को गौरवान्वित कर रही हैं। <span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> तहसील अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र के ग्राम बम्हौरी निवासी दिनेशकुमार व साधना जैन की सुपुत्री एवं दीपेश जैन की बहन दीपाली जैन की कलाकृतियां निरंतर ख्याति प्राप्त कर अपने परिवार ही नहीं अपितु समाज ग्राम क्षेत्र को गौरवान्वित कर रही हैं। दीपाली जैन के नेतृत्व में एक विशाल कलाकृति को देखकर हर दर्शक वाह-वाह कर उठे। वहीं इस उत्कृष्ट कृति को ट्रांस ओशियाना (यूएसए) द्वारा वर्ल्ड रिकॉर्ड के रूप में अधिकारिक मान्यता प्राप्त हुई है। जिन्होंने तीन दिनों तक लगातार कार्य कर 24 अन्य कलाकारों के साथ मिलकर इस अनोखे टाइगर पोर्ट्रेट को आकार दिया है। उनकी इस ऐतिहासिक गौरवशाली उपलब्धि पर सुरेश जैन आईएएस भोपाल, तीर्थक्षेत्र कमेटी मध्यांचल अध्यक्ष डीके जैन, महामंत्री राजकुमार घाटे इंदौर, कुंदकुंद ज्ञानपीठ इंदौर के डॉ.अरविंदकुमार जैन, राजेश जैन रागी बकस्वाहा सहित अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी, समाजसेवी, जनप्रतिनिधियों ने शुभकामनाएं दी हैं।</p>
<p><strong> 2 लाख से अधिक नर्मदा नदी के कंकड़ों से निर्मित     </strong></p>
<p>विश्व बाघ दिवस के उपलक्ष्य में फीनिक्स सिटाडेल मॉल, इंदौर में आयोजित ’इंदौर टाइगर फेस्टिवल’ में कला और प्रकृति संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला। इस आयोजन की सबसे अनोखी और आकर्षक प्रस्तुति रही 2 लाख से अधिक नर्मदा नदी के कंकड़ों से निर्मित 15 गुणा 15 फीट की विशाल टाइगर पोर्ट्रेट, जिसे देखकर हर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गया। यह उत्कृष्ट कृति कला स्तंभ संस्था के निर्देशन में तैयार की गई और इसे ट्रांस ओशियाना (यूएसए) द्वारा वर्ल्ड रिकॉर्ड के रूप में आधिकारिक मान्यता प्राप्त हुई &#8211; ‘द मोस्ट किएटिव पेबल स्टोन टाइगर आर्टवर्क की श्रेणी में।</p>
<p><strong>इस ऐतिहासिक कला आयोजन के यह साक्षी बने</strong></p>
<p>इंदौर शहर के कई प्रतिष्ठित और गणमान्य अतिथि जिसमें प्रमुखतः प्रवीण खारीवाल अध्यक्ष स्टेट प्रेस क्लब मध्यप्रदेश, श्वेता अग्रवाल, चेयरपर्सन, एफआईसीसीआई एफएलओ इंदौर, उन्नति सिंग डायरेक्टर आईएचबी इंडिया ट्रांस ओशीयाना वर्ल्ड रिकॉर्ड टीम फीनिक्स सिटाडेल मॉल प्रबंधन, कलास्तंभ के निदेशक पुष्कर सोनी, संस्थापक सपना कथफर, वरिष्ठ कलाकार और कला प्रेमी नागरिक शामिल रहे। इस आयोजन ने न केवल इंदौर, बल्कि पूरे भारत के कला प्रेमियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।</p>
<p><strong>कीर्तिमान यह भी उल्लेखनीय हैं</strong></p>
<p>स्मरण रहे कि इसके पूर्व में भी राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू का विश्व का सबसे बड़ा चित्र 4 हजार वर्गफीट के आकार में 5 हजार किलो लकड़ियों से 50 कलाकारों के साथ बनाया गया। जो वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ तथा जींस के कपड़े से 10 हजार वर्गफीट में इंदौर राजवाड़ा की आकृति 100 चित्रकारों के साथ बनाई गई, जो भी वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुई।</p>
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		<title>कुंदकुंद ज्ञानपीठ इंदौर: निःशुल्क प्राकृत भाषा पाठ्यक्रम अध्ययन कार्यशाला </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Jul 2023 17:14:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की मूल भाषा प्राकृत भाषा के अध्ययन व अध्यापन हेतु कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा विद्यार्थियों को निशुल्क कार्यशाला उपलब्ध कराई जा रही है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट श्रीफल जैन न्यूज़ के साथ&#8230; इंदौर:- जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की मूल भाषा प्राकृत भाषा के अध्ययन व अध्यापन हेतु कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा विद्यार्थियों को निशुल्क कार्यशाला उपलब्ध कराई जा रही है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट श्रीफल जैन न्यूज़ के साथ&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर:-</strong> जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की मूल भाषा प्राकृत भाषा के अध्ययन व अध्यापन हेतु कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा विद्यार्थियों को निशुल्क कार्यशाला उपलब्ध कराई जा रही है। प्राचीन भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का यथार्थ ज्ञान प्राप्त करने की दृस्टि से प्राकृत भाषा का साहित्य अतयंत उपयोगी रहा है ,भगवान् महावीर स्वामी द्वारा उपदिष्ट जैन आगम साहित्य प्राकृत भाषा की अमूल्य धरोहर है | वैराग्य ,तप, सयम एवं त्याग से ओत प्रोत यह साहित्य आध्यात्मिक सहृदयों को स्वतः ही अपनी और आकृष्ट कर लेता है |अधिकांश जैन ग्रंथो की रचना प्राकृत भाषा में ही हुई है | हमारा मूल महामंत्र णमोकार मंत्र इसी प्राकृत भाषा में है | यह शिलालेखों की भी भाषा रही है | हाथीगुफा शिलालेख, नासिक शिलालेख, अशोक के शिलालेख प्राकृत भाषा में ही हैं |</p>
<p><strong>प्राकृत भाषा जैनो की पहचान है</strong></p>
<p>हमें प्राकृत भाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए ,प्राकृत भाषा जैनो की पहचान है | वर्तमान समय में आवश्यकता है की हमअन्य भाषाओ के साथ साथ प्राकृत भाषा को भी सीखे | एक युग में प्राकृत जन भाषा थी और हमारे आचार्यों ने इसी को आधार बना कर ग्रंथो की रचना की है | इस लोक भाषा ‘प्राकृत’ का समृद्ध साहित्य रहा है, जिसके अध्ययन के बिना भारतीय समाज एवं संस्कृति का अध्ययन अपूर्ण रहता है। सभी इच्छुक विद्यार्थी संस्था के उदासीन आश्रम स्थित कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p><strong>कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा विद्यार्थियों को निशुल्क उपलब्ध </strong></p>
<p>जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की मूल भाषा के अध्ययन व अध्यापन हेतु कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा विद्यार्थियों को निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। प्राकृत भाषा का यह पाठ्यक्रम श्रवणबेलगोला विश्वविद्यालय से संबद्ध होंगा। जिसमे नियमित उपस्थिति एवं विशेष अंक प्राप्त करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को स्वर्गीय डॉ अजीत कुमार सिंह कासलीवाल स्मृति प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रमाण पत्र एवं प्रोत्साहन राशि भी सम्मान स्वरूप दी जाएगी।</p>
<p>कुंदकुंद ज्ञानपीठ के अध्यक्ष अमित कासलीवाल एवं समाज के संजीव जैन संजीवनी ने बताया कि प्राकृत भाषा के अध्यापन करवाने हेतु संस्कृत विदुषी प्रोफेसर श्रीमती डॉक्टर संगीता मेहता ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है एवं नियमित उपस्थिति एवं विशेष अंक प्राप्त करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को स्वर्गीय डॉ अजीत कुमार सिंह कासलीवाल स्मृति प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रमाण पत्र एवं प्रोत्साहन राशि भी सम्मान स्वरूप दी जाएगी।</p>
<p><strong>कुंदकुंद ज्ञानपीठ </strong></p>
<p>जैन साहित्य अत्यंत समृद्ध है, किन्तु वैज्ञानिक अभिरुचि सम्पन्न व्यक्तियों द्वारा अब तक उसका सम्यक अनुशीलन नहीं हुआ है । साथ ही देश के कोने &#8211; कोने में विकीर्ण पुरासम्पदा का संरक्षण, अभिलेखीकरण एवं मूल्यांकन किये जाने की तत्काल आवश्यकता है । इन दूरगामी लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ की स्थापना दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट के अन्तर्गत 19.10.87 को की गयी एवं इसकी सभी प्रवृत्तियाँ एतदर्थ समर्पित हैं ।</p>
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