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	<title>कुंडलपुर दमोह &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य श्री ने जब बड़े बाबा को देखा तो... : सर्वधर्म समभाव सभा में आचार्यश्री को बताया शब्दातीत </title>
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		<pubDate>Tue, 18 Feb 2025 16:18:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुंडलपुर में सर्वधर्म समभाव सभा में धर्म गुरुओं ने आचार्य श्री विद्यासागर जी को विनयांजलि अर्पित की। आचार्य श्री के प्रत्येक कार्य पर एक-एक नोबेल पुरस्कार दिया जा सकता है। मंगलाचरण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन तथा गुणानुवाद हुआ। पढ़िए कुंडलपुर से राजीव सिंघई की यह खबर&#8230; कुंडलपुर (दमोह)। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर आचार्य श्री विद्यासागर जी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>कुंडलपुर में सर्वधर्म समभाव सभा में धर्म गुरुओं ने आचार्य श्री विद्यासागर जी को विनयांजलि अर्पित की। आचार्य श्री के प्रत्येक कार्य पर एक-एक नोबेल पुरस्कार दिया जा सकता है। मंगलाचरण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन तथा गुणानुवाद हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए कुंडलपुर से राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर (दमोह)।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की तपोस्थली रही है। जहां आचार्य श्री के प्रथम समाधि दिवस पर सर्वधर्म समभाव सभा रखी गई। इस अवसर पर मंगलाचरण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन के साथ सभी अतिथियों का स्वागत-अभिनंदन कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के सभी पदाधिकारी सदस्यों ने किया।</p>
<p><strong>&#8216;इंडिया नहीं भारत&#8217; बोलो &#8216;नारी शिक्षा&#8217; पर जोर </strong></p>
<p>इस अवसर पर सिख धर्म से सरदार जसवीर सिंह पूर्व अध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग (राजस्थान) ने अपने उद्बोधन में कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की समाधि को एक वर्ष पूर्ण हुआ है। उनके चरणों में नमन। आचार्य श्री समयसागर जी महाराज को नमन करते हुए कहा आचार्य श्री आज भी सूक्ष्म रूप में इस मंडप में विद्यमान हैं। स्मृति के रूप में आगम के रूप में हमारे दिलों में आज भी वे निवास करते हैं। भारत भूमि पर जन्म लेना सौभाग्य की बात है भारत की महिमा पूज्य गुरुवर ने बहुत गाई है। इंडिया नहीं भारत बोलो नारी शिक्षा पर उन्होंने जोर दिया।</p>
<p>आचार्यश्री ने मूकमाटी महाकाव्य की रचना की। &#8216;बच्चियों को पढ़ाइए-लिखाइए&#8217; की प्रेरणा दी। उन्होंने बहुत दूर की सोची। उनके उपदेश भारत भूमि की रक्षा के लिए है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-74879" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250218-WA0039.jpg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250218-WA0039.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250218-WA0039-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250218-WA0039-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250218-WA0039-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250218-WA0039-1536x1023.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250218-WA0039-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250218-WA0039-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250218-WA0039-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250218-WA0039-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250218-WA0039-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250218-WA0039-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250218-WA0039-1320x879.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />आप उनके संदेश को रख रहे हैं याद</strong></p>
<p>भारत को आगे बढ़ाना है। एकजुट भारत समभाव का संदेश गुरुदेव ने दिया। उनके संदेशों को अपने जीवन में उतरना होगा। आचार्यश्री के आशीर्वाद से बहुत सुंदर बड़े बाबा का मंदिर बनाया है। आप उन प्रभु के दर को और उनके संदेश को याद रख रहे हैं। उनकी समाधि को एक वर्ष बीत जाने के बाद भी गुरु का स्मरण कर रहे हैं।</p>
<p><strong>वे नूतन दृश्य देने वाले थे</strong></p>
<p>गायत्री शक्तिपीठ भोपाल जोन समन्वयक पंडित रघुनाथ हजारी ने कहा कि आचार्य विद्यासागर जी उत्कृष्ट तपस्वी ,गोवंश की रक्षक थे। उनके एक-एक काम पर नोबेल पुरस्कार दिए जा सकते हैं। चल चरखा हथकरघा, प्रतिभास्थली, पाषाण मंदिर, पूर्णायु आदि उनके प्रकल्प हैं। स्वनाम धन्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज आचार्य शब्द से ही ज्ञात होता है, वह सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व हैं। जो नूतन दृश्य देने वाले थे।</p>
<p><strong>उनके निकलते ही पानी थम गया</strong></p>
<p>पंडित हजारी ने कहा कि 1980 में जबलपुर में उनका सानिध्य मिला। युवा थे। 22 वर्ष में ही दीक्षित हुए हमें बहुत प्रेरित करते थे। मैं उन्हें सुनने बार-बार जाता था। आचार्य श्री राम शर्मा जी के साहित्य को वे पढ़ने और सभी शिष्यों को पढ़ने की प्रेरणा देते। आचार्य श्री की रचना मूकमाटी पर ढेरों पीएचडी, डी-लिट उपाधि हो गई हैं। वे समाधिस्थ अवस्था में भी सभी को मार्गदर्शन देने में सक्षम हैं। पटना रहलीगंज में जब आचार्य श्री आए। सुनार नदी के पुल पर पानी था और सभी ने देखा कि उनके निकलते ही पानी थम गया। पूरा संघ नदी पार हो गया। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का स्लोगन प्रधानमंत्री ने आचार्य श्री की प्रेरणा से दिया।आचार्य श्री ने अनेक चेतन प्रतिमाओं में प्राण फूंके।</p>
<p><strong>उनके ही शब्द अपनी कथाओं में कहता हूं</strong></p>
<p>इस अवसर पर बाल व्यास पंडित ऋषिकांत गर्ग मथुरा ने कहा कि युग पुरुष आचार्य विद्यासागर जी के विषय में बोलना सूर्य के विषय में बोलने के समान है। उनकी प्रेरणा विचार सभी को मार्गदर्शित करते हैं। उनके प्रवचन मैं प्रतिदिन सुनता हूं। उनके ही शब्द अपनी कथाओं में कहता हूं। यह पृथ्वी आचार्य विद्यासागर जी जैसे संतों से टिकी हुई है।</p>
<p><strong>कई सेवा प्रकल्प उनके आशीर्वाद से हैं</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने उदघोष नहीं किया कि मैं करूंगा। उन्होंने वह करके दिखा दिया। उनके प्रकल्प समाज के लिए भारत वर्ष के लिए है। उन्होंने जो भी कदम उठाया परहित के लिए उठाए। इंडिया को भारत नाम दिया। मानवता दया अहिंसा के कई सेवा प्रकल्प उनके आशीर्वाद से चल रहे हैं।</p>
<p><strong>अपनी ऊर्जा भारतीय संस्कृति की ओर लगाई</strong></p>
<p>ब्रह्मकुमारी आरती दीदी जबलपुर ने कहा कि आध्यात्मिक विभूति भारतीय संस्कृति की आत्मा होती है। आचार्य श्री ने समस्त ऊर्जा को भारतीय संस्कृति की ओर लगा दिया। विश्व में समरसता हो, विश्व के वे प्रेरणासूत्र, मार्गदर्शक रहे हैं । उनके सभी कार्य अनुकरणीय और प्रेरणादायक हैं। उनका जीवन प्रेरणा देने वाला है।</p>
<p><strong>शब्दातीत हैं आचार्यश्री विद्यासागर जी</strong></p>
<p>प्रकाश पाटनी अजमेर ने कहा कि कुंडलपुर की पावन धरा पर यह कार्यक्रम रखा। क्यों रखा? क्योंकि 18 फरवरी को समाधि दिवस हर वर्ष पूरे देश में मनाया जाए। ऐसा प्रस्ताव सदन में लाएंगे। उपस्थित जनसमूह ने अनुमोदना की। कुंडलपुर आचार्य श्री की सबसे प्रिय धरा है। हम उन्हें भगवान महावीर के प्रतिबिंब के रूप में देखते हैं। हरे माधव दरबार कटनी के प्रतिनिधि ने इस अवसर पर कहा आचार्य गुरुवर ने जीवन का सच्चा मार्ग दिखाया है। उनके विषय में जितना वर्णन करें कम है। उनके पावन दर्शन का सौभाग्य हमें मिला।</p>
<p><strong>लोगों ने उन्हें छोटे बाबा का नाम दिया</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी संजीव भैया कटगी ने कहा कि प्राणी मात्र के प्रति दया का भाव उनमें था। जो अपने कार्यों से प्रसिद्ध हुए ऐसे संत ने अहिंसा का विगुल बजाया। वह जन-जन के संत थे। गुरुवर आचार्य श्री को शत-शत नमन। ब्रह्मचारी श्री विनय भैया जी, जो आचार्य श्री के सबसे नजदीकी एवं समाधि के आखिरी समय तक रहे। उन्होंने इस अवसर पर कहा आचार्य श्री 22 वर्ष की उम्र में दीक्षा लेकर जब बुंदेलखंड की पावन धरा कुंडलपुर में आए तो यहां उन्होंने बड़े बाबा को देखा। बड़े बाबा ने उन्हें देखा और कुंडलपुर से ही लोगों ने उन्हें छोटे बाबा का नाम दिया। वे विरले संत थे। प्रत्येक प्राणी का उद्धार करते हुए उनका विहार हुआ करता था। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।</p>
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		<title>नव वर्ष पर कुंडलपुर में श्रद्धालु भक्तों का उमड़ा जन सैलाब, बड़े बाबा के अभिषेक के लिए भक्तों की लगी लंबी कतार : स्वतंत्रता संग्राम में जैन वीर सपूत ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुति दी गई </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/a_huge_crowd_of_devotees_gathered_in_kundalpur_on_the_occasion_of_new_year/</link>
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		<pubDate>Wed, 01 Jan 2025 14:23:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर, पूज्य बड़े बाबा की अतिशय स्थली, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की तपस्थली में नव वर्ष 2025 के शुभ आगमन पर पूज्य बड़े बाबा के चरणों में श्रद्धालु भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। पढ़िए एक रिपोर्ट&#8230; कुंडलपुर दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर, पूज्य बड़े बाबा की अतिशय स्थली, संत शिरोमणि आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर, पूज्य बड़े बाबा की अतिशय स्थली, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की तपस्थली में नव वर्ष 2025 के शुभ आगमन पर पूज्य बड़े बाबा के चरणों में श्रद्धालु भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए एक रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर दमोह।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर, पूज्य बड़े बाबा की अतिशय स्थली, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की तपस्थली में नव वर्ष 2025 के शुभ आगमन पर पूज्य बड़े बाबा के चरणों में श्रद्धालु भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। नववर्ष की पूर्व संध्या से ही कुंडलपुर में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्तों का आना प्रारंभ हो गया। रात्रि में 8 बजे से जैन नाटक समिति पनागर के 90 प्रतिभाशाली कलाकारों द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में जैन वीर सपूतों के बलिदान की जीवन गाथा ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुति के मंचन द्वारा उपस्थित भारी जनसमूह का मनमोह लिया। कलाकारों का अभिनय सराहनीय रहा।</p>
<p><strong>कार्यक्रम के शुभारंभ में चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन के साथ किया गया</strong></p>
<p>कार्यक्रम के शुभारंभ में चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन के साथ कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ सहित पदाधिकारी सदस्यों ने अतिथियों एवं सभी कलाकारों का स्वागत अभिनंदन किया। देर रात तक नाटक की प्रस्तुति होती रही। मुख्य अतिथि हटा विधायक उमा देवी खटीक ने सभी कलाकारों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। बारह बजते ही पूज्य बड़े बाबा के श्री चरणों में जनसमूह उमड़ पड़ा और नव वर्ष 2025 का स्वागत नाचते गाते पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती के साथ किया। प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि नये वर्ष की प्रातः बेला में भक्तामर महामंडल विधान संपन्न हुआ। पूज्य बड़े बाबा के अभिषेक के लिए श्रद्धालु भक्तों की लंबी कतार लगना शुरू हो गई। एक-एक भक्तों ने क्रम से आकर नए वर्ष का शुभारंभ पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक कर किया। दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा रहा।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-71848" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0030.jpg" alt="" width="1600" height="1064" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0030.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0030-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0030-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0030-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0030-1536x1021.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0030-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0030-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0030-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0030-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0030-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0030-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0030-1320x878.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />इन्हें मिला सौभाग्य</strong></p>
<p>इस अवसर पर शांतिधारा, रिद्धि कलश करने का सौभाग्य अशोक, आयु,ष सुदीप, पप्पू, बड़े बाबा ड्रेसेस सागर, रमेशचंद्र अनीता विकास दिल्ली, जीतू भाई रायचंद दिनेश, विशाल शाह अहमदाबाद, मुरारीलाल विजय ऋषभ हरदोई लखनऊ, राहुल सुषमा अजमेरा अशोकनगर, संतोष कुमार कोतमा, ऑर्थव सिंधु प्रक्षाल मेरठ, संभव पारस गौरझामर, गौरव आदि बड़ोद, लक्ष्मीचंद नरेश बीना, अभिनव मुकेश फिरोजाबाद, अनुराग आशीष गौरझामर ने सौभाग्य प्राप्त किया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-71849" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0029.jpg" alt="" width="1600" height="1064" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0029.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0029-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0029-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0029-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0029-1536x1021.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0029-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0029-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0029-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0029-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0029-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0029-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250101-WA0029-1320x878.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />जैन सपूतों के स्वतंत्रता संग्राम में दिए योगदान की गाथा का मंचन किया गया</strong></p>
<p>जैन नाटक समिति के 90 कलाकारों ने 14वीं सदी में उल्लाल बेंगलुरु कर्नाटक की महारानी अबक्का का, 1857 में शहीद लाला हुकुमचंद जैन कानूनगो हांसी हरियाणा, शहीद अमरचंद भाटिया ग्वालियर, क्षुल्लक गणेशप्रसाद जी वर्णी जैसे जैन सपूतों के स्वतंत्रता संग्राम में दिए योगदान की गाथा का जीवंत अभूतपूर्व मंचन कलाकारों द्वारा किया गया। स्वतंत्रता संग्राम में जैन नामक ग्रंथ स्वर्गीय कपूरचंद जैन, ज्योति जैन खतौली द्वारा संकलित किया गया। संयोजक मंच संचालन राहुल बड़कुल, डायरेक्टर विद्याधर खजांची, बहन पूजा मोदी, प्रिया खजांची, प्रशांत जैन लालू का नाट्यमंचन में विशेष सहयोग रहा। रात्रि में भक्तामर दीप अर्चना एवं पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती की गई।</p>
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		<title>गुरुदेव ने आत्मानुशासन से वह कार्य कर दिखाया कि देखती रह गई दुनिया मुनिराजों का मनाया गया दीक्षा दिवस </title>
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		<pubDate>Tue, 14 May 2024 17:28:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र ,जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से निर्यापक मुनि श्री संभव सागर जी महाराज ने मुनि दीक्षा दिवस के अवसर पर प्रवचन देते हुए कहा कि देखो आज का दिवस ऐसा है [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र ,जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से निर्यापक मुनि श्री संभव सागर जी महाराज ने मुनि दीक्षा दिवस के अवसर पर प्रवचन देते हुए कहा कि देखो आज का दिवस ऐसा है कि सूरज की तपन कुछ कम है। उस दिन 22 अप्रैल 1999 वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन सूर्य सुबह से ही इतना तप रहा था कि शायद वह सबसे ज्यादा लालायित हो कि गुरुदेव आचार्य भगवान पहली बार दीक्षा नहीं दे रहे थे। <span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर ।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र ,जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से निर्यापक मुनि श्री संभव सागर जी महाराज ने मुनि दीक्षा दिवस के अवसर पर प्रवचन देते हुए कहा कि देखो आज का दिवस ऐसा है कि सूरज की तपन कुछ कम है। उस दिन 22 अप्रैल 1999 वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन सूर्य सुबह से ही इतना तप रहा था कि शायद वह सबसे ज्यादा लालायित हो कि गुरुदेव आचार्य भगवान पहली बार दीक्षा नहीं दे रहे थे। सिद्ध क्षेत्र में 23 मुनियों को दीक्षा प्रदान की हैं, गुरुदेव ने करकमलों से। सर्वप्रथम दीक्षा द्रौणगिर सिद्ध क्षेत्र में पहली दीक्षा जेष्ठ- श्रेष्ठ वर्तमान में आचार्य श्री समय सागर जी महाराज को दीक्षा प्रदान की गई थी। मुनि श्री योग सागर जी महाराज परसों सुना रहे थे, कि दीक्षा कैसे हुई ।आचार्य श्री स्वयं बाहर आकर बोले, यह तख्त कहां लगाना है। हम लोगों ने तख्त पाटा लगाया। दर्शक भी ऐसा कोई नहीं सुनने वाला ।उस समय की सोचों जब आचार्य महाराज ने समय सागर जी महाराज को दीक्षा प्रदान की ।योगसागर महाराज बता रहे थे ।हम लोगों ने खड़े-खड़े दीक्षा देखी। पाटा लगाया, पाटा पर चौकी लगाई। आचार्य भगवान बैठ गए।समय सागर जी को बिठाया और दीक्षा के संस्कार शुरू हो गए। थोड़ी देर में दीक्षा पूर्ण हो गई। उस दीक्षा ने इतने विशाल संघ में एक नींव के पत्थर का कार्य किया। उस नींव के पत्थर पर इस विशाल संघ की आधारशिला रखी गई। यूं तो गुरुदेव ने चार क्षुल्लक दीक्षा दी थी। पर जब तक कोई आचार्य मुनि दीक्षा नहीं देता। तब तक उसका वह पद सुशोभित नहीं होता ।योग सागर जी बोलते हैं कि हम शहर वासी हैं ,उनकी दीक्षा सागर में मोराजी में हुई। दो कदम चलकर गुरुदेव ने मुनि श्री योग सागर जी एवं नियम सागर जी को मुनि दीक्षा प्रदान की ।गुरुदेव ने और कदम बढ़ाए 2,5,8 दीक्षा प्रदान की ।इकाई का अंक था। सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र में पहली बार दहाई के अंक में दीक्षा प्रदान की गई। 10 दीक्षा प्रदान की गई शरद पूर्णिमा के दिन। कुछ समय गुजरा नहीं कि 9 मुनिराज की दीक्षा मुक्तागिरी सिद्ध क्षेत्र में हुई ।वहां गुरुदेव ने अचानक शाम को बताया, दीक्षा के विषय में। नेमावर सिद्ध क्षेत्र में वैशाख शुक्ल सप्तमी को 47 डिग्री तापमान पर 23 मुनियों को दीक्षा प्रदान की गई। जबलपुर में 25 दीक्षाएं दी । गुरुदेव ने जिनधर्म की प्रभावना करते हुए रामटेक में 24 दीक्षाएं दी। गुरुदेव ने एक-एक ,दो-दो घंटे में दीक्षा संपन्न की है। शीतल धाम विदिशा में शीतल सागर जी आदि मुनिराज को4 दीक्षा दी ।बीनाबारहा में तीन दीक्षाएं दी ।ललितपुर में दीक्षा दी। अंतिम दीक्षा दी वो उत्कृष्ट दीक्षा दी। अच्छा बेस्ट मैन वह होता जो हर बाल पर रन बनाए। गुरुदेव ने लिखा है कि बड़े बाबा ने बड़ी कृपा की है। मुझे आशीष देकर ।गुरुदेव ने कुंडलपुर में 84 आर्यिका दीक्षा प्रदान की है ।एक भी मुनि दीक्षा नहीं दी है ।</p>
<p><strong>आगे के कार्य करने का करना है शंखनाद</strong></p>
<p>आचार्य पदारोहण समारोह यहां पर हुआ। हम लोग चंद्रगिरी से चलकर आए। मुनि दीक्षा से शुरुआत हो, बड़े बाबा के पादमूल में। आर्यिका दीक्षा भी यहां बड़े बाबा के पादमूल में हो ,ऐसी भावना है ।ऐसी संयोजना हो ,बड़े बाबा तो बड़े बाबा हैं ,उनके बारे में क्या कहा जाए ।यहां कोई भी कार्य असंभव नहीं है। करीब से देखा है, पूरी जैन समाज सशंकित थी, संघ के सदस्य भी सशंकित थे ।यह कार्य कैसे होगा, गुरुदेव ने ठान लिया और पुरातत्व ,शासन, प्रशासन सबके ऊपर हावी था। आत्म अनुशासन और गुरुदेव ने आत्मानुशासन से वह कार्य कर दिखाया कि दुनिया देखती रह गई। पुरातत्व ,शासन, प्रशासन ,न्यायपालिका कह रही थी। यह कार्य हो नहीं सकता ।उसी सर्वोच्च न्यायपालिका ने अपनी मोहर लगा दी कि यह कार्य ठीक हुआ ।यह कार्य गुरुदेव की दूरगामी सोच है ।2006 का वह वृतांत है ।सब लोगों के सामने प्रश्न चिन्ह था। कार्य कैसे होगा। जिन शासन की ध्वजा को आगे ले गए गुरुदेव ।इस प्रभावना को बढ़ाना है । गुरुदेव ऊपर विराजमान है ।स्वर्ग से देख रहे होंगे। संघ की इस धरोहर को अपनी आखिरी पीढ़ी को सौंपा था। वह संघ को गति दे रहे । संघ फल -फूल रहा है ।आगे के कार्य करने का शंखनाद करना है ।हम सब मिलजुल कर अपने नूतन आचार्य समय सागर जी से निवेदन कर रहे हैं कि अपनी बात पुरजोर तरीके से रखेंगे।</p>
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		<title>जिनवाणी ही गुरुवाणी है- निर्यापक मुनि श्री नियम सागर जी महाराज भगवान कुंथुनाथ का जन्म, तप एवं मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया गया </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/lord_kunthunaths_birth_penance_and_salvation_kalyanak_mahotsav_celebrated/</link>
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		<pubDate>Wed, 08 May 2024 16:02:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र जैन तीर्थ कुंडलपुर में जैन धर्म के 17 वें तीर्थंकर भगवान कुंथुनाथ का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। निर्यापक श्रमण मुनि श्री योगसागर जी महाराज एवं निर्यापक श्रमण मुनि श्री नियम सागर जी महाराज का मुनि दीक्षा दिवस धूमधाम से मनाया गया। पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र जैन तीर्थ कुंडलपुर में जैन धर्म के 17 वें तीर्थंकर भगवान कुंथुनाथ का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। निर्यापक श्रमण मुनि श्री योगसागर जी महाराज एवं निर्यापक श्रमण मुनि श्री नियम सागर जी महाराज का मुनि दीक्षा दिवस धूमधाम से मनाया गया। <span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>कुंडलपुर दमोह।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र जैन तीर्थ कुंडलपुर में जैन धर्म के 17 वें तीर्थंकर भगवान कुंथुनाथ का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। निर्यापक श्रमण मुनि श्री योगसागर जी महाराज एवं निर्यापक श्रमण मुनि श्री नियम सागर जी महाराज का मुनि दीक्षा दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्रात: भक्तांमर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा एवं पूजन विधान हुआ, निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। ज्ञान साधना केंद्र परिसर में निर्यापक मुनि श्री योग सागर जी महाराज एवं निर्यापक मुनि श्री नियम सागर जी महाराज का 45 वां मुनि दीक्षा दिवस मनाया गया। इस अवसर पर पूज्य बड़े बाबा एवं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण, दीप प्रज्वलन हुआ। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का पूजन एवं आचार्य जी समय सागर जी महाराज का पूजन हुआ। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन हुआ। शास्त्र समर्पण किया गया। इस अवसर पर पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री नियम सागर महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा दीक्षा का आज पावन दिवस है जिसको दीक्षा कहते हैं वह आत्म कल्याण के क्षेत्र में संसारत सभी भव्य जीव को अनिवार्य हुआ करती है। दीक्षा अनिवार्य है दीक्षा का अर्थ मुक्ति और मुक्ति के लिए दीक्षा होती है।</p>
<p><strong>गुरु के बिना जीवन का आरंभ नहीं</strong></p>
<p>दीक्षा का अर्थ है छुटकारा विसर्जन है जिसको अज्ञान बस बटोर कर रखा था उन सब का विसर्जन और सबसे मुक्ति, मुक्ति के लिए मुक्ति और वास्तविक मुक्ति रत्नत्रय है। जिसकी साधना से जिसकी अनुभूति से आत्मा संतृप्त हो जाए वह आत्मा का भोजन कहलाता है। ऐसे भोजन को परोसने वाले परंपरा की दृष्टि से देखें तो परंपरा का अंत ही नहीं परोसते चले आ रहे हैं और भोजन करते-करते सभी चले आ रहे हैं। इस युग में हमको भी अपने भाग्य के वजह से इस व्यंजन को इस मधुर भोजन को परोसने से पहले भोजन के स्वाद का पता लगा लो वह कितना आनंददाई है वह कितना सुखदाई है वह कितना आत्मा को संतुष्टि पहुंचा सकता है। उस सब का परिचय करके सर्वप्रथम भटकती आत्मा को आकर्षित किया और आकर्षित करना ही धर्म की प्रभावना है। हमें कोई आकर्षण ना करें हमें कोई भोजन ना मिले यह संभव ही कैसे हम आकर्षित होते हैं। आकर्षित होने की शक्ति हमारे पास आकर्षित करने वाले निमित्त के रूप में जब आहार प्राप्त होते तो हमारा जीवन भी सार्थक हो जाता अनादि कालीन वह प्यास अनादिकालीन वह भूख मिट जाती। ऐसे भोजन को परोसने वाले इस पावन भूमि पर भरत क्षेत्र में इस धरा पर थे, हैं और रहेंगे। यह हम सोच भी नहीं सकते लेकिन जब सानिध्य प्राप्त हुआ तो है, थे और आगे भी यह परंपरा बनी रहेगी।</p>
<p>इस पर विश्वास हुआ भोजन करने से पूर्व भोजन का परिचय मिला वह भोजन ऐसा भोजन की पुन: भोजन ही ना करना पड़े हमेशा-हमेशा के लिए भोजन के बिना अनंत काल तक हम रह सकें। ऐसा भोजन एक बार भोजन करने के बाद अनंत काल तक हम भोजन के बिना रह सकते हैं। ऐसा भोजन का परिचय हमने सुना प्राप्त किया और उन्हीं के द्वारा एक-एक ग्रास जैसे मां अपने बच्चों को एक-एक ग्रास बड़े प्रेम के साथ भोजन कराती है। वैसे ही गुरु ने हमारे लिए भोजन कराया छोटे से बड़ा बनाया। भोजन ही नहीं करते तो बड़े कैसे बन सकते। भोजन के बिना तो सारा संसार छोटा है विकसित ही नहीं हो रहा गर्भ के काल से भोजन मिलना शुरू होता है। गुरु शिष्य को गर्भ काल से जब भोजन कराते हैं तो हमारा विकास तो गुरु के गर्भ से होता और हमारा जन्म गुरु के गर्भ से होता है। इसलिए कहते हैं गुरु के बिना जीवन शुरू नहीं हुआ। ऐसा सतगुरु का मिलना बहुत दुर्लभ होता है।</p>
<p>बाहर का मार्ग तो लाखों करोड़ों हैं लेकिन भीतर का मार्ग तो एक ही है। करोड़ मार्ग को बताने वाले बहुत मिलेंगे। पग-पग पर मिलेंगे लेकिन भीतर के मार्ग को बताने वाले दुर्लभ ही मिला करते है। मिल जाए तो भाग्य के द्वार खुल जाते हैं जीवात्माओं के। ऐसे गुरुवर हमको मिले उनके उपकार को शब्दों में बांधना और किसके सामने कहना मन को समझाना भी संभव नहीं है। जैसा नाम है उस नाम के अनुसार ही वचन है और वचनों को गुमफित करके शास्त्र बनाकर कलेक्शन करके गुरु के भोजन के रूप में हमको प्रदान किया। गुरु वाणी भगवान की वाणी है जो भगवान की वाणी हुआ करती है वही गुरु की वाणी होती है जो गुरु की वाणी होती है वही जिनवाणी कहलाती है। जिनवाणी भगवान से निकलती है गुरु के पास आती है और आगे बढक़र के शिष्य के पास पहुंचती है। वह वाणी जिनवाणी ही कहलाती है लेकिन जब गुरु के मुखारविंद से निकलती है तो वह जिनवाणी गुरुवाणी ही कहलाती है। बताइए जिनवाणी गुरु वाणी में अंतर क्या है अपने मुख से बोल ही नहीं सकते बोलते हैं तो जिनेंद्र भगवान की वाणी को ही बोलते हैं। गुरु वाणी संज्ञा पाकर हम तक पहुंचती है। जिनवाणी ही गुरु वाणी है और गुरु वाणी ही जिनवाणी है। जिनवाणी हम तक पहुंच जाएं हम सभी जीवों तक पहुंच जाए कहीं भी भोजन करने चले जाओ पेट ही नहीं भरता ऐसा भोजन क्यों करें उस भोजन का आविष्कार करें जिससे पेट भरता।</p>
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		<title>कुंडलपुर में भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव पर हुए विविध धार्मिक आयोजन     मुनि प्रमाणसागर जी एवं मुनि पवित्रसागर जी आदि मुनिराजों का दीक्षा दिवस मनाया गया      </title>
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		<pubDate>Mon, 22 Apr 2024 10:57:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव पर विविध धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के चर्तुविध संघ के मंगल सानिध्य में प्रात: 6:30 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव पर विविध धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के चर्तुविध संघ के मंगल सानिध्य में प्रात: 6:30 बजे श्री जी का पालना, भगवान महावीर स्वामी के चित्र के साथ गाजे-बाजे से मानस्तंभ परिसर से प्रारंभ होकर बड़े बाबा मंदिर तक प्रभात फेरी निकाली गई। <span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघइ पूरी रिपोर्ट&#8230;     </span>   </strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर दमोह</strong>। सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव पर विविध धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के चर्तुविध संघ के मंगल सानिध्य में प्रात: 6:30 बजे श्री जी का पालना, भगवान महावीर स्वामी के चित्र के साथ गाजे-बाजे से मानस्तंभ परिसर से प्रारंभ होकर बड़े बाबा मंदिर तक प्रभात फेरी निकाली गई।</p>
<p>प्रभात फेरी में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही, मुनि संघ एवं आर्यिका संघ की भी उपस्थिति रही। बड़े बाबा मंदिर में भक्तांमर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, महावीर पूजन एवं पूज्य मुनि श्री के मंगल प्रवचन हुए। इस अवसर पर अभिषेक शांति धारा करने का सौभाग्य, सौभाग्य मल जी, राजेंद्र, संतोष, पुष्पेंद्र, रोहन मानस कटारिया परिवार अहमदाबाद ,अनिल कुमार, मनोज कुमार, मुलायम चंद परिवार ललितपुर, प्रभात जैन, प्रशांत जैन परिवार को प्राप्त हुआ। हजारों की संख्या में लोगों ने पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक कर पुन्यार्जन किया। आचार्य श्री की पूजन हुई एवं गुणांयतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज एवं मुनि श्री पवित्र सागर जी महाराज का दीक्षा दिवस धूमधाम से मनाया गया।</p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज, मुनि श्री पवित्र सागर जी महाराज, निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज, आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल प्रवचन हुए। दोपहर 3:30 बजे श्री जी की शोभायात्रा कुंडलपुर ग्राम का भ्रमण करती हुई निकाली गई। ज्ञानसाधना केंद्र के सामने अभिषेक पूजन का भव्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर मिष्ठान वितरण किया गया। सायंकाल बड़े बाबा मंदिर में भक्तांमर दीप अर्चना, पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती हुई। मानस्तंभ परिसर में रात्रि में पालना झुलाया गया एवं भजन संध्या का कार्यक्रम आयोजित किया गया।</p>
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		<title>जो जैसा कर्म करता है वैसा फल मिलता है- आचार्य श्री समयसागर जी महाराज    कई प्रसंगों से समझाया चिंतन का महत्त्व और जीवन का उद्देश्य      </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Apr 2024 10:53:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युगश्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा, कर्मों का आश्रय जो हो रहा है उसको रोकना है। उसका निरोध करना है और निरोध करने के लिए विभिन्न प्रकार के साधन आगम के माध्यम से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युगश्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा, कर्मों का आश्रय जो हो रहा है उसको रोकना है। उसका निरोध करना है और निरोध करने के लिए विभिन्न प्रकार के साधन आगम के माध्यम से उपलब्ध हो सकते हैं। <span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू पूरी रिपोर्ट&#8230;     </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर दमोह।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युगश्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा, कर्मों का आश्रय जो हो रहा है उसको रोकना है। उसका निरोध करना है और निरोध करने के लिए विभिन्न प्रकार के साधन आगम के माध्यम से उपलब्ध हो सकते हैं। उसमें एक अनुप्रेक्षा को प्राथमिकता देते हुए कल विषय रखा था। इस विषय को जो गुरुदेव ने समय-समय पर दिया है उसी को समय-समय पर हम स्मरण में लाने का पुरुषार्थ कर रहे हैं। उन्होंने एक बार में नहीं कई बार प्रसंग पढ़ाया है कि चिंतन जो होता है वह पर्याय का भी विषय बनाकर चिंतन होता है और पर्याय को भी विषय बनाकर किया जा सकता है।</p>
<p>बहुत अनोखी बात उन्होंने यह कही है कि द्रव्य का चिंतन करने से भीती समाप्त होती है और पर्याय का चिंतन करने से वैराग उत्पन्न होता है। आप क्या चाहते हैं भीती से ऊपर उठना चाहते हैं तो आप किसका सहारा लेते हैं समझने के लिए सामने व्याग्र आ गया अथवा बहुत बड़ा विशाल अजगर जिसको बोलते अगर इस सभा में अजगर आ जाए तो निश्चित रूप से भय की उदीयता होगी। ध्यान देने की बात यह है कि हम या आप व्याग्र से डरते सर्पादिक से डरते है क्यों डरते हैं सत्य यह है हमें मृत्यु से भीती होने के कारण उस व्याघ्र या क्रूर स्वभाव वाले र्तियंच होते उनसे बचाने का पुरुषार्थ करते। जिसे मृत्यु का भय नहीं है तो सामने भी बैठे, पीछे भी बैठे, आगे बैठे, उसके बीच में वह बैठेंगे और द्रव्य का चिंतन करेंगे। सोचो विचार जो गुरुदेव चिंतन करते हैं हम और आप भी चिंतन करते प्रयोग चिंतन करो भीती समाप्त होगी। दोहा लिखा है। अंत किसी का कब हुआ अनंत सभी संत, पर सब मिटता सा लगा पतझड़ पुन: बसंत। पदार्थ की ना उत्पत्ति होती ना पदार्थ का विनाश होता है भय से ऊपर उठना चाहो तो द्रव्य का चिंतन करो स्वभाव का चिंतन करो। स्वभाव का अर्थ प्रत्येक पदार्थ का अपना-अपना स्वभाव है उसका चिंतन करो तो आकर्षक विकर्षण समाप्त होगा। भीती उत्पन्न नहीं होगी।</p>
<p><strong>सात प्रकार के हैं भय    </strong></p>
<p>आचार्य महाराज पढ़ा रहे थे पूछा कितने प्रकार के भय होते हैं। एक महाराज ने कहा आठ प्रकार के भय होते हैं। आचार्य महाराज ने कहा हमने पढ़ाया है सात प्रकार के भय होते सबको ज्ञात है। सात प्रकार के भय होते हैं आठवां वह जो आपको डर भीती उत्पन्न होती है। गुरुदेव ने कहा मुझसे क्यों डरते हो तुम पाप से डरो। श्रमण के लिए संसारी प्राणी नरक जाने से डरता है किंतु नरक में कारण भूत जो सामग्री होती उससे बचना चाहता है। सन् १९87 की बात है आचार्य महाराज का चातुर्मास थोवन जी में हुआ। संघ के साथ हुआ। उस समय अपराह्न बेला में आचार्य भक्ति संपन्न हुई और मेरे पास एक सज्जन आए। उन्होंने हाथ जोड़कर निवेदन किया मुझे डर लगता है। किससे डर लगता है महाराज स्वाध्याय करने से हमें डर लगता है। क्यों इस प्रकार के परिणाम करने से र्तियंच आयु का बंध होता है। इस प्रकार के परिणाम करने से अनेक प्रकार के कर्मों का बंध होता है। यह चर्चा आगम में मिलती है इसलिए मुझे डर लगता है नरक जाने से क्यों डरते हो। नरक जाने के जो कारण है उनसे बचो तो भगवान मेरा भविष्य कैसा रहेगा।</p>
<p>एक प्रसंग और स्मरण में आ रहा महाराज हमने सुना है अनेक व्यक्तियों के मुख से हमने सुना है महाराज आप भविष्य जानते हैं। मान लो एक व्यक्ति चोरी कर रहा है तो उसका भविष्य जेल होगा। यह पक्की बात है जो जैसा कर्म करता है निश्चित रूप से वैसा फल मिलता है। आगम के अनुरूप में बात कर रहा हूं गुरुदेव ने जो बात आगम के अनुरूप रखी है वही मैं बात कर रहा हूं परिणामों के आश्रित ही भविष्य होगा।</p>
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