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	<title>कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>प्रथम बार 12 ऐलक दीक्षाएं संपन्न हुईः बड़े बाबा के दरबार में आचार्यश्री समय सागरजी महाराज के कर कमलों से  </title>
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		<pubDate>Mon, 31 Mar 2025 07:07:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री विद्या सागरजी महाराज के शिष्य आचार्यश्री समय सागरजी महाराज के कर कमलो से प्रथम बार सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में बड़े बाबा के बड़े दरबार में एक भव्य समारोह में ऐलक दीक्षाएं प्रदान की गई। इस अवसर पर मुनिश्री चंद्र सागरजी महाराज द्वारा पूज्य आचार्यश्री विद्या सागरजी महाराज के कुछ संस्मरण सुनाते हुए कार्यक्रम की शुरुआत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्री विद्या सागरजी महाराज के शिष्य आचार्यश्री समय सागरजी महाराज के कर कमलो से प्रथम बार सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में बड़े बाबा के बड़े दरबार में एक भव्य समारोह में ऐलक दीक्षाएं प्रदान की गई। इस अवसर पर मुनिश्री चंद्र सागरजी महाराज द्वारा पूज्य आचार्यश्री विद्या सागरजी महाराज के कुछ संस्मरण सुनाते हुए कार्यक्रम की शुरुआत हुई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए कुंडलपुर से राजीव सिंघई की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर (दमोह)।</strong> युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर श्री विद्या सागरजी महाराज के शिष्य परंपराचार्य विद्या शिरोमणि परम पूज्य आचार्यश्री समय सागरजी महाराज के कर कमलो से प्रथम बार सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में बड़े बाबा के बड़े दरबार में बड़े बाबा मंदिर परिसर में एक भव्य समारोह में 12 ऐलक दीक्षाएं प्रदान की गई। इस अवसर पर मुनिश्री चंद्र सागरजी महाराज द्वारा पूज्य आचार्यश्री विद्या सागरजी महाराज के कुछ संस्मरण सुनाते हुए कार्यक्रम की शुरुआत हुई।</p>
<p><strong>विभिन्न विधान सम्पन्न हुए</strong></p>
<p>चित्र अनावरण अमिताभ, अशोक चांवल, चंद्र कुमार सराफ अध्यक्ष कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी, वीरेश सेठ, संतोष सिंघई, इंजी. आर के जैन महामंत्री आदि ने किया। दीप का दीपन कंवरलाल अशोक पाटनी आरके मार्बल परिवार द्वारा किया गया। आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन अभय बनगांव परिवार द्वारा किया गया। शास्त्र अर्पण भामाशाह पाटनी परिवार ने किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए निर्यापक श्रमण मुनिश्री संभव सागरजी महाराज ने कहा आज वह दिन सबके समक्ष उपस्थित हुआ है आचार्यश्री विद्या सागरजी महाराज के शिष्य आचार्यश्री समय सागरजी महाराज के द्वारा बड़े बाबाजी जो छोटे बाबा के आराध्य हैं जिनके पादमूल में यह दीक्षा कार्यक्रम संपन्न हो रहा है। आचार्यश्री ने भी बड़े बाबा के पादमूल में क्षुल्लक, ऐलक, आर्यिका दीक्षाएं दी थी उसी का अनुसरण करते हुए नववर्ष पर आचार्यश्री समय सागरजी आज दीक्षा प्रदान कर रहे हैं। सभी प्रतीक्षारत हैं कौनसा दृश्य उपस्थित हो रहा है, कौनसी दीक्षा होने जा रही है। अब क्षुल्लकजी नए स्वरूप में आएंगे आप देखेंगे।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-77916" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250331-WA0019.jpg" alt="" width="1512" height="1006" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250331-WA0019.jpg 1512w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250331-WA0019-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250331-WA0019-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250331-WA0019-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250331-WA0019-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250331-WA0019-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250331-WA0019-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250331-WA0019-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250331-WA0019-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250331-WA0019-990x659.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250331-WA0019-1320x878.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1512px) 100vw, 1512px" />क्षुल्लक के उपरांत ऐलक पद आता है </strong></p>
<p>इस अवसर पर परम पूज्य आचार्यश्री समय सागरजी महाराज ने दीक्षा की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा सन् 2022 में बड़े बाबा के पंचकल्याणक गजरथ महामहोत्सव के पावन अवसर पर गुरुदेव ने क्षुल्लक दीक्षाएं प्रदान की थी। उनकी भावना काफी दिन से थी उनकी भावना को ध्यान रखते आचार्यश्री के आदेश संकेत का पालन करते हुए पवित्र पावन क्षेत्र कुंडलपुर में वह दृश्य आपके सामने आ रहा है। मेरी दीक्षा भी इसी क्रम से गुरुदेव ने प्रदान की थी। समय-समय पर योग्यता सामर्थ अनुसार मार्ग प्रदान किया जाता है। अभी 11 प्रतिमाएं यथावत है उनके पास जो गुरुदेव ने प्रदान की थी। क्षुल्लक के उपरांत ऐलक पद आता है। अभी तक दुपट्टा का उपयोग करते थे अब करपात्री बनेंगे अब आज से ऐलक पद पर रहेंगे।</p>
<p><strong>कटोरा लेकर आहार लेते थे अब कर पात्र में आहार लेंगे</strong></p>
<p>थोड़ा और समय उन्हें साधना के लिए दिया जा रहा है। अब दुपट्टा उतार कर कायोत्सर्ग कर दुपट्टे का प्रयोग नहीं करेंगे। मृदु वस्त्र के माध्यम से परिमार्जन करते थे। अब उनके हाथ में पिच्छिका संयोपकरण प्रदान किया जाएगा। अभी तक कटोरा लेकर आहार लेते थे अब कर पात्र में आहार लेंगे। अब ऐलक बनने के बाद नियमपूर्वक केशलोच करेंगे। जो नाम गुरुदेव ने प्रदान किए थे वही नाम उनके रहेंगे।</p>
<p><strong>बारह ऐलक महाराजों को पिच्छिका प्रदान की</strong></p>
<p>12 ऐलक महाराज को आचार्यश्री समय सागरजी महाराज के करकमलों से संयम उपकरण पिच्छिका प्रदान की गई। अब संयम उपकरण पिच्छिका से ही सभी परिमार्जन करेंगे। जिन क्षुल्लक महाराज को ऐलक दीक्षा प्रदान की गई उनके नाम क्रमशः ऐलक श्री औचित्य सागरजी, ऐलक श्री गहन सागरजी, ऐलक श्री कैवल्य सागरजी, ऐलक श्री सुदृढ़ सागरजी, ऐलक श्री समुचित सागरजी, ऐलक श्री उचित सागरजी, ऐलक श्री अथाह सागरजी, ऐलक श्री उत्साह सागरजी, ऐलक श्री अमाप सागरजी, ऐलक श्री उद्यम सागरजी, ऐलक श्री गरिष्ठ सागरजी, ऐलक श्री गौरव सागरजी महाराज।</p>
<p><strong>दीक्षा कार्यक्रम के साक्षी बनने का सौभाग्य </strong></p>
<p>पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री अभय सागरजी महाराज ससंघ सहित आचार्य संघ मंच पर विराजमान रहे। वाणी भूषण ब्रह्मचारी विनयभैया, ब्रह्मचारी संजीव भैया बड़ी संख्या में भैयाजी एवं दीदीजी की उपस्थिति थी। इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने देश के कोने-कोने से उपस्थित होकर दीक्षा कार्यक्रम के साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।</p>
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		<title>अंतरंग लक्ष्मी को प्राप्त करने का लक्ष्य प्रत्येक साधक का होता है-आचार्यश्री समय सागरजीः श्री आदिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Mar 2025 07:31:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुण्डलपुर में प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव आचार्यश्री समय सागर महाराज ससंघ सानिध्य में मनाया गया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि आगम ग्रन्थों के आधार पर यह बात समझ में आ जाती है कि मोहनीय कर्म के क्षय फलस्वरुप अथवा चार घातिया कर्म के क्षय फलस्वरुप केवल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>कुण्डलपुर में प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव आचार्यश्री समय सागर महाराज ससंघ सानिध्य में मनाया गया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि आगम ग्रन्थों के आधार पर यह बात समझ में आ जाती है कि मोहनीय कर्म के क्षय फलस्वरुप अथवा चार घातिया कर्म के क्षय फलस्वरुप केवल ज्ञान की उपलब्धि होती है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए कुंडलपुर से राजीव सिंघई की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर दमोह।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में जैनधर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव विद्या शिरोमणि प.पू.आचार्यश्री समय सागरजी महाराज ससंघ सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः भक्तामर महामंडल विधान, श्री आदिनाथ विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, विधान हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने पूज्य बड़े बाबा का चरणाभिषेक किया। शांतिधारा का वाचन परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री अभय सागरजी महाराज द्वारा किया गया। आचार्यश्री की पूजन हुई।</p>
<p><strong>कर्म के क्षय फलस्वरुप केवल ज्ञान की उपलब्धि</strong></p>
<p>इस अवसर पर प. पू. आचार्यश्री समय सागरजी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा महावीर जयंती तो पूरे भारतवर्ष में मनाई जाती है किंतु आज आदिनाथ भगवान की जन्म जयंती जन्म कल्याणक का यह पुनीत पावन अवसर आप लोगों को प्राप्त हुआ है। आज की तिथि में ही आदिनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक दोनों अवसर आपको प्राप्त हो रहा है। वस्तुतः आगम ग्रन्थों के आधार पर यह बात समझ में आ जाती है कि मोहनीय कर्म के क्षय फलस्वरुप अथवा चार घातिया कर्म के क्षय फलस्वरुप केवल ज्ञान की उपलब्धि होती है। किंतु केवली कई प्रकार के होते हैं उनमें सामान्य केवली का भी वर्णन मिलता है और तीर्थंकर केवली का भी वर्णन मिलता है। दोनों में अंतरंग दृष्टि से देखेंगे कर्मक्षय की दृष्टि से देखेंगे तो केवल ज्ञान में कोई भी अंतर नहीं है। केवल ज्ञान की दृष्टि से कोई भी अंतर नहीं पाया जाता। क्योंकि क्षायिक ज्ञान माना जाता।</p>
<p><strong>उदय के फलस्वरुप समोशरण की रचना </strong></p>
<p>अंत चतुष्टय की प्राप्ति सामान्य केवली हो तीर्थंकर केवली हो सबको प्राप्त हो चुका है। विशेषता यह है तीर्थंकर प्रकृति के वंध के फलस्वरुप जो की केवली और श्रुतकेवली के पादमूल में ही तीर्थंकर प्रकृति का वंध षोडसकारण भावना के माध्यम से होता है। ज्यो ही मोहिनी कर्म का क्षय हो जाता है तेरहवे गुण स्थान में तीर्थंकर प्रकृति का उदय हो जाता है। उस उदय के फलस्वरुप समोशरण की रचना होती है।</p>
<p><strong>अमूर्त आत्मतत्व को प्राप्त करने महान आत्माएं हुई हैं </strong></p>
<p>आप लोग सुबह उठ जाते हैं स्नानादि से निवृत होकर अपने आप को आईना में देखते हैं आईना का क्या मायना है आईना अर्थात दर्पण होता उसमें अपना चेहरा देखते जब आप बाहर निकलते सारे लोग आपका चेहरा देखते। मैं अच्छा लगू फोटो निकालते फोटो में क्या आ रहा है आपका चेहरा शरीर वस्त्राभूषण आदि फोटो में आ रहा है। किंतु जो परमात्म तत्व है जो आत्मतत्व है वह उसे कैमरे में नहीं आ सकता। क्योंकि वह अमूर्त आत्मतत्व है और अमूर्त आत्मतत्व को प्राप्त करने जो महान आत्माएं हुई हैं। उन्होंने मोक्ष मार्ग पर आरुण होकर रत्नात्रय के माध्यम से शरीर से आत्मतत्व को पृथक कर लिया है। इसका अनंतसुख का अनुभव प्रतिपल प्रति समय करते रहते हैं। वापस इस धरती पर कभी आएंगे नहीं। निर्वाण का लाभ प्राप्त हो जाता है।</p>
<p><strong>बिना पुरुषार्थ के कोई भी वस्तु उपलब्ध नहीं हो सकती</strong></p>
<p>लोक के अग्रभाग पर जाकर विराजमान होते हैं। साधना का फल है अंतरंग लक्ष्मी को प्राप्त करने का लक्ष्य प्रत्येक साधक का होता है। उस लक्ष्य को प्राप्त करने ही गुरुदेव ने हम लोगों को मार्ग प्रशस्त किया है। उस मार्ग पर आरुण होकर अपनी साधना को उन्होंने पूर्ण कर लिया है। हम लोगों के लिए प्रतिफल यही संबोधन रहा है चतुर्विध संघ के लिए। मनुष्य पर्याय बहुत दुर्लभ मानी जाती है इस पर्याय को सार्थक करने जो सच्चे देव शास्त्र गुरु की साधना में लग जाता है। निश्चित रूप से अल्प समय में वह घड़ी आएगी वह पूर्णतः मोक्ष मार्ग के योग्य सामग्री को प्राप्त करके साधना के माध्यम से आत्मनिधि को प्राप्त करने का प्रयास कर सकता है। बिना पुरुषार्थ के कोई भी वस्तु उपलब्ध नहीं हो सकती। निरंतर निरपेक्ष भाव के साथ भगवान की गुरु की साधना करने के लिए क्षण मिले। आज का जन्म कल्याणक और तप कल्याण का दिन है केवल ज्ञान प्राप्त करने का एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए।</p>
<p><strong>रिद्धिकलश करने का सौभाग्य महानुभावों को प्राप्त हुआ</strong></p>
<p>इस अवसर पर प्रथम अभिषेक, शांतिधारा, रिद्धिकलश करने का सौभाग्य अंशुल जैन, न्यायाधीश अशोक जैन, गुना जबलपुर, अनिल ज्ञानचंद फिरोजपुर, किरीट हर्ष कोमल मुंबई, विकास राखी दुर्गापुर, नेमीचंद संतोष भीलवाड़ा, हर्षित महेश बम्होरी राजकुमार नीरज तेंदूखेड़ा, वैभव नमन नवीन ध्रूव रेवाड़ी, डॉ मानकचंद्र शीलचंद जबलपुर, राकेश ईशान डिंडोरी, हर्ष शुभम टूंडला ,तुषार अक्षय सर्वेश कन्नौज को प्राप्त हुआ। आचार्य संघ की आहार चर्या संपन्न हुई। दोपहर में विद्या भवन में मुनिश्री विनीत सागरजी महाराज के मंगल प्रवचन हुए। सायंकाल भक्तामर दीप अर्चना एवं पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महाआरती हुई।</p>
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		<title>भव्य शोभायात्रा के साथ आचार्यश्री के चरणों की हुई स्थापनाः शोभायात्रा का स्वागत व छत्तीसी विधान सम्पन्न </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 13:09:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री विद्या सागरजी महाराज व आचार्यश्री समय सागरजी महाराज के मंगल आशीर्वाद से एक भव्य समारोह के साथ नसिया, दिगंबर जैन मंदिर, दमोह में निर्मित आकर्षक भव्य वेदी पर स्थापित करने का सौभाग्य कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष के परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर बनगांव आदि को आचार्यश्री चरणों का अभिषेक करने का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्यश्री विद्या सागरजी महाराज व आचार्यश्री समय सागरजी महाराज के मंगल आशीर्वाद से एक भव्य समारोह के साथ नसिया, दिगंबर जैन मंदिर, दमोह में निर्मित आकर्षक भव्य वेदी पर स्थापित करने का सौभाग्य कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष के परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर बनगांव आदि को आचार्यश्री चरणों का अभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए दमोह से राजीव सिंघई की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>दमोह।</strong> संत शिरोमणि आचार्यश्री विद्या सागरजी के पावन चरण चिन्ह विद्यानिधि आचार्यश्री समयसागर जी के मंगल आशीर्वाद से एक भव्य समारोह के साथ नसिया दिगंबर जैन मंदिर दमोह में निर्मित आकर्षक भव्य वेदी पर स्थापित करने का सौभाग्य कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ के परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर ललित सराफ, प्रदीप सराफ, अशोक सराफ, अभय बनगांव आदि को आचार्यश्री चरणों का अभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>छत्तीसी विधान संपन्न </strong></p>
<p>पंडित अभिषेक जैन के निर्देशन में चरणों के अभिषेक आरती के उपरांत आचार्यश्री की मंगलमय पूजन आचार्य छत्तीसी विधान संपन्न किया गया। इसके पूर्व नन्हे मंदिर से गुरुचरण स्थापना महोत्सव भव्य आकर्षक शोभायात्रा प्रारंभ हुई जो घंटाघर, राय चौराहा होते हुए नसिया मंदिर पहुंची।</p>
<p><strong>शोभायात्रा का जगह-जगह स्वागत </strong></p>
<p>शोभा यात्रा में सबसे आगे रथ पर विराजमान श्रावक हाथों में धर्म ध्वज लेकर शोभा बढ़ा रहे थे। आचार्यश्री के चरणरथ में विराजमान थे। शोभायात्रा का जगह-जगह श्रावक स्वागतकर आरती उतार रहे थे। विभिन्न महिला मंडल मंगल कलश लेकर शोभायात्रा में सम्मिलित थे। शोभायात्रा मार्ग को तोरण द्वारों से सुंदर सजाया गया था। सकल जैन समाज, जैन पंचायत दमोह का सहयोग रहा। चंद्रकुमार सराफ परिवार द्वारा सभी श्रद्धालुओं के सामूहिक भोज की व्यवस्था की गई।</p>
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		<title>बड़े बाबा की नगरी कुंडलपुर पधारेंगे आचार्य श्री समयसागर जी: सतना से किया है मंगल विहार </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 13:07:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने श्री नेमिश्वर धाम विद्या ज्योतिर्मय तीर्थ क्षेत्र सतना से ससंघ सोमवार सुबह विहार किया। वे कुंडलपुर पधारने वाले हैं। आचार्य संघ की आहार चर्या डीएमडी रिसोर्ट में हुई। आचार्य श्री ससंघ का सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में मंगल पदार्पण हो। ऐसी भावना रखी गई है। कुंडलपुर से राजीव सिंघई की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने श्री नेमिश्वर धाम विद्या ज्योतिर्मय तीर्थ क्षेत्र सतना से ससंघ सोमवार सुबह विहार किया। वे कुंडलपुर पधारने वाले हैं। आचार्य संघ की आहार चर्या डीएमडी रिसोर्ट में हुई। आचार्य श्री ससंघ का सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में मंगल पदार्पण हो। ऐसी भावना रखी गई है। कुंडलपुर से राजीव सिंघई की <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर दमोह।</strong> आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज का श्री नेमिश्वर धाम विद्या ज्योतिर्मय तीर्थ क्षेत्र सतना से ससंघ (14 मुनिराज 9 क्षुल्लक जी महाराज) का सोमवार सुबह मंगल विहार हुआ। आचार्य संघ की विहार दिशा संभावित बड़े बाबा की नगरी कुंडलपुर बताई जा रही है। आचार्य संघ की आहारचर्या डीएमडी रिसॉर्ट नागौद रोड सतना में हुई। बता दें कि आचार्य श्री को कुंडलपुर ससंघ पधारने का निवेदन 5 मार्च को कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्र कुमार सराफ ने श्रीफल अर्पित कर किया था। पुनः कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी इंजी. आरके जैन, अजित कंडया, अमर सेठ, विजय डायमंड आदि ने सतना पहुंचकर श्रीफल अर्पित कर निवेदन किया। आचार्य श्री ससंघ का सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में मंगल पदार्पण हो, ग्रीष्म कालीन वाचना हो। ऐसी मंगल भावना सकल दमोह जिला जैन समाज, कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी एवं समस्त क्षेत्र वासियों की है।</p>
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