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	<title>कलषाभिषेक &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>कलषाभिषेक &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जिनेंद्र प्रभु को पांडुक शिला पर विराजमान कर कलषाभिषेक, शांतिधारा की : ध्वजारोहण के साथ हुआ सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ </title>
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		<pubDate>Wed, 29 Oct 2025 10:38:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा जैन मंदिर में ध्वजारोहण के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिन प्रातःकालीन बेला में सर्वप्रथम जिनेंद्र प्रभु को पांडुक शिला पर विराजमान कर कलषाभिषेक, शांतिधारा एवं नित्यमह पूजन किया गया। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। नगर के श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा जैन मंदिर में ध्वजारोहण के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिन प्रातःकालीन बेला में सर्वप्रथम जिनेंद्र प्रभु को पांडुक शिला पर विराजमान कर कलषाभिषेक, शांतिधारा एवं नित्यमह पूजन किया गया। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा जैन मंदिर में ध्वजारोहण के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ। विधानाचार्य पंडित चक्रेश शास्त्री ने बताया कि जैन संस्कृत विद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं वयोवृद्ध प्रतिष्ठाचार्य पंडित महेंद्रकुमार शास्त्री के निर्देशन और नवनीत शास्त्री, संदीप शास्त्री, अभिषेक शास्त्री के आचार्यत्व में सकल जैन समाज के सहयोग से श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन 29 अक्टूबर से 6 नवंबर तक होने जा रहा है। बुधवार को प्रथम दिन प्रातःकालीन बेला में सर्वप्रथम जिनेंद्र प्रभु को पांडुक शिला पर विराजमान कर कलषाभिषेक, शांतिधारा एवं नित्यमह पूजन किया गया। इसके बाद श्रावक श्रेष्ठि प्रेमचंद जैन (वंदना साड़ी) द्वारा विधिविधान पूर्वक मंत्रोच्चारण के साथ ध्वजारोहण किया गया।</p>
<p><strong>धार्मिक क्रियाओं के साथ विधान की पूजा की </strong></p>
<p>श्री सिद्ध परमेष्ठियों की भक्ति, पूजा, आराधना, उपासना के लिए मंडप में एक भव्य एवं आकर्षक माढ़ने की रचना की गई। वरिष्ठ प्रतिष्ठाचार्य पंडित महेंद्रकुमार शास्त्री के निर्देशन में अन्य विधानाचार्यों द्वारा भूमि, मंडप एवं दिशाओं का बंधन करते हुए सकलीकरण, पात्र शुद्धि, इंद्र प्रतिष्ठा आदि क्रियाएं विधि विधान एवं मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न कराईं। प्रारंभिक धार्मिक क्रियाओं के बाद श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान की प्रथम पूजन कर सिद्ध परमेष्ठियों की आराधना करते हुए आठ अर्घ्य समर्पित किए।</p>
<p><strong>इनको मिला इंद्र बनने का सौभाग्य</strong></p>
<p>विधान में सौधर्म इंद्र पंकज संगीता जैन (मेडिकल वाले), यज्ञनायक विमल संगीता जैन (पलपुरा), कुबेर इंद्र नेमीचंद ममता जैन (ट्रांसपोर्ट), श्रीपाल मैनासुंदरी पंकज ज्योति जैन (किराना) एवं इंद्र स्वरूप में जवाहरलाल वरैया, भागचंद पुष्पलता जैन, राजीव मंजूषा जैन, रवि अल्पना जैन, शैलेन्द्र नीतू जैन मुकुट, हार, बाजूबंद से सुसज्जित होकर पूजन मंडप में विराजमान थे। गुरुवार को विधान की द्वितीय पूजन की जाएगी और श्री सिद्ध परमेष्ठियों का गुणगान करते हुए सोलह अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।</p>
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		<title>सिद्धचक्र विधान आध्यात्मिक और सांसारिक लाभों की प्राप्ति होती है: मुनिश्री ने बताया विधान का महत्व  </title>
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		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 10:38:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के शिष्य प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी मुरैना ने आज सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन मुनिराजश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज के सान्निध्य में श्री जिनेंद्र प्रभु का कलषाभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन मंत्रोचारण के साथ कराया। मुनिश्री के प्रवचन हुए। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। सांसारिक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के शिष्य प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी मुरैना ने आज सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन मुनिराजश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज के सान्निध्य में श्री जिनेंद्र प्रभु का कलषाभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन मंत्रोचारण के साथ कराया। मुनिश्री के प्रवचन हुए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> सांसारिक प्राणी धन कमाने में पूरी जिंदगी मेहनत करता है। धन का संचय मानव के लिए वरदान भी है और अभिशाप भी है। यदि आप अपने धन का उपयोग अच्छे कार्यों में करते हैं तब तो वो वरदान साबित होगा और यदि धन का उपयोग अनैतिक कार्यों में करते हो तो वो अभिशाप साबित होगा। इसीलिए पूर्वाचार्यों ने कहा है कि अपने धन का उपयोग परोपकार, मानव सेवा, जीवदया और धार्मिक अनुष्ठान आदि आदि सदकार्यों में लगाना चाहिए। यह उद्गार श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर में मुनिराजश्री विलोकसागरजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि इस असार संसार में आए हैं तो कुछ ऐसा करके जाएं कि जिससे लोग हमारे बाद भी हमें याद करें। धन भी हमें पुण्य कर्म के उदय से ही प्राप्त होता है। जरूर आपने पूर्व जन्मों में अच्छे कर्म करते हुए पुण्य संचय किया होगा कि आप इस जन्म में धनवान बने हैं।</p>
<p>यदि आप धनवान हैं तो धार्मिक अनुष्ठान, दान आदि आवश्यक रूप में करते रहना चाहिए। त्याग यानि दान का और दान देने वालों का एक अलग ही महत्व होता है क्योंकि, जब कोई धन का त्याग अथवा दान करता है तब ही किसी मंदिर, धर्मशाला, प्रतिमा आदि का निर्माण होता है। मुनिश्री आज हम सभी श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के विशाल एवं भव्य मंडप में बैठकर सिद्धों की आराधना कर रहे हैं, ये सब त्याग की ही महिमा है, दान की ही महिमा है क्योंकि, इसकी समस्त व्यवस्थाओं में जो धन लगा है या लग रहा है, वह दानदातारों से प्राप्त हुआ है। यानि कुछ लोगों ने धन का त्याग किया, तभी यह भव्य अनुष्ठान हो रहा है।</p>
<p><strong> प्रतिष्ठाचार्य संजय भैयाजी ने मंत्रोचारण से कराई क्रियाएं</strong></p>
<p>आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के शिष्य प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी मुरैना ने आज सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन मुनिराजश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज के सान्निध्य में श्री जिनेंद्र प्रभु का कलषाभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन मंत्रोचारण के साथ कराया। विधान के द्वितीय दिन 16 अर्घ्य के साथ जिन्होंने 16 कारण भावना भाते हुए तीर्थंकर बनकर मोक्ष प्राप्त किया, ऐसे सिद्ध प्रभु की आरधना की गई और अष्टद्रव्य के अर्घ समर्पित किए।</p>
<p><strong>विधान में भक्तिरस की हो रही है वर्षा</strong></p>
<p>आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र विधान में भक्तिरस की वर्षा हो रही है। विधान के पूजन में सैकड़ों की संख्या में साधर्मी बंधु, माता बहिनें एवं युवा साथियों ने सम्मिलित होकर एक कीर्तिमान स्थापित किया है। विधान के मुख्य पात्र अपने विशेष परिधान के साथ चांदी के हार, मुकुट एवं अन्य अलंकरणों से सुसज्जित होकर विधान का हिस्सा बने हुए हैं। पूज्य गुरुदेव के संघस्थ ब्रह्मचारी संजय भैयाजी बम्होरी वाले पूर्ण तन्मयता के साथ विधान में सहभागिता प्रदान कर रहे हैं। झापन वाले संजय भैयाजी अपने बुंदेलखंडी जैन भजनों से सभी को भक्ति नृत्य करने को मजबूर कर देते हैं । भजन गायक एवं संगीतकार हर्ष जैन एंड कंपनी भोपाल अपनी संगीत लहरी से सभी को मंत्रमुग्ध करते हैं। प्रातः 6.30 बजे से विधान की क्रियाएं प्रारंभ हो जाती हैं और निरंतर 11-12 बजे तक विधान का पूजन, अर्घ आदि का कार्यक्रम चलता है। शाम को गुरु भक्ति के समय महाआरती का आयोजन होता है। गुरुवार की महाआरती डालचंद मीना जैन बरहाना के निज निवास से बड़े मंदिर जी आई थी। महाआरती के पुण्यार्जक घोड़ा बग्घी में सवार थे। ढोल तासे की धुन पर नृत्य करते हुए सैकड़ों बंधु महाआरती चल समारोह में जय जय कार करते हुए चल रहे थे।</p>
<p><strong>मुनिश्री विबोधसागर ने बताया विधान का महत्व</strong></p>
<p>मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज ने बताया कि सिद्धचक्र विधान आत्मज्ञान और मोक्ष की दिशा में मार्गदर्शन करता है। सिद्धचक्र विधान में सभी प्रकार की पूजाएँ समाहित हो जाती हैं। सिद्धचक्र विधान वह विधान है जिसे श्रद्धा एवं भक्ति के साथ करने से आध्यात्मिक और सांसारिक लाभों की प्राप्ति होती है। जैन शास्त्रों में वर्णित अनेक पूजन-विधानों में ‘सिद्धचक्र मंडल विधान’ का विशेष महत्त्व है। सिद्धचक्र विधान, जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण विधान है, जिसका उद्देश्य कर्मों के चक्र से मुक्ति पाना और मोक्ष की प्राप्ति करना है। यह विधान, जिसे अष्टान्हिका पूजा भी कहा जाता है, घर-गृहस्थी के पापों को नष्ट करने और आत्मज्ञान प्राप्त करने में सहायक है। सिद्धचक्र विधान में भाव सहित आठ दिन श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान करके 49वें भव में सिद्धत्व की प्राप्ति होती है। इस विधान के माध्यम से, व्यक्ति अपने जीवन के चक्रों से मुक्ति पाकर मोक्ष की ओर अग्रसर होता है। सिद्धचक्र विधान, पापों का प्रायश्चित करने और शुद्धि प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। सिद्धचक्र विधान, मनोकामनाओं को पूरा करने में भी सहायक है।</p>
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		<title>धार्मिक क्रियाओं से पुण्य की उत्पत्ति होती है: रविवार से जैन मंदिर में चल रहा है सिद्धचक्र विधान </title>
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		<pubDate>Mon, 05 May 2025 12:04:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर मुरैना में चल रहा है। मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित कर रहे हैं। विधान के प्रथम दिन 8, द्वितीय दिन 16, तृतीय दिन 32, चतुर्थ दिन 64, पांचवंे दिन 128, छठवें दिन 256, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर मुरैना में चल रहा है। मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित कर रहे हैं। विधान के प्रथम दिन 8, द्वितीय दिन 16, तृतीय दिन 32, चतुर्थ दिन 64, पांचवंे दिन 128, छठवें दिन 256, सातवें दिन 512 एवं अंतिम दिन 1024 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> सांसारिक प्राणी को सदैव धार्मिक अनुष्ठान करते रहना चाहिए। धार्मिक क्रियाओं से पुण्य की उत्पत्ति होती है और पुण्य से पापों का क्षय होता है। अपने इष्ट का ध्यान, जप, पूजन करने से सुखों की प्राप्ति के साथ मन की शांति प्राप्त होती है। जहां धर्म होता है, जो लोग धर्म के सिद्धांतों का पालन करते हैं, वहां धर्म उनकी रक्षा करता है। पुण्य से ही व्यक्ति धनवान और ऐश्वर्यवान बनता है। धर्मात्मा व्यक्ति अपने भावों को शुद्ध रखता हुआ अपने चित्त को शुभता की ओर लगता है। उसके हृदय में सदैव शुभ भाव उत्पन्न होते है। इसलिए हमें सदैव पुण्य का अर्जन करना चाहिए। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज एवं आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज के आशीर्वाद से आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोक सागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज के पावन सानिध्य एवं संस्कृत विद्यालय के पूर्व प्राचार्य पंडित महेंद्रकुमार शास्त्री के निर्देशन एवं प्रतिष्ठाचार्य राजेंद्र शास्त्री मगरौनी के आचार्यत्व में आठ दिवसीय सिद्धों की आराधना की जा रही है। विधान के प्रथम दिन 8, द्वितीय दिन 16, तृतीय दिन 32, चतुर्थ दिन 64, पांचवंे दिन 128, छठवें दिन 256, सातवें दिन 512 एवं अंतिम दिन 1024 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।</p>
<p><strong>प्रतिदिन होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम </strong></p>
<p>पुण्यार्जक परिवार मुन्नालाल, राकेशकुमार, रोबिन जैन, गौरव जैन, सौरभ जैन एवं समस्त चोरम्बार जैन परिवार की ओर से 4 मई से प्रारंभ हुए श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ में 5 से 10 मई तक प्रतिदिन प्रातः 5.30 बजे जाप, 5.55 बजे अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन, 7.40 बजे से विधान, 8.30 बजे मुनिश्री के प्रवचन, शाम 07.30 बजे गुरु भक्ति, आरती, 8.30 बजे शास्त्र सभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। भजन गायक एवं संगीतकार स्वर लहरी सैंकी एंड पार्टी फिरोजाबाद प्रतिदिन संगीतमय गुरु भक्ति, महाआरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेगी। अंतिम दिन 11 मई को प्रातः विश्व शांति महायज्ञ होगा। महायज्ञ में सभी लोग विश्व शांति की कामना के साथ अग्निकुंड में आहुति देंगे। विधान समापन पर श्री जिनेंद्र प्रभु के कलषाभिषेक, सम्मान समारोह और वात्सल्य भोज का आयोजन रखा गया है।</p>
<p><strong>मैना सुंदरी ने कराया था सिद्धचक्र महामंडल विधान</strong></p>
<p>जैन सिद्धांतों के अनुसार मैनासुंदरी के पति श्रीपाल को कोढ़ की बीमारी थी। दिगंबर मुनिराज के उपदेशानुसार मैना सुंदरी ने आठ दिवसीय सिद्धचक्र महा मंडल विधान करते हुए सिद्धों की भक्ति करते हुए आठ दिन में 1024 अर्घ्य समर्पित किए थे और प्रतिदिन श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक का गंधोदक अपने कोढ़ी पति को लगाया था। जिससे उसके पति एवं अन्य लोगों का कोढ़ समाप्त हुआ था। तभी से श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का महत्व माना जाने लगा है। इसे विधानों का राजा भी कहा जाता है।</p>
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