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	<title>करवा चौथ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>करवा चौथ रिश्ते की स्थिरता और संवेदनशीलता का प्रतीक है: “करवा” यानी मिट्टी का घड़ा, जो प्राचीन भारत में जल का प्रतिनिधि  </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Oct 2025 12:43:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतीय संस्कृति का एक लोकप्रिय पर्व करवा चौथ है, इसकी परंपरा प्रेम और समर्पण से जुड़ी है, लेकिन आधुनिक समाज में यह त्यौहार समानता और साझेदारी के भाव से मनाया जाने लगा है, रिश्तों में आपसी सम्मान, प्रेम और विश्वास का उत्सव भी है। परंपरा तभी सार्थक है, जब उसमें आत्मा के साथ-साथ समय की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारतीय संस्कृति का एक लोकप्रिय पर्व करवा चौथ है, इसकी परंपरा प्रेम और समर्पण से जुड़ी है, लेकिन आधुनिक समाज में यह त्यौहार समानता और साझेदारी के भाव से मनाया जाने लगा है, रिश्तों में आपसी सम्मान, प्रेम और विश्वास का उत्सव भी है। परंपरा तभी सार्थक है, जब उसमें आत्मा के साथ-साथ समय की समझ भी हो। <span style="color: #ff0000">करवा चौथ पर पढ़िए, टीकमगढ़ की प्रियंका पवन घुवारा का यह विशेष ज्ञानवर्द्धक आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टीकमगढ़।</strong> भारतीय संस्कृति का एक लोकप्रिय पर्व करवा चौथ है, इसकी परंपरा प्रेम और समर्पण से जुड़ी है, लेकिन आधुनिक समाज में यह त्यौहार समानता और साझेदारी के भाव से मनाया जाने लगा है, रिश्तों में आपसी सम्मान, प्रेम और विश्वास का उत्सव भी है। परंपरा तभी सार्थक है, जब उसमें आत्मा के साथ-साथ समय की समझ भी हो। भारतीय समाज में स्त्री के जीवन को “सुहाग” से जोड़ा गया है। ऐसे में करवा चौथ जैसे व्रत स्त्री के समर्पण, त्याग और सहनशीलता का उत्सव बन गए। करवा चौथ का व्रत उत्तर भारत में विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु के लिए सूर्याेदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। जब चाँद निकलता है तो पत्नी छलनी से पति का चेहरा देख कर व्रत तोड़ती है। कभी यह व्रत गाँव की औरतों के बीच अपनापन और सहयोग का प्रतीक था। महिलाएँ एक-दूसरे के घर जातीं, मिट्टी के करवे (घड़े) में जल भरतीं, गीत गातीं ‘करवा चौथ का व्रत है भाई, करवा लाना भूली न जाई’ यह त्यौहार उनके लिए आपसी मिलन का अवसर था, जहाँ वे जीवन की तकलीफ़ों को साझा करतीं। फिर भी परंपराओं को केवल अंध विश्वास कहकर नकार देना भी उचित नहीं। हर संस्कृति की अपनी आत्मा होती है। “करवा” यानी मिट्टी का घड़ा, जो प्राचीन भारत में जल का प्रतीक था, और “चौथ” यानी चतुर्थी का दिन। इस त्यौहार का मूल भाव केवल पति की आयु से नहीं, बल्कि स्त्री के सामाजिक सहयोग से भी जुड़ा था। यह सच है कि समय के साथ इसके स्वरूप में बदलाव आया है। अब कई जगह पति भी व्रत रखते हैं, कई जोड़े इसे “रिलेशनशिप रिचुअल” की तरह मनाते हैं। यह बदलाव बताता है कि समाज धीरे-धीरे समानता की ओर बढ़ रहा है। त्योहार का अर्थ वही रहता है, पर दृष्टिकोण बदल जाता है। करवा चौथ जहाँ पहले यह स्त्री के कर्तव्य का प्रतीक था, वहीं अब यह रिश्तों की साझेदारी का रूप ले रहा है। करवा चौथ को न तो केवल रूढ़िवादिता समझें, न ही सिर्फ दिखावे का त्यौहार बनाएं।</p>
<p>इसके भीतर के प्रेम, भाव और समर्पण को सच्चे अर्थों में आत्मसात करें ,यदि इस व्रत के बहाने पति-पत्नी एक-दूसरे को समझने, एक-दूसरे के त्याग की कद्र करने और रिश्ते में नयापन लाने का अवसर पा सके तो यह त्यौहार अपने असली अर्थ में सफल होगा। क्योंकि आखिरकार, करवा चौथ सिर्फ पति की लंबी उम्र का पर्व नहीं, बल्कि उस रिश्ते की स्थिरता और संवेदनशीलता का प्रतीक है, जो दो आत्माओं को जोड़ता है।आज जब हम समानता, स्वतंत्रता और पारस्परिक सम्मान की बात करते हैं, तो यह व्रत भी एकतरफा नहीं रहना चाहिए। यदि पत्नी पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है, कहते हैं, शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान नहीं देती, बल्कि वह जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है। किंतु उस शिक्षा का प्रयोग कौन-से दिशा में होगा यह निर्णय हर व्यक्ति को स्वयं करना पड़ता है। तो पति भी पत्नी की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए समान भाव से प्रार्थना करे यही सच्चा प्रेम और समानता है।</p>
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		<title>सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए रखती हैं यह व्रत : रोहिणी नक्षत्र में करवा चौथ व्रत 20 अक्टूबर रविवार को </title>
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		<pubDate>Thu, 17 Oct 2024 09:09:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पूरे वर्षभर महिलाओं को करवा चौथ के व्रत का इंतजार रहता है। सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं, जो आमतौर पर निर्जला होता है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार तिथियों का असर त्योहारों पर दिखाई दे रहा है। करवा चौथ इस बार सूर्योदय को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पूरे वर्षभर महिलाओं को करवा चौथ के व्रत का इंतजार रहता है। सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं, जो आमतौर पर निर्जला होता है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार तिथियों का असर त्योहारों पर दिखाई दे रहा है। करवा चौथ इस बार सूर्योदय को स्पर्श नहीं कर रही है, न ही दूसरे दिन <span style="color: #ff0000">के सूर्योदय को।</span> पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> पूरे वर्षभर महिलाओं को करवा चौथ के व्रत का इंतजार रहता है। सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं, जो आमतौर पर निर्जला होता है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार तिथियों का असर त्योहारों पर दिखाई दे रहा है। करवा चौथ इस बार सूर्योदय को स्पर्श नहीं कर रही है, न ही दूसरे दिन के सूर्योदय को। इससे चतुर्थी का क्षय हो गया है। इस बार तृतीया युक्त चतुर्थी तिथि में सुहागिन स्त्रियां करवा चौथ का व्रत रख सकेंगी।</p>
<p>डॉ. जैन ने बताया कि 20 अक्टूबर, रविवार को प्रातः 06:46 बजे चतुर्थी प्रारंभ होगी और यह रात 04:46 बजे समाप्त होगी। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत और चंद्र दर्शन 20 अक्टूबर, रविवार को होगा। इस दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग प्रातः 08:31 बजे से चतुर्थी तिथि के साथ होने से शुभ रहेगा। चतुर्थी प्रारंभ होने से पहले प्रातः 06:46 बजे तक भद्रा भी समाप्त हो जाएगी।</p>
<p><strong>पूजा मुहूर्त</strong></p>
<p>इस दिन प्रातः दैनिक चर्या से निवृत्त होकर स्नान आदि कर व्रत रखने का संकल्प 07 बजे से पूर्व करना चाहिए, जो चंद्रोदय तक निर्जला उपवास का संकल्प होगा।</p>
<p><strong>चंद्रोदय का समय</strong></p>
<p>मैदानी क्षेत्रों में रात्रि 08:20 पर और अन्य स्थानों पर रात्रि 08:40 बजे होगा। इससे पूर्व व्रतार्थी महिलाएं मिट्टी के करवे में परंपरागत तरीके से पूजन करेंगी और चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ देकर अपने तरीके से पूजन करेंगी। इसके बाद पति और सासू मां के पैर छूकर व्रत खोलकर भोजन करेंगी।</p>
<p><strong>किस राशि वालों को किस रंग की साड़ी, चूड़ी और श्रृंगार करना चाहिए</strong></p>
<p>करवा चौथ का निर्जला उपवास कठिन है, लेकिन सुहाग की रक्षा और दीर्घायु के लिए इसे रखने से महिलाओं में शक्ति आती है। अपने राशि के अनुसार रंगों का चयन करने से अधिक उत्साह और उमंग आती है:</p>
<p>मेष, सिंह, वृश्चिक: रेड साड़ी, चूड़ी और श्रृंगार की अधिकता।</p>
<p>वृष, कर्क, तुला: डायमंड, चमकीले रंग-बिरंगे और झिलमिलाते रंगों की अधिकता।</p>
<p>मिथुन, कन्या, मकर, कुंभ: ग्रीन, स्काई ब्लू रंगों की अधिकता।</p>
<p>धनु, मीन: संतरी, ब्राउन, यलो रंगों की अधिकता और मिक्स कलर।</p>
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		<title>पति की मंगल कामना के लिए व्रत :  सर्वार्थ सिद्धि योग में करवा चौथ का व्रत रखेंगी सुहागिनें </title>
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		<pubDate>Mon, 30 Oct 2023 13:49:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है। इस बार यह तिथि 31 अक्टूबर मंगलवार को रात्रि 9.21 बजे से प्रारंभ होकर 1 नवम्बर को दिन भर रहते हुए रात्रि 9.19 बजे तक रहेगी। पढ़िए मनोज नायक की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><span style="color: #000000;">वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है। इस बार यह तिथि 31 अक्टूबर मंगलवार को रात्रि 9.21 बजे से प्रारंभ होकर 1 नवम्बर को दिन भर रहते हुए रात्रि 9.19 बजे तक रहेगी। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></span></p>
<hr />
<p>मुरैना। हर सुहागिन को करवा चौथ का बेसब्री से इंतजार रहता है। महिलाएं महीने दो महीने पहले से ही सुहाग का सामान इकट्ठा करने में जुटी रहती हैं। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ता है। इस बार यह तिथि 31 अक्टूबर मंगलवार को रात्रि 9.21 बजे से प्रारंभ होकर 1 नवम्बर को दिन भर रहते हुए रात्रि 9.19 बजे तक रहेगी। इस बार बुधवार को मृगशिरा नक्षत्र का योग से सर्वार्थ सिद्धि योग पूरे समय तक रहेगा, जो हर सुहागिन के व्रत का पूर्ण फल कराएगा।</p>
<p>लंबी आयु के लिए व्रत</p>
<p>सुहागिन महिलाएं इस व्रत को अपने पति की लंबी आयु के लिए पूरे दिन निर्जला रखती हैं। रात के समय चंद्रमा को देखकर उसकी पूजा कर अर्घ्य देकर ही व्रत का पारण करती हैं। करवा चौथ के दिन शादीशुदा महिलाएं 16 श्रृंगार कर सजती-संवरती हैं और रात में चंद्रमा के निकलने के बाद चंद्र दर्शन कर उसकी पूजा कर चंद्रमा को जल देकर और अपने पति का मुख छलनी से देखकर अपना व्रत खोलती हैं।</p>
<p>करवा चौथ क्यों और कैसे मनाती हैं सुहागिन</p>
<p>करवा चौथ के दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले जागकर व्रत की शुरुआत करती हैं। उसके बाद महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को स्त्रियां दुल्हन की तरह मेहंदी, महावर लगाकर 16 श्रृंगार आदि कर तैयार होती हैं और पूजा करती हैं। उसके बाद शाम रात्रि में चंद्र उदय होने पर छलनी से चंद्र दर्शन कर पति को सामने खड़े कर उसकी आरती उतारकर अपना व्रत खोलती हैं। मान्यता है कि माता पार्वती ने शिव के लिए, द्रौपदी ने पांडवों के लिए करवा चौथ का व्रत किया था। करवा चौथ व्रत के प्रताप स्त्रियों को अखंड सौभाग्यवती रहने के वरदान मिलता है। करवा माता उनके सुहाग की सदा रक्षा करती हैं और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है।<br />
इस दिन रहेंगे ये खास योग<br />
&#8211; मृगशिरा नक्षत्र बुधवार, सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अमृत योग<br />
-व्रत का समय एक नवम्बर को सूर्योदय से रात्रि चंद्र उदय तक।<br />
-करवा चौथ का पूजन शाम को 5:36 बजे से शाम 6:53 बजे तक।<br />
करवा चौथ पर चंद्रोदय मैदानी क्षेत्रों में रात 8:20 पर पर्वतीय क्षेत्रों में रात्रि 8:40 बजे पर होगा।</p>
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