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	<title>ऋषभदेव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>ऋषभदेव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जी का पावन गर्भ कल्याणक 2 जुलाई को : आस्था और उल्लास का महापर्व आषाढ़ कृष्ण द्वितीया को मनाया जाता है </title>
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		<pubDate>Wed, 01 Jul 2026 07:22:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, युगादिदेव भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव 2 जुलाई आषाढ़ कृष्ण द्वितीया को देशभर में पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और अपार उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस मंगल अवसर पर इंदौर सहित संपूर्ण भारतवर्ष के दिगंबर जैन मंदिरों, चैत्यालयों और प्रमुख तीर्थ स्थलों पर प्रभु की भक्ति का एक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, युगादिदेव भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव 2 जुलाई आषाढ़ कृष्ण द्वितीया को देशभर में पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और अपार उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस मंगल अवसर पर इंदौर सहित संपूर्ण भारतवर्ष के दिगंबर जैन मंदिरों, चैत्यालयों और प्रमुख तीर्थ स्थलों पर प्रभु की भक्ति का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, युगादिदेव भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) जी का गर्भ कल्याणक महोत्सव 2 जुलाई आषाढ़ कृष्ण द्वितीया को देशभर में पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और अपार उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस मंगल अवसर पर इंदौर सहित संपूर्ण भारतवर्ष के दिगंबर जैन मंदिरों, चैत्यालयों और प्रमुख तीर्थ स्थलों पर प्रभु की भक्ति का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। प्रातः काल से ही जिनालयों में प्रभु का महामस्तकाभिषेक, संगीतमय शांतिधारा, विशेष अष्टद्रव्य पूजन, भक्तामर स्तोत्र का पाठ और विधान आदि के मांगलिक स्वर गूंजेंगे, जिनमें श्रद्धालु आत्म-कल्याण की पावन भावना के साथ लीन रहेंगे।</p>
<p><strong>गर्भ कल्याणक का अर्थ और स्वरूप</strong></p>
<p>जैन दर्शन में तीर्थंकरों के जीवन की पांच प्रमुख घटनाओं को ‘पंचकल्याणक’ कहा जाता है, जिनमें ‘गर्भ कल्याणक’ सबसे पहला है। जब कोई तीर्थंकर आत्मा अपनी माता के गर्भ में अवतरित होती है तो उस पवित्र और दिव्य क्षण को ‘गर्भ कल्याणक’ कहा जाता है। आषाढ़ कृष्ण द्वितीया के इसी शुभ दिन स्वर्ग (सर्वार्थसिद्धि) से च्युत होकर भगवान आदिनाथ की परम पवित्र आत्मा ने अयोध्या नगरी में माता मरुदेवी के गर्भ में प्रवेश किया था। इस पावन अवसर की पूर्व संध्या पर माता मरुदेवी ने गजराज, वृषभ, सिंह, लक्ष्मी, युगल माला आदि 16 मांगलिक और अलौकिक स्वप्न देखे थे, जो इस बात का स्पष्ट संकेत थे कि उनके गर्भ में त्रिलोकीनाथ का आगमन हो रहा है। सौधर्म इंद्र और असंख्य देवगणों ने अयोध्या आकर महाराज नाभिराज और माता मरुदेवी की पूजा की तथा इस महान कल्याणक का दिव्य उत्सव मनाया था।</p>
<p><strong>आध्यात्मिक महत्व और सौभाग्यवर्धक प्रभाव</strong></p>
<p>गर्भ कल्याणक मात्र एक ऐतिहासिक या पौराणिक घटना नहीं है, बल्कि यह आत्मा के परमात्मा बनने की महायात्रा का प्रथम चरण है। यह पावन दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि प्रत्येक आत्मा में परमात्मा बनने की अनंत शक्ति निहित है। भगवान आदिनाथ जी का यह कल्याणक अत्यंत मंगलकारी, पुण्यवर्धक और लौकिक-पारलौकिक सौभाग्य प्रदान करने वाला है। इस दिन प्रभु की सच्ची लगन से भक्ति करने, उनके गुणों का स्तवन करने और दान-पुण्य करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय होता है। मन में शांति का संचार होता है और मोक्ष मार्ग (सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र) की प्राप्ति का प्रशस्त मार्ग खुलता है।</p>
<p><strong>भगवान आदिनाथ के दिव्य संदेश और प्रमुख सिद्धांत</strong></p>
<p>भगवान आदिनाथ न केवल एक आध्यात्मिक गुरु थे, बल्कि उन्होंने मानव सभ्यता को सुसंस्कृत और व्यवस्थित करने का महान कार्य भी किया था। जब कल्पवृक्षों का युग समाप्त हो रहा था, तब उन्होंने ही युग की शुरुआत में आजीविका के छह मार्ग असि (रक्षा), मसि (लेखन), कृषि (खेती), वाणिज्य (व्यापार), विद्या और शिल्प सिखाकर कर्मभूमि की रचना की। उनके द्वारा दिए गए मुख्य सिद्धांत आज के आधुनिक युग में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। भगवान आदिनाथ ने ‘अहिंसा’ को सर्वाेपरि मानते हुए मन, वचन और कर्म से किसी भी सूक्ष्म या स्थूल जीव को कष्ट न पहुंचाने का संदेश दिया, जो शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का मूल आधार है। इसी तरह अनेकांतवाद (स्याद्वाद) के माध्यम से उन्होंने सत्य को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने और दूसरों के विचारों व मान्यताओं का आदर करते हुए वैचारिक सहिष्णुता की सीख दी। अपरिग्रह का सिद्धांत हमें अपनी इच्छाओं और आवश्यकताओं को सीमित रखने तथा भौतिक वस्तुओं व संपदा के प्रति अत्यधिक मूर्छा या आसक्ति न रखने की प्रेरणा देता है। इसके साथ ही, कर्मयोग और समता का संदेश यह सिखाता है कि लौकिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करते हुए भी आत्मा को निर्लिप्त रखा जाए और जीवन के सुख-दुःख में सदैव समभाव धारण किया जाए। भगवान आदिनाथ जी का गर्भ कल्याणक हमें आत्मकल्याण, लोक-कल्याण और विश्व शांति का शाश्वत मार्ग दिखाता है। 2 जुलाई को इस पावन अवसर पर आइए, हम सब अपने हृदय में प्रभु की भक्ति को जागृत करें और उनके बताए हुए अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह के मार्ग पर चलने का दृढ़ संकल्प लें। दिगंबर जैन मंदिरों में गूंजते भक्तामर के श्लोक और शांतिधारा के पवित्र मंत्र हम सभी के जीवन में असीम सुख, शांति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक समृद्धि का संचार करें।</p>
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		<title>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ में निकली कलश घटयात्रा : मां ना होती तो ऋषभदेव राम ना होते -आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी  </title>
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		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 14:16:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निराला रंग बिहार में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ में घटयात्रा कुआ वाले जैन मंदिर से नगर भ्रमण करते हुए परेड चौराहे सदर बाजार राज टॉकीज मार्ग होते हुए निकली। बैंड बाजों के साथ महिलाएं हाथों में कलश लेकर हाथी पर सवार ध्वजारोहण कर्ता दिनेश कुमार जैन परिवार चल रहे थे।भिंड से सोनल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>निराला रंग बिहार में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ में घटयात्रा कुआ वाले जैन मंदिर से नगर भ्रमण करते हुए परेड चौराहे सदर बाजार राज टॉकीज मार्ग होते हुए निकली। बैंड बाजों के साथ महिलाएं हाथों में कलश लेकर हाथी पर सवार ध्वजारोहण कर्ता दिनेश कुमार जैन परिवार चल रहे थे।<span style="color: #ff0000">भिंड से सोनल जैन की यह रिपोर्ट पढ़िए, </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> निराला रंग बिहार में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ में घटयात्रा कुआ वाले जैन मंदिर से नगर भ्रमण करते हुए परेड चौराहे सदर बाजार राज टॉकीज मार्ग होते हुए निकली। बैंड बाजों के साथ महिलाएं हाथों में कलश लेकर हाथी पर सवार ध्वजारोहण कर्ता दिनेश कुमार जैन परिवार चल रहे थे। जैसे ही निराला रंग बिहार अयोध्या नगरी पहुंचे। वहां पर मंडप शुद्धि, ध्वजारोहणकर्ता दिनेश कुमार जैन परिवार एवं मंच उद्घाटनकर्ता दिनेश जैन मॉडल स्कूल परिवार के द्वारा प्रतिष्ठाचार्य अभिषेक जैन आशीष जैन ने विधि विधान से कराया।  इस अवसर पर पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने प्रवचनों में कहा की माँ ना होती तो तीर्थंकर ऋषभदेव, राम हम सब ना होते माँ वह जाननी है जिन्होंने कितने तीर्थंकर और महापुरुषों को जन्म दिया आज हम सबको उनका उपकार मानना चाहिए आजकल सुनने को मिलता है कि लोग बेटा बेटी में भेद कर रहे हैं बेटा है तो राग क्यों दोनों बालक बालिका धर्म संस्कृति को चलाते हैं। पट्टाचार्य ने आगे कहा कि हमें जन्म और मरण का उपकार मानना चाहिए लोग मरण का उपकार नहीं मानते तो कब तक शरीर में सड़े गले  बैठे रहोगे एक समय ऐसा आया कि नाक से कीड़े टपकने लगे उसकी पीड़ा देखकर लगता है कि ये चला जाए कैसे कर्म का बंद किया की कीड़े काट रहे हैं कीड़े यह कह रहे हैं कि दूसरों की निंदा करते थे गरीबों का पैसा खा लिया गरीबों की जमीन पर कब्जा कर लिया सब यही भोगना है कर्म किसी को नहीं छोड़ते।</p>
<p>महाराज ने कहा कि देश के मुखिया से कहो की बच्चे युवा मोबाइल का उपयोग कम करें इसमें समय बर्बाद हो रहा है बचपन से बुद्धि का विकास होता है इस सदमार्ग में लगाये जिनवाणी की बूंदे पढ़ने पर कभी ना कभी अंकुरित होती हैं।</p>
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		<title>एनसीईआरटी की 9वीं की संस्कृत पुस्तक &#039;शारदा&#039; में शामिल : ऋषभदेव की कथा, पाठ का शीर्षक &#8216;णमो अरिहंताणं </title>
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		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 16:39:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9वीं की नवीन संस्कृत पाठ्यपुस्तक &#8216;शारदा&#8217; के पाठ-10 में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की पावन जीवन कथा को सम्मिलित किया है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9वीं की नवीन संस्कृत पाठ्यपुस्तक &#8216;शारदा&#8217; के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9वीं की नवीन संस्कृत पाठ्यपुस्तक &#8216;शारदा&#8217; के पाठ-10 में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की पावन जीवन कथा को सम्मिलित किया है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9वीं की नवीन संस्कृत पाठ्यपुस्तक &#8216;शारदा&#8217; के पाठ-10 में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की पावन जीवन कथा को सम्मिलित किया है। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस पाठ का शीर्षक &#8216;णमो अरिहंताणं&#8217; रखा गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को संस्कृत के साथ-साथ प्राकृत भाषा की प्राचीनता और मिठास से परिचित कराना है</p>
<p><strong>पाठ की मुख्य विशेषताएं</strong></p>
<p>पाठ में सृष्टि के आरंभ में महाराज नाभि एवं मरुदेवी के पुत्र ऋषभदेव के जीवन का वर्णन है। राजा बनने के बाद ऋषभदेव ने प्रजा को कृषि, भोजन निर्माण, वस्त्र निर्माण, पशुपालन एवं नगर निर्माण जैसे जीवन के कौशल सिखाए।</p>
<p>ऋषभदेव के सौ पुत्रों में भरत एवं बाहुबली प्रसिद्ध हुए। पुत्री ब्राह्मी के नाम पर ही ब्राह्मी लिपि&#8217; का विकास माना जाता है। संसार की नश्वरता देखकर ऋषभदेव ने राजपाठ त्याग कर तपस्या अपनाई। 400 दिनों के कठोर उपवास तप साधना के पश्चात हस्तिनापुर में उनके प्रपौत्र श्रेयांस ने उन्हें गन्ने का रस पिलाकर पारणा कराया। यह दिन अक्षय तृतीया के रूप में विश्व में मनाया जाता है।</p>
<p>प्रयागराज में अक्षयवट वृक्ष के नीचे उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ। वे जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर &#8216;आदिनाथ&#8217; कहलाए।</p>
<p><strong>जैन धर्म के सिद्धांत</strong></p>
<p>पाठ में अहिंसा परमो धर्मः, अनेकान्तवाद, अपरिग्रह एवं सम्यक् दर्शन-ज्ञान-चरित्र रूपी तीन रत्नों का उल्लेख है। साथ ही प्राकृत भाषा में रचित णमोकार महामंत्र एवं 24 तीर्थंकरों की सूची भी दी गई है, जिनमें अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर हैं।</p>
<p><strong>प्राकृत भाषा का महत्व</strong></p>
<p>पाठ में बताया गया है कि प्राचीन काल में प्राकृत जनसंवाद एवं साहित्य की प्रमुख भाषा थी। संस्कृत यदि नदी है, तो प्राकृत उसका सरल प्रवाह है। इदौर दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, तीर्थ रक्षणी सभा के टीके वेद, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के मयंक जैन, विश्व जैन संगठन के राजेश जैन दद्दू, हंसमुख गांधी, मनोहर झांझरी, सुशील पांड्या, सुभाष काला एवं फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका पुष्पा कासलीवाल, महिला परिषद् की मुक्ता जैन एवं रेखा जैन श्रीफल आदि ने भारत सरकार का अभिवादनकरते हुए कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा, जैन दर्शन एवं प्राचीन भाषाओं को पाठ्यक्रम में सम्मानजनक स्थान देने के लिए भारत सरकार एवं एनसीईआरटी का हार्दिक अभिनंदन है। यह निर्णय एक भारत श्रेष्ठ भारत&#8217; एवं &#8216;विकसित भारत 2047&#8217;की संकल्पना में नैतिक मूल्यों से युक्त, संस्कारवान पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। शिक्षा के माध्यम से शासन प्रभावना का यह प्रयास सराहनीय है।</p>
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		<title>24 तीर्थंकर और चैत्य वृक्ष धर्म की जड़ें और प्रकृति की छाया : हमारे ऋषियों और तीर्थंकरों ने धर्म को केवल उपदेशों में नहीं, बल्कि प्रकृति में ढाला </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/24_tirthankaras_and_chaitya_trees_roots_of_religion_and_shadow_of_nature/</link>
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		<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 07:37:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जब मनुष्य अपनी ही बनाई हुई दौड़ में थककर बैठता है, तब उसे छाँव की याद आती है—वह छाँव जो केवल पेड़ों की नहीं, बल्कि जीवन की होती है। जैन परंपरा के 24 तीर्थंकरों के साथ जुड़े चैत्य वृक्ष इसी जीवन-छाया के प्रतीक हैं। ये वृक्ष केवल धर्म की कथा नहीं कहते, बल्कि मनुष्य और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जब मनुष्य अपनी ही बनाई हुई दौड़ में थककर बैठता है, तब उसे छाँव की याद आती है—वह छाँव जो केवल पेड़ों की नहीं, बल्कि जीवन की होती है। जैन परंपरा के 24 तीर्थंकरों के साथ जुड़े चैत्य वृक्ष इसी जीवन-छाया के प्रतीक हैं। ये वृक्ष केवल धर्म की कथा नहीं कहते, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के उस गहरे संबंध को प्रकट करते हैं, जिसे आज का युग भूलता जा रहा है। <span style="color: #ff0000">चंदेरी से पढ़िए,  डॉ. जयेन्द्र जैन &#8216;निप्पू&#8217; का यह आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>जब मनुष्य अपनी ही बनाई हुई दौड़ में थककर बैठता है, तब उसे छाँव की याद आती है—वह छाँव जो केवल पेड़ों की नहीं, बल्कि जीवन की होती है। जैन परंपरा के 24 तीर्थंकरों के साथ जुड़े चैत्य वृक्ष इसी जीवन-छाया के प्रतीक हैं। ये वृक्ष केवल धर्म की कथा नहीं कहते, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के उस गहरे संबंध को प्रकट करते हैं, जिसे आज का युग भूलता जा रहा है।</p>
<p>हमारे ऋषियों और तीर्थंकरों ने धर्म को केवल उपदेशों में नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रत्येक कण में ढाल दिया। ऋषभदेव का बरगद हो या महावीर का साल, शीतलनाथ का पीपल हो या नेमिनाथ का बाँस—ये सभी वृक्ष मानो मौन साधु की तरह खड़े हैं, जो बिना बोले ही जीवन का सबसे बड़ा सत्य सिखाते हैं।</p>
<p>बरगद की विशालता में एक गूढ़ संदेश छिपा है—यह केवल छाया ही नहीं देता, बल्कि अपने भीतर एक पूरा संसार बसाए रहता है। इसकी जटाएँ मिट्टी को बाँधती हैं, इसकी छाल घाव भरती है और इसकी उपस्थिति मन को स्थिर करती है। यह वृक्ष दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक है।</p>
<p>साल का वृक्ष अपनी कठोरता और दृढ़ता के लिए जाना जाता है। इसकी लकड़ी मजबूत होती है, राल औषधीय गुणों से भरपूर होती है और इसके पत्ते पर्यावरण के अनुकूल उपयोग में आते हैं। यह वृक्ष कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहता है, इसलिए यह संघर्ष और सहनशीलता का प्रतीक है।</p>
<p>पीपल का वृक्ष जीवनदायी माना गया है। यह निरंतर प्राणवायु प्रदान करता है, इसके पत्ते, छाल और फल अनेक रोगों में उपयोगी होते हैं। इसकी छाँव में बैठने से मन को शांति मिलती है, मानो यह वृक्ष स्वयं ध्यान में लीन हो।</p>
<p>चम्पक (चंपा) अपनी सुगंध से वातावरण को पवित्र करता है। इसके पुष्प औषधीय और सौंदर्य दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हैं। यह वृक्ष जीवन में मधुरता और सौंदर्य का प्रतीक है।</p>
<p>धातकी वृक्ष आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण में अत्यंत उपयोगी है। यह पाचन तंत्र को सुदृढ़ करता है और शुष्क भूमि में भी उगकर उसे उपजाऊ बनाता है। यह कठिन परिस्थितियों में भी जीवन को संवारने का संदेश देता है।</p>
<p>नागकेसर (नाग वृक्ष) रक्तस्राव रोकने और हृदय को बल देने में सहायक है। इसके पुष्प और बीज औषधीय गुणों से भरपूर हैं। यह वृक्ष स्वास्थ्य और संतुलन का प्रतीक है।</p>
<p>मालूर वृक्ष पाचन संबंधी रोगों में उपयोगी है और कठिन जलवायु में भी जीवित रहता है। यह हमें सिखाता है कि अनुकूलता ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है।</p>
<p>कदंब वृक्ष वर्षा और हरियाली का प्रतीक है। इसके फूल और छाल औषधीय गुणों से युक्त हैं और यह जल चक्र को संतुलित करता है। यह प्रकृति की लय को बनाए रखने वाला वृक्ष है।</p>
<p>जामुन का वृक्ष मधुमेह नियंत्रण में अत्यंत प्रभावी है। इसके फल, बीज और छाल सभी उपयोगी हैं। यह वृक्ष स्वास्थ्य और पोषण का प्रतीक है।</p>
<p>अशोक वृक्ष मानसिक शांति और शारीरिक संतुलन प्रदान करता है। विशेषकर स्त्री रोगों में इसका उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दुःख को दूर करने और मन को प्रसन्न रखने का संदेश देता है।</p>
<p>शाल्मली (सेमल) वृक्ष अपने रेशों और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। यह पक्षियों को आश्रय देता है और पर्यावरण को संतुलित रखता है। यह सह-अस्तित्व का प्रतीक है।</p>
<p>बकुल वृक्ष दंत स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसके फूल वातावरण को सुगंधित बनाते हैं और मन को शांति प्रदान करते हैं। यह सौम्यता और मधुरता का प्रतीक है।</p>
<p>वेतस (बाँस) अत्यंत तेजी से बढ़ने वाला वृक्ष है। यह मिट्टी के कटाव को रोकता है, कार्बन को अवशोषित करता है और अनेक उपयोगों में आता है। यह विकास और उपयोगिता का प्रतीक है।</p>
<p>अन्य वृक्ष जैसे प्रियंगु, तिलक, नंदी आदि भी अपने-अपने औषधीय और पर्यावरणीय गुणों से जीवन को संतुलित बनाए रखते हैं। ये सभी मिलकर प्रकृति के उस अदृश्य ताने-बाने को मजबूत करते हैं, जिस पर हमारा अस्तित्व टिका है।</p>
<p>आज का मनुष्य जब इन वृक्षों की ओर देखता है, तो उसे केवल लकड़ी या छाया नहीं दिखनी चाहिए, बल्कि उसे वह जीवन-दर्शन दिखना चाहिए, जो हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्ष पहले समझ लिया था।</p>
<p>यदि हम सच में धर्म को समझना चाहते हैं, तो हमें इन वृक्षों की रक्षा करनी होगी, उन्हें लगाना होगा और उनके साथ एक जीवंत संबंध स्थापित करना होगा। क्योंकि धर्म केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि हर उस वृक्ष में है, जो निस्वार्थ भाव से जीवन को पोषित करता है।</p>
<p>अंततः, 24 तीर्थंकरों के 24 चैत्य वृक्ष हमें यही सिखाते हैं कि जीवन का सच्चा संतुलन प्रकृति के साथ ही संभव है। जब तक ये वृक्ष सुरक्षित हैं, तब तक मानवता भी सुरक्षित है—और जब ये समाप्त होंगे, तो केवल जंगल ही नहीं, हमारा भविष्य भी उजड़ जाएगा।</p>
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		<title>ऋषभदेव पखवाड़े के विजेताओं को किया पुरस्कृत: पखवाड़े में पोस्टर, निबंध, रंगोली, स्लोगन, प्रतियोगिता हुईं </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 11:03:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नाभिराय जी पिता तुम्हारे माता मरु देवी तुम हो विघ्न विनाशक पार करो खेबा की पंक्तियों के साथ महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय कलेक्ट्री झालावाड़ में तीर्थंकर ऋषभदेव पखवाड़े में पोस्टर, निबंध, रंगोली, स्लोगन, प्रतियोगिता हुईं। इसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। झालरापाटन से पढ़िए, यह खबर&#8230;  झालरापाटन। नाभिराय जी पिता तुम्हारे माता मरु देवी तुम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नाभिराय जी पिता तुम्हारे माता मरु देवी तुम हो विघ्न विनाशक पार करो खेबा की पंक्तियों के साथ महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय कलेक्ट्री झालावाड़ में तीर्थंकर ऋषभदेव पखवाड़े में पोस्टर, निबंध, रंगोली, स्लोगन, प्रतियोगिता हुईं। इसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। <span style="color: #ff0000">झालरापाटन से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> झालरापाटन</strong>। नाभिराय जी पिता तुम्हारे माता मरु देवी तुम हो विघ्न विनाशक पार करो खेबा की पंक्तियों के साथ महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय कलेक्ट्री झालावाड़ में तीर्थंकर ऋषभदेव पखवाड़े में पोस्टर, निबंध, रंगोली, स्लोगन, प्रतियोगिता में प्रथम आने पर हर्षाली, मनीषा, गणिका, सृष्टि, राहीन, मेहनीन, शरिया, आर्या साक्षी को उप प्रधानाचार्य जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान झालरापाटन एवं जिला कार्यक्रम संयोजक सुरेंद्रकुमार जैन ने पुरस्कृत किया। प्रधानाचार्य बालचंद नागर ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम होने से विद्यार्थियों के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास होता है। उप प्रधानाचार्य रमेश यादव ने कहा कि इन कार्यक्रम से विद्यार्थियों के नैतिक ज्ञान में वृद्धि होती है। कार्यक्रम में रवि लता पारीक, समीना खान, समीना बेगम, सनी वर्मा, लक्ष्मी कुमावत, मीनूसिंह तंवर ने भी अपने विचार व्यक्त किए।</p>
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		<title>श्रद्धालुओं ने की भक्तामर दीप आराधना : आदिनाथ जन्म जयंती पर हुआ पंचामृत महामस्तकाभिषेक  </title>
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		<pubDate>Sat, 14 Mar 2026 03:34:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ मुनि श्री चारित्र सागर जी महाराज की प्रेरणा से निर्मित 1008 श्री आदिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय, स्कीम नंबर 71, इंदौर में प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ संपन्न हुए। पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230; इंदौर। बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> मुनि श्री चारित्र सागर जी महाराज की प्रेरणा से निर्मित 1008 श्री आदिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय, स्कीम नंबर 71, इंदौर में प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ संपन्न हुए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण बाल ब्रह्मचारी पट्टपरंपरा के वर्तमान पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि श्री वर्धमान सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं परम पूज्य मुनि श्री चारित्र सागर जी महाराज की प्रेरणा से निर्मित 1008 श्री आदिनाथ दिगंबर जैन चैत्यालय, स्कीम नंबर 71, इंदौर में प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री आदिनाथ की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ संपन्न हुए।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-101945" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260314-WA0000-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260314-WA0000-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260314-WA0000-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260314-WA0000-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260314-WA0000-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260314-WA0000-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260314-WA0000-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260314-WA0000-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260314-WA0000.jpg 1280w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>इस अवसर पर मूलनायक भगवान श्री आदिनाथ का 55 मंगल द्रव्यों द्वारा पंचामृत महामस्तकाभिषेक, वृहद शांतिधारा, नित्य नियम पूजन एवं श्री आदिनाथ विधान पूजन सानंद संपन्न किया गया। संध्याकाल में देव, शास्त्र और गुरु की आरती के पश्चात श्रद्धालु भक्तों द्वारा 48 दीपों से भक्तामर दीप आराधना की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भक्ति भाव से भगवान की आराधना की।</p>
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		<title>कारीटोरन पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में पहुंचे उपमुख्यमंत्री : संतों की वाणी से ही मिलते संस्कार &#8211; केशव प्रसाद मौर्य </title>
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		<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 17:07:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ विकास खंड मड़ावरा अंतर्गत श्री शांतिनाथ अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पहुंचे। उन्होंने चर्याशिरोमणि आचार्य श्रेष्ठ विशुद्धसागर महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि सम्यत्व सागर महाराज को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पढ़िए राजीव सिंघई की यह विशेष रिपोर्ट&#8230; ललितपुर। विकास खंड मड़ावरा अंतर्गत श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> विकास खंड मड़ावरा अंतर्गत श्री शांतिनाथ अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पहुंचे। उन्होंने चर्याशिरोमणि आचार्य श्रेष्ठ विशुद्धसागर महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि सम्यत्व सागर महाराज को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। विकास खंड मड़ावरा अंतर्गत श्री शांतिनाथ अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पहुंचे। उन्होंने चर्याशिरोमणि आचार्य श्रेष्ठ विशुद्धसागर महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि सम्यत्व सागर महाराज को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने कारीटोरन में प्राचीन पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण के लिए संग्रहालय की आधारशिला रखी और कहा कि पुरातत्व हमारी अमूल्य धरोहर है, जिसका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। अपने संबोधन में उन्होंने जैन संतों की उत्कृष्ट तपस्या को नमन करते हुए कहा कि संतों की वाणी से ही समाज को संस्कार प्राप्त होते हैं। उन्होंने जैन धर्म की प्राचीनता का उल्लेख करते हुए भगवान महावीर के सिद्धांतों को आज के समय में अत्यंत आवश्यक बताया।</p>
<p>प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक सभी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कारीटोरन क्षेत्र में बिजली, बैंक और सड़क जैसी सुविधाओं के विकास के लिए आवश्यक कार्रवाई का भरोसा भी दिलाया।</p>
<p>कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर उपमुख्यमंत्री द्वारा किया गया। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति द्वारा मुख्य अतिथि का माल्यार्पण, शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। मेला अध्यक्ष एडवोकेट मुन्नालाल जैन ‘अभिलाषा’ ने सनातन संस्कृति का प्रतीक चिन्ह भेंट कर उपमुख्यमंत्री को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने “कारीटोरन दर्शन” पुस्तिका का लोकार्पण भी किया। इस दौरान मुनि श्री सम्यत्व सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि राजनीति में धर्म का समावेश समाज के लिए श्रेयस्कर है। धर्म ही जीवन में शांति और सदाचार का मार्ग दिखाता है। धर्मसभा को मुनि श्री सौम्य सागर महाराज ने भी संबोधित करते हुए श्रावकों को जीवन में धर्म के महत्व की सीख दी। भाजपा जिलाध्यक्ष हरिश्चंद्र रावत ने उपमुख्यमंत्री के कारीटोरन जैसे सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में आगमन को विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने प्रतिष्ठाचार्य महेश जी डीमापुर को धर्म और संस्कृति के उत्थान में दिए गए योगदान के लिए प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ, पूर्व विधायक देवेंद्र सिंह मदनपुर, ब्लॉक प्रमुख चंद्रदीप रावत, नगरपालिका अध्यक्ष सोनाली जैन, अनिल जैन ‘अंचल’, अजित खजुरिया, अक्षय अलया, पवन जैन ‘शिवाजी’, आनंद राय, महेश श्रीवास्तव ‘भैया’, जिला पंचायत सदस्य मनोज कुशवाहा, अरविंद रजउराजा मैनुवा, सुदीप मोहनी, माधव शास्त्री, श्रेयस जैन ककरवाहा, विवेक जैन ‘अभिलाषा’, अनुभव कपासिया, जिनेंद्र जैन ‘रानू’, मनोज जैन (ललितपुर टीवी), आनंदी लुहर्र, विजय जैन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मुनि श्री सम्यत्व सागर महाराज का पादप्रक्षालन कर संतों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कार्यक्रम का संचालन वीरचंद नैकौरा ने किया, जबकि अंत में उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार नगरपालिका अध्यक्ष सोनाली जैन ने व्यक्त किया।</p>
<p><strong>मोक्ष कल्याणक व विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन</strong></p>
<p>इससे पूर्व प्रातःकाल पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत मोक्ष कल्याणक की मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुईं तथा विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें इंद्र-इंद्राणियों ने भाग लेकर आहुतियां अर्पित कीं। इसके उपरांत मुनि श्री सम्यत्व सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में गजरथ परिक्रमा निकाली गई। मुख्य प्रतिष्ठाचार्य पंडित कमलकुमार ‘कमलांकुर’ (भोपाल) के मार्गदर्शन में गजस्थ परिक्रमा संपन्न हुई, जिसमें इंद्र-इंद्राणियां पंक्तिबद्ध चल रहे थे और विभिन्न स्वयंसेवी संगठन उत्साहपूर्वक शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए थे।</p>
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		<title>बर्रो वाले बाबा भगवान आदिनाथ नए मंदिर में नए आसन पर विराजमान : तीर्थंकर भगवान का जन्म कल्याणक मनाया, शहर में निकली भव्य शोभायात्रा </title>
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		<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 17:05:24 +0000</pubDate>
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<p><strong>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के तृतीय दिवस प्रातःकालीन बेला में तीर्थंकर भगवान का जन्म कल्याणक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जैसे ही अयोध्या नगरी में राजा नाभिराय की महारानी मरुदेवी के यहां तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ, देवराज इंद्र का आसन कम्पायमान हो उठा और तीनों लोकों में आनंद की लहर छा गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के तृतीय दिवस प्रातःकालीन बेला में तीर्थंकर भगवान का जन्म कल्याणक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जैसे ही अयोध्या नगरी में राजा नाभिराय की महारानी मरुदेवी के यहां तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ, देवराज इंद्र का आसन कम्पायमान हो उठा और तीनों लोकों में आनंद की लहर छा गई। राजा नाभिराय ने अपने राज्य में उत्सव मनाने का आदेश दिया, वहीं स्वर्ग के प्रमुख सौधर्म इंद्र ने कुबेर का खजाना खोल दिया और चारों ओर रत्नों की वर्षा होने लगी। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के तीसरे दिवस प्रातः 6 बजकर 18 मिनट पर जैसे ही तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ, अयोध्या नगरी बने पांडाल में उपस्थित प्रमुख पात्रों और इंद्र-इंद्राणियों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी विनय भैया ने इसकी घोषणा की। इस अवसर पर राजा नाभिराय द्वारा किमिच्छिक दान की घोषणा की गई। साथ ही हथकरघा के सभी वस्त्रों पर 25 प्रतिशत छूट देने की घोषणा हुई तथा जीवदया के निमित्त गौशाला के लिए दान की घोषणाएं भी की गईं।</p>
<p><strong>शहर में निकली भव्य शोभायात्रा</strong></p>
<p>कार्यक्रम के अंतर्गत शहर में विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इसमें सौधर्म इंद्र बालक आदिकुमार को ऐरावत हाथी पर लेकर गाजे-बाजे के साथ नगर भ्रमण पर निकले। उनके साथ पंचकल्याणक महोत्सव के सभी प्रमुख पात्र अश्व रथों पर अपने परिवार के साथ सवार थे। शोभायात्रा जैन महाविद्यालय से प्रारंभ होकर तिलक चौक, माधवगंज और अस्पताल रोड होते हुए पुनः अयोध्या नगरी पहुँची। यहाँ पांडुक शिला पर बालक आदिकुमार का अभिषेक किया गया।</p>
<p><strong>मुनि श्री ने बताई भगवान आदिनाथ की महिमा</strong></p>
<p>इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज ने कहा कि जब अयोध्या नगरी में भगवान का अवतरण हुआ तो संपूर्ण विदिशा नगरी उल्लास में डूब गई। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसी परिवार में बालक के जन्म पर अपार खुशी होती है, उसी प्रकार तीनों लोकों के नाथ आदि प्रभु के जन्म पर हमारा हर्ष भी असीम होना चाहिए। मुनि श्री ने कहा कि यह पंचकल्याणक कार्यक्रम हमारे इष्टदेव बर्रो वाले बाबा भगवान आदिनाथ को समर्पित है। उन्होंने कहा कि भगवान आदिनाथ ने मानव समाज को असि, मसि, कृषि, विद्या, वाणिज्य और शिल्पकला जैसे षट्कर्मों का ज्ञान देकर मानव सभ्यता को दिशा दी। उन्होंने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — इन चार पुरुषार्थों की शिक्षा देकर मानव जीवन को पूर्णता प्रदान की। भारतीय संस्कृति के चार आश्रमों — ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास — के महत्व को बताते हुए मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य को जीवन के प्रत्येक चरण का संतुलित रूप से पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजकल लोग वानप्रस्थ की भावना को भूल रहे हैं, जिससे परिवारों में तनाव बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>बर्रो वाले बाबा का नया जिनालय</strong></p>
<p>मुनि श्री ने बताया कि वर्ष 2008 में गुरुदेव ने बर्रो वाले बाबा की प्रतिमा की अगवानी की थी। प्रतिमा को देखकर उन्होंने कहा था कि यह अत्यंत अतिशयकारी प्रतिमा है और इसके लिए एक भव्य जिनालय बनना चाहिए, जो हजारों वर्षों तक जीवंत रहे। इसी भावना से प्रेरित होकर अशोक जैन (सागर वाले) एवं मोहन जैन नमकीन द्वारा बर्रो वाले बाबा का भव्य पाषाण मंदिर निर्माण कराया गया, जिसमें आज भगवान आदिनाथ नए आसन पर विराजमान हुए। इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज ने पुण्य की महिमा बताते हुए कहा कि जीवन में मिलने वाली हर सफलता — चाहे वह शिक्षा हो, व्यापार, नौकरी, विवाह या संतान का सुख — सब पुण्य के प्रभाव से ही प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य गुरुदेव विद्यासागर महाराज के शिष्य बनने का अवसर भी पुण्य का ही फल है।</p>
<p><strong>शनिवार को दिखाए जाएंगे वैराग्य के दृश्य</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि पंचकल्याणक के चतुर्थ दिवस 14 मार्च को प्रातः राजपाट तथा मध्याह्न में स्वर्ग की अप्सरा नीलांजना के नृत्य के माध्यम से संसार की असारता का दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद राजकुमार आदिकुमार को वैराग्य उत्पन्न होता है और वे दीक्षा लेकर घोर तपस्या के लिए वन की ओर प्रस्थान करते हैं।</p>
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		<title>देश के अनेक शिक्षाविद, विद्वान एवं जनप्रतिनिधि लेंगे भाग; नैनागिरि में होगा जैन शिक्षा समृद्धि का 13वां स्थापना दिवस समारोह </title>
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		<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 17:04:02 +0000</pubDate>
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<p><strong>बकस्वाहा</strong>। तहसील क्षेत्र के सुविख्यात जैन तीर्थ नैनागिरि में जैन शिक्षा समृद्धि का 13वां स्थापना दिवस समारोह विविध कार्यक्रमों के साथ 15 मार्च 2026 को दोपहर 2 बजे आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर देश के अनेक शिक्षाविद, विद्वान एवं जनप्रतिनिधि भाग लेंगे। जैन शिक्षा समृद्धि के राष्ट्रीय मंत्री जवाहर जैन ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय जैन, राष्ट्रीय महामंत्री जीवेत जैन, राष्ट्रीय मंत्री जवाहर जैन (सिकंदराबाद) तथा राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष प्रमोद जैन के प्रयासों एवं निर्देशन में वर्ष 2013 में जैन शिक्षा समृद्धि की स्थापना बच्चों में शिक्षा और संस्कारों का विकास करने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में जहां संसाधनों का अभाव है, वहां भी बच्चों में उज्ज्वल भविष्य के सपने हैं। वर्तमान में संचालित प्राइमरी विद्यालयों के माध्यम से संस्था शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की सुगंध भी निरंतर फैला रही है। संस्था द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से शिक्षक एवं शिक्षिकाएं लाभान्वित होकर स्वयं के साथ-साथ नन्हें बच्चों के जीवन को सही दिशा, नैतिक आधार और संस्कारयुक्त व्यक्तित्व प्रदान करने का कार्य कर रहे हैं। जैन शिक्षा समृद्धि के पदाधिकारियों ने सभी समाजजनों से इस अवसर पर उपस्थित होकर कार्यक्रम का लाभ लेने की अपील की है।</p>
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		<title>निमाड़ क्षेत्र के जिन मंदिरों के करेंगे दर्शन : द्वय आचार्य का मंगल प्रवेश 14 मार्च को </title>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सनावद (सन्मति जैन काका)।</strong> धर्म नगरी कहे जाने वाले नगर सनावद में साधु-संतों का निरंतर आगमन और विहार हो रहा है। ऊन वार्षिक मेले में अपना मंगल सानिध्य प्रदान कर निमाड़ क्षेत्र के जिन मंदिरों के दर्शनार्थ पधार रहे द्वय आचार्य, आचार्य श्री कुमुदनंदी महाराज एवं पट्टाचार्य विप्रणत सागर जी महाराज का मंगल प्रवेश 14 मार्च 2026 को प्रातः 8 बजे बेड़ियां की ओर से होगा। सभी समाजजन चौधरी फ्यूल्स, खरगोन रोड पर एकत्रित होकर द्वय आचार्य महाराज की मंगल अगवानी करेंगे।</p>
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