<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>उन्नति &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%89%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BF/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sat, 29 Jul 2023 13:00:48 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>उन्नति &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>दूसरे की उन्नति को देखकर जलना नहीं, सीखना चाहिए :  आचार्य श्री विद्यासागर ने उन्नति पाने का मार्ग बताया </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vidyasagar_told_the_way_to_progress/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vidyasagar_told_the_way_to_progress/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Jul 2023 13:00:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya VidhyaSagar]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Dongergarh]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[morena]]></category>
		<category><![CDATA[Progress]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Success]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर]]></category>
		<category><![CDATA[उन्नति]]></category>
		<category><![CDATA[कामयाबी का मंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[डोंगरगढ़]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=49860</guid>

					<description><![CDATA[दूसरे की उन्नति को देखकर जलना नहीं चाहिए जबकि उसकी उन्नति का क्या कारण है इसे देखकर उससे सीखना चाहिए और अपनी अउन्नति के कारण को भी देखना चाहिए । यह विचार डोगरगढ़ में चातुर्मासरत संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। पढ़िए मनोज नायक की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दूसरे की उन्नति को देखकर जलना नहीं चाहिए जबकि उसकी उन्नति का क्या कारण है इसे देखकर उससे सीखना चाहिए और अपनी अउन्नति के कारण को भी देखना चाहिए । यह विचार डोगरगढ़ में चातुर्मासरत संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डोंगरगढ़।</strong> दूसरे की उन्नति को देखकर जलना नहीं चाहिए जबकि उसकी उन्नति का क्या कारण है इसे देखकर उससे सीखना चाहिए और अपनी अउन्नति के कारण को भी देखना चाहिए । यह विचार डोगरगढ़ में चातुर्मासरत संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।</p>
<p>आचार्य श्री ने बताया कि कई बार कारण ज्ञात नहीं होता है तो पक्ष और विपक्ष रखकर भी देखा जाता है। आज आपके सामने एक ऐसा पक्ष लाकर रख रहे हैं कि आपके पंख उड़ने लायक हो जाए। एक आँख से हम देख सकते हैं, एक पैर से हम चल सकते है जबकि एक पंख से पक्षी उड़ नहीं सकता है। दो व्यक्ति है एक के पास बहुत पैसा है और दूसरे के पास भी बहुत पैसा है दोनों में कोई अंतर नहीं है तो कोई बात नहीं। लेकिन एक के पास 21 है और दूसरे के पास यदि 19 या 20 है तो 21 वाला अन्दर ही अन्दर खुश हो जाता है कि वह दूसरे से आगे है।</p>
<p>ऐसा क्यों होता है इसका क्या कारण है इसके बारे में कभी आपने विचार किया है ? विद्यार्थी भी कक्षा में परीक्षा के बाद जब रिजल्ट आता है तो वह दूसरे की ओर देखता है और सोचता है कि मेरा नंबर सबसे ज्यादा आए और दूसरे का नंबर उससे कम ही आए। जबकि उन्हें यह सोचना चाहिये कि उसकी उन्नति का क्या कारण है और उसे देखकर सीखकर अपनी उन्नति करना चाहिए।</p>
<p><strong>भगवान की दृष्टि नाशा होती है</strong></p>
<p>सर्वार्थसिद्धि में जिन महिमा का मंडन किया गया है जिसमें जिनेन्द्र भगवान के गुणों को बताया गया है। सौधर्म इंद्र अपने परिवार के सदस्यों को कहता है कि सभी को भगवान के समवशरण में चलना है तो परिवार के सभी सदस्य चलने को तैयार हो जाते हैं लेकिन परिवार में कुछ सदस्य ऐसे होते हैं जो आना कानी करते है। लेकिन सौधर्म इंद्र के कहने पर साथ में चले जाते है। फिर समवशरण में पहुचते ही सौधर्म इंद्र अपना सारा वैभव भगवान के सामने बिखेर देता है और भक्तिमय होकर ताण्डव नृत्य करने लग जाता है।</p>
<p>जिसे देखकर सभी देव ताली बजाने लग जाते हैं (वैसे तो देव कभी ताली बजाते नहीं है लेकिन सौधर्म इंद्र कि भक्ति में सभी उत्साहित होकर ताली बजाने लगते हैं )। भगवान का सिहासन कमल के जैसा होता है और भगवान उससे 4 उंगल ऊपर उठकर विराजमान रहते हैं। सौधर्म इंद्र अपना किरीट (मुकुट) उतारकर भगवान के चरणों में रख देता है और चरणरज (वहाँ चरणरज तो होता नहीं है लेकिन यह सम्मान का प्रतीक है कि चरण छूकर ललाट पर लगा लेते हैं) को अपने माथे में लगा लेता है।</p>
<p>यह देखकर जो सदस्य यहां आने के लिए आनाकानी कर रहा था वह अपने आप को धन्य मानता है कि सौधर्म के साथ आकर ऐसा समवशरण का दर्शन प्राप्त हुआ। वह सौधर्म इंद्र को देव समझता था उसे प्रतिदिन प्रणाम करता था। आज वह सौधर्म इंद्र भी इस देवों के देव के सामने अपना सिर झुका (नतमस्तक हो जाता है ) रहा है। वह भी भगवान को प्रणाम करता है और वह सोचता है कि यदि आज यहां नहीं आता तो जीवन बेकार था। इसके सामने कुछ है ही नहीं आज जीवन सार्थक हो गया।</p>
<p>आपकी दृष्टि इधर उधर जा सकती है लेकिन भगवान की दृष्टि नाशा दृष्टि होती है जिसको कोई आशा नहीं होती वही नाशा दृष्टि होती है। एक तरफ जड़ है और एक तरफ चेतन है। समवशरण में भगवान के साक्षात दर्शन होता है यहां (धरती पर) हम उनका बिम्ब स्वरुप में दर्शन कर रहे हैं। वह भगवान के साक्षात दर्शन कर जीवन को सुसंस्कारित कर लिया और आह्लाहिद हो गया अब क्या करना है ? अब कषायों का उन्मूलन करना है और मोक्षमार्ग में चलकर मुक्ति को प्राप्त करना है। भगवान से यही प्रार्थना है कि जैसे आपके गुण प्रगट हुए ऐसे ही हमारे गुण भी प्रगट हो जाए। भगवान के दर्शन मात्र से कई लोगो को सम्यकदर्शन प्राप्त हो जाता है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री की कृपा से चंद्रगिरी मंदिर का निर्माण तीव्र गति से चल रहा</strong></p>
<p>आज आचार्य श्री विद्यासागर महाराज को नवधा भक्ति पूर्वक आहार कराने का सौभाग्य अष्टम प्रतिमा धारी सुधा जी बेन परिवार को प्राप्त हुआ। श्री दिगम्बर जैन चंद्रगिरी अतिशय तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष सेठ सिंघई किशोर जैन ने बताया की क्षेत्र में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी की विशेष कृपा एवं आशीर्वाद से अतिशय तीर्थ क्षेत्र चंद्रगिरी मंदिर निर्माण का कार्य तीव्र गति से चल रहा है और यहाँ प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ में कक्षा चौथी से बारहवीं तक सीबीएसई पाठ्यक्रम में विद्यालय संचालित है। इस वर्ष से कक्षा एक से पांचवी तक डे स्कूल भी संचालित हो चुका है।</p>
<p>यहां गौशाला का भी संचालन किया जा रहा है जिसका शुद्ध और सात्विक दूध और घी भरपूर मात्रा में उपलब्ध रहता है। यहां हथकरघा का संचालन भी वृहद रूप से किया जा रहा है जिससे जरूरत मंद लोगो को रोजगार मिल रहा है और यहाँ बनने वाले वस्त्रों की डिमांड दिन ब दिन बढती जा रही है। यहां वस्त्रों को पूर्ण रूप से अहिंसक पद्धति से बनाया जाता है जिसका वैज्ञानिक दृष्टि से उपयोग कर्त्ता को बहुत लाभ होता है। आचार्य श्री के दर्शन के लिए दूर–दूर से उनके भक्त आ रहे है उनके रुकने, भोजन आदि की व्यवस्था की जा रही है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vidyasagar_told_the_way_to_progress/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
