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	<title>आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>वार्षिक अधिवेशन में अनेक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित : शताधिक विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ भव्य समारोह  </title>
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		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 10:28:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि-परिषद् का शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर एवं पुरस्कार अलंकरण समारोह विगत दिनों केशवरायपाटन में संपन्न हुआ। इसमें विद्वानों की मौजूदगी में कई प्रस्तावों पर सहमति बनी। आयोजन आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ के सानिध्य में हुआ। केशवराय पाटन से पढ़िए, डॉ. सुनील जैन संचय की यह रिपोर्ट&#8230; केशवराय पाटन (बूंदी)। श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि-परिषद् का शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर एवं पुरस्कार अलंकरण समारोह विगत दिनों केशवरायपाटन में संपन्न हुआ। इसमें विद्वानों की मौजूदगी में कई प्रस्तावों पर सहमति बनी। आयोजन आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ के सानिध्य में हुआ। <span style="color: #ff0000">केशवराय पाटन से पढ़िए, डॉ. सुनील जैन संचय की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>केशवराय पाटन (बूंदी)।</strong> श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, केशवराय पाटन में गणिनी आर्यिकारत्न श्री स्वस्ति भूषण माता जी ससंघ के पावन सान्निध्य में अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्रि-परिषद् के तत्वावधान में शिक्षण-प्रशिक्षण शिविर, वार्षिक अधिवेशन एवं पुरस्कार अलंकरण समारोह 25 से 30 मई तक आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। इस आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे शताधिक विद्वानों ने सहभागिता की। शिविर के दौरान ध्यान एवं योग, भक्तियों का स्वरूप, ज्योतिष, मुहूर्त, प्राकृत भाषा, धर्मध्यान एवं शुक्लध्यान, मूर्ति विज्ञान सहित विविध विषयों पर वरिष्ठ विद्वानों एवं विदुषियों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया।</p>
<p><strong>कार्यकारिणी बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय </strong></p>
<p>28 मई की रात्रि में परिषद् के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत की अध्यक्षता में कार्यकारिणी समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें संस्था के आगामी कार्यक्रमों, विभिन्न गतिविधियों एवं समाजोपयोगी कार्यों पर गहन विचार-विमर्श कर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।</p>
<p><strong>साधारण सभा का अधिवेशन संपन्न </strong></p>
<p>29 मई को साधारण सभा का खुला अधिवेशन किया गया। जिसमें कोषाध्यक्ष पंडित सुखमाल जैन सहारनपुर ने आय-व्यय विवरण प्रस्तुत किया तथा महामंत्री ब्र. जयकुमार जैन निशांत टीकमगढ़ ने गत बैठक की कार्रवाई का वाचन किया।</p>
<p><strong>अनेक महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत </strong></p>
<p>अधिवेशन में विद्वानों ने विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर अपने विचार रखे। चर्चा के बाद अनेक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें जनगणना में धर्म के कॉलम में जैन एवं भाषा के कॉलम में प्राकृत भाषा अंकित करने, आचार्य श्री शांतिसागरजी छाणी आचार्य पद पदारोहण शताब्दी वर्ष समारोह, रीवा में आर्यिका माता जी के साथ हुई सड़क दुर्घटना एवं साधु सुरक्षा, भोजशाला प्रकरण में जैन संस्कृति से जुड़े प्रमाणों की उपेक्षा, मंदिरों एवं जैन आयतनों की दीवारों पर जैन प्रतीकों के निर्माण, दीक्षा प्रदाता द्वारा दीक्षार्थी को पूर्ण परिपक्व करने के बाद ही दीक्षा प्रदान करने सहित कई प्रस्ताव सम्मिलित रहे। साथ ही आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माता जी की प्रेरणा से जहाजपुर, सोनागिर, केशवरायपाटन, प्यावड़ी आदि तीर्थ क्षेत्र के जीर्णाेद्धार कार्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा शोक संवेदनाओं से जुड़े प्रस्ताव भी पारित किए गए।</p>
<p><strong>चंबल तट पर ध्यान-योग एवं भगवान मुनिसुव्रतनाथ का अभिषेक  </strong></p>
<p>30 मई को प्रातः चंबल नदी के सुरम्य तट पर माताजी के साथ सभी विद्वानों, मुरैना गुरुकुल एवं नवागढ़ गुरुकुलम् के बच्चों ने ध्यान एवं योग किया। इसके बाद मूलनायक भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी का भव्य अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। जिसमें विद्वानों ने बोली लेकर पुण्यार्जन किया।</p>
<p><strong>विद्वानों का हुआ सम्मान एवं उपाधियों से अलंकरण </strong></p>
<p>समापन समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वानों को परिषद् के पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। डॉ. मनोज निर्लिप्त अलीगढ़, डॉ. मोहन जैन मैसूर, महावीर शास्त्री आगरा, पंडित जयकुमार दुर्ग, पंडित प्रद्युम्न कुमार जैन शास्त्री जयपुर, चक्रेश शास्त्री मुरैना, डॉ. शैलेश जैन उदयपुर, पंडित सुरेश जैन दमोह, डॉ. राजेंद्र पाटिल श्रवणबेलगोला एवं डॉ. संजय शास्त्री टीकमगढ़ सहित दस विद्वानों को शास्त्रि-परिषद् के पुरस्कारों से अलंकृत किया गया। पंडित मनीष संजू टीकमगढ़ एवं डॉ. भरत शास्त्री इंदौर को प्रतिष्ठाचार्य तथा पंडित देवेंद्र शास्त्री केकड़ी एवं पंडित संतोष शाहगढ़ को विधानाचार्य की उपाधि प्रदान की गई। इस अवसर पर विभिन्न कृतियों का विमोचन भी हुआ। केशवराय पाटन अतिशय क्षेत्र प्रबंध कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष गुलाबचंद जैन (चूना वालों) सहित समिति के सदस्यों ने सभी विद्वानों का सम्मान किया। सकल जैन समाज एवं प्रबंध समिति द्वारा आगामी चातुर्मास के लिए आर्यिका संघ के लिए श्रीफल समर्पित किया गया।</p>
<p><strong>शास्त्रि परिषद् कृ आर्षमार्गी विद्वानों की प्राचीन संस्था </strong></p>
<p>अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत ने कहा कि अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्रि-परिषद् आर्षमार्गी विद्वानों की शताधिक वर्ष पुरानी संस्था है, जिसने धर्म, दर्शन एवं समाज के क्षेत्र में अनेक उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने आयोजन के लिए प्रबंध समिति एवं सकल समाज का आभार व्यक्त करते हुए विद्वानों को आगामी कार्यों के लिए दिशा-निर्देशन प्रदान किया।</p>
<p><strong>विद्वान समाज के मार्गदर्शक दीपक हैं &#8211; आर्यिका स्वस्तिभूषण माता जी</strong></p>
<p>इस अवसर पर गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि विद्वान दीपक की तरह समाज को प्रकाशित करता है। समाज की समस्याओं का समाधान विद्वानों को करना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार अपने बच्चों को विद्वान बनाने का प्रयास करे, विद्वान अपने बच्चों को विद्वान बनाएं। माता जी ने विद्वानों के अध्ययन, साधना एवं परिश्रम की सराहना करते हुए वर्तमान समय की विसंगतियों को दूर करने में विद्वानों की महत्वपूर्ण भूमिका बताई और शास्त्रि-परिषद् के कार्यों की प्रशंसा की।</p>
<p><strong>शताधिक विद्वानों की रही गरिमामयी उपस्थिति </strong></p>
<p>आयोजन में डॉ श्रेयांस कुमार जैन बडौत अध्यक्ष, ब्र. जयकुमार जैन निशांत टीकमगढ़, महामंत्री एवं संयोजक, पंडित विनोदकुमार जैन रजवांस उपाध्यक्ष, पंडित पवन दीवान सागर उपाध्यक्ष, पंडित जयंत सीकर उपाध्यक्ष, पंडित सुखमाल जैन सहारनपुर कोषाध्यक्ष, डॉ. आशीष जैन आचार्य सागर संयुक्तमंत्री, डॉ. सोनल कुमार जैन दिल्ली संयुक्त मंत्री, डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर प्रचारमंत्री, ब्रह्मचारी डॉ. धर्मेंद्रकुमार जैन जयपुर, पं.राजकुमार शास्त्री, सागर, ब्र. जिनेश मलैया इंदौर, सोमचंद जैन शास्त्री मैनवार (सह संयोजक शिविर), पं. प्रद्युम्न कुमार शास्त्री जयपुर ,डॉ शैलेश जैन उदयपुर , पंडित गजेन्द्र जैन (गुलगंज) केशवराव पाटन,पं उदय जैन शास्त्री कोटा, पं.जितेंद्र जैन शास्त्री, कोटा, पं.श्रीनंदन जैन, टीकमगढ़, डॉ. निर्मल शास्त्री, टीकमगढ़, पं. संजय जैन शास्त्री,टीकमगढ, डॉ राजेश शास्त्री ललितपुर, .मनीष संजू, टीकमगढ़, डॉ. भारत शास्त्री इंदौर, सचिन जैन ‘चिन्मय’ टीकमगढ, पं.विनोद जैन शास्त्री, बबीना कैंट,पं. महावीर प्रसाद जैन, आगरा, पं. इंद्रसेन जैन, सहारनपुर, ब्र. पं. कमल जैन हाथीशाह, भोपाल, डॉ. ज्योति बाबू शास्त्री, उदयपुर , डॉ ज्योति जैन खतौली, पं. अजित कुमार जैन बड़ागांव धसान , पं. सनत कुमार जैन, रजवांस, पं. विनय कुमार जैन, अहार जी, पं. अखिलेश शास्त्री, रामटोरिया , पं. सुनील कुमार जैन शास्त्री बड़ागांव, पंडित विवेक जैन (बलदेवगढ़) दिल्ली, डॉ. मनोज जैन श्निर्लिप्तश्, अलीगढ़, पं शशांक जैन सिघंई बड़ामलहरा , पं प्रशान्त शास्त्री मड़ावरा, पं कैलाश शास्त्री मैनवार, पं ऋषभ शास्त्री ललितपुर , पं. ब्रजेश शास्त्री महुआ, भीलवाड़ा ,देवेश कुमार शास्त्री बलेह , पंडित मुकेश विनम्र गुड़गांव, पं. अखिलेश शास्त्रीष्सुप्रज्ञष्रमगढा,पं.रमेशचंद जैन शास्त्री ‘दाऊ’ जोबनेर जयपुर, डॉ. राजेंद्र पाटिल, श्रवणबेलगोला, पं देवेन्द्रकुमार जैन शास्त्री, केकड़ी, पं. जयकुमार, दुर्ग, पं. संजय जैन शास्त्री टीकमगढ़, चन्द्रेश शास्त्री भोपाल, पं. शैलेंद्र जैन शास्त्री भेलसी. पं. राजकुमार शास्त्री, भगवा, पं. चक्रेश शास्त्री मुरैना, पं.उदयचंद्र शास्त्री, सागर, मनीष विद्यार्थी, सागर, पं. राजकुमार जैन, कर्द, डॉ बाहुबली जैन, इंदौर, सविता शास्त्री, बड़नगर, पं अशोक जैन शास्त्री खतौली, पं. ऋषभ कुमार जैन बड़ागांव, अंकित जैन, बडागांव (धसान) आदि शताधिक विद्वान उपस्थित रहे।</p>
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		<title>प्रथम बार सराक जैन प्रतिभाओं का हुआ सम्मान : ओड़िसा में शिक्षण शिविरों का हुआ समापन </title>
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		<pubDate>Wed, 13 May 2026 08:34:16 +0000</pubDate>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के 70 वें अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष मति माता जी, आर्यिकाश्री सुज्ञान मति माता जी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल के विभिन्न अंचलों में आयोजन हो रहा है। <span style="color: #ff0000">भुवनेश्वर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> भुवनेश्वर।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के 70 वें अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष मति माता जी, आर्यिकाश्री सुज्ञान मति माता जी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल के विभिन्न अंचलों में आयोजन हो रहा है। उड़ीसा प्रांत के भुवनेश्वर पुरी जिले के विभिन्न स्थानों पर 5 से 10 मई तक चले शिक्षण शिविरों का समापन कार्यक्रमों के साथ हुआ। ब्र.मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया के निर्देशन में ग्रीष्मकालीन ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविरों का समापन विशिष्ट जनों की उपस्थिति में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ। आचार्य ज्ञानसागर जी के चित्र के समग्र दीप प्रज्वलन, मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ। स्थानीय शिविर सहयोगियों का सम्मान, बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गई। ज्ञान दर्पण भाग 1,2, पूजन प्रशिक्षण,मेहंदी, ड्राइंग, सिलाई में प्रथम, द्वितीय,तृतीय पुरस्कार दिए गए एवं सभी शिविरार्थीओं को सांत्वना पुरस्कार दिए गए। इसके साथ ही कक्षा 10वीं एवं 12वीं में अच्छे अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र, मेडल, स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। शिक्षण शिविरों अध्यापन कराने के लिए शिविर मुख्य संयोजक मनीष शास्त्री विद्यार्थी सागर, संहसंयोजक पं. जयकुमार दुर्ग, पं. राजकुमार शास्त्री कर्द, पं. शिखरचंद्र जैन भिलाई,राखी जैन का सम्मान सराक ट्रस्ट द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>ऐसे आयोजन से धर्म की प्रभावना</strong></p>
<p>शिक्षण शिविरों के विषय में जैनम फाउंडेशन दिल्ली के सत्येंद्र जैन ने कहा कि ऐसे आयोजन से धर्म की प्रभावना होती है और यह हमेशा होते रहने चाहिए, शीतकालीन शिविरों के लिए अभी से हम लोगों का आमंत्रण है, हम सभी आपका सहयोग करेंगे। केंद्र कार्यकर्ता हेमंत जैन सराक ने कहा हमें आगे के कार्यक्रम के लिए अभी से तैयारी करनी पड़ेगी, तब जाकर हम बहुत अच्छे तरीके से कार्यक्रम कर सकेंगे। शिविर संयोजक मनीष शास्त्री विद्यार्थी ने कहा कि ऐसे आयोजन में अगर स्थानीय समाज सहयोग करती है तो कार्यक्रम निश्चित ही सफल होते हैं और आप लोगों का हमें सहयोग मिलेगा तो हम शीतकालीन शिविरों का भव्य आयोजन करेंगे। जिससे पूरे सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का सफलतम आयोजन हो सकें। शिक्षण शिविरों की आयोजक भारतवर्षीय दिगंबर जैन सराक ट्रस्ट दिल्ली एवं पश्चिम बंगाल, झारखंड उड़ीसा स्थानीय सराक ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविरों का सफलतम कार्यक्रम संपन्न हो सका।</p>
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		<title>प्रथम बार सराक जैन प्रतिभाओं का हुआ सम्मान : ओड़िसा में शिक्षण शिविरों का हुआ समापन </title>
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		<pubDate>Sun, 10 May 2026 13:26:11 +0000</pubDate>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के 70 वें अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष मति माता जी, आर्यिकाश्री सुज्ञान मति माता जी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल के विभिन्न अंचलों में आयोजन हो रहा है। <span style="color: #ff0000">भुवनेश्वर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> भुवनेश्वर।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के 70 वें अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष मति माता जी, आर्यिकाश्री सुज्ञान मति माता जी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल के विभिन्न अंचलों में आयोजन हो रहा है। उड़ीसा प्रांत के भुवनेश्वर पुरी जिले के विभिन्न स्थानों पर 5 से 10 मई तक चले शिक्षण शिविरों का समापन कार्यक्रमों के साथ हुआ। ब्र.मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया के निर्देशन में ग्रीष्मकालीन ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविरों का समापन विशिष्ट जनों की उपस्थिति में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ। आचार्य ज्ञानसागर जी के चित्र के समग्र दीप प्रज्वलन, मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ। स्थानीय शिविर सहयोगियों का सम्मान, बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गई। ज्ञान दर्पण भाग 1,2, पूजन प्रशिक्षण,मेहंदी, ड्राइंग, सिलाई में प्रथम, द्वितीय,तृतीय पुरस्कार दिए गए एवं सभी शिविरार्थीओं को सांत्वना पुरस्कार दिए गए। इसके साथ ही कक्षा 10वीं एवं 12वीं में अच्छे अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र, मेडल, स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। शिक्षण शिविरों अध्यापन कराने के लिए शिविर मुख्य संयोजक मनीष शास्त्री विद्यार्थी सागर, संहसंयोजक पं. जयकुमार दुर्ग, पं. राजकुमार शास्त्री कर्द, पं. शिखरचंद्र जैन भिलाई,राखी जैन का सम्मान सराक ट्रस्ट द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>ऐसे आयोजन से धर्म की प्रभावना</strong></p>
<p>शिक्षण शिविरों के विषय में जैनम फाउंडेशन दिल्ली के सत्येंद्र जैन ने कहा कि ऐसे आयोजन से धर्म की प्रभावना होती है और यह हमेशा होते रहने चाहिए, शीतकालीन शिविरों के लिए अभी से हम लोगों का आमंत्रण है, हम सभी आपका सहयोग करेंगे। केंद्र कार्यकर्ता हेमंत जैन सराक ने कहा हमें आगे के कार्यक्रम के लिए अभी से तैयारी करनी पड़ेगी, तब जाकर हम बहुत अच्छे तरीके से कार्यक्रम कर सकेंगे। शिविर संयोजक मनीष शास्त्री विद्यार्थी ने कहा कि ऐसे आयोजन में अगर स्थानीय समाज सहयोग करती है तो कार्यक्रम निश्चित ही सफल होते हैं और आप लोगों का हमें सहयोग मिलेगा तो हम शीतकालीन शिविरों का भव्य आयोजन करेंगे। जिससे पूरे सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का सफलतम आयोजन हो सकें। शिक्षण शिविरों की आयोजक भारतवर्षीय दिगंबर जैन सराक ट्रस्ट दिल्ली एवं पश्चिम बंगाल, झारखंड उड़ीसा स्थानीय सराक ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविरों का सफलतम कार्यक्रम संपन्न हो सका।</p>
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		<title>आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी का जैन भवन में मंगल प्रवेश : माताजी ने कहा-नई प्रतिभावान पीढ़ी को सही दिशा दिखाना समाज का महत्वपूर्ण कर्तव्य  </title>
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		<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 07:25:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ का रविवार को शहर के जैन भवन में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रातः 9 बजे समाज बंधुओं ने बस्सी चौराहे पर आर्यिका संघ की अगवानी की। वहां से गाजे बाजे के साथ सकल जैन समाजजन नाचते-गाते प्रमुख मार्गों से होते हुए आर्यिका संघ को जैन भवन लाए। टोडारायसिंह से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ का रविवार को शहर के जैन भवन में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रातः 9 बजे समाज बंधुओं ने बस्सी चौराहे पर आर्यिका संघ की अगवानी की। वहां से गाजे बाजे के साथ सकल जैन समाजजन नाचते-गाते प्रमुख मार्गों से होते हुए आर्यिका संघ को जैन भवन लाए। <span style="color: #ff0000">टोडारायसिंह से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोडारायसिंह।</strong> गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ का रविवार को शहर के जैन भवन में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रातः 9 बजे समाज बंधुओं ने बस्सी चौराहे पर आर्यिका संघ की अगवानी की। वहां से गाजे बाजे के साथ सकल जैन समाजजन नाचते-गाते प्रमुख मार्गों से होते हुए आर्यिका संघ को जैन भवन लाए। इस दौरान जगह जगह भक्तों ने गुरु मां की आरती कर पाद प्रक्षालन कर आर्शीवाद लिया। जैन भवन के प्रवेश द्वार पर गुरु मां का 51 विशेष थाल सजाकर पाद प्रक्षालन किया। इस दौरान मंदिर परिसर भगवान के जयकारों से गुंज उठा। जैन समाज अध्यक्ष संतकुमार जैन और प्रवक्ता मुकुल जैन ने बताया कि इस मौके पर धर्मसभा हुई। कार्यक्रम की शुरूआत चित्र अनावरण से की गई। चित्र अनावरण अग्रवाल चौरासी समाज के नवनियुक्त अध्यक्ष अनिल मित्तल और सभी जैन मंदिरों के अध्यक्ष ने किया। इंदु मित्तल ने मंगलाचरण किया। आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि आजकल बेवकूफ बच्चे पैदा होना बंद हो गए हैं। नई प्रतिभावान पीढ़ी को सही दिशा दिखाना समाज का महत्वपूर्ण कर्तव्य है, नहीं तो इनकी प्रतिभा का उपयोग गलत हो जाएगा।</p>
<p><strong>जैन श्रावक को पिच्छी और कमंडल का उपासक होना चाहिए</strong></p>
<p>माताजी ने कहा कि समय के साथ सबकुछ बदल जाए लेकिन देव ,शास्त्र, गुरु की भक्ति मत बदलना। धर्म की अंगुली पकड़कर चलते रहेंगे तो जीवन धन्य हो जाएगा। यदि धर्म छूट गया तो जीवन में विपदाओं की बाढ़ आ जाएगी। उन्होंने टोडा में मंगल प्रवेश को वात्सल्य प्रवेश बताया। इस अवसर पर उन्होंने टोडा में स्वाध्याय शुरु करने के लिए महिला-पुरुषों की टीम का गठन किया। इस अवसर पर समाज अध्यक्ष संतकुमार जैन ने कहा कि टोडा के लोगों का सौभाग्य है कि आर्यिका माताजी का टोडा में आगमन हुआ है। एक जैन श्रावक को पिच्छी और कमंडल का उपासक होना चाहिए और हर जैन मुनि और आर्यिका संघ का प्रवेश-आहार-विहार पूरी भक्ति और श्रद्धा के साथ कराना चाहिए।</p>
<p><strong>मुनि-आर्यिका और श्रावक-श्राविका धर्म के चार पहिए</strong></p>
<p>आर्यिका श्री ने कहा कि जिस प्रकार एक रथ को चलाने के लिए चार पहियों की आवश्यकता होती है। उसी प्रकार धर्मरूपी रथ को आगे बढ़ाने के लिए मुनि-आर्यिका और श्रावक-श्राविका रूपी चार पहियों की बहुत जरूरत है। अगर एक भी पहिया अपने दायित्व और कर्तव्य से पीछे हटा तो धर्म का पहिया वहीं रुक जाएगा। इस अवसर पर सकल जैन समाज के साथ पीपलू, केकड़ी, देवली,राजमहल, झिराना आदि जगह से सैकड़ों श्रावक उपस्थित रहे। संचालन पंडित संजीव कासलीवाल ने किया।</p>
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		<title>बंगाल, झारखंड, उड़ीसा सराक क्षेत्र में हो रही हैं धर्म प्रभावना : ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविरों का शंखनाद  </title>
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		<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:44:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य ज्ञेय सागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका आर्षमति माताजी, आर्यिका सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर 2025-26 का सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का शंखनाद हुआ। रघुनाथपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; रघुनाथपुर। आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य ज्ञेय सागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका आर्षमति माताजी, आर्यिका सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर 2025-26 का सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का शंखनाद हुआ। <span style="color: #ff0000">रघुनाथपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रघुनाथपुर।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य ज्ञेय सागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका आर्षमति माताजी, आर्यिका सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर 2025-26 का सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का शंखनाद हुआ। शिक्षण शिविर ब्र. मंजुला दीदी, ब्र.मनीष भैया के निर्दशन में धर्म प्रभावना के साथ होंगे। शिक्षण शिविर में जैनत्व संस्कार कार्यक्रम, प्रतिभा सम्मान समारोह, प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। शिविर संयोजक मनीष विद्यार्थी ने बताया कि पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा प्रांत के विभिन्न अंचलों में शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों द्वारा नैतिक शिक्षा,ज्ञान दर्पण भाग 1,2 छहढाला की शिक्षा दी जाएगी।</p>
<p><strong>5 जनवरी को होगा समापन </strong></p>
<p>शिविर में छत्तीसगढ़ से आए पंडित जयकुमार दुर्ग, पंडित शिखरचंद जैन भिलाई, टीकमगढ़ से पंडित श्रीनंदन, उत्तर प्रदेश महरौनी से पंडित कपिल शास्त्री, सागर से पंडित मुन्नालाल जैन, पंडित राजकुमार कर्द, सहसंयोजक पंडित मोहित शास्त्री धर्म प्रभावना कर रहे हैं। स्थानीय संयोजक लखन, गौरांग जैन, रामदुलार जैन, डॉ. प्रदीप जैन, शक्तिपथ सराक समिति के लखनपुर से गयाराम जैन अध्यक्ष, संजय जैन सचिव, रघुनाथपुर से पुटुक जैन अध्यक्ष एवं सराक उत्थान समिति बंगाल, उड़ीसा, झारखंड सहयोग कर रही हैं। शिक्षण शिविरों का श्री दिगंबर जैन मंदिर रघुनाथपुर 5 जनवरी को भक्तामर विधान और विद्वानों के सम्मान, प्रतियोगिता ड्रॉ के साथ समापन होगा।</p>
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		<title>जिन मंदिर शिलान्यास और 30 वां दीक्षा जयंती महोत्सव की पत्रिका का किया विमोचन : आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी का 30 वां दीक्षा समारोह मनाया जाएगा। </title>
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		<pubDate>Sun, 07 Dec 2025 15:10:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जहाजपुर स्वस्तिधाम तीर्थ प्रणेत्री आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के सान्निध्य में स्वस्तिक मांगलिक भवन हिंडोली में जिन मंदिर शिलान्यास समारोह और 30 वां दीक्षा जयंती महोत्सव की पत्रिका का विमोचन किया गया। प्यावड़ी/पीपलू (टोंक) से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230; प्यावड़ी/पीपलू (टोंक)। श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र समिति प्यावडी के अध्यक्ष रतनलाल जैन, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जहाजपुर स्वस्तिधाम तीर्थ प्रणेत्री आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के सान्निध्य में स्वस्तिक मांगलिक भवन हिंडोली में जिन मंदिर शिलान्यास समारोह और 30 वां दीक्षा जयंती महोत्सव की पत्रिका का विमोचन किया गया। <span style="color: #ff0000">प्यावड़ी/पीपलू (टोंक) से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>प्यावड़ी/पीपलू (टोंक)</strong>। श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र समिति प्यावडी के अध्यक्ष रतनलाल जैन, उपाध्यक्ष रमेशचंद प्यावड़ी के नेतृत्व में जहाजपुर स्वस्तिधाम तीर्थ प्रणेत्री आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के सान्निध्य में स्वस्तिक मांगलिक भवन हिंडोली में जिन मंदिर शिलान्यास समारोह और 30 वां दीक्षा जयंती महोत्सव की पत्रिका का विमोचन किया गया। इस अवसर पर अतुल जैन, हिमांशु जैन, अशोक जैन, राजेश जैन, बुद्धिप्रकाश जैन, महावीर जैन, सुशील जैन, स्वास्तिक जैन, शिखरचंद जैन, सुनील जैन, श्रेयांस जैन, विनीत जैन, विकास जैन उपस्थित थे।</p>
<p><strong>22 जनवरी से दो दिवसीय कार्यक्रम होगा</strong></p>
<p>हिंडोली में जिन मंदिर शिलान्यास समारोह और 30 वां दीक्षा जयंती महोत्सव कार्यक्रम 22 और 23 जनवरी को मंगलमय वातावरण में किया जाएगा। समारोह के श्रैयांश जैन ने कि प्यावडी में अति प्राचीन जैन अतिशय क्षेत्र है। जहां पर भगवान चंद्रप्रभु की मनोहर प्रतिमा विराजमान है। जिनके दर्शन मात्र से अंतर्मन में दिव्य शांति महसूस होती है। कई बार पूर्णिमा को प्रातःकाल अभिषेक के समय चांदी के सिक्के अपने आप वेदी पर गिरते हैं और कई बार केसर भी दिखाई दी है। जिसका समाचार कई जैन पत्र-पत्रिकाओं में प्रमुखता के साथ प्रकाशित हुआ। इसके मैंने भी खूब समाचार दिए थे। जो भी पहली बार यहां पहुंचा है तो बाबा के दर्शन करने के बाद वहां से दूर जाने को मन नहीं होता।यही से 6 किमी दूरी पर पीपलू गांव है। वहां 400 जैन लोग रहते हैं। वहीं के जैन समाज के युवा प्रतिदिन अभिषेक करने इस अतिशय क्षेत्र पर आते हैं। इस मंदिर का भव्य शिलान्यास और आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी का 30 वां दीक्षा समारोह आयोजित किया जा रहा है।</p>
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		<title>नवागढ़ अतिशय क्षेत्र पर मनाया मोक्ष सप्तमी पर्व : अतिशयकारी भगवान अरनाथ स्वामी का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई </title>
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		<pubDate>Fri, 01 Aug 2025 08:01:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रागैतिहासिक नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में श्री पारसनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव संगीतमय विधान के साथ गुरुकुलम के बच्चों के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में विशेष सानिध्य ब्रह्मचारी श्री जय कुमार निशांत जी का रहा। नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; नवागढ़। प्रागैतिहासिक नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में श्री पारसनाथ भगवान का निर्वाण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रागैतिहासिक नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में श्री पारसनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव संगीतमय विधान के साथ गुरुकुलम के बच्चों के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में विशेष सानिध्य ब्रह्मचारी श्री जय कुमार निशांत जी का रहा। <span style="color: #ff0000">नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नवागढ़।</strong> प्रागैतिहासिक नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में श्री पारसनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव संगीतमय विधान के साथ गुरुकुलम के बच्चों के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में विशेष सानिध्य ब्रह्मचारी श्री जय कुमार निशांत जी का रहा। कार्यक्रम का प्रारंभ सातवीं सदी के भोंयरे के साथ भू गर्भ से प्रकटित मनोकामनापूर्ण अतिशयकारी भगवान अरनाथ स्वामी के अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ। इसमें गुरुकुलम के बच्चों ने उत्साह पूर्वक अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार श्रद्धा राशि समर्पित करके भगवान अरनाथ जी कि शांतिधारा की एवं दैनिक पूजन के साथ भगवान पारसनाथ स्वामी का विधान हुआ।</p>
<p><strong>सौजन्य एवं पुण्यार्जन इनका रहा</strong></p>
<p>इस अवसर पर राजेंद्र कुमार कुसुम लता जैन सपरिवार ग्वालियर द्वारा निर्वाण लाडू समर्पित किया गया एवं दिनेश कुमार जैन खजांची सपरिवार ग्वालियर वालों द्वारा वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया।</p>
<p><strong>निर्वाण महोत्सव की जानकारी दी</strong></p>
<p>कार्यक्रम के समापन पर क्षेत्र महामंत्री वीरचंद्र नैकोरा एवं क्षेत्र निर्देशक ब्रह्मचारी जय निशांत भैयाजी द्वारा तीर्थंकर भगवान् पार्श्वनाथ के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कमठ द्वारा किए गए उपसर्ग एवं पारसनाथ भगवान की सहनशीलता एवं क्षमाशीलता के बारे में बताते हुए गुरुकुलम के सभी छात्रों को पारसनाथ भगवान के निर्माण महोत्सव की विशेष जानकारी दी गई।</p>
<p>आर्यिका स्वस्ति भूषण जी का मिल रहा आशीर्वाद महामंत्री वीरचंद ने नवागढ़ क्षेत्र के इतिहास एवं गुरुकुलम के बारे में जानकारी देते हुए सभी लोगों को आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के द्वारा किए गए पंचकल्याणक उनके आशीर्वाद एवं भारत गौरव गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी का विशेष आशीर्वाद नवागढ़ को प्राप्त हो रहा है। अवगत कराते हुए आचार्य श्री ज्ञान सागर जी एवं स्वस्तिभूषण माताजी के प्रति अपना विनम्र भाव निवेदित किया।</p>
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		<title>श्रद्धा से पाषाण में भी परमात्मा नजर आते हैं - स्वस्तिभूषण माताजी : कल्पद्रुम महामंडल विधान में 800 अर्घ्य किए अर्पित </title>
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		<pubDate>Tue, 06 May 2025 07:47:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के सानिध्य एवं विधानाचार्य कपिल भैया के निर्देशन में कल्पद्रुम महामंडल विधान जारी है। समवशरण में विराजित चतुर्दिशा में विराजमान श्रीजी का प्रातः जिनाभिषेक, शांतिधारा मुनि आर्यिका ससंघ के सानिध्य में की गई। कल्पतरु महामंडल विधान के [&#8230;]]]></description>
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<p>बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के सानिध्य एवं विधानाचार्य कपिल भैया के निर्देशन में कल्पद्रुम महामंडल विधान जारी है। समवशरण में विराजित चतुर्दिशा में विराजमान श्रीजी का प्रातः जिनाभिषेक, शांतिधारा मुनि आर्यिका ससंघ के सानिध्य में की गई। कल्पतरु महामंडल विधान के 800 अर्घ्य श्रीफल सहित श्रीजी को समर्पित किए गए। केकड़ी से पढ़िए, <strong><span style="color: #ff0000">अभिषेक जैन लुहाड़िया और रमेश बंसल पारस की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>केकड़ी</strong>। जब भक्ति की लहर आत्मा में उमड़ती है तो सब कुछ भूल जाते हैं। बाह्य प्रक्रिया उसे बिल्कुल भी नजर नहीं आती है। श्रद्धा से पाषाण में भी परमात्मा नजर आते हैं। श्री कल्पतरु महामंडल विधान तीर्थंकर महावीर के अद्वितीय महिमा मंडल मंगल अर्घ्याें द्वारा पवित्र पूजा करने का एक मात्र उपाय है। बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आचार्य श्री इंद्रनंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के सानिध्य एवं विधानाचार्य कपिल भैया के निर्देशन में मय संगीत एवं साज बाज के साथ चल रहे कल्पद्रुम महामंडल विधान के अंतर्गत विधान में चौबीस तीर्थकरों की स्तुति करने पर ऐसा लगता है की संपूर्ण जैन दर्शन की आत्मा का सुख अनुभव हो रहा है इस अवसर पर आर्यिका माताजी ने कहा कि एक-एक नाम के मंत्र का जाप करने से कर्मों के बंधन ढीले पड़ते हैं। प्रातः जिनाभिषेक एवं शांतिधारा एवं समवशरण में विराजित चतुर्दिशा में विराजमान श्री जी का अभिषेक मुनिश्री तथा आर्यिका ससंघ के सानिध्य में किए गए। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल ने बताया कि कल्पतरु महामंडल विधान के 800 अर्घ्य श्रीफल सहित श्री जी के समर्पित किए गए। समाज के अमरचंद चौरूका ने बताया कि मंगलवार को प्रातः आचार्य मुनि आर्यिका ससंघ के सानिध्य में कल्पतरु महामंडल विधान का समापन पूर्णाहुति एवं विश्व शांति कामना महायज्ञ होगा। शाम को आरती भक्ति आनंद यात्रा सहित प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का संचालन कपिल भैया द्वारा किया गया।</p>
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		<title>किसी भी गलत कार्य के प्रति प्रायश्चित बड़ा तप-स्वस्तिभूषण माताजी: शिवम वाटिका में मुनिसुव्रतनाथ विधान किया </title>
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		<pubDate>Wed, 23 Apr 2025 06:24:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिसुव्रतनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक महोत्सव आर्यिका माताजी ससंघ के सानिध्य में मनाया गया। रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से 1008 रजत कलशों से महामस्तकाभिषेक एवं पालना झुलाने का कार्यक्रम शिवम वाटिका में हुआ। इस अवसर पर आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने धर्मसभा को संबोधित किया। केकड़ी से पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; केकड़ी। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिसुव्रतनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक महोत्सव आर्यिका माताजी ससंघ के सानिध्य में मनाया गया। रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से 1008 रजत कलशों से महामस्तकाभिषेक एवं पालना झुलाने का कार्यक्रम शिवम वाटिका में हुआ। इस अवसर पर आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने धर्मसभा को संबोधित किया। <span style="color: #ff0000">केकड़ी से पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>केकड़ी।</strong> जाने अनजाने में भूलवश मानव गलती कर बैठता है, और कर्म रूपी बंधन से जकड़ जाता है। घर के कचरे के लिए प्रतिदिन सफाई की आवश्यकता है उसी प्रकार कर्मों की सफाई के लिए प्रभु भक्ति करना भी आवश्यक होता है। बोहरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ जैन मंदिर के निकट शिवम वाटिका में आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने धर्माेपदेश में कहे। उन्होंने कहा कि कर्मों की निर्जरा व आत्म विशुद्धि के लिए आलोचना, ,प्रतिक्रमण, प्रायश्चित एवं पश्चाताप सफल साधन है। किसी भी गलत कार्य के प्रति प्रायश्चित कर लेना एक बहुत बड़ा तप है। स्वयं के सुख के लिए कभी भी पर को कष्ट पहुंचाने की चेष्टा नहीं करनी चाहिए।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-79597" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0002.jpg" alt="" width="1600" height="1106" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0002.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0002-300x207.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0002-1024x708.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0002-768x531.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0002-1536x1062.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0002-990x684.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250423-WA0002-1320x912.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />1008 रजत कलशों से महामस्तकाभिषेक </strong></p>
<p>प्रातःकालीन शांतिधारा का सौभाग्य भागचंद ज्ञानचंद सुनीलकुमार जैन ज्वेलर्स परिवार को मिला। भगवान महावीर व आचार्य श्री के चित्र अनावरण व दीप प्रज्वलन तथा आर्यिका माताजी के पाद प्रक्षालन का पुण्यार्जन ओमप्रकाश गोविंदकुमार योगेशकुमार सदारा परिवार ने प्राप्त किया। आर्यिका माता जी को शास्त्र भेंट शुभकामना परिवार के पार्श्वनाथ ग्रुप द्वारा किया गया। समाज के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ज्वैलर्स व मंत्री कैलाशचंद जैन मावा वालों ने बताया कि भगवान मुनिसुव्रतनाथ विधान आर्यिका माताजी ससंघ के सानिध्य में आयोजित किया गया। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि बुधवार को मुनिसुव्रतनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक महोत्सव आर्यिका माताजी ससंघ के सानिध्य में रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से 1008 रजत कलशों द्वारा महामस्तकाभिषेक एवं पालना झुलाने का कार्यक्रम शिवम वाटिका में हुआ।</p>
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		<title>विख्यात विद्वान व लेखक डॉ. कपूर चंद्र जैन स्मृति ग्रन्थ का हुआ भव्य लोकार्पण : देशभर के शताधिक विद्वानों की उपस्थिति में हुआ भव्य आयोजन </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/a_grand_event_was_held_in_the_presence_of_hundreds_of_scholars_from_across_the_country/</link>
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		<pubDate>Tue, 06 Jun 2023 10:19:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[&#160; श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में मूर्धन्य मनीषी श्रद्धेय डॉ. कपूरचंद जैन खतौली के स्मृति ग्रन्थ का भव्य विमोचन समारोह पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ व गणनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के ससंघ सान्निध्य में शास्त्री परिषद के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जी जैन बड़ौत की अध्यक्षता में भारत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<hr />
<p><strong>श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में मूर्धन्य मनीषी श्रद्धेय डॉ. कपूरचंद जैन खतौली के स्मृति ग्रन्थ का भव्य विमोचन समारोह पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ व गणनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के ससंघ सान्निध्य में शास्त्री परिषद के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जी जैन बड़ौत की अध्यक्षता में भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य के विशिष्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए डॉ सुनील जैन संचय की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सोनागिर (दतिया)।</strong> श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में मूर्धन्य मनीषी श्रद्धेय डॉ. कपूरचंद जैन खतौली के स्मृति ग्रन्थ का भव्य विमोचन समारोह पूज्य मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ससंघ व गणनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी के ससंघ सान्निध्य में शास्त्री परिषद के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जी जैन बड़ौत की अध्यक्षता में भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य के विशिष्ट आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। सर्व प्रथम ज्योति जैन झांसी व पंडित पवन दीवान मुरैना एवं डॉ कपूर चंद्र जी खतौली के परिजनों ने मंगलाचरण किया। इसके बाद विद्वानों, अतिथियों आदि ने चित्र अनावरण व दीप प्रज्वलन किया।</p>
<p><strong>दशों दिशाएं सुगंधित कीं</strong></p>
<p>इस मौके पर मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज ने कहा कि डॉ. कपूर चंद्र जी खतौली ने कपूर की तरह दशों दिशाएं सुगंधित कीं।भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके कार्य उन्हें सदैव जीवंत बनाए रखेंगे। वे चिंतन शील मनीषी थे। गणनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी ने कहा कि डॉ. कपूर चंद्र जी जितने दिन जिए शान जिए। वे मूर्धन्य मनीषी तथा अद्भुत प्रतिभा के धनी थे। वे विविध विद्याओं में पारंगत, अनोखे विषय पर अनोखे कार्य करने वाले मनीषी थे।</p>
<p><strong>शोध पीठ की हो स्थापना</strong></p>
<p>प्रारंभ में डॉ जय कुमार जैन मुज्जफरनगर ने डॉ कपूर चंद्र जी का खतौली का परिचय देते हुए उनके जीवन से जुड़े संस्मरण सुनाए। विशिष्ट अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य झांसी ने डॉ. कपूर चंद्र जी के अवदान को ऐतिहासिक बताया तथा उनकी स्मृति में बुंदेलखंड विश्विद्यालय झांसी में एक शोध पीठ स्थापना की बात कही। समारोह का संचालन पंडित विनोद जैन रजवांस व राजेन्द्र महावीर सनावद ने संयुक्त रूप से किया। आभार डॉ. ज्योति जैन खतौली ने व्यक्त किया। डॉ. कपूर चंद्र जैन के भाई सुमत जैन सीए झांसी ने अपने अनेक संस्मरण सुनाते हुए उन्हें जीवन निर्माता बताया।</p>
<p><strong>नई विधाओं पर किए कार्य</strong></p>
<p>शास्त्री परिषद के अध्यक्ष डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत ने कहा कि अपने को तिल-तिल गलाकर साहित्य साधना करने वाले सरस्वती के वरद पुत्र डॉ कपूर चंद्र जैन के द्वारा नयी-नयी विधाओं पर कार्य किए गए। डॉ. शीतल चंद्र जैन प्राचार्य जयपुर ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में जैन उनकी 700 पृष्ठों की कृति ऐतिहासिक दस्तावेज बन गयी है। इस पुस्तक को तैयार करने में उन्होंने अथक श्रम किया है।</p>
<p><strong>सहज-सरल मनीषी थे</strong></p>
<p>शास्त्री परिषद के महामंत्री ब्र. जय कुमार जी निशांत भैया टीकमगढ़ ने कहा कि वे सहज- सरल मनीषी थे इसलिए उनका इसलिए कोई विरोधी नहीं था। शास्त्रि परिषद के वे उपाध्यक्ष व पुरस्कार संयोजक रहे।  वे पूरे जीवन प्रभावना व साहित्य सपर्या में संलग्न रहे। प्राचार्य अरुण जैन सांगानेर ने कहा कि मध्यप्रदेश के दतिया मंडल के वरधुआ नामक छोटे से गांव में जन्में डॉ. जैन ने शिक्षा और समाज के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जो सदैव स्मरणीय रहेंगे।.डॉ. सुरेन्द्र जैन भारती बुरहानपुर ने कहा कि उनके साथ मेरा भाई जैसा संबंध था। वे सरल और सहज थे। वे आज भी याद हैं और कभी भूलेंगे भी नहीं।</p>
<p><strong>अक्षय आहार योजना थी महत्त्वपूर्ण</strong></p>
<p>प्रोफेसर विजय कुमार जैन लखनऊ ने डॉ. जैन को बड़ा भाई बताते हुए उनकी साहित्यिक यात्रा को याद किया, साथ ही प्रोफेसर वृषभ प्रसाद जी लखनऊ के अवदान को रेखांकित करते हुए उनके द्वारा कोरोना काल में चलाई गई अक्षय आहार की योजना को महत्वपूर्ण बताया। डॉ. ब्र. राकेश भैया सागर ने विलक्षण प्रतिभा के धनी डॉ. कपूर चंद्र जी ने जैन विद्या शोध संदर्भ पुस्तक तैयार कर महत्वपूर्ण कार्य किया, यह पुस्तक शोधार्थियों के लिए वरदान साबित हुई।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-45626" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM.jpeg" alt="" width="1504" height="1004" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM.jpeg 1504w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-1024x684.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-768x513.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-990x661.jpeg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/WhatsApp-Image-2023-06-06-at-3.39.20-PM-1320x881.jpeg 1320w" sizes="(max-width: 1504px) 100vw, 1504px" /></p>
<p><strong>सरलता की थे प्रतिमूर्ति</strong></p>
<p>दैनिक विश्व परिवार के संपादक प्रवीण जैन झांसी ने कहा कि ज्ञान यज्ञ में अनूठी आहुति देने वाले  डॉ साब सरलता की प्रतिमूर्ति थे। डॉ. सुनील संचय ललितपुर ने कहा कि डॉ. कपूर चंद्र जी की कृतियाँ श्रम साध्य, व्यय साध्य और समय साध्य थीं। वे अजातशत्रु थे। उनकी कालजयी कृतियां ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, जिनसे वे सदैव अमर रहेंगे। इस अवसर पर जसवीर राणा, डॉ. ज्योति जैन खतौली, डॉ. चंद्र मोहन जैन,  कार्तिक जैन, अनिकेत जैन, विभु जैन, वैभव जैन आदि वक्ताओं ने अपने विचार रखे। स्मृति ग्रंथ का विमोचन मंचासीन अतिथियों, विद्वानों एवं परिजनों ने किया।</p>
<p><strong>इन्हें किया गया सम्मानित</strong></p>
<p>स्मृति ग्रंथ के प्रधान संपादक डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत, संपादक मंडल ब्र. जय कुमार निशांत जी, पंडित विनोद कुमार जैन रजवांस, डॉ. सुरेन्द्र जैन भारती, ब्र. जिनेश मलैया, प्रबंध संपादक सुमत चंद्र जैन सीए, डॉ. ज्योति जैन, सह संपादक राजेन्द्र जैन महावीर, डॉ. सुनील संचय, डॉ. चंद्रमोहन जैन, जसवीर राणा, परामर्श मंडल के डॉ. शीतल चंद्र जैन, डॉ. जय कुमार जैन,  प्राचार्य अरुण जैन एवं संयोजक मंडल के नीरज जैन, कार्तिक जैन, अनिकेत जैन, विभु जैन, वैभव जैन आदि को सम्मानित किया गया।</p>
<p><strong>पत्नी ज्योति जैन का योगदान</strong></p>
<p>उल्लेखनीय है कि अनेक पुरस्कारों से अलंकृत डॉ कपूरचंद जी खतौली ने स्वतंत्रता संग्राम में जैन, प्राकृत एवं जैन विद्या शोध संदर्भ, संविधान विषयक जैन अवधारणाएं, धवल कीर्तिमान, जैन विरासत जैसी कालजयी कृतियों का प्रणयन कर अमूल्य योगदान दिया है। उनकी धर्मपत्नी डॉ. ज्योति जैन भी एक विदुषी हैं। उन्होंने छाया की तरह उनके कार्यों में योगदान दिया। डॉ. साब के जाने के बाद वे निरंतर सक्रिय होकर डॉ. साब के पद चिह्नों पर चल रहीं हैं।</p>
<p><strong>ये रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस अवसर पर देश भर के विभिन्न अंचलों से आमंत्रित 125 विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह में डॉ कपूरचंद जैन खतौली के जीवनवृत्त पर एलईडी के माध्यम से उनके जीवन के विविध पक्षों को दिखाया गया। इस मौके पर कमल चंद जी अहमदाबाद, नरेंद्र भंडारी, अमित भंडारी ,रसम भंडारी, सुमित कुमार सीए ,संजीव कुमार, अमित कुमार, आशीष कुमार, प्रमोद कुमार हैदराबाद, संजीव कुमार खंडवा, श्रीमती कल्पना, बेबी, श्रुति ,अनंत ,रोमी, प्रियंका ,ऋषि, राखी, रेसी, दीपू ,उदित ,कार्तिक, अनिकेत, पंडित वीरेश कानपुर, आमोद कानपुर , प्रकाशजी झांसी , मीहिका जैन, अरहम जैन आदि परिजन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।</p>
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<p><strong>प्रोफेसर वृषभ प्रसाद जी लखनऊ स्मृति विशेषांक &#8216;बुलेटिन&#8217; का हुआ विमोचन</strong></p>
<p>इस मौके पर शास्त्री परिषद के उपाध्यक्ष रहे प्रोफेसर वृषभ प्रसाद जी लखनऊ स्मृति विशेषांक &#8216;बुलेटिन&#8217; का भी विमोचन किया गया। इस मौके पर विद्वानों ने कहा कि प्रोफेसर वृषभ प्रसाद जी लखनऊ भाषा शास्त्र के बहुत बड़े विद्वान थे। उनका अवदान भी अविस्मरणीय है। इन्होंने भाषा के विकास में अतुलनीय योगदान दिया है। आपका जन्म एटा में 2 जनवरी 1959 को हुआ। आप प्रसिद्ध विद्वान बाबू कामता प्रसाद जी के सुपौत्र थे। मंत्र विज्ञान और ज्योतिष के भी अच्छे विद्वान थे। कोरोना काल में आपने अक्षय योजना के माध्यम से जो रसोई संचालित कराई उससे हजारों लोग लाभान्वित हुए। अनेक बार विदेश जाकर प्रभावना की। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का स्नेह और वात्सल्य उन्हें विशेष रूप से मिलता रहा। उन्होंने अनेक कृतियों का प्रणयन किया। उनके असामयिक निधन से अपूरणीय क्षति हुई है। इस मौके पर प्रोफेसर वृषभ प्रसाद जी की धर्मपत्नी एवं प्रोफेसर विजय कुमार जैन, डॉ. राका जैन, डॉ. पत्रिका जैन आदि उनके परिजन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।</p>
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