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	<title>आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भावना भाव नाशिनी होती है भाव से भव सुधरता है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने भाव, भावना और भव के बीच संबंध समझाए  </title>
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		<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 11:58:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी, आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी सहित 55 से अधिक साधुओं का लघु कुंभ पदमपुरा में विराजित है। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; पदमपुरा। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी, आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी सहित 55 से अधिक साधुओं का लघु कुंभ पदमपुरा में विराजित है। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा</strong>। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी, आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी सहित 55 से अधिक साधुओं का लघु कुंभ पदमपुरा में विराजित है। मंगलवार को धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि संसारी प्राणी संसार का नाश अर्थात जन्म मरण से छुटकारा चाहता है। भावना भव नाशिनी होती है भाव से भव सुधरता है, भव संसार का नाश होता है। उसके लिए 12 भावना, 16 कारण भावना का वर्णन शास्त्रों में बताया गया है। भावना वैराग्य की करना चाहिए। उसके बिना धर्म कार्य का फल नहीं मिलता है। संसार ,शरीर, विषय भोगों से विरक्ति लेना चाहिए। बुराई छोड़ने से और छोटे-छोटे निर्मित पाकर वैराग्य प्रकट होता है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-99758" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260210-WA0013-300x231.jpg" alt="" width="300" height="231" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260210-WA0013-300x231.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260210-WA0013.jpg 463w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>साधुओं के उपदेश मनोरंजन में भी रहस्य और संदेश समाहित होता है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने धर्मदेशना में बताया कि चक्रवर्ती जो कि 6 खंड का अधिपति हैं। वह भी हर समय वैराग्य का चिंतन करते हैं। उन्होंने धर्म का, भक्ति का सार को, आत्मा को समझा। 24 तीर्थंकरों ने जो कुछ जीवन में प्राप्त किया, वह दिव्य ध्वनि से हमें दिया है। साधुओं के उपदेश मनोरंजन में भी रहस्य और संदेश समाहित होता है, उससे जीवों का कल्याण होता है भावना संसार में पतन या उन्नति दोनों करती है यह संसार असार है, अशरण है, अनित्य है। केवल धर्म ही मंगलकारी शरणभूत है। धर्म को धारण करने से परमात्मा पद मिलता है, साधुओं के प्रवचन उपदेश को श्रवण कर उसके मर्म को समझ कर जीवन में उन्नति करना चाहिए़। इसके पूर्व मंगलाचरण चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन के बाद आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने तीनों आचार्यों, मुनिराजों, साधुओं का गुणानुवाद किया। आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी ने पुण्य, समय और मृत्यु का की विवेचना श्लोक से की।</p>
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से सलूंबर के दंपति ने दीक्षा का किया निवेदन </strong></p>
<p>आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी ने भाइयों के प्रेम, विनम्रता, बड़प्पन के आदर्श श्री प्रसन्न सागर जी को निरूपित किया। पाप छोड़कर पुण्य ग्रहण करो। संतों के सानिध्य में आकर छोटे-छोटे नियम लेने बुराई छोड़ने पर भी उनका दर्शन करना सार्थक होगा। दोनों आचार्यों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर आचार्य भक्ति परिक्रमा पूर्वक की। मंगलवार को पदमपुरा से आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी का संघ सहित चाकसू के लिए मंगल विहार हुआ। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को सलूंबर के दंपति 8 प्रतिमाधारी हुकमीचंद एवं उनकी धर्मपत्नी कांतादेवी 7 प्रतिमाधारी ने दीक्षा के लिए निवेदन कर श्रीफल समर्पित किया। वही अन्य श्रावक ने भी व्रत नियम ग्रहण किए।</p>
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		<title>प्रज्ञा को प्रसन्नता से वर्धमान करने पर परमात्मा पद प्राप्त होता है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मंगल देशना में साधुओं की चर्या पर की चर्चा  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 09:48:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पदमपुरा के अतिशय क्षेत्र में आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी के शिष्य आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी(6 पिच्छी) तथा आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी(18 पिच्छी) का आगमन हुआ। आचार्य वर्धमान सागर संघ के साधुओं, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी, पदमपुरा अतिशय क्षेत्र कमेटी और हजारो भक्तों ने दोनों संघों की मंगल अगवानी की। पदमपुरा से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पदमपुरा के अतिशय क्षेत्र में आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी के शिष्य आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी(6 पिच्छी) तथा आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी(18 पिच्छी) का आगमन हुआ। आचार्य वर्धमान सागर संघ के साधुओं, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी, पदमपुरा अतिशय क्षेत्र कमेटी और हजारो भक्तों ने दोनों संघों की मंगल अगवानी की। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा।</strong> पदमपुरा के अतिशय क्षेत्र में आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी के शिष्य आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी(6 पिच्छी) तथा आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी(18 पिच्छी) का आगमन हुआ। आचार्य वर्धमान सागर संघ के साधुओं, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी, पदमपुरा अतिशय क्षेत्र कमेटी और हजारो भक्तों ने दोनों संघों की मंगल अगवानी की। दोनों आचार्य संघ ने जिनालय में पदमप्रभ के दर्शन कर आचार्य श्री वर्धमान सागरजी के दर्शन कर आचार्य भक्ति पूर्वक चरण वंदना की। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, आचार्य श्री प्रज्ञा सागरजी, आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी एवं आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी के मंचासीन होने पर दोनों आचार्यों ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन किए। धर्मसभा में अनूठा संयोग अतिशय हुआ। जब दिगंबर धर्म की तीनों परंपरा मंच पर प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर, आचार्य श्री आदि सागर परंपरा के आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी एवं आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी एवं आचार्य श्री शांतिसागरजी छाणी परंपरा की आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी मंचासीन हुई।</p>
<p><strong>ब्रह्मचारी अवस्था के संस्मरणों को साझा किया</strong></p>
<p>धर्मसभा में आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने उपदेश में 12 तप के बारे में बताया। जैन समाज की पहचान दिगंबर साधुओं से होती है। तीर्थंकर भगवान यथानाम तथागुण अनुरूप होकर असंभव को संभव बनाते हैं। आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी ने आचार्य प्रज्ञा सागर जी और स्वयं के ब्रह्मचारी अवस्था के संस्मरणों को साझा किया। श्री तरुण सागर जी की स्मृति से भावुक हो गए। प्रभु सानिध्य से भक्ति में वृद्धि होती हैं। आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी ने बताया कि 12 वर्ष पूर्व दाहोद में 23 फरवरी 2014 को हमारा मिलन हुआ। आपने बताया कि तप, ज्ञान,संयम में वृद्धि होने से प्रज्ञा, प्रसन्न होकर जीवन वर्धमान होता हैं।</p>
<p><strong>साधु का लक्ष्य साधना से प्रसन्नता को प्राप्त होता है </strong></p>
<p>इस अवसर पर आशीर्वचन में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने उपदेश में बताया कि पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में आचार्य प्रज्ञासागर जी एवं आचार्य प्रसन्नसागर जी संघ सहित आए हैं। आप दोनों आचार्य पुष्पदंत सागर जी के शिष्य हैं। जिस समय सन 1990 में पारसोला में आचार्य पद हमें प्राप्त हुआ था। तब यह दोनों मुनि युवा अवस्था में विद्यमान रहे। साधु का लक्ष्य साधना से प्रसन्नता को प्राप्त होता है और प्रज्ञा बढ़ने से जीवन आगे बढ़कर वर्धमान होता है। तब परमात्मा बनने की यात्रा प्रारंभ पदमप्रभ बनते हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागरजी ने पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में धर्मसभा में प्रकट की।</p>
<p><strong>अष्टमी होने से अधिकांश साधुओं के उपवास रहे</strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा कि सब साधु एक हैं। दोनों आचार्यों के दादा गुरु आचार्य श्री विमलसागर जी से हमने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया था। संसारभोगी हैं और तीर्थंकर भोग से रहित होकर भगवान बने हैं। हम सब साधना का लक्ष्य लेकर संयमी बने हैं। पीयूष सागर के पिता ने हमसे दीक्षा लेकर मुनि देवेंद्रसागर जी बने तथा देवेंद्र सागर जी के पिता ने हमारे दीक्षागुरु आचार्य धर्मसागर जी से दीक्षा लेकर मुनि जिनेंद्र सागर जी बने। आज अष्टमी होने से अधिकांश साधुओं के उपवास रहे।</p>
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		<title>श्रावकों का जीवन मन, वचन और काय के संयम और रत्नत्रय धर्म से सफल : आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण ने निवाई में प्रवेश कर दोपहर को किया विहार  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_lives_of_lay_followers_are_made_successful_through_self_control_in_thought_word_and_deed_and_by_following_the_three_jewels_of_dharma/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 11:36:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य वर्धमान सागर जी जैन समाज के निवेदन पर शीतकालीन प्रवास 32 साधुओं के साथ पार्श्वनाथ नसिया जी संत भवन में कर रहे हैं। जबसे आचार्य श्री पधारे है, प्रति सप्ताह धार्मिक अनुष्ठान होकर धर्म की गंगा बह रही है। निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर... निवाई। आचार्य वर्धमान सागर जी जैन समाज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य वर्धमान सागर जी जैन समाज के निवेदन पर शीतकालीन प्रवास 32 साधुओं के साथ पार्श्वनाथ नसिया जी संत भवन में कर रहे हैं। जबसे आचार्य श्री पधारे है, प्रति सप्ताह धार्मिक अनुष्ठान होकर धर्म की गंगा बह रही है। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर..</span>.</strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> आचार्य वर्धमान सागर जी जैन समाज के निवेदन पर शीतकालीन प्रवास 32 साधुओं के साथ पार्श्वनाथ नसिया जी संत भवन में कर रहे हैं। जबसे आचार्य श्री पधारे है, प्रति सप्ताह धार्मिक अनुष्ठान होकर धर्म की गंगा बह रही है। सिद्धचक्र मंडल विधान, प्रथमाचार्य शांति सागर स्मारक ओर प्रतिमा चरण स्थापना का राष्ट्रीय कार्यक्रम 71 वर्ष पूर्व निर्मित 41 फीट के मानस्तंभ में विराजित श्री जी का भव्य पंचामृत अभिषेक 28 जनवरी को होगा। मंगलवार को याग़ मंडल विधान का पूजन हुआ। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघस्थ 83 वर्षीय आर्यिका शीतलमति माताजी ने 23 जनवरी को चारों प्रकार के आहार का त्याग कर यम संलेखना धारण कर ली। अब पूज्य माताजी निर्जल बिना जल के उपवास कर तप साधना, आत्मा का चिंतन कर रही हैं। 27 जनवरी को 5वां उपवास है। आचार्य वर्धमानसागरजी ,मुनिश्री हितेंद्र सागरजी, मुनिश्री प्रभव सागरजी ,मुनिश्री चिंतनसागरजी , मुनिश्री दर्शितसागरजी, प्रबुद्ध सागरजी, मुमुक्षुसागरजी, प्रणीतसागरजी, ध्येयसागरजी, भुवन सागरजी, आर्यिका शुभमति, शीतलमती ,चैत्यमती,</p>
<p>विलोकमति ,दिव्यांशु मति ,पूर्णिमामति , मुदितमति विचक्षणमति ,समर्पितमति,निर्मुक्तमति विनम्रमति, दर्शनामति ,देशनामति ,महायशमति, देवर्धिमति,प्रणतमति ,निर्माेहमति,</p>
<p>पद्मश मति ,दिव्ययशमति, प्रेक्षामति जिनेशमति, ऐलक हर्षसागर, क्षुल्लक प्राप्तिसागर , सभी साधु उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>जन्म अनेक लेते हैं किंतु सभी संयम अपनाते नहीं</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री ने धर्मसभा में माताजी को संबोधित कर देशना में बताया कि केवलज्ञान लक्ष्मी से जैनधर्म विभूषित है। जैन धर्म के अंतर्गत सर्वाेच्च सिद्ध अवस्था का मार्ग बतलाया गया है। अनंतानंत भव्य आत्माएं इस मार्ग पर चलकर सिद्ध हुए हैं। संयम धारण करने से जीवन सार्थक होता है। जन्म अनेक लेते हैं किंतु सभी संयम अपनाते नहीं है। जन्म के साथ मरण भी लगा हुआ है। जन्म मरण की सार्थकता सम्यक दर्शन, ज्ञान और सम्यक चारित्र की साधना कर संलेखना से मृत्युंजय मृत्यु पर विजय पाने का पुरुषार्थ से होती है। आर्यिका श्री शीतलमति माताजी ने 54 वर्ष पूर्ण कर आर्यिका दीक्षा ली। जन्म वैराग्य संयम के महान कार्यों से सफल होता है। सर्वश्रेष्ठ अवस्था सिद्ध अवस्था होती है।</p>
<p><strong>आत्मा में लगे कर्मों को साधना तप बल से हटाया जाता है</strong></p>
<p>आचार्य वर्धमानसागर ने उपदेश में बताया कि शीतलमति ने अपने मन को दृढ़ करते हुए वसंतपंचमी के दीक्षा दिन पर संपूर्ण चारों प्रकार के आहार का त्याग कर यम संलेखना धारण की है। संलेखना शरीर और कषाय को क्रश करने से सफल होती है। उपवास से शरीर को ओर आत्मा में लगे कर्मों को साधना तप बल से हटाया जाता है। उत्साह और भक्ति से धर्म पुरुषार्थ करना चाहिए। इससे आत्मा का कल्याण होता है और अन्य को भी संयम धारण करने की प्रेरणा मिलती है। श्रावक का मानव जीवन मन वचन काय के संयम से सफल होता है। साधु की समाधि देखना सेवा करना तीर्थ यात्रा समान होती है। उत्कृष्ट समाधि होने पर क्षपकसाधु अगले दो से आठ भव में निश्चित रूप से सिद्ध अवस्था को प्राप्त करते हैं।</p>
<p><strong>माताजी का चाकसू की ओर मंगल विहार </strong></p>
<p>पवन बोहरा, हेमंत बाबी,सुशील मोहित ने बताया कि आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी का धूमधाम से मंगल प्रवेश हुआ। माताजी ने श्री जी के दर्शन के बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ सहित दर्शन किए। धर्म सभा में आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी और आचार्य श्री के प्रवचन हुए दोपहर को आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी का आहार के बाद निवाई से चाकसू की ओर मंगल विहार हुआ।</p>
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		<title>प. बंगाल झारखंड उड़ीसा सराक क्षेत्र में भी पर्युषण की धूम : प्रतिभा सम्मान एवं क्षमा वाणी के साथ होगा समापन </title>
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		<pubDate>Thu, 28 Aug 2025 10:16:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञानमती माताजी के आशीर्वाद, ब्र.मंजुला दीदी, ब्र.मनीष भैया के निर्देशन में पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा के विभिन्न स्थानों पर पर्यूषण महापर्व पर धर्म प्रभावना हो रही है। पुरुलिया से पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञानमती माताजी के आशीर्वाद, ब्र.मंजुला दीदी, ब्र.मनीष भैया के निर्देशन में पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा के विभिन्न स्थानों पर पर्यूषण महापर्व पर धर्म प्रभावना हो रही है। <span style="color: #ff0000">पुरुलिया से पढ़िए, मनीष विद्यार्थी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पुरुलिया प. बंगाल।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञानमती माताजी के आशीर्वाद, ब्र.मंजुला दीदी, ब्र.मनीष भैया के निर्देशन में पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा के विभिन्न स्थानों पर पर्यूषण महापर्व पर धर्म प्रभावना हो रही है। पर्यूषण पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म पर सभी मंदिरों में नित्य नियम पूजन आरती, प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। पर्युषण महापर्व 28 अगस्त से 6 सितंबर तक धर्म प्रभावना पूर्वक पश्चिम बंगाल, उड़ीसा,झारखंड के सराक क्षेत्र में होंगे। इस अवसर पर स्यादवाद महाविद्यालय वाराणसी, श्रमण ज्ञान भारती मथुरा, वर्णी संस्थान विकास सभा के विद्वानों द्वारा धर्म प्रभावना हो रही है।</p>
<p><strong>सराक भाइयों के उत्थान के लिए कार्य जारी </strong></p>
<p>भारतीय जैन मिलन क्रमांक10 के क्षेत्रीय अध्यक्ष अरुण चंदेरिया, क्षेत्रीय कार्य अध्यक्ष संजय जैन शक्कर, संयोजक मनीष विद्यार्थी, राकेश जैन बमोरी सागर में रेलवे स्टेशन पर सराक क्षेत्र प्रभावना करने जा रहे विद्वानों को तिलक, टोपी लगाकर सम्मानित किया। सराक क्षेत्र में 1995 से निरंतर शीतकालीन, ग्रीष्मकालीन एवं पर्यूषण पर्व पर आयोजन से सतत हो रहा है। मुख्य संयोजक पं.मनीष शास्त्री विद्यार्थी सागर ने बताया कि आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से पश्चिम बंगाल झारखंड उड़ीसा के लगभग 8 लाख सराक भाइयों के उत्थान के लिए कार्य चल रहा हैं।</p>
<p><strong>25 विद्वानों द्वारा सभी मंदिर में धर्म प्रभावना hai होगी</strong></p>
<p>कार्यक्रम की निर्देशक ब्र. मंजुला दीदी सम्मेद शिखर ने बताया कि पर्यूषण महापर्व के अवसर पर 25 विद्वानों द्वारा सभी मंदिर में धर्म प्रभावना होगी। सुबह से जिन मंदिरों में सामूहिक पूजन, दोपहर में क्लास, शाम को आरती, प्रवचन एवं अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न होंगे। समापन के अवसर पर विद्यभावन छात्र-छात्राओं का सम्मान पाठशाला टीचर विद्वान सम्मान के साथ कार्यक्रम होगा। सहसंयोजक पंडित जयकुमार जैन दुर्ग, पं.राजकुमार जैन सागर स्थानीय संयोजक गौरांग जैन, रामदुलार जैन, सृष्टिधर जैन, डॉ प्रदीप जैन, शक्तिपथ, अनुज सराक जैन कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। कार्यक्रम में भारतवर्षीय दिगंबर जैन सराक ट्रस्ट दिल्ली एवं पश्चिम बंगाल झारखंड उड़ीसा स्थानीय सराक समिति धर्म प्रभावना कार्य कर रही है।</p>
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		<title>आचार्य श्री सुंदर सागर जी ससंघ को किया श्रीफल भेंट:  टोंक आगमन का विनम्र आग्रह कर लिया आशीष </title>
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		<pubDate>Thu, 19 Jun 2025 09:31:52 +0000</pubDate>
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<p><strong>दिगंबर जैन समाज पुरानी टोंक (राजस्थान) ने आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज को तालेड़ा पहुंचकर टोंक आगमन के लिए श्रीफल भेंट किया। इसके बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को काछोला (भीलवाड़ा) में टोंक आगमन के लिए श्रीफल भेंट किया गया। स्वस्ति धाम जहाजपुर पहुंचकर 1008 श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान एवं आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।<span style="color: #ff0000"> टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> दिगंबर जैन समाज पुरानी टोंक राजस्थान ने आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज को तालेड़ा पहुंचकर टोंक आगमन के लिए श्रीफल भेंट किया। इसके बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को काछोला (भीलवाड़ा) में टोंक आगमन के लिए श्रीफल भेंट किया गया। पारस जैन पार्श्वमणि कोटा ने बताया कि इस अवसर पर सरावगी समाज के अध्यक्ष शैलेंद्र जैन, तेरापंथ समाज के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन जयपुरिया, प्रकाश पटवारी जैन, पदमकुमार जैन, चेतनकुमार जैन, पारस जैन सोनी, निर्मलकुमार जयपुरिया, अशोक जैन छाबड़ा, अजय सोनी, बाबू बाकलीवाल, कुशाल जैन चौधरी, खेमचंद बिलासपुरिया, जितेंद्र कासलीवाल आदि श्रावक श्रेष्ठी उपस्थित थे।</p>
<p>मुनि श्री ने सबको आशीर्वाद दिया एवं इसके बाद स्वस्ति धाम जहाजपुर पहुंचकर 1008 श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान एवं आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद टोंक के लिए प्रस्थान किया। यह यात्रा अविस्मरणीय यादगार रही।</p>
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		<title>सोनागिर सिद्धक्षेत्र पर आयोजन : पं. मनीष विद्यार्थी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित </title>
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		<pubDate>Mon, 05 Jun 2023 10:38:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री सौभाग्य सागर जी महाराज, मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य एवं आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी के निर्देशन में अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्री परिषद का शिक्षण प्रशिक्षण शिविर, अधिवेशन, पुरस्कार समर्पण समारोह, डॉ कपूर चंद्र जी खतौली स्मृति ग्रंथ लोकार्पण समारोह 29 मई से 4 जून तक सिद्धक्षेत्र सोनागिरि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री सौभाग्य सागर जी महाराज, मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य एवं आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी के निर्देशन में अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्री परिषद का शिक्षण प्रशिक्षण शिविर, अधिवेशन, पुरस्कार समर्पण समारोह, डॉ कपूर चंद्र जी खतौली स्मृति ग्रंथ लोकार्पण समारोह 29 मई से 4 जून तक सिद्धक्षेत्र सोनागिरि जी में संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनीष जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> परम पूज्य आचार्य श्री सौभाग्य सागर जी महाराज, मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य एवं आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी के निर्देशन में अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्री परिषद का शिक्षण प्रशिक्षण शिविर, अधिवेशन, पुरस्कार समर्पण समारोह, डॉ कपूर चंद्र जी खतौली स्मृति ग्रंथ लोकार्पण समारोह 29 मई से 4 जून तक सिद्धक्षेत्र सोनागिरि जी में संपन्न हुआ।</p>
<p>3 जून 2023 को आयोजित पुरस्कार सम्मान समारोह में विभिन्न विधाओं में काम करने वाले 10 विद्वानों का सम्मान किया गया, सभी को साल, श्रीफल, प्रतीक चिह्न, सम्मान पत्र एवं 11000 रुपए की राशि प्रदान की गई, पुरस्कार समर्पण समारोह में श्रुत संवर्धन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर समिति के संयोजक ,जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री, अहिंसा कारुणा समाचार पत्र के संपादक पं. मनीष विद्यार्थी शाहगढ़ को सम्मानित किया गया।</p>
<p>उपस्थित विद्वतवर्ग डॉ. श्रेयांश जैन बड़ोद, डॉ. शीतल चंद्र जी प्राचार्य जयपुर, ब्र. जय कुमार निशांत, डॉ. ब्र. अनिल भैया जी जयपुर, ब्र. मनीष भैया, ब्र. विनोद भैया, डॉ. जय कुमार मुजफ्फरनगर, डॉ. सुरेंद्र भारती बुरहानपुर, राजेंद्र महावीर सनावद, डॉ. सुनील संचय ललितपुर , डॉ विमल जी जयपुर, प्रतिष्ठाचार्य सनत विनोद जी रजवांस, डॉ अमित आकाश, इंजी. दिनेश भिलाई, पं. रमेश जोबनेर,पं. जयकुमार दुर्ग पं. हजारी पार्श्वनाथ श्रवणबेलगोला ने बधाई दी। सोशल मीडिया पर सुरेश जैन बीज निगम मकरोनिया, पंकज जैन छतरपुर, महेश जैन पीएचई सागर, मनीष जैन नेहानगर, प्रकाश जैन पत्रकार शाहगढ़, चेतन जैन बण्डा ने बधाई दी।</p>
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		<title>गोराघाट से पीजी कॉलेज तक :  आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ का हुआ विहार </title>
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		<pubDate>Sat, 13 May 2023 14:09:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[डबरा। आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ का मंगलविहार गोराघाट से पीजी कॉलेज तक हुआ। आज के मंगलविहार में जैनयुवा सेवा मण्डल मुरार के मनोज जैन, आशीष जैन, सचिन जैन, अंकुश जैन, महेंद्र जैन, अर्पित जैन, निवृत्ति जैन, रजत जैन, राजकुमार जैन, ऋषभ जैन, मनीष जैन, मोहन जैन, पारस जैन, मुकुल जैन, सौरभ जैन, गौरव [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>डबरा।</strong> आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ससंघ का मंगलविहार गोराघाट से पीजी कॉलेज तक हुआ। आज के मंगलविहार में जैनयुवा सेवा मण्डल मुरार के मनोज जैन, आशीष जैन, सचिन जैन, अंकुश जैन, महेंद्र जैन, अर्पित जैन, निवृत्ति जैन, रजत जैन, राजकुमार जैन, ऋषभ जैन, मनीष जैन, मोहन जैन, पारस जैन, मुकुल जैन, सौरभ जैन, गौरव जैन,ऋत्विक जैन, अनुराग जैन, संयम जैन, यश जैन, सन्नी जैन, अभिषेक जैन, मडेन्द्र जैन, तन्मय जैन, अतुल जैन, पुष्पेंद्र जैन के अलावा जैन मिलन स्वतंत्र डबरा के क्षेत्रीय संयोजक वीर मनोज जैन एकांत, मुनि सेवा समिति के चेयरमैन रीतेश जैन, अध्यक्ष वीर राजू जैन कपड़े वाले, मंत्री वीर प्रेमचंद जैन एसबीआई, वीर आशीष जैन आदिनाथ फास्ट फूड, मुनि सेवा समिति डबरा के कोषाध्यक्ष जितेंद्र जैन जीतू रजियार वाले, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप के सदस्य राहुल जैन, विकी जैन, जैन मिलन डबरा के सदस्य संजीव जैन, संजू सेंथरी वाले कपूरचंद जैन आदि सदस्यगण उपस्थित थे।</p>
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