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	<title>आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>तीर्थंकर बालक जन्म से मति, श्रुत और अवधि ज्ञान के धारी होते हैं : भगवान का जन्म कल्याणक श्रद्धा, भक्ति उत्साह से मनाया गया </title>
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		<pubDate>Thu, 19 Feb 2026 11:41:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संसार समुद्र में दुःख से डूबे हैं, संसार में सुख नहीं है, सुख शाश्वत होना चाहिए और शाश्वत सुख धर्म से मिलता है और धर्म से पुण्य कमाया जाता है और पुण्य से ही सुख के राह मिलती है। यह उद्गार आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने व्यक्त किए। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संसार समुद्र में दुःख से डूबे हैं, संसार में सुख नहीं है, सुख शाश्वत होना चाहिए और शाश्वत सुख धर्म से मिलता है और धर्म से पुण्य कमाया जाता है और पुण्य से ही सुख के राह मिलती है। यह उद्गार आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा।</strong> आज आपने तीर्थंकर बालक की देव बालकों के साथ क्रीड़ा देखी है। संसार का हर प्राणी क्रीडा करता है, जो किसी भी रूप में होती है। संसार असार है। इस असार संसार में रहने वाले सुख की कल्पना कर लौकिक सुख चाहते हैं। संसार समुद्र में दुःख से डूबे हैं, संसार में सुख नहीं है, सुख शाश्वत होना चाहिए और शाश्वत सुख धर्म से मिलता है और धर्म से पुण्य कमाया जाता है और पुण्य से ही सुख के राह मिलती है। यह उद्गार आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बाल क्रीड़ा में अपने कबड्डी का खेल देखा। संसारी प्राणी भी पुण्य और पाप की कबड्डी में मग्न है। पुण्य प्राप्ति के लिए धर्म की क्रिया करना होगी। पाप हमेशा पुण्य से हारता है पुण्य यदि हारता है तो हमें संसार रूपी समुद्र में दुःख रूपी मगरमच्छ मिलते हैं। ब्रह्मचारी गजू भैय्या ने बताया कि आचार्यश्री ने कहा कि आप संसार में रचे बसे हैं और दुःख में सुख खोज रहे हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100291" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-1024x683.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-1536x1024.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-1320x880.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025.jpg 1599w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>देव शास्त्र गुरु संत समागम पुण्य धर्म अर्जित करने के साधन</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने बताया कि इंसान से पशु ठीक है क्योंकि, वह दिन भर खाने के बाद भी जुगाली करते हैं। मगर इंसान कभी धर्म रूपी, वैराग्य रूपी, स्वाध्याय रूपी जुगाली नहीं करता। संत आपको अभिषेक, दर्शन, पूजन स्वाध्याय की प्रेरणा देते हैं किंतु, उसमें आपकी रुचि नहीं रहती है। देव शास्त्र गुरु संत समागम पुण्य धर्म अर्जित करने के साधन है। यह रत्नत्रय धर्म के अंग हैं। रत्नत्रय धर्म के अवलंबन से सिद्धालय की राह प्राप्त होती है। पंच कल्याणक से खाली हाथ नहीं जाकर छोटे-छोटे नियम व्रत लेकर प्रतिदिन देव दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, मनन, चिंतन से जीवन में परिवर्तन लाकर मनुष्य जीवन को सार्थक करने का प्रयास करंे। पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में श्रीमद जिनेंद्र चौबीसी का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ, आर्यिका सरस्वतीमति, आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी के संघ सानिध्य में मनाया जा रहा है।</p>
<p><strong>शोभायात्रा का समापन पाण्डुक शिला पर हुआ</strong></p>
<p>गुरुवार को विधिनायक आदिनाथ तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। इसका नाटकीय मंचन सुमधुर स्वर लहरियों में सभी ने मंत्रमुग्ध होकर देखा, सुना। भक्ति से नृत्य कर इंद्रों के साथ सभी ने खुशियां मनाई। शोभायात्रा का समापन पाण्डुक शिला पर हुआ। भगवान को विराजित कर सबसे पहले तीर्थंकर बालक का अभिषेक सौधर्म इंद्र सुरेंद्र शची इंद्राणी मृदुला ने किया। इनके बाद बोली के माध्यम से चयनित राजेश बी शाह अहमदाबाद और अन्य सौभाग्यशाली परिवारों ने किया। सभी इंद्रों के अभिषेक के बाद समाजजनों ने अभिषेक किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट मुनि श्री प्रभव सागरजी, तारा,राजेश, राकेश सेठी जयपुर कोलकाता परिवार ने किया। संयोग से संघस्थ शिष्य मुनि श्री प्रभव सागर जी का भी जन्म एवं दीक्षा दिवस है। इसके पूर्व चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन संतोष सेठी, चिरंजीलाल बगड़ा कोलकाता ने किया। कर्नाटक मठ बद्री के भट्टारक भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>तीर्थकर प्रभु का जन्म सौधर्म इंद्र का आसन कंपायमान </strong></p>
<p>9 माह पूर्ण होने पर तीर्थकर बालक का जन्म होता है। जन्म होते ही तीन लोक के प्राणियों को पल भर के लिए शांति का अनुभव होता है। देवताओं द्वारा 12.30 करोड़ प्रकार के बाजे बजाए जाते हैं। सौधर्म इंद्र का आसन कंपायमान होता है और ध्यान लगाकर सौधर्म इंद्र यह जानते हैं कि अमुक नगरी में तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ है। वह अपने सिंहासन से खड़े होकर सात कदम आगे चलकर स्वर्ग से तीर्थकर बालक को नमस्कार करता है। सौधर्म इंद्र सभी देव परिवार के साथ ऐरावत हाथी पर शचि इंद्राणी के साथ तीर्थकर बालक की जन्म नगरी की ओर प्रस्थान करता है।</p>
<p><strong>तीन परिक्रमा कर शचि इंद्राणी ने किए प्रभु के दर्शन </strong></p>
<p>सौधर्म इंद्र ऐरावत हाथी पर शचि इंद्राणी के साथ सवार होकर तीर्थंकर बालक का जन्म जिस नगरी में हुआ है। उस नगर के तीन परिक्रमा लगाते हैं और शचि इंद्राणी प्रसुति गृह में जाती है, जहां तीर्थकर माता के पास मायावी बालक को सुलाकर तीर्थंकर बालक को अपनी गोद में लेकर बाहर आती है। तीर्थकर बालक के दिव्य मनोहर अलौकिक रूप को देखकर शचि इंद्राणी अत्यंत भाव विभोर होकर परिणाम में विशुद्धि बढ़ जाती है और संसार को केवल दो भव प्रमाण कर लेती है। वर्तमान भव सहित अर्थात तीर्थंकर बालक का दर्शन कितना पुण्यशाली होता है कि शचि इंद्राणी रानी एक भव अवतारी हो जाती है। तीर्थकर बालक को सौधर्म इंद्र जब गोद में लेता है तो दो नेत्रों से उन्हें संतुष्टि नहीं मिलती तो वह अपने 1000 नेत्र लगाकर भगवान को निहारते हैं। तीर्थकर बालक को देखते हैं। इसके बाद सौधर्म इंद्र शचि इंद्राणी के साथ ऐरावत हाथी पर तीर्थंकर बालक को लेकर जाते हैं। रत्न सिहासन पर विराजमान कर क्षीरसागर से 1008 जल के घडो कलशौ से भगवान का जन्म अभिषेक वैभव के साथ करते हैं। बालक के दाहिने पैर पर जो चिन्ह होता है। वही तीर्थकर का लांछन होता है। तीर्थंकर बालक के जन्म अभिषेक के बाद सौधर्म इंद्र तीर्थकर बालक का नामकरण करते हैं।</p>
<p><strong> 8 वर्ष की उम्र में अणुवर्ती</strong></p>
<p>8 वर्ष की आयु में तीर्थकर बालक अणुव्रत का पालन करने लग जाते हैं। क्रम से युवावस्था प्राप्त कर कुछ तीर्थकरों का विवाह भी होता है तीर्थकर कुमार माता पिता के इकलौते हैं। उनका राज्याभिषेक किया जाता है। संयोग पाकर वैराग्य का निमित्त मिलता है और वह वन की ओर प्रस्थान करते हैं। तीर्थकर स्वयंभू होते हैं अन्य किसी के संबोधन की आवश्यकता नहीं होती है। केवल सामान्य निमित्त पाकर वह वैराग्य को प्राप्त करते हैं। तीर्थंकर सम्मेद दृष्टि होते हैं तत्वों का यथार्थ चिंतन करते हैं।</p>
<p><strong>तीर्थकर बालक माता पिता की इकलौती संतान</strong></p>
<p>तीर्थकर बालक अपने माता-पिता की इकलौती संतान होते हैं। तीर्थकर बालक के जन्म होने के बाद माता-पिता को अन्य कोई संतान नहीं होती है। तीर्थकर बालक के भोजन भोग उपयोग की सामग्री स्वर्ग से सोधर्म इंद्र भेजते हैं। तीर्थकर बालक के साथ बाल क्रीड़ा जो होती है वह स्वर्ग के देव आकर करते हैं।</p>
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		<title>पदमपुरा में 18 फरवरी से पंच कल्याणक की तैयारियां : धार्मिक कार्यक्रम की समितियों को दी जिम्मेदारी  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 12:30:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रसिद्ध अतिशयक्षेत्र पदमपुरा बाड़ा (जयपुर) में 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पंचकल्याणक में प्रमुख मंगल निर्देशन देने के लिए मंगल प्रवेश 8 फरवरी को हो चुका है। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; पदमपुरा( जयपुर)। प्रसिद्ध अतिशयक्षेत्र पदमपुरा बाड़ा (जयपुर) में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पंचकल्याणक में प्रमुख मंगल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रसिद्ध अतिशयक्षेत्र पदमपुरा बाड़ा (जयपुर) में 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पंचकल्याणक में प्रमुख मंगल निर्देशन देने के लिए मंगल प्रवेश 8 फरवरी को हो चुका है। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा( जयपुर)।</strong> प्रसिद्ध अतिशयक्षेत्र पदमपुरा बाड़ा (जयपुर) में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पंचकल्याणक में प्रमुख मंगल निर्देशन देने के लिए मंगल प्रवेश 8 फरवरी को हो चुका है। नूतन चौबीसी की मंगल प्रेरणादाता आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण जी भी विराजित हैं। अध्यक्ष सुधीर जैन दौसा, मानद मंत्री हेमंत सोगानी, और कोषाध्यक्ष राजकुमार कोठारी ने बताया कि श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा की प्रबंध समिति</p>
<p>के तत्वावधान में पंच कल्याणक होगा। सुचारू कार्य व्यवस्था के लिए श्री पदमपुरा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति का गठन किया गया है।</p>
<p><strong>समितियों में इन समाजजनों को दी जिम्मेदारी</strong></p>
<p>पदमपुरा पंचकल्याणक महोत्सव के लिए सुधीर जैन को समारोह अध्यक्ष, हेमंत सोगानी को महामंत्री, राजकुमार कोठारी को संयोजक,न्यायाधिपति नरेंद्र जैन को स्वागत समिति,मंदिर निर्माण समिति में राजकुमार कोठारी, साधुओं की आहार व्यवस्था समिति में महावीर प्रसाद पाटनी, सुरेश सबलावत को प्रचार-प्रसार एवं प्रकाशन समिति का संयोजक बनाया गया है। सुरेश सबलावत प्रचार-प्रसार संयोजक ने बताया कि इसकेअतिरिक्त वित्त, कलश आबंटन, वित्तीय प्रबंधन लेखा, पांडाल, आवास, मंदिर, भोजन , जल,विद्युत, सुरक्षा, भंडार ,पूजन निर्माण,चिकित्सा ,सांस्कृतिक कार्यक्रम , यातायात, पार्किंग, कार्यालय,जुलूस, प्रदर्शनी इन्द्र व्यवस्था, मंच माइक संचार व्यवस्था सहित अनेक समिति गठित कर उनके सदस्य मनोनीत किए गए हैं।</p>
<p><strong>महोत्सव के लिए पात्रों का चयन किया</strong></p>
<p>मंदिर समिति के राजकुमार कोठारी ने बताया कि श्री पदमप्रभ भगवान की खड़गासन प्रतिमा के पास नवनिर्मित 24 तीर्थंकरों की चौबीसी, नूतन शिखर का निर्माण हो चुका है। आचार्य श्री वर्धमानसागर जी (32 पिच्छी)के प्रमुख निर्देशन में गणिनी आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी( 5 पिच्छी) एवं अन्य संघ सानिध्य में संहितासुरी पंडित हंसमुख शास्त्री धरियावद द्वारा धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। नव निर्मित शिखर पर कलश एवं ध्वजा आरोहण भामाशाह अशोक सुशीला पाटनी, सुरेश, शांता, विमल तारिका पाटनी आरके मार्बल ग्रुप किशनगढ़ द्वारा किया जाएगा। पंच कल्याणक के लिए महावीर शशि पहाड़िया को माता-पिता, सुरेंद्र जैन पांड्या मृदुला जैन सौधर्म इंद्र, पारस पूजा पाटनी कुबेर इंद्र सहित अनेक पात्रों का चयन हो गया है।</p>
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		<title>आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माता जी का मंगल पदार्पण : गुरु मां के आगमन से देवों ने किया अतिशय  </title>
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		<pubDate>Wed, 21 Jan 2026 12:25:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माता जी का मंगल पदार्पण मंगलवार को श्री 1008 चंद्र प्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र प्यावड़ी पीपलू जिला टोंक में हुआ। मनोहारी चंद्र प्रभु भगवान के समीप चरणों में चांदी के दो सिक्के नजर आए। माताजी के जयकारे गूंजे। प्यावड़़ी पीपलू से पढ़िए, यह खबर&#8230; प्यावड़ी पीपलू (टोंक)। दो साल बाद फिर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माता जी का मंगल पदार्पण मंगलवार को श्री 1008 चंद्र प्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र प्यावड़ी पीपलू जिला टोंक में हुआ। मनोहारी चंद्र प्रभु भगवान के समीप चरणों में चांदी के दो सिक्के नजर आए। माताजी के जयकारे गूंजे। <span style="color: #ff0000">प्यावड़़ी पीपलू से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>प्यावड़ी पीपलू (टोंक)</strong>। दो साल बाद फिर हुआ चमत्कार, बाबा की हो रही जय जयकार जो भी भक्त आया द्वार, उसकी हो गई नैया पार। श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र प्यावड़ी में मनोहरी श्री चंद्र प्रभु भगवान की अतिशय युक्त मनोहारी प्रतिमा विराजमान है, जो भी भक्त वहां जाता है, उसके अंतर्मन में दिव्य शांति का अनुभव होता है। वहां से दूर जाने को मन नहीं करता है। जहां पर कई बार पूर्णिमा और अमावस्या को चांदी के सिक्के एवं केसर अपने आप कपड़े पर आ जाती है। ऐसा देखा है हजारों की संख्या में भक्तों ने पहले कई बार। कोटा के पारस जैन पार्श्वमणि ने बताया कि आज फिर गुरु मां के आगमन से देवों द्वारा अतिशय हुआ। कहते हैं पुण्यशाली जीव जिस जगह जाते हैं, उसके पुण्य आगे-आगे पहले ही पहुंच जाते हैं। ऐसा ही नजारा आज देखने को मिला। जब आचार्य श्री सन्मति सागर जी की सुयोग्य शिष्या गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माता जी का मंगल पदार्पण मंगलवार को श्री 1008 चंद्र प्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र प्यावड़ी पीपलू जिला टोंक में हुआ। मनोहारी चंद्र प्रभु भगवान के समीप चरणों में चांदी के दो सिक्के नजर आए। उस समय पूरा परिसर चंद्रप्रभु बाबा एवं गुरु मां के जयकारों से गूंज उठा।</p>
<p><strong>ज्ञान के फूल खिलते वहां झूम उठते हैं धरती गगन</strong></p>
<p>मंगलवार को जैसे ही गुरु मां ने क्षेत्र में प्रवेश किया, मानो देवताओं ने प्रसन्नचित होकर सिक्कों के माध्यम से अतिशय दिखला दिया। लगभग 2 साल से जो नहीं हुआ था वो आज हो गया। श्री 1008 चंद्रप्रभु भगवान के श्री चरणों से के पास चांदी के 2 सिक्के पुनः दिखाई दिए। जीवन में सच्ची आस्था ही सही रास्ता दिखाती है। जो चमत्कार 2 साल से नहीं हो रहा था। वह माताजी के चरण पड़ते ही फिर से हो गया। मेरे अंतर्मन में यही भाव विचार आ रहा है कि जहां पड़े गुरु मां चरण वहां वीराना भी हो जाता चमन। ज्ञान के फूल खिलते वहां झूम उठते हैं धरती गगन। गुरु मां के पावन सानिध्य में ये आयोजन सफलता के शिखर पर जरूर पहुंचेगा। इसके संशय नहीं लगता है। आचार्य श्री इंद्र नंदी जी महाराज संघ का पावन सानिध्य और मंगल आशीर्वाद भी आयोजन की गरिमा को चार चांद लगा देगा। ये सब पीपलू और आसपास के श्रद्धालुओं की बाबा के प्रति अति श्रद्धा का ही फल कहा जा सकता है।</p>
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		<title>आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी का जहाजपुर से मंगल विहार: पीपलू में जिन मंदिर का होगा शिलान्यास समारोह </title>
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		<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 08:16:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जहाजपुर स्वस्तिधाम तीर्थ प्रणेत्री गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी का विहार श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर प्यावड़ी के लिए हुआ। प्यावडी में अति प्राचीन जैन अतिशय क्षेत्र है। जहां पर भव्य मनोहारी चंद्र प्रभु की मनोहर प्रतिमा विराजमान है। जिनके दर्शन मात्र से अंतर्मन में दिव्य शांति महसूस होती है। प्यावड़ी पीपलू से पढ़िए, पारस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जहाजपुर स्वस्तिधाम तीर्थ प्रणेत्री गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी का विहार श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर प्यावड़ी के लिए हुआ। प्यावडी में अति प्राचीन जैन अतिशय क्षेत्र है। जहां पर भव्य मनोहारी चंद्र प्रभु की मनोहर प्रतिमा विराजमान है। जिनके दर्शन मात्र से अंतर्मन में दिव्य शांति महसूस होती है। <span style="color: #ff0000">प्यावड़ी पीपलू से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> प्यावड़ी पीपलू (टोंक)।</strong> जहाजपुर स्वस्तिधाम तीर्थ प्रणेत्री गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी का विहार श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर प्यावड़ी के लिए हुआ। प्यावडी में अति प्राचीन जैन अतिशय क्षेत्र है। जहां पर भव्य मनोहारी चंद्र प्रभु की मनोहर प्रतिमा विराजमान है। जिनके दर्शन मात्र से अंतर्मन में दिव्य शांति महसूस होती है। कई बार पूर्णिमा को प्रातःकाल अभिषेक के समय चांदी के सिक्के अपने आप वेदी पर गिरते हैं और कई बार केसर भी दिखाई दी। जिसका समाचार कई जैन पत्र पत्रिकाओं में प्रमुखता के साथ प्रकाशित हुआ। जब मैं पहली बार यहां पहुंचा तो बाबा के दर्शन करने के बाद वहां से दूर जाने को मन नहीं हुआ। श्रेयांश जैन ने बताया कि यहीं से 6 किमी की दूरी पर पीपलू गांव है। वहां जैन समाज के 400 लोग निवास करते हैं। वहीं के जैन समाज के युवा पीढ़ी की टीम प्रतिदिन अभिषेक करने इस अतिशय क्षेत्र पर आते हैं। इस शिलान्यास समारोह को मुनिश्री इंद्र नंदी जी ससंघ का सानिध्य प्राप्त होगा। इस मंदिर का भव्य शिलान्यास का आयोजन प्रतिष्ठाचार्य पंडित मनोज शास्त्री बगरोही एवं अनुष्ठाचार्य कपिल भैया इंदौर के निर्देशन में अपार श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति में किया जाएगा। साथ जी आर्यिका स्वस्तिभूषण माता जी का 30वां दीक्षा समारोह भी आयोजित किया जाएगा।</p>
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		<title>शिक्षा के साथ संस्कारों के बीजारोपण की आवश्यकता : मां स्वस्ति इंटरनेशनल स्कूल में वार्षिकोत्सव में बच्चों ने दी प्रभावी प्रस्तुति  </title>
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		<pubDate>Mon, 22 Dec 2025 13:42:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शिक्षा के साथ संस्कारों का होना अतिआवश्यक है। बच्चों को किताबी ज्ञान मिलता है, लेकिन वे संस्कारों से दूर रहे हैं। होना यह चाहिए कि स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ संस्कारों का बीजारोपण भी किया जाए। यह उद्गार मां स्वस्ति इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिकोत्सव के अवसर आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने वर्जुअल व्यक्त किए। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शिक्षा के साथ संस्कारों का होना अतिआवश्यक है। बच्चों को किताबी ज्ञान मिलता है, लेकिन वे संस्कारों से दूर रहे हैं। होना यह चाहिए कि स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ संस्कारों का बीजारोपण भी किया जाए। यह उद्गार मां स्वस्ति इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिकोत्सव के अवसर आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने वर्जुअल व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> शिक्षा के साथ संस्कारों का होना अतिआवश्यक है। वर्तमान में स्कूली शिक्षा में बच्चों को किताबी ज्ञान मिलता है, लेकिन वे संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। होना यह चाहिए कि स्कूलों में किताबी ज्ञान के साथ साथ बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण भी किया जाए। यह उद्गार मां स्वस्ति इंटरनेशनल स्कूल के वार्षिकोत्सव के अवसर आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने वर्जुअल व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा ज्ञान और कौशल सिखाती है, जबकि संस्कार नैतिक मूल्य, सही आचरण और जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं। ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और एक सभ्य, सफल और जिम्मेदार व्यक्ति तथा समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं क्योंकि, व्यक्ति शिक्षा के बिना अज्ञानी और संस्कारों के बिना चरित्रहीन हो सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन में शिक्षा और संस्कार दोनों का महत्व है। शिक्षा और संस्कार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। शिक्षा दिशा देती है और संस्कार उस दिशा में चलने की प्रेरणा और शक्ति देते हैं। आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने कहा कि केवल किताबी शिक्षा से व्यक्ति जीवन में भटक सकता है, लेकिन शिक्षा के साथ संस्कार मिलने से जीवन सरल और सफल बनता है। एक शिक्षित व्यक्ति बुद्धिमान हो सकता है, लेकिन एक संस्कारवान व्यक्ति ही देश, समाज के लिए उपयोगी और अच्छा इंसान बन सकता है। इसलिए, बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और अच्छे आचरण की शिक्षा देना बहुत ज़रूरी है, ताकि वे एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकें। देश, धर्म, समाज और परिवार के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ साथ संस्कारवान होना भी जरूरी है।</p>
<p><strong> नौ रसों का प्रभावशाली प्रदर्शन </strong></p>
<p>विगत दिवस मां स्वस्ति इंटरनेशनल स्कूल में वार्षिक उत्सव सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। इस वर्ष के वार्षिक समारोह की थीम ‘नवरस: जीवन के नौ भाव’ पर आधारित थी। जिसके माध्यम से विद्यार्थियों ने मानव जीवन की विविध भावनाओं को मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत किया। इस अवसर जैन छात्रावास के बच्चों ने वाद्ययंत्रों के माध्यम से सुंदर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। विद्यार्थियों ने नृत्य, नाट्य एवं संगीत प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रृंगार, हास्य, करुणा, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत एवं शांत इन नौ रसों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। बच्चों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।</p>
<p><strong>नवरस थीम बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने में सहायक </strong></p>
<p>विद्यालय के डायरेक्टर्स ने पालकों और विद्यार्थियों से कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन बच्चों के आत्मविश्वास, रचनात्मकता और नैतिक मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा कि नवरस जैसी थीम बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास में सहायक है। उन्होंने विद्यालय की प्रगति रिपोर्ट के साथ साथ आगामी कार्य योजना भी प्रस्तुत की। कार्यक्रम के अंत में अभिभावकों एवं अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और विद्यालय परिवार को इस सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।</p>
<p><strong>गुरुमां स्वस्तिभूषण ने सभी को दिया शुभाशीष</strong></p>
<p>कार्यक्रम के मध्य वर्जुअल माध्यम से आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने समस्त बच्चों, पालकों एवं स्टाफ को शुभाशीष प्रदान किया। जैसे ही गुरुमां ने शुभाशीष के लिए हाथ उठाया। संपूर्ण सभा मंडप तालियों की गड़गड़ाहट और उनके जय जयकारों से गूंज उठा। सभी के चेहरे पर प्रसन्नता और खुशी के भाव दृष्टिगोचर हो रहे थे।</p>
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		<title>ब्र.मनीष भैया ने किया शिक्षण शिविरों का निरीक्षण:  पूजन के साथ मेहंदी पेंटिंग का प्रशिक्षण </title>
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		<pubDate>Tue, 13 May 2025 06:14:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत वर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविर जारी हैं। यह शिविर लखनपुर, बारकोना, राजामेला,भोक्ताबांध, हारीबांगा, लक्ष्मणपुर, साहिबखेड़ा, खगड़ा, चुडरी में चल रहे हैं। इनमें पूजन प्रशिक्षण के साथ पेंटिंग, मेहंदी और नृत्य आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बाकुड़ा से पढ़िए, मनीष जैन विद्यार्थी की यह खबर&#8230; बाकुडा। आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत वर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविर जारी हैं। यह शिविर लखनपुर, बारकोना, राजामेला,भोक्ताबांध, हारीबांगा, लक्ष्मणपुर, साहिबखेड़ा, खगड़ा, चुडरी में चल रहे हैं। इनमें पूजन प्रशिक्षण के साथ पेंटिंग, मेहंदी और नृत्य आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">बाकुड़ा से पढ़िए, मनीष जैन विद्यार्थी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बाकुडा।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी के जन्म दिवस के पावन अवसर पर पश्चिम बंगाल के सराक में आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी, आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी, आर्यिका श्री आर्षमति माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञानमति माताजी के आशीर्वाद से ब्र.मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया के निर्देशन में भारत वर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविर जारी हैं। यह शिविर लखनपुर, बारकोना, राजामेला,भोक्ताबांध, हारीबांगा, लक्ष्मणपुर, साहिबखेड़ा, खगड़ा, चुडरी में चल रहे हैं। इनमें पूजन प्रशिक्षण के साथ पेंटिंग, मेहंदी और नृत्य की क्लासों के लिए स्नेहा जैन और साधिका जैन ने बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ लौकिक कलाओं का प्रशिक्षण दिया।</p>
<p>यह शिक्षण शिविर सफलता की ओर अग्रसर हैं। इसके बाद मध्यप्रदेश से पधारे विद्वान पं. रीतेंद्र जैन, राजकुमार शास्त्री, जिनांश जैन, विदुषी सपना जैन, काव्या जैन ने भी शिक्षण शिविर में बच्चों को प्रशिक्षण दिया। शिविर निर्देशक ब्र. मनीष भैया ने शिक्षण शिविरों का निरीक्षण किया। जिसमें सर्वप्रथम बारकोना पहुंचकर बच्चों से शिक्षण शिविर के विषय में जानकारी ली। इसके बाद भैया जी मोलाहीर पहुंचकर बच्चों से धार्मिक क्लासों की जानकारी ली। शिविर मुख्य संयोजक मनीष विद्यार्थी सागर ने बताया कि पांच दिवसीय संस्कार शिविरों से निश्चित ही संस्कारों का बीजारोपण होगा। स्थानीय स्तर पर बाकुड़ा जिला सराक ट्रस्ट के अध्यक्ष गयाराम जैन, सचिव संजय जैन, डॉ प्रदीप जैन,रामदुलार जैन, लखन जैन राजा मेला, शक्तिपथ जैन, शिक्षण शिविरों को सफल बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं।</p>
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		<title>मानव जीवन में संस्कारों का विशेष महत्व है: आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी के सानिध्य में रजत कलशों से अभिषेक  </title>
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		<pubDate>Thu, 24 Apr 2025 08:09:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आयोजित त्रि-दिवसीय श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसका समापन बुधवार को हुआ। धर्मसभा में आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने उपदेश दिए। भगवान मुनिसुव्रतनाथ का पूजन व धार्मिक क्रियाएं आर्यिका ससंघ, पंडित कपिल भैया तथा पंडित निकेत शास्त्री के निर्देशन में हुई। रिद्धि-सिद्धि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आयोजित त्रि-दिवसीय श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इसका समापन बुधवार को हुआ। धर्मसभा में आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी ने उपदेश दिए। भगवान मुनिसुव्रतनाथ का पूजन व धार्मिक क्रियाएं आर्यिका ससंघ, पंडित कपिल भैया तथा पंडित निकेत शास्त्री के निर्देशन में हुई। रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से 1008 रजत कलशों से मस्तिकाभिषेक हुआ। <span style="color: #ff0000">केकड़ी से पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>केकड़ी।</strong> मानव जीवन में संस्कारों का विशेष महत्व है। जीवन में अच्छे संस्कार के लिए जिनागम के रहस्य को समझना आवश्यक है। बोहरा कॉलोनी स्थित शिवम वाटिका में आयोजित त्रि-दिवसीय श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव के समापन अवसर पर धर्म सभा में आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी ने अपने धर्माेपदेश में कहे। उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों के कल्याणक महोत्सव पुण्यशाली जीव ही मना सकते हैं। जिनधर्म की प्रभावना के लिए 24 ही तीर्थंकरों के कल्याणक धूमधाम से धार्मिक कार्यों के साथ मनाना चाहिए। प्रातः आर्यिका माताजी ससंघ श्री मुनिसुव्रत नाथ मंदिर पहुंचीं तथा वहां से भागचंद ज्ञानचंद जैनम कुमार विनय कुमार सावर परिवार जिन प्रतिमा लेकर शिवम वाटिका जुलूस के साथ पहुंचे।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-79723" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0014.jpg" alt="" width="1263" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0014.jpg 1263w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0014-300x203.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0014-1024x692.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0014-768x519.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0014-990x669.jpg 990w" sizes="(max-width: 1263px) 100vw, 1263px" />1008 रजत कलशों से किया महामस्तकाभिषेक</strong></p>
<p>भगवान मुनिसुव्रतनाथ का पूजन व धार्मिक क्रियाएं आर्यिका ससंघ, पंडित कपिल भैया तथा पंडित निकेत शास्त्री के निर्देशन में हुई। रिद्धि-सिद्धि मंत्रों से 1008 रजत कलशों से महामस्तकाभिषेक हुआ। जिसमें प्रथम कलश का सौभाग्य टीकमचंद, विपिनकुमार, जितेंद्रकुमार, सानिध्य परिवार और शांतिधारा का पुण्यार्जन महावीरप्रसाद पदमचंद अक्षत बीजवाड़ परिवार ने प्राप्त किया। भगवान महावीर और आचार्य श्री का चित्र अनावरण और दीप प्रज्जवलन उपखंड अधिकारी सुभाष हेमानी तथा तहसीलदार बंटी राजपूत ने किया। भाजपा नगर अध्यक्ष रितेश जैन मौजूद रहे। समाज के गणमान्यों ने अतिथियों का स्वागत सम्मान किया। इस अवसर पर उपखंड अधिकारी तथा तहसीलदार ने माताजी का आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि आर्यिका माताजी की प्रेरणा से जहाजपुर में एक ऐसा जहाज मंदिर बनाया है। जो विश्व प्रसिद्ध हो गया है। उन्होंने महिलाओं से कहा कि आज की महिला सर्वशक्तिमान हैं। जैन धर्म की प्रासंगिकता तथा जन-जन को जिन धर्म का महत्व बताया। माताजी के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य टीकमचंद मोनू कुमार रामथला परिवार ने किया।</p>
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		<title>गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी का प्रवचन शिवम वाटिका, केकड़ी में आयोजित : भक्ति से ही जीवन में मिलती है शांति और कल्याण – स्वस्तिभूषण माताजी </title>
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		<pubDate>Fri, 18 Apr 2025 14:36:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ श्री नेमिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के समीप शिवम वाटिका में आयोजित धर्मसभा में गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में कहा कि &#8220;बीमारी में दवा का, गर्मी में ठंडी हवा का और धर्म में भक्ति का बड़ा महत्व है।&#8221; मीरा की श्रीकृष्ण भक्ति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि निष्काम भक्ति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> श्री नेमिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के समीप शिवम वाटिका में आयोजित धर्मसभा में गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में कहा कि &#8220;बीमारी में दवा का, गर्मी में ठंडी हवा का और धर्म में भक्ति का बड़ा महत्व है।&#8221; मीरा की श्रीकृष्ण भक्ति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि निष्काम भक्ति से विष भी अमृत बन जाता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अभिषेक जैन लुहाड़िया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>केकड़ी।</strong> श्री नेमिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर के समीप शिवम वाटिका में आयोजित धर्मसभा में गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में कहा कि &#8220;बीमारी में दवा का, गर्मी में ठंडी हवा का और धर्म में भक्ति का बड़ा महत्व है।&#8221; मीरा की श्रीकृष्ण भक्ति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि निष्काम भक्ति से विष भी अमृत बन जाता है। उन्होंने बताया कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे चार कषायों एवं पांच पापों पर विजय पाने का एकमात्र उपाय भक्ति और उपासना है। देवपूजा व स्वाध्याय भक्ति के आवश्यक अंग हैं।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-79340" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0015-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1444" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0015-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0015-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0015-1024x578.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0015-768x433.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0015-1536x866.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0015-2048x1155.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0015-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0015-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0015-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0015-990x558.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250418-WA0015-1320x744.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />प्रवचन को जीवन में उतारना आवश्यक</strong></p>
<p>माताजी ने कहा कि केवल साधु-संतों के प्रवचन सुनने या आशीर्वाद लेने से सुख-शांति प्राप्त नहीं होती, बल्कि उनके विचारों को जीवन में अपनाने और उनके बताए मार्ग पर चलने से ही सच्चा कल्याण संभव है।</p>
<p><strong>सार्थक उदाहरण द्वारा शिक्षा</strong></p>
<p>माताजी ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक नासमझ कुत्ता यज्ञशाला में घुस जाता है, तो उसे लोग मारते हैं। परंतु किसी समझदार व्यक्ति द्वारा उसे &#8216;णमोकार मंत्र&#8217; सुनाने से वह कुत्ता भी उत्तम भव को प्राप्त करता है। यह बताता है कि सही भावना और संस्कार किसी भी आत्मा को उन्नति की ओर ले जा सकते हैं।</p>
<p><strong>धार्मिक आयोजन एवं सम्मान समारोह</strong></p>
<p>प्रातःकाल आर्यिका ससंघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा, जिनेन्द्र अर्चना एवं अन्य धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न हुईं। शांतिधारा का सौभाग्य दिनेश कुमार प्रकाश चंद नासिरदा एवं ओमप्रकाश गोविंद कुमार राजकुमार सदारा परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>कार्यक्रम में भगवान महावीर व आचार्यों के चित्रों का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन पत्रकारगणों द्वारा किया गया। माताजी ने पत्रकारों को आशीर्वाद प्रदान किया, वहीं समाज के वरिष्ठ जनों द्वारा उनका स्वागत एवं शास्त्र भेंट अरिहंत ग्रुप द्वारा की गई।</p>
<p>आर्यिका माताजी का पाद प्रक्षालन टीकमचंद, विपिन कुमार, जितेश एवं रामथला परिवार द्वारा किया गया। मंगलाचरण इंदु मित्तल, सुनीता पाटनी एवं विद्या जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया।</p>
<p><strong>आगामी कार्यक्रम की जानकारी</strong></p>
<p>समाज के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन (ज्वैलर्स) एवं मंत्री कैलाशचंद जैन (मावा वालों) ने बताया कि आगामी कार्यक्रम के अंतर्गत मंदिर में मुनिसुव्रतनाथ भगवान की लाइव शांतिधारा आर्यिका माताजी के मुखारविंद से सम्पन्न होगी, जिसका सीधा प्रसारण भी किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन कपिल शास्त्री ने किया।</p>
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		<title>जैन मित्र मंडल का होली मिलन समारोह 16 को: समाज के श्रावक श्रेष्ठियों का होगा सम्मान </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 13:02:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र टिकटोली में 16 मार्च को होली मिलन समारोह होगा। इसके लिए जैन मित्र मंडल ने अतिथियों को आमंत्रण भेजा है। इसमें समाजजनों का सम्मान भी किया जाएगा। पढ़िए मुरैना से मनोज जैन नायक की खबर&#8230; मुरैना। जैन समाज की सेवाभावी संस्था जैन मित्र मंडल की ओर से जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र टिकटोली में 16 मार्च को होली मिलन समारोह होगा। इसके लिए जैन मित्र मंडल ने अतिथियों को आमंत्रण भेजा है। इसमें समाजजनों का सम्मान भी किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मुरैना से मनोज जैन नायक की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन समाज की सेवाभावी संस्था जैन मित्र मंडल की ओर से जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र टिकटोली में 16 मार्च को विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों के साथ होली मिलन समारोह रखा जा रहा है। जैन मित्र मंडल के मुख्य संयोजक सतेंद्र जैन (खनेता वाले) ने बताया कि श्रद्धा, निष्ठा और समर्पण की भावना के साथ सामाजिक एकता, सद्भावना, वात्सल्य और हर्षाेल्लास का प्रतीक रंगों का पर्व होली विशेष आयोजन के साथ मनाया जाएगा। जैन मित्र मंडल ने इसको भव्यता प्रदान करने के लिए निर्मल जैन भंडारी (अंबाह वाले) को संयोजक मनोनीत किया है। कार्यक्रम में श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर के नवनियुक्त अध्यक्ष योगेश जैन खतौली वाले दिल्ली, जैन समाज मुरार के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दिनेश जैन नायक ऐसाह वाले मुरार, जैसवाल जैन धर्मशाला सोनागिर के अध्यक्ष प्रतिष्ठाचार्य अजीत जैन शास्त्री सहित अन्य श्रावक श्रेष्ठियों का सम्मान किया जाएगा।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-76382" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250310-WA0037.jpg" alt="" width="1260" height="508" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250310-WA0037.jpg 1260w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250310-WA0037-300x121.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250310-WA0037-1024x413.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250310-WA0037-768x310.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/03/IMG-20250310-WA0037-990x399.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1260px) 100vw, 1260px" />इन अतिथियों को किया आमंत्रित </strong></p>
<p>समारोह में ग्वालियर के संयुक्त कलेक्टर संजीव जैन, डिप्टी कलेक्टर वंदना जैन, सीएसपी रोबिन जैन, कैट अध्यक्ष भूपेंद्र जैन, अंबाह समाज अध्यक्ष जिनेश जैन, टिकटोली के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी, मंत्री ओमप्रकाश जैन, अतिशय मित्र मंडल जौरा सहित अनेक श्रावक श्रेष्ठियों को आमंत्रित किया गया है।</p>
<p><strong>जलाभिषेक अष्टद्रव्य पूजन होगा</strong></p>
<p>होली मिलन समारोह में 16 मार्च को प्रथम सत्र में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन त्रिमूर्ति परमोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र टिकटोली दूमदार (जौरा) में जैन मित्र मंडल के सदस्यों की ओर से प्रातःकालीन बेला में भगवान शांतिनाथ स्वामी का जलाभिषेक, शांतिधारा एवं अष्टद्रव्य से पूजन किया जाएगा। श्री जिनेंद्र प्रभु की आराधना के बाद भक्ति नृत्य सहित दीपकों से आरती की जाएगी।</p>
<p><strong>शिखर जी यात्रा के बारे में विचार होगा</strong></p>
<p>द्वितीय सत्र में दोपहर में श्रावक श्रेष्ठियों का सम्मान किया जाएगा। सभा के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी। कार्यक्रम में एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली मिलन होगा। आवास, स्वल्पाहार एवं भोजनादि की व्यवस्था रहेगी। समारोह में श्री सम्मेद शिखर जी यात्रा के बारे में विचार-विमर्श हो सकता है। जैन मित्र मंडल मुरैना द्वारा वर्ष 2025 में आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी की प्रेरणा एवं निर्देशन में 1008 श्रावकों को श्री सम्मेद शिखर जी की यात्रा कराना प्रस्तावित है। इसकी रूपरेखा भी बन सकती है।</p>
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		<title>सोनागिर पर्वत पर गूंजे चन्द्रप्रभु के जयकारे : आर्यिका स्वस्तिभूषण ससंघ का सोनागिर में भव्य प्रवेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 14 May 2023 11:55:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणिनी आर्यिका श्री लक्ष्मीभूषण माताजी एवं विदुषी लेखिका, स्वस्तिधाम प्रणेत्री गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ का 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 14 मई को प्रातः कालीनबेला में श्री सोनागिर सिद्धक्षेत्र में तीर्थलवन्दना हेतु भव्य मंगल प्रवेश हुआ। पढ़िए मनोज नायक की यह विशेष रिपोर्ट&#8230; सोनागिर। जैन साध्वी गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणिनी आर्यिका श्री लक्ष्मीभूषण माताजी एवं विदुषी लेखिका, स्वस्तिधाम प्रणेत्री गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ का 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 14 मई को प्रातः कालीनबेला में श्री सोनागिर सिद्धक्षेत्र में तीर्थलवन्दना हेतु भव्य मंगल प्रवेश हुआ। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>सोनागिर।</strong> जैन साध्वी गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ का 14 मई को श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। परम पूज्य गुरुदेव पंचम पट्टाचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर जी महाराज की परम प्रभावक शिष्या गणिनी आर्यिका श्री लक्ष्मीभूषण माताजी एवं विदुषी लेखिका, स्वस्तिधाम प्रणेत्री गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ का 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 14 मई को प्रातः कालीनबेला में श्री सोनागिर सिद्धक्षेत्र में तीर्थलवन्दना हेतु भव्य मंगल प्रवेश हुआ। श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर कमेटी के अध्यक्ष योगेश जैन (खतौली वाले) दिल्ली, मंत्री बालचन्द जैन ग्वालियर ने अपनी पूरी टीम के साथ क्षेत्र की सीमा पर पहुंचकर पूज्य आर्यिका संघ की अगवानी की। पूज्य आर्यिका संघ को बैंडबाजों, ढोल-ताशों के साथ शोभायात्रा के रूप में भव्य प्रवेश कराया गया। सोनागिर जी में विराजमान क्षुल्लिका पूजाभूषण एवं क्षुल्लिका भक्तिभूषण माताजी ने पूज्य आर्यिका संघ की अगवानी की। विशाल जनसमुदाय के साथ ही पूज्य आर्यिका संघ ने तीर्थराज सोनागिर पर्वत की वन्दना की।</p>
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<p><strong>प्रदान किया शुभाशीष</strong></p>
<p>पर्वत पर भगवान श्री चन्द्रप्रभु के अभिषेक, शांतिधारा, पूजन के पश्चात गणिनी आर्यिका गुरुमां श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने अपनी अमृतमयी वाणी में सभी को शुभाशीष प्रदान किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार सोनागिर में श्री सहस्त्र कूट जिनालय की स्थापना की जाएगी। जिसका शिलान्यास एक जून को होना प्रस्तावित है। अम्बाह नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष जिनेश जैन अम्बाह एवं भागचंद सुनीलकुमार भण्डारी मुरेना ने नवनिर्माणाधीन सहस्त्र कूट जिनालय में एक-एक प्रतिमा स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की।</p>
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<p><strong>श्रीफल भेंट किया</strong></p>
<p>श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर कमेटी, स्याद्वाद शिक्षण परिषद, लंबेचू धर्मशाला कमेटी, बीसपंथी धर्मशाला कमेटी सहित सभी संस्थाओं ने पूज्य आर्यिका संघ के पाद प्रक्षालन करते हुए आरती उतार कर अगवानी की। पूज्य माताजी के मंगल प्रवेश के समय अपार जनसमुदाय मौजूद था। गुरुमां के भक्त महेंद्र जैन (दुहिया वाले) मुरार ने बताया कि पूज्य आर्यिका संघ को श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर कमेटी, जैन समाज एवं जैन मिलन डबरा, जैन युवा सेवा मंडल मुरार, ज्ञानतीर्थ परिवार, सकल जैन समाज मुरैना, जैन समाज अम्बाह ने चातुर्मास हेतु श्रीफल अर्पित किया।</p>
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<p><strong>ये रहे मौजूद</strong></p>
<p>मंगल प्रवेश के समय मुरार, लश्कर, ग्वालियर, मुरैना, डबरा, अंबाह, दिल्ली, करेरा सहित सैकड़ों की संख्या में विभिन्न शहरों से आये हुये गुरुमां के भक्तों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर योगेश जैन (खतौली वाले) दिल्ली, बालचंद जैन ग्वालियर, राजेंद्र जैन एडवोकेट, मूलचंद जैन ठेकेदार, जिनेश जैन अम्बाह, आनन्द जैन (खेकड़ा वाले) दिल्ली, योगेश जैन (खोआ वाले), महेन्द्र जैन, सौरभ जैन (बड़ा गांव), भानु प्रकाश जैन नेताजी, दिनेश चंद जैन (ऐसा वाले), श्री दिगंबर जैन पंचायती कमेटी मुरार के सभी सदस्य गण, ज्ञानतीर्थ परिवार एवं मुरैना से ब्र.बहिन अनीता दीदी, ललिता दीदी, भागचंद भण्डारी, महेशचंद बंगाली, धर्मेंद्र जैन एड., राजकुमार जैन, पदमचंद जैन, महेश जैन, सुनील जैन, शैंकी जैन, सुनीत जैन, डबरा से क्षेत्रीय संयोजक मनोज जैन एकांत, क्षेत्रीय शाखा संयोजक संजय जैन (मगरोनी वाले), रितेश जैन, राजू जैन, प्रेमचंद जैन, अमित जैन, कपूरचंद जैन, नवीन कुमार जैन एवं डबरा महिला मंडल सहित सैकड़ों की संख्या में सभी शैलियों के सधर्मी बन्धु मौजूद थे। इस अवसर पर श्री गोपाल दिगम्बर जैन संस्कृत विद्यालय मुरेना के सभी छात्रों ने मंगल प्रवेश में अपनी अहम भूमिका निभाई।</p>
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