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	<title>आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी संघ का सिद्ध क्षेत्र बावनगजा में प्रवेश : सिद्ध चक्र विधान मंत्रोच्चार पूर्वक किए </title>
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		<pubDate>Sun, 11 Jan 2026 05:18:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका श्री विश्वयश मति जी और आर्यिका श्री विमल मति का प्रथम बार मप्र के सिद्धक्षेत्र नेमावर,सिद्धवरकूट, पावागिरी ऊन के दर्शन अर्चना कर 31 वर्ष के संयमी जीवन में बड़वानी नगर में प्रवेश कर आहार के बाद दोपहर को श्री बावनगजा के लिए मंगल विहार हुआ। बड़वानी से पढ़िए, राजेश [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका श्री विश्वयश मति जी और आर्यिका श्री विमल मति का प्रथम बार मप्र के सिद्धक्षेत्र नेमावर,सिद्धवरकूट, पावागिरी ऊन के दर्शन अर्चना कर 31 वर्ष के संयमी जीवन में बड़वानी नगर में प्रवेश कर आहार के बाद दोपहर को श्री बावनगजा के लिए मंगल विहार हुआ। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> बड़वानी (बावनगजा)।</strong> आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका श्री विश्वयश मति जी और आर्यिका श्री विमल मति का प्रथम बार मप्र के सिद्धक्षेत्र नेमावर,सिद्धवरकूट, पावागिरी ऊन के दर्शन अर्चना कर 31 वर्ष के संयमी जीवन में बड़वानी नगर में प्रवेश कर आहार के बाद दोपहर को श्री बावनगजा के लिए मंगल विहार हुआ। 4 किमी के बाद श्री पार्श्व गिरी के दर्शन कर शुक्रवार को शाम बावनगजा में प्रवेश हुआ। आर्यिका संघ ने 84 फिट के श्री आदिनाथ भगवान के दर्शन कर पहाड़ चढ़कर चुलगिरी पर इंद्रजीत और कुंभकरण और 5-5 करोड़ मुनिराजो की सिद्ध निर्वाण भूमि के दर्शन किए। शनिवार को आहार के बाद एक दिवसीय सिद्ध चक्र विधान मंत्रोच्चार पूर्वक किए। देहली की शालू मनीष जैन विधान के पुण्यार्जक रहे। विधान में आचार्य श्री विप्रणत सागर जी, आर्यिका श्री सृष्टि भूषण, श्री विश्वयश मति और आर्यिका श्री विमल मति का सानिध्य रहा। 11 जनवरी को प्रातः पाटी (खेतिया) तीर्थंकर लेनी के दर्शन के लिए मंगल विहार होगा। इस अवसर पर धामनोद जैन समाज से दीपक प्रधान, अजय जैन, राकेश जैन, भोपाल से राजकुमार जैन ने विधान का पुण्य लाभ लिया।</p>
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		<title>आर्यिका माताजी के अमृत वचनों से कृतार्थ हुए श्रद्धालु: साध्वी संघ का मंगल प्रवेश, अगवानी में अग्रणी रहे समाजजन  </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Dec 2025 13:24:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संयम की राह पर अग्रसर 18 त्यागियों की नगरी में निरंतर पद विहार कर रहे साधु-संतों का आना जारी है। इसी क्रम में आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका 105 श्री विश्वयशमति जी एवं आर्यिका श्री विमलमति जी का मंगल प्रवेश सोमवार शाम को श्री सिद्धांचल पोदनपुरम की ओर से हुआ। सनावद से पढ़िए, सन्मति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संयम की राह पर अग्रसर 18 त्यागियों की नगरी में निरंतर पद विहार कर रहे साधु-संतों का आना जारी है। इसी क्रम में आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका 105 श्री विश्वयशमति जी एवं आर्यिका श्री विमलमति जी का मंगल प्रवेश सोमवार शाम को श्री सिद्धांचल पोदनपुरम की ओर से हुआ। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> संयम की राह पर अग्रसर 18 त्यागियों की नगरी में निरंतर पद विहार कर रहे साधु-संतों का आना जारी है। इसी क्रम में आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आर्यिका 105 श्री विश्वयशमति जी एवं आर्यिका श्री विमलमति जी का मंगल प्रवेश सोमवार शाम को श्री सिद्धांचल पोदनपुरम की ओर से हुआ। आर्यिका संघ नवकार तीर्थ में होने वाले भव्य पंचकल्याणक में अपना सानिध्य प्रदान करने वाली हैं। आर्यिका संघ ने मंगलवार को सुबह नगर के सभी जैन मंदिरों के दर्शन किए एवं मंदिरों के इतिहास को जाना। प्रातःकालीन मंगल बेला की प्रवचन माला में संगीता पाटोदी द्वारा मंगलाचरण कर सभा का शुभारंभ किया गया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित आर्यिका श्री विश्वयशमति जी ने अपनी देशना में कहा कि आज का दिन हमारे लिए बहुत ही अविस्मरणीय क्षणों को संजोने वाला है क्योंकि, आज सौभाग्य प्राप्त हुआ गुरु के जन्म नगरी की धूल मस्तक लगाने का। ये वो धरा है जहां से एक दो नहीं बल्कि 18 संत इस मार्ग पर निकले। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के हस्त करकमलों द्वारा हमें आर्यिका दीक्षा लेने का सौभाग्य मिला। सनावद नगरी का परिचय किसी व्यापार से नहीं या भूगोल की दृष्टि से नहीं है बल्कि इस धरती का परिचय त्याग की दृष्टि से होता है।</p>
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<p><strong>सब जी रहे हैं दूसरों के लिए</strong></p>
<p>इसी क्रम में आर्यिका श्री श्रृष्टि भूषण माताजी ने कहा कि इस नगर को गौरवान्वित करने वालेआचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के साथ हमें महावीरजी तीर्थ क्षेत्र राजस्थान में चातुर्मास करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आचार्य श्री का वात्सल्य पाकर हम तो धन्य हो गए। आप सब सौभाग्यशाली हैं कि आप ने इस धरती पर जन्म लिया है। अपने लिए कौन जी रहा है। अपने लिए कोई नहीं जी रहा है, सब जी रहे हैं दूसरों के लिए क्योंकि, इन पांचों इंद्रिय को सही उपयोग करोगे तो एक इंद्रिय बन जाओगे। सिर्फ बाहर का त्याग नहीं अंदर के राग का ेभी समाप्त करना तुम्हारा जीवन त्याग मय हो जाएगा। कभी ये मत सोचना कि हम घर में रहो, लेकिन दिल से दर पर रहो तो तर जाओगे।</p>
<p><strong>नगर के आचार्य सूर्य के समान आज पूरे विश्व में चमक रहे </strong></p>
<p>मुनि श्री निराकुल सागर जी महाराज ने कहा की सनावद का अर्थ है। सनआवाद सन याने सूरज और हमारे आचार्य जो है वो सूर्य के समान होते हैं। आज नगर के आचार्य सूर्य के समान आज पूरे विश्व में चमक रहे हैं। मुनि श्री ने बताया कि मोक्ष मार्ग कैसे पाएंगे  तो आप को कुछ नहीं करना है जहा से जोड़े हो वहा से मोड़ ले लो रास्ते पर आ जाओगे। जो चीज इंद्रिय विषय में हो चाहे जो भी हो आप कर्म करे फल अवश्य मिलेगा।</p>
<p><strong>सम्यक दर्शन के बिना जैनत्व प्राप्त ही नहीं होता</strong></p>
<p>मुनि श्री अक्षय सागर महामुनिराज ने अपनी देशना में कहा कि हमें यह नहीं पता की जैनत्व कब आता है? सम्यक दर्शन के बिना जैनत्व प्राप्त ही नहीं होता और सम्यक दर्शन कब होता है, जब वीतराग पर विश्वास से ही जैनत्व प्राप्त होता है। देव का निर्मय हुए बिना धर्म का निर्मय नहीं होता। जिनशासन की प्रभावना में प्रत्येक पात्र को बनाने की कला प्रत्येक के पास रहती है और कौन से जीव कौन से सूत्र द्वारा ऊपर उठेगा। कह नहीं सकते यही लक्ष्य बना के जैन आचार्यों ने हम लोगों के लिए जो धर्मादेश बताया है। इसी देशना की देशना लब्धी द्वारा पतित से पतित आत्मा भी पावन बनने की पूरी संभावना बन जाती है। आज की इस मंगल बेला में मुनि श्री आर्यिका माताजी को आहार करवाने का सौभाग्य मंजुला हेमचंद भूच परिवार, सुनीता भूपेंद्र लश्करे परिवार एवं अविनाश कुमार पारस कुमार वाचनालय परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
<p><strong>आर्यिका संघ हुआ मंगल विहार </strong></p>
<p>नगर में विराजमान आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी संसंघ का मंगल विहार बेड़िया की ओर हुआ। आप ने मार्ग में सर्वार्थ सिद्धि द्वार एवं मुनि श्री चा सागर जी महाराज की छतरी का अवलोकन भी किया। ज्ञात है कि आर्यिका माता जी भोपाल में चर्तुमास संपन्न कर नवकार तीर्थ नाशिक महाराष्ट्र की ओर निरंतर अग्रसर है। इस अवसर पर मुकेश जैन, राजेश पंचोलिया, राजीव जैन,,हर्षित जैन, पुलकित जैन, नीरव जैन, प्रशांत चौधरी, अचिंत्य जैन, सहित अनेक समाजजन विहार में सहयोगी बने।</p>
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		<title>सनावद में आर्यिका संघ का हुआ मंगल प्रवेश: आर्यिका संघ की मंगल अगवानी सभी समाजजनों ने ट्रेंगल चौराहे पर की अगवानी  </title>
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					<description><![CDATA[त्याग संयम एवं अठारह त्यागियों की जन्म नगरी सनावद में आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। आर्यिका संघ की मंगल अगवानी सभी समाजजनों ने ट्रेंगल चौराहे पर पहुंच कर की। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; सनावद। त्याग संयम एवं अठारह त्यागियों की जन्म नगरी सनावद में आर्यिका [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>त्याग संयम एवं अठारह त्यागियों की जन्म नगरी सनावद में आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। आर्यिका संघ की मंगल अगवानी सभी समाजजनों ने ट्रेंगल चौराहे पर पहुंच कर की। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> त्याग संयम एवं अठारह त्यागियों की जन्म नगरी सनावद में आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित आर्यिका श्री विश्वयशमति जी और आर्यिका श्री विमलमति जी का मंगल विहार भोपाल में वर्ष 2025 का वर्षायोग संपन्न कर सिद्धक्षेत्र नेमावर के दर्शन कर आप सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट की वंदना कर णमोकार तीर्थ नाशिक की ओर हो रहा है। आर्यिका संघ की मंगल अगवानी सभी समाजजनों ने ट्रेंगल चौराहे पर पहुंच कर की। आर्यिका संघ ने नगर के सभी जिन मंदिरों एवं गृह चैत्यालयों के दर्शन कर आप श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पहुंचीं। जहां समाज की गवाक्षीजैन, प्रियंका पंचोलिया, गरिमा पंचोलिया, अंशुमा सराफ, संध्या जैन, मंजुला भूच, साधना जैन ,चंदा पाटनी सहित अनेक महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश रखकर पाद प्रक्षालन कर अगवानी की।</p>
<p><strong>मुनि श्री एवं आर्यिका माताजी की आध्यात्मिक चर्चा हुई</strong></p>
<p>नगर में पूर्व से विराजमान मुनि श्री अक्षय सागरजी, मुनि श्री निराकुल सागरजी के आर्यिका संघ ने दर्शन किए एवं मुनि श्री एवं आर्यिका माताजी की आध्यात्मिक चर्चा हुई। शाम की मंगल बेला में आर्यिका माताजी द्वारा आचार्यश्री शांतिसागर वर्धमान देशना निलय में सामयिक, गुरु भक्ति, आचार्य वंदना, प्रश्न मंच व मंगल उद्धबोधन हुए। इस अवसर पर प्रशांत चौधरी, राजेश पंचोलिया, हेमंत काका, संतोष बाकलीवाल, अचिंत्य जैन, देवेंद्र काका, मुकेश जैन, राजू जैन, कमल केके, वारिश जैन, आशीष जैन, मिश्रू जैन, सुनिल मास्टर साब आशीष जैन, कमलेश भूच, गोरू मुंशी, हितांश, नीरव, अभियांशु, नरेंद्र भारती सहित अनेक समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>आर्यिका श्री विश्वयशमति जी और आर्यिका श्री विमलमति जी का विहार जारी: सिद्धवरकूट में होगा सिद्धचक्र मंडल विधान और केशलोचन  </title>
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		<pubDate>Thu, 25 Dec 2025 12:07:36 +0000</pubDate>
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<p><strong>जिनधर्म प्रभाविका 61 वर्षीय गणनी आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी का मंगल विहार भोपाल में वर्ष 2025 का संयमी जीवन का 31वां वर्षायोग संपन्न कर सिद्ध क्षेत्र की ओर मंगल विहार आर्यिका श्री विश्वयशमति जी और आर्यिका श्री विमलमति जी के साथ चल रहा है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जिनधर्म प्रभाविका 61 वर्षीय गणनी आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी का मंगल विहार भोपाल में वर्ष 2025 का संयमी जीवन का 31वां वर्षायोग संपन्न कर सिद्ध क्षेत्र की ओर मंगल विहार आर्यिका श्री विश्वयशमति जी और आर्यिका श्री विमलमति जी के साथ चल रहा है। सिद्ध क्षेत्र नेमावर के दर्शन के बाद सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट के दर्शन के लिए विहार हो रहा है। पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित आर्यिका श्री विश्वयश मति जी भी संघ सहित हैं। 25 दिसंबर को विहार कर सुलगांव आहार हुआ। गुरुवार को दोपहर विहार के बाद नवकार होटल ओंकारेश्वर रोड पर रात्रि विश्राम होगा। शाम 6 से 8 तक गुरुभक्ति और प्रश्न मंच होता हैं।</p>
<p>दीक्षा गुरु सहित 19 साधुओं की जन्म कर्म भूमि से मात्र 2 किमी की दूरी पर हैं। शुक्रवार को डॉ डागोर के फार्म हाउस कोठी में आर्यिका संघ की आहार चर्या होगी। इसी दिन विहार कर रात्रि विश्राम सिद्ध क्षेत्र सिद्धवरकूट में होगा। शनिवार को एक दिवसीय सिद्ध चक्र मंडल विधान होगा। आर्यिका श्री विश्वयश मति जी के केशलोचन भी इसी दिन को होंगे। रविवार को सिद्धवरकूट से आहार के बाद माताजी संघ का विहार होगा।</p>
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		<title>पाप के परित्याग से ही जीवन का उत्थान संभव है : मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने युवाओं को पाप मनोवृत्ति त्यागने का दिया संदेश  </title>
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		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 13:31:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आज का युवा शराब पीना नशा करने को पाप ही नहीं मानता। वह उसे आजकल का कल्चर समझता है, युवाओं में ऐसी मनोवृत्ति ही उनके जीवन का सत्यानाश कर रही है। यह उद्बोधन मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ने धर्मसभा में दिया। भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230; भोपाल। भोपाल के अवधपुरी में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आज का युवा शराब पीना नशा करने को पाप ही नहीं मानता। वह उसे आजकल का कल्चर समझता है, युवाओं में ऐसी मनोवृत्ति ही उनके जीवन का सत्यानाश कर रही है। यह उद्बोधन मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ने धर्मसभा में दिया। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> भोपाल के अवधपुरी में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनिश्री संधान सागर महाराज का चातुर्मास चल रहा है। आधे से अधिक चातुर्मास का समय व्यतीत हो चुका है। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि क्षमावाणी पर्व मनाने आईं आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी संघ सहित अवधपुरी के विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में विराजमान हैं। मुनि श्री ने प्रातःकालीन प्रवचन सभा में गृहस्थों के 12 अणुव्रतों को बहुत ही सरल तरीकों से समझाते हुए कहा कि कोई भी छोटे से छोटा व्रत हो। वह भी आपके जीवन में परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि आचार्य समंतभद्र स्वामी ने पाप के त्याग में किसी त्यागी व्रती का उदाहरण नहीं दिया बल्कि उस हिंसा करने वाले यमपाल चांडाल और मांसभक्षी भील को याद किया है।</p>
<p>जिन्होंने मुनिराज के कहने से पूरे पापों का त्याग नहीं किया सिर्फ एक पाप का ही त्याग किया लेकिन, दृढ़ता से उसका पालन किया और तर गये। यमपाल चांडाल ने मात्र चतुर्दशी के दिन किसी को फांसी पर न चढ़ाने का प्रण लिया था। वही खादिरशाल भील ने सिर्फ कौवे के मांस का आजीवन त्याग किया था लेकिन, दोनों के जीवन में ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हुई कि उन्होंने मुनिराज को दिये वचन को भंग न कर अपने प्राणों को त्यागना उचित समझा और वह स्वर्ग में देव बने।</p>
<p><strong>पुण्य की भी चार स्थितियां है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि पाप के परित्याग से ही जीवन का उत्थान होता है पाप और पुण्य की स्थितियों की बात करते हुए कहा कि पाप करना, पाप बोलना, पाप काटना, पाप त्यागना है तो उसी प्रकार पुण्य की भी चार स्थितियां है। पुण्य करना, पुण्य भोगना, पुण्य चाहना और जीवन को पुण्य बनाना। मुनि श्री ने कहा कि जब तक दृढ़ता पूर्वक पापों का त्याग नहीं करोगे पापों का आगमन निरंतर चलता रहेगा और उन पापों को भोगना ही पड़ेगा। पाप त्यागे विना पाप काटने की प्रक्रिया हाथी स्नान है, जैसे एक हाथी पोखर से बाहर निकलते ही अपनी सूड़ से धूल को अपने ही शरीर पर डाल लेता है।</p>
<p><strong>किसी को बंधन में रखना पाप है</strong></p>
<p>जैन धर्म पाप काटने तक सीमित नहीं जैन धर्म पाप के त्याग को अपना धर्म मानता है। हिंसा झूठ, चोरी, कुशील, परिग्रह यह पांच पाप हैं। इन पांचों पाप को पूर्ण त्याग लो तो अति उत्तम नहीं त्याग सकते तो आप कम से कम संकल्पी हिंसा का त्याग करना ही चाहिये। निर्णय कर लो कि हम जानबूझकर किसी का घात नहीं करेंगे। दूसरा उन्होंने कहा कि बच्चों को पीटो मत पीटने से वह ढीट बनेंगे। जब कि उनको आंख दिखाओगे तो वह आज्ञाकारी और संस्कारी बनेंगे। उन्होंने कहा कि पीटना तो किसी को भी नहीं चाहिये। नौकर चाकर हों या पशु हो। किसी को बंधन में रखना पाप है। उन्होंने पंजाब बाढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि जो पशु बंधन में थे। वह काल कवलित हो गए जो छुट्टा थे वह तैरते हुए अपनी जानबचाकर पाकिस्तान पहुंच गए। इसी प्रकार पशुओं के साथ दुर्भावना पूर्वक किया गया।</p>
<p><strong>पापों के त्याग के प्रति अभिरुचि को जगाना होगा</strong></p>
<p>व्यवहार जैसे अति भारारोपण उनको समय पर चारा पानी नहीं देना यह सभी पाप है। आप लोग तो प्रतिदिन गुरुओं के प्रवचन सुनते हो। पूजा पाठ, दान धर्म तथा उपवास करते फिर भी पाप करने से डर नहीं लगता? इसका मतलब है कि आपको पापों में अनुरक्ति है। धर्म के प्रति सच्ची श्रद्धा और अनुरक्ति नहीं। अपने जीवन को पुण्य मयी बनाना चाहते हो तो पापों के त्याग के प्रति अभिरुचि को जगाना होगा। उन्होंने कहा कि भले ही एक एक कदम चलो लेकिन, त्याग की शुरुआत करो जिससे अधर्म करने से बचो। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ग्रीन सिग्नल पर गाड़ी न बढ़ाओ चलेगा पर रेड सिग्नल पर यदि गाड़ी आगे बढ़ाओगे तो खतरा ही खतरा है। चालान कटेगा ही कटेगा। मुनि श्री ने कहा कि जिन जिन रास्तों पर भगवान ने चलने का निषेध किया। उन रास्तों को दृढ़ता पूर्वक त्यागो। तभी अपने जीवन को पुण्य बना पाओगे।</p>
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		<title>स्वस्थ और सुखी हो सबका जीवन समाजसेविकाओं ने सृष्टि भूषण माता जी का पपौरा जी में दर्शन कर लिया आशीर्वाद </title>
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		<pubDate>Sun, 28 Apr 2024 07:22:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[टीकमगढ़ मे मातृशक्ति संगठन एक गैर राजनीति के साथ गैर अनुदान प्राप्त, सामाजिक संस्था है, जो 12 वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में कार्य कर रही है ,वर्तमान में टीकमगढ़ का एक मात्र वृद्ध आश्रम मातृ पितृ छाया वृद्ध आश्रम को संचालित कर रही है।जिसमें वृद्ध माता-पिता को सभी सुविधा उपलब्ध कराने के साथ संगठन गरीब [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>टीकमगढ़ मे मातृशक्ति संगठन एक गैर राजनीति के साथ गैर अनुदान प्राप्त, सामाजिक संस्था है, जो 12 वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में कार्य कर रही है ,वर्तमान में टीकमगढ़ का एक मात्र वृद्ध आश्रम मातृ पितृ छाया वृद्ध आश्रम को संचालित कर रही है।जिसमें वृद्ध माता-पिता को सभी सुविधा उपलब्ध कराने के साथ संगठन गरीब बच्चों के इलाज, दिव्यांग बच्चों के क्षेत्र में एवं गरीब बेटियों के विवाह, February और गौ संरक्षण के क्षेत्र में भी कार्य कर रही है। <span style="color: #ff0000">पढि़ए पवन घुवारा की रिपोर्ट ……….</span></strong></p>
<hr />
<p>टीकमगढ़ मे मातृशक्ति संगठन एक गैर राजनीति के साथ गैर अनुदान प्राप्त, सामाजिक संस्था है, जो 12 वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में कार्य कर रही है ,वर्तमान में टीकमगढ़ का एक मात्र वृद्ध आश्रम मातृ पितृ छाया वृद्ध आश्रम को संचालित कर रही है।जिसमें वृद्ध माता-पिता को सभी सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश के साथ संगठन गरीब बच्चों के इलाज, दिव्यांग बच्चों के क्षेत्र में एवं गरीब बेटियों के विवाह, पर्यावरण और गौ संरक्षण के क्षेत्र में भी कार्य कर रही है, मातृ पितृ छाया वृद्ध आश्रम को संचालित करने वाली समाजसेविकाओं ने 105 सृष्टि भूषण माता जी के पपौरा जी में श्रद्धा चौहान , मधु मिश्रा,शारदा नायक,किरण शर्मा ,रचनाभाई,सीमा पटेल ,जया बुंदेला , शिवांगी पाठक ,पिंकी बत्रा, रेखा नायक, स्वाति सिंह गौर, संध्या दुबे, सरिता तिवारी, संध्या सोनी ,बर्षा लोहिया ने दर्शन कर आशीर्वाद लिया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59620" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0005-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1440" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0005-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0005-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0005-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0005-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0005-1536x864.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0005-2048x1152.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0005-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0005-1320x743.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0005-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0005-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0005-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240428-WA0005-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />स्वस्थ और सुखी हो सबका जीवन</strong></p>
<p>परम पूजनीय जिनधर्म प्रभाविका आर्यिका105 सृष्टि भूषण माताजी की सरलता, वात्सल्य सभी के प्रति रहती है। चाहे व्यक्ति किसी वर्ग से हो। माताजी ने महानगर दिल्ली समेत सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेद शिखरजी झारखंड, सिद्ध क्षेत्र सोनागिर जी मध्य प्रदेश, अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी राजस्थान में भक्तों के सहयोग से सृष्टि मंगलम फाउंडेशन जैसी संस्थाओं की स्थापना करवाई, जिसके माध्यम से हर वर्ग के लोग लाभान्वित हो सकें। आपके आशीर्वाद से एवं निर्देशन में जगह जगह निशुल्क भोजनालय खुलवाए गए। छात्रवृत्ति शिक्षण शिविर, संस्कार शिविर, पूजन विधान शिविर, वस्त्र वितरण, ट्राई साइकिल बैसाखी ,कानों की मशीन, सिलाई मशीन, कंबल और,निशुल्क दवाइयों के वितरण के साथ साथ असहाय गरीब लड़कियों की शादी करवाना एवं बेरोजगार परिवारों को कार्य दिलवाने के कार्य किए जा रहे हैं ।</p>
<p>असाध्य एवं अर्थ उपेक्षित व्याधियों जिनका उपचार है उनमें कैंसर और थैलेसीमिया जैसी दो बड़ी बीमारियों को ध्यान में रखते हुए आप की प्रेरणा सेआदि सृष्टि कैंसर ट्रस्ट का गठन हुआ। पिछले कई दशकों से कैंसर पीड़ित व्यक्तियों, दिव्यांगजन, अनाथ बच्चों की शिक्षा एवं महिला रोजगार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक महा अभियान चला कर सृष्टि के मानव ग्रह का संताप हरण कर रहीं हैं। कैंसर पीड़ितों एवं गरीबों की सेवा के लिए सृष्टि भूषण माता श्री का योगदान अंतरराष्ट्रीय ख्याति का है। जिनधर्म प्रभाविका आर्यिका 105 श्री सृष्टि भूषण माताजी को मानव कल्याणार्थ किए गए अति विशिष्ट कार्यों के लिए अंतर्राष्ट्रीय समाचार और दृश्य निगम (इन्टरनेशनल न्यूज एवं व्यूज कार्पोरेशन) द्वारा मानव रत्न अलंकरण से सम्मानित किया गया है ।आर्यिका श्री विश्वयश माता जी अपने साथ जुड़े लाखों भक्तों को एक ही सन्देश दिया है,स्वस्थ और सुखी हो सबका जीवन।</p>
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		<title>टीकमगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष ने लिया श्री सृष्टि भूषण माताजी का आशीर्वाद यात्रियों के लिए शुध्द पेयजल की व्यवस्था </title>
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		<pubDate>Fri, 26 Apr 2024 06:39:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[परम पूज्य गणनीआर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी का टीकमगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार मलिक ने अतिशय क्षेत्र पपौरा में दर्शन हेतु शाम को पहुंच कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट … परम पूज्य गणनीआर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी का टीकमगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार मलिक ने अतिशय क्षेत्र पपौरा में दर्शन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>परम पूज्य गणनीआर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी का टीकमगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार मलिक ने अतिशय क्षेत्र पपौरा में दर्शन हेतु शाम को पहुंच कर आशीर्वाद प्राप्त किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट …</span></strong></p>
<hr />
<p>परम पूज्य गणनीआर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी का टीकमगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार मलिक ने अतिशय क्षेत्र पपौरा में दर्शन हेतु शाम को पहुंच कर आशीर्वाद प्राप्त किया। गणनी परम पूज्य 105 आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी एवम् आर्यिका श्री विश्वयश मति जी का प्रथम बार बुंदेलखंड के सिद्ध क्षेत्र के लिए प्रभावना पूर्वक बिहार में चल रहा है ।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-59559" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240426-WA0033.jpg" alt="" width="1280" height="962" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240426-WA0033.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240426-WA0033-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240426-WA0033-1024x770.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240426-WA0033-768x577.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240426-WA0033-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240426-WA0033-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240426-WA0033-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240426-WA0033-990x744.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />राष्ट्रीय विमर्श जागृति महिला मंच (रजि.)शाखा टीकमगढ़ म.प्र.द्धारा अतिशय क्षेत्र पपौरा मे 25अप्रेल को पक्षियों के दाना, पानी एवं आने वाले यात्रियों के लिए शुध्द पेयजल की व्यवस्था सहित वृहद आयोजन में नगरपालिका अध्यक्ष अब्दुल गफ्फार पप्पू मलिक,पवनघुवारा भूमिपुत्र मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी का आगमन टीकमगढ़ मे 30 वर्ष के संयमी जीवन में किया 25000 से अधिक किलोमीटर का विहार </title>
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		<pubDate>Sun, 21 Apr 2024 17:05:23 +0000</pubDate>
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<p><strong>परम पूज्य 105 आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी एवम् आर्यिका श्री विश्वयश मति जी का प्रथम बार बुंदेलखंड के सिद्ध क्षेत्र के लिए प्रभावना पूर्वक बिहार चल रहा है । वर्ष 2023 मुरादाबाद में चातुर्मास कर बुंदेलखंड यात्रा के लिए कुंडलपुर सिद्ध क्षेत्र से दर्शन पश्चात बेला, दमोह ,पथरिया सिद्धक्षेत्र ,नैनागिर, शाहगढ़ ,बड़ा मलहरा, द्रोण गिरी होते हुए माताजी ने सिद्ध क्षेत्र टीकमगढ़ मे आगमन किया ।<span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट ……….</span></strong></p>
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<p>गणनी परम पूज्य 105 आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी एवम् आर्यिका श्री विश्वयश मति जी का प्रथम बार बुंदेलखंड के सिद्ध क्षेत्र के लिए प्रभावना पूर्वक बिहार चल रहा है । वर्ष 2023 मुरादाबाद में चातुर्मास कर बुंदेलखंड यात्रा के लिए कुंडलपुर सिद्ध क्षेत्र से दर्शन पश्चात बेला, दमोह ,पथरिया सिद्धक्षेत्र ,नैनागिर, शाहगढ़ ,बड़ा मलहरा, द्रोण गिरी होते हुए माताजी ने सिद्ध क्षेत्र टीकमगढ़ मे आगमन किया ।23 मार्च 1964 को जन्मी सुलोचना दीदी ने सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेद शिखर जी में आचार्य श्री सुमति सागर जी और विद्या भूषण आचार्य श्री सम्मति सागर जी से 26 मार्च 1994 को आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका श्री सृष्टि भूषण जी नामकरण हुआ। 30 वर्ष के संयमी जीवन में 10 से अधिक राज्यों मे भ्रमण कर धर्म की प्रभावना की। सृष्टि संस्था के माध्यम से कैंसर मरीजों तथा अन्य बीमारियों के इलाज कराए जाते हैं।30 वर्ष के संयमी जीवन में 25000 से अधिक किलोमीटर का विहार किया है 29 सितंबर 2019 को विश्व प्रसिद्ध संस्था ने मानव रत्न अलंकरण से दिल्ली में विभूषित किया।</p>
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		<title>साधना और मंगल भावना की संपूर्णता का नाम है पूज्य आर्यिका 105 श्री सृष्टि भूषण माताजी    आर्यिका105 सृष्टि भूषण माताजी अवतरण दिवस 23 मार्च पर विशेष आलेख     </title>
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		<pubDate>Fri, 22 Mar 2024 12:10:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आध्यात्म की सरिता स्वरूपा, आत्महित एवं परहित में संलग्न पूज्य माता श्री आर्यिका 105 श्री सृष्टि भूषण माताजी जी, साधना और मंगल भावना की संपूर्णता का नाम है। सृष्टि का अलंकरण करती पूज्य माता जी सृष्टि के दुखों को भी हरती है। परम पूजनीय जैनधर्म प्रभाविका आर्यिका 105 सृष्टि भूषण माताजी संयम वर्ष वद्र्धन दिवस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आध्यात्म की सरिता स्वरूपा, आत्महित एवं परहित में संलग्न पूज्य माता श्री आर्यिका 105 श्री सृष्टि भूषण माताजी जी, साधना और मंगल भावना की संपूर्णता का नाम है। सृष्टि का अलंकरण करती पूज्य माता जी सृष्टि के दुखों को भी हरती है। परम पूजनीय जैनधर्म प्रभाविका आर्यिका 105 सृष्टि भूषण माताजी संयम वर्ष वद्र्धन दिवस 26 मार्च एवं अवतरण दिवस 23 मार्च पर<span style="color: #ff0000"> संघस्थ बाल ब्रह्मचारिणी आर्यिका श्री विश्वयशमति जी का विशेष आलेख पढि़ए</span>&#8211;      </strong></p>
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<p>साधना और मंगल भावना की संपूर्णता का नाम है 60 वर्षीय पूज्य आर्यिका 105 श्री सृष्टि भूषण माताजी, पूज्य माता जी ने भारतवर्ष के मध्य प्रदेश प्रांत की रत्नमय मुंगावली की धरा पर 23 मार्च सन 1964 चैत्र शुक्ला नवमी को श्रद्धेय पिताश्री कपूर चंद एवं माता श्री पदमा देवी की बगिया में जन्म लिया। मानवता के दिव्य आलोक से परिपूर्ण संयम की मंगल मनीषा सुलोचना यह परिवार की तीसरी संतान थी। इसे विधि का विधान कहे की इनसे पूर्व जन्मे दोनों ही पुत्र अल्प समय में ही इस मनुष्य पर्याय से पलायन कर गए। दोनों संतानों के चले जाने के बाद आपका जन्म हुआ।</p>
<p><strong>ताई को सौंपी परवरिश की जिम्मेदारी </strong></p>
<p>आपके जन्म से पहले ही आपकी मातृश्री को सपनों के माध्यम से आदेशित किया गया यह संतान को अपने पास ना रख कर कहीं और परवरिश कराई जाए अन्यथा संतान भी काल के गाल में विलीन हो जाएगी। बड़ा ही व्याकुल क्षण था मां के लिए, अपने हृदय और भावनाओं पर पत्थर रखकर आपको जन्म के कुछ क्षणों बाद ताई रामप्यारी बाई को सौंप दिया। जो आपके गांव की एक वरिष्ठ महिला थी। उनके पति का देहांत भी उनके विवाह के मात्र 6 महीने बाद ही हो गया था। उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी। उन्होंने आपको हृदय से लगाकर अपनी खुद की संतान से भी ज्यादा प्यार देकर पाला पोसा और संस्कारित किया। आप सभी के आकर्षण का केंद्र थी। पूरे गांव की लाडली सुलोचना पूरे कुटुंब का आकर्षण थी। मेधावी छात्रा को शिक्षकों ने भरपूर स्नेह दिया। वह इन्होंने आत्मीयता से शिक्षा को सम्पन्न किया। चाहे लौकिक शिक्षा हो, हस्त कला हो, संगीत कला हो सभी में पारंगत रही।</p>
<p><strong>दैदीप्यमान ललाट देखकर हुई भविष्यवाणी</strong></p>
<p>जब सुलोचना की 4 वर्ष की थी तो ताई जी आर्यिका श्री सुपाश्र्वमति माताजी के दर्शन के लिए उन्हें लेकर गई, उन्हें देखकर माताजी स्वयं ही बोल पड़ी, अरे इस बालिका को तो संन्यास लेने से कोई नहीं रोक सकता। तब ताई हैरानी से बोली पर ऐसा क्यों? माताजी ने कहा कि जिस दिन यह बच्ची जैन संतों के दर्शन कर लेगी उसी दिन गृह त्याग की भावना बन जाएगी, जो रोकने से नहीं रुकेगी। माताजी ने छोटी सी सुलोचना को छोटे-छोटे कमंडल और मयूर पीछी भी आशीर्वाद में दिए। ताई धार्मिक महिला होते हुए इस बात से चिंतित हुई। जब कोई संत नगर में आते तब उन्होंने सुलोचना का मंदिर जाना बंद कर दिया, पर होता वही है जो भाग्य में लिखा होता है संयोग से सुलोचना को मुंगावली जाना पड़ा जहां भाग्य प्रतीक्षा कर रहा था। सुलोचना के मस्तिष्क पर धर्म का स्वस्तिक रचना के संयोग बने नगर में क्षुल्लक श्री गुण सागर जी वर्तमान समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी आए हुए थे। जिनके सानिध्य में दहेज विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता रखी गई सुलोचना ने भी प्रतियोगिता में भाग लिया और अपनी वाक पटुता से प्रथम स्थान प्राप्त किया। पुरस्कार में मिली कुछ पुस्तकों में एक पुस्तक मिली आटे का मुर्गा। इन पुस्तकों के स्वाध्याय से परिजनों के लाख यत्न करने पर भी सुलोचना को मोक्ष मार्ग चढऩे-बढऩे पर कोई रोक नहीं सका।</p>
<p><strong> धार्मिक शिक्षा में बड़ा लगाव </strong></p>
<p>ललितपुर की प्रखर मेधावी ब्रह्मचारिणी कमलेश जी ब्रह्म सुलोचना के लिए वरदान बनकर मिली। उन्होंने ही ब्रह्म सुलोचना को आगम का अध्ययन कराया और बड़ी बहन जैसी आत्मीयता स्नेह दिया। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री का वात्सल्य प्रसंग है 1993 श्री बाहुबली भगवान के महामस्तकाभिषेक का तब माताजी की दीक्षा नहीं हुई थी। ब्रह्मचारिणी थी। वह भी 93 में मस्तकाभिषेक देखने संघ की अन्य दीदियों के साथ गई थी। उन्होंने पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से संघ के साथ अभिषेक देखने का निवेदन किया। आचार्य श्री ने सहज स्वीकृति देकर अगले दिन दोपहर को सामायिक के बाद का समय दिया। आचार्य श्री संघ समय पर बड़े पहाड़ के गेट तक पहुंच गए। किंतु दीदियों के नहीं पहुंचने पर इंतजार कर बुलाने भेजा और संघ के साथ लेकर चले गए। घटना छोटी है किंतु यह अन्य संघ के प्रति वात्सलय को दर्शाती है कि सचमुच आचार्य श्री का हृदय कितना विशाल एवं करुणामय है।</p>
<p><strong>जीवन की नश्वरता से दीक्षा की ओर </strong></p>
<p>सभी बहनों के साथ गुरु आज्ञा से तीर्थराज सम्मेद शिखर जी की यात्रा करने के लिए पहुंची, वहां एक पर्वत पर एक श्रावक के साथ हृदय विदारक घटना घटी। श्रावक को लुटेरों ने लूटा और गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। उसकी मूर्छित पत्नी और तड़पते बच्चों को देखकर ब्रह्मचारिणी सुलोचना को इस संसार की असारता और नश्वरता को गहराई से भाप गई, तुरंत दीक्षा लेकर आत्म कल्याण को व्याकुल हो गई।</p>
<p><strong> सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेद शिखर जी में हुई आर्यिका दीक्षा </strong></p>
<p>26 मार्च 1994 चैत्र शुक्ला 14 चतुर्दशी को आचार्य श्री सुमति सागर जी महाराज एवं विद्या भूषण आचार्य श्री सम्मति सागर जी से बाल ब्रह्मचारिणी सुलोचना दीदी ने 30 वर्ष की उम्र में सीधे आर्यिका दीक्षा ग्रहण की आचार्य श्री ने नाम प्रदान किया आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी। आप विशिष्ट प्रज्ञा समन्वित एवं रत्यत्रय विभूषित है। माताजी द्वारा समाज सेवा धार्मिक क्षेत्र में देश में अनेक कीर्तिमान बने हैं जो स्वयं में भूतो ना भविष्यति की संख्या लिए हुए हैं। इसमें माताजी द्वारा बद्रीनाथ की यात्रा अतिशय क्षेत्र रानीला में 57 दिवसीय अखंड भक्तामर आराधना, औद्योगिक नगरी गुडग़ांव में पद्म पुराण मानस लीला का मंचन, अतिशय क्षेत्र बड़ा गांव में अखंड 44 दिवसीय आराधना, अतिशय क्षेत्र महावीर जी और मुरादाबाद में विषपाहार स्त्रोत शामिल है। माताजी के निमित्त से धर्म में जोडऩे वालों की संख्या हजारों लाखों से भी ज्यादा है, जहां माताजी के चरण पड़ते हैं वहीं श्रद्धालुओं का हुजूम लग जाता है जब माताजी चल पड़ती तो ऐसा लगता है मानो कोई मेला लगा हुआ है।</p>
<p><strong> मानव कल्याण के लिए पदयात्रा</strong></p>
<p>माता जी के चातुर्मास पाने के लिए समाज में तो होड़ लगी रहती। इतना ही नहीं आपने धर्म की प्रभावना करते हुए लगभग 25000 किलोमीटर की पदयात्रा की है एवं आपने अपने 30 वर्षीय संयमी जीवन में करीब 25000 किलोमीटर की पदयात्रा पूरी की। जिसमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, गुजरात आदि के प्रांतों के नगर एवं महानगर सम्मिलित हैं। आपके द्वारा महानगर दिल्ली समेत सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेद शिखरजी झारखंड, सिद्ध क्षेत्र सोनागिर जी मध्य प्रदेश, अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी राजस्थान में भक्तों के सहयोग से श्री सृष्टि मंगलम फाउंडेशन ऐसी संस्थाओं की स्थापना करवाई। जिसमे त्यागी महाव्रती अणुव्रत धारी के आहार की व्यवस्था की गई । जिसके माध्यम से समाज के हर वर्ग के लोग लाभान्वित हो सके। साथ ही प्यारी आत्माओं जो संयम के मार्गदर्शक हैं। निर्विकल्प अपनी संयम साधना कर सकें। ऐसी व्यवस्था प्रदान की गई भविष्य में भी की जाती रहेंगी। आपके आशीर्वाद से एवं निर्देशन में जगह-जगह निशुल्क भोजनालय खुलवाए गए। छात्रवृत्ति शिक्षण शिविर, संस्कार शिविर, पूजन विधान शिविर, वस्त्र वितरण ट्राई साइकिल बैसाखी कानों की मशीन सिलाई मशीन कंबल निशुल्क दवाइयों के वितरण के साथ-साथ असहाय गरीब लड़कियों की शादी करवाना एवं साथ-साथ बेरोजगार परिवारों को कार्य दिलवाने के कार्य किए जा रहे हैं। कैंसर और थैलेसीमिया जैसी दो बड़ी बीमारियों को ध्यान में रखते हुए आप की प्रेरणा से गठन हुआ श्री आदि सृष्टि कैंसर ट्रस्ट का। अनेक सेमिनार अल्प समय में ही देश के विभिन्न प्रांतों, जिलों, गांव-कस्बों के साथ विदेशों में भी जांच शिविर सेमिनार एवं जागरूकता अभियान शुरू किए गए। शासन प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला। सरकारी योजनाओं के द्वारा लाभान्वित लोगों इलाज कराया गया।</p>
<p><strong>मानव रत्न से अलंकृत</strong></p>
<p>प्रख्यात मानव सेविका एवं जैनधर्म प्रभाविका आर्यिका 105 श्री सृष्टि भूषण माताजी को मानव कल्याणार्थ किए गए अति विशिष्ट कार्यों के लिए इंटरनेशनल न्यूज एंड व्यूज कॉर्पोरेशन द्वारा मानव रत्नअलंकरण से सम्मानित किया गया है। वे एक प्रख्यात जैन संत एवं समाज सेविका हैं, जो पिछले कई दशकों से कैंसर पीडि़त व्यक्तियों, दिव्यांगजन, अनाथ बच्चों की शिक्षा एवं महिला रोजगार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक महा अभियान चला कर सृष्टि के मानव ग्रह भारतीय भू-वसुंधरा का संताप हरण कर रहीं हैं। उनको यह अलंकरण, कैंसर पीडि़त व्यक्तियों की सेवा के लिए चलाए जाए जा रहे आदि सृष्टि कैंसर सेवा ट्रस्ट के संचालन के लिए दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एवं विचार निगम के मानव रत्न अवार्ड सिलेक्शन कमेटी के समन्वयक डॉ डीपी शर्मा जो कि यूनाइटेड नेशंस की संस्था आईएलओ के अंतरराष्ट्रीय परामर्शक एवं भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के राष्ट्रीय ब्रांड एंबेसडर है ने बताया कि यह पुरस्कार सेवा के क्षेत्र में अति विशिष्ट कार्यों के लिए परंपरा से परे भागीरथ प्रयासों के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार उन्हें 29 सितंबर 2019 को दिल्ली के राजवाडा पैलेस में एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया है। डॉक्टर डीपी शर्मा ने आगे कहा की कैंसर पीडि़तों एवं गरीबों की सेवा के लिए सृष्टि भूषण माता श्री का योगदान अंतरराष्ट्रीय ख्याति का है। उन्होंने कहा कि सेवा एवं ममता की प्रतिमूर्ति माता श्री मनुष्य देह में एक देवी स्वरूपा हैं जो दिन-रात अनवरत रूप से मानव कल्याण के लिए प्रयासरत हैं। उनको यह सम्मान प्रदान करते हुए संपूर्ण मानवता कृतज्ञता के भाव से स्वयं को गौरवान्वित महसूस करेगी।</p>
<p><strong>  चातुर्मास आपने देश के अनेक राज्यों में वर्षायोग किए। </strong></p>
<p>1994 आगरा, 1995 इटावा, 1996 कुरावली, 1997 बड़ौत, 1998 गोहाना, 1999 चंडीगढ़, 2000 सहारनपुर, 2001 मुरादाबाद, 2002 सम्मेद शिखर, 2003 सिरसागंज, 2004 त्रिनगर दिल्ली, 2005 अजमेर, 2006 त्रिनगर दिल्ली, 2007 शाहदरा दिल्ली, 2008 सुल्तानपुर, 2009 शामली, 2010 बिहारी कॉलोनी दिल्ली, 2011 गुडग़ांव-हरियाणा, 2012 बूंदी, 2013 केसरगंज-अजमेर, 2014 रोहतक, 2015 सेठी कालोनी जयपुर, 2016 महावीर जी, 2017 भीलवाड़ा, 2018 नजफगड़, 2019 राणा प्रताप बाग दिल्ली, 2020 कोशी, 2021 महावीर जी, 2022 महावीर जी, 2023 मुरादाबाद।</p>
<p><strong>अलंकरण और उपाधियां</strong></p>
<p>आपको इन महान कार्यों के लिए निम्न उपाधियां भी पूर्व में सम्मान स्वरूप प्रदान की गई हैं, जो मुख्य है- हरियाणा समाज द्वारा सन 1998 हरियाणा उद्धारक (200 देशों के शंकराचार्यों की उपस्तिथि में) अजमेर समाज द्वारा सन 2005 &#8211; जिनधर्म प्रभाविका, गुडगांव समाज द्वारा सन 2011 कविमना, बूंदी राजस्थान समाज द्वारा सन 2012 -वात्सल्य मूर्ति, महावीर जी समाज द्वारा सन 2016 समता शिरोमणि, नजफगढ़ समाज द्वारा सन 2018 में वात्सल्य निधि। आचार्य अतिवीर जी महाराज जी द्वारा सन 2015 गणनी पद के संस्कार किए है, आदि अनेकों उपाधियां आपको प्रदान की गईं। परन्तु हर उपाधि आपके द्वारा किये जा रहे कार्यों के समक्ष छोटी ही नजर आई।</p>
<p><strong> आपने अपने साथ जुड़े लाखो भक्तों को एक ही सन्देश दिया है-  </strong></p>
<p><strong>&#8221;मेरा तो है बस एक ही सपना, </strong></p>
<p><strong>स्वस्थ सुखी हो जीवन सबका&#8221;  </strong></p>
<p>आपकी इसी मंगल भावना और आशीर्वाद को साथ लेकर संकल्पित और समर्पित है आपके सभी भक्तगण। हम प्रभु से निवेदन करते हैं कि आध्यात्म की सरिता स्वरूपा, आत्महित एवं परहित से संलग्न पूज्य माता श्री आपने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज अभ्युत्थान, संस्कृति के संरक्षण एवं श्रमण परम्परा के संवर्धन में समर्पित किया है। आपकी यह कृति सम्पूर्ण मानवता के लिए अनुकरणीय है, वन्दनीय है । आपकी यशोगाथा का कांतिमय दीपस्तंभ युगों युगों तक इसी तरह दैदीप्यमान रहे। साथ ही आपने अपने साथ जुड़े लोगों को भक्तों को एक ही संदेश दिया।मेरा तो है बस एक ही सपना स्वस्थ सुखी हो भारत अपना।अनेकों धार्मिक मंडल विधान आपके निर्देशन में 44 दिवसीय से लेकर अनेक दिनों में धार्मिक विधान करवा कर समाज को धर्मसे लगातार जोड़ कर रखा। शाम को गुरुवंदना कार्यक्रम में भी काफी श्रद्धालु उपस्थित होते हैं।</p>
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		<title>विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम होंगे आयोजित : आचार्य सन्मति सागर महाराज एवं ज्ञानसागर महाराज का दीक्षा समारोह 31 मार्च को </title>
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		<pubDate>Wed, 29 Mar 2023 14:08:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगम्बराचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज एवं श्री ज्ञानसागर जी महाराज का दीक्षा दिवस समारोह आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में 31 मार्च को जैन बगीची, अंबाह में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। पढ़िए अजय जैन की विशेष रिपोर्ट&#8230; अंबाह। दिगम्बराचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगम्बराचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज एवं श्री ज्ञानसागर जी महाराज का दीक्षा दिवस समारोह आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में 31 मार्च को जैन बगीची, अंबाह में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए अजय जैन की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> दिगम्बराचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज एवं श्री ज्ञानसागर जी महाराज का दीक्षा दिवस समारोह 31 मार्च को जैन बगीची, अंबाह में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया जाएगा। श्री विश्वयशमती माता जी ने बताया कि चंबल अंचल के बरवाई गांव में जन्मे त्रिलोक तीर्थ प्रणेता परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज एवं पूज्य गुरुदेव, ज्ञानतीर्थ प्रणेता, सराकोद्धारक समाधिस्थ षष्ट पट्टाचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का दीक्षा दिवस समारोह परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में 31 मार्च को जैन बगीची क्षेत्र पर मनाया जायेगा।</p>
<p><strong>भगवान को होंगे अर्घ्य समर्पित</strong></p>
<p>कार्यक्रम के तहत श्री पारसनाथ मंदिर परेड चौराहा में श्री जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन होगा, जिसमें गुरुभक्त सधर्मी बन्धु, माता-बहिनें जिनेन्द्र भगवान की आराधना करते हुए अर्घ्य समर्पित करेंगे। पूजन के पश्चात गुरुदेव आचार्य श्री सन्मति सागर जी महाराज एवं श्री ज्ञानसागर जी महाराज की महा अर्चना, पूजन एवं महाआरती होगी। मुख्य समारोह जैन बगीची में होगा। इस अवसर पर दोनों आचार्यों के जैन धर्म के प्रति योगदान पर व्याख्यानमाला के साथ-साथ जैन समाज में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए समस्त मंडलों का सम्मान आर्यिका माताजी सृष्टि भूषण के सानिध्य में किया जाएगा। इस अवसर पर भजन, भक्ति नृत्य एवं बालिकाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जायेंगे।</p>
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