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	<title>आर्यिका श्री वत्सलमति जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>आर्यिका श्री वत्सलमति जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>72 वर्षीय आर्यिका श्री वत्सलमति जी अतिशय क्षेत्र टोंक में पंचतत्व में विलीन: आर्यिका श्री वत्सलमति जी का चकडोला यात्रा में उमड़ा समाज  </title>
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		<pubDate>Fri, 07 Nov 2025 12:20:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अतिशय क्षेत्र टोंक में आर्यिका श्री वत्सलमति जी का 6 नवंबर को शाम 6.15 बजे आचार्य श्री केश्री मुख से अरिहंत सिद्ध सुनते समाधि मरण हो गया। विमान यात्रा चकडोला 7 नवंबर को प्रातः 8 बजे निकाला गया। टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; टोंक। तेरी छत्र छाया भगवन मेरे सिर पर हो [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अतिशय क्षेत्र टोंक में आर्यिका श्री वत्सलमति जी का 6 नवंबर को शाम 6.15 बजे आचार्य श्री केश्री मुख से अरिहंत सिद्ध सुनते समाधि मरण हो गया। विमान यात्रा चकडोला 7 नवंबर को प्रातः 8 बजे निकाला गया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> तेरी छत्र छाया भगवन मेरे सिर पर हो ,मेरा अंतिम मरण समाधि तेरे दर पर हो। बिरले आत्मा जो धर्मात्मा बनकर वैराग्य धारण कर दीक्षा संयम के मंदिर पर संलेखना का कलशारोहण कर परमात्मा बनने की राह पर अग्रसर होते हैं। समाधिस्थ मुनि श्री निर्मल सागर जी की जन्म भूमि अतिशय क्षेत्र टोंक में आर्यिका श्री वत्सलमति जी का 6 नवंबर को शाम 6.15 बजे आचार्य श्री केश्री मुख से अरिहंत सिद्ध सुनते समाधि मरण हो गया। विमान यात्रा चकडोला 7 नवंबर को प्रातः 8 बजे निकाला गया। दिन-रात मेरे स्वामी, मैं भावना यह भावु, देहांत के समय मे तुमको न भूल जाउं। मरण समय गुरु पाद मूल हो संत समूह रहे, पंडित पंडित मरण हो ऐसा अवसर दो। इन सारगर्भित भावनाओं को बिरले ही भव्य जीव अपने जीवन मे चरितार्थ करते हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर से 18 अगस्त वर्ष 1997 में दीक्षित सलूंबर धरियावद निवासी समाधिस्थ आर्यिका श्री वत्सल मति माताजी जी का डोला विमान यात्रा 7 नवंबर को निकाली गई। समाधिस्थ माताजी के डोले के आगे कमंडल लेकर भूमि शुद्धि का सौभाग्य परिजनों को प्राप्त हुआ। कंधे लगाने का सौभाग्य परिजनों के साथ समाज को प्राप्त हुआ। वैराग्य दर्शन समाधिस्थल परिसर में मंत्रोचार से स्थल शुद्धि की गई। समाधिस्थ आर्यिका श्री वत्सलमति जी का पूजन, शांतिधारा, पंचामृत अभिषेक उल्टेक्रम से गृहस्थ अवस्था के परिवार ने किया।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-93866" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0006.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0006.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0006-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0006-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0006-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0006-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0006-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0006-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0006-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0006-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251107-WA0006-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />मोक्ष मार्ग ही अविनाशी फल, लौकिक फल तो नश्वर है</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि उत्कृष्ट समाधि होने पर समाधिस्थ जीव अगले दो भव जन्म से 8 भव में निश्चित मोक्ष जाते हैं मरण सुमरण हो, समाधि मरण हो, ऐसा प्रयास करना चाहिए। आचार्य श्री ने बताया कि रत्नत्रय के तीन प्रमुख सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र से मोक्ष मार्ग प्राप्त होकर जन्म जरा मृत्यु का विनाश होता है। देव शास्त्र गुरु चरण में ही रत्नत्रय धर्म का मार्ग मिलता है क्योंकि, मोक्ष मार्ग ही अविनाशी फल है। लौकिक फल तो नश्वर होता है इसलिए आपको पुण्य का बंध करना चाहिए। पाप के बंध से कर्मों का आश्रव होता है। जैसे कार्य करेंगे वैसे ही कर्मों का बंघ होगा। मन को देव शास्त्र गुरु की भक्ति में लगाने से शाश्वत सुख की संपदा प्राप्त होगी। पांच इंद्रीय विषय भोगों से नर्क और तिर्यच गति का दुःख प्राप्त होगा। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने टोंक नगर में आर्यिका श्री वत्सल मति जी की समाधि के बाद भक्तों की सभा में प्रकट की।</p>
<p><strong>पंच कल्याणक में भिंडर में हुई थी आर्यिका दीक्षा </strong></p>
<p>आर्यिका श्री महायश मति माताजी ने बताया कि व शब्द वितरागता पर विजय, वैराग्य का प्रतीक है। विमला दीदी से आर्यिका श्री वत्सल मति में वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी यह व शब्द का अदभुत अनुठा संयोग है। क्षपक साधु की उत्कृष्ट समाधि होने पर अगले 2 भव जन्म से 8 भव जन्मों में सिद्ध होते हैं। सलूंबर धरियावद की विमला दीदी की 18 अगस्त वर्ष 1997 पंच कल्याणक में भिंडर में आर्यिका दीक्षा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सिद्धहस्त करकमलों से हुई। आपका नाम आर्यिका श्री वत्सल मति जी हुआ। ऐसा लगता हैं कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा घोषित अतिशय क्षेत्र अब निर्वाण सिद्ध भूमि हो गया है। जबसे आचार्य श्री का चातुर्मास 55 वर्षों के बाद हुआ हैं।</p>
<p><strong>दूर-दूर से भक्तजन आए थे दर्शन के लिए </strong></p>
<p>समाज के फूलचंद, धर्मचंद, कमल सराफ, लोकेश गजराज प्रदीप एवं अमित छामुनिया ने बताया कि सकल जैन समाज, पंच कल्याणक समिति एवं वर्षायोग समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में टोंक नगर के अतिरिक्त निकट के अन्य नगरों से भक्त अंतिम दर्शन हेतु शामिल हुए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ के मुनि श्री विशाल सागर जी, मुनि श्री चिन्मय सागर जी, क्षुल्लक श्री शील सागर जी, आर्यिका श्री वत्सल मति सहित चौथी समाधि हुई है।</p>
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		<title>आदर्श नगर में हुआ भक्तिमय मंडल विधान का पूजन: साधुओं की संयम साधना जारी </title>
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		<pubDate>Wed, 29 Oct 2025 13:26:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में धर्म की गंगा का लाभ सभी नगर वासी ले रहे हैं। सहस्त्र महामंडल विधान के सुंदर विधान की रचना  स्थानीय विद्वान पंडित प्रमोद जी और अन्य द्वारा की गई। सौधर्म इंद्र और अन्य प्रमुख इंद्र परिवार द्वारा मंडल पर श्रीफल और अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं। बुधवार को तीसरे और चौथे प्रति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में धर्म की गंगा का लाभ सभी नगर वासी ले रहे हैं। सहस्त्र महामंडल विधान के सुंदर विधान की रचना  स्थानीय विद्वान पंडित प्रमोद जी और अन्य द्वारा की गई। सौधर्म इंद्र और अन्य प्रमुख इंद्र परिवार द्वारा मंडल पर श्रीफल और अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं। बुधवार को तीसरे और चौथे प्रति वलय पर 100 और 100 कुल 200 अर्घ्य चढ़ाए। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> नगर में धर्म की गंगा का लाभ सभी नगर वासी ले रहे हैं। सहस्त्र महामंडल विधान के सुंदर विधान की रचना विद्वान पंडित प्रमोद जी और अन्य द्वारा की गई। राजेश पंचोलिया, गजराज लोकेश, संजय संघी ने बताया कि सौधर्म इंद्र और अन्य प्रमुख इंद्र परिवार द्वारा मंडल पर श्रीफल और अर्घ्य समर्पित किए जा रहे हैं। बुधवार को तीसरे और चौथे प्रति वलय पर 100 और 100 कुल 200 अर्घ्य चढ़ाए। चढ़ाए जाने वाले अर्घ्य का मंत्रोच्चार आचार्य श्री एवं मुनि हितेंद्र सागर जी ने कर भगवान के गुणों का वर्णन किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन के लिए समाधिस्थ आचार्य श्री विद्या सागर जी के शिष्य क्षुल्लक श्री ध्यान सागर जी पधारे। श्री जी के दर्शन कर आचार्य श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी से दीक्षित आर्यिका श्री शीतलमति जी और आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित 70 वर्षीय आर्यिका श्री वत्सलमति जी की संयम नियम संल्लेखना चल रही हैं।</p>
<p>आर्यिका श्री शीतल मति जी एकांतर आहार ले रही हैं। वहीं आर्यिका श्री वत्सल मति जी दो उपवास के बाद एक आहार की कठोर तप साधना कर रही हैं। आप मात्र जल, दूध और मनुक्का पानी बहुत ही अल्प मात्रा में ले रही हैं। सभी प्रकार के अन्न और 5 रसों का त्याग कर दिया हैं। ब्रह्मचारिणी विमला दीदी सलूंबर धरियावद आचार्य श्री धर्म सागर जी के समय से संघस्थ होकर आपने वर्ष 1997 में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से भिंडर पंच कल्याणक में सीधे आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका श्री वत्सल मति जी बनीं। 27 वर्षों में हजारों उपवास किए है। प्रातःकाल आचार्य श्री के सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक विभिन्न द्रव्यों से पुण्यार्जक परिवारों द्वारा किया गया। आचार्य श्री भक्ति भाव नृत्य द्वारा भव्य पूजन किया गया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट का सौभाग्य का प्राप्त हुआ। श्री जी और आचार्य श्री की मंगल आरती का सौभाग्य केवल चंद, लोकेश (गजराज भैया), आशीष कुमार रक्षांश कुमार, अवि कुमार कलई वालों को प्राप्त हुआ।</p>
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		<title>आचार्य वर्धमान सागरजी ने कहा-भगवान और गुरु के दर्शन विनय पूर्वक करें : 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ  </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Oct 2025 13:14:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230; टोंक। नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। केवलचंद कल्ली वाले, ज्ञान भरनी वाले, पारसमल बगड़ी वाले ने बताया कि शनिवार को जिनालय में जल, शर्करा, नारियल पानी, विभिन्न फलों के रस, धी, दूध, दही, केशर सर्वऔषधि, लाल सफेद चंदन, हल्दी पुष्प मंगल आरती, सुगंधित जल एवं शांतिधारा विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों ने किए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की संघस्थ शिष्या 70 वर्षीय आर्यिका श्री वत्सलमति जी की संयम समाधि साधना निरंतर एकांतर एक आहार एक उपवास से साथ चल रही है। आहार में भी सीमित मात्र मनुक्का जल, दूध और पानी ही ले रही हैं। दूध के अतिरिक्त अन्य 5 रसों ,सभी अनाज सहित काफी खाद्य सामग्री का त्याग कर दिया हैं।</p>
<p><strong>जब बच्चा संसार में जन्म लेता है तब दुनिया हंसती है</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया और गजराज लोकेश ने बताया कि संत भवन में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने उपस्थित श्रावकों से कहा कि हमें दुनिया में जो कुछ भी प्राप्त होता है। वह हमारे पुण्य कर्मों से होता है। मनुष्य जीवन भी हमें अपने पुण्य कर्मों से ही मिला है। दुनिया में हम जैसा कर्म करेंगे। वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा। कहते भी हैं जैसी करनी वैसी भरनी। जब बच्चा संसार में जन्म लेता है तब दुनिया हंसती है और बच्चा रोता है। हमें दुनिया में आने के बाद ऐसे कर्म करने हैं कि जब हम हमारी आयु पूर्ण कर दुनिया से जाएं तो हमारे जाने के दुख में सारी दुनिया रोए। इसके लिए जरूरी है कि हमारे कर्म अच्छे होने चाहिए। हमारे जैसे गुरु होंगे हमें शिक्षा भी वैसी ही मिलेगी। अच्छे गुरु की संगत हमें अच्छे कर्म करवाएगी।</p>
<p><strong>प्रभु सब की प्रार्थना स्वीकार करते हैं </strong></p>
<p>हमारे अच्छे कर्म और पुण्यों के कारण से ही हम लोगों के दिलों में जगह बना सकते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि जब भी आप गुरु या भगवान के पास जाएं तो उनके सामने विनम्रता पूर्वक दर्शन करे। हर आत्मा में परमात्मा बनने की शक्ति होती है। बस जरूरत है साधना और तपोबल की। प्रभु के सामने जो भी प्रार्थना करता है। प्रभु सब की प्रार्थना स्वीकार करते हैं लेकिन, जरूरी नहीं जो आप मांग रहे हैं। वह सब आपको प्रभु प्रदान कर दे। जो भी आपको मिलना है वह आपके पुण्य कर्म के आधार पर ही मिलना है। अगर हमें अपने जीवन की दशा सुधारनी है तो हमें दिशा बदलनी पड़ेगी। राग, द्वेष, मोह ,माया और जीवन के कषायों को छोड़कर अपनी दिशा बदलोगे तो आपके जीवन के दशा अपने आप बदल जाएगी। प्रभु के पास जब भी आप जाएं उन से विनती करें प्रार्थना करें कि हे प्रभु जैसे आप हैं मुझे भी वैसा ही बनना है। ऐसा बनने के लिए मुझे पुरुषार्थ करने की शक्ति प्रदान करें।</p>
<p><strong>आचार्यश्री की आहारचर्या हुई </strong></p>
<p>आज आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की आहार चर्या केवलचंद, लोकेश गजराज कलई परिवार टोंक ओर समर, सनत राजेश पंचोलिया इंदौर के चौके में हुई। पारसमल फूलेता परिवार पुण्यार्जक के निवास से जुलूस आकर शाम को श्रीजी ओर आचार्य श्री आरती हुई। शाम को छहढाला की कक्षा में सभी उम्र के समाज जन शामिल होते हैं।</p>
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