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	<title>आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<item>
		<title>आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के जन्मदिवस पर भक्ति के साथ मनाया उत्सव मनाया : तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन को गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती पुरस्कार’ </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Oct 2025 12:59:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 92वें जन्मदिन और 74वें संयम दिवस के अवसर पर शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव के तृतीय दिवस दिवस मंगलवार को प्रातः 6 बजे से बडी मूर्ति भगवान ऋषभदेव 31फुट उतंग प्रतिमा जी का अभिषेक और शांतिधारा हुई। अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230; अयोध्या। गणिनी प्रमुख श्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 92वें जन्मदिन और 74वें संयम दिवस के अवसर पर शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव के तृतीय दिवस दिवस मंगलवार को प्रातः 6 बजे से बडी मूर्ति भगवान ऋषभदेव 31फुट उतंग प्रतिमा जी का अभिषेक और शांतिधारा हुई। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी ससंघ के सान्निध्य में भगवान ऋषभदेव आदि पांप तीर्थंकरों की जन्म भूमि शाश्वत तीर्थ अयोध्या में गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 92वें जन्मदिन और 74वें संयम दिवस के अवसर पर शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव के तृतीय दिवस दिवस मंगलवार को प्रातः 6 बजे से बडी मूर्ति भगवान ऋषभदेव 31फुट उतंग प्रतिमा जी का अभिषेक और शांतिधारा हुई।झण्डा रोहण अशोक चांदवाड परिवार जयपुर द्वारा किया गया। अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन जयपुर ने बताया कि दोपहर 2 बजे विनयांजलि सभा का मंगलाचरण सुभाष जैन सराफ लखनऊ ने किया एवं ऋचा जैन तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद ने सभा की अध्यक्षता की। कमेटी द्वारा उनका स्वागत, सम्मान किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-92112" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251008-WA0030.jpg" alt="" width="1056" height="755" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251008-WA0030.jpg 1056w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251008-WA0030-300x214.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251008-WA0030-1024x732.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251008-WA0030-768x549.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251008-WA0030-990x708.jpg 990w" sizes="(max-width: 1056px) 100vw, 1056px" /> अतिथि व अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया गया। साथ में ग्लोबल महासभा के अध्यक्ष जमुनालाल हपावत, अधिष्ठाता ऋषभदेवपुरम मांगीतुंगी सीआर पाटिल, कमल कासलीवाल मुंबई थे। कार्यक्रम के शुभारंभ में आर्यिका श्री चन्दनामती माताजी ने समारोह का प्रस्तावना वक्तव्य प्रदान किया। पीठाधीश स्वस्ति श्री रवींद्र कीर्ति स्वामी जी, प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन, कमल कासलीवाल ने प्रस्तुति दी और कहा कि पूज्य माताजी ने जैन समाज को अनेकों उपकार किए।</p>
<p><strong>आचार्य श्री शांति सागरजी की परंपरा को भी आगे बढ़ाया </strong></p>
<p>उन्होंने भगवान ऋषभदेव व महावीर के अहिंसा, शाकाहार, आदि सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाया। आचार्य श्री शांति सागरजी की परंपरा को भी पूज्य माता जी ने आगे बढ़ाया। सभा में विशिष्ट भक्तों द्वारा पूज्य माताजी के पाद प्रक्षालन कर उन्हें नूतन पिच्छी, कमंडल व शास्त्र भी भेंट किए। युवा परिषद् बाराबंकी और अग्रवाल जैन महासंघ ने माताजी को ज्ञानसूर्य की उपाधि से विभूषित किया।</p>
<p><strong>पुरस्कार प्रदान कर सम्मान किया गया </strong></p>
<p>इस अवसर पर दिगंबर जैन त्रिलोक शोध संस्थान हस्तिनापुर द्वारा वीरा फाउंडेशन दिल्ली की ओर से भारतवर्षीय तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन गाजियाबाद को देश का सर्वाेच्च पुरस्कार गणिनी ज्ञानमती पुरस्कार 2025 प्रदान किया गया। प्रशस्ति का वाचन डॉ. अनुपम जैन इंदौर ने किया। जिनको 1995 में सर्वप्रथम यह पुरस्कार दिया गया। समारोह में प्रातः अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद् द्वारा युवा रत्न’ पुरस्कार से सम्यक जैन लखनऊ को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद् की ओर से अजैन लोगों को भंडारे की व्यवस्था की गई।</p>
<p><strong>नूतन एसी भोजनालय का उद्घाटन किया</strong></p>
<p>अयोध्या तीर्थ विकास के क्रम में नूतन एसी भोजनालय का भी इस अवसर पर उद्घाटन किया गया जिसका सौभाग्य विनोद सेठी डीमापुर परिवार को प्राप्त हुआ। रात्रि में रूपेश एंड पार्टी द्वारा भक्ति संध्या का आयोजन रखा गया। जिसमें 9.15 बजे टिकैतनगर के महिला मंडल, युवा परिषद्, वीर वालिका मंडल, देश के विभिन्न प्रांतों से आए श्रेष्ठियों व सैंकडों भक्तों ने थाली बजाकर गुरु माँ का जन्मदिन मनाया। सभी उपस्थित अतिथियों व श्रेष्ठियों का अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के महामंत्री अमर चन्द जैन, मंत्री विजय कुमार जैन, डॉ. जीवनकुमार जैन, संघपति अनिल जैन दिल्ली द्वारा स्वागत किया गया। मंच संचालन डॉ. जीवनकुमार प्रकाश जैन जम्बूद्वीप ,हस्तिनापुर एवं विजेंद्र जैन दिल्ली ने किया।</p>
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		<title>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव मनाया: आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की 92वीं जन्म जयंती पर तीर्थ क्षेत्र कमेटी ने कालजयी व्यक्तित्व पदवी से किया विभूषित  </title>
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		<pubDate>Tue, 07 Oct 2025 11:23:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी ससंघ के सानिध्य में भगवान ऋषभदेव आदि पांच तीर्थंकरों की जन्म भूमि शाश्वत तीर्थ अयोध्या में माताजी के 92 वें जन्मदिन और 74वें संयम दिवस पर शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को सुबह 6 बजे से बडी मूर्ति भगवान ऋषभदेव 31 फुट उतंग प्रतिमा जी के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी ससंघ के सानिध्य में भगवान ऋषभदेव आदि पांच तीर्थंकरों की जन्म भूमि शाश्वत तीर्थ अयोध्या में माताजी के 92 वें जन्मदिन और 74वें संयम दिवस पर शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को सुबह 6 बजे से बडी मूर्ति भगवान ऋषभदेव 31 फुट उतंग प्रतिमा जी के अभिषेक और शांतिधारा की गई। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से उदयभान जैन की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी ससंघ के सानिध्य में भगवान ऋषभदेव आदि पांच तीर्थंकरों की जन्म भूमि शाश्वत तीर्थ अयोध्या में माताजी के 92 वें जन्मदिन और 74वें संयम दिवस पर शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को सुबह 6 बजे से बडी मूर्ति भगवान ऋषभदेव 31 फुट उतंग प्रतिमा जी के अभिषेक और शांतिधारा की गई। इसके बाद आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की महा पूजा बड़े ही भक्ति भाव के साथ हुई। जिसके सौधर्म इंद्र कमलकुमार कासलीवाल मुंबई ने 101 सामूहिक अर्घ्य समर्पित किए। सभी ने भक्ति भावना से जयमाला पर नृत्य प्रस्तुत किए। अखिल भारत वर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन, जयपुर ने बताया कि दोपहर 2 बजे भारतवर्षीय तीर्थ क्षेत्र कमेटी का नियमित राष्ट्रीय अधिवेशन पूर्व न्यायाधीश कैलाश चांदीवाल महाराष्ट्र के मुख्य आतिथ्य एवं तीर्थ क्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बूप्रसाद जैन गाजियाबाद की अध्यक्षता में हुआ। जिसके विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पारुल जैन थे। मंगलाचरण प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन एवं स्वागत उद्वोधन अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद् राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवनप्रकाश जैन ने दिया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-91926" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005.jpg" alt="" width="1280" height="970" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005-300x227.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005-1024x776.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005-768x582.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251007-WA0005-990x750.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /> इस अवसर परभारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी की ओर से गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी को ’कालजयी’व्यक्तित्व’ उपाधि से नवाजा गया। कार्यक्रम में गणिनी प्रमुख श्री ज्ञान मती माताजी, प्रज्ञा श्रमणी चंदनामती माताजी, पीठाधीष रविंद्र कीर्ती स्वामी जी ने कहा कि तीर्थ संरक्षण के लिए संपूर्ण जैन समाज का योगदान होना चाहिए। अधिवेशन में सुनयना जैन लखनऊ, जय कुमार जैन कोटा, विजयकुमार लुहाडिया, कैलाश जैन सराफ लखनऊ, पवन घुवारा, संजय पापडीवाल, जवाहरलाल जैन सिकंद्राबाद, जम्बूप्रसाद जैन गाजियाबाद, कैलाश चांदीवाल, शरद जैन दिल्ली ने तीर्थ क्षेत्र के संरक्षण के लिए किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने बताया कि</p>
<p>मंगलवार सुबह 6 बजे 31 फुट उतंग प्रतिमा जी का महामस्तिकाभिषेक किया गया। दोपहर 2 बजे से माताजी की मुख्य विनयांजलि सभा एवं त्रिलोक शोध संस्थान का सर्वाेच्च गणिनी ज्ञानमती पुरस्कार 2025 प्रदान किया जाएगा। शाम 7 बजे आरती एवं सांस्कृतिक संध्या आदि कार्यक्रम होंगे। मंच संचालन हसमुख गांधी इंदौर ने किया।</p>
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		<title>आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी ने नारी पर्याय को किया सार्थक: अवतरण दिवस पर मुनिश्री जयंत सागर जी ने माताजी का किया गुणानुवाद </title>
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		<pubDate>Sat, 04 Oct 2025 12:35:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर जी महाराज का चातुर्मास भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में चल रहा है। इस दौरान यहां पर नित्य पूजा, आराधना और भक्ति के साथ ही मुनिराजों के प्रवचनों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर जी महाराज का चातुर्मास भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में चल रहा है। इस दौरान यहां पर नित्य पूजा, आराधना और भक्ति के साथ ही मुनिराजों के प्रवचनों का दौर भी जारी है। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे।</strong> आचार्य विशुद्धसागरजी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर जी महाराज का चातुर्मास भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में चल रहा है। इस दौरान यहां पर नित्य पूजा, आराधना और भक्ति के साथ ही मुनिराजों के प्रवचनों का दौर भी जारी है। प्रवचनों के माध्यम से दिगंबर जैन समाज के श्रावक-श्राविकाओं को धर्म, ज्ञान और संस्कृति से परिचय करवाया जा रहा है। इस सिलसिले में मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज प्रवचन में कहा कि मनुष्य जन्म बड़ी दुर्लभता से प्राप्त होता है और बहुत पुण्य करने के बाद ही मिलता है। जो ये मनुष्य पर्याय में आकर भी उस मनुष्य जन्म को सार्थक नहीं करता, वह उस अंधे व्यक्ति के समान है, जिसे रत्नों का पिटारा सामने पड़ा दिखाई नहीं देता और आगे निकल जाता है, परंतु मनुष्य पर्याय को सार्थक कर सफलता के शिखर तक पहुंचने का किसी ने काम किया है तो वह हैं गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी।</p>
<p>व्यक्ति पुरुष बनने के बाद कार्य करने में सोचता है, निर्णय करने में सोचता है, लेकिन ज्ञानमती माताजी ने एक नारी पर्याय में छोटी सी उम्र में जब लड़‌कियां अपने जीवन में क्या करना क्या नहीं करना उसका निर्णय नहीं कर पाती थीं। लड़‌कियां सजती संवरती थीं परंतु ज्ञानमति माताजी ने छोटी सी उम्र में दिगंबर परंपरा में जिन दीक्षा को धारण कर लिया और दीक्षा के बाद अध्ययन आदि करके ऐसे अनेकों ग्रंथों पर जो महान-महान ग्रंथ है। उन पर टीका की और उन पर कार्य किया और तो और अनेकों प्राचीन तीर्थ क्षेत्र का निर्माण एवं नवीन निर्माण कराके हमारे संस्कृति को आगे बढ़ाया है। आज 92 वें वर्ष वर्धन दिवस पर भी अपनी तप-साधना में निरंतर तल्लीन हैं। हमारी यही भावना है कि माताजी ने ये संयम को जिस शिखर तक पहुंचाने के लिए दीक्षा ली। उस शिखर तक निरंतर ऐसे ही तप-साधना में लीन रहते हुए कलश विराजमान करें।</p>
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		<title>जैनधर्म के 5 तीर्थंकरों की ही जन्मभूमि : इस धरती के प्रथम शाश्वत तीर्थ अयोध्या का हो रहा है महत्वपूर्ण विकास </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Jul 2023 17:27:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन संस्कृति की आन-बान-शान और हमारी पहचान, सर्वाधिक महत्वपूर्ण तीर्थ, शाश्वत तीर्थंकर जन्मभूमि अयोध्या का विकास सर्वोच्च जैन साध्वी दिव्यशक्ति भारतगौरव गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से चल रहा है, जिसमें समस्त दिगम्बर जैन समाज को तन-मन-धन से सहयोग देकर पुण्य अर्जित का आह्वान निवेदित है। इसके विशेष आलेख के लेखक है डॉ. जीवन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p>जैन संस्कृति की आन-बान-शान और हमारी पहचान, सर्वाधिक महत्वपूर्ण तीर्थ, शाश्वत तीर्थंकर जन्मभूमि अयोध्या का विकास सर्वोच्च जैन साध्वी दिव्यशक्ति भारतगौरव गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से चल रहा है, जिसमें समस्त दिगम्बर जैन समाज को तन-मन-धन से सहयोग देकर पुण्य अर्जित का आह्वान निवेदित है। इसके विशेष आलेख के लेखक है डॉ. जीवन प्रकाश जैन, मंत्री और <span style="color: #ff0000;">प्रस्तुति है मनोज नायक(मुरैना) की&#8230;</span></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> पूरे विश्व भर में जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी परमपूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी को साक्षात् सरस्वती स्वरूपा कहें या पवित्रतम चरणद्वय से सहित सिद्धहस्त साधिका कहें, उनकी इस शक्ति के साक्षात् परिणाम इस देश ने अनेक बार प्रत्यक्ष रूप से देखे, समझे और आभास किए हैं। पूज्य माताजी की शक्ति को चाहे जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर तीर्थ में देखें या ऋषभगिरि-मांगीतुुंगी तीर्थ के विशाल पर्वत पर अखण्ड पाषाण में विश्व की सबसे ऊंची 108 फुट उत्तुंग भगवान ऋषभदेव प्रतिमा में देखें या फिर उनके द्वारा रचित 500 से अधिक ग्रंथों के विशाल साहित्य समूह में देखें, हर व्यक्ति इन कार्यों से अचम्भित होकर स्तब्ध, आश्चर्य और प्रगाढ़ आस्था के आलोक में डूब जाता है।</p>
<p><strong>असंभव कार्य किया</strong></p>
<p>आज 89 वर्षीय अपने योग्य जीवन को 70 वर्षीय साधना से चमत्कार स्वरूप बनाने वाली पूज्य माताजी के ऐसे शक्ति-आभास इस समाज ने समय-समय पर अनेक बार देखे हैं, जब अनूठे, विरले और असंभव जैसे कार्य भी इस धरती पर संभव होते नजर आए हैं। ठीक इसी क्रम में पुन: इस 89 वर्षीय पायदान पर पूरे समाज ने फिर एक बार ऐसा आश्चर्य, चमत्कार और वरदान तब देखा, जब 31 दिसम्बर 2022 को अयोध्या जैन तीर्थ की पावन धरती पर पूज्य माताजी के पवित्र चरणयुगल पड़ते ही यह धरती जाग उठी। परिणामस्वरूप मात्र एक अत्यन्त अल्प अंतराल में ही भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगम्बर जैन तीर्थ-बड़ी मूर्ति परिसर में देखते ही देखते ऐसा विकासीय बदलाव आता गया और अप्रैल 30 से मई 7, 2023 की तारीख में यहां ऐतिहासिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव से अयोध्या को देश ही नहीं पूरी दुनिया में विशाल जैन तीर्थ का स्वर्णिम सोपान प्राप्त हुआ। पूरे विश्व जैन समाज की दृष्टि इस चमत्कार पर और इस तीर्थ के महत्त्व पर लगातार बनी रही और अब भी निरंतर ही यह तीर्थ अपने नये विकास को लेकर चरम की ओर बढ़ रहा है।</p>
<p><strong>साबित हुआ मील का पत्थर</strong></p>
<p>इस धरा पर कभी-कभी कोई विरले ही ऐसी घड़ियां पुण्योदय में आ जाती हैं कि जो भविष्य के लिए आज मील का पत्थर बन जाती हैं। एक लम्बा समय इन आशाओं से बंधा हुआ था कि क्या कभी अयोध्या का ऐतिहासिक विकास इस जैन समाज को प्राप्त हो पाएगा? लेकिन कभी इन आशाओं पर निराशा का अंकुश नहीं लग पाया और सतत ही ये आशाएं सबल होते हुए सन् 2023 में इतनी प्रबल हो गईं कि आज इस जैन संस्कृति को भगवान ऋषभदेव, भगवान अजितनाथ, भगवान अभिनंदननाथ, भगवान सुमतिनाथ एवं भगवान अनंतनाथ, वर्तमान के इन पांचों तीर्थंकरों की जन्मभूमि अयोध्या जैसा महातीर्थ पुन: एक ऐसे जागृत स्वरूप में प्राप्त हो गया कि अब हम भी गर्व के साथ इस बात का आगाज कर सकते हैं कि अयोध्या हमारे जैनधर्म के 5 तीर्थंकरों की ही जन्मभूमि नहीं अपितु यह शाश्वत तीर्थंकर जन्मभूमि के रूप में अनादिकाल से पूज्य और मान्य रही है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-48210" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230710-WA0060.jpg" alt="" width="683" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230710-WA0060.jpg 683w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230710-WA0060-128x300.jpg 128w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230710-WA0060-437x1024.jpg 437w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/07/IMG-20230710-WA0060-656x1536.jpg 656w" sizes="(max-width: 683px) 100vw, 683px" /></p>
<p><strong>गौरवशाली स्वरूप लौटा</strong></p>
<p>ऐसा भी नहीं कि अयोध्या में हमारा अस्तित्व नहीं था लेकिन जो अस्तित्व था, वो इतने गौरवशाली स्वरूप में नहीं था, जिसको लेकर हम अपने अनादिनिधन जैनधर्म की गरिमा को जन-जन के सामने प्रस्तुत कर सकें। यह विकास की दृष्टि आज नहीं अपितु सर्वप्रथम सन् 1965 में आचार्यरत्न श्री देशभूषण जी महाराज के उन दिव्य नयनों में प्राप्त हुई, जिनसे उन्होंने इस अयोध्या के लिए नई आशाओं और विकास का स्वप्न देखकर 31 फुट उत्तुंंग भगवान ऋषभदेव की विशाल प्रतिमा विराजमान करवाई और सुंदर जिनमंदिर का भी निर्माण हुआ। इससे पूर्व आचार्य श्री देशभूषण जी महाराज की ही कृपा प्रसाद से कटरा मोहल्ले के भगवान सुमतिनाथ जिनमंदिर में भगवान आदिनाथ-भरत-बाहुबली की सुन्दर और विशाल जिनप्रतिमाओं का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव भी आचार्य श्री के ही सान्निध्य में सन् 1952 में सम्पन्न हुआ था।</p>
<p><strong>अयोध्या का विकास नए अंदाज में</strong></p>
<p>अत: आचार्य श्री देशभूषण जी महाराज ने सतत अपनी दृष्टि अयोध्या की तरफ रखी और उसके बाद उन्हीं के करकमलों से क्षुल्लिका दीक्षा प्राप्त उनकी शिष्यारत्न वर्तमान की गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी ने सन् 1994-1995 से इस अयोध्या की जीर्ण-शीर्ण स्थिति को अपनी दृष्टि में प्रमुख लक्ष्य पर लिया और सतत चरैवेती-चरैवेती के सिद्धान्त पर चलते हुए उन्होंने धीरे-धीरे इस अयोध्या के विकास को एक नया अंदाज प्रदान किया। सर्वप्रथम बड़ी मूर्ति जिनमंदिर परिसर में त्रिकाल चौबीसी जिनमंदिर, समवसरण जिनमंदिर आदि के निर्माण, तीर्थ पर धर्मशाला, भोजनशाला आदि समुचित व्यवस्थाओं का प्रबंध आदि के साथ क्रमश: पांचों भगवन्तों की टोकों पर सुंदर-सुंदर जिनमंदिरों के निर्माण भी सम्पन्न हुए।</p>
<p><strong>वर्तमान में हो रहा विकास कार्य </strong></p>
<p>पुन: अब इस जैन संस्कृति के आद्य केन्द्र को नई ऊंचाईयां प्रदान करने के लिए पूज्य माताजी ने सन् 2019 में अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी व समाज को बड़ी मूर्ति परिसर विस्तृत रूप से सजाने-संवारने की प्रेरणा प्रदान की, जिसके फलस्वरूप आज हम सबके मध्य 31 फुट उत्तुंग भगवान भरत प्रतिमा से समन्वित विशाल जिनमंदिर, भगवान ऋषभदेव के मोक्ष प्राप्त 101 पुत्रों का विश्वशांति जिनमंदिर, रत्नमयी प्रतिमाओं वाला तीस चौबीसी जिनमंदिर, तीनलोक रचना एवं सर्वतोभद्र महल जैसी सुन्दर-सुन्दर कृतियां विकासशील नजर आ रही हैं। इतना ही नहीं नवम्बर 2019 में पूज्य माताजी द्वारा साक्षात् सान्निध्य देकर भगवान भरत जिनमंदिर और विश्वशांति जिनमंदिर का शिलापूजन भी सम्पन्न कराया गया और पुन: इस तीर्थ के विकास की ललक लेकर 89 वर्ष की आयु में हस्तिनापुर से 31 दिसम्बर 2022 को पूज्य माताजी का आगमन अयोध्या में हुआ और 30 अप्रैल से 7 मई 2023 तक यहां भव्य तीस चौबीसी तीर्थंकर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव सम्पन्न होकर यह जैन संस्कृति का शाश्वत तीर्थ अयोध्या नये प्रकाश को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>सहयोग करें</strong></p>
<p>इसी नये प्रकाश का विस्तृत वर्णन करने के लिए पाठकों के समक्ष यह आलेख प्रस्तुत किया गया है। साथ ही सभी बंधुओं से यह भी निवेदन है कि इस तीर्थ के विकास में तन-मन-धन के साथ अपना सहयोग प्रदान करें। क्योंकि जैनधर्म में दो ही शाश्वत तीर्थ हैं जिनमें प्रथम शाश्वत तीर्थंकर जन्मभूमि अयोध्या है एवं द्वितीय शाश्वत तीर्थंकर निर्वाणभूमि सम्मेदशिखर जी कहलाती है। अत: दिगम्बर जैन समाज के समस्त बंधुजन अब इस शाश्वत तीर्थ अयोध्या के महत्वपूर्ण विकास में अपना योगदान अवश्य प्रदान करें। इसके लिए कार्यालय में 9520554138, 9520554164, 9520554171, 9520554172 पर संपर्क किया जा सकता है।</p>
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		<title>आचार्य श्री की प्रतिमा जी का हुआ अभिषेक : अयोध्या में मनाया गया श्री वीरसागर जी महाराज का अवतरण दिवस </title>
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		<pubDate>Wed, 05 Jul 2023 01:30:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चारित्रचक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज की परम्परा के प्रथम पट्टाचार्य श्री वीर सागर जी महाराज का 147वां अवतरण दिवस आषाढ़ शुक्ला पूर्णिमा 3 जुलाई को विभिन्न धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों के साथ अयोध्या में परम पूज्य आर्यिका शिरोमणि, गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। पढ़िए मनोज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>चारित्रचक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज की परम्परा के प्रथम पट्टाचार्य श्री वीर सागर जी महाराज का 147वां अवतरण दिवस आषाढ़ शुक्ला पूर्णिमा 3 जुलाई को विभिन्न धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों के साथ अयोध्या में परम पूज्य आर्यिका शिरोमणि, गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> चारित्रचक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज की परम्परा के प्रथम पट्टाचार्य श्री वीर सागर जी महाराज का 147वां अवतरण दिवस आषाढ़ शुक्ला पूर्णिमा 3 जुलाई को विभिन्न धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों के साथ अयोध्या में परम पूज्य आर्यिका शिरोमणि, गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने बताया कि इस अवसर पर आचार्य श्री की प्रतिमा जी के अभिषेक के पश्चात परमपूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चन्दनामती माताजी ने आचार्य श्री की अष्ट द्रव्य से सामूहिक पूजा कराई। पूजन में युवा परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ. जीवन प्रकाश जैन, राष्ट्रीय मुख्य संयोजक विजय कुमार जैन हस्तिनापुर, राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन जयपुर, राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जैन जयपुर, भरत स्थली दिल्ली के कोषाध्यक्ष विनोद जैन दिल्ली, जैन पत्रकार महासंघ के संरक्षक सदस्य हंसमुख गांधी इन्दौर, ऋषभांचल मांगीतुंगी के ट्रस्टी प्रमोद कासलीवाल महाराष्ट्र आदि विभिन्न प्रान्तों से उपस्थित श्रेष्ठी शामिल हुए।</p>
<p><strong>व्यक्तित्व का गुणानुवाद किया</strong></p>
<p>आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से सन् 1956 में माधोराजपुरा जिला जयपुर राजस्थान में पूज्य गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी ने आर्यिका दीक्षा प्राप्त करके “ज्ञानमती माताजी” नाम प्राप्त किया था। अतः पूज्य माताजी ने आचार्यश्री के जन्मदिवस पर गुरुपूर्णिमा मनाते हुए उनके व्यक्तित्व का गुणानुवाद किया। इस अवसर पर पूज्य पीठाधीश रवीन्द्र कीर्ति स्वामी जी ने जैन संस्कृति से संबंधित अयोध्या में चल रहे विकास कार्यों के बारे में प्रकाश डाला। इस अवसर पर परम पूज्य गणिनी ज्ञानमती माताजी ा पाद प्रक्षालन अशोक चांदवाड जयपुर परिवार एवं जीतेन्द्र जैन खंडवा परिवार द्वारा किया गया। तत्पश्चात उपस्थित श्रेष्ठियों ने पाद प्रक्षालन किया।</p>
<p>डॉक्टर जीवन प्रकाश जैन जम्बूद्वीप ने उपस्थित श्रेष्ठियों का अभिनन्दन किया ।</p>
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