<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>आधुनिक दंत चिकित्सा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B8%E0%A4%BE/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Fri, 10 Apr 2026 15:10:36 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0.2</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>आधुनिक दंत चिकित्सा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>वैश्विक मंच पर आधुनिक दंत चिकित्सा के रुझानों पर मंथन : देश-विदेश के विशेषज्ञों ने प्रस्तुत किया अपना विजन  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/deliberating_on_trends_in_modern_dentistry_on_the_global_stage/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/deliberating_on_trends_in_modern_dentistry_on_the_global_stage/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 15:10:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Emerging Trends in Contemporary Dentistry]]></category>
		<category><![CDATA[Expert in Oral Medicine श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[Ministry of Health Malaysia]]></category>
		<category><![CDATA[Modern Dentistry]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Sultan Abdul Halim Hospital]]></category>
		<category><![CDATA[Teerthanker Mahaveer University]]></category>
		<category><![CDATA[आधुनिक दंत चिकित्सा]]></category>
		<category><![CDATA[इमर्जिंग ट्रेंड्स इन कंटेंपरेरी डेंटिस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[ओरल मेडिसिन की एक्सपर्ट]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मलेशिया केनी हेल्थ मिनिस्ट्री]]></category>
		<category><![CDATA[सुल्तान अब्दुल हलीम अस्पताल]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=104415</guid>

					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की ओर से इमर्जिंग ट्रेंड्स इन कंटेंपरेरी डेंटिस्ट्री पर दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का शंखनाद, मलेशिया केनी हेल्थ मिनिस्ट्री के सुल्तान अब्दुल हलीम अस्पताल में चीफ कंसल्टेंट एंड ओरल मेडिसिन की एक्सपर्ट डॉ. नोराटिखा बिन्ती अवांग हसीम ने शिरकत अपनी बात रखी। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसुंदर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की ओर से इमर्जिंग ट्रेंड्स इन कंटेंपरेरी डेंटिस्ट्री पर दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का शंखनाद, मलेशिया केनी हेल्थ मिनिस्ट्री के सुल्तान अब्दुल हलीम अस्पताल में चीफ कंसल्टेंट एंड ओरल मेडिसिन की एक्सपर्ट डॉ. नोराटिखा बिन्ती अवांग हसीम ने शिरकत अपनी बात रखी। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो.श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद।</strong> मलेशिया के हेल्थ मिनिस्ट्री के सुल्तान अब्दुल हलीम अस्पताल में चीफ कंसल्टेंट एंड जानी मानी ओरल मेडिसिन की एक्सपर्ट डॉ. नोराटिखा बिन्ती अवांग हसीम ने नॉन हीलिंग अल्सर पर कहा कि अल्सर की अनदेखी से जीवन संकट में आ जाता है। मुंह के छालों के विभिन्न आकार जैसे गोल, अंडाकार एवं अनियमित हो सकते हैं, जिनकी प्रकृति से रोग की गंभीरता का अनुमान लगाया जाता है। नॉन-हीलिंग अल्सर वे होते हैं, जो सामान्य उपचार के बाद भी 2-3 सप्ताह में ठीक नहीं होते। डॉ. नोराटिखा ने ट्रॉमैटिक, इंफेक्शियस, और प्री कैंसरस अल्सर को प्रमुख बताया। इसके प्रमुख कारणों में तंबाकू सेवन, धूम्रपान, विटामिन की कमी, संक्रमण और लगातार घाव शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सही निदान के लिए बायोप्सी, क्लिनिकल परीक्षण और इमेजिंग तकनीकों का उपयोग किया जाता है। पीपी के जरिए एक मरीज का केस इतिहास भी साझा किया, जिसमें लंबे समय से न भरने वाले अल्सर को शुरुआती चरण में पहचानकर सफल उपचार किया गया। अल्सर की अवस्थाओं को समझाया गया। उपचार में दवाइयों के साथ- साथ आवश्यक होने पर सर्जिकल हस्तक्षेप की भूमिका भी बताई गई। अंत में समय पर जांच और जागरूकता को सबसे प्रभावी बचाव उपाय बताया गया। डॉ. नोराटिखा तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की ओर से इमर्जिंग ट्रेंड्स इन कंटेंपरेरी डेंटिस्ट्री पर ऑडी में दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में बतौर की नोट स्पीकर बोल रही थीं। कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ।कार्यक्रम के दौरान कांफ्रेंस प्रोसिडिंग का विमोचन किया गया। संचालन स्टुडेंट्स वंशिका त्यागी, हृदेश सुरेखा आदि ने किया। कॉन्फ्रेंस में कोठीवाल डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर,मुरादाबाद के प्रिंसिपल डॉ. स्वतंत्र अग्रवाल, केडी डेंटल कॉलेज,मथुरा की प्रिंसिपल डॉ. नवप्रीत कौर समेत 20 डेंटल शिक्षाविदों को उत्कृष्टता के लिए विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-104418" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0018-300x166.jpg" alt="" width="300" height="166" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0018-300x166.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0018-1024x567.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0018-768x425.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0018-1536x851.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0018-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0018-990x548.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0018-1320x731.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0018.jpg 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>छात्रों को नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया</strong></p>
<p>आंध्र प्रदेश से आए विष्णु डेंटल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एवी रामा राजू ने आधुनिक दंत चिकित्सा एवं भविष्य की डेंटिस्ट्री के परिवर्तन पर एक प्रभावशाली व्याख्यान दिया। डॉ. राम राजू ने बताया कि आधुनिक तकनीकों जैसे डिजिटल डेंटिस्ट्री, थ्री डी इमेजिंग और लेज़र तकनीक के उपयोग से दंत चिकित्सा में क्रांतिकारी बदलाव आया है। उन्होंने भविष्य की डेंटिस्ट्री को अधिक सटीक, तेज़ और मरीज-केंद्रित बताते हुए छात्रों को नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान डेंटल स्टुडेंट्स एवम् फैकल्टीज ने विभिन्न प्रश्नों के माध्यम से अपनी शंकाओं का समाधान किया। कॉन्फ्रेंस में टीएमयू के कुलपति प्रो. वी.के. जैन, डीन गवर्निंग डॉ. नीलिमा जैन, टीएमयू डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. प्रदीप तांगड़े, वाइस प्रिंसिपल डॉ. अंकिता जैन के अलावा विशिष्ट अतिथियों में कोठीवाल डेंटल कॉलेज और अनुसंधान केंद्र से डॉ. स्वतंत्र अग्रवाल, मानव रचना डेंटल कॉलेज की डीन डॉ. पुनीत बत्रा, दंत विज्ञान संस्थान, बरेली के प्रिंसिपल डॉ. सत्यजीत नाइक, केडी डेंटल कॉलेज मथुरा से डॉ. नवप्रीत कौर आदि की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। डॉ. विनीता निखिल , डॉ. सुनीता गुप्ता, डॉ. के.वी. अरुण, डॉ. नवीन पी.जी, डॉ. विक्रांत मोहंती , डॉ. शौर्य टंडन , डॉ. राजेंद्र गौड़ा पाटिल आदि भी शामिल रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/deliberating_on_trends_in_modern_dentistry_on_the_global_stage/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चिकित्सा के साथ रीति-रिवाजों में हल्दी का उपयोग 6000 साल पुराना: आधुनिक दंत चिकित्सा में प्रासंगिकता पर 11वीं ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_use_of_turmeric_in_medicine_and_rituals_dates_back_6000_years/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_use_of_turmeric_in_medicine_and_rituals_dates_back_6000_years/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 14:34:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[11th Online National Seminar]]></category>
		<category><![CDATA[11वीं ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Modern Dentistry]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Teerthanker Mahaveer University]]></category>
		<category><![CDATA[Turmeric]]></category>
		<category><![CDATA[आधुनिक दंत चिकित्सा]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[हल्दी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=98039</guid>

					<description><![CDATA[तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में प्राचीन भारतीय मौखिक स्वच्छता परंपराएं और आधुनिक दंत चिकित्सा में इसकी प्रासंगिकता पर 11वीं ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई। इसमें विद्वानों ने रोचक किंतु उपयोगी जानकारी दी। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230; मुरादाबाद। गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज, पटना में ऑर्थाेडॉन्टिक्स के विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग राय ने बताया कि [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p>तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में प्राचीन भारतीय मौखिक स्वच्छता परंपराएं और आधुनिक दंत चिकित्सा में इसकी प्रासंगिकता पर 11वीं ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई। इसमें विद्वानों ने रोचक किंतु उपयोगी जानकारी दी। <span style="color: #ff0000"><strong>मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह खबर&#8230;</strong></span></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद।</strong> गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज, पटना में ऑर्थाेडॉन्टिक्स के विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग राय ने बताया कि आयुर्वेद में मुल्तानी मिट्टी, अखरोट स्क्रब और फिटकरी जैसे प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग दंत संरक्षण हेतु किया जाता था, जो आज भी घरेलू स्तर पर प्रचलित हैं। डॉ. राय ने कवला और गंडूश जैसी पारंपरिक विधियों की वैज्ञानिक उपयोगिता पर चर्चा की। साथ ही त्रिफला माउथवॉश, नीम, बबूल एवं मिस्वाक की दातुन के प्रयोग का उल्लेख किया। जिन्हें चबाकर ब्रश के रूप में उपयोग किया जाता था। उन्होंने बताया कि ये आयुर्वेदिक पद्धतियां आज भी प्रासंगिक हैं। जिसका प्रमाण यह है कि आयुर्वेदिक टूथपेस्ट और माउथवॉश वर्तमान बाजार में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। डॉ. अनुराग तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के भारतीय ज्ञान परम्परा आईकेएस केंद्र की ओर से प्राचीन भारतीय मौखिक स्वच्छता परंपराएं और आधुनिक दंत चिकित्सा में उनकी प्रासंगिकता पर 11वें ऑनलाइन राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में बोल रहे थे। कॉन्क्लेव में वाइस चांसलर प्रो. वीके जैन ने यूनिवर्सिटी की आख्या प्रस्तुत की, जबकि तीर्थंकर महावीर डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर की वाइस प्रिंसिपल डॉ. अंकिता जैन ने नेशनल कॉन्क्लेव की थीम पर प्रकाश डाला।</p>
<p><strong>हल्दी को स्वर्णिम मसाला, सूर्य की औषधि माना गया</strong></p>
<p>एआईएमएसटी यूनिवर्सिटी, मलेशिया की विभागाध्यक्षा डॉ. प्रियदर्शिनी कार्तिकेयन ने ओरल लेज़न्स में हल्दी की सूजनरोधी भूमिका का परिचय देते हुए स्पष्ट किया। आधुनिक शोध का उद्देश्य प्राचीन जड़ी-बूटियों एवं् मसालों विशेषकर हल्दी की जैव उपलब्धता को बेहतर बनाना है। आयुर्वेद में कुर्कुमा लोंगा के नाम से जानी जाने वाली हल्दी को स्वर्णिम मसाला, सूर्य की औषधि माना गया है। उन्होंने बताया, हल्दी में करक्यूमिन के तीन सक्रिय घटक पाए जाते हैं। इसका चिकित्सा और सामाजिक-धार्मिक उपयोग 6,000 वर्षों से अधिक समय से प्रलेखित है। आयुर्वेद में इसे दर्दनाशक, कृमिनाशक, कैंसररोधी, कोलेस्ट्रॉल-नियंत्रक, पाचन, त्वचा और नेत्र स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया गया है।</p>
<p><strong>मुख संबंधी घावों में बेहतर उपचार परिणाम प्राप्त होते हैं</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि यद्यपि हल्दी की उत्पत्ति भारत में हुई, किंतु आज इसका उपयोग जापान, मलेशिया, कोरिया, चीन, अमेरिका सहित अनेक देशों में किया जा रहा है। डॉ. प्रियदर्शिनी ने कहा कि करक्यूमिन ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, फाइब्रोसिस, डिस्प्लेसिया और दर्द को कम करता है। जिससे मुख संबंधी घावों में बेहतर उपचार परिणाम प्राप्त होते हैं। करक्यूमिन का उपयोग ओरल म्यूकोसाइटिस, ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस, ओरल कैंसर, ओरल कैंडिडायसिस, आफ्थस स्टोमैटाइटिस, ओरल लाइकेन प्लैनस, पीरियोडॉन्टल रोग और दंत क्षय जैसे रोगों में किया गया है।</p>
<p><strong> लौंग में दर्दनाशक और जीवाणुनाशक गुण होते हैं</strong></p>
<p>मिथिला माइनॉरिटी डेंटल कॉलेज, दरभंगा की पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री विभाग की डॉ. स्वप्निल बुम्ब ने भारतीय मौखिक स्वच्छता परंपराओं में लौंग की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया, यद्यपि लौंग भारत में व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला मसाला है, परंतु इसका सर्वाधिक उत्पादन इंडोनेशिया में होता है। डॉ. बुम्ब ने बताया कि लौंग विटामिन के, सी, मैंगनीज़, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों से भरपूर होती है। इसमें पाया जाने वाला यूजेनॉल एक प्रभावशाली तत्व है, जिसमें दर्दनाशक और जीवाणुनाशक गुण होते हैं। जिसका उपयोग आधुनिक दंत उत्पादों में व्यापक रूप से किया जाता है, जो दंत क्षय के प्रमुख कारण हैं।</p>
<p><strong>लौंग से कैविटी का खतरा कम होता है</strong></p>
<p>लौंग एंटीऑक्सीडेंट्स से समृद्ध होती है, जो मुख और गुहा में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने और ओरल कैंसर की संभावना को घटाने में सहायक है। इसके अतिरिक्त यह फंगल एवम् वायरल संक्रमणों से भी सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे कैविटी का खतरा कम होता है। प्लाक निर्माण घटता है और अस्थायी रूप से दर्द से राहत मिलती है।</p>
<p><strong>वाणी और मुख की शुद्धता यज्ञ और अनुष्ठानों के लिए अनिवार्य </strong></p>
<p>टीएमडीसीआरसी में ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. सिवन सतीश ने कहा, आयुर्वेद में मुख-गुहा को समग्र स्वास्थ्य का दर्पण माना गया है। उन्होंने वैदिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए बताया, ऋग्वेद में मुख, दंत और जीभ जैसे मौखिक अंगों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। वैदिक मंत्रों में मुख संबंधी पीड़ा, रोगों और उनके निवारण हेतु उपचारात्मक प्रार्थनाएं वर्णित हैं। यजुर्वेद में वाणी और मुख की शुद्धता को यज्ञ और अनुष्ठानों के लिए अनिवार्य बताया गया है, जबकि सामवेद में वाणी-उत्पादन, मुखगुहा की समन्वित क्रियाविधि, यहां तक कि तंत्रिका और न्यूरो-मस्कुलर समन्वय के संकेत मिलते हैं।</p>
<p><strong>कृमि को रोगकारक तत्व के रूप में पहचाना गया </strong></p>
<p>अथर्ववेद में मुख रोग (मुखर), दंतशूल और मुख से रक्तस्राव के सर्वाधिक स्पष्ट उल्लेख पाए जाते हैं, जहां कृमि को रोगकारक तत्व के रूप में पहचाना गया है, जिसे दंत क्षय (डेंटल कैरीज़) की प्रारंभिक अवधारणा माना जा सकता है। संचालन टीएमयू आईकेएस सेंटर की समन्वयक डॉ. अलका अग्रवाल और लॉ फैकल्टी डॉ. माधव शर्मा ने संयुक्त रूप से किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_use_of_turmeric_in_medicine_and_rituals_dates_back_6000_years/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
