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	<title>आदिनाथ दिगंबर जैन कुआं वाले जैन मंदिर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>आदिनाथ दिगंबर जैन कुआं वाले जैन मंदिर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्यश्री ने कहा सत्य ही असत्य का ज्ञान कराता है : निराला रंग विहार बना अयोध्या नगरी, होगा ध्वजारोहण </title>
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		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 13:12:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आदिनाथ दिगंबर जैन कुआं वाले जैन मंदिर के 5 से 10 जून तक होने वाले पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए नगर में पधारे पट्टाचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने निराला रंग बिहार में धर्मसभा में कहा कि सत्य ही असत्य का ज्ञान कराता है। सत्य का जीवन अलौकिक आनंदमय है। भिंड से पढ़िए, सोनल जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आदिनाथ दिगंबर जैन कुआं वाले जैन मंदिर के 5 से 10 जून तक होने वाले पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए नगर में पधारे पट्टाचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने निराला रंग बिहार में धर्मसभा में कहा कि सत्य ही असत्य का ज्ञान कराता है। सत्य का जीवन अलौकिक आनंदमय है। <span style="color: #ff0000">भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> आदिनाथ दिगंबर जैन कुआं वाले जैन मंदिर के 5 से 10 जून तक होने वाले पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए नगर में पधारे पट्टाचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने निराला रंग बिहार में धर्मसभा में कहा कि सत्य ही असत्य का ज्ञान कराता है। सत्य का जीवन अलौकिक आनंदमय है। सत्य अनंत अनंतानंत प्रकार का है जितनी भी पर्याय (शरीर) है द्रव्य अनंतानंत सिद्ध परमात्मा है वह सत्य है। उन्होंने कहा वाणी का सत्य प्राणी का सत्य मन का सत्य भावों का सत्य झूठ बोलते हुए भी सत्य विराजमान रहता है झूठ बोलते हुए भी सत्य विराजमान रहता है आज भगवान ऋषभदेव राम नहीं है लेकिन कभी थे नाम आया है तो यह सत्य है वस्तु वस्तु है सत्य सत्य है। पट्टाचारी विशुद्ध सागर महाराज ने आगे कहा कि शरीर को वस्त्रों की आवश्यकता नहीं जिसमें वासना है उसे वस्त्रों की आवश्यकता है। वस्त्रों की आवश्यकता होती तो निर्ग्रन्थ मुनि भी वस्त्र पहने हुए होते। प्रकृति पशु पछी को भी आवश्यकता नहीं बहुत सारी आवश्यकताएं किसी को नहीं। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन मंदिर जाते हो एक बार श्मशान घाट भी चले जाया करो। वस्तु का मिलना पुण्य उदय है। वस्तु का भोगना पाप बंद है वस्तु का त्याग करना तपस्या है।</p>
<p><strong>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ में कलश घटयात्रा 5 जून को</strong></p>
<p>पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के सत्संग सानिध्य में 5 से 10 जून तक होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर कलश घटयात्रा का आयोजन पैच नंबर 2 कुआं वाले जैन मंदिर से प्रातः काल 6.30 बजे होने जा रहा है। पार्षद मनोज जैन ने बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ में प्रातः काल 6.30 बजे घटयात्रा में महिलाएं हाथों में कलश लेकर पेच नंबर 2 कुआं वाले जैन मंदिर से निकलेंगी, जो इटावा रोड जिला पंचायत वाली गली, देव नगर कॉलोनी, महावीर गंज होते हुए निराला रंग बिहार में बने अयोध्या नगरी पहुंचेंगी। जहां पर मंडप शुद्ध एवं ध्वजारोहण कार्यक्रम होगा।</p>
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		<title>पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी के सानिध्य में निकली शोभायात्रा : नवनिर्मित रथ पर विराजमान हुए श्रीजी </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:14:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नसिया जी कमेटी द्वारा तैयार आकर्षक रथ पर नगर भ्रमण को निकले भगवान आदिनाथ, महामस्तकाभिषेक में जनसैलाब उमड़ा। भगवान आदिनाथ के जयकारे लगे। भिंड से सोनल जैन की यह रिपोर्ट&#8230; भिंड। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित ऐतिहासिक नगरी भिंड इन दिनों पूरी तरह से धर्म और अध्यात्म के रंग में सराबोर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नसिया जी कमेटी द्वारा तैयार आकर्षक रथ पर नगर भ्रमण को निकले भगवान आदिनाथ, महामस्तकाभिषेक में जनसैलाब उमड़ा। भगवान आदिनाथ के जयकारे लगे। <span style="color: #ff0000">भिंड से सोनल जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित ऐतिहासिक नगरी भिंड इन दिनों पूरी तरह से धर्म और अध्यात्म के रंग में सराबोर है। स्थानीय आदिनाथ दिगंबर जैन कुआं वाले जैन मंदिर में ससंघ विराजमान पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में बुधवार को एक ऐतिहासिक धार्मिक उत्सव का आयोजन किया गया। सूर्य सागर उदासीन आश्रम नसिया जी कमेटी द्वारा नवनिर्मित कराए गए भव्य और नक्काशीदार रथ पर जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (श्रीजी) को विराजमान कर नगर में शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा केवल एक धार्मिक जुलूस नहीं, बल्कि पूरे भिंड नगर के लिए एक उत्सव बन गई। जैसे ही नवनिर्मित रथ पर श्रीजी की प्रतिमा को विराजमान किया गया, पूरा परिसर आचार्य विशुद्ध सागर महाराज की जय और भगवान आदिनाथ की जय के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।</p>
<p><strong>भक्ति और उल्लास के साथ हुआ नगर भ्रमण</strong></p>
<p>आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ हुई यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई गुजरी। शोभायात्रा में सबसे आगे जैन ध्वज लिए श्रद्धालु चल रहे थे, जिनके पीछे बैंड-बाजे की मधुर धार्मिक धुनों पर थिरकते युवा और मंगल कलश धारण किए पीत वस्त्र धारी महिलाएं चल रही थीं। मार्ग में जगह-जगह जैन समाज सहित अन्य समाज के नागरिकों ने भी पलक-पावड़े बिछाकर भगवान की अगवानी की। अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं ने श्रीजी की आरती उतारी और पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज के ससंघ चरणों में अर्घ्य समर्पित कर आशीर्वाद लिया।</p>
<p>इस दौरान नसिया जी कमेटी के पदाधिकारी और समाज के वरिष्ठ पुरुष-महिलाएं व्यवस्थाओं को संभालते हुए पूरे उत्साह के साथ चल रहे थे।</p>
<p><strong>नसिया जी प्रांगण में संपन्न हुआ महामस्तकाभिषेक</strong></p>
<p>नगर के विभिन्न मुख्य चौराहों और मार्गों का भ्रमण करते हुए यह भव्य शोभायात्रा सूर्य सागर उदासीन आश्रम श्नसिया जीश् प्रांगण पहुंची। यहां का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो चुका था। मुनिश्री के पावन निर्देशों और मंत्रोच्चार के बीच भगवान आदिनाथ का भव्य महामस्तकाभिषेक कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। श्रावकों ने सबसे पहले जल, दूध, दही, घृत, चंदन और सर्वाैषधि से भगवान का अभिषेक किया। इसके बाद गंधोदक लेकर श्रद्धालुओं ने अपने मस्तक पर लगाया। महामस्तकाभिषेक के पुण्य अवसर पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि भगवान की रथयात्रा और अभिषेक का दर्शन आत्मा को पवित्र करने वाला होता है। रथ पर आरूढ़ भगवान इस बात का प्रतीक हैं कि हमें भी अपने जीवन रूपी रथ को धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाना चाहिए।</p>
<p><strong>धार्मिक आयोजन से संपूर्ण अंचल में हर्ष’</strong></p>
<p>इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में सूर्य सागर उदासीन आश्रम नसिया जी कमेटी के सभी सदस्यों, कुआं वाले जैन मंदिर प्रबंध समिति और भिंड के सकल दिगंबर जैन समाज ने अपनी सराहनीय भूमिका निभाई। इस ऐतिहासिक और आलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए भिंड शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण अंचलों और अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में जैन-अजैन श्रद्धालु पहुंचे थे।</p>
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