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	<title>आचार्य समय सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>आचार्य समय सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>चातुर्मास 2026 हेतु कस्बा मड़ावरा में मुनिसंघ की भव्य आगवानी : आचार्य समयसागर जी के मंगल आशीर्वाद से मुनि निर्मद सागर एवं मुनि नीरज सागर जी को मिला वर्षायोग </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:35:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनि श्री निर्मदसागर जी एवं मुनि श्री नीरजसागर जी महाराज का वर्षायोग चातुर्मास मड़ावरा में प्रारंभ हुआ। 600 किलोमीटर पदविहार के बाद जैन समाज ने भव्य मंगल आगवानी की। पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट। मड़ावरा (ललितपुर)। वर्षायोग 2026 के पावन चातुर्मास हेतु आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनि श्री निर्मदसागर जी एवं मुनि श्री नीरजसागर जी महाराज का वर्षायोग चातुर्मास मड़ावरा में प्रारंभ हुआ। 600 किलोमीटर पदविहार के बाद जैन समाज ने भव्य मंगल आगवानी की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मड़ावरा (ललितपुर)।</strong> वर्षायोग 2026 के पावन चातुर्मास हेतु आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनि श्री निर्मदसागर जी महाराज एवं मुनि श्री नीरजसागर जी महाराज का वर्णी नगर मड़ावरा में मंगल आगमन हुआ। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से लगभग 600 किलोमीटर का पदविहार पूर्ण कर गुरुवार को मुनिसंघ के नगर आगमन पर जैन समाज ने श्रद्धा एवं उल्लास के साथ भव्य स्वागत किया।</p>
<p><strong>दयोदय गौशाला से हुई मंगल आगवानी</strong></p>
<p>नगर के गिरार राजमार्ग स्थित दयोदय गौशाला में सैकड़ों श्रद्धालु एकत्रित हुए और भक्तिभाव से मुनिसंघ की अगवानी की। धार्मिक जयघोषों के बीच मुनिसंघ ने गौशाला का अवलोकन किया तथा गौसेवा के कार्यों की सराहना की।</p>
<p><strong>भव्य शोभायात्रा बनी आकर्षण का केंद्र</strong></p>
<p>गौशाला से विहार के पश्चात कस्बे की सीमा पर सकल दिगम्बर जैन समाज मड़ावरा द्वारा भव्य मंगल स्वागत किया गया। गाजे-बाजे एवं धार्मिक ध्वजों के साथ निकली शोभायात्रा मुख्य मार्गों से होती हुई महावीर विद्याविहार पहुँची। शोभायात्रा में नवयुवतियों का दिव्य घोष विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विभिन्न संस्थाओं के सदस्य अपनी पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर धर्म प्रभावना का संदेश देते नजर आए।</p>
<p><strong>पदविहार कराने वाले श्रद्धालुओं का सम्मान</strong></p>
<p>महावीर विद्याविहार के सभागार में मुनिसंघ के विराजमान होने के उपरांत समिति द्वारा उन श्रद्धालुओं का सम्मान किया गया जिन्होंने लगभग 600 किलोमीटर की पदयात्रा में मुनिसंघ के साथ रहकर सेवा एवं सहयोग प्रदान किया।</p>
<p><strong>धर्ममय हुआ वातावरण</strong></p>
<p>मुनिसंघ के आगमन से सम्पूर्ण मड़ावरा नगर धर्ममय वातावरण में सराबोर हो गया। सकल दिगम्बर जैन समाज एवं क्षेत्रीय समाजजनों ने इसे अपने लिए परम सौभाग्य बताते हुए चातुर्मास के दौरान अधिकाधिक धर्माराधना एवं आत्मकल्याण का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>आत्मकल्याण का मिलेगा अवसर</strong></p>
<p>चातुर्मास के दौरान श्रद्धालुओं को मुनिसंघ के सान्निध्य में प्रवचन, स्वाध्याय, संयम साधना एवं धर्माराधना का लाभ प्राप्त होगा। समाज ने इसे नगर के आध्यात्मिक उत्थान का महत्वपूर्ण अवसर बताया।</p>
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		<title>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने आचार्य श्री समय सागर जी को भोपाल चातुर्मास हेतु श्रीफल अर्पित किया : प्राकृत शोध एवं जिनशासन प्रभावना पर हुआ मार्गदर्शन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Jul 2026 11:05:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के प्रतिनिधिमंडल ने नवाचार्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ससंघ के दर्शन कर वर्ष 2026 के चातुर्मास हेतु भोपाल में विराजमान होने का श्रीफल अर्पित कर विनम्र निवेदन किया। पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट। इंदौर। राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने विहाररत परम पूज्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के प्रतिनिधिमंडल ने नवाचार्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ससंघ के दर्शन कर वर्ष 2026 के चातुर्मास हेतु भोपाल में विराजमान होने का श्रीफल अर्पित कर विनम्र निवेदन किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल ने विहाररत परम पूज्य विद्याशिरोमणि नवाचार्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ससंघ के पावन दर्शन कर वर्ष 2026 के आगामी चातुर्मास भोपाल में सम्पन्न होने की मंगल भावना के साथ श्रीफल अर्पित कर विनम्र निवेदन किया तथा उनका मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>प्रतिनिधिमंडल ने किया श्रीफल समर्पण</strong></p>
<p>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के केंद्रीय संघ नायक राकेश जी गोहिल, केंद्रीय संघ कोषाध्यक्ष वीरेंद्र जी अजमेरा, भोपाल संघ नायक जयदीप जी शास्त्री, शाखा संवाहक डॉ. मनोज जी सहित प्रतिनिधिमंडल ने पूज्य आचार्य श्री के समक्ष वर्षायोग भोपाल में सम्पन्न होने की प्रार्थना करते हुए श्रीफल अर्पित किया।</p>
<p><strong>धर्म एवं जिनशासन प्रभावना का मिला संदेश</strong></p>
<p>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि पूज्य नवाचार्य आचार्य भगवंत ने सभी सदस्यों को धर्म, संयम एवं जिनशासन की प्रभावना के लिए समर्पित भाव से निरंतर कार्य करने का मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
<p><strong>प्राकृत शोध संस्थान पर हुई चर्चा</strong></p>
<p>प्रतिनिधिमंडल ने पूज्य आचार्य श्री से प्राकृत शोध संस्थान, वैशाली (बिहार) की भावी योजनाओं, शोध गतिविधियों एवं विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा की। पूज्य आचार्य श्री ने प्राकृत भाषा, जैन आगमों के अध्ययन, संरक्षण एवं शोध कार्यों के व्यापक संवर्धन के लिए प्रेरणादायी मार्गदर्शन प्रदान किया।</p>
<p><strong>संघ ने व्यक्त किया आभार</strong></p>
<p>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने पूज्य आचार्य श्री के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके सान्निध्य एवं मार्गदर्शन को संघ के लिए प्रेरणास्रोत बताया तथा वर्ष 2026 का चातुर्मास भोपाल में सम्पन्न होने की मंगल भावना व्यक्त करते हुए सफल आयोजन के लिए प्रार्थना की।</p>
<p><strong>धर्मकार्य के प्रति समर्पण का संकल्प</strong></p>
<p>प्रतिनिधिमंडल ने आचार्य श्री के आशीर्वाद से जिनशासन की प्रभावना, समाज सेवा एवं धार्मिक गतिविधियों को और अधिक गति देने का संकल्प लिया तथा आगामी योजनाओं को समर्पित भाव से आगे बढ़ाने का विश्वास व्यक्त किया।</p>
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		<title>दद्दू ने किए आचार्य समय सागर जी के दर्शन एवं चरण वंदना : आशीर्वाद लेकर धर्म प्रभावना का लिया संकल्प </title>
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		<pubDate>Sun, 12 Jul 2026 14:45:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्म समाज प्रचारक एवं दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने इटारसी के समीप आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के दर्शन कर चरण वंदना की तथा उनका मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर अनेक गणमान्यजन भी उपस्थित रहे। पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट। इटारसी। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धर्म समाज प्रचारक एवं दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने इटारसी के समीप आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के दर्शन कर चरण वंदना की तथा उनका मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर अनेक गणमान्यजन भी उपस्थित रहे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इटारसी।</strong> धर्म समाज प्रचारक एवं दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने मध्यान्ह में इटारसी के समीप श्रमण संस्कृति के महाश्रमण आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के दर्शन कर चरण वंदना की तथा उनका मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>धर्मगुरु का मिला सान्निध्य</strong></p>
<p>राजेश जैन दद्दू ने आचार्य श्री के श्रीचरणों में विनम्र वंदना कर धर्म प्रभावना एवं समाजहित के कार्यों के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए कहा कि संतों का सान्निध्य आत्मिक उन्नति और जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।</p>
<p><strong>गणमान्यजनों की रही उपस्थिति</strong></p>
<p>इस अवसर पर प्रसिद्ध कवि द्वय चंद्रसेन जैन एवं अजय जैन &#8216;अहिंसा&#8217;, कुंडलपुर तीर्थ के महामंत्री ऋषभ जैन, धन्नू शिखर बड़कुल, नितिन जैन तथा पत्रकार मनोज जैन सहित अनेक श्रद्धालु एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>धर्म प्रभावना का संदेश</strong></p>
<p>आचार्य श्री के दर्शन एवं आशीर्वाद से उपस्थित श्रद्धालुओं ने धर्म, संयम, सदाचार एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>आगामी गतिविधियां</strong></p>
<p>धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि संतों के सान्निध्य से समाज में आध्यात्मिक जागरण और धर्म प्रभावना के कार्यों को निरंतर गति मिल रही है।</p>
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		<title>गुजरात से असम तक निकली आचार्य श्री विद्यासागर जी की प्रेरणा यात्रा : मूक माटी म्यूजियम व गुरु मंदिर निर्माण हेतु भव्य रथ यात्रा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Aug 2025 15:22:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हीरापुर (जिला सागर, मध्य प्रदेश) में बनने जा रहे “श्री विद्यासागरम गुरु मंदिर मूक माटी म्यूजियम” हेतु गुजरात से असम तक निकली रथ यात्रा जन-जन में आचार्य विद्यासागर जी के संयम, साधना और आध्यात्मिक जीवन का संदेश प्रसारित कर रही है। पढ़िए राजीव सिंघई की ख़ास रिपोर्ट… हीरापुर (म.प्र.)। संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>हीरापुर (जिला सागर, मध्य प्रदेश) में बनने जा रहे “श्री विद्यासागरम गुरु मंदिर मूक माटी म्यूजियम” हेतु गुजरात से असम तक निकली रथ यात्रा जन-जन में आचार्य विद्यासागर जी के संयम, साधना और आध्यात्मिक जीवन का संदेश प्रसारित कर रही है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई की ख़ास रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>हीरापुर (म.प्र.)।</strong> संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के अमृत जीवन से प्रेरित, उनके परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में, श्री दिगम्बर जैन प्रभावना संघ द्वारा “श्री विद्यासागरम गुरु मंदिर मूक माटी म्यूजियम” के निर्माण हेतु भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया गया है।</p>
<p>यह रथ यात्रा गुजरात से प्रारंभ होकर असम की दिशा में अग्रसर है, जो हर नगर, ग्राम और समाज को संयम, साधना और त्याग की प्रेरणा प्रदान कर रही है। रथ में आचार्य श्री विद्यासागर जी की भव्य प्रतिमा को आकर्षक रूप से सजाया गया है, जो दर्शकों के लिए श्रद्धा और प्रेरणा का केंद्र बन चुकी है।</p>
<p>रथ के चारों ओर लगाए गए फ्लेक्स बैनरों में आचार्य संघ के मुनिराजों व आर्यिकाओं के जीवन प्रसंगों, साधना यात्राओं और तपस्वी जीवन को दिखाया गया है। यह दृश्य श्रद्धालुओं को न केवल धर्म के प्रति नत करता है, बल्कि आत्मिक उन्नति की ओर भी प्रेरित करता है।</p>
<p><strong>यह है इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य </strong></p>
<p>इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज को आचार्य श्री की संयममय साधना, धार्मिक दृष्टिकोण और सामाजिक सेवा के संदेश से अवगत कराना है। साथ ही हीरापुर (जिला सागर, म.प्र.) में बन रहे मूक माटी म्यूजियम व गुरु मंदिर के लिए जनजागरूकता एवं सहयोग को एकत्र करना भी इस यात्रा का लक्ष्य है।</p>
<p>रथ यात्रा जिस भी नगर में पहुँच रही है, वहाँ का जैन समाज पूरे श्रद्धा भाव से यात्रा का स्वागत कर रहा है। फूल वर्षा, भजन संध्या, धर्मसभा और जनसंवाद जैसे कार्यक्रमों से यह यात्रा एक धार्मिक उत्सव का रूप ले रही है।</p>
<p><strong><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/2728.png" alt="✨" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> विशेष बिंदु:</strong></p>
<p>&#8211; यह यात्रा समाज में संयम, सेवा और साधना के मूल्यों को जीवंत करती है</p>
<p>&#8211; ⁠मूक माटी म्यूजियम जैन परंपरा का भव्य केंद्र बनेगा</p>
<p>&#8211; ⁠आचार्य विद्यासागर जी का तपस्वी जीवन समाज के लिए युग प्रेरणा है</p>
<p>&#8211; ⁠युवाओं में धार्मिक चेतना और संस्कार जाग्रत करने का प्रयास</p>
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		<title>जैन समाज ने की अनुमोदना : सांसद ने की सदन में कुंडलपुर को दमोह रेल लाइन से जोड़ने की मांग </title>
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		<pubDate>Fri, 09 Aug 2024 17:00:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दमोह (राजेश जैन दद्दू)। कुंडलपुर में नव आचार्य श्री 108 समय सागर महाराज जी एवं निर्यापक मुनि श्री 108 अभय सागर महाराज जी की निर्देशन में दमोह कुंडलपुर रेल लिंक लाइन के लिए मार्गदर्शन दमोह सांसद राहुल लोधी द्वारा प्राप्त किया गया था। संसद में सांसद द्वारा दमोह कुंडलपुर रेल लाइन हेतु बात रखी गई। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>दमोह (राजेश जैन दद्दू)।</strong> कुंडलपुर में नव आचार्य श्री 108 समय सागर महाराज जी एवं निर्यापक मुनि श्री 108 अभय सागर महाराज जी की निर्देशन में दमोह कुंडलपुर रेल लिंक लाइन के लिए मार्गदर्शन दमोह सांसद राहुल लोधी द्वारा प्राप्त किया गया था। संसद में सांसद द्वारा दमोह कुंडलपुर रेल लाइन हेतु बात रखी गई।</p>
<p>संपूर्ण जैन समाज आपके द्वारा किए गए कार्य की बहुत-बहुत अनुमोदना करता है। इंदौर दिगम्बर जैन समाज के मंत्री डॉ. जैनेन्द्र जैन ने आप के इस प्रयास के लिए कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए आप को समग्र जैन समाज की ओर से बधाई दी।</p>
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		<title>चातुर्मास स्थल तक संघ के विहार की सभी व्यवस्थाएं कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी संभालेगी : आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ससंघ का मड़ियादो आगमन </title>
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		<pubDate>Wed, 10 Jul 2024 07:58:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विद्या शिरोमणि परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज का सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में लगभग तीन माह का प्रवास रहा ।इस बीच आचार्य पदारोहण अनुष्ठान कार्यक्रम संपन्न हुआ। सहस्त्रकूट जिनालय वेदी प्रतिष्ठा होकर प्रतिमा विराजमान हुई। पूज्य बड़े बाबा मंदिर का कलशारोहण, सहस्त्रकूट जिनालय का कलशारोहण, छहघरिया स्थित भगवान मुनिसुब्रतनाथ जिनालय वेदी प्रतिष्ठा प्रतिमा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विद्या शिरोमणि परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज का सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में लगभग तीन माह का प्रवास रहा ।इस बीच आचार्य पदारोहण अनुष्ठान कार्यक्रम संपन्न हुआ। सहस्त्रकूट जिनालय वेदी प्रतिष्ठा होकर प्रतिमा विराजमान हुई। पूज्य बड़े बाबा मंदिर का कलशारोहण, सहस्त्रकूट जिनालय का कलशारोहण, छहघरिया स्थित भगवान मुनिसुब्रतनाथ जिनालय वेदी प्रतिष्ठा प्रतिमा विराजमान एवं कलशारोहण होकर, पूज्य बड़े बाबा के चरण एवं श्रीधर केवली के चरण स्थापित हुए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर (दमोह)।</strong> विद्या शिरोमणि परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज का सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में लगभग तीन माह का प्रवास रहा ।इस बीच आचार्य पदारोहण अनुष्ठान कार्यक्रम संपन्न हुआ। सहस्त्रकूट जिनालय वेदी प्रतिष्ठा होकर प्रतिमा विराजमान हुई। पूज्य बड़े बाबा मंदिर का कलशारोहण, सहस्त्रकूट जिनालय का कलशारोहण, छहघरिया स्थित भगवान मुनिसुब्रतनाथ जिनालय वेदी प्रतिष्ठा प्रतिमा विराजमान एवं कलशारोहण होकर, पूज्य बड़े बाबा के चरण एवं श्रीधर केवली के चरण स्थापित हुए। आचार्य श्री समयसागर जी महाराज का 7 जुलाई 2024 को कुंडलपुर सिद्ध क्षेत्र से ससंघ मंगल विहार हुआ। आचार्य श्री संघ का रात्रि विश्राम मजगुंवा पतोल ग्राम में हुआ। कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी ने गुरुदेव के विहार के साथ ही विहार की संपूर्ण व्यवस्थाएं संभाली और कमेटी पदाधिकारी सदस्यगण निरंतर विश्राम स्थल चयन से लेकर अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थाएं जुटाने में संलग्न हैं।</p>
<p>चातुर्मास स्थल तक सभी व्यवस्थाएं कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी संभालेगी। 8 जुलाई को आचार्य संघ का हटा नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। आहारचर्या, सामायिक के पश्चात विहार हुआ एवं कनकतला ग्राम में रात्रि विश्राम हुआ ।9 जुलाई को प्रातः मडियादो ग्राम में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। गाजे बाजे के साथ भव्य अगवानी की गई। आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन हुआ, शास्त्र अर्पण किए गए। आचार्य श्री की पूजन हुई। सभी साधुओं की आहारचर्या संपन्न हुई। आचार्य भक्ति हुई एवं आचार्य संघ का रात्रि विश्राम मडियादो ग्राम में ही हुआ।10 जुलाई को प्रातः आचार्य श्री संघ का कलकुंआ ग्राम की ओर विहार होगा, जहां आचार्य संघ की आहारचर्या संपन्न होगी।</p>
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		<title>नवनिर्मित मानस्तंभ में प्रतिमायें स्थापित हुई : सहस्त्रकूट जिनालय में1008 प्रतिमायें स्थापित की जा रही </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Jun 2024 10:02:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के सानिध्य में बड़े बाबा जिनालय का कलशारोहण एवं सहस्त्रकूट जिनालय वेदी प्रतिष्ठा का अभूतपूर्व आयोजन चल रहा है। 9 जून को प्रातः अभिषेक, शांतिधारा, नित्यमह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के सानिध्य में बड़े बाबा जिनालय का कलशारोहण एवं सहस्त्रकूट जिनालय वेदी प्रतिष्ठा का अभूतपूर्व आयोजन चल रहा है। 9 जून को प्रातः अभिषेक, शांतिधारा, नित्यमह पूजन उपरांत सहस्त्रकूट मानस्तंभ, मुनिसुब्रतनाथ जिनालय वेदी शुद्धि संस्कार के उपरांत मानस्तंभ में श्री जी की प्रतिमाओं की स्थापना आचार्य संघ के मंगल सानिध्य में की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर (दमोह)।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के सानिध्य में बड़े बाबा जिनालय का कलशारोहण एवं सहस्त्रकूट जिनालय वेदी प्रतिष्ठा का अभूतपूर्व आयोजन चल रहा है। 9 जून को प्रातः अभिषेक, शांतिधारा, नित्यमह पूजन उपरांत सहस्त्रकूट मानस्तंभ, मुनिसुब्रतनाथ जिनालय वेदी शुद्धि संस्कार के उपरांत मानस्तंभ में श्री जी की प्रतिमाओं की स्थापना आचार्य संघ के मंगल सानिध्य में की गई। इसके पश्चात सहस्त्रकूट जिनालय में जिनविम्ब, जिन प्रतिमा स्थापित करने का क्रम प्रारंभ हुआ। प्रतिमाएं गगन विहार करके सहस्त्रकूट जिनालय में पहुंचाई गईं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-61853" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0023.jpg" alt="" width="1600" height="1064" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0023.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0023-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0023-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0023-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0023-1536x1021.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0023-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0023-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0023-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0023-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0023-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0023-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0023-1320x878.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />पुस्तकों का विमोचन</strong></p>
<p>प्रचारमंत्री जय कुमार जैन जलज ने बताया कि इस अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज की संगीतमय पूजा की गई। इस अवसर पर आचार्य विद्यासागर जी महाराज द्वारा रचित जापानी कविता हाईकू पुस्तक का मराठी एवं कन्नड़ भाषा में अनुवाद करके प्रकाशित दोनों पुस्तकों का विमोचन किया गया। नव निर्मित बुंदेलखंड का प्रथम सहस्त्रकूट जिनालय में गगन विहार कर प्रतिमायें विराजित की जा रही हैं, तब उस दृश्य का स्मरण हो गया जब आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के पड़गाहन पर पूज्य बड़े बाबा गगन विहार करके नए मंदिर में विराजित हुए थे। सहस्त्रकूट जिनालय में प्रतिमा स्थापित करने का क्रम अगले दिन भी जारी रहेगा। कल छहघरिया जिनालय में भगवान मुनिसुब्रतनाथ की प्रतिमा विराजित होगी।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-61854" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0021.jpg" alt="" width="1600" height="1064" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0021.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0021-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0021-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0021-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0021-1536x1021.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0021-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0021-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0021-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0021-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0021-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0021-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0021-1320x878.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />कलुषित भावों से होता है पतन</strong></p>
<p>इस अवसर पर पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि आत्मा का पतन आत्मगत परिणामों के द्वारा ही हुआ करता है और आत्मा का जो उत्थान है वह भी आत्मगत पवित्र परिणाम के द्वारा हुआ करता है ।यह आगम के माध्यम से हमें ज्ञात हो जाता है। वस्तुतः प्रत्येक जीव स्वतंत्र परिणमन कर सकता है किंतु उसकी जो स्वतंत्रता है वह लुप्त हो चुकी है कर्माधीन परिणमन जब तक उस जीव का चलेगा तब तक वह बंधन का ही अनुभव करता है और बंधन का अनुभव करता हुआ संसारी प्राणी अनेक प्रकार के परिणाम कर लेता है। कलुषित भावों के माध्यम से उसका पतन होता है और कलुषित भावों के लिए ऐसे कौन से पदार्थ हैं जिनके माध्यम से वह आत्मा पतित होती चली जाती है। एक कारिका के माध्यम से इस विषय को थोड़ा सा विस्तार देना चाहते हैं। जिनेंद्र भगवान ने स्पष्ट कहा है कि इंद्रियों के माध्यम से उत्पन्न होने वाला जो सुख है वह ऐसा कहा है पांचों इंद्रियों के माध्यम से उत्पन्न होने वाला सुख हुआ करता है और वह सुख कैसा है मोह के दावानल को प्रज्वलित करने के लिए वह ईंधन का काम करता है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-61855" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0020.jpg" alt="" width="1280" height="588" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0020.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0020-300x138.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0020-1024x470.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0020-768x353.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240610-WA0020-990x455.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />आचार्य कहना चाहते हैं मोह रूपी जो दावाग्नि है उसको और प्रज्वलित करना है तो इंद्रिय सुख ईंधन का काम करता है। दीपक आपने जलाया है और दीपक जल रहा है तेल अथवा घी दीपक के लिए ईंधन का काम कर रहा है। ईंधन के बिना अग्नि जलती नहीं ईंधन समाप्त हो जाए अग्नि बुझ जाती है किंतु दावाग्नि अनंत काल से वह अग्नि जल रही है। अखंड रूप से एक क्षण भी उसका अभाव नहीं हुआ है। अनंत काल तक अभी भी वह अग्नि शांत नहीं हो रही है क्योंकि उसको ईंधन प्रतिफल मिल रहा है। ईंधन डालते चले जाओ अग्नि को बुझाया संभव नहीं है। दुख की परंपरा का वह बीज है दुख समाप्त हो आप प्रभु के चरणों में आकर जुड़ोगे भगवान सुनने वाले नहीं वह सुनते नहीं कुछ करते नहीं उन्होंने जगत का जो स्वरूप है बोध हो चुका है। संसारी प्राणी उपदेश देने से मानता नहीं क्योंकि जब तक अनुभव नहीं होगा तब तक वह ज्ञान प्रकट ही नहीं हो होता। अनुभव अनंत काल से हो रहा है। दुख का अनुभव हो रहा है इसके उपरांत भी पंचेेंद्री के विषयों के प्रति जो आकर्षण बना हुआ है वह समाप्त नहीं हो रहा है उसको समाप्त करने के लिए भी जिनेंद्र भगवान की आराधना हमें करनी है। स़हस्त्रकूट का निर्माण हुआ है और उसमें विम्ब स्थापित हो रहे हैं उनका दर्शन करके हमें अपने मोह को शांत करना है। अपने आप शांत नहीं होगा। क्योंकि वह अग्नि अपने आप जल नहीं रही है। अग्नि और उद्लित हो रही है उसको विषयों से मोड़ने की आवश्यकता है ।महाराज चारों ओर विषय दिखाई देते हैं हम क्या करें आंख खोलेंगे तो पांचो इंद्रियों के विषय आपके सामने उपस्थित हैं। किंतु उन पदार्थों को ग्रहण करने का भाव नहीं होना चाहिए। ग्रहण करना ठीक नहीं क्योंकि अपने से पृथक जो पदार्थ हैं वे अपने नहीं हो सकते तो अपना जो स्वरूप है उसको देखने के लिए आंख मूंदना होगा।</p>
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		<title>इंद्र-इंद्राणी ने भक्ति भाव से अर्घ्य चढ़ाएं : याग मंडल विधान का हुआ भव्य आयोजन </title>
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		<pubDate>Sun, 09 Jun 2024 10:08:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के मंगल सानिध्य में सहस्त्रकूट जिनालय का वेदी प्रतिष्ठा समारोह एवं बड़े बाबा जिनालय का कलशारोहण समारोह का अभूतपूर्व आयोजन चल रहा है। इस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के मंगल सानिध्य में सहस्त्रकूट जिनालय का वेदी प्रतिष्ठा समारोह एवं बड़े बाबा जिनालय का कलशारोहण समारोह का अभूतपूर्व आयोजन चल रहा है। इस अवसर पर आचार्य समय सागर महाराज के प्रवचन भी हुए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर (दमोह)।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के मंगल सानिध्य में सहस्त्रकूट जिनालय का वेदी प्रतिष्ठा समारोह एवं बड़े बाबा जिनालय का कलशारोहण समारोह का अभूतपूर्व आयोजन चल रहा है। 8 जून को श्री यागमंडल विधान का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य सम्राट ब्रह्मचारी विनय भैया बंडा ने विधि विधान से याग मंडल विधान की सभी क्रियाएं संपन्न कराईक्ष। प्रातः अभिषेक, शांति धारा, पूजन उपरांत याग मंडल विधान प्रारंभ हुआ।</p>
<p>विधान में बैठे हजारों इंद्र-इंद्राणियों ने अत्यंत भक्ति भाव से संगीत की स्वर लहरियों के बीच पूजन करते हुए प्रत्येक अर्घ्य चढ़ाए। क्रमबद्ध श्रीफल सहित अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य भी प्रत्येक को प्राप्त हुआ। इस बीच पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा एवं पूजन विधान संपन्न हुई। मुनि संघ एवं आर्यिका संघ की आहार चर्या भी संपन्न हुई।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-61769" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011.jpg" alt="" width="1600" height="1068" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-1024x684.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-768x513.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-1536x1025.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-990x661.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240609-WA0011-1320x881.jpg 1320w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />आत्मतत्व में उपयोग केंद्रित </strong></p>
<p>इस अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि पूर्ण रूप से उस दीपक के द्वारा प्रकाश नहीं मिल पा रहा है। दीपक की लौ स्थिर हो जाए तो पूरा का पूरा प्रकाश फैल जाता है। इसी प्रकार वह आत्म तत्व में उपयोग केंद्रित है और वह केंद्रित एक अंतर मुहूर्त के लिए हो जाए तो केवल ज्ञान रूपी दीपक जलेगा और विश्व प्रकाशित हो सकता है। आज तक सब कुछ संसारी प्राणी ने कार्य किया है केवल पुनरावृत्ति करता चला जा रहा है।किंतु आज तक कोई कार्य नहीं किया है परमात्म तत्व को नहीं जान पाया है, बहुत विस्मय होता है। 33 सागर की आयु है सर्वार्थ सिद्धि और परम सुख लेश्या के साथ अहमिंद्र आदि होते हैं निरंतर तत्व चिंतन में उनका उपयोग लगा होता है।</p>
<p>इसके उपरांत भी आत्म तत्व का संवेदन उन्हें नहीं हो सकता। क्यों ? क्योंकि संयम का अभाव है। द्वादशांग के पाटी होने के उपरांत भी समस्त पदार्थ को जानने की क्षमता रख रहे हैं। भले परोक्ष रूप में हो इसके उपरांत भी आत्म तत्व का वीतराग संवेदन इसको बोलते उससे वह वंचित हैं। क्षायिक सम्यक दृष्टि भी हो सकते कोई बाधा नहीं और 33 सागर तक तत्व चिंतन में लीन होते हुए भी एक विशेष बात और कह रहा हूं वहां पर वासना नहीं है। सोलहवें स्वर्ग तक तो भिन्न-भिन्न स्वर्ग में रहने वाले जो इंद्र आदिक हैं, वह विचार से सहित हैं किंतु नव अनुदिश पंचउन्त्तर विमान में रहने वाले जो अहमहेंद्र हैं, वे शुक्ल लेश्या के धारी होते हैं और वासना का अभाव रहता है। वासना संभव नहीं है इसके बावजूद भी असंयम पल रहा है। बड़ी विचित्र दशा है। 33 सागर तक तत्व का चिंतन करने के बावजूद वहां से उतरकर जीव मनुष्य पर्याय को प्राप्त कर लेता है। वह पुराने संस्कार हैं वह डिलीट हो जाते हैं। 33 सागर तक तत्व चिंतन में लीन रहा, यहां आने के उपरांत वासना जागृत होती है क्यों ?नौकर्म कर्म को फल देने के लिए जो निमित्त डिलीट हो जाते हैं।33 सागर तक तत्व चिंतन में लीन रहा यहां आने के उपरांत वासना जागृत होती है।</p>
<p>नौकर्म कर्म को फल देने के लिए जो ऐसी सामग्री है, उसके बीच में आता है तो अपने कर्म को रोक नहीं पाता, अपने परिणामों को रोक नहीं पाता। 33 सागर संबंधी जो संस्कार थे, वासना के अभाव में तत्व चिंतन किया था, सारा का सारा विस्मृत में हो जाता। यहां आकर के वृषभ नाथ भगवान का जीव, भरत चक्रवर्ती का जीव, बाहुबली का जीव यह तीनों सर्वार्थ सिद्धी से अवतरित हुए हैं। यहां पर अवतरित होने के उपरांत 24 लाख पूर्व की, जिनकी आयु है ऐसे वृषभ नाथ युग की आदि में मोक्ष मार्ग के नेता होने वाले हैं। इसके उपरांत भी वह सारे के सारे तत्व चिंतन के संस्कार डिलीट हो चुके हैं। कर्मबंध से बचना चाहते हो तो नौकर्म से बचने का पुरुषार्थ करो।</p>
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		<title>सहस्त्र कूट जिनालय की भव्य वेदी प्रतिष्ठा कार्यक्रम की हुई शुरुआत : ध्वजारोहण के साथ विशाल घट यात्रा जुलूस निकाला गया </title>
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		<pubDate>Sat, 08 Jun 2024 09:21:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में बड़े बाबा जिनालय का मंगल कलशारोहण एवं सहस्त्रकूट जिनालय की भव्य वेदी प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम के अंतर्गत 7 जून को विशाल घट यात्रा एवं ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित हुआ। युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में बड़े बाबा जिनालय का मंगल कलशारोहण एवं सहस्त्रकूट जिनालय की भव्य वेदी प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम के अंतर्गत 7 जून को विशाल घट यात्रा एवं ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित हुआ। युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के सानिध्य में सर्वप्रथम सामूहिक रूप से भाग्योदय तीर्थ कमेटी सागर द्वारा ध्वजारोहण किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर (दमोह)।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में बड़े बाबा जिनालय का मंगल कलशारोहण एवं सहस्त्रकूट जिनालय की भव्य वेदी प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम के अंतर्गत 7 जून को विशाल घट यात्रा एवं ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित हुआ। युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के चतुर्विध संघ के सानिध्य में सर्वप्रथम सामूहिक रूप से भाग्योदय तीर्थ कमेटी सागर द्वारा ध्वजारोहण किया गया। प्रतिष्ठाचार्य सम्राट विनय भैया ने मंत्रोचार के बीच ध्वजारोहण संपन्न कराया। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज की भक्ति भाव के साथ संगीतमय पूजन हुई।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-61728" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240608-WA0003.jpg" alt="" width="1600" height="1064" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240608-WA0003.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240608-WA0003-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240608-WA0003-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240608-WA0003-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240608-WA0003-1536x1021.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240608-WA0003-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240608-WA0003-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240608-WA0003-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240608-WA0003-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240608-WA0003-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240608-WA0003-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240608-WA0003-1320x878.jpg 1320w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />आचार्य श्री समयसागर जी महाराज का पाद प्रक्षालन भाग्योदय कमेटी के पदाधिकारियों ने किया। आचार्य श्री के चित्र का अनावरण भाग्योदय ट्रस्ट ने किया। शास्त्र समर्पित कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी ने किया। श्रीफल अर्पित जैन पंचायत दमोह एवं कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी सदस्यों द्वारा किया गया। इस अवसर पर हजारों महिलाएं सिर पर कलश रखकर घट यात्रा जुलूस में सम्मिलित हुईं। गाजे-बाजे के साथ घट यात्रा शोभायात्रा ने बड़े बाबा मंदिर की परिक्रमा की। तत्पश्चात सहस्त्रकूट जिनालय में प्रतिष्ठाचार्य द्वारा मंगल कलश से शुद्धि कराई गई। पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा, पूजन विधान हुआ। इस अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा वर्तमान में यह पंचम कलिकाल है यहां पर साक्षात प्रभु का दर्शन संभव नहीं है। किंतु जिनबिम्बों के माध्यम से धर्म की आराधना की जाती है। देव, गुरु, शास्त्र का आलंबन लेकर परिणामों में पवित्रता आती है।</p>
<p>उज्वलता आती है और उसके माध्यम से ही पुण्य का संचय भी होता है। अज्ञान दशा में अर्जित जो पाप कर्म है उसका निर्मूलन भी होता है। गुरुदेव ने कई बार यह बात रखी है। साधन परिणाम उपलब्ध होने के साधना की ओर दृष्टि नहीं जाती, सारे के सारे उपस्थित रहते हैं किंतु उनका उपयोग नहीं हो पाता। टेपरिकॉर्डर अब तो जमाना चला गया किंतु वह भी जमाना था आचार्य महाराज देशना देने के लिए बैठे हैं और श्रावकजन टेपरिकॉर्डर सामने रखते उसमें-कैसेट तो सभी जानते। टेप रिकॉर्ड के भीतर उस कैसेट को फिट किया जाता, बाद में स्विच को ऑन करते हैं तो टेपरिकॉर्डर चालू हो जाता आप लोग सुन लेते हैं। मैं दृष्टांत को रख रहा हूं, ज्ञाना वर्णी कर्म का क्षयोपशम हुआ है वह कैसेट की भांति है और टेप रिकॉर्ड में स्विच को ऑन किया जाता है देशना आप सुन सकते हैं। उसी प्रकार वस्तु स्वरूप को प्राप्त करने की दृष्टि से उसे जानने की दृष्टि से उपयोग केंद्रित हो जाता है। उस पदार्थ का बोध होता है बोध होने के उपरांत उपलब्ध ज्ञान के माध्यम से पदार्थ के बहुत सारे पदार्थ हैं उन अनंतानंत पदार्थों के बीच में कौन सा पदार्थ ग्रहण करने के योग्य है और कौन सा पदार्थ छोड़ने योग्य है यह ज्ञान गुण के माध्यम से होता है।</p>
<p>जो जानने योग्य पदार्थ हैं उसको ज्ञेय की संज्ञा दी गई है। ग्रहण करने योग पदार्थ को उपादेय की संज्ञा दी गई है। छोड़ने योग पदार्थ को हेय की संज्ञा दी गई है। छोड़ने योग्य पदार्थ हेय माने जाते तो छोड़ने योग्य पदार्थ कौन है जिन्हें हम हेय माने ज्ञान के माध्यम से यह बोध हो जाता है। यह छोड़ने योग्य है ग्रहण करने योग्य नहीं यह श्रद्धांन का भी विषय बन जाता है। श्रद्धांन का विषय बनना अलग वस्तु छोड़ने का भाव होना अगल वस्तु। पंचेेंद्रीय के विषय है वह छोड़ने योग्य है। यह सिद्धांत का विषय बनने के उपरांत सम्यक्त उपलब्ध है। श्रद्धांन अलग वस्तु त्याग अलग वस्तु श्रद्धांन में और चारित्र में बड़ा अंतर होता है ।आचार्य श्री ने भरत बाहुबली का प्रसंग सामने रखा। सांयकाल भक्तामर दीप अर्चना एवं पूज्य बड़े बाबा की महाआरती की गई, शास्त्र प्रवचन हुए।</p>
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		<title>धर्मसभा में हुए प्रवचन : आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज का समाधि दिवस धूमधाम से मनाया  </title>
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		<pubDate>Fri, 07 Jun 2024 07:31:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के गुरु आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का समाधि दिवस आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा, पूजन, विधान हुआ। पढ़िए राजीव सिंघई [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के गुरु आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का समाधि दिवस आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा, पूजन, विधान हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>कुंडलपुर(दमोह)</strong>। सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के गुरु आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का समाधि दिवस आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा, पूजन, विधान हुआ। पूज्य आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज,आचार्य श्री समय सागर जी महाराज की भक्ति भाव से पूजा हुई। निर्यापक श्रमण योग सागर जी महाराज द्वारा पूजन का वाचन किया गया। अभय बनगांव द्वारा आचार्य श्री समय सागर जी महाराज को शास्त्र दान किए गए।</p>
<p><strong>नहीं भुला सकते उपकार</strong></p>
<p>इस अवसर पर ज्येष्ठ आर्यिका श्री गुरुमति माताजी ने आचार्य ज्ञान सागर महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज का यह पर्व जीवन में धर्म रूपी शिखर पर कलशारोहण के समान है। जब मंदिर होगा तो उस पर शिखर होगा, शिखर होगा तो उस पर कलशारोहण भी आवश्यक है। जिन महान आत्माओं ने आज तक जिस रत्नात्रय रूपी धर्म को धारण किया है उनके जीवन में वह शिखर का निर्माण हुआ, उन्होंने कलशारोहण किया है। आज उनका 51 वां समाधि दिवस महान पर्व है। एक पर्व ऐसा है जो जो साधक रहेंगे मुक्ति ना हो जावे जब तक पाने की लालसा रहेगी। गुरु नाम गुरु आचार्य ज्ञान सागर जी थे जो ज्ञान देखा जा रहा है उस ज्ञान को देने वाले स्रोत थे। उनके ज्ञान की सुगंधि सारे ब्रह्मांड में सुगंधित हो रही है। एकमात्र श्रेय आचार्य ज्ञान सागर जी को है। आचार्य ज्ञान सागर जी ने अपने जीवन को ही सुभाषित नहीं किया है उन्होंने कई रत्न दिए और कई रत्नत्रय के पुष्प दिए एक पुष्प वह था चैतन्य महाकाव्य जिसका नाम आचार्य विद्यासागर है जिनको आज भी उनके उपकार को भुलाया नहीं जा सकता।</p>
<p><strong>उनके साहित्य पर हुई पीएचडी</strong></p>
<p>इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री अभय सागर जी महाराज ने कहा कि आचार्य भगवंत ज्ञान सागर जी महाराज के जीवन के कुछ प्रसंग जिनसे लोग अनभिज्ञ से हैं ऐसी दो-चार बातें आपके सामने रखने का प्रयास कर रहे हैं।आचार्य भगवन ज्ञान सागर जी के विषय में भारत शासन से कुछ विशिष्ट कार्य हो एक डाक टिकट जारी करवाने का प्रयास करवाया। एक समस्या खड़ी हुई शासन के रिकॉर्ड अनुसार जन्मदिवस, जन्मस्थान, मृत्यु दिवस, मृत्यु स्थान आवश्यक होता है। जन्म स्थान तो राड़ेली मिल गया, 82 वर्ष उम्र में संल्लेखना हुई होगी। एक पंडित जी से उनकी कुंडली एवं पांचो भाइयों की कुंडली उपलब्ध हुई। तीन भाइयों की कुंडली पंडित भुरामल जी के हाथ की बनी है, मेरे पास उपलब्ध है। 1897 का जन्म था 24 अगस्त 1897 समय 12 बजकर कुछ मिनट पर जन्म हुआ। उन्होंने आचार्य वीर सागर जी के संघस्थ सभी साधुओं को पंडित भूरामल जी ब्रह्मचारी की अवस्था में अध्ययन कराया। संघस्थ साधुओं को विद्या अध्ययन कराते थे। पांच-पांच महाकाव्य का सृजन करने वाले जयोदय महाकाव्य जैसे उत्कृष्ट साहित्य का सृजन करने वाले आचार्य भगवन थे। गंजबासौदा की बहन ने उनके साहित्य पर पीएचडी की है।</p>
<p><strong>मरण का स्वागत करें</strong></p>
<p>इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनिश्री नियम सागर जी महाराज ने बताया कि संल्लेखना मरण का प्रसंग है। संल्लेखना उन जीवों की अनिवार्य आवश्यक विशेष मरण है जिस मरण को वह साधक अपने जीवन को त्याग और तपस्या के मार्ग पर समर्पित करता है। त्याग और तपस्या मय जीवन संल्लेखना मरण के द्वारा सार्थक होता है। मंदिर बनता है समय अपेक्षित होता है, अपेक्षित समय पर ही मंदिर की पूर्णता होती है। जितना समय मंदिर निर्माण के लिए लगता है उतना समय मृत्यु के लिए नहीं लगता। मैं आ रहा हूं कह कर भी आ सकता हूं और कहे बिना भी आ सकता हूं। साधक सावधान होकर मरण का स्वागत करता है। मरण का स्वागत करने के लिए समय लग सकता है और नहीं भी लग सकता है।स्वागत किया मरण कब होगा निश्चित नहीं स्वागत किया इसी वक्त मरण होगा आकस्मिक मरण की घटना घट सकती है। मृत्यु ही मृत्यु को दूर करने का साधन है इसमें कोई संदेह नहीं हम भी वही अवस्था प्राप्त करें जो अरिहंत प्रभु कर रहे हैं। यही उद्देश्य सभी साधक का रहता है। मरण के पांच प्रकार हुआ करते हैं। गुरु को हम याद करते हैं।</p>
<p><strong>मृत्यु महोत्सव मनाने का लाभ</strong></p>
<p>इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री योग सागर जी महाराज ने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि आज पावन पर्व है महोत्सव है आज तो मृत्यु महोत्सव है। जिन्होंने अपने जीवन में जिनवाणी की आराधना करते-करते मृत्यु महोत्सव मनाने का लाभ हुआ आचार्य ज्ञान सागर महाराज का समाधि दिवस है। 1968&#8211; 69 में 2 साल उनके चरण वंदन करने चरण रज लगाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आचार्य ज्ञान सागर महाराज प्रवचन करते तो णमोकार मंत्र का मंगलाचरण करते थे। उनके मुख से सुनते सुनते मुझे ज्ञान हुआ और मैं विद्या सरोवर में समा गया। ज्ञान सागर जी महाराज का दर्शन किया आज भी वह दृश्य हमें दिखाई देता है। उनकी कृपा से उनके आशीष से हम लोग यहां आए जिस निधि को उन्होंने प्राप्त किया है उस निधि को हमें भी प्राप्त करना है।</p>
<p style="padding-left: 40px"><strong>शोक न करें</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य भगवन श्री समय सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा जिनके जीवन में वैराग्य के क्षण नहीं आते उसका उपादान बहुत कमजोर है निमित्त मिलने के बाद भी वैराग्य के क्षण मिले। शब्द के माध्यम से अर्थ की गति हो अर्थ से भाव की गति होती जिस ज्ञान बोलते। योग उपादान से ही कार्य संपादित होते। शब्द कुछ नहीं करते ऐसा नहीं किंतु शब्द एकमात्र माध्यम है शब्द के माध्यम से अर्थ को गति मिलती। शोक करने की आवश्यकता नहीं जिसका मरण हुआ उसका जन्म हुआ है किंतु मरण के उपरांत जन्म हो यह निश्चित नहीं। पंडित पंडित मरण है मरण याने विश्राम विराम लग जाता है ।बार-बार जन्म और मरण का जो प्रसंग आता है आज तक संसारी प्राणी का जीवन चल रहा है।आयु समाप्त होते ही आगे भव का उदय होता है। नया जीवन प्रारंभ होता पुराना विस्मृत हो जाता। संवेदन अलग संवेदन वर्तमान का होता है। किंतु अतीत में जो पर्याय होती है ज्ञान का विषय बन सकती है। आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज की 75&#8211;80 की उम्र थी। आकुलता ना करें, साथ-साथ प्रमाद न करें निरंतर पुरुषार्थ शील बने रहें।</p>
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