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	<title>आचार्य श्री समय सागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि श्री ने भोजन को जूठा नहीं छोड़ने का संकल्प दिलाया : झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 05:37:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी, मुनि श्री भावसागर जी के सान्निध्य में सोमवार को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। झुमरी तिलैया से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी, मुनि श्री भावसागर जी के सान्निध्य में सोमवार को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। <span style="color: #ff0000">झुमरी तिलैया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> झुमरी तिलैया।</strong> आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री धर्मसागर जी, मुनि श्री भावसागर जी के सान्निध्य में 20अप्रैल को प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर झुमरी तिलैया, कोडरमा (झारखंड) में श्री जी का अभिषेक और शांतिधारा की गई। विशेष मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई। इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अन्न को विशेष माना गया है। इसलिए इसका सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है। थाली में भोजन को जूठा छोड़ना इसका अनादर करने के समान है। ऐसे ही कुछ संस्कारों की शुरूआत की गई है। रोजाना हजारों लोग रोटी के बगैर भूखे सो जाते हैं और कई लोग थाली में भोजन को जूठा छोड़ देते हैं। भोजन उतना ही लो, जितना खा सको ताकि बचा हुआ भोजन किसी दूसरे के काम आ सके।</p>
<p><strong>अन्य स्कूल भी प्रेरणा ले तो कोई भूखा नहीं रहेगा</strong></p>
<p>इन्हीं सब उद्देश्यों को लेकर एक विद्यालय में शनिवार का दिन &#8216;भोजन जूठा न छोड़ें&#8217; के रूप में मनाया जाता है। इस दिन एक भी बच्चा अपने टिफिन में भोजन को जूठा नहीं छोड़ता है। अगर भोजन बचता भी है तो उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी स्कूल की ही होतीहै। इतना ही नहीं इस स्कूल के सभी बच्चे एक साथ बैठकर भोजन करते हैं और टीचर उन्हें पूरा भोजन खाने के लिए प्रोत्साहित भी करती है। अन्य स्कूल भी प्रेरणा ले तो कोई भूखा नहीं रहेगा। कहा जाता है कि जूठन छोड़ना पाप है, फिर भी बहुत लोग जूठन छोड़ते हैं।</p>
<p>आजकल अन्न पैसे से खरीदते हैं। इसलिये लोग उसकी तुलना पैसे से करते हैं। जूठन छोड़ देते हैं और उसे फेंक देते हैं किन्तु यह वास्तविकता नहीं है।</p>
<p><strong>जल का भी उपयोग सीमित करना चाहिए</strong></p>
<p>पैसे से अन्न खरीदा नहीं जा सकता। अन्न धरती अपनी छाती चीर कर देती है। कोई उसका अपमान करता है तो धरती दुःखी होती है और दूसरे जन्म में उसे अन्न के लिये तरसाती है। आज से सभी संकल्प लें कि थाली में जूठन नहीं छोड़ेंगे और इतना लो थाली में, व्यर्थ ना जाए नाली में। जल का भी उपयोग सीमित करना चाहिए। आधा गिलास भरकर रिश्तेदारों को, मित्रों को, परिवार वालों को देना चाहिए। जिससे कि अन्न और जल की बर्बादी ना हो, पक्षी को भी सकोरे में जल रखना चाहिए। पशुओं के लिए भी जल की व्यवस्था करना चाहिए। सेविंग में एवं स्नान आदि कार्यो में जल की बचत करना चाहिए। जल की सोचे कल की सोचे। कई लोगों ने संकल्प लिया।</p>
<p><strong>मुनि दीक्षा स्मृति महोत्सव 22 अप्रैल को</strong></p>
<p>समाज के पदाधिकारी ने कहा कि मुनि श्री धर्मसागर जी का 28 वां मुनि दीक्षा स्मृति महोत्सव प्रथम चरण में 22 अप्रैल को प्रातः 6बजे ध्वजारोहण से प्रारंभ होगा। फिर नगर के इतिहास में प्रथम बार समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज एवं समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चरण चिह्न की शुद्धि, अष्ट कुमारियों के द्वारा होगी। आचार्य छत्तीसी विधान होगा। मुनिसंघ के प्रवचन होंगे। 23अप्रैल को द्वितीय चरण में प्रातः6बजे मांगलिक क्रियाएं, गुरु महापूजन, सांस्कृतिक प्रस्तुति, मुनिसंघ के प्रवचन होंगे। यह झारखंड में प्रथम बार होगा। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन ने दी।</p>
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		<title>जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल ने श्रीफल किया भेंट: आचार्य श्री के दर्शन कर नगर पधारने का आग्रह किया  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Feb 2026 10:51:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यरत्न श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित 18 त्यागियों की जन्म नगरी सनावद से 12 सदस्यी जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल ने मुक्तागिरी जैन तीर्थक्षेत्र पहुंचकर आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज द्वारा प्रथम प्रदत्त आचार्य शिष्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के दर्शन कर सनावद की ओर विहार कर नगर पधारने के लिए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्यरत्न श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित 18 त्यागियों की जन्म नगरी सनावद से 12 सदस्यी जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल ने मुक्तागिरी जैन तीर्थक्षेत्र पहुंचकर आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज द्वारा प्रथम प्रदत्त आचार्य शिष्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के दर्शन कर सनावद की ओर विहार कर नगर पधारने के लिए श्रीफल समर्पित किए। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> नगर गौरव आचार्यरत्न श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित 18 त्यागियों की जन्म नगरी सनावद से 12 सदस्यी जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल ने मुक्तागिरी जैन तीर्थक्षेत्र पहुंचकर आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज द्वारा प्रथम प्रदत्त आचार्य शिष्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के दर्शन कर सनावद की ओर विहार कर नगर पधारने के लिए श्रीफल समर्पित किए।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100249" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0016-300x134.jpg" alt="" width="300" height="134" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0016-300x134.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0016-1024x458.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0016-768x343.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0016-990x442.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0016.jpg 1280w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के साथ नगर में जन्मे मुनि श्री प्रशस्त सागर जी महाराज एवं बड़वाह नगर के गौरव मुनि श्री मल्लिसागर सागर जी महाराज संघस्थ होकर आचार्य श्री के साथ सहायक होकर धर्म प्रभावना कर रहे हैं। इस अवसर पर प्रशांत चौधरी, सुनील जैन डीपीएस, मुकेश जैन, रजनीश जैन, राजेश जैन, राजा जैन, आशीष झांझरी, सुनील पावणा, वारिश जैन, विशाल चौधरी, पुष्पेंद्र जैन, अक्षय सराफ उपस्थित थे।</p>
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		<title>आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज अवतरण दिवस के अवसर पर विशेष: युवा और श्रम का पुनर्जागरण-गुरुजी की दूरदृष्टि से आत्मनिर्भर भारत की दिशा  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Oct 2025 11:14:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शरद पूर्णिमा, वह पावन रात्रि जब सम्पूर्ण सृष्टि चंद्रमा की पूर्ण आभा में स्नान करती है,ज्ञान, तप और सृजन की त्रिवेणी एकाकार होती है। यह वही शुभ तिथि है जब आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज जैसे महामानवों ने इस धरती पर अवतार लिया, ताकि समाज को पुनः श्रम, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>शरद पूर्णिमा, वह पावन रात्रि जब सम्पूर्ण सृष्टि चंद्रमा की पूर्ण आभा में स्नान करती है,ज्ञान, तप और सृजन की त्रिवेणी एकाकार होती है। यह वही शुभ तिथि है जब आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज जैसे महामानवों ने इस धरती पर अवतार लिया, ताकि समाज को पुनः श्रम, संयम और आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाया जा सके। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> शरद पूर्णिमा, वह पावन रात्रि जब सम्पूर्ण सृष्टि चंद्रमा की पूर्ण आभा में स्नान करती है,</p>
<p>ज्ञान, तप और सृजन की त्रिवेणी एकाकार होती है। यह वही शुभ तिथि है जब आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज जैसे महामानवों ने इस धरती पर अवतार लिया, ताकि समाज को पुनः श्रम, संयम और आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाया जा सके।</p>
<p>इस पावन अवतरण दिवस पर हम केवल उनके जीवन का स्मरण नहीं करते, बल्कि उस विचारधारा को नमन करते हैं जो आज विश्व की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। वैश्विक परिप्रेक्ष्यः शिक्षित युवा, पर अवसरहीन भविष्य। हाल ही में नथिंग कंपनी के संस्थापक और सीईओ कार्ल पाई ने एक ट्वीट कर वैश्विक ध्यान खींचा। यूरोप में दुनिया के सर्वाेत्तम विश्वविद्यालय हैं, पर युवाओं में निवेश रुक गया है। हम इस प्रवृत्ति को कैसे बदलें?” उनका यह विचार उस रिपोर्ट पर आधारित था जिसमें यूके की भर्ती वेबसाइट त्ममक के प्रमुख जेम्स रीड ने बताया कि</p>
<p>सिर्फ तीन वर्षों में ही ग्रेजुएट युवाओं के लिए नौकरियों की संख्या 1,80 हजार से घटकर मात्र 55 हजार रह गई है। उन्होंने इसे वाइट कॉलर रिसेशन कहा- अर्थात शिक्षित युवाओं में बेरोज़गारी का संकट। यह स्थिति केवल यूरोप या ब्रिटेन की नहीं है। यह उस वैश्विक मानसिकता का परिणाम है जिसमें शिक्षा का अर्थ डिग्री बन गया है, पर कौशल और श्रम की शिक्षा पीछे छूट गई है । गुरुजी की दूरदृष्टिः श्रम ही सच्ची साधना। ऐसे समय में, जब दुनिया शिक्षित बेरोज़गारी से जूझ रही है,</p>
<p>आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की युगदृष्टि ने वर्षों पूर्व इसका उत्तर प्रस्तुत किया था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि शिक्षा वही सच्ची है, जो व्यक्ति को श्रमशील बनाए और समाज के लिए उपयोगी बने। गुरुजी के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुआ हथकरघा प्रकल्प केवल वस्त्र निर्माण नहीं,</p>
<p>बल्कि मानव निर्माण का आंदोलन है। यहाँ ग्रामीण युवा और महिलाएँ हाथों से कपड़ा बुनना सीखते हैं, पर वस्त्र के साथ वे स्वाभिमान, अनुशासन और आत्मनिर्भरता भी बुनते हैं। यह प्रकल्प यह सिखाता है कि जब शिक्षा श्रम से जुड़ती है, तभी जीवन सार्थक होता है। गुरुजी ने जो बीज वर्षों पहले बोया था, वह आज “आत्मनिर्भर भारत” के रूप में फल-फूल रहा है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री समय सागर जी महाराजः विचार से व्यवहार तक</strong></p>
<p>आचार्य श्री समय सागर जी महाराज, गुरुजी की ही परंपरा के तेजस्वी दीपक हैं,</p>
<p>जो आज श्रम और संयम के इस संदेश को धरातल पर मूर्त रूप दे रहे हैं। उनके सान्निध्य में संचालित हथकरघा केंद्र न केवल वस्त्र निर्माण के केंद्र हैं, बल्कि जीवन मूल्य, अनुशासन और सृजनशीलता के विद्यालय हैं। उनकी प्रेरणा से असंख्य युवा और महिलाएँ आज स्वावलंबन और सम्मानपूर्ण जीवन की दिशा में अग्रसर हैं। यह सच्चा “रोज़गार” नहीं, बल्कि जीवन-निर्माण का संस्कार है।</p>
<p><strong>अवतरण दिवस का संदेश</strong></p>
<p>जिस प्रकार शरद पूर्णिमा की चाँदनी अंधकार को दूर करती है, उसी प्रकार गुरुजी और आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के जीवन से प्रस्फुटित यह विचारधारा आज समाज के अंधकार को दूर कर रही है। जब पूरी दुनिया “शिक्षित बेरोज़गारी” की समस्या से जूझ रही है, भारत की इस पवित्र भूमि पर गुरुजी के प्रेरक विचार। युवाओं के जीवन में श्रम, साधना और स्वाभिमान का उजाला फैला रहे हैं।</p>
<p><strong>निष्कर्ष-</strong></p>
<p>अवतरण दिवस केवल जन्म की स्मृति नहीं है कृयह उस दिव्य दृष्टि की पुनःस्मृति है जिसने युगों को दिशा दी। संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज और आचार्य श्री समय सागर जी महाराज दोनों ने अपने जीवन से यह सिखाया कि रोज़गार की नहीं, कर्म की तलाश करो।</p>
<p>श्रम ही पूजा है, और आत्मनिर्भरता ही सच्ची विजय है। इस शरद पूर्णिमा, इस अवतरण दिवस पर,</p>
<p>आइए हम सब संकल्प लें कि शिक्षा के साथ श्रम का सम्मान लौटाएँ, और गुरुजी की इस युगांतरकारी प्रेरणा को जन-जन तक पहुंचाएं। प्रेषक -ब्रह्मचारी प्रणव भैयाजी, अजमेर</p>
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		<title>कुंडलपुर में बड़े बाबा जिनालय का मंगल कलशारोहण   सहस्त्र कूटजिनालय की भव्य वेदी प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम होगा 6 से 11 जून तक     </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 May 2024 16:33:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं ससंघ सानिध्य में पूज्य बड़े बाबा मंदिर का मंगल कलशारोहण, सहस्त्रकूट जिनालय की भव्य वेदी प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम 6 जून से 11 जून [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं ससंघ सानिध्य में पूज्य बड़े बाबा मंदिर का मंगल कलशारोहण, सहस्त्रकूट जिनालय की भव्य वेदी प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम 6 जून से 11 जून तक आयोजित किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;       </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर दमोह।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं ससंघ सानिध्य में पूज्य बड़े बाबा मंदिर का मंगल कलशारोहण, सहस्त्रकूट जिनालय की भव्य वेदी प्रतिष्ठा का भव्य कार्यक्रम 6 जून से 11 जून तक आयोजित किया जाएगा।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-61368" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240530-WA0025.jpg" alt="" width="1600" height="1066" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240530-WA0025.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240530-WA0025-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240530-WA0025-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240530-WA0025-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240530-WA0025-1536x1023.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240530-WA0025-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240530-WA0025-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240530-WA0025-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240530-WA0025-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240530-WA0025-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240530-WA0025-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240530-WA0025-1320x879.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />ये कार्यक्रम होंगे आयोजित </strong></p>
<p>&#8211; इस अवसर पर 6 जून 2024 दिन गुरुवार को गुरु आज्ञा, आचार्य निमंत्रण, देव आज्ञा, गुरु नाम गुरु आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज का समाधि दिवस समारोह।</p>
<p>&#8211; 7 जून 2024 दिन शुक्रवार को प्रात: 5:30 से घट यात्रा, ध्वजारोहण 8: 00 बजे से आचार्य श्री के प्रवचन सांयकाल 7: 00 बजे आरती, 8: 00 बजे शास्त्र प्रवचन।</p>
<p>-8 जून 2024 दिन शनिवार प्रात 5:00 बजे से अभिषेक, शांतिधारा, नित्यमह पूजन, याग मंडल विधान 8:00 बजे से आचार्य श्री के प्रवचन, शाम 7:00 बजे से आरती 8:00 बजे शास्त्र प्रवचन।</p>
<p>-9 जून 2024 दिन रविवार प्रात: 5:00 बजे से अभिषेक, शांतिधारा, नित्यमह पूजन, 6:30 बजे से सहस्त्रकूट, मानस्तंभ, संभवनाथ जिनालय वेदी संस्कार शुद्धि, श्री जी की स्थापना प्रारंभ, 8:00 बजे से आचार्य श्री के प्रवचन, शाम 7:00 बजे से आरती, 8:00 बजे से शास्त्र प्रवचन।</p>
<p>-10 जून 2024 दिन सोमवार प्रात 5:00 बजे से अभिषेक शांतिधारा नित्यमह पूजन, 6:00 बजे से श्री जी की स्थापना जारी, 8:00 बजे से आचार्य श्री के प्रवचन, शाम 7:00 बजे से आरती, 8:00 से शास्त्र प्रवचन ।</p>
<p>-11 जून 2024 दिन मंगलवार प्रात: 5:00 बजे से अभिषेक, शांतिधारा ,नित्यमह पूजन, प्रात: 6:00 बजे से श्री बड़े बाबा जिनालय का विशाल कलशारोहण, संभवनाथ जिनालय, पदमप्रभु जिनालय, मानस्तंभ, सहस्त्रकूट जिनालय के कलशारोहण, ध्वज स्थापना, 7:30 बजे से श्रूत पंचमी पूजन, 7:45 बजे आचार्य श्री के प्रवचन, शाम 7:00 बजे आरती, 8:00 बजे से शास्त्र प्रवचन होंगे।</p>
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		<title>परमात्मा का बोध कराने वाले है गुरु- मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज समर्पण पर केंद्रित होता है मोक्ष </title>
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		<pubDate>Wed, 22 May 2024 15:57:28 +0000</pubDate>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में महासमाधिधारक संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से पूज्य मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि युग बीतते हैं, सृष्टि बदलती है ,कई युग दृष्टा जन्म लेते हैं, अनेकों की स्मृतियां शेष रह जाती हैं। <span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट ……….</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर ।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में महासमाधिधारक संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से पूज्य मुनि श्री दुर्लभ सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि युग बीतते हैं, सृष्टि बदलती है ,कई युग दृष्टा जन्म लेते हैं, अनेकों की स्मृतियां शेष रह जाती हैं। कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो अपनी करुणामयी महती कार्यों से युग युगान्तर तक याद ही नहीं अपितु आदर्श के रूप में हम जैसे अनेक लोगों का मार्ग जिन्होंने प्रशस्त किया है ।</p>
<p>असंख्य जन-मानस को घने तिमिर से निकालकर उज्जवल प्रकाश से प्रकाशित कर दिया। ऐसे निरीह, निर्लिप्त, निरपेक्ष, अनियत विहारी स्वावलंबी जीवन जीने वाले युग पुरुष की सर्वोच्च श्रेणी में आते है। वे है हमारे गुरुदेव, हमारे भगवन्त विद्यासागर जी महामुनिराज। जिन्होंने स्वेच्छा से अपने जीवन को पूर्ण वीतरागमय बनाया। जिन्होंने त्याग और तपस्या से कार्य किया स्वंय के रूप को ,स्वरूप को संयम के सांचे में डाला और अनुशासन को ही अपनी ढाल बनाया।</p>
<p>ऐसे महान गुरु हमें पंचम काल में दर्शन दे रहे थे। हम सब का कल्याण किया। परमात्मा का परिचय कौन कराता ,अंदर बैठी आत्मा का परिचय कौन कराता ,सत्ता के सानिध्य, संसर्ग और अंदर की चेतना जागती है उसका नाम ही तो गुरु है। अंदर बैठे परमात्मा का बोध कराने वाले वे गुरु हैं।</p>
<p><strong>समर्पण की प्यास है न्यारी</strong></p>
<p>आपने सुना होगा। गुरु साक्षात परम ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे। आजकल जो भी सिद्ध हुए हैं ,गुरु चरणों से ही उनके सिद्ध की यात्रा प्रारंभ होती है। एक बात कहूं राग में आकर्षण होता है।आकर्षण को विकर्षण में रूपांतरित होने में देर नहीं लगती। राग में आकर्षण होता है पर आकर्षण को विकर्षण होने में देर नहीं लगती ।राग केंद्रित होता है। सामने वाला जब तक राग करता है वह राग रहता है। राग टूटने में देर नहीं लगती, स्वयं की भी भावना होती है और टूट जाती है लेकिन समर्पण की प्यास न्यारी है, उसमें भी आकर्षण होता है पर विकर्षण के रूप में रूपांतरित नहीं होता है। समर्पण पर केंद्रित होता है मोक्ष। केंद्रित सब है जो उन्होंने किया है, जो उन्होंने करा है, वह करते चले गए।</p>
<p>गुरुदेव चले गए हैं ,पर गुरुदेव हमारे पास हैं ।गुरुदेव की आंखों को लेकर कुछ लिखा था जिनके अंदर आदर भाव झलकता है ।जिनको देखकर अभिनंदन भाव झलकता हो ।जिनको देखकर आकिंचन भाव होता हो और अहोभाव होता हो ।जिन आंखों को देखकर हम झुक जाएं। हम समर्पित हो जाएं। अपने आप को अर्पित कर दें वह है आदर भाव। जिन आंखों को देखने से हमारा अहम गल जाए। उनकी अहमियत से अपने जीवन को समतामय बना लें। ये है आदर भाव।</p>
<p>जिन आंखों को देखने से हमारे दर्द की भटकन और संसार की अटकन समाप्त हो ।वह आंख हमारे जीवन को संवारने वाली हो। मुनिश्री ने आंखों पर रचित अपनी रचना सुनाई और आचार्य श्री से संबंधित संस्मरण सुनाया। किस तरह उन्हें मुक्तागिरी में आचार्य श्री का पहला दर्शन प्राप्त हुआ।</p>
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		<title>लघु बने बिना कोई राघव रघुराई बन ही नहीं सकता जीवन में भी गुरु के प्रति होनी चाहिए लघुता </title>
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		<pubDate>Sat, 18 May 2024 16:37:34 +0000</pubDate>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि आचार्यों ने तीर्थंकर भगवंतों की देशना को जो प्रतिपादित किया है ,जितना भगवान ने जाना, उतना भगवान प्रतिपादित नहीं कर पाए ,जितना भगवान ने प्रतिपादन किया है। कथन किया है ,उतना गणधर उसे ग्रहण नहीं कर पाए। गणधरों ने जितना प्रस्तुत किया है उतना आचार्य परंपरा को प्राप्त नहीं हुआ है ।<span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट ……….</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर ।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि आचार्यों ने तीर्थंकर भगवंतों की देशना को जो प्रतिपादित किया है ,जितना भगवान ने जाना, उतना भगवान प्रतिपादित नहीं कर पाए ,जितना भगवान ने प्रतिपादन किया है। कथन किया है ,उतना गणधर उसे ग्रहण नहीं कर पाए। गणधरों ने जितना प्रस्तुत किया है उतना आचार्य परंपरा को प्राप्त नहीं हुआ है ।आचार्य परंपरा को जितना प्राप्त हुआ है, उतना प्रवाह रूप में आगे बढ़ते- बढ़ते लिपिबद्ध नहीं हो पाया। जितना लिपिबद्ध हुआ है ,जो भी हमारे को प्राप्त हुआ है ।देखा जाए तो कम नहीं है। वैसे देखा जाए तो समुद्र में से जल की एक बूंद है। वह जल की एक बूंद भी हमारे क्षयोपशम और क्षमता के अनुसार है। हमारे लिए समुद्र की बूंद भी समुद्र के बराबर है ।आचार्य महाराज ने इसलिए लिखा है, श्रुत में अवगाहन करें। कितना भी काल बीत जाए ,उसका पार नहीं, लेकिन सार क्या है। श्रुत में अवगाहन करना ही सार नहीं है। श्रुत अवगाहन करते-करते स्वयं में संगति हो जाए, यह सार है। पानी के अंदर डुबकी लगाते रहे ,तैरते रहे, स्नान करते रहे, अच्छी बात है। वह भी माध्यम है, लेकिन अगर वह स्नान करने वाला ,डुबकी लगाने वाला प्यासा रहे ,तो अवगाहन उसका सार्थक नहीं है ।अवगाहन ज्यादा करें या ना करें। एक बूंद भी उसे प्राप्त हो जाए।वह अपनी तृषा को बुझा लें, इसलिए आचार्य महाराज कहते हैं कि पंचम काल में रहने वाले हम और आप तो दूरमेती हैं, दुर्बुद्धि हैं ।अब क्या करें समय थोड़ा सा है । श्रुत का कोई पार नहीं, हम दुर्बुद्धि हैं। ऐसे समय में करें क्या, जिससे जन्म -जरा और मरण का नाश हो जाए। इतनी व्याधियां ,रोग लगे हुए हैं। इनका विनाश हो तो अजर, अमर पद प्राप्त हो। गुरुवर आचार्य श्री की चरण सन्निधि में नेमावर पहुंचे थे। उस समय आचार्य श्री ने अपने संबोधन में कहा था। वह अभी भी याद है, जरा ना चाहूं ,अजर अमर बनू ,नजर चाहूं। मैंने अपने संबोधन में ,प्रवचन में यह बात रखी कि गुरुवर से कुछ मांगने की जरूरत नहीं पड़ती गुरुवर से कुछ आग्रह की जरूरत नहीं पड़ती।इतना ही हो कि गुरुवर के चरणों में नजर बनी रहे और गुरुवर की नजर हमारे ऊपर बनी रहे। अपनी नजर गुरुवर के चरणों में रहे। विनम्रता का प्रतीक है, और जब हम विनम्र होंगे, तो ऊपर वाले की नजर बिन मांगे ही पड़ेगी।</p>
<p><strong>गुरुवर की नजर पड़े यह शिष्य का सौभाग्य </strong></p>
<p>जेष्ठश्रेष्ठ निर्यापक श्रमण नियम सागर जी का कैशलोंंच हुआ ।ईर्या भक्ति के बाद वैया वृत्ति का भाव पहुंच गया। गुरुवर की नजर पड़े, यह शिष्य का सौभाग्य है। गुरुवर की नजर में हम बने रहे, यह सातिशय पुण्य का योग है। मांगने की जरूरत नहीं पड़े, बिन मांगे मिले। यह हमारा सौभाग्य होता है। गुरुवर आचार्य जी ने अपने गुरुवर ज्ञान सागर जी से कुछ नहीं मांगा, पर उनको सब कुछ मिल गया ।गुरु नाम गुरु आचार्य ज्ञान सागर महाराज जो उन्हें देना चाहते थे। आप मिल गए ,उससे ज्यादा पाने की जरूरत नहीं ।यह बहुत बड़ा सौभाग्य है। नेमावर के प्रवचन संग्रह में आचार्य गुरुवर ने यह बात भी कही थी ।हमारे गुरु ज्ञान सागर जी भले बहुत दूर हैं ,बाहर से दूर है, लेकिन अंदर से दूर नहीं है। अंदर से तो हमारे अंदर है। बहुत निकट हैं। फिर गुरुवर ने यह भी कहा, जब एक बार बैठ गए हैं तो निकल कर जा भी नहीं सकते, उन्होंने पूरे विश्वास से यह भी कहा था ।आकर बैठे नहीं, मैंने ही उन्हें बिठा लिया है। मुझसे पूछे बिना वह जा भी नहीं सकते हैं। गुरुवर की भक्ति और निष्ठा देखकर के हम सबको लगता है, हमारे गुरुवर इतने महान होकर भी अपने गुरु के प्रति कितनी लघुता रखते थे ।तो हमारे जीवन में भी गुरु के प्रति यही लघुता होनी चाहिए। हायकू लिखा है गुरु ने गुरु समय दिया लघु बने। लघु बने बिना कोई राघव रघुराई बन ही नहीं सकता।</p>
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		<title>मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज एवं मुनि श्री प्रयोग सागर जी महाराज का मंगल विहार 17 मई को कुंडलपुर से पटेरा की ओर हुआ </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 May 2024 17:05:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज ससंघ एवं मुनि श्री प्रयोग सागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार 17 मई को सायंकाल कुंडलपुर से पटेरा की ओर हुआ।पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट ………. कुंडलपुर । सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र,जैन तीर्थ कुंडलपुर की पावन धरा से महासमाधिधारी संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज ससंघ एवं मुनि श्री प्रयोग सागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार 17 मई को सायंकाल कुंडलपुर से पटेरा की ओर हुआ।<span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट ……….</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर ।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र,जैन तीर्थ कुंडलपुर की पावन धरा से महासमाधिधारी संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से पहला उपसंघ पूज्य मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री अटल सागर जी महाराज ,दूसरा उपसंघ मुनि श्री प्रयोग सागर जी महाराज, मुनि श्री सुब्रत सागर जी महाराज का मंगल विहार 17 मई को सायंकाल कुंडलपुर से पटेरा की ओर हुआ।</p>
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		<title>गुरु के माध्यम से ही मिल सकते है परमात्मा पुरुषार्थ सही दिशा करें तो सफलता जरूर प्राप्त होगी </title>
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		<pubDate>Fri, 17 May 2024 17:00:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से पूज्य मुनि श्री निष्कम्पसागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि एक घास के तिनके की इच्छा थी। सागर में जाकर मिलने की ।यात्रा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से पूज्य मुनि श्री निष्कम्पसागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि एक घास के तिनके की इच्छा थी। सागर में जाकर मिलने की ।यात्रा प्रारंभ करता है, हवा का झोंका उसका प्रयास सफल नहीं होने देता। <span style="color: #ff0000">पढि़ए विशेष रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से पूज्य मुनि श्री निष्कम्पसागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि एक घास के तिनके की इच्छा थी। सागर में जाकर मिलने की ।यात्रा प्रारंभ करता है, हवा का झोंका उसका प्रयास सफल नहीं होने देता। कई बार उसने प्रयास किया ,मैं सागर से मिलूं, जैसे ही वह यात्रा प्रारंभ करता, हवा का एक झोंका आता और उसके प्रयासों को असफल कर देता ।सामने बैठा हुआ एक पथिक बहुत देर से यह दृश्य देख रहा था। उसने तिनके से पूछा तुम क्या कर रहे हो। तिनके ने कहा मैं सागर से मिलना चाहता हूं, पर यात्रा विफल हो जाती है। मैं इतना पुरुषार्थ कर रहा हूं, मेरा पुरुषार्थ कोई काम नहीं आ रहा। उस पथिक ने कहा तुम्हारा यह पुरुषार्थ ठीक नहीं ।</p>
<p>तुम सागर से मिलना चाहते हो। बन्धुओं कभी-कभी मनुष्य पुरुषार्थ तो करता है पर पुरुषार्थ करने के बाद भी सफलता प्राप्त नहीं होती। पुरुषार्थ तो कर रहा है पर पुरुषार्थ सही दिशा में नहीं हो रहा। सही दिशा में करें तो उसे सफलता जरूर प्राप्त होगी। लेकिन हमारा जो पुरुषार्थ है ,वह असफल इसलिए होता है कि हमारा पुरुषार्थ सही दिशा में नहीं होता ।कई लोग कहते हैं कि हम पुरुषार्थ करते है पर सफलता प्राप्त नहीं हो रही।</p>
<p><strong>दिगंबर साधु का वचन झूठ नहीं होता</strong></p>
<p>एक बार लोगों ने कहा हमारे यहां जल की कमी है। हम जिनेंद्र भगवान का अभिषेक नहीं कर पाते।कुएं का शुद्ध जल प्राप्त नहीं होता। हम जिनेंद्र भगवान का अभिषेक कैसे करें। जैन दर्शन में कहा है कि बोरिंग के पानी से अभिषेक नहीं होना चाहिए ।साधुओं का आहार भी बोरिंग के पानी से नहीं होना चाहिए। क्यों नहीं होना चाहिए।कुएं का पानी भी नीचे से आ रहा है और बोरिंग का पानी भी नीचे से आ रहा है ।जैन दर्शन में पानी छानने का नहीं, बिल्छानी का महत्व है। कुएं के पानी की विल छानी यथा स्थान पहुंचेगी, बोरिंग के पानी की नहीं पहुंचेगी। महाराज जी ऐसा आशीर्वाद दो कि कुएं के जल की व्यवस्था हो जाए। इस स्थान पर जल की प्राप्ति हो सकती है ,100 फीट गड्ढा खोदो महाराज ने कहा। हम कल आएंगे और देखेंगे। दूसरे दिन महाराज जी के पास वह व्यक्ति उदास बैठा था ,बोला हमने इतना पुरुषार्थ किया पर पानी की प्राप्ति नहीं हुई ।दिगंबर साधु झूठ नहीं बोलते ,आपने कहा था ,पानी की प्राप्ति होगी। हां दिगंबर साधु का वचन झूठ नहीं होता।</p>
<p>तुमने पुरुषार्थ तो किया पर एक-एक फीट के सौ गड्ढे खोद दिए। तुम्हारा पुरुषार्थ सफल नहीं हो पाया। ऐसा ही उस पथिक ने तिनके से कहा, तुम्हें रास्ता बताता हूं ,तुम सागर से मिल सकोगे ।तुम्हारे बगल से जो गंगा नदी जा रही है। तुम इसमें डुबकी लगा लो। तुम्हारी सागर से मिलने की यात्रा पूरी होगी ।उसने पथिक की बात मानी और तिनके ने नदी में डुबकी लगाई और सागर तक की यात्रा कर ली ।इस दृष्टांत के माध्यम से बताना चाहता हूं, गुरु रूपी गंगा में डुबकी लगानी पड़ेगी और परमात्मा की प्राप्ति हो सकेगी। जो गुरु की अवहेलना करते है ,उन्हें गुरु के बिना परमात्मा मिलने वाला नहीं है ।गुरु के माध्यम से ही तुम्हें परमात्मा मिल सकते हैं। बिना गुरु के परमात्मा मिलना तीन काल में भी संभव नहीं है।</p>
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		<title>गुरुदेव ने आत्मानुशासन से वह कार्य कर दिखाया कि देखती रह गई दुनिया मुनिराजों का मनाया गया दीक्षा दिवस </title>
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		<pubDate>Tue, 14 May 2024 17:28:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र ,जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से निर्यापक मुनि श्री संभव सागर जी महाराज ने मुनि दीक्षा दिवस के अवसर पर प्रवचन देते हुए कहा कि देखो आज का दिवस ऐसा है [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र ,जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से निर्यापक मुनि श्री संभव सागर जी महाराज ने मुनि दीक्षा दिवस के अवसर पर प्रवचन देते हुए कहा कि देखो आज का दिवस ऐसा है कि सूरज की तपन कुछ कम है। उस दिन 22 अप्रैल 1999 वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन सूर्य सुबह से ही इतना तप रहा था कि शायद वह सबसे ज्यादा लालायित हो कि गुरुदेव आचार्य भगवान पहली बार दीक्षा नहीं दे रहे थे। <span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर ।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र ,जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रभावक शिष्य पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से निर्यापक मुनि श्री संभव सागर जी महाराज ने मुनि दीक्षा दिवस के अवसर पर प्रवचन देते हुए कहा कि देखो आज का दिवस ऐसा है कि सूरज की तपन कुछ कम है। उस दिन 22 अप्रैल 1999 वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन सूर्य सुबह से ही इतना तप रहा था कि शायद वह सबसे ज्यादा लालायित हो कि गुरुदेव आचार्य भगवान पहली बार दीक्षा नहीं दे रहे थे। सिद्ध क्षेत्र में 23 मुनियों को दीक्षा प्रदान की हैं, गुरुदेव ने करकमलों से। सर्वप्रथम दीक्षा द्रौणगिर सिद्ध क्षेत्र में पहली दीक्षा जेष्ठ- श्रेष्ठ वर्तमान में आचार्य श्री समय सागर जी महाराज को दीक्षा प्रदान की गई थी। मुनि श्री योग सागर जी महाराज परसों सुना रहे थे, कि दीक्षा कैसे हुई ।आचार्य श्री स्वयं बाहर आकर बोले, यह तख्त कहां लगाना है। हम लोगों ने तख्त पाटा लगाया। दर्शक भी ऐसा कोई नहीं सुनने वाला ।उस समय की सोचों जब आचार्य महाराज ने समय सागर जी महाराज को दीक्षा प्रदान की ।योगसागर महाराज बता रहे थे ।हम लोगों ने खड़े-खड़े दीक्षा देखी। पाटा लगाया, पाटा पर चौकी लगाई। आचार्य भगवान बैठ गए।समय सागर जी को बिठाया और दीक्षा के संस्कार शुरू हो गए। थोड़ी देर में दीक्षा पूर्ण हो गई। उस दीक्षा ने इतने विशाल संघ में एक नींव के पत्थर का कार्य किया। उस नींव के पत्थर पर इस विशाल संघ की आधारशिला रखी गई। यूं तो गुरुदेव ने चार क्षुल्लक दीक्षा दी थी। पर जब तक कोई आचार्य मुनि दीक्षा नहीं देता। तब तक उसका वह पद सुशोभित नहीं होता ।योग सागर जी बोलते हैं कि हम शहर वासी हैं ,उनकी दीक्षा सागर में मोराजी में हुई। दो कदम चलकर गुरुदेव ने मुनि श्री योग सागर जी एवं नियम सागर जी को मुनि दीक्षा प्रदान की ।गुरुदेव ने और कदम बढ़ाए 2,5,8 दीक्षा प्रदान की ।इकाई का अंक था। सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र में पहली बार दहाई के अंक में दीक्षा प्रदान की गई। 10 दीक्षा प्रदान की गई शरद पूर्णिमा के दिन। कुछ समय गुजरा नहीं कि 9 मुनिराज की दीक्षा मुक्तागिरी सिद्ध क्षेत्र में हुई ।वहां गुरुदेव ने अचानक शाम को बताया, दीक्षा के विषय में। नेमावर सिद्ध क्षेत्र में वैशाख शुक्ल सप्तमी को 47 डिग्री तापमान पर 23 मुनियों को दीक्षा प्रदान की गई। जबलपुर में 25 दीक्षाएं दी । गुरुदेव ने जिनधर्म की प्रभावना करते हुए रामटेक में 24 दीक्षाएं दी। गुरुदेव ने एक-एक ,दो-दो घंटे में दीक्षा संपन्न की है। शीतल धाम विदिशा में शीतल सागर जी आदि मुनिराज को4 दीक्षा दी ।बीनाबारहा में तीन दीक्षाएं दी ।ललितपुर में दीक्षा दी। अंतिम दीक्षा दी वो उत्कृष्ट दीक्षा दी। अच्छा बेस्ट मैन वह होता जो हर बाल पर रन बनाए। गुरुदेव ने लिखा है कि बड़े बाबा ने बड़ी कृपा की है। मुझे आशीष देकर ।गुरुदेव ने कुंडलपुर में 84 आर्यिका दीक्षा प्रदान की है ।एक भी मुनि दीक्षा नहीं दी है ।</p>
<p><strong>आगे के कार्य करने का करना है शंखनाद</strong></p>
<p>आचार्य पदारोहण समारोह यहां पर हुआ। हम लोग चंद्रगिरी से चलकर आए। मुनि दीक्षा से शुरुआत हो, बड़े बाबा के पादमूल में। आर्यिका दीक्षा भी यहां बड़े बाबा के पादमूल में हो ,ऐसी भावना है ।ऐसी संयोजना हो ,बड़े बाबा तो बड़े बाबा हैं ,उनके बारे में क्या कहा जाए ।यहां कोई भी कार्य असंभव नहीं है। करीब से देखा है, पूरी जैन समाज सशंकित थी, संघ के सदस्य भी सशंकित थे ।यह कार्य कैसे होगा, गुरुदेव ने ठान लिया और पुरातत्व ,शासन, प्रशासन सबके ऊपर हावी था। आत्म अनुशासन और गुरुदेव ने आत्मानुशासन से वह कार्य कर दिखाया कि दुनिया देखती रह गई। पुरातत्व ,शासन, प्रशासन ,न्यायपालिका कह रही थी। यह कार्य हो नहीं सकता ।उसी सर्वोच्च न्यायपालिका ने अपनी मोहर लगा दी कि यह कार्य ठीक हुआ ।यह कार्य गुरुदेव की दूरगामी सोच है ।2006 का वह वृतांत है ।सब लोगों के सामने प्रश्न चिन्ह था। कार्य कैसे होगा। जिन शासन की ध्वजा को आगे ले गए गुरुदेव ।इस प्रभावना को बढ़ाना है । गुरुदेव ऊपर विराजमान है ।स्वर्ग से देख रहे होंगे। संघ की इस धरोहर को अपनी आखिरी पीढ़ी को सौंपा था। वह संघ को गति दे रहे । संघ फल -फूल रहा है ।आगे के कार्य करने का शंखनाद करना है ।हम सब मिलजुल कर अपने नूतन आचार्य समय सागर जी से निवेदन कर रहे हैं कि अपनी बात पुरजोर तरीके से रखेंगे।</p>
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		<title>प्रतिकूलताओं में ही परिणामों की होती है परीक्षा परिणामों को परिवर्तित करने का नाम ही हैं मोक्ष मार्ग </title>
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		<pubDate>Mon, 13 May 2024 15:55:06 +0000</pubDate>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से पूज्य मुनि श्री महासागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि जब तक स्वयं के चित्त में मुक्ति की अवधारणा जागृत नहीं होगी तब तक मुक्ति का लाभ आत्मा को नहीं मिल सकता।परिणामों को परिवर्तित करने का नाम ही मोक्ष मार्ग है। <span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू रिपोर्ट की ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से पूज्य मुनि श्री महासागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि जब तक स्वयं के चित्त में मुक्ति की अवधारणा जागृत नहीं होगी तब तक मुक्ति का लाभ आत्मा को नहीं मिल सकता। उनका कहने का तात्पर्य है कि तुमको मोक्ष पुरुषार्थ के लिए स्वयं अपनी अवधारणा को बदलना होगा। तुम्हें मुक्ति को प्राप्त करने के लिए स्वयं उस मार्ग पर चलना होगा। तभी उस मुक्ति का लाभ आपको मिल पाएगा ।</p>
<p>कर्मबंधन से मुक्ति के लिए हमें अपने परिणामों को बदलना होगा। हमारे यहां देव शास्त्र गुरु को निमित्त कहा गया है। उस निमित्त को देखकर के, उस निमित्त को समझ करके, उपादान को जागृत करना है। कर्म बंधन से मुक्त हो सकता है ।समो शरण में दिव्य ध्वनि दिन में चार बार खिरती है। गुरु महाराज कहते हैं कि दिव्य ध्वनि तो आज भी खिर रही है उस दिव्यध्वनि की वर्गणायें आज भी हमारे पास आ रही हैं। जो वर्गणायें हैं ,वह यहां तक आज भी आ रही है, लेकिन उन दिव्य ध्वनि की वर्गणाओं का लाभ हम आज भी नही ले पाए। क्यों नहीं ले पाए, हम उपयोग अन्य जगह लगा रहे हैं ।उपयोग को वहां लगा नहीं पा रहे हैं ।</p>
<p><strong>अच्छे विचारों के लिए करना पड़ता है पुरुषार्थ</strong></p>
<p>गुरु महाराज कहते हैं कि उन गुण स्थानों पर चल नहीं सकते, पर उन गुण स्थानों को छू तो सकते हैं। परिभाषाओं के माध्यम से उन परिणामों को वहां लेकर तो जाओ ,अगर यह प्रयोग नहीं करते तो यह तुम्हारा प्रमाद कहलाएगा। तुम्हारी भूल कहलाएगी। हम भले ही उन गुण स्थान तक नहीं पहुंच पा रहे है, पर ध्यान प्रयोग के माध्यम से उस गुणस्थान को छूने का पुरुषार्थ करना चाहिए ।गुण स्थान तक पहुंचाने का पुरुषार्थ करना चाहिए। भले अनुभूति ना हो हमें, लेकिन परिणामों के माध्यम से सामने तो आना चाहिए। लक्ष्य क्या है बंदे, तद गुण लब्धे। हम वंदन क्यों कर रहे हैं ।मोक्ष मार्ग की जितनी क्रियाएं होती हैं, श्रावक की हो या श्रमण की हो, कोई फर्क नहीं पड़ता। आप श्रावक हो या श्रमण हो, दोनों की क्रिया का जो लक्ष्य हुआ करता है ,वह एक हुआ करता है ।कर्म क्षय सम्यक दृष्टि श्रावक भी जो क्रिया करता है। कोई बिना लक्ष्य यात्रा करता है तो उसे यात्रा कहेंगे या भटकाव कहेंगे बोलो। भटकाव कहोगे। पर यात्रा तो लक्ष्य को लेकर चलती है ।सम्यक दृष्टि चाहे चतुर्थ गुणस्थान का हो या कहीं का हो, वह लक्ष्य तो आत्म उपलब्धि हुआ करती है ।</p>
<p>उस लक्ष्य के बिना उस मंजिल को प्राप्त कर ही नहीं सकते। गुरुदेव हमेशा हम लोगों को यह उपदेश देते थे ।सभी बैठे हुए थे ।मैंने पूछ लिया गुरुदेव मोक्ष मार्ग के लिए कोई सरल साधना बता दें ,अध्यात्म को जानता नहीं ,सिद्धांत का ज्ञान नहीं ,कम पढ़ा लिखा हूं। यहां आप ले आए ।आगे मार्ग अवरूद्ध न हो ,आगे बढ़ता जाऊं, कोई सरल उपाय बता दें ।गुरुदेव तो गुरुदेव है वह कभी निराश नहीं करते उन्होंने बोला, बहुत अच्छा प्रश्न किया तुमने ,सुनो उत्तर भी अच्छा देता हूं। मोक्ष मार्ग में आगे कैसे बढ़ें। कर्म के आश्रव बंध से कैसे छूटे ।इसके लिए कुछ नहीं करना है। देखो बुरे परिणामों के लिए किसी भी प्रकार का पुरुषार्थ नहीं करना पड़ता है ।यह पूर्व कर्म की एक छाया जैसी छाप, पूर्व संस्कार के लिए आपको किसी प्रकार का पुरुषार्थ नहीं करना पड़ता। विचार अर्हत यंत्र की तरह आते रहते हैं, चलते रहते हैं, अच्छे विचारों के लिए पुरुषार्थ करना पड़ता है ।परिणाम को परिवर्तित करने का नाम ही मोक्ष मार्ग है। अच्छे विचारों को पढ़ना है, यही स्वाध्याय है ,अपने विचारों को परिवर्तित करना है।यही त्याग है,यही स्वाध्याय है ।योगी योग लगाते उनका यही लक्ष्य है ।स्वयं के परिणाम का चौकीदार स्वयं बनना है ।कुछ ना कुछ परिवर्तन अपने अंदर आना चाहिए। प्रतिकूलताओं में ही परिणामों की परीक्षा होती है अनुकूलता में नहीं।</p>
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