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	<title>आचार्य श्री समयसागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>दो दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा का हुआ आगाज : जिनबिम्ब स्थापना, कलशारोहण, विश्वशांति महायज्ञ होंगे  </title>
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		<pubDate>Thu, 22 May 2025 10:48:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज एवं आचार्य श्री समयसागर महाराज के आशीर्वाद से गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज की प्रेरणा से श्री दिगंबर जैन सम्मेदाचल विकास कमेटी मधुबन श्री सम्मेदशिखर में दो दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा, जिनबिम्ब स्थापना तथा कलशारोहण महा महोत्सव 22 मई गुरुवार को आरंभ हुआ। 23 मई शुक्रवार को इसका समापन होगा। श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज एवं आचार्य श्री समयसागर महाराज के आशीर्वाद से गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज की प्रेरणा से श्री दिगंबर जैन सम्मेदाचल विकास कमेटी मधुबन श्री सम्मेदशिखर में दो दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा, जिनबिम्ब स्थापना तथा कलशारोहण महा महोत्सव 22 मई गुरुवार को आरंभ हुआ। 23 मई शुक्रवार को इसका समापन होगा। <span style="color: #ff0000">श्री सम्मेदशिखर से पढ़िए राजकुमार जैन अजमेरा की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>श्री सम्मेदशिखर/कोडरमा।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज एवं आचार्य श्री समयसागर महाराज के आशीर्वाद से गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज की प्रेरणा से श्री दिगंबर जैन सम्मेदाचल विकास कमेटी मधुबन श्री सम्मेदशिखर में दो दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा, जिनबिम्ब स्थापना तथा कलशारोहण महामहोत्सव 22 मई गुरुवार को हुआ। 23 मई शुक्रवार को इसका समापन होगा। यह महा महोत्सव मुनि श्री समतासागरजी महाराज, मुनि श्री पवित्र सागर महाराज, मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज, मुनि श्री अतुलसागर महाराज, आर्यिकारत्न गुरमति माताजी, आर्यिकारत्न दृढ़मति माताजी ससंघ तथा ऐलक श्री निश्चयसागर महाराज ऐलक श्री निजानंद सागर महाराज क्षु. श्री संयम सागर महाराज के संघ सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य वाल ब्र.अशोक भैया एवं इंदौर आश्रम के अधिष्ठाता अनिल भैया के निर्देशन में किया जा रहा है।</p>
<p><strong>विविध विधानों से सुवासित रहा माहौल </strong></p>
<p>राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं गुणायतन के मुख्य जन संपर्क अधिकारी वीरेंद्र जैन छाबड़ा ने बताया गुरुवार को प्रातः 5.45 बजे से अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। गुणायतन स्थित जिनालय में होकर शोभायात्रा ‘श्री पावनधाम जिनालय’ श्री सम्मेदाचल विकास कमेटी के कार्यक्रम स्थल तक पहुंची एवं यहां पर 7 बजे ध्वजारोहण, जाप्य अनुष्ठान, मंडप शुद्धि, नवीन वेदी शुद्धि, सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, अभिषेक शांतिधारा एवं पूजन हुआ। मुनिसंघ आर्यिका संघ के मांगलिक देशना भी हुई। इस शुभ मांगलिक अवसर पर गुणायतन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद काला, कार्याध्यक्ष एनसी जैन, महामंत्री अशोक पांडया, सीईओ सुभाष जैन, एनएल जैन, प्रद्युमन जैन, शैलेंद्र जैन, सिद्दार्थ जैन, कपूर जैन, निर्मल जैन सहित समस्त पदाधिकारियों ने समस्त श्रेष्ठी महानुभावों को आमंत्रित कर कार्यक्रम में पधारने का अनुरोध किया है। सभी अतिथियों के आवास एवं भोजन व्यवस्था गुणायतन में है।</p>
<p><strong>मूकमाटी महाकाव्य संग्रह है</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रातः गुणायतन मंदिर परिसर में मुनि श्री समतासागर महाराज ससंघ के सानिध्य में आचार्य श्री विद्यासागरजी की अष्टद्रव्य से पूजन किया गया तथा मुनि श्री के मुखारबिंद से शांतिधारा एवं मांगलिक प्रवचन हुए। इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि शिशु को पोषक तत्व देना जरूरी होता है, तभी शिशु की काया बलिष्ठ और स्वस्थ होती है। ऐसे ही किसान अपने खेत में बीज को बो कर के उसमें खाद-पानी देता है तब अंकुरण के बाद जो फसल आती है वह पुष्ट होकर आती है। फसल आने के पहले अपने लहलहाते खेत को देखकर किसान को जो आनंद का सुःखद अहसास होता है, वह किसान ही समझ सकता है क्योंकि, उसका परिश्रम पनप रहा है और जब उसकी फसल खेत से घर पर आ जाती है तो उसके चेहरे की चमक बढ़ जाती है। मुनि श्री ने कहा कि इस संदर्भ में आचार्य गुरुदेव किसान कि इस सफलता को फिसलने पर फसल शब्द से संबोधित करते हैं। आचार्य श्री शब्दों के जादूगर थे। शब्दों का ऑपरेशन कर उसे जोड़-तोड़ कर एक नया अर्थ निकाल देते थे। ऐसे शब्दों के प्रयोग से ही आचार्य श्री की साहित्य श्रृंखला निकली है। उसमें प्रमुख हिंदी भाषा में मूकमाटी महाकाव्य संग्रह है। जिसमें ऐसे शब्दों का तथा हायकू का सम्मिश्रण किया गया है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। आचार्य श्री शब्दों के पारखी एवं सारगर्भित प्रयोग करते थे।</p>
<p><strong>दान धर्म करना तीर्थयात्रा कराना आसान है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने ऐसे कई काव्य संग्रह को लिखा। जब पहली किताब श्रमण संगम वर्ष 1975-76 कोलकाता के कल्याणमल झांझरी ने प्रकाशित कराई, जो आज 10 प्रतिमाओं के साथ अपनी साधना को कर रहे है। मुनि श्री ने 42 वर्ष पूर्व की स्मृतियों को संजोते हुए उस समय के समाज प्रमुखों का नाम लिया और कहा कि ये लोग राजस्थान से लेकर बुंदेलखंड तक पीछे लगे रहे। मुनि श्री ने कहा कि दान धर्म करना तीर्थयात्रा कराना आसान है लेकिन, खुद संयम का पालन कर परिवार को संयमित करना बहुत कठिन होता है। उन्होंने कोलकाता के श्रावकों की तारीफ करते हुए कहा कि इनका पूरा ग्रुप इधर-उधर की बातें न करते हुए अपने पूरे समय का सदुपयोग करते थे। मुनि श्री ने अपनी यादों को ताजा करते 42 साल पूर्व की उन यादों को साझा किया एवं ऐलक दीक्षा से लेकर मुनि दीक्षा तक के कई पलों को स्मरण कर उन सभी के परिवारों का नाम सहित उल्लेख कर आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
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		<title>आचार्य श्री समयसागर जी महाराज से लिया आशीर्वाद : दमोह सांसद राहुलसिंह ने कुंडलपुर पहुंच कर बड़े बाबा के दर्शन किए </title>
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		<pubDate>Sun, 16 Jun 2024 07:34:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में नवनिर्वाचित दमोह सांसद राहुल सिंह ने कुंडलपुर पहुंचकर पूज्य बड़े बाबा के दर्शन किए श्रीफल और छत्र चढ़ाया एवं आरती की नवनिर्मित सहस्त्रकूट जिनालय के भी दर्शन किए। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230; कुंडलपुर (दमोह)। सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में नवनिर्वाचित दमोह सांसद राहुल सिंह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में नवनिर्वाचित दमोह सांसद राहुल सिंह ने कुंडलपुर पहुंचकर पूज्य बड़े बाबा के दर्शन किए श्रीफल और छत्र चढ़ाया एवं आरती की नवनिर्मित सहस्त्रकूट जिनालय के भी दर्शन किए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर (दमोह)।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैन तीर्थ कुंडलपुर में नवनिर्वाचित दमोह सांसद राहुल सिंह ने कुंडलपुर पहुंचकर पूज्य बड़े बाबा के दर्शन किए श्रीफल और छत्र चढ़ाया एवं आरती की नवनिर्मित सहस्त्रकूट जिनालय के भी दर्शन किए। सांसद ने परम पूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी सदस्यों द्वारा सांसद महोदय का शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मान किया गया।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-62128" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240616-WA0005.jpg" alt="" width="1204" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240616-WA0005.jpg 1204w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240616-WA0005-226x300.jpg 226w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240616-WA0005-771x1024.jpg 771w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240616-WA0005-768x1021.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240616-WA0005-1156x1536.jpg 1156w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240616-WA0005-990x1316.jpg 990w" sizes="(max-width: 1204px) 100vw, 1204px" />मुनि श्री निष्पक्षसागर जी महाराज का ससंघ कुंडलपुर से हुआ विहा</strong></p>
<p>आचार्य भगवन श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनि श्री निष्पक्षसागर जी महाराज, मुनि श्री निस्पृहसागर जी महाराज, मुनि श्री निष्काम सागर जी महाराज, मुनि श्री निष्कंप सागर जी महाराज का मंगल विहार कुंडलपुर से पटेरा की ओर हुआ।</p>
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		<title>धर्मसभा में दिए प्रवचन :  गणधर परमेष्ठी द्वारा आगम की रचना होती है- आचार्य श्री समयसागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Fri, 19 Apr 2024 08:06:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैनतीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ आचार्य भगवन संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य कुंडलपुर में विराजमान हैं। इस अवसर पर अभिनव आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि आगम के माध्यम से बहुत सारा विषय सूक्ष्मता को लेकर वर्णन मिलता आगम में वह आगम की रचना दिव्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैनतीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ आचार्य भगवन संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य कुंडलपुर में विराजमान हैं। इस अवसर पर अभिनव आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि आगम के माध्यम से बहुत सारा विषय सूक्ष्मता को लेकर वर्णन मिलता आगम में वह आगम की रचना दिव्य ध्वनि के आधार से गणधर परमेष्ठी द्वारा आगम की रचना होती है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर ( दमोह)।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र, जैनतीर्थ कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ आचार्य भगवन संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य कुंडलपुर में विराजमान हैं। इस अवसर पर अभिनव आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि आगम के माध्यम से बहुत सारा विषय सूक्ष्मता को लेकर वर्णन मिलता आगम में वह आगम की रचना दिव्य ध्वनि के आधार से गणधर परमेष्ठी द्वारा आगम की रचना होती है और द्वादशांग धीरे-धीरे काल के प्रभाव से समझ लो धीरे-धीरे अपनी योग्यता को लेकर कर्म के उदय के कारण वह श्रुत राग को प्राप्त होता हुआ आया है लेकिन वस्तुतः क्षीरसागर का वह जल, जिसमें से आप एक लोटा भरकर ले आए तो वह जल क्षीरसागर का ही जल माना जाता है ।</p>
<p>उसी प्रकार गणधर परमेष्ठी के पश्चात उक्तरवर्ती आचार्यों के माध्यम से वह क्षीर सागर की धारा बहती हुई यहां तक आई और आचार्य महाराज उनको आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज के माध्यम से उनके मुखारविंद से और उनके अनुभव के माध्यम से आचार्य गुरुदेव को प्राप्त हुआ। बहुत अद्भुत पुण्य का उनका योग रहा और उन्होंने आचार्य ज्ञान सागर महाराज को उनकी उपस्थिति में भी और उनके समाधिस्थ होने के उपरांत भी उनको हृदय में बिठाया और निर्भीक होकर के निर्भीकता के साथ ज्ञान का अर्जन करते हुए ज्ञान सागर महाराज के माध्यम से प्राप्त जो रत्नात्रय की निर्दोष आराधना करते हुए रत्नात्रय को निर्मल बनाया है।</p>
<p>अपने जीवन काल में जो ज्ञान का अर्जन उन्होंने किया है वह शायद ही कोई और भी कर सकेगा। हमारे पास है क्या आप लोग कहते महाराज आप भी हमें भी सूत्र दे दो सूत्र के रचयिता आचार्य हुआ करते हैं और उन्होंने जो भी सूत्रों का निर्माण किया है, उसमें से किसी भी सूत्र को आप अपनी बुद्धि का विषय बना लो उपयोग के माध्यम से उन सूत्रों की आराधना उन सूत्रों की गहराई तक पहुंचने का पुरुषार्थ हमें भी करना है। आप लोगों के लिए भी करना बहुत अद्भुत विषय पूज्यपाद स्वामी ने स्पष्ट किया है कि प्रसंग धर्म ज्ञान का है। आप लोग सर्वार्थ सिद्धि का अवलोकन कर सकते हैं। मुझे वह प्रसंग स्मरण में आ रहा है कहां तक मैं आपके सामने रख पाऊं यह अलग वस्तु किंतु क्षयोपशम है। आपके पुण्य के उदय से वह भाव आपके सामने रख पाऊंगा, आज्ञा विशेष धर्म ज्ञान का विषय है।</p>
<p>पूज्यपाद स्वामी कह रहे हैं कि उपदेशता आवावात उपदेशता का अभाव हम लोगों के लिए तो सर्वार्थ सिद्धि का निर्माण करके महान उपकार किया है और वे उमा स्वामी का तत्वार्थ सूत्र जो उमा स्वामी के द्वारा रचित है। आदि टीका उनके द्वारा लिखी गई है और सर्वार्थ सिद्धि में अपने आप में लघुता का एक भाव प्रकट करते हुए लिखा है। सर्वार्थ सिद्धि में नवें अध्याय में धर्म ध्यान का प्रसंग आया। धर्म ध्यान के प्रसंग में बात रखी हेतु और दृष्टांत इन दोनों का अभाव हो जाता है। हम हेतु नहीं दे पाते हैं जिस समय और दृष्टांत प्रस्तुत नहीं करते उस समय इसको धर्म ज्ञान का विषय बनता है। हमें आज्ञा का पालन करना है कहां पर करना है इसका कोई अंत है नहीं।</p>
<p>जब श्रुत का अंत नहीं उपलब्ध आगम पुण्य के उदय से उपलब्ध हुआ है उसको हमें बिना किसी संघ के उसकी आस्था का विषय बनाना चाहिए।आचार्य श्री ने अच्छा दृष्टांत दिया था फर्श की दरी जिसको बोलते हजारों व्यक्ति बैठे हैं और एक व्यक्ति के हाथ में हिमखंड है छोटा सा बर्फ का एक टुकड़ा है वह एक दूसरे के हाथ में वह परिवर्तित होता हुआ अंतिम व्यक्ति के हाथ में पहुंच जाए शायद वह बर्फ की डली देखने नहीं मिलेगी। हाथ गीला मिलेगा यह आगम धीरे-धीरे यहां तक पहुंचा है हमारे हाथ गीले हैं हाथ सूख भी जाएं तो मन हमारा गीला बना रहेगा। प्रत्येक व्यक्ति का मन यदि शीतलता का अनुभव करता है तो निश्चय हृदय में भी वह आगम विद्ममान है।</p>
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