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	<title>आचार्य श्री शांति सागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य संघ सान्निध्य में होगा 22 दिसंबर से सिद्धचक्र महामंडल विधान: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने विधान का महत्व बताया  </title>
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		<pubDate>Fri, 19 Dec 2025 15:39:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी टोंक जिले के निवाई में संघ सहित विराजित है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मंगल सान्निध्य में चवरिया परिवार की ओर से 22 से 30 दिसंबर तक सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी टोंक जिले के निवाई में संघ सहित विराजित है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मंगल सान्निध्य में चवरिया परिवार की ओर से 22 से 30 दिसंबर तक सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ होगा। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी टोंक जिले के निवाई में संघ सहित विराजित है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मंगल सान्निध्य में चवरिया परिवार की ओर से 22 से 30 दिसंबर तक सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ होगा। बहुत पुण्य और सौभाग्य से सिद्धचक्र महा मंडल की पूजन करने, पूजन देखने ओर पूजन में चढ़ाए जाने वाले अर्ध्य में सिद्ध प्रभु का गुणानुवाद सुनने का अवसर मिलता है। विधान में पूजन में भावों और परिणामों की निर्मलता जरूरी है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने संत भवन में सिद्ध चक्र मंडल विधान के पुण्यार्जक परिवार को आशीर्वाद देकर प्रकट की। आचार्य श्री ने प्रतिदिन सिद्धचक्र विधान में समर्पित किए जाने वाले अर्घ्य के समय भगवान के गुणों का विस्तार से वर्णन कर बताया कि सिद्ध चक्र विधान की पूजा में मुख्य रूप से 2040 अर्घ्य चढ़ाए जाते हैं। सिद्ध चक्र विधान की पहली पूजा में मुख्य 8, दूसरी पूजा में 16, तीसरी पूजा में 32, चौथी में 64, पांचवीं में 128 और छठी पूजा में 256 अर्घ्य चढ़ाए जाते हैं।</p>
<p>आगे सातवीं पूजा में 512 आठवीं पूजन में 1024 अर्ध्य चढ़ाए जाएंगे। महिपाल एवं मोहित चवरिया ने बताया कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित 33 साधुओं के सान्निध्य में सिद्ध चक्र मंडल विधान का शुभारंभ 22 दिसंबर जिनेंद्र, आचार्य आज्ञा, मंगल कलश और रथ यात्रा के साथ होगा। रथयात्रा बड़ा मंदिर से प्रारंभ होगी। इसका समापन संत निवास पार्श्वनाथ उद्यान में होगा। आचार्य श्री वर्धमानसागर जी संघ सान्निध्य में सन्मति, कमलेश देवी, सुकुमाल, नीलम, शालू एवं परिवार ध्वजारोहण करेंगे। विमल जोला विधानाचार्य के निर्देशन में मंडप स्थल शुद्धि, इंद्र प्रतिष्ठा, सकलीकरण अंकुरारोपण होगा। सभी समाज जनों को विधान में सम्मिलित होकर धर्म लाभ लेने का सादर अनुरोध किया गया।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 14 दिसंबर को होगा मंगल प्रवेश : आचार्यश्री के नगर प्रवेश को लेकर समाज हैं उत्साहित </title>
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		<pubDate>Fri, 12 Dec 2025 12:33:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का निवाई नगर की ओर मंगल विहार चल रहा है। आचार्य श्री का 3 वर्षों के बाद 14 दिसंबर को भव्य मंगल प्रवेश होगा। निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; निवाई। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का निवाई नगर की ओर मंगल विहार चल रहा है। आचार्य श्री का 3 वर्षों के बाद 14 दिसंबर को भव्य मंगल प्रवेश होगा। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का निवाई नगर की ओर मंगल विहार चल रहा है। आचार्य श्री का 3 वर्षों के बाद 14 दिसंबर को भव्य मंगल प्रवेश होगा। निवाई नगर 10 से अधिक जिनालयों की, संघस्थ आर्यिका श्री पूर्णिमामति जी की जन्म नगरी और आर्यिकाश्री विन्रम मति जी की दीक्षा भूमि, अनेक साधुओं की समाधि भूमि हैं। नगर प्रवेश को लेकर समाज काफी उत्साहित हैं।</p>
<p>जीतू ,मोहित ,पवन बोहरा ने बताया कि इसके पूर्व 11 दिसंबर को जीतू भाई की फैक्टरी में आचार्य श्री वर्धमान सागरजी की अगवानी हुई। आचार्य संघ ने झिलाय की ओर मंगल विहार किया। 14 दिसंबर को दोपहर को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की 26 साधु अगवानी करेंगे। वर्ष 2022 के बाद पुनः 3 वर्षों के बाद वर्ष 2025 में निवाई चातुर्मास नहीं होने के बाद बहु प्रतीक्षित आगमन होगा।</p>
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		<title>जिस मंदिर क्षेत्र में चमत्कार होता है वह मंदिर अतिशय क्षेत्र होता है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्राचीन मंदिर के रहस्यों से पर्दा उठाया  </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 13:55:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी सहित पूर्वाचार्यों के आशीर्वाद से हमने पहली बार किसी मंदिर का जीणोद्धार कर नूतन जिनालय बनाने की प्रेरणा दी। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के मोक्ष कल्याणक अवसर पर धर्मसभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि अब पीपल्दा गांव नगर हो गया। पीपल्दा से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी सहित पूर्वाचार्यों के आशीर्वाद से हमने पहली बार किसी मंदिर का जीणोद्धार कर नूतन जिनालय बनाने की प्रेरणा दी। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के मोक्ष कल्याणक अवसर पर धर्मसभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि अब पीपल्दा गांव नगर हो गया। <span style="color: #ff0000">पीपल्दा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पीपल्दा।</strong> पीपल्दा ग्राम अब श्री चंद्र प्रभु अतिशय मंदिर के नाम से भारत में विख्यात होगा। 972 वर्ष प्राचीन जिनालय में विगत 3 वर्षों पूर्व आए थे तब से अभी तक हमने भी अनेक अतिशय देखे और प्रभु की सकारात्मक उर्जा महसूस की। आचार्य श्री शांति सागर जी सहित पूर्वाचार्यों के आशीर्वाद से हमने पहली बार किसी मंदिर का जीणोद्धार कर नूतन जिनालय बनाने की प्रेरणा दी। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के मोक्ष कल्याणक अवसर पर धर्मसभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि अब पीपल्दा गांव नगर हो गया। प्राचीन जिनालय पहले रोड से 4 फीट नीचे था। वर्षा का पानी मंदिर में आता था। प्रभु के चमत्कार से बिना निकासी के जल निकल जाता था। श्री चंद्रप्रभु भगवान का पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव हुआ। इस दौरान इंदौर जैसे महानगर से भक्त यहां आकर सौधर्म इंद्र बने। कोलकाता, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश सहित अनेक राज्यों के श्रावकों ने तन-मन-धन से भक्ति की।</p>
<p><strong>आचार्यश्री ने कहा-अब यह अतिशय क्षेत्र है</strong></p>
<p>जन्म कल्याणक पर हेलिकाप्टर से पुष्प वर्षा, तप कल्याणक पर प्रसिद्ध भामाशाह का हेलिकाप्टर से आना, मंदिर बहुमंजिला शिखर वाला बनना, संत भवन बनाना,उसके लिए भूमिदान, निर्माण सामग्री का दान ऐसे अनेक चमत्कार अतिशय प्राचीन श्री चंद्रप्रभु द्वारा ही हुए हैं। इसलिए श्री चंद्रप्रभु जिनालय को हम अतिशय क्षेत्र घोषित करते हैं। आपकी ही तरह श्री चन्द्रप्रभु भगवान भी संसारी प्राणी थे। जिन्होंने मनुष्य भव में युवराज बनकर राज संचालन किया। विवाह भी किया। आकाश में बिजली की चमक देखकर वैराग्य का निमित्त मिला।</p>
<p><strong>रोज देवदर्शन और पूजन का संकल्प लें</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि दीक्षा का प्रसंग आपने देखा। तप साधना से चार धातिया कर्मों को नष्ट कर केवल ज्ञान प्राप्त कर विहार कर धर्म देशना समवशरण में देते हैं। सम्मेद शिखर में नियोग धारण कर ध्यान से शेष 4 अधातिया कर्मों को नष्ट कर सिद्ध अवस्था प्राप्त करते हैं। सभी को चमत्कारी अतिशयकारी चंद्रप्रभु श्री का प्रतिदिन देव दर्शन, अभिषेक, पूजन का संकल्प लेना चाहिए। देव गुरु हमारे आराध्य हैं। मंगलवार को सुबह श्रीजी के अभिषेक पूजन के बाद आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनिश्री हितेंद्र सागर जी ने बताया कि अरिहंत भगवान 4 कर्मों के बाद शेष 4 कर्म किस प्रकार श्रेणी बार क्षय कर सिद्धालय विराजित होते हैं। भगवान के मोक्ष जाने के बाद अग्निकुमार देव नख और केश के अग्नि संस्कार करते हैं।</p>
<p><strong>दानदाताओं और सहयोगियों का किया सम्मान </strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ के सानिध्य में पंडाल से नूतन श्रीजी को प्रतिष्ठाचार्य मनोज शास्त्री के निर्देशन में रथ में विराजित कर नूतन मंदिर में नूतन वेदी पर मंत्रोच्चार पूर्वक पुण्यशाली परिवारों द्वारा विराजित किया गया। नूतन शिखर पर स्वर्ण कलशारोहण मनोज, संजीव गौरव सोगानी परिवार ने किया। ध्वजदंड आरती सनत निखिल विशाल जैन इंदौर पुण्यार्जक परिवार ने लगाए। मंदिर निर्माण समिति के प्रभारी लल्लूप्रसाद सिंघल, ओमप्रकाश, राजेंद्र, ओमप्रकाश बजाज ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान नूतन जिनालय नूतन प्रतिमा वेदी, शासन रक्षक देवी-देवताओं, मंदिर और संत भवन निर्माण में तन, मन और धन से सहयोग करने वाले सभी दान दाताओं और सहयोगियों का तिलक, माला, दुप्पटा, स्मृति चिन्ह से सम्मान कर कृतज्ञता ज्ञापित की गई।</p>
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		<title>आचार्य श्री शांति सागर जी की नूतन प्रतिमा की स्थापना 14 नवंबर को : ध्यान मंदिर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सान्निध्य में होंगे कार्यक्रम   </title>
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		<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 11:36:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज जी की मूल बाल ब्रह्मचारी पट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने संयमी जीवन का 57 वां वर्षायोग अतिशय क्षेत्र टोंक में संपन्न किया। नूतन प्रतिमा नवनिर्मित ध्यान केंद्र अमीरगंज श्री आदिनाथ नसिया में14 नवंबर को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान से साथ विराजित होगी। टोंक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज जी की मूल बाल ब्रह्मचारी पट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने संयमी जीवन का 57 वां वर्षायोग अतिशय क्षेत्र टोंक में संपन्न किया। नूतन प्रतिमा नवनिर्मित ध्यान केंद्र अमीरगंज श्री आदिनाथ नसिया में14 नवंबर को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान से साथ विराजित होगी। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज जी की मूल बाल ब्रह्मचारी पट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने संयमी जीवन का 57 वां वर्षायोग अतिशय क्षेत्र टोंक में संपन्न किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के सानिध्य में आचार्य श्री शांतिसागर जी की नूतन प्रतिमा नवनिर्मित ध्यान केंद्र अमीरगंज श्री आदिनाथ नसिया में 14 नवंबर को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान से साथ विराजित होगी। भागचंद फुलेता, धर्मचंद दाखिया सकल दिगंबर जैन समाज के सहयोग से प्रबंध समिति दिगंबर समाज अमीरगंज एवं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी वर्षायोग समिति के तत्वावधान में शुक्रवार को प्रातः श्री जी के अभिषेक पूजन के बाद श्रीजी, देव, गुरु से आज्ञा लेकर आचार्य निमंत्रण दिया जाएगा। महिलाओं की घटयात्रा निकाली जाकर पुण्यार्जक कलई परिवार द्वारा मंदिर भूमि शुद्धि की जाएगी।</p>
<p><strong>श्री शांतिसागर ध्यान केंद्र का निर्माण कराया</strong></p>
<p>समाज अध्यक्ष पदमचंद आंडरा, महावीर देवली वाले मंत्री और वर्षायोग समिति के भागचंद फुलेता, धर्मचंद ने बताया कि स्वर्गीय कजोड़ मल की धर्मपत्नी कमला देवी, शिखरचंद, कमलेश, लक्ष्मीदेवी वेणी प्रसाद, पवन, अर्पित, अंकित आदि समस्त कलई परिवार की ओर से श्री शांतिसागर ध्यान केंद्र का निर्माण कराया गया है। इन्हीं कलई परिवार द्वारा 14 नवंबर को नवीन भवन और नूतन वेदी का शुद्धिकरण कार्य आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में किया जाएगा।</p>
<p><strong>सेवाभावी सहयोगियों, कार्यकर्ताओं का सम्मान होगा </strong></p>
<p>कमल सराफ के अनुसार ऋतु भरत जीरभार इंदौर आचार्य श्री शांति सागर जी की प्रतिमा के पुण्यार्जक हैं। विगत माह आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव में आचार्य श्री शांतिसागर जी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। आचार्य श्री शांति सागर नवीन ध्यान केंद्र भवन, वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत 14 नवंबर को प्रातः श्रीजी के अभिषेक के पश्चात याग मंडल विधान होगा। जिसमें वेदी और भूमि शुद्धि, वास्तु विधान, हवन किया जाएगा। दोपहर को आचार्य श्री शांतिसागर महाराज की प्रतिमा नवीन ध्यान मंदिर पर नूतन वेदी पर नूतन भवन पुण्यार्जक परिवार द्वारा विराजित की जाएगी। चातुर्मास समिति द्वारा आचार्य संघ के सेवाभावी सहयोगियों, कार्यकर्ताओं आदि का सम्मान किया जाएगा। आचार्य श्री शांति सागर जी एवं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के पूजन पश्चात आचार्य श्री के उपदेश होंगे।</p>
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		<title>आचार्य श्री शांति सागर जी का आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव : दो दिवसीय कार्यक्रम में हुए विविध विधि-विधान और धार्मिक क्रियाएं  </title>
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		<pubDate>Mon, 06 Oct 2025 12:02:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव का दो दिवसीय कार्यक्रम अनेक भव्य कार्यक्रमों के साथ सानंद हुआ। सन 1872 में जन्मे श्री सातगोंडा ने श्री देवेंद्रकीर्ति स्वामी से सन 1915 में क्षुल्लक एवं सन 1920 में मुनि दीक्षा ली। आपका नाम मुनि श्री शांति सागर जी किया गया। टोंक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव का दो दिवसीय कार्यक्रम अनेक भव्य कार्यक्रमों के साथ सानंद हुआ। सन 1872 में जन्मे श्री सातगोंडा ने श्री देवेंद्रकीर्ति स्वामी से सन 1915 में क्षुल्लक एवं सन 1920 में मुनि दीक्षा ली। आपका नाम मुनि श्री शांति सागर जी किया गया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूलबाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज अतिशय क्षेत्र टोंकनगर में 57वां वर्षायोग कर रहे हैं। प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव का दो दिवसीय कार्यक्रम अनेक भव्य कार्यक्रमों के साथ सानंद हुआ। सन 1872 में जन्मे श्री सातगोंडा ने श्री देवेंद्रकीर्ति स्वामी से सन 1915 में क्षुल्लक एवं सन 1920 में मुनि दीक्षा ली। आपका नाम मुनि श्री शांति सागर जी किया गया। संयमी जीवन में, सर्प , सिंह, चींटी, मकोड़े,मानवजन्य के अनेक उपसर्गों को नाम के अनुरूप समता भाव धारण कर सहन किया। सन 1924 आश्विन शुक्ल ग्यारस को आपको आचार्य पद दिया गया। उस दिन 4 दीक्षा दीं। जिनवाणी जिनालयों और धर्म संस्कृति की रक्षा की। जीवन में 9938 उपवास किए। 88 भव्य आत्माओं की दीक्षा दी।</p>
<p><strong>मुनि दीक्षा शताब्दी महोत्सव पारसोला से प्रारंभ हुआ </strong></p>
<p>राजस्थान सरकार के राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में 3 ओर 4 अक्टूबर 2025 आश्विन शुक्ल 11 एवं 12 से विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों से साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रारंभ हुआ। श्रीजी के पंचामृत अभिषेक मानव चलित श्रीजी की रथयात्रा, ध्वजारोहण भूमिशुद्धि, आचार्य श्री के प्रवचन ,प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर विधान शाम को श्रीजी की आरती ,भजन संध्या का आयोजन हुआ। आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि हम सभी का सौभाग्यशाली हैं कि 20 वीं सदी के सर्वप्रथम दिगम्बर प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी का आचार्य पद का शताब्दी तथा मुनि श्री वीरसागर जी और मुनि श्री नेमिसागर जी का मुनि दीक्षा शताब्दी महोत्सव पारसोला से प्रारंभ हुआ है और महोत्सव निरंतर आगे भी चलेगा क्योंकि, गुरु का गुणानुवाद समय का मोहताज नहीं है। हर दिन हर समय किया जाता है। आपने आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के संयम उपकरण पिच्छी कमंडल शास्त्र और सिंहासन का अवलोकन किया। आश्विन शुक्ल एकादशी सन 1924 को 4 दीक्षा देने कारण श्री शांतिसागर जी को आचार्य पद इसी दिन दिया गया। संलेखना के समय प्रथम मुनि शिष्य श्री वीरसागर जी को उन्होंने समाधि के पूर्व आचार्य पद देकर यही आदेश दिया कि परंपरा का निर्दाेष पालन करना और अपने समाधि के पूर्व अपने योग्य शिष्य को आचार्य पद देना। आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा तब से निरंतर निर्दाेष रूप से गुरु परंपरा अनुसार चल रही है।</p>
<p><strong>श्रीजी की विशाल यात्रा महावीर जिनालय अहिंसा सर्किल से प्रारंभ हुई</strong></p>
<p>आचार्य पद से धर्म प्रभावना होती है। आचार्य श्री शांतिसागर जी ने चरित्र के सभी छह अंगों का पालन कर जीवन को प्रयोगशाला बनाया। मृत्यु श्रावक की होती है और संलेखना श्रमण साधु की होती है। यह मंगल देशना प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के आचार्य पदप्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव के दो दिवसीय कार्यक्रम में पंचम पट्टाधीशआचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रकट की। गुरुभक्त राजेश पंचोलिया के अनुसार आओ शांति मार्ग पर चले के दिव्य संदेश के आह्वान पर आचार्य श्री वर्धमान सागरजी संघ सानिध्य में श्रीजी की विशाल यात्रा महावीर जिनालय अहिंसा सर्किल से प्रारंभ हुई। जिसमें भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों के वेशभूषा परिधानों का विशेष आकर्षण रहा। बुलेट गाड़ियों, घोड़े और ऊँट, जिनध्वजा युवा लहराते हुए शोभायमान दृष्टिगत हुए। ढोल-नगाड़ों, बैंड की मधुर ध्वनियों से आच्छादित लहरियों पर युवक-युवतियां थिरक कर भक्ति प्रदर्शित कर रहे थे।</p>
<p><strong>3 किमी की शोभा यात्रा 4 घंटे में पहुंची </strong></p>
<p>पाँच गज (हाथी) पर चयनित कल्पना सुशील कार्वा उदयपुर मुंबई सौंधर्म इंद्र, चक्रवर्ती अलका सुनील जवेरी संघपति परिवार मुंबई,कुबेर, यज्ञ नायक पूर्वा समर कंठाली इंदौर तथा कुबेर इंद्र पुष्पा मोहनलाल छामुनिया तथा श्रुतदेवी जिनवाणी माता को लेकर कन्हैयालाल बारवास परिवार हाथियों पर सवार होकर धर्म प्रभावना कर रहे। अनेक बग्घियों पर इंद्र तथा विशिष्ट गणमान्य अतिथि गृहस्थ अवस्था भोज के परिजन, बारामती के चंदू काका परिवार,श्री अरविंद दोषी परिवार विराजित हुए। शोभा यात्रा में श्री जी आचार्य संघ की आरती की। पुष्प वृष्टि से स्वागत नगर के सभी राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक संगठनों ने कर सामाजिक सदभावना का परिचय दिया। लगभग 3 किमी की शोभा यात्रा 4 घंटे में प्रमुख मार्गाे से होते हुए आर एन फार्म हाउस पहुंची। नगर में सैकड़ों बैनर लगाए गए। प्रशासन द्वारा भी जुलूस की समुचित व्यवस्था की तथा 100 से अधिक नगरों के समाज जान यहां उपस्थित हुए।</p>
<p><strong> पंजाब बैंड की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र </strong></p>
<p>कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु ,मध्यप्रदेश, राजस्थान दिल्ली, गुजरात ,छत्तीसगढ़,बिहार, असम पश्चिम बंगाल आदि अनेक राज्यों से गुरु भक्त कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। लाखों भक्तों ने जिनवाणी और वात्सल्य वारिधी यू-ट्यूब से लाइव प्रसारण देखा। कार्यक्रम में आचार्य शांति सागर जी के गृहस्थ अवस्था कर्नाटक के तीसरी पीढ़ी के परिजन विशेष रूप से उपस्थित हुए। जुलूस में श्रावक श्राविकाएं बगैर जूते चप्पल के चल रहे थे। सभी मंडल डीजे, बैंड पार्टी की सुमधुर भजनों पर अनेक भक्त भक्ति नृत्य से प्रस्तुत कर रहे थे। पंजाब बैंड की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र बन गई। मंगल कार्यक्रम के पूर्व दिवस वर्षा कर इंद्र देवता ने नगर एवं भूमि की शुद्धता की। घटयात्रा कलश के पवित्र जल से भूमिशुद्धि की। ध्वज वंदन मंगल कलश स्थापना आदि समस्त मांगलिक क्रियाएं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जी शास्त्री धरियावद के निर्देशन में हुई।</p>
<p><strong>आचार्य श्री शांतिसागर जी की डॉक्यूमेंट्री दिखाई </strong></p>
<p>ध्वजारोहण श्री अजीत मिंडा मुंबई ,मंडप उद्घाटन सुनील अग्रवाल जयपुर, दीप प्रवज्जलन अनिल सेठी बैंगलोर ,सुरेश सबलावत जयपुर ,राकेश सेठी कोलकाता धर्मचंद जैन टोंक ने किया। कलश स्थापना 6 प्रतिमा धारी सुशीला अशोक पाटनी किशनगढ़ आर के मार्बल ग्रुप ने किया। चरण प्रक्षालन का सौभाग्य अजीत मिंडा, राजकुमार सेठी जयपुर ,शास्त्र भेंट अंकेश जोबनेर ,निर्मल ,शांति, सुबोध सुमति छाबड़ा रायपुर दुर्ग ने तथा आचार्य शांतिसागर जी के सिंहासन, संयम उपकरण पिच्छी, कमंडल शास्त्र का अनावरण राजेश गुणमाला जवेरी मुंबई परिवार ने किया। प्रवचन के बाद आचार्य श्री शांतिसागर जी की डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। आचार्य ससंघ की आहार चर्या इसके बाद दोपहर को इंद्र प्रतिष्ठा सकलीकरण क्रिया हुई। जिसमें 125 प्रमुख और प्रति इंद्रों द्वारा आचार्य श्री शांति सागर मंडल विधान की पूजन की गई।</p>
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पूजन कर द्रव्य अर्पित किए</strong></p>
<p>इस विधान के लिए यज्ञनायक स्पर्श समर कँठाली इंदौर द्वारा पूजन के सभी द्रव्यों के 100 थाल स्थापना, जल ,कलश, चंदन कलश अक्षत थाल प्रकार के देश-विदेश के पुष्प प्रकार के नैवेद्य में मिठाई नमकीन दीप थाल धूप प्रकार के विभिन्न फल सूखे मेवे अर्ध्य सभी द्रव्य सभी इंद्र परिवार द्वारा आचार्य श्री शांति सागर जी एवं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पूजन कर द्रव्य अर्पित किए। मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवं आर्यिका श्री महायश मति जी ने विधान की पूजन कराई। पूजन के दौरान चढ़ाए जाने वाले द्रव्यों अर्ध्य में आचार्य श्री के गुणों बाबद भी बताया। दोपहर को मुनि श्री दर्शित सागर जी के केशलोचन हुए। दोपहर को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की नूतन प्रतिमा की विधि विधान मंत्रोच्चार से प्राणप्रतिष्ठा की गई। कार्यक्रम का सुंदर संचालन बसंत वेद ने किया। किशनगढ़ समाज ने आचार्य संघ को किशनगढ़ में आगमन शताब्दी महोत्सव एवं वर्ष 2026 का चातुर्मास करने हेतु श्रीफल अर्पित किया।</p>
<p><strong>आचार्य श्री की प्रेरणा से ही मूलाचार ग्रंथ का प्रकाशन </strong></p>
<p>रात्रि को श्री जी ओर आचार्य श्री की 2500 दीपक आरती की गई आमंत्रित कलाकारों ने मन मोहक भजनों की प्रस्तुति दी। दूसरे दिन4 अक्टूबर को उपदेश में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने बताया कि आचार्य पद शताब्दी महोत्सव मनाना बहुत ही पुण्य का कार्य है। चार अक्टूबर को अनेक कार्यक्रम हो रहे हैं। दीक्षित मुनि अपने योग्यता गुणों के आधार पर आचार्य बनते हैं। आज आचार्य श्री शांति सागर जी की विशेषता ,उनके गुणों को वाणी से प्रकट करना कठिन है। चारित्र चक्रवर्ती ग्रंथ में उनकी अनेक विशेषता बतलाई है उन्होंने बाहर शरीर से अंतर्मुखी होकर आत्मा के ज्ञान को प्रकट किया और आत्मा में देखने चिंतन करने की प्रवृत्ति को जागृत रखा। देव शास्त्र गुरु हमें मार्ग दिखलाते हैं जिस मार्ग पर वह चले उसको उन्होंने स्वयं निर्मित किया। बने बनाए मार्ग पर चलने से ज्यादा कठिन नया मार्ग बनाकर उस पर चलना महत्वपूर्ण है। गुरु भक्त राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे प्रवचन में बताया कि जीवन में धर्म को धारण कर दीक्षा से जीवन का उत्थान किया जाता है दीक्षा के साथ अहिंसा महाव्रत धारण किया जाता है। यह महाव्रत मन, वचन, काय शरीर से पालन किया जाता है। वाणी में कटुता होना भी हिंसा का सूचक है। 20वीं सदी के आचार्य श्री की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी वर्तमान में भी देखने को मिल रही है। साधु जीवन में मन ,वचन , काय से पवित्र होते हैं। साधु शूरवीर होते हैं वह अपनी आत्मा की वीरता से कर्म रूपी शत्रु से लड़ते हैं। आचार्य श्री शांति सागर जी के जीवन में सरलता, सत्य व्यवहार, धर्म के प्रति अनुराग ,और सब परिस्थितियों में समता भाव त्याग, तप आदि गुण थे। आचार्य श्री ने बताया कि हमें ऐसा लगता है कि हम पूर्व जन्म में भी जैन मुनि रहे हैं। इसी कारण उसे आगम चर्या का हम वर्तमान जीवन में पालन कर रहे हैं। जैन साधु के लिए मूलाचार ग्रंथ तब प्रकाशित नहीं था। आचार्य श्री की प्रेरणा से ही मूलाचार ग्रंथ का अब प्रकाशन हुआ है।</p>
<p><strong>संपूर्ण समाज के लिए मंगल आशीर्वाद दिया</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने सम्यक दर्शन ,सम्यक ज्ञान सम्यक चारित्र जिनागम को जीवन में धारण किया। समाधि के समय भी धर्म से वह परिपूर्ण रहे। और सिद्ध क्षेत्र कुंथल गिरी में 36 दिन की सल्लेखना धारण की। साधु मृत्यु पर विजय प्राप्त करते हैं। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने संघपति जवेरी परिवार मुंबई ,गृहस्थ अवस्था के परिजनों ,चंदू काका बारामती परिवार, डॉ. कल्याण अग्रवाल ,अरविंद दोषी सहित पंडित हंसमुख शास्त्री, भागचंद जी एवं टोंक नगर की संपूर्ण समाज के लिए मंगल आशीर्वाद दिया। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व अनेक विद्वानों ने , पंडित श्री हंसमुख जी धरियावद, ने भावांजलि प्रस्तुत की।आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री महायश मति जी ने प्रथमाचार्य श्री ओर 9 के अंक का संयोग बताया जन्म दिनांक 27 ,जन्म वर्ष 1872, कमल की 1008 पंखुड़ी ,108 कमल , 18 वर्ष की उम्र, 36 मूलगुण, 36 दिन की सल्लेखना, 18 करोड़ जाप, समाधि दिनांक 18,समाधि माह सितंबर,,108 गुण आदि से भावांजलि प्रस्तुत की।मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज ने गुणानुवादमें बताया कि प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज बाल ब्रह्मचारी थे उनकी परंपरा में आचार्य वीर सागर जी, आचार्य श्री शिव सागर जी, आचार्य श्री धर्म सागर जी, आचार्य श्री अजीत सागर जी और वर्तमान पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सभी बाल ब्रह्मचारी आचार्य हैं। अनेक उपसर्ग सहन किएबाहर से आमंत्रित भक्तों ने चित्र अनावरण कर दीप प्रवज्जलन कर चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भंेट की।</p>
<p><strong>कई आयोजन और सम्मेलन हुए </strong></p>
<p>टोंक नगर में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकलने कारण आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने इसे अतिशय क्षेत्र घोषित किया है। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर आचार्य पद शताब्दी प्रतिष्ठापना महोत्सव में पूर्व में पत्रकार संगोष्ठी, विद्वत संगोष्ठी, चार्टर्ड एवं एडवोकेट सम्मेलन, शिक्षक सम्मेलन, नारी, युवा सम्मेलन हो चुके है। भागचंद, धर्म चंद, कमल सराफ ,बीना छामुनिया ने बताया कि टोंक समाज द्वारा अनेक प्रकल्पों राष्ट्र सेवा, श्रुत जिनवाणी सेवा, श्रमण साधु सेवा माता-पिता की सहमति से जैन समाज में शादी करना आदि प्रकल्पों के लिए सांकेतिक 100 सदस्यों को देव शास्त्र एवं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के समक्ष संकल्पित कराया। इस अवसर पर गृहस्थ अवस्था की जन्म नगरी भोज से तीसरी पीढ़ी की पद्मश्री पाटिल, चौथी के किरण ,सुरेखा, कुमारी प्रणिता सहित उपस्थित हुए। बारामती के प्रसिद्ध संघपति चंदू काका के परिजन, अरविंद दोषी मुंबई के परिजन, संघ पति प्रतापगढ़ मुंबई के सुनील, अलका जवेरी ने भी सहभागिता की।</p>
<p><strong>यह समाजजन भी मौजूद रहे</strong></p>
<p>आचार्य श्री शांति सागर फाउंडेशन के अनिल सेठी बंगलौर, संजय पापड़ीवाल किशनगढ़, राकेश सेठी कोलकाता, सुरेश सबलावत जयपुर, सुनील अग्रवाल जयपुर राजकुमार सेठी जयपुर, अजीत मिंडा मुंबई, सुनील जवेरी मुंबई, डॉ. कल्याण गंगवाल, भरत जीरभार, समर कँठाली इंदौर, जय, शरद कार्वा उदयपुर, राजेश जवेरी मुम्बई सहित अनेक भक्त उपस्थित हुए। सभी के तन-मन-धन त्याग हेतु तिलक, माला, शॉल, श्रीफल से स्वागत कर स्मृति चिन्ह भेंट किया।</p>
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		<title>धर्म रूपी विश्व विद्यालय से ज्ञान मिलता है : आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ भगवान और आचार्य श्री शांति सागर जी का संयोग बताया  </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 13:20:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राग और द्वेष से कर्म बंध होते हैं। इससे सुख का नाश होता है। संसार में जन्म मरण का परिभ्रमण होता रहता है। हमें जो भौतिक पदार्थ पुरुषार्थ से मिले हैं। वह वास्तव में हमारे नहीं है नश्वर है। श्री शांतिसागर प्रवचन माला के तहत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कर्मबंध के बारे में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>राग और द्वेष से कर्म बंध होते हैं। इससे सुख का नाश होता है। संसार में जन्म मरण का परिभ्रमण होता रहता है। हमें जो भौतिक पदार्थ पुरुषार्थ से मिले हैं। वह वास्तव में हमारे नहीं है नश्वर है। श्री शांतिसागर प्रवचन माला के तहत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कर्मबंध के बारे में बताया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> राग और द्वेष से कर्म बंध होते हैं। इससे सुख का नाश होता है। संसार में जन्म मरण का परिभ्रमण होता रहता है। हमें जो भौतिक पदार्थ पुरुषार्थ से मिले हैं। वह वास्तव में हमारे नहीं है नश्वर है। घर जिसमें आप रहते हैं। यह भी जेल के समान है। घर में रहना भी बंधन है, इन परिवार ,परिग्रह, राग द्वेष के बंधन कारण आप पराधीन है। इससे उदासीन होकर वैराग्य लेना ही वास्तविक यथार्थ ज्ञान है। यह मंगल देशना श्री शांतिसागर प्रवचन माला के तहत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अतिशय क्षेत्र में धर्मसभा में प्रकट की। आचार्य श्री ने श्री शांतिनाथ भगवान और प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी का संयोग बताया कि श्री शांतिनाथ भगवान के समय से धर्म परिवर्तन निरंतर चल रहा है। उसी प्रकार 20वीं सदी में प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी ने श्रमण परंपरा को परावर्तन कर पुनर्जीवित किया। तब से श्रमण परंपरा भी निर्बाध जारी है।</p>
<p><strong>पुरुषार्थ करने पर मोक्ष की राह प्रशस्त होगी</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने उपदेश में आगे बताया कि प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव ने एक लाख वर्ष पूर्व की आयु शेष रहने पर 84 खंड के भवन राज पाठ वैभव को त्याग कर निमित्त से जैनेश्वरी दीक्षा धारण की। आप भी मन, शरीर और आत्मा रूपी तीन खंड के भवन में रहते हैं। आत्मा को सब भूल रहे हैं। आत्मा के स्वरूप का यथार्थ ज्ञान प्राप्त करने का पुरुषार्थ करने पर मोक्ष की राह प्रशस्त होगी। जिनशासन ज्ञान में है। धर्म रूपी विश्व विद्यालय से ज्ञान मिलता है। शासन ज्ञान से चलता है, ज्ञान से शांति मिलती है ज्ञान नियमित बनने का मार्ग देता है। संसारी भव्य प्राणियों के लिए धर्म ही मंगलमय और शरणभूत है।</p>
<p><strong>आर्यिका श्री देशना मति जी ने क्रोध और क्षमा की विवेचना की</strong></p>
<p>समाज प्रवक्ता पवन कंटान और विकास जागीरदार, कमल सराफ ने बताया कि आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री देशना मति जी ने क्रोध और क्षमा की विवेचना की। अपेक्षा की उपेक्षा होने से क्रोध आता है। पवन और अंजना सती की कहानी के माध्यम से बताया कि 22 वर्ष तक पति का वियोग सिर्फ इस कारण से हुआ कि उन्होंने जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा को 22 मिनट के लिए छुपा दिया था। उन कर्मों के बंधन ने उन्हें यह दुःख दिया। जिसे उन्होंने समता से शांति से सहन किया। क्रोध जब बैर का रूप लेता है तो एक भव नहीं अनेक जन्मों के भव बिगड़ जाते हैं। 2 अक्टूबर को होने वाली अवनीश भाई दीक्षार्थी के परिजनों द्वारा 30 सितंबर को धार्मिक भजन का कार्यक्रम किया गया। दीक्षार्थी परिवार की ओर से प्रभावना का वितरण किया गया। रात्रि में दीक्षार्थी का हल्दी और मेंहदी का कार्यक्रम हुआ।</p>
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		<title>कलम को अनुभव की स्याही से समर्थ बनाएं: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में हुई राष्ट्रीय पत्रकार संगोष्ठी  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Jul 2025 12:24:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में रविवार को आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी समारोह में शांति समागम राष्ट्रीय पत्रकार संगोष्ठी हुई। इसमें देश भर के जैन समाज के पत्रकारों ने भाग लिया। टोंक से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर&#8230; टोंक। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में रविवार को आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी समारोह में शांति समागम राष्ट्रीय पत्रकार संगोष्ठी हुई। इसमें देश भर के जैन समाज के पत्रकारों ने भाग लिया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में रविवार को आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी समारोह में शांति समागम राष्ट्रीय पत्रकार संगोष्ठी हुई। इसमें देश भर के जैन समाज के पत्रकारों ने भाग लिया। भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष रमेश जैन तिजारिया ने अध्यक्षता की। विशिष्ट अतिथि सरोज बंसल प्रधान पंचायत समिति टोंक थीं। दिशा बोध पत्रिका के प्रधान संपादक चिरंजीलाल बगड़ा कोलकत्ता ने निर्देशन किया। जैन संदेश के संपादक एडवोकेट अनूपचंद जैन फिरोजाबाद मुख्य वक्ता थे। पदम बिलाला जयपुर, इंजी आशीष जैन धार आदि भी उपस्थित थे। तीन सत्रों में 5.30 बजे तक श्री दिगंबर जैन मंदिर नसियां जी अमीर गंज में इसका आयोजन हुआ। मुख्य संयोजक राजेंद्र महावीर सनावद ने बताया कि अतिथियों दीप प्रज्वलन किया। स्थानीय समाज की बालिकाओं ने नृत्य के माध्यम से सुंदर मंगलाचरण किया। इस अवसर पर आचार्य शांति सागर जी की परंपरा के आचार्यों के अर्घ्य चढ़ाए गए। राजेंद्र जैन महावीर ने संचालन किया। उन्होंने गोष्ठी शांति समागम, समागम से संवाद, संवाद से समाधान, समाधान से समन्वय, समन्वय से समाज, समाज से सद्भावना, सद्भावना से समृद्धि, समृद्धि से सहानुभूति, सहानुभूति से संवेदना, संवेदना से शांति पर प्रकाश डाला।</p>
<p><strong> जैन सिद्धांतों का स्वयं पालना करें और करवाएं</strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कहा कि देव शास्त्र गुरु के प्रति निष्ठा रखते हुए भगवान महावीर, कुंद कुंद आमनाय, आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज के उपकारों, सिद्धांतों को आगे बढ़ाएं। धर्म प्रभावना कर अपने-अपने समाचार पत्रों में प्रकाशित कर जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करें। पत्रकार एक आदर्श समाज का निर्माण करें और कलम को अनुभव की स्याही से समर्थ बनाएं। आचार्य जी ने कहा कि आप सभी ऐसे कुल में पैदा हुए जिन्हें तीर्थंकरों की वाणी, आदर्श व उपदेश सुनने और पालन करने का अवसर मिल रहा है। जैन कुल में हो तो जैन सिद्धांतों का स्वयं पालना करें और करवाएं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-86136" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250728-WA0020.jpg" alt="" width="1299" height="606" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250728-WA0020.jpg 1299w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250728-WA0020-300x140.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250728-WA0020-1024x478.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250728-WA0020-768x358.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250728-WA0020-990x462.jpg 990w" sizes="(max-width: 1299px) 100vw, 1299px" />सम्यक दर्शन से मोक्ष सिद्धशिला जोड़ना चाहिए</strong></p>
<p>गोष्ठी के मुख्य वक्ता अनूपचन्द जैन फिरोजाबाद ने आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के संसमरण सुनाए। इस अवसर पर अखिल बंसल, कमल जैन,सरोज बंसल, रमेश जैन तिजारिया ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने जैन संस्कृति के संरक्षण व विकास के लिए विचार रखे और कहा कि पत्रकार निष्पक्ष होकर अपनी कलम चलाएं। प्रथम सत्र के पश्चात राजेंद्र महावीर व सुनील संचय ललितपुर ने सभी पत्रकारों का आचार्य श्री से व्यक्तिश परिचय व आशीर्वाद दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परस्पर संवाद के द्वितीय सत्र का संचालन जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने किया। राकेश सफल चपलमन, डॉ. कल्पना जैन, संजय बडजात्या ,चक्रेश जैन ,सुनील जैन सागर ,राजेश जैन ,राजेंद्र जैन, अखिलेश जैन ,पारस जैन, महावीर सरावगी, रविंद्र काला, साधना मदावत, डॉ. प्रगति जैन इन्दौर ,अमित जैन, राजा बाबू गोधा, महेंद्र जैन ,मनीष जैन उदयपुर, विमल बज आदि ने विचार रखे। डॉ. प्रगति जैन ने कहा कि गोष्ठी के उद्देश्यों में शांति से सुकल्याण, सुकल्याण से सम्यक दर्शन और सम्यक दर्शन से मोक्ष सिद्धशिला जोड़ना चाहिए। तृतीय सत्र का संचालन डॉ. सुनील जैन ललितपुर व डॉ. प्रगति जैन इंदौर ने किया। जिसके मुख्य वक्ता चिरंजीलाल बगड़ा थे। अध्यक्षता एडवोकेट अनूप जैन फिरोजाबाद ने की। विशिष्ट अतिथि दैनिक आचरण के प्रधान संपादक सुनील जैन सागर पूर्व विधायक थे। इस सत्र में राकेश चपलमन, राजीव प्रचंडिया आदि ने अपने विचार रखे। इसी क्रम में इसी सत्र में आचार्य श्री अपने उद्बोधन में सभी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आज क्षुल्लक श्री विशाल सागर जी महाराज का अंतिम समय जानकर विधिपूर्वक मुनि दीक्षा के संस्कार दिए। उन्हें णमोकार महामंत्र का उच्चारण एवं स्वाध्याय सुनाया के साथ संलेखना पूर्वक उत्कृष्ट समाधि कराई।</p>
<p><strong>समारोह में यह रहे उपस्थित  </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने तृतीय सत्र में चल रही पत्रकार संगोष्ठी में मुनि दीक्षा व समाधि की घोषणा की। सभी ने यह सुनकर आचार्य श्री की जय जयकार की व मुनि श्री विशाल सागर जी की जय जयकार की। राष्ट्रीय गोष्ठी में डॉ. सुबोध मरोरा इंदौर, राकेश सोनी (देवपुरी वंदना) इंदौर, प्रतिभा जैन इंदौर ,मनोज सोगानी, विजयकुमार जैन, रविकुमार जैन, मनोज जैन जयपुर, अनिल सेठिया जिनवाणी संदेश, सुरेंद्र प्रकाश जैन जयपुर ,मुकेश जैन समाचार जगह, शैलेश कपाड़िया गुजरात ,अजय जैन, पारस जैन, प्रकाशन पाटनी ,राजेश जैन, डॉ. आरके जैन, एवी जैन, टोनी जैन, विमल बज, विमल जोला, डॉ. सुशीला सालगिया, संजय जैन किशनगढ़, नवनीत जैन इटावा, राकेश संगी, ज्ञानचंद जैन निवाई आदि उपस्थित थे। तृतीय सत्र में आचार्य श्री के सानिध्य में जैन गजट, तीर्थ वंदना, कोकली के राम फीचर फिल्म का पोस्टर, भारतीय गणित में आचार्य वीर सागर जी का योगदान आदि कृतियों का भी विमोचन किया गया। महोत्सव समिति टोंक ने पत्रकारों का गिफ्ट देकर सम्मानित किया। मुख्य संयोजक राजेन्द्र जैन महावीर ,पवन कंटान टोंक ने आभार व्यक्त किया।</p>
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		<title>ध्वजारोहण कर कलश स्थापना की : मंगल कलश स्थापना में प्रदेश भर से पधारे श्रद्धालु  </title>
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		<pubDate>Thu, 10 Jul 2025 08:35:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में ध्वजारोहण किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ कलश स्थापना के साथ हुआ। टोंक से पढ़िए, विकास जैन की यह खबर&#8230; टोंक। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में ध्वजारोहण किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ कलश स्थापना के साथ हुआ। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, विकास जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में ध्वजारोहण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कलश स्थापना के साथ हुआ। धर्म उपदेश के पूर्व आदिनाथ भगवान एवं आचार्य शांति सागर जी सहित सभी आचार्यों के चित्रों के सम्मुख दीप प्रवज्जलन स्व बाबूलाल जी सेठिया परिवार नैनवा द्वारा किया गया। इसके पश्चात पूर्वाचार्यों को अर्घ्य समर्पण किया गया। एवं आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन एवं पूजन किया गया। ध्वजारोहण के पुण्यार्जक परिवार श्रेष्ठी टीकमचंद, श्याम लाल, धर्मचंद, भागचंद, उत्तमचंद फूलेता वाले परिवार ने किया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-84806" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1703" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-1536x1022.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-2048x1362.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0007-1320x878.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />उदार भावना से किया धार्मिक कार्य सफल होता है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में सुख, शांति धर्म में वृद्धि के लिए ध्वजारोहण किया जाता है। भावना भव जन्म मरण के आवागमन को नष्ट करती है। सरल ,सहज और उदार भावना के साथ किया गया धार्मिक कार्य सफल होता है। धर्म और अर्थ के प्रति उदारता अच्छी है ,धर्म की उदारता से अर्थ का उपार्जन होता है। धर्म धारण करने से प्रतिकूलता अनुकूलता में बदल जाती है, क्योंकि धार्मिक कार्य से पुण्य का अर्जन होता है। और प्रतिकूलता पाप कर्मों के कारण होती है आगम जिनवाणी में इसका उपाय बताया है कि धर्म धारण करने से प्रतिकूलता को अनुकूलता में बदला जाता है। चातुर्मास में अनेक पर्व आते हैं गुरु पूर्णिमा, वीर शासन जयंती दशलक्षण पर्व आत्मा की विशुद्धता के लिए होते हैं गुरु पूर्णिमा के पूर्व आचार्य श्री ने दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज को स्मरण कर उनके गुणानुवाद किया। जिनालय में दर्शन अभिषेक पूजन से जीवन का निर्माण होता है। यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज ने 57 वें वर्षायोग स्थापना के पूर्व आयोजित ध्वजारोहण के पश्चात धर्म सभा में प्रकट की। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने कहा कि वर्षायोग में श्रावकों को साधुओं की धार्मिक क्रियाओं की अनुकूलता के लिए कार्य करना चाहिए। समय का उपयोग कर वर्षायोग में साधुओ द्वारा धर्म की वर्षा की जाती है इससे जीवन में बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-84808" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1703" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-1536x1022.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-2048x1362.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250710-WA0003-1320x878.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />कलश स्थापना के सौभाग्यशाली ये रहे</strong></p>
<p>चातुर्मास समिति मीडिया प्रभारी रमेश काला प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया कि प्रथम कलश आचार्य श्री वर्धमान सागर कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी पारस चंद,सुरेन्द्र कुमार,नरेंद्र कुमार,अंशुल कुमार, आरव,अंश, आशी, रीति छामुनिया परिवार को मिला। द्वितीय कलश आचार्य शांतिसागर कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी प्रहलाद चंद , विमल चंद, कमल कुमार , चेतन कुमार, अंकित कुमार अंश आंडरा परिवार को मिला। तृतीय मंगल कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी मदन लाल, मिट्ठू लाल , महावीर प्रसाद , ज्ञानचंद,सन्मति कुमार जी दाखिया परिवार को प्राप्त हुआ। चतुर्थ कलश आचार्य शिव सागर कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी राधा देवी, सौरभ कुमार , जंबू कुमार, टोनी कुमार आंडरा परिवार को मिला। पंचम कलश आचार्य धर्मसागर जी कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी मोहन लाल, पदम चंद , ज्ञानचंद, मनोज कुमार, कमल कुमार छामुनिया परिवार को मिला। षष्ठम कलश आचार्य अजीत सागर कलश का सौभाग्य महावीर प्रसाद, धर्मेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार, अविकांश कुमार पासरोटियां परिवार को मिला। चातुर्मास सर्वोषधि प्रहलाद चंद, विमल कुमार, कमल कुमार, अनिल कुमार, चेतन कुमार, सुनील, दिव्यांश आंडरा परिवार को मिला। वस्त्र भेंट राजेंद्र कुमार, शैलेश कुमार गोयल परिवार को प्राप्त हुआ। पाद प्रक्षालन का सौभाग्य बाबूलाल, नरेंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार, मुकेश कुमार, ओमप्रकाश, कुशाल ककोड़ वाले परिवार को मिला। शास्त्र भेंट का सौभाग्य महावीर प्रसाद, धर्मचंद, सुमित कुमार, रवि कुमार दाखिया परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>यह समाजजन रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस मौके पर चतुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष भागचंद फूलेता, धर्मचंद दाखिया, मंत्री राजेश सराफ, धर्मेंद्र पासरोटियां, कमल सराफ, राजेश बोरदा, रमेश सायवाड, पप्पू नमक,टोनी आंडरा, चेतन आंडरा, डॉ चेतन, हिमांशु पासरोटियां, हेमराज नमक निवाई, सुरेन्द्र छामुनिया, ज्ञानचंद छामुनिया, किन्नी शिवाड़िया, अर्पित पासरोटियां, मनीष अतार, राहुल पासरोटियां, पुनीत जागीरदार, दिनेश छामुनिया, बेनी प्रसाद कल्ली, अमित छामुनिया आदि मौजूद थे ।</p>
<p><strong>यहां</strong> से भी आए श्रद्धालुजन</p>
<p>इस ऐतिहासिक अवसर पर हजारों श्रद्धालु जयपुर, किशनगढ़, कोटा, निवाई, लावा, डिग्गी, टोडा, देवली, पिपलु, उनियारा, इचलकरंजी, पारसोला, धरियावद, सनावद, जोबनेर, इंदौर, सूरत, नैनवा, सांगानेर, अजमेर, कर्नाटक, कोलकाता, अहमदाबाद, सूरत, गोहाटी, सलूंबर, सहित अनेक स्थानों से उपस्थित रहे</p>
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		<title>ध्वजारोहण के साथ मंगल कलश स्थापना 9 जुलाई कोः प्रदेश भर से शामिल होने आएंगे श्रद्धालु </title>
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		<pubDate>Tue, 08 Jul 2025 13:19:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के पट्टम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ का 2025 का चातुर्मास हेतु कलश स्थापना बुधवार को होगी। इससे पूर्व आचार्य श्री के सानिध्य में ध्वजारोहण पुण्यार्जक परिवार श्रेष्ठी टीकमचंद, श्यामलाल, धर्मचंद, भागचंद, उत्तमचंद फूलेता वाले परिवार द्वारा संपन्न होगा। टोंक से विकास जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के पट्टम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ का 2025 का चातुर्मास हेतु कलश स्थापना बुधवार को होगी। इससे पूर्व आचार्य श्री के सानिध्य में ध्वजारोहण पुण्यार्जक परिवार श्रेष्ठी टीकमचंद, श्यामलाल, धर्मचंद, भागचंद, उत्तमचंद फूलेता वाले परिवार द्वारा संपन्न होगा। <span style="color: #ff0000">टोंक से विकास जैन जागीरदार पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के पट्टम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ का 2025 का चातुर्मास हेतु कलश स्थापना बुधवार को होगी। इससे पूर्व आचार्य श्री के सानिध्य में ध्वजारोहण पुण्यार्जक परिवार श्रेष्ठी टीकमचंद, श्यामलाल, धर्मचंद, भागचंद, उत्तमचंद फूलेता वाले परिवार द्वारा संपन्न होगा। आचार्य श्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अर्थ पुरुषार्थ से अर्जित धन का विसर्जन अर्थात दान करना चाहिए। शास्त्र में धर्म अर्थ, काम और मोक्ष पुरुषार्थ बताए गए हैं।</p>
<p>जिसमें पहला ओर चौथा महत्वपूर्ण हैं किन्तु मानव आप लोग दूसरे ओर तीसरे अर्थ और काम पुरुषार्थ में लगे हैं जबकि, धर्म पूर्वक अर्थ पुरुषार्थ करना चाहिए। नीति धर्म पूर्वक अर्जित धन का विसर्जन आहार, ज्ञान, अभय और औषधि दान देना चाहिए। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रगट की। आचार्य श्री ने बताया कि धर्म पुरुषार्थ, उत्साह, संकल्प, श्रद्धा,भक्ति पूर्वक करने पर मोक्ष मार्गी बन सकते हैं। आत्मा को समझने पर पर आत्म स्वरूप का ज्ञान होगा। आचार्य श्री के उपदेश के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज ने बताया कि जिस प्रकार गंगा नदी में नहाने से मेल दूर किया जाता है। उसी प्रकार संत समागम रूपी गंगा नदी से आप कर्म रूपी मेल को दूर कर सकते हैं। शरीर के मेल के साथ आत्मा का मेल अर्थ कर्मों को तप त्याग धर्म से दूर करना होगा। इसलिए आत्मा के स्वरूप अपनी शक्ति को पहचानना जरूरी है।</p>
<p>अध्यक्ष चातुर्मास समिति एवं समाज प्रवक्ता पवन एवं विकास जागीरदार अनुसार धर्म उपदेश के पूर्व आदिनाथ भगवान एवं आचार्य शांति सागर जी सहित सभी आचार्यों के चित्रों के सम्मुख दीप प्रवज्लन समाज के पदाधिकारियों तथा इंदौर से आए राजेश पंचोलिया ने किया।</p>
<p><strong>400 से अधिक श्रावक-श्राविकाएं सेवारत रहेंगे</strong></p>
<p>पुण्यार्जक परिवारों द्वारा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट ,एवं भक्ति सहित पूजन कर मंगल आरती की गई। चातुर्मास व्यवस्था में 400 से अधिक पुरुष महिलाएं और युवा सेवारत में रहेंगे एवं चातुर्मास व्यवस्था समिति एवं प्रबंध समिति के अलावा जिनधर्म प्रभावना समिति, पदमपुरा पदयात्रा संघ, शांतिनाथ शांतिधारा परिवार समिति, जैन फ्रेंड्स क्लब, जैन वूमेंस ग्रुप, बहुरानी महिला मंडल, आदिनाथ महिला मंडल, जिनवाणी महिला मंडल, आचार्य धर्मासागर पाठशाला, चंद्रप्रभु महिला मंडल काफला बाजार,पारसनाथ महिला मंडल आदर्श नगर, हाउसिंग बोर्ड महिला मंडल, पटेल सर्कल महिला मंडल, पांच मंदिर पुरानी टोंक की महिला मंडल की महिलाएं एवं पुरुष, युवा इस 4 महीने के चातुर्मास में प्रातःकाल, अभिषेक शांतिधारा की क्रियाएं, आहारचर्या, चौका, प्रवचन, आरती, भोजन व्यवस्था में ग्रुप से सहभागिता निभाएंगे।</p>
<p><strong>यह समाजजन मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस मौके पर चतुर्मास कमेटी के अध्यक्ष भागचंद फुलेता, कार्यकारी अध्यक्ष धर्मचंद दाखिया, मंत्री राजेश सराफ, महामंत्री धर्मेंद्र पासरोटियां, मिट्ठू लाल दाखिया, महावीर पासरोटियां, महावीर दाखिया, नेमीचंद बनेठा, नीटू छामुनिया, विनोद दाखिया, लोकेश कल्ली, वीरेंद्र संघी, रमेश काला, मोंटू, राजेश शिवाड़िया, विनोद कल्ली, पुनीत जागीरदार प्रकाश सेठी, नवीन अलीगढ़, रमेश काला, वीरेंद्र कापरेन, ताराचंद बड्जत्या आदि प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस ऐतिहासिक अवसर पर हजारों श्रद्धालु जयपुर, किशनगढ़, कोटा, निवाई, लावा, डिग्गी, टोडा, देवली, पिपलु, उनियारा, इचलकरंजी, धरियावद, सनावद, जोबनेर, इंदौर, कर्नाटक, कोलकाता सहित अनेक स्थानों से उपस्थित होंगे।</p>
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		<title>मुनिसुव्रतनाथ के दर्शन पाने आ पहुंचे हैं वर्धमान: स्वस्ति भूषण चरण पखारे, किया गुरुवर को प्रणाम </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Jun 2025 15:36:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ की मंगल अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी ( छाणी ) के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री सन्मतिसागर जी शिष्या गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ ने बड़े ही भक्ति भाव से की। प्रातः 8 बजे आचार्य संघ(36 पिच्छी) का मंगल प्रवेश हुआ। जय मुनिसुव्रत् जय वर्धमान के दिव्यघोष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ की मंगल अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी ( छाणी ) के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री सन्मतिसागर जी शिष्या गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ ने बड़े ही भक्ति भाव से की। प्रातः 8 बजे आचार्य संघ(36 पिच्छी) का मंगल प्रवेश हुआ। जय मुनिसुव्रत् जय वर्धमान के दिव्यघोष से स्वस्तिधाम मंदिर और परिसर गुंजायमान हो उठा। <span style="color: #ff0000">जहाजपुर से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जहाजपुर।</strong> गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र स्वस्तिधाम जहाज़पुर में ससंघ विराजमान हैं। दो अविरल धाराओं का पावन संगम दर्शन करके हर मनुज धन्य हुआ। आचार्य श्री 108 शांति सागर के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ की मंगल अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी (छाणी) के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री सन्मतिसागर जी शिष्या गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ ने बड़े ही भक्ति भाव से की। जय मुनिसुव्रत जय वर्धमान के दिव्यघोष से समस्त स्वस्तिधाम मंदिर और परिसर गुंजायमान हो उठा।</p>
<p>प्रातः 8 बजे आचार्य संघ (36 पिच्छी)का मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य संघ के सानिध्य में श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान के मंगल अभिषेक एवं शांतिधारा का सभी भक्तों ने लाभ उठाया। तत्पश्च्यात मंगल प्रवचन हुए। मंगल सूचना यह है कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 36वां आचार्य पदारोहण दिवस 27 जून को स्वस्तिधाम की भूमि पर मनाया जाएगा।</p>
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