<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%86%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A5%80/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sat, 25 Apr 2026 11:33:52 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>9वां संयम वर्षवर्द्धन दिवस 25 अप्रैल को: वैशाख शुक्ल दशमी पर तिथि अनुसार विशेष, आर्यिका महायशमती ने आर्यिकाओं की परंपरा को किया गौरवान्वित </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/9th_sanyam_varshavardhan_day_on_25th_april/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/9th_sanyam_varshavardhan_day_on_25th_april/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:33:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[9th Spiritual Discipline Anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[9वां संयम वर्षवर्द्धन दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shree Shantisagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shree Vardhmansagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Shree Mahayashmati Mataji. श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Vaishakh Shukla Dashami]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका श्री महायशमति माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[वैशाख शुक्ल दशमी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=105540</guid>

					<description><![CDATA[भारतीय संस्कृति के उन्नयन में श्रमण संस्कृति का महनीय योगदान है। श्रमण संस्कृति के बिना भारतीय संस्कृति की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस गौरवमयी श्रमण परंपरा में चतुर्विध संघ के अंतर्गत आर्यिकाओं का भी अहम योगदान रहा है। धर्म और संस्कृति की रक्षा में महिलाओं का योगदान प्रमुख है। संस्कारों से धर्म और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भारतीय संस्कृति के उन्नयन में श्रमण संस्कृति का महनीय योगदान है। श्रमण संस्कृति के बिना भारतीय संस्कृति की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस गौरवमयी श्रमण परंपरा में चतुर्विध संघ के अंतर्गत आर्यिकाओं का भी अहम योगदान रहा है। धर्म और संस्कृति की रक्षा में महिलाओं का योगदान प्रमुख है। संस्कारों से धर्म और संस्कृति निरंतर बनी रहती है। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, डॉ.सुनील जैन संचय की यह प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> भारतीय संस्कृति के उन्नयन में श्रमण संस्कृति का महनीय योगदान है। श्रमण संस्कृति के बिना भारतीय संस्कृति की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस गौरवमयी श्रमण परंपरा में चतुर्विध संघ के अंतर्गत आर्यिकाओं का भी अहम योगदान रहा है। धर्म और संस्कृति की रक्षा में महिलाओं का योगदान प्रमुख है। संस्कारों से धर्म और संस्कृति निरंतर बनी रहती है। जैन परंपरा में आर्यिका के रूप में नारी को महत्वपूर्ण पूजनीय स्थान प्राप्त है। आर्यिकाओं के उपदेश से समाज, संस्कृति के उत्थान में नई प्रेरणा मिलती है। मानवीय मूल्यों की संरचना में आर्यिकाओं का योगदान महत्वपूर्ण है। आर्यिकाओं की गौरवशाली परंपरा में आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज जी की अक्षुण्ण पट्ट परंपरा के आचार्य श्री वर्धमानसागर जी की सुयोग्य सुशिष्या आर्यिका श्री महायशमति माताजी का महनीय योगदान है। आर्यिका श्री महायशमति माताजी का जन्म सनावद, जिला खरगोन (मप्र) में 3 जनवरी 1989 पोष वदी ग्यारस को हुआ था। जन्म नाम सिद्धा जैन पंचोलिया था। आपके पिता श्रावक श्रेष्ठी राजेश जैन पंचोलिया और माता संगीता पंचोलिया हैं। आपने लौकिक शिक्षा एमएससी (आईटी) तक ग्रहण की। बचपन से ही आपके मन में वैराग्य के प्रति लगाव था। पारिवारिक धार्मिक संस्कार के कारण 8 वर्ष की उम्र में सनावद में धार्मिक फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में आर्यिका माता का अभिनय किया। स्कूल, समाज में सांस्कृतिक गतिविधियों में विभिन्न अभिनय, पंचकल्याणक में अष्ट कुमारी का अभिनय, ब्राह्मी-सुंदरी का अभिनय बड़ी कुशलता के साथ किया।</p>
<p><strong>खेलकूद में दिखाई अपनी प्रतिभा</strong></p>
<p>अध्ययन के दौरान स्कूल में कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया। जिसमें अनेक पुरस्कार प्राप्त किए। जिसमें प्रमुख हैं- जूडो-कराटे में राज्य स्तर पर गोल्ड मैडल, राष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर मेडल, कराटे में ब्लैक बेल्ट जैसे पुरस्कार मिले। वहीं स्कूल, कॉलेज में ट्रेंनिग भी दी</p>
<p><strong>वैराग्य का बीजारोपण</strong></p>
<p>हम देखते हैं कि वर्तमान के युवक-युवतियों को फिल्मी स्टार, क्रिकेट खिलाड़ियों से ऑटोग्राफ का शौक रहता है किंतु इन्हें आचार्याे, मुनियों, आर्यिका माताजी से डायरी में आशीर्वाद लिखवाने की गहन रुचि थी। बचपन से ही धार्मिक संस्कार प्राप्त होने के कारण धर्म मार्ग पर आगे बढ़ती रहीं। दादाजी की दीक्षा के बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने आशीर्वाद में लिखा कि -कुल परंपरा अनुसार धर्म और त्याग मार्ग पर आगे बढ़ो। आचार्यश्री के इस आशीर्वचन का सिद्धा दीदी पर काफी प्रभाव पड़ा। अल्पायु से ही दादाजी के साथ मंदिर जाना, रात्रि को मंदिर में पाठशाला जाना, आलू-प्याज आदि जमींकंद का सेवन नहीं किया।</p>
<p><strong>दादाजी की दीक्षा’ </strong></p>
<p>जब सिद्धा दीदी की उम्र मात्र 4 वर्ष की थी तब आपके दादाजी श्री श्रवणबेलगोला में आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज के सिद्ध हस्त कर कमलों से मुनि दीक्षित होकर मुनि श्री चारित्र सागर जी महाराज नाम करण हुआ। जब आपकी उम्र मात्र 13 वर्ष की थी। तब गृह नगर सनावद में ही मुनि श्री चारित्र सागर जी की समाधि निकटता से देखने का अवसर मिला।</p>
<p><strong>आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के संघ में शामिल</strong></p>
<p>सिद्धा दीदी, श्री सम्मेद शिखर जी पर वर्ष 2011 में विजयादशमी के दिन आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के संघ में शामिल हो गईं। पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से अतिशय क्षेत्र पपौरा जी जिला टीकमगढ़ (म.प्र.) में वर्ष 2012 में आपने अक्षय तृतीया के दिन आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत पूर्ण रूप से अपनाकर जीवन संयम की ओर मोड़ लिया। सिद्धा दीदी के रूप में आपने अपनी साधना, ओजस्वी प्रवचन, लेखन, संचालन आदि के माध्यम से अल्प समय में अपना एक अलग स्थान बना लिया। मेरा सौभाग्य रहा है कि सिद्धा दीदी जी से अनेक बार चर्चा, परिचर्चा का अवसर मिला। आपका स्नेह और वात्सल्य सदैव मुझे मिला। आचार्यश्री के सान्निध्य में विद्वत संगोष्ठियों में मुझे संयोजक के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। आयोजन संबंधी कोई भी जानकारी मुझे सिद्धा दीदी से ही मिलती थी। 2018 में श्रवणबेलगोला में संपन्न गोमटेश्वर बाहुबली भगवान के महमस्तकाभिषेक के समय भी आपसे अनेक बार चर्चा करने का अवसर मिला। जानकारी आदि आपसे प्राप्त की। सिद्धा दीदी ने जैन संस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे खुद युवा अवस्था में संयम के मार्गपर चलकर दूसरों के लिए प्रेरणा का अनुकरणीय उदाहरण बनीं। साथ ही उन्होंने अपने लेखन, प्रवचन आदि के माध्यम से युवाओं में नैतिकता का शंखनाद किया।</p>
<p><strong> आर्यिका दीक्षा का बना अद्भुत संयोग </strong></p>
<p>29 वर्ष की युवावस्था में ग्रहण की आर्यिका दीक्षा तारीख 25 अप्रैल 2018 वैशाख शुक्ल दशमी को विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल श्रवणबेलगोला, कर्नाटक में आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने विधि विधान के साथ आर्यिका दीक्षा के संस्कार प्रदान किए। आर्यिका दीक्षा का यह महोत्सव अपने आप में अनूंठा था। दीक्षार्थी दीदी के चेहरे पर मनचाही कामना पूर्ति की झलक मुस्कान स्पष्ट देखी जा सकती थी। दीक्षा के समय 29 वर्ष की आयु थी। इस उम्र में जहां युवा वर्ग अपना संसार वर्द्धन करता है। वहीं दीक्षार्थी अपना मोक्षमार्ग वर्द्धन करने निकल पड़ीं थीं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा भव्य जैनेश्वरी दीक्षा श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला, कर्नाटक में प्रदान कर वैराग्य पथ पर अग्रसर कर नवीन नामकरण अपने श्री मुख से उच्चारित किए। गृहस्थ अवस्था का नाम सिद्धा दीदी था , जो सिद्ध भगवान का सूचक है। दीक्षा के बाद ड्रेस, एड्रेस दोनों बदले। आचार्यश्री ने नया नामकरण आर्यिका श्री महायशमति माता जी किया, जो कि भगवान के 1008 नामों में एक नाम है। 468 नंबर श्री महायश नाम भगवान का है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि आपके दादाजी तिलोक चंद सराफ सनावद ने भी वर्ष 1993 को श्रवण बेलगोला में आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री चारित्र सागर जी बने। आपकी बुआजी ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षा लेकर आर्यिका श्री निर्माेह मति माताजी हैं। आपके ताऊजी के लड़के मुनि श्री श्रेष्ठ सागर जी हैं। ऐसे संयोग पुण्यशाली आत्माओं धर्मात्माओं को नसीब होते हैं।</p>
<p><strong>सहज और सरल हैं आर्यिका महायशमती</strong></p>
<p>विलक्षण और तपस्वी साध्वी के रूप में आपकी पहचान है। समाज और संस्कृति को भी एक नई दिशा दिखा रहीं हैं। वे सहज और सरल हैं । उन्होंने समाज में अभिनव चेतना और जागृति का संचार किया। माता जी ने अपने नाम को सार्थक किया है, वे निरंतर ज्ञानाराधना और शास्त्रानुशासन के संबल से अपने जनकल्याणी और जगतकल्याणी विचारों को आगम के संबल से ऊर्जित होकर साधनातीत जीवन की आत्यंतिक गहराईयों- अनुभूतियों और वात्सल्य के संचार से मानवीय चिंतन के सतत परिष्कार में सतत सन्नद्ध होकर जीवन को एक सहज-सरल जीने की एक कला बताने में आचार्यश्री की प्रेरणा से निरंतर संलग्न हैं। आर्यिकाओं की परंपरा को आपने गौरवान्वित किया है।</p>
<p>25 अप्रैल वैशाख शुक्ल दशमी 9वां संयम वर्षवर्द्धन दिवस के इस पावन अवसर पर यही कामना है कि आचार्य श्री शांतिसागर जी की परंपरा में शांति मार्ग पर वीरता, दृढ़ता से शिव, मोक्ष को लक्ष्य बना कर श्रुत का संवर्धन करते हुए धर्ममार्ग पर अजीत रहते हुए वर्तमान के वर्धमान सम वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमानसागर जी का यश बढ़ाते हुए उत्तम चारित्र का पालन कर महायश की प्राप्त करें। आर्यिका महायशमती माता जी के रूप में आप आचार्यश्री की क्षत्रछाया में निरंतर जहां अपनी रत्नत्रय की साधना में संलग्न हैं। वहीं गहन स्वाध्याय, अध्ययन, मनन-चिंतन जारी है साथ ही अपनी प्रखर, तेजस्वी, उर्जावान वाणी के द्वारा प्रभावना कर रहीं हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/9th_sanyam_varshavardhan_day_on_25th_april/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>श्रुत को वर्धमान कर शीतल करने का स्वर्णिम सफर : जल के अतिरिक्त शेष सभी आहार सामग्री का त्याग </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_golden_journey_of_nurturing_and_soothing_the_mind_through_listening/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_golden_journey_of_nurturing_and_soothing_the_mind_through_listening/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 12:33:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shantisagar Ji Mahamuniraj]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyakalp Shri Shrutsagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Shri Sheetalamati]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[First Pattadhish Acharya Shri Veer Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Niwai]]></category>
		<category><![CDATA[Renunciation of all possessions]]></category>
		<category><![CDATA[Sallekhana Samadhi]]></category>
		<category><![CDATA[Self Realization]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यकल्प श्री श्रुत सागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[आत्मसाधना]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका श्री शीतलमति]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[निवाई]]></category>
		<category><![CDATA[प्रथम पट्टाधीश आचार्य श्री वीर सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सभी पदार्थों का त्याग]]></category>
		<category><![CDATA[संल्लेखना समाधि]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=98675</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महामुनिराज की अक्षुण्ण मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के प्रथम पट्टाधीश आचार्य श्री वीर सागर जी के अंतिम मुनि शिष्य आचार्यकल्प श्री श्रुत सागरजी से माध सुदी पंचमी वर्ष 1972 में दीक्षित 83 वर्षीय आर्यिका श्री शीतलमति ने आचार्य श्री वर्धमान सागर के समक्ष जल के अतिरिक्त सभी पदार्थों का त्याग निवाई [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री शांतिसागर जी महामुनिराज की अक्षुण्ण मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के प्रथम पट्टाधीश आचार्य श्री वीर सागर जी के अंतिम मुनि शिष्य आचार्यकल्प श्री श्रुत सागरजी से माध सुदी पंचमी वर्ष 1972 में दीक्षित 83 वर्षीय आर्यिका श्री शीतलमति ने आचार्य श्री वर्धमान सागर के समक्ष जल के अतिरिक्त सभी पदार्थों का त्याग निवाई में 19 जनवरी को किया। आर्यिका श्री शीतल मति माताजी ने आचार्य श्री एवं संघ के सभी साधुओं से क्षमायाचना की। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई</strong>। 83 वर्षीय आर्यिका श्री शीतलमति जी के माघ सुदी 5 पंचमी सन 1972 अनुसार 54 वें दीक्षा वर्ष दिवस पर कोटिश वंदामि। आचार्य श्री शांतिसागर जी महामुनिराज की अक्षुण्ण मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के प्रथम पट्टाधीश आचार्य श्री वीर सागर जी के अंतिम मुनि शिष्य आचार्यकल्प श्री श्रुत सागरजी से माध सुदी पंचमी वर्ष 1972 में दीक्षित 83 वर्षीय आर्यिका श्री शीतलमति ने आचार्य श्री वर्धमान सागर के समक्ष जल के अतिरिक्त सभी पदार्थों का त्याग निवाई में 19 जनवरी को किया। आर्यिका श्री शीतल मति माताजी ने आचार्य श्री एवं संघ के सभी साधुओं से क्षमायाचना की। इस अवसर पर आर्यिका श्री शीतल मति जी ने संक्षिप्त उद्बोधन में सभी पूर्वाचार्यों को ,दीक्षागुरु आचार्य कल्प श्री श्रुतसागर जी को स्मरण आचार्य भक्ति पूर्वक कहा कि मैं आचार्य शिवसागर जी के समय से संघ में हूं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संल्लेखना भावना रूपी नैया पार करा दो। गुरु संघ सानिध्य में सभी प्रकार के परिग्रह का त्याग कर धार्मिक भक्ति संग्रह गुटका रखूंगी। अगले आहार में मात्र जल ही लूंगी। संघ में 60 वर्ष हो गए हैं। किसी के प्रति राग द्वेष कषाय मोह उत्पन्न हुआ हो, कोई गलती हुई हो तो आचार्य श्री एवं समस्त साधुओं सहित सबसे क्षमा याचना करती हूं। आचार्य पद पर आचार्य श्री को 36 साल हो गए हैं। गुरुवर के सानिध्य में मेरी समाधि हो, आत्मा की उन्नति हो, आचार्य श्री मुझे क्षमा करें।</p>
<p><strong>गुरु की शरण में मृत्यु पर विजय का मार्ग प्राप्त होता है</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने श्री शीतलमति जी को संबोधित कर बताया कि श्रीमद् जैन धर्म में जन्म के बाद मृत्यु को कैसे विजय प्राप्त कर वरण किया जाता है, इसका वर्णन है। गुरु की शरण में मृत्यु पर विजय का मार्ग प्राप्त होता है। भव्य जीव दीक्षा लेकर आत्मा को परम पावन करता है। उपसर्ग, रोग के कारण शरीर के प्रति ममत्व हटाकर अनेक आत्म साधकों ने आत्मा को सिद्ध करने का प्रयास किया है। श्री शीतलमति जी भी संल्लेखना समाधि की आत्मसाधना कर रही है। उनके दीक्षा गुरु श्री श्रुतसागर जी ने भी आत्म साधना धैर्य पूर्वक की थी। माता जी के समक्ष भी अनेक साधकों ने जीवन को सार्थक करने का पुरुषार्थ किया है। आज के बाद माताजी केवल आहार में जल लेगी। अन्य सभी पदार्थों का उन्होंने त्याग कर दिया है। आत्म साधकों की भावना उत्कृष्ट होती है। अंतरंग और बहिरंग तप में साधक ममत्व, मोह और कषाय को हटाता है। संघ परंपरा में आचार्य धर्मसागर जी सहित अनेक साधकों ने क्रमशः त्याग किया है। माताजी ने सभी साधकों को निकट से देखा है। माता जी की साधना शांतिपूर्वक सफल हो ऐसी मंगल भावना करते हैं।</p>
<p><strong>माताजी का सामान्य परिचय</strong></p>
<p>गामड़ी जिला डुंगरपुर में झकुदेवी श्रेष्ठी न्यालचंद जी धाटलिया की पुत्री गेंदी देवी का जन्म सन 1943 में हुआ। आपका विवाह गोवर्धनलाल पचौरी से हुआ। आप द्वितीय पट्टाचार्य आचार्य श्री अजित सागर जी के समय से संघ में आर्यिका श्री ज्ञानमती जी की प्रेरणा से शामिल हुईं। आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत और 2 प्रतिमा के नियम आचार्य श्री शिव सागर जी से ग्रहण किए। आपने दीक्षा गुरु आचार्य कल्प श्री श्रुतसागर जी से 1971 में क्षुल्लिका और सन 1972 में आर्यिका दीक्षा लेकर आर्यिका श्री शीतल मति हुई। आपके शिक्षा गुरु आचार्य श्री अजित सागर जी हैं। आप आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघस्थ हैं, विगत वर्षों से क्रमश आहार की सामग्री में त्याग कर 19 जनवरी 2026 से दो उपवास के बाद मात्र जल ले रही हैं। आप संल्लेखना समाधि की ओर दृढ़ता से अग्रसर हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_golden_journey_of_nurturing_and_soothing_the_mind_through_listening/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्यश्री ने अंतिम क्षण तक पंचामृत अभिषेक देखा: त्रि-दिवसीय शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव का हुआ हुआ समापन  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/achary_ashree_witnessed_the_panchamrit_abhishek_till_the_last_moment/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/achary_ashree_witnessed_the_panchamrit_abhishek_till_the_last_moment/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 10:15:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Nemisagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shantisagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shantisagar Ji Maharaj Vidhan]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Veersagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Rishabhdev]]></category>
		<category><![CDATA[panchamrit abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Three-day Sharad Purnima Ratnatray Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री नेमिसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वीरसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[त्रि-दिवसीय शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पंचामृत अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान ऋषभदेव]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=92258</guid>

					<description><![CDATA[गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 74वें संयम दिवस एवं 92वें जन्म जयंती के अवसर पर श्री भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि बडी मूर्ति दिगंबर जैन मंदिर अयोध्या में त्रि-दिवसीय शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव का समापन हुआ। इससे पहले प्रथम दिन महोत्सव का शुभारंभ झंडारोहण के साथ हुआ। अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230; अयोध्या। गणिनी प्रमुख श्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 74वें संयम दिवस एवं 92वें जन्म जयंती के अवसर पर श्री भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि बडी मूर्ति दिगंबर जैन मंदिर अयोध्या में त्रि-दिवसीय शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव का समापन हुआ। इससे पहले प्रथम दिन महोत्सव का शुभारंभ झंडारोहण के साथ हुआ। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का 74वें संयम दिवस एवं 92वें जन्म जयंती के अवसर पर श्री भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि बडी मूर्ति दिगंबर जैन मंदिर अयोध्या में त्रि-दिवसीय शरद पूर्णिमा रत्नत्रय महोत्सव का समापन हुआ। इससे पहले प्रथम दिन महोत्सव का शुभारंभ झंडारोहण के साथ हुआ। झंडारोहण करने का सौभाग्य अशोक शकुंतला जैन चांदवाड़ जयपुर को प्राप्त हुआ। प्रथम दिवस आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का आचार्य पदारोहण शताब्दी वर्ष समापन एवं आचार्य श्री वीरसागरजी, आचार्य श्री नेमिसागर जी के मुनि दीक्षा शताब्दी दिवस के उपलक्ष्य में सुबह मंदिर जी में 31 फीट उत्तुंग भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक किया गया। आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की प्रतिमा का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। इसके बाद आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज विधान किया गया। इसमें 108 अर्घ्य मंडल पर समर्पित किए गए। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने बताया कि गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के संघस्थ ब्रम्हचारी प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन के अनुसार आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने आचार्य श्री का गुणानुवाद प्रवचन के माध्यम से किया। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री श्रमण संस्कृति के गौरव थे। जिन्होंने आज दिगंबर जैन मुनियों के मार्ग को प्रशस्त किया है।</p>
<p><strong>तीर्थक्षेत्र कमेटी पर बनाई हुई फिल्म का लोकार्पण </strong></p>
<p>गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने कहा कि आचार्यश्री के समाधि से पूर्व एक माह कुंथलगिरी तीर्थ में रहकर मुझे बहुत नजदीक से आचार्यश्री की प्रत्येक चर्या को, उनकी संल्लेखना को देखने का सौभाग्य प्राप्त मिला। तीन बार मैंने आचार्यश्री के अपने जीवन में दर्शन किए एवं आचार्यश्री की पट्ट परंपरा के सभी आचार्यों को देखा है एवं दर्शन किए हैं। आचार्यश्री का जीवन एक आदर्श था। जिन्होंने अंतिम क्षण तक पंचामृत अभिषेक देखा है। कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों का स्वागत भाषण से सम्मान डॉ. जीवन प्रकाश जैन (राष्ट्रीय मंत्री भारत दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी) ने किया। तीर्थक्षेत्र कमेटी पर बनाई हुई फिल्म का लोकार्पण किया गया। इसमें तीर्थक्षेत्र कमेटी के संदर्भ में सुंदर भजन की प्रस्तति एवं समस्त तीर्थों के चित्र दिखाए गए।</p>
<p><strong>श्री ज्ञानमती पुरस्कार समर्पण</strong></p>
<p>श्री दिगंबर जैन त्रिलोक शोध संस्थान-जम्बूद्वीप हस्तिनापुर का गणिनी श्री ज्ञानमती पुरस्कार का समर्पण जम्बूप्रसाद गाजियाबाद को किया गया। उनके साथ में उनके सुपुत्र गण संजय जैन, पंकज जैन (सपरिवार) उपस्थित हुए। सम्मान में दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान के सभी पदाधिकारियों ने जम्बूप्रसाद का तिलक माल्यार्पण कर प्रशस्ति पत्र दिया गया। जिसमें संस्थान के पदाधिकारियों में मुख्य रूप से पूज्य स्वामी, अनिल मनोज मेरठ, विजय दरियागंज दिल्ली, प्रदीप जैन, खारीबावली, आदीश जैन सर्राफ लखनऊ, डॉ. जीवन प्रकाश जैन, प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन हस्तिनापुर का योगदान रहा। प्रशस्ति का वाचन डॉ. अनुपम जैन इंदौर ने किया। इस अवसर पर भरत चक्रवर्ती भोजनालय का उद्घाटन सोना देवी सेठी की स्मृति में विनोद कुमार आनंद सेठी एवं समस्त सेठी परिवार डीमापुर ने किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/achary_ashree_witnessed_the_panchamrit_abhishek_till_the_last_moment/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विजयादशमी और त्रयोदशी पर आचार्यश्री ने दी हैं दीक्षाएं: आचार्यश्री शांतिसागर जी का प्रतिष्ठापन दिवस आज </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharyashree_has_given_initiations_on_vijayadashmi_and_trayodashi/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharyashree_has_given_initiations_on_vijayadashmi_and_trayodashi/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 08:52:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shantisagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhaman Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Ashwin Shukla 13 Trayodashi]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[Initiations]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Samvat 1981]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Vijayadashami]]></category>
		<category><![CDATA[Year 1924]]></category>
		<category><![CDATA[अश्विन शुक्ल 13 त्रयोदशी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दीक्षाएं]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ष 1924]]></category>
		<category><![CDATA[विजयादशमी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[संवत 1981]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=91540</guid>

					<description><![CDATA[ प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागर जी को अश्विन शुक्ल 13 त्रयोदशी संवत 1981 वर्ष 1924 में आचार्य पद दिया गया था। यह आचार्य प्रतिष्ठापन दिवस है। आचार्य शिरोमणी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने विजयादशमी आश्विन शुक्ल दशमी एवं अश्विन शुक्ल 13 को निम्नांकित दीक्षाएं अलग-अलग वर्षाे में दी। इंदौर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागर जी को अश्विन शुक्ल 13 त्रयोदशी संवत 1981 वर्ष 1924 में आचार्य पद दिया गया था। यह आचार्य प्रतिष्ठापन दिवस है। आचार्य शिरोमणी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने विजयादशमी आश्विन शुक्ल दशमी एवं अश्विन शुक्ल 13 को निम्नांकित दीक्षाएं अलग-अलग वर्षाे में दी। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागर जी को अश्विन शुक्ल 13 त्रयोदशी संवत 1981 वर्ष 1924 में आचार्य पद दिया गया था। यह आचार्य प्रतिष्ठापन दिवस है। आचार्य शिरोमणी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने विजयादशमी आश्विन शुक्ल दशमी एवं अश्विन शुक्ल 13 को दीक्षाएं अलग-अलग वर्षाे में दी। आश्विन शुक्ल दशमी दशहरा 1 मुनि श्री हितेंद्रसागर जी मुनि दीक्षा 9 अक्टूबर 2008 तथा 5 अक्टूबर 2022 विजयादशमी पर आर्यिका श्री निर्माेह मती, आर्यिका श्री विश्वयश मति जी, आर्यिका श्री पद्मयश मती जी, आर्यिका श्री दिव्ययशमती जी आश्विन शुक्ल त्रयोदशी 14 अक्टूबर 2016 सिद्धवरकूट, मुनि श्री चिंतन सागर जी, मुनि श्री दर्शित सागर जी,आर्यिका श्री देशना मति जी, आर्यिका श्री दर्शना मति जी की दीक्षा दिवस पर प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांतिसागर जी, पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमानसागर जी, सभी मुनिराज को कोटिश नमोस्तु। समस्त आर्यिका माताजी को वंदामी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharyashree_has_given_initiations_on_vijayadashmi_and_trayodashi/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के जन्म दिवस पर रत्नत्रय महोत्सव जारी: आरा बिहार, टिकैत नगर और बहराइच के भक्त परिवार ने मनाया उत्सव  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/ratnatraya_mahotsav_continues_on_the_birth_anniversary_of_aryika_shri_gyanmati_mataji/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/ratnatraya_mahotsav_continues_on_the_birth_anniversary_of_aryika_shri_gyanmati_mataji/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Aug 2025 15:24:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shantisagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Ashtadravya]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Ganinipramukh Shri Gyanmati Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Ratnatray Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अष्टद्रव्य]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[रत्नत्रय महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=88002</guid>

					<description><![CDATA[शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव में 40 वें दिवस मंगलवार को दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। आरा बिहार, टिकैत नगर और बहराइच के भक्त परिवार ने अपने घर में यह उत्सव मनाया। आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का रत्नत्रय महोत्सव जगह-जगह मनाया जा रहा है। अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव में 40 वें दिवस मंगलवार को दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। आरा बिहार, टिकैत नगर और बहराइच के भक्त परिवार ने अपने घर में यह उत्सव मनाया। आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का रत्नत्रय महोत्सव जगह-जगह मनाया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव में 40 वें दिवस मंगलवार को दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। आरा बिहार, टिकैत नगर और बहराइच के भक्त परिवार ने अपने घर में यह उत्सव मनाया। आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का रत्नत्रय महोत्सव जगह-जगह मनाया जा रहा है। मंगलवार को रत्नत्रय महोत्सव सरोज देवी जैन, विनीता दीपक प्रकाश जैन, शालिनी धीरज प्रकाश जैन, अनुष्का दिव्यांशु जैन, सेजल, प्रियंका, सम्यक जैन, आरा बिहार, योगेश, विनीत जैन, आदित्य जैन टिकैतनगर, यशोमती जैन, आलोक, मंजू जैन, अरिहंत, खुशबू, संभव जैन, बहराइच में मनाया गया।</p>
<p>इन्होंने अपने घरों में ज्ञानमती माताजी की तस्वीर रखकर उसके सामने सजावट करके अष्टद्रव्य से आचार्य शांतिसागर जी महाराज और आर्यिका ज्ञानमती माताजी का पूजन किया और सभी ने मिलकर भक्ति भाव से आरती की गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी और प्रज्ञाश्रमणी चंदनामती माताजी ने सभी भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
<p><strong>अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन </strong></p>
<p>अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने बताया कि गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं और उनकी संघस्थ सुरभि दीदी ने कहा कि गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 92वें जन्मदिवस एवं 74 वें संयम दिवस शरद पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।</p>
<p><strong>दीक्षास्थल माधोराजपुरा में पदमपुरा अतिशय क्षेत्र का हुआ विकास</strong></p>
<p>सुरभि दीदी ने बताया कि आर्यिका चंदनामती माताजी ने कहा कि आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का कार्य उल्लेखनीय हैं। उनके आर्यिका दीक्षास्थल माधोराजपुरा (राज.) में पदमपुरा अतिशय क्षेत्र के निकट में भी ‘गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती दीक्षा तीर्थ के विकास का कार्य किया जा चुका है।</p>
<p>यहां सुंदर कृत्रिम सम्मेदशिखर पर्वत का निर्माण करके 15 फीट उत्तुंग काले पाषाण वाली भगवान पार्श्वनाथ की खड्गासन प्रतिमा एवं चौबीसी विराजमान की गई है। इस तीर्थ की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा 21 नवंबर से २६ नवंबर 2010 तक पीठाधीश क्षुल्लक श्री मोतीसागर जी महाराज के सान्निध्यएवं कर्मयोगी ब्रह्मचारी रवींद्र कुमार जैन (वर्तमान पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी जी) के निर्देशन में विशेष महोत्सवपूर्वक हुई थी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/ratnatraya_mahotsav_continues_on_the_birth_anniversary_of_aryika_shri_gyanmati_mataji/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दिल्ली लखनऊ टिकैतनगर में मनाया गया रत्नत्रय महोत्सव: अष्टद्रव्य से पूजन, आरती कर लिया आचार्यश्री और माताजी का आशीर्वाद  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/ratnatraya_mahotsav_celebrated_in_delhi_lucknow_tikaitnagar/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/ratnatraya_mahotsav_celebrated_in_delhi_lucknow_tikaitnagar/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Aug 2025 12:37:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA['Kalyan Kalpataru Stotra']]></category>
		<category><![CDATA[’कल्याण कल्पतरु स्तोत्र’]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shantisagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Ashtadravya]]></category>
		<category><![CDATA[Ayodhya]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Ganinipramukh Shri Gyanmati Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Ratnatray Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अयोध्या]]></category>
		<category><![CDATA[अष्टद्रव्य]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[रत्नत्रय महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=87936</guid>

					<description><![CDATA[अयोध्या में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के जन्म दिवस एवं संयम दिवस के अवसर पर 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन चल रहा है। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव’ का शुभारंभ श्रावण कृष्ण एकम 11 जुलाई को हुआ। सोमवार को 39 वां दिवस मनाया गया। अयोध्या में दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अयोध्या में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के जन्म दिवस एवं संयम दिवस के अवसर पर 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव का आयोजन चल रहा है। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव’ का शुभारंभ श्रावण कृष्ण एकम 11 जुलाई को हुआ। सोमवार को 39 वां दिवस मनाया गया। अयोध्या में दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। दिल्ली, लखनऊ, टिकैत नगर के भक्त परिवार ने अपने घर में माताजी का रत्नत्रय महोत्सव मनाया। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं। गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की संघस्थ सुरभि दीदी जी ने कहा कि गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 92वें जन्म दिवस एवं 74 वें संयम दिवस शरद पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय रत्नत्रय महोत्सव चल रहा है। उन्होंने कहा कि गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के अनेक भक्तांे ने अपने मनोगत में कहा कि श्री ज्ञानमती माताजी दीर्घायु हों, माताजी का अधिक से अधिक समय तक हमें धर्म लाभ मिलता रहे। माताजी के सानिध्य में उनकी जन्म शताब्दी मनाने का अवसर मिले, ऐसी भावना व्यक्त की। शाश्वत तीर्थ अयोध्या में 108 दिवसीय ’रत्नत्रय महोत्सव’ का शुभारंभ श्रावण कृष्ण एकम 11 जुलाई को हुआ। सोमवार को 39 वां दिवस मनाया गया। अयोध्या में दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। दिल्ली, लखनऊ, टिकैत नगर के भक्त परिवार ने अपने घर में माताजी का रत्नत्रय महोत्सव मनाया।</p>
<p><strong>सेमवार को इनके घर में मना रत्नत्रय महोत्सव </strong></p>
<p>थ्जनराज मंजू जैन, आयुषी, जीनांशी, कैवल्या जैन, सुरभि जैन, योगेश जैन, मयंक हिमानी जैन, सम्यक जैन रेनु जैन, सिविल लाइन दिल्ली, नरेंद्र किरण जैन, धन्नू ममता जैन, बिजेंद्र तृप्ति जैन, अतिशय सुभागंनि जैन, पारस, तन्मय, शुभ जैन ज्ञान ज्योति परिवार निराला नगर, लखनऊ, अरविंद बीना जैन, पारस मोनिका जैन, विमन्यु दृष्टि जैन, श्रेयश, सम्यक जैन, टिकैत नगर में रत्नत्रय महोत्सव मनाया गया। सभी ने अपने घरो में आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की तस्वीर रखकर उसके सामने सजावट कर अष्टद्रव्य से आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज और आर्यिका ज्ञानमती माताजी का पूजन किया और सभी भक्तांे ने मिलकर भक्ति भाव से आरती की। गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी और प्रज्ञाश्रमणी श्री चंदनामती माताजी ने सभी भक्तांे को आशिर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर आर्यिका श्री चंदनामती माताजी के मुखारविंद से ’तीर्थंकर देशना’ सत्र के अंतर्गत गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी की लेखनी से प्रस्तुत ’कल्याण कल्पतरु स्तोत्र’ जैसी विलक्षण रचना का अध्ययन भी कराया गया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/ratnatraya_mahotsav_celebrated_in_delhi_lucknow_tikaitnagar/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ससंघ का टोंक में ऐतिहासिक मंगल प्रवेश: टोक नगरी एक अदभुत दृश्य की साक्षी बनी  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/historical_auspicious_entry_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_sangh_in_tonk/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/historical_auspicious_entry_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_sangh_in_tonk/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Jul 2025 14:23:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shantisagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhamansagar Ji Sansangh]]></category>
		<category><![CDATA[Bhagwan adinath]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Magnificent entry]]></category>
		<category><![CDATA[Shreefal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान् आदिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[भव्यातिभव्य मंगल प्रवेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=84596</guid>

					<description><![CDATA[65 जिन बिम्बों के अतिशय से सुशोभित भगवान् आदिनाथ की अतिशयकारी नगरी को सोमवार को गर्वित होने का अहसास तब प्राप्त हुआ, आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण परम्परा के आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज ससंघ ने वर्ष 2025 के चातुर्मास के लिए अपने चतुर्विध संघ सहित जैन नसिया जी मंदिर में भव्यातिभव्य मंगल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>65 जिन बिम्बों के अतिशय से सुशोभित भगवान् आदिनाथ की अतिशयकारी नगरी को सोमवार को गर्वित होने का अहसास तब प्राप्त हुआ, आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण परम्परा के आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज ससंघ ने वर्ष 2025 के चातुर्मास के लिए अपने चतुर्विध संघ सहित जैन नसिया जी मंदिर में भव्यातिभव्य मंगल प्रवेश किया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> 65 जिन बिम्बों के अतिशय से सुशोभित भगवान् आदिनाथ की अतिशयकारी नगरी को सोमवार को गर्वित होने का अहसास तब प्राप्त हुआ, आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण परम्परा के आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज ससंघ ने वर्ष 2025 के चातुर्मास के लिए अपने चतुर्विध संघ सहित जैन नसिया जी मंदिर में भव्यातिभव्य मंगल प्रवेश किया। टोक की धरती का कण कण आज इठला रहा था क्योंकि, धरती के भगवान के चरण उसकी धरती पर पड़ रहे थे। सोमवार प्रातः काल की बेला से ही ही भक्तों का विभिन्न स्थानों से भक्तांे आगमन प्रारंभ हो चुका था। धर्म नगरी टोक का बच्चा-बच्चा श्री संघ एव मेहमानों की अगवानी के लिए तैयार था। 7 जुलाई की प्रातः से ही सभी जनों के चेहरे पर उभरे खुशी के भाव स्पष्ट नजर आ रहे थे। टोकवासियों के 55 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा अब पूरी होने जा रही थी। संघ का भव्य स्वागत करने हेतु टोक प्रवेश की जगह पर भव्य तोरण द्वार बनवाया गया था। कदम कदम पर आचार्य श्री के मंगल प्रवेश और अभिनंदन के होर्डिंग्स नजर आ रहे थे। नवाबांे की नगरी के नाम से मशहूर टोक पूरी तरह से केशरिया रंग में रंगी थी। सुबह से आस पास के गांवों से श्रद्धालुओं की अपार संख्या गुरु भक्ति के लिए प्रवेश द्वार पर पहुंचने लगीं। और देखते ही देखते हजारों का अपार समूह जयकारों के उद्घोष से गूंजने लगा। चारों ओर स्त्री पुरुष अगवानी करते नजर आ रहे थे। कलेक्टर कल्पना अग्रवाल एसपी विकास सागवान जिला प्रमुख सरोज बंसल भव्य अगवानी के लिए उपस्थित थे। 7. 15 बजे आचार्य श्री ने संघ सहित टोक द्वार की सीमा में प्रवेश किया। आचार्य श्री शांति सागर जी एव आचार्य श्री वर्धमानसागर जी के जयकारों से आकाश गुंजायमान हो उठा। प्रवेश द्वार पर आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन हुए।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-84598" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0026.jpg" alt="" width="1512" height="1006" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0026.jpg 1512w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0026-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0026-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0026-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0026-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0026-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0026-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0026-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0026-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0026-990x659.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0026-1320x878.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1512px) 100vw, 1512px" />शोभायात्रा में उमड़े समाजजन </strong></p>
<p>शोभायात्रा में आगे-आगे घोड़े, ऊंट, तरह-तरह के बैंडबाजे, साथ में विभिन्न पोशाकों में स्थानीय समाज जन मौजूद रहे। स्थानीय महिलाएं मस्तक पर कलश धारण कर चल रही थी। भक्ति भाव से युवाओं ने बैंड वादन किया। टोक का प्रत्येक नागरिक आज आचार्य संघ के दर्शन और शोभायात्रा में शामिल होने को आतुर था। श्रद्धालुओं के हुजूम के बिच आचार्य संघ मानो किसी सिंह की भांति चल रहे थे। टोक नगरी आज उत्साह और भावों की धरा नजर आ रही थी। श्रद्धालुओं ने गुरु आगमन के साथ ही वर्षायोग के लिए एक नए उत्साह का बिगुल बजा दिया। निश्चित समय पर संघ का प्रवेश नसिया जी में हुआ। जहा समाज के पदाधिकारियों एव वर्षायोग समिति ने आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन किए। कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला प्रमुख, पूर्व सभापति लक्ष्मी देवी, युवा नेता विनायक जैन, नरेश बंसल ने चित्र अनावरण कर द्वीप प्रज्वलित कर धर्मसभा का शुभारंभ किया। मंच संचालन विकास अतार और कमल सर्राफ ने किया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-84599" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1703" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-1536x1022.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-2048x1362.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250707-WA0024-1320x878.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />विभिन्न गांवों और शहरों से भी जुटे श्रद्धालुजन </strong></p>
<p>यहां पर विनोद सर्राफ, हेमराज नमक वाले निवाई, रचना टोरडी एवं अंजना मंडावर ने मंगलाचरण किया ।एवं आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज एवं पट्ट परम्परा के आचार्य वृंद को अर्घ्य समर्पित किया गया। आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन श्रेष्ठी श्री सौरभ कुमार जी , जंबू कुमार जी, टोनी कुमार जी आंडरा परिवार द्वारा एवं शास्त्र भेंट श्रेष्ठी श्री महावीर प्रसाद जी, धर्मेंद्र कुमार जी, जितेंद कुमार जी, अविकांश कुमार जी पासरोटिया परिवार द्वारा किया गया। चातुर्मास प्रबंध कारिणी समिति एवं समाजजन ने आचार्य श्री ससंघ को चातुर्मास के लिए श्रीफल भेंट किया। आचार्य श्री ने सभी को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि प्रभु भक्ति और गुरु भक्ति से सभी कार्य संपादित होते है,संघ के विहार, आहार आदि में सभी समाज जनों ने अपनी सेवा प्रदान की। इस अवसर पर समिति और स्थानीय समाज ने गज्जू भैया, प्रमित जैन और तारा देवी सेठी का उनके त्याग, समर्पण, और सेवा के लिए विशेष अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर आसपास के गांवों से जन समूह आचार्य संघ की अगवानी के लिए आए। जयपुर, किशनगढ़,कोटा, निवाई लावा, डिग्गी टोडा, देवली, पिपलु, उनियारा, इचलकरंजी, धरियावद, सनावद, जोबनेर, इंदौर से भी श्रद्धालुओं का आगमन हुआ।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/historical_auspicious_entry_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_sangh_in_tonk/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>टोंक में आचार्यश्री वर्धमानसागर जी का मंगल प्रवेश : नगर में आकर्षक सजावट के साथ उत्साह का माहौल  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/auspicious_entry_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_in_tonk/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/auspicious_entry_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_in_tonk/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Jul 2025 07:42:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[36 Pichhika]]></category>
		<category><![CDATA[36 पिच्छिका]]></category>
		<category><![CDATA[57th Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[57वां चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[75th Diamond Birth Jubilee Festival]]></category>
		<category><![CDATA[75वां हीरक जन्म जयंती महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Padarohan Centenary Festival]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shantisagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyashree Vardhmansagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=84584</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (36 पिच्छिका) का मंगल विहार इस वर्ष टोंक नगर में 57वें चातुर्मास के लिए चल रहा है। आचार्य श्री का यह तीसरी बार टोंक नगर में आगमन हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1970 एवं 2016 में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (36 पिच्छिका) का मंगल विहार इस वर्ष टोंक नगर में 57वें चातुर्मास के लिए चल रहा है। आचार्य श्री का यह तीसरी बार टोंक नगर में आगमन हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1970 एवं 2016 में भी आपने चातुर्मास किया था। वर्ष 2025 में पूरे 55 वर्षों के बाद जैन समाज सहित नगरवासियों को यह ऐतिहासिक अवसर पुनः प्राप्त हुआ है। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (36 पिच्छिका) का मंगल विहार इस वर्ष टोंक नगर में 57वें चातुर्मास के लिए चल रहा है। आचार्य श्री का यह तीसरी बार टोंक नगर में आगमन हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1970 एवं 2016 में भी आपने चातुर्मास किया था। वर्ष 2025 में पूरे 55 वर्षों के बाद जैन समाज सहित नगरवासियों को यह ऐतिहासिक अवसर पुनः प्राप्त हुआ है। ऐतिहासिक संयोग और तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रम होंगे। इस अवसर पर टोंक नगर को तीन अद्वितीय सौभाग्य एक साथ प्राप्त हो रहे हैं। आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 75वां हीरक जन्म जयंती महोत्सव, संयम वर्ष का 57वां चातुर्मास होगा।</p>
<p><strong>मंगल प्रवेश और शोभायात्रा निकाली  </strong></p>
<p>9 जुलाई को चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना के लिए 7 जुलाई को प्रातः भव्य नगर प्रवेश हुआ। मंगल प्रवेश के अवसर पर कल्पना गार्डन से जैन नसिया तक लगभग डेढ़ किमी लंबी दिव्य शोभायात्रा निकाली गई। पूरे मार्ग पर 31 भव्य स्वागत द्वार, आकर्षक विद्युत सजावट एवं पुष्पवर्षा की विशेष तैयारियां की गई थीं। जैन नसिया को आकर्षक सजावट से दुल्हन की तरह सुसज्जित किया गया था। जैसे ही आचार्य श्री ससंघ नगर सीमा में पहुंचेंगे, शाही बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों, जयघोष और भक्ति के स्वर वातावरण में गूंज उठे। किशनगढ़, नेनवा एवं टोंक के शाही बैंड अपनी मधुर सुर लहरियों से स्वागत कर रहे थे।</p>
<p><strong>36 साधु-साध्वी का दिव्य ससंघ आगमन</strong></p>
<p>इस मंगल विहार में आचार्य श्री के साथ 10 मुनि, 22 आर्यिका, 1 ऐलक एवं 2 क्षुल्लक सहित कुल 36 साधु-साध्वी सम्मिलित हैं। नगर में अद्भुत उत्साह का वातावरण है। नगर के सभी धार्मिक-सामाजिक संगठन तन, मन, धन से जुटकर तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। ऐसा वातावरण है मानो नगरवासी अनेक पर्वों को एक साथ उल्लासपूर्वक मना रहे है। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति इस ऐतिहासिक अवसर पर रहेगी। टोंक-सवाई माधोपुर सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया, जिला प्रमुख सरोज नरेश बंसल, पूर्व विधायक अजीतसिंह मेहता, नगर परिषद की पूर्व सभापति लक्ष्मी देवी जैन, टोडारायसिंह के पूर्व चेयरमैन संतकुमार जैन, भाजपा युवा नेता विनायक जैन, संजय संघी, सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहकर आचार्य श्री ससंघ के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>चातुर्मास समिति के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे</strong></p>
<p>चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष भागचंद फूलेता, कार्यकारी अध्यक्ष धर्मचंद दाखिया, मंत्री राजेश सर्राफ, संयोजक कमल आंडरा, राजेश बोरदा, पप्पू नमक, लालचंद फूलेता, सुरेश संघी, सीटू आरटी, अनिल कंटान, सुमित दाखिया, अम्मु छामुनिया, नरेंद्र दाखिया, सुनील सर्राफ, पारस बहड़, विनोद कल्ली, प्रदीप सर्राफ, मुकेश करवर, टोनू सर्राफ, कमल सर्राफ, अंकित बगड़ी, किन्नी शिवाड़िया, मुकेश बरवास, सोनू बरवास, पंकज फूलेता, लोकेश कल्ली, राजेश शिवाड़िया, ओम ककोड़, नीटू छामुनिया, अर्पित पासरोटियां, ज्ञान संघी, कुंदन आंडरा, देवेंद्र आंडरा, उमेश संघी, मुकेश दतवास, वीरेंद्र संघी, पदमपुरा पदयात्रा संघ के सदस्य, शांतिधारा परिवार समिति के सदस्य, महिला मंडल, बालिका मंडल उपस्थित रहे। यह पुण्य अवसर टोंक नगर के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अमूल्य स्रोत बन रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/auspicious_entry_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_in_tonk/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>55 वर्षों बाद ऐतिहासिक नगर प्रवेश: आचार्य वर्धमान सागर महाराज की मंगल अगवानी से टोंक सजेगा  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/tonk_will_be_decorated_with_the_auspicious_welcome_of_acharya_vardhmansagar_maharaj/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/tonk_will_be_decorated_with_the_auspicious_welcome_of_acharya_vardhmansagar_maharaj/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Jul 2025 14:33:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shantisagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vardhman Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas Committee]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nasia]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Mehndwas]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Chandraprabhu Digambar Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास समिति]]></category>
		<category><![CDATA[जैन नसिया]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मेहंदवास]]></category>
		<category><![CDATA[श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=84436</guid>

					<description><![CDATA[जैन समाज सहित पूरे नगर में अपार श्रद्धा और अलौकिक उल्लास की लहर दौड़ गई है। पूरे 55 वर्षों बाद आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ चातुर्मास हेतु टोंक की पुण्यधरा पर पदार्पण करने जा रहे हैं। यह ऐतिहासिक अवसर नगरवासियों के लिए गौरव और पुण्य का अद्वितीय क्षण होगा। टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन समाज सहित पूरे नगर में अपार श्रद्धा और अलौकिक उल्लास की लहर दौड़ गई है। पूरे 55 वर्षों बाद आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ चातुर्मास हेतु टोंक की पुण्यधरा पर पदार्पण करने जा रहे हैं। यह ऐतिहासिक अवसर नगरवासियों के लिए गौरव और पुण्य का अद्वितीय क्षण होगा। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> जैन समाज सहित पूरे नगर में अपार श्रद्धा और अलौकिक उल्लास की लहर दौड़ गई है। पूरे 55 वर्षों बाद आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ चातुर्मास हेतु टोंक की पुण्यधरा पर पदार्पण करने जा रहे हैं। यह ऐतिहासिक अवसर नगरवासियों के लिए गौरव और पुण्य का अद्वितीय क्षण होगा। चातुर्मास समिति के प्रवक्ता जैन धर्म प्रचारक पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया कि नगर प्रवेश की भव्य तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। कल्पना गार्डन से जैन नसिया तक लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी दिव्य शोभायात्रा निकलेगी। इस मार्ग पर 31 भव्य स्वागत द्वार, आकर्षक फ्लेक्स-बैनर, रंग-बिरंगी विद्युत सजावट एवं पुष्पवर्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं। जैन नसिया को दुल्हन की तरह श्रृंगारित किया गया है, जहां चातुर्मास की सभी व्यवस्थाएं संपन्न होगी। जैसे ही आचार्य श्री का नगर सीमा में आगमन होगा, शाही बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों, जय घोष और भक्ति के स्वरों से वातावरण गुंजायमान हो उठेगा। किशनगढ़, नेनवा और टोंक के प्रसिद्ध शाही बैंड अपनी सुर लहरियों से अभूतपूर्व स्वागत करेंगे। इस विशेष अवसर पर विशाल डोम पंडाल की भव्यता श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय रहेगी। यह परंपरा बीसवीं सदी के आचार्य श्री शांतिसागर जी की अक्षुण्ण साधना परम्परा का जीवंत प्रतीक है। कार्यक्रम का क्रम इस प्रकार निर्धारित है।</p>
<p><strong>इस तरह होंगे कार्यक्रम </strong></p>
<p>6 जुलाई आहारचर्या (संत सुधासागर पब्लिक स्कूल, सोनवा टोल प्लाजा), 7 जुलाई मंगल नगर प्रवेश, 9 जुलाई सोमवार मंगल कलश स्थापना, शनिवार को आचार्य श्री ससंघ ने अरनिया नील चौराहे से विहार कर श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर, मेहंदवास में रात्रि विश्राम किया। इस अवसर पर चातुर्मास व्यवस्था समिति के सदस्य धर्मचंद दाखिया, मंत्री राजेश सर्राफ, कमल आड़रा, राजेश बोरदा, सीटू राटी, अनिल सुमित, हनी, अम्मु छामुनिया, नरेंद्र दाखिया, सुनील सर्राफ, विनोद कल्ली, प्रदीप सर्राफ, मुकेश करवर, टोनू सर्राफ, लालचंद फूलेता, कमल सर्राफ, मुकेश बरवास, सोनू बरवास, विनायक कल्ली, लोकेश कल्ली, राजेश शिवाड़िया, ओम ककोड़ सहित समाज के गणमान्यजन पूरी निष्ठा से तैयारियों में जुटे हैं। नगरवासी और श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पुण्य अवसर के साक्षी बनेंगे, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/tonk_will_be_decorated_with_the_auspicious_welcome_of_acharya_vardhmansagar_maharaj/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आदर्श नगर में आचार्य श्री अतिवीर जी का होगा आगमन : 40 साल बाद यहां चातुर्मास का सौभाग्य </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_ati_veer_ji_will_arrive_in_adarsh_nagar/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_ati_veer_ji_will_arrive_in_adarsh_nagar/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Jun 2025 07:50:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Ati Veer Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shantisagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Adarsh Nagar]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Dharmanagari Majlis Park]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar and Shwetambar Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Mangal Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री अतिवीर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आदर्श नगर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर और श्वेताम्बर जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मनगरी मजलिस पार्क]]></category>
		<category><![CDATA[मंगल चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=83796</guid>

					<description><![CDATA[राजधानी की धर्मनगरी मजलिस पार्क (आदर्श नगर) का सकल जैन समाज इतिहास के पन्नों में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है। लगभग 40 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी दिगंबर जैन मुनि का मंगल चातुर्मास यहां होने जा रहा है। दिल्ली से पढ़िए, समीर जैन की यह खबर&#8230; दिल्ली। राजधानी की धर्मनगरी मजलिस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>राजधानी की धर्मनगरी मजलिस पार्क (आदर्श नगर) का सकल जैन समाज इतिहास के पन्नों में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है। लगभग 40 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी दिगंबर जैन मुनि का मंगल चातुर्मास यहां होने जा रहा है। <span style="color: #ff0000">दिल्ली से पढ़िए, समीर जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>दिल्ली।</strong> राजधानी की धर्मनगरी मजलिस पार्क (आदर्श नगर) का सकल जैन समाज इतिहास के पन्नों में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है। लगभग 40 वर्षों के इतिहास में पहली बार किसी दिगंबर जैन मुनि का मंगल चातुर्मास यहां होने जा रहा है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एकता, श्रद्धा और समरसता का अनूठा उदाहरण है क्योंकि, इस ऐतिहासिक चातुर्मास को दिगंबर और श्वेताम्बर जैन समाज संयुक्त रूप से करने जा रहे हैं। आचार्य श्री शांतिसागर जी (छाणी) परंपरा के प्रमुख आचार्य श्री अतिवीर जी महाराज का आगमन पूरे क्षेत्र के लिए सौभाग्य का विषय है। समाज के वरिष्ठजनों के अनुसार आदर्श नगर में यह पहली बार है। जब किसी दिगम्बर जैन मुनि का चातुर्मास हो रहा है और वह भी श्वेताम्बर समाज के पूर्ण समर्थन व सहयोग के साथ।</p>
<p>यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बनेगा, बल्कि समाज में सामूहिकता और धार्मिक सौहार्द की मिसाल भी पेश करेगा। समस्त आदर्श नगर क्षेत्र में इस चातुर्मास को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। समाज के हर वर्ग अपनी-अपनी भूमिकाओं में बढ़-चढ़ कर भाग ले रहे हैं। आचार्य श्री के सान्निध्य में चातुर्मास के दौरान विभिन्न धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा जो समस्त समाज में नवचेतना का संचार करने में सहायक होंगे।</p>
<p><strong>एकता की नई मिसाल बनेगा यह आयोजन</strong></p>
<p>आदर्श नगर जैन समाज पिछले 6-7 वर्षों से निरंतर प्रयासरत रहा है कि क्षेत्र में पूज्य आचार्य श्री का चातुर्मास स्थापित हो जाए। यह समाज की संकल्प शक्ति, समर्पण और श्रद्धा का ही परिणाम है कि इस वर्ष यह स्वप्न साकार हो सका है। आचार्य श्री के आगमन के साथ ही समाज को वह आध्यात्मिक सौभाग्य प्राप्त हो रहा है जिसकी प्रतीक्षा वर्षों से की जा रही थी। जहाँ अक्सर अलग-अलग पंथों के कार्यक्रम अलग-अलग होते हैं, वहीं इस बार दोनों जैन संप्रदायों ने मिलकर एक ऐतिहासिक पहल की है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाएगा कि मत भले अलग हों, परंतु धर्म और सेवा की भावना हमें एक सूत्र में बाँध सकती है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_ati_veer_ji_will_arrive_in_adarsh_nagar/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
