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	<title>आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि जयंत सागरजी का नांद्र में मनाया जाएगा अवतरण दिवस : सभी जगह अपूर्व जिनधर्म की प्रभावना कर रहे हैं मुनिश्री  </title>
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		<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:56:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज नांद्रे में विराजमान हैं। मुनि जयंत सागरजी का अवतरण दिवस 14 जून को श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जैन युवा मंच, युवती मंडळ, तथा समस्त श्रावक-श्राविकाओं की ओर से भक्तिपूर्ण मनाया जाएगा। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज नांद्रे में विराजमान हैं। मुनि जयंत सागरजी का अवतरण दिवस 14 जून को श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जैन युवा मंच, युवती मंडळ, तथा समस्त श्रावक-श्राविकाओं की ओर से भक्तिपूर्ण मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नांद्रे(महा.)।</strong> मुनि श्री सारस्वत सागर जी, मुनि श्री जयंत सागर जी, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज नांद्रे में विराजमान हैं। मुनि जयंत सागरजी का अवतरण दिवस 14 जून को श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में जैन युवा मंच, युवती मंडळ, तथा समस्त श्रावक-श्राविकाओं की ओर से भक्तिपूर्ण मनाया जाएगा। भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर नांद्रे के अध्यक्ष जिनेश्वर पाटील ने बताया कि देश की पावन वसुंधरा को अनेकों ऋषि मुनियों ने अपनी चरण धूलि से पवित्र किया है और समाज को एक नई दिशा प्रदान की है। 30 वर्ष पूर्व भिंड निवासी सौभाग्यशाली दंपती सुरेंद्रकुमार जैन एवं अनिता जैन के आंगन में खुशियां छाई थीं। 14 जून 1996 को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी और उस सुंदर बालक का माता-पिता ने नाम रखा विशाल। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के करकमलों से 6 नवंबर 2022 को रायपुर ( छत्तीसगढ ) में मुनि दीक्षा धारण कर आपका नाम जयंत सागर जी रखा गया। मुनिश्री जयंत सागर जी ने पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी के आशीष से सभी जगह अपूर्व जिनधर्म की प्रभावना करते हुए हमेशा गुरु आज्ञा को सबकुछ माना है। आपके प्रत्येक प्रवचन जिसमें गुरु भक्ति मानो स्वर्णिम शिखर को छूती है। सरलता, सहजता, सौम्यता की आप प्रतिमूर्ति हो।</p>
<p>आप अधिकतम समय ध्यान में लीन रहते हैं, आपकी वाणी ओजस्वी है। आपके प्रवचनों की चर्चा चारों ओर है। ऐसे भविष्य के महावीर को प्रणाम करता हूं। अवतरण दिवस के इस शुभ अवसर पर हम सभी यही भावना भाते हैं कि मुनि श्री जयंत सागर जी आप ऐसे ही अपनी साधना से अपना मोक्ष मार्ग प्रशस्त करते रहें और हमें सदैव वात्सल्य, उपदेश एवं आशीष देते रहें। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री जयंत सागर जी के 30 वें अवतरण दिवस पर उनके पावन चरणों में समस्त परिवारजनों की ओर से,बारंबार नमोस्तु।</p>
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		<title>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ में निकली कलश घटयात्रा : मां ना होती तो ऋषभदेव राम ना होते -आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी  </title>
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		<pubDate>Fri, 05 Jun 2026 14:16:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निराला रंग बिहार में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ में घटयात्रा कुआ वाले जैन मंदिर से नगर भ्रमण करते हुए परेड चौराहे सदर बाजार राज टॉकीज मार्ग होते हुए निकली। बैंड बाजों के साथ महिलाएं हाथों में कलश लेकर हाथी पर सवार ध्वजारोहण कर्ता दिनेश कुमार जैन परिवार चल रहे थे।भिंड से सोनल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>निराला रंग बिहार में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ में घटयात्रा कुआ वाले जैन मंदिर से नगर भ्रमण करते हुए परेड चौराहे सदर बाजार राज टॉकीज मार्ग होते हुए निकली। बैंड बाजों के साथ महिलाएं हाथों में कलश लेकर हाथी पर सवार ध्वजारोहण कर्ता दिनेश कुमार जैन परिवार चल रहे थे।<span style="color: #ff0000">भिंड से सोनल जैन की यह रिपोर्ट पढ़िए, </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> निराला रंग बिहार में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ में घटयात्रा कुआ वाले जैन मंदिर से नगर भ्रमण करते हुए परेड चौराहे सदर बाजार राज टॉकीज मार्ग होते हुए निकली। बैंड बाजों के साथ महिलाएं हाथों में कलश लेकर हाथी पर सवार ध्वजारोहण कर्ता दिनेश कुमार जैन परिवार चल रहे थे। जैसे ही निराला रंग बिहार अयोध्या नगरी पहुंचे। वहां पर मंडप शुद्धि, ध्वजारोहणकर्ता दिनेश कुमार जैन परिवार एवं मंच उद्घाटनकर्ता दिनेश जैन मॉडल स्कूल परिवार के द्वारा प्रतिष्ठाचार्य अभिषेक जैन आशीष जैन ने विधि विधान से कराया।  इस अवसर पर पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने प्रवचनों में कहा की माँ ना होती तो तीर्थंकर ऋषभदेव, राम हम सब ना होते माँ वह जाननी है जिन्होंने कितने तीर्थंकर और महापुरुषों को जन्म दिया आज हम सबको उनका उपकार मानना चाहिए आजकल सुनने को मिलता है कि लोग बेटा बेटी में भेद कर रहे हैं बेटा है तो राग क्यों दोनों बालक बालिका धर्म संस्कृति को चलाते हैं। पट्टाचार्य ने आगे कहा कि हमें जन्म और मरण का उपकार मानना चाहिए लोग मरण का उपकार नहीं मानते तो कब तक शरीर में सड़े गले  बैठे रहोगे एक समय ऐसा आया कि नाक से कीड़े टपकने लगे उसकी पीड़ा देखकर लगता है कि ये चला जाए कैसे कर्म का बंद किया की कीड़े काट रहे हैं कीड़े यह कह रहे हैं कि दूसरों की निंदा करते थे गरीबों का पैसा खा लिया गरीबों की जमीन पर कब्जा कर लिया सब यही भोगना है कर्म किसी को नहीं छोड़ते।</p>
<p>महाराज ने कहा कि देश के मुखिया से कहो की बच्चे युवा मोबाइल का उपयोग कम करें इसमें समय बर्बाद हो रहा है बचपन से बुद्धि का विकास होता है इस सदमार्ग में लगाये जिनवाणी की बूंदे पढ़ने पर कभी ना कभी अंकुरित होती हैं।</p>
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		<title>दृष्टि बदलते ही डाकू साधु बन जाते हैं : आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज ने प्रवचन में दृष्टि के बारे में बताया </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 04:59:41 +0000</pubDate>
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<p><strong>वस्तुओं को बदलने की कोशिश ना करें। बदलना है तो दृष्टि को बदलो। दृष्टि बदलते ही डाकू साधु हो जाते हैं, जो विश्व को बदलना चाहते थे वह मर गए। यह बात निराला रंग बिहार में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने प्रवचन में कही। <span style="color: #ff0000">भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> वस्तुओं को बदलने की कोशिश ना करें। बदलना है तो दृष्टि को बदलो। दृष्टि बदलते ही डाकू साधु हो जाते हैं, जो विश्व को बदलना चाहते थे वह मर गए। यह बात निराला रंग बिहार में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि जीव अपने परिणामों की विशुद्धि के कारण आपके अंदर श्रद्धान ना होता तो साधु के पास जा नहीं पाते। जिसका मोक्ष का कारण बन गयाज़ वह साधु बन जाते हैं, जो भव्य जीव आस्था श्रद्धा विश्वास के साथ जिनेंद्र भगवान की देशना को सुनता है। वह भविष्य का भगवान होता है। एक बार विश्वास हो जाए कि धर्म है जगत में प्रत्येक जीव सुखी रहे, ऐसा विचार रखें यही धर्म है सुखी रहे जीव जगत के। उन्होंने कहा कि पर्वतों को घूमकर आना सरल है। नदियों में डूब कर आना सरल है लेकिन, सुखी रहे सब जीव जगत में यह कहना कठिन है अहिंसा दया ही धर्म है इसके लिए ताकत चाहिए।</p>
<p><strong>जनगणना में जैन ही लिखें</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने आगे कहा कि प्रत्येक घर में जिनवाणी रखना प्रारंभ कर दो घर-घर में आभूषण, साड़ियां रख सकते हो तो शास्त्र क्यों नहीं? जब किसी प्रकार की विपदा स्थिति बने, जिससे ग्रंथ सुरक्षित रहे।घर में बंकर होना चाहिए, मिसाइल गिरे तो ग्रंथ सुरक्षित रहें। 200-400 लोगों के चक्कर में विश्व समाप्त हो रहा है। ईरान-इजरायल यूक्रेन युद्ध के कारण न जाने देश में कितना नुकसान हो रहा है। आचार्य श्री ने आगे कहा कि देश में जनगणना चल रही है। जनगणना में जैन होने का जो कलम है, जो जैन है वह जैन ही लिखें। जिससे जैन समाज की गणना हो जाए।</p>
<p><strong>गुरु के सामने बोलना अच्छा नहीं</strong></p>
<p>वहां पर उपस्थित नगर गौरव मुनि श्री यशोधर सागरजी महाराज ने प्रवचनों में कहा कि भगवान महावीर स्वामी की परंपरा में आज धरती के भगवान आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज हैं। आज बोलते हुए डर लग रहा है कि गुरु के सामने बोलना अच्छा नहीं है। जहां प्रवचनकार बैठे हैं। उनके सामने बच्चा बोलेज़ यह अच्छा नहीं।10 नवंबर 2019 का वह दिन जब गुरुवर ने दीक्षा देकर मोक्ष मार्गी बना दिया। भारत में ऐसा एक गुरु देखा कई गलतियां की आंखों से हमेशा क्षमा किया।</p>
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		<title>वस्तुत्व महाकाव्य में जैन दर्शन पर ममता खासगीवाला को डॉक्टरेट उपाधि : पारसी कॉलेज मुंबई में 30 मई को हुआ दीक्षांत समारोह </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/mamata_khasgiwala_awarded_doctorate_degree_for_research_on_jain_philosophy_in_the_vastutvamahakavya/</link>
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		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 09:36:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वस्तुत्व महाकाव्य में जैन दर्शन पर नगर के कंचनबाग में निवासरत ममता खासगीवाला की अथक मेहनत रंग लाई और उन्हें इस शोध ग्रंथ पर डॉक्टरेट की मानद उपाधि से 30 मई को नवाजा गया है। जैन फिलॉसॉफी इन वस्तुत्व महाकाव्य की पूर्णता पर मुंबई के पारसी कॉलेज में भव्य दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इंदौर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वस्तुत्व महाकाव्य में जैन दर्शन पर नगर के कंचनबाग में निवासरत ममता खासगीवाला की अथक मेहनत रंग लाई और उन्हें इस शोध ग्रंथ पर डॉक्टरेट की मानद उपाधि से 30 मई को नवाजा गया है। जैन फिलॉसॉफी इन वस्तुत्व महाकाव्य की पूर्णता पर मुंबई के पारसी कॉलेज में भव्य दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। वस्तुत्व महाकाव्य में जैन दर्शन पर नगर के कंचनबाग में निवासरत ममता खासगीवाला की अथक मेहनत रंग लाई और उन्हें इस शोध ग्रंथ पर डॉक्टरेट की मानद उपाधि से 30 मई को नवाजा गया है। जैन फिलॉसॉफी इन वस्तुत्व महाकाव्य की पूर्णता पर मुंबई के पारसी कॉलेज में भव्य दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की डिग्री के लिए ममता खासगीवाला को इसकी प्रेरणा आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज से मिली। उनके लिखे वस्तुत्व महाकाव्य को पढ़ा तो लगा कि इसमें कुछ विशेष किया जा सकता है। बस फिर क्या था और उन्हीं के आशीर्वाद, मुनि श्री सूरज सागर जी, मुनि श्री आदित्य सागर जी के परम आशीर्वाद और सहयोग से इस शोध ग्रंथ को देश के जाने-माने विद्वान गणितज्ञ डॉ. अनुपम जैन के सानिध्य में पूरा किया। डॉ. अनुपम जैन ने मेरा बहुत सहयोग किया। विषय के हर पहलुओं का विश्लेषण कर बताया। ममता ने श्रीफल जैन न्यूज को बताया कि इस ग्रंथ को तैयार करने में काफी मेहनत और सैकड़ों संदर्भित ग्रंथों का निचोड़ लिया गया। उन्होंने बताया कि पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूर्ण करते हुए वस्तुत्व महाकाव्य में जैन दर्शन शोध प्रबंध को बड़ी मेहनत से तैयार किया गया। जैन फिलॉसॉफी इन वस्तुत्व महाकाव्य ओपन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी फॉर कॉम्प्लीमेंट्री मेडिसिन में मार्च 2026 में कंप्लीट कर प्रस्तुत किया गया था। डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की डिग्री के लिए पारसी कॉलेज (Zoroastrian College), मुंबई में इसे रखा गया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-107631" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-1536x1021.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-990x658.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006-1320x878.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/06/IMG-20260602-WA0006.jpg 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>सामाजिक कार्य और सेवा प्रकल्पों के निमित्त पुरस्कार </strong></p>
<p>ऑल इंडिया शाह बेहराम बाग सोसाइटी के तत्वावधान में संचालित (वैज्ञानिक और शैक्षिक अनुसंधान के लिए) संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद के साथ विशेष सलाहकार स्थिति में एक गैर-सरकारी संगठन के माध्यम से यह ग्रंथ पूर्णता पा सका। उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही आध्यात्म की ओर रुझान था। नित्य मंदिर जाना और दर्शन पूजन किया जाता था। विवाह के बाद ससुराल में भी पति, बच्चों और बहुओं के प्रोत्साहन से ही मैं इस महती कार्य को कर पाई। आज खुशी है कि मैं इस शोध ग्रंथ को पूरा कर पाई। उन्होंने बताया कि बचपन से ही लेखन का भी शौक रहा। यहां इंदौर में उनके पति ने भी उनकी इस रुचि को आगे बढ़ाया और परिवार के सहयोग से ही लेखन की प्रक्रिया को निरंतर बनाए रखने के लिए हौसला मिला। इसी के चलते आज यह ग्रंथ तैयार हुआ और इस पर उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त हुई। उन्हें कई अवसरों पर सामाजिक कार्य और सेवा प्रकल्पों को करने के निमित्त पुरस्कार और सम्मानों से नवाजा गया है। उन्होंने बताया कि यह गर्भ संस्कार और दिन बुजुर्गों को धर्म ग्रंथों का श्रवण करवाने में भी पीछे नहीं रहती हैं। इसके लिए बाकायदा एक समूह तैयार किया गया है।</p>
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		<title>आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी संसघ का चातुर्मास दिल्ली में संभव: 2026 के पावन वर्षायोग के लिए दिल्ली के दिगंबर समाज के श्रेष्ठीजन कर रहे थे प्रयास  </title>
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		<pubDate>Tue, 05 May 2026 11:58:28 +0000</pubDate>
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<p><strong>आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी ससंघ’ का 2026 का पावन वर्षायोग इस वर्ष राजधानी दिल्ली’ में होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक समाचार से पूरे भारतवर्ष के जैन समाज में हर्ष है। विगत कई वर्षों से दिल्ली नगर समाज शहर में वर्षायोग के लिए प्रयासरत थे। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर</strong>। आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी ससंघ’ का 2026 का पावन वर्षायोग इस वर्ष राजधानी दिल्ली’ में होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक समाचार से पूरे भारतवर्ष के जैन समाज में हर्ष है। विगत कई वर्षों से दिल्ली नगर समाज शहर में वर्षायोग के लिए प्रयासरत थे। जैसे ही संकेत प्राप्त हुए कि इस वर्ष का चातुर्मास का परम सौभाग्य दिल्ली नगर की जैन समाज को प्राप्त होने जा रहा है। समाज में उल्लास का वातावरण है। राजेश जैन दद्दू ने कहा कि जैन श्रमण परंपरा में चातुर्मास’ का विशेष महत्व है। वर्षाकाल के चार महीनों में आचार्यश्री एक स्थान पर विराजकर धर्म-ध्यान, स्वाध्याय, तप एवं प्रवचनों के माध्यम से समाज को सत्य, अहिंसा, मैत्री एवं ‘जियो और जीने दो’ का संदेश देते हैं। आचार्यश्री के सान्निध्य में पर्यूषण महापर्व में हजारों श्रावक-श्राविकाएं शिविर के माध्यम से आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। गुरु भक्त डॉ. जैनेंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली समाज में भारी उत्साह है। राजधानी दिल्ली में 21वीं सदी के श्रमण संस्कृति के पट्टाचार्य श्री का चातुर्मास होना गौरव का विषय है। समाजजनों ने चातुर्मास की भव्य तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। विभिन्न समितियों का गठन कर व्यवस्था, आवास, आहार, विहार प्रवचन एवं धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा बनाई जा रही है।</p>
<p><strong>आचार्यश्री का परिचय</strong></p>
<p>आचार्य श्री विरागसागर महाराज के सुशिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज युवाओं के प्रेरणास्रोत’ एवं आगमानुसार आचरण करने वाले श्रमण संस्कृति आध्यात्मिक गुरु के रूप में पद प्रतिष्ठित हैं। उनका प्रमुख संदेश ’नमोस्तु शासन जयवंत हो’ जन-जन तक पहुंच रहा है। 31 मार्च 2007 को औरंगाबाद में महावीर जयंती के पावन अवसर पर उन्हें आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया था। अभी तक लगभग दो लाख किमी तक का पदविहार कर चुके हैं। वर्तमान समय में आचार्य श्री द्वारा प्रणीत ग्रंथों को सबसे ज्यादा पढ़ा जा रहा है। आचार्यश्री द्वारा की जा रही धर्म प्रभावना से समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों एवं अध्यात्म का व्यापक प्रचार-प्रसार हो रहा है। दिल्ली चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रातः जिनेंद्र अभिषेक, नित्य नियम पुजन शांतिधारा, आचार्यश्री के मंगल प्रवचन एवं तत्वचर्चा के कार्यक्रम होंगे। दिल्ली की सकल दिगंबर जैन समाज ने आचार्यश्री के चातुर्मास के संकेत को सहर्ष स्वीकार करते हुए पुण्यार्जन का लाभ लेने का संकल्प लिया है। इस वर्ष के वर्षायोग में देशभर से श्रद्धालुओं के दिल्ली पहुंचने की संभावना है।</p>
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		<title>विद्या-विशुद्ध निलय भवन का शुभारंभ : चंद्रप्रभु मांगलिक भवन में ग्रीष्मकालीन वाचना में किया गया आयोजन </title>
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		<pubDate>Fri, 01 May 2026 10:15:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर, अंजनी नगर में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के प्रथम पट्टाचार्य महामहोत्सव के अवसर पर विद्या-विशुद्ध निलय भवन का शुभारंभ समाज श्रेष्ठी पाटोदी जितेंद्र अनिता परिवार द्वारा हुआ। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर, अंजनी नगर में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के प्रथम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर, अंजनी नगर में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के प्रथम पट्टाचार्य महामहोत्सव के अवसर पर विद्या-विशुद्ध निलय भवन का शुभारंभ समाज श्रेष्ठी पाटोदी जितेंद्र अनिता परिवार द्वारा हुआ। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>इंदौर</strong>। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर, अंजनी नगर में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के प्रथम पट्टाचार्य महामहोत्सव के अवसर पर विद्या-विशुद्ध निलय भवन का शुभारंभ समाज श्रेष्ठी पाटोदी जितेंद्र अनिता परिवार द्वारा हुआ। राजेश जैन दद्दू ने कहा कि अंजनी नगर स्थित श्री चंद्रप्रभु मांगलिक भवन में ग्रीष्मकालीन वाचना के दौरान यह आयोजन किया गया। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ससंघ के मुनि श्री आदित्य सागर जी, मुनि श्री अप्रमित सागर जी, मुनि श्री सहजानंदी, मुनि श्री सहज सागर जी एवं छुल्लक श्री श्रेयस सागर जी महाराज के सानिध्य में हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री आदित्य सागर जी ने अपनी मंगल देशना में स्वाध्याय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वाध्याय से धैर्य प्राप्त होता है, स्वाध्याय ही परम तप है स्वाध्याय से मन शांत चित्त रहता है और पुण्य की अभी वृद्धि होती है। गुरुदेव ने कहा कि धीरे-धीरे अध्ययन करने से एकाग्रता बनी रहती है और मन भटकता नहीं है।</p>
<p>स्वाध्याय व्यक्ति को आंतरिक रूप से सुरक्षित रखता है तथा जिनकी इसमें रुचि होती है, वे आगे चलकर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होते हैं। मुनि श्री ने कहा कि गुरु की संगति से जीवन के अनेक कार्य सरल हो जाते हैं और &#8216;भगवान की संगत में रहोगे तभी भगवान बन पाओगे। दिगंबर जैन समाज अंजनी नगर के देवेंद्र सोगानी, ऋषभ पाटनी, राजेश काला, चिराग गोधा, कैलाश वेद आदि समाज जन उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>सहजानंद वर्णी जन्मभूमि स्मारक का हुआ शिलान्यास : ग्रामीण लोगों ने की आचार्य श्री की भव्य अगवानी </title>
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		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 13:27:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में,सहजानंद वर्णी जन्मभूमि स्मारक का शिलान्यास कार्यक्रम ग्राम दुमादुम पृथ्वीपुर में संपन्न हुआ। पृथ्वीपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;  पृथ्वीपुर। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के ससंघ मंगल सान्निध्य में,सहजानंद वर्णी जन्मभूमि स्मारक का शिलान्यास कार्यक्रम ग्राम दुमादुम पृथ्वीपुर में संपन्न हुआ। सर्वप्रथम सुबह पृथ्वीपुर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में,सहजानंद वर्णी जन्मभूमि स्मारक का शिलान्यास कार्यक्रम ग्राम दुमादुम पृथ्वीपुर में संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">पृथ्वीपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> पृथ्वीपुर।</strong> आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के ससंघ मंगल सान्निध्य में,सहजानंद वर्णी जन्मभूमि स्मारक का शिलान्यास कार्यक्रम ग्राम दुमादुम पृथ्वीपुर में संपन्न हुआ। सर्वप्रथम सुबह पृथ्वीपुर से दुमदुमा के लिए आचार्य श्री का गमन हुआ और अगवानी दुमदुमा में हजारों धर्म प्रेमी जन के साथ ग्रामीण जन समुदाय ने भी कलश लेकर घर के द्वार पर रंगोली एवं पाद प्रक्षालन के साथ आचार्य श्री की अगवानी की। कई वर्ष बाद इस ग्राम में ऐसा भव्य आयोजन हुआ। यह आयोजन देश के ख्याति प्राप्त विद्वान डॉ.श्रेयांस जैन बड़ौत के निर्देशन में हुआ। सर्वप्रथम जन्मभूमि स्मारक शिलान्यास, वर्णी बाल संस्कार केंद्र,वर्णी आरोग्य केंद्र का शुभारंभ किया गया।</p>
<p>बच्चों को टी-शर्ट, कॉपी एवं मिष्ठान वितरण किया गया। इस कार्यक्रम में वर्णी विकास सभा राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत जैन सीकर, निर्देशक कडोरीलाल बंडा की टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रतिष्ठाचार्य कमल कुमार कमलांकुर भोपाल द्वारा विधि- विधान पूर्वक कार्यक्रम संपन्न कराया गया। कार्यक्रम में दिल्ली, अहमदाबाद,भोपाल,बड़ौत, राजस्थान, सागर, भोपाल के लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। वर्णी संदेश समाचार पत्र का विमोचन किया गया। दिगंबर जैन समाज दुमदुमा,पृथ्वीपुर ने आंगतुक अतिथियों का स्वागत सत्कार किया। प्रशासनिक सहयोगी डिप्टी कलेक्टर विनीता जैन का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। पीएससी में चयनित आईपीएस अभिजीत जैन का सम्मान किया गया। शिलान्यास परिवार विमलचंद,सुमत कुमार परिवार अहमदाबाद एवं जिनेंद्र कुमार, सेतुलाल जैन, प्रवीणकुमार जैन परिवार, अहमदाबाद, गुजरात, आरोग्यधाम पुण्यार्जक परिवार डॉ. श्रेयांस कुमार जैन,आलोक जैन बड़ौत एवं नरेंद्र कुमार दयाचंद्र जैन और संजीव कुमार जयकुमार जैन अहमदाबाद का स्मारक निर्माण सहयोगी परिवार रहे।</p>
<p>कार्यक्रम में आचार्य श्री ने कहा कि सहजानंद वर्णी की जन्मस्थली इसलिए महान है कि उनके द्वारा 500 से ज्यादा जैन ग्रथों की रचना की गई और आज देश भर में इन ग्रंथो के माध्यम से धर्म की प्रभावना निरंतर चल रही हैं अगर समाज के लोग उनकी कृतियों का संवर्धन संरक्षण कर सकें तो इससे महत्वपूर्ण कार्य कोई नहीं है,कार्यक्रम में मुकेश जैन, पंकज जैन, नवीन जैन,देवेंद्र जैन मुकेश जैन पृथ्वीपुर के साथ दुमदुमा, पृथ्वीपुर समाज एवं ग्रामीण समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा।</p>
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		<title>अक्षय तृतीया दान दिवस पर सेवा कार्य सोमवार को करेंगे : असहाय जरूरतमंदों की होगी मदद </title>
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		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 18:33:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के परम प्रभावक शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी के संघ के आशीर्वाद से 20 अप्रैल सोमवार को विभिन्न सेवा कार्य किए जाएंगे। कुचामनसिटी से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट&#8230; कुचामन सिटी। सकल जैन समाज के सहयोग से श्री जैन वीर मंडल के तत्वावधान में जैन धर्म के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के परम प्रभावक शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी के संघ के आशीर्वाद से 20 अप्रैल सोमवार को विभिन्न सेवा कार्य किए जाएंगे। <span style="color: #ff0000">कुचामनसिटी से पढ़िए, सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामन सिटी।</strong> सकल जैन समाज के सहयोग से श्री जैन वीर मंडल के तत्वावधान में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) के एक वर्ष 39 दिन के उपवास के बाद अक्षय तृतीया के दिन राजा श्रेयांस द्वारा आहार कराए जाने की स्मृति में यह दिवस तप, त्याग, संयम और दान के रूप में मनाया जाता है। सौभागमल गंगवाल एवं अशोक झांझरी के अनुसार आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के परम प्रभावक शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी के संघ के आशीर्वाद से 20 अप्रैल सोमवार को विभिन्न सेवा कार्य किए जाएंगे। इस अवसर पर असहाय, लाचार एवं बीमार जरूरतमंदों को &#8216;अपना घर&#8217; में 63 प्रभुजी को अल्पाहार, दोनों भोजन, मिठाई एवं दवाइयों के साथ &#8216;माधव सेवा&#8217; की जाएगी। साथ ही संपर्क संस्थान के मूक-बधिरों बच्चों एवं अन्नपूर्णा रसोई में जरूरतमंदों को भोजन कराया जाएगा। गोसेवा के तहत कुचामन गोशाला, समरिया सागर बालाजी गोशाला एवं शाकंभरी माता गोशाला में हरा चारा (रीजका), गुड़ एवं पानी की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही पक्षियों के लिए 100 किलो ‌जवार दाना-पानी की व्यवस्था भी समाज के श्रावक-श्रेष्ठियों द्वारा की जाएगी। देवेंद्र पहाड़िया ने बताया कि इन सेवा कार्यों के पुण्यार्जक शांतिदेवी धर्मचंद छाबड़ा परिवार, नीलम अनिल बज परिवार, भानुकुमार अजित पांड्या परिवार, गोपालचंद अजित पहाडिया,पारसमल पंकज पहाड़िया परिवार तथा जीवदया सेवा समिति ट्रस्ट के कमलकुमार (पुत्र स्व. धर्मचंद पांड्या) परिवार के सहयोग से सभी पुरुष, महिलाएं एवं युवा मिलकर सेवा कार्य करेंगे।</p>
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		<title>णमोकार महामंत्र से सभी आत्माओं का कल्याण होता है: तेरहपंथी जैन मंदिर में जलाभिषेक, शांतिधारा भक्ति भाव से हुई </title>
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		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:45:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य मे धाटीकुआं स्थित तेरहपंथी जैन मंदिर में जलाभिषेक, शांतिधारा भक्ति भाव से करवाई गई। कुचामनसिटी से सुभाष पहाड़िया की रिपोर्ट&#8230;  कुचामनसिटी। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य मे धाटीकुआं स्थित तेरहपंथी जैन मंदिर में जलाभिषेक, शांतिधारा भक्ति भाव से करवाई गई। <span style="color: #ff0000">कुचामनसिटी से सुभाष पहाड़िया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> कुचामनसिटी।</strong> आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के आज्ञानुवर्ती शिष्य उपाध्याय मुनि श्री विकसंत सागर जी महाराज के सानिध्य मे धाटीकुआं स्थित तेरहपंथी जैन मंदिर में जलाभिषेक, शांतिधारा भक्ति भाव से करवाई गई। शांतिधारा के पुण्यार्जक गुणमाला देवी कैलाश चन्द, निर्मल कुमार, अमित, उमंग अरिहंत पांड्या परिवार रहे। धर्मसभा का मंगलाचरण किरणदेवी मुन्नी देवी झांझरी ने किया। संतोष कुमार, प्रवीण, विपिन, चिन्मय, दिव्य पहाडिया परिवार ने शास्त्र भेंट किया। ललितकुमार, चिरंजी लाल, लेखराज, निखिल पहाडिया परिवार ने पाद प्रक्षालन किया। आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के फोटो के सामने लालचंद, संतोष, ज्ञानचंद, अशोक पहाडिया पुरणमल, विनोद झांझरी, अशोक अजमेरा, सुरेश कुमार, प्रकाशचंद, मोनू पाटोदी, निखिल जैन ने दीप प्रज्वलन किया।</p>
<p>उपाध्याय श्री ने अपने प्रवचन में धार्मिक वही है जो दुसरो को दुख देने का जरा सा ही भाव नहीं करें। सभी आत्माएं एक समान हैं। मृत्यु व वैराग्य की कोई उम्र नहीं होती है। सभी आत्माओं की सम्मान और कल्याण की भावना करनी चाहिए। णमोकार महामंत्र की महिमा में बताया कि नाग नागीन को मरते समय णमोकार सुनाने से जीव देवगती जाकर अपना कल्याण किया। यह महामंत्र अनाघि अंनत व सबके लिए मंगलकारी है। प्रवचन के बाद सभी के लिए संतोष देवी संतोष पहाडिया परिवार ने अल्पाहार रखा।</p>
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		<title>17 अप्रैल को आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी देंगे जैनेश्वरी दीक्षा: टीकमगढ में होगा यह अद्भुत नजारा, उमड़ेगे श्रद्धालु  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/on_april_17_acharya_shri_vishuddha_sagar_ji_will_confer_jaineshwari_diksha/</link>
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		<pubDate>Tue, 14 Apr 2026 13:20:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[टीकमगढ़ एक बार फिर त्याग, तपस्या और आत्मजागरण का अद्भुत दृश्य देखने जा रहा है। 17 अप्रैल शुक्रवार का वह पावन दिवस, जब आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी अपने शिष्यों को जैनेश्वरी दीक्षा अपने करकमलों से प्रदान करेंगे। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। टीकमगढ़ एक बार फिर त्याग, तपस्या और आत्मजागरण का अद्भुत दृश्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>टीकमगढ़ एक बार फिर त्याग, तपस्या और आत्मजागरण का अद्भुत दृश्य देखने जा रहा है। 17 अप्रैल शुक्रवार का वह पावन दिवस, जब आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी अपने शिष्यों को जैनेश्वरी दीक्षा अपने करकमलों से प्रदान करेंगे। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> टीकमगढ़ एक बार फिर त्याग, तपस्या और आत्मजागरण का अद्भुत दृश्य देखने जा रहा है। 17 अप्रैल शुक्रवार का वह पावन दिवस, जब आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी अपने शिष्यों को जैनेश्वरी दीक्षा अपने करकमलों से प्रदान करेंगे। केवल एक महोत्सव नहीं, बल्कि आत्मपरिवर्तन का युगांतकारी क्षण होगा। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी जिन्होंने पूरे भारत में संयम की अलख जगाई और सैकड़ों मुनियांे को दीक्षित कर नमोस्तु शासन जयवंत हो को गुंजायमान किया। राजेश जैन दद्दू ने बताया आचार्य श्री विशुद्ध सागर दीक्षा के बाद निरंतर भारत भूमि को कर्मस्थली बनाकर उन्होंने भगवान महावीर के अहिंसा और करुणा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया। भारत भूमि पर लाखों किमी पदविहार कर ऐतिहासिक चातुर्मासों के माध्यम से उन्होंने समाज को संस्कार, संयम और धर्म मार्ग पर चलने का संदेश दिया। भावी दीक्षार्थीयो को जेनेश्वरी दीक्षा प्रदान कर उन्हें संयम जीवन की ओर अग्रसर करेंगे। यह क्षण केवल दीक्षा का नहीं, आत्मजागरण का है। यह अवसर केवल देखने का नहीं, अनुभव करने का है। यह जहां त्याग की गंगा बहेगी, वैराग्य का दीप जलेगा और हजारों श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति के आंसू झिलमिलाएंगे। नमोस्तु शासन जयवंत हो।</p>
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