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	<title>आचार्य श्री विराग सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>प्रथम समाधि दिवस पर गुरु मंदिर का लोकार्पण: गुरु के उपकार को हम सदियों तक भी नहीं चुका सकते- आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज  </title>
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		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 12:20:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विराग सागर महाराज के प्रथम समाधि दिवस पर 13 फीट गुरु मंदिर का लोकार्पण हुआ। जिसका सौभाग्य संतोष कुमार नितिन कुमार सबदरा परिवार को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में मुनिश्री प्रांजल सागर महाराज के निर्देशन में लोकार्पण हुआ। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विराग सागर महाराज के प्रथम समाधि दिवस पर 13 फीट गुरु मंदिर का लोकार्पण हुआ। जिसका सौभाग्य संतोष कुमार नितिन कुमार सबदरा परिवार को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में मुनिश्री प्रांजल सागर महाराज के निर्देशन में लोकार्पण हुआ। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विराग सागर महाराज के प्रथम समाधि दिवस पर 13 फीट गुरु मंदिर का लोकार्पण हुआ। जिसका सौभाग्य संतोष कुमार नितिन कुमार सबदरा परिवार को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में मुनिश्री प्रांजल सागर महाराज के निर्देशन में लोकार्पण हुआ, जो बहुत ही भव्य अलौकिक यह मंदिर लगभग 13 फीट का है। जिसे योगेश जैन जबलपुर के निर्देशन में तैयार किया गया है। इसमें लगभग 20 कारीगरों ने मिलकर तैयार किया है। इसे बनाने में डेढ़ महीने का समय लगा। योगेश जैन ने बताया कि आचार्य श्री के आशीर्वाद एवं मुनि श्री प्रांजल सागर महाराज की प्रेरणा से इसका निर्माण किया गया है। इसमें क्रिस्टल और अमेरिकन डायमंड का उपयोग किया गया है।</p>
<p>लोकार्पण से पूर्व सर्वप्रथम आचार्य श्री विराग सागर महाराज के प्रथम समाधि दिवस को आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में मनाया गया। सर्वप्रथम मूलनायक शांतिनाथ भगवान के समक्ष श्रीजी का अभिषेक एवं शांति धारा की गई। इसके उपरांत जिनसहस्त्र नाम के 1008 कलश से अभिषेक किया गया। शांतिधारा का सौभाग्य सुरेशकुमार सिद्धार्थ कुमार बाबरिया परिवार रामगंजमंडी एवं सुनील कुमार विवान सुरलाया परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong> गुरु पूजा के लिए बनाया गया आकर्षक मांडना </strong></p>
<p>अभिषेक शांतिधारा उपरांत विशेष थाल सजाकर आचार्य श्री विराग सागर का पूजन किया गया जिसे संगीत लहरियों के बीच मुनिश्री प्रांजल सागर महाराज ने कराया। जो भक्ति से ओतप्रोत रही। सभी का उत्साह भरपूर था पूजन के शुभारंभ से पूर्व मुनि श्री प्रांजल सागर महाराज ने मंगलाचरण किया। इसके उपरांत विशेष थाल सजाकर सभी समूह बच्चों ने क्रम से भक्ति नृत्य करते हुए भाव विभोर होकर अष्ट द्रव्य समर्पित किए। पूजन के लिए बनाया गया मांडना बहुत ही आकर्षक था। इस अवसर पर आचार्य श्री के पद प्रक्षालन का सौभाग्य दिलीप कुमार अरुण कुमार विनायका परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>तीर्थंकर कहते हैं कि मरण के लिए पुरुषार्थ समाधि है</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री ने आचार्य श्री विराग सागर महाराज के प्रति अपनी भावांजली दी। उन्होंने उन्होंने समाधि के विषय को समझाते हुए कहा कि मरण को मिटाने को समाधि कहते हैं। उन्होंने इसका विशेष रूप से इसका भावार्थ बताते हुए कहा कि तीर्थंकर कहते हैं कि मरण के लिए पुरुषार्थ समाधि है। समाधि का अर्थ लक्ष्य तक पहुंचना है। उन्होंने कहा हम बार-बार मर चुके हैं लेकिन, एक बार भी समाधि नहीं हुई अगर अवसर मिले समझने का तो निर्णय करना चाहिए। जैन दर्शन कहता है कि भगवान प्राप्त किसी को नहीं होते मार्ग है भगवान बनने का कि हम अपनी समाधि करें।</p>
<p><strong>समाधि की यह अवस्था दुर्लभ एवं मुश्किल होती है</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि आचार्य श्री ने अनेकों समाधि कराई है। आचार्य श्री मोह से हटाकर त्याग में प्रवेश कराकर कुशलता से समाधि कराते थे। उनकी समाधि के समय नियति ने उन्हें पूरा अवसर दिया संपूर्ण जागृत अवस्था में उन्होंने समाधि की यह अवस्था दुर्लभ एवं मुश्किल होती है। उन्होंने भगवती आराधना का पालन किया निर्णय किया और अपने पद त्याग दिया और अपना पद दूसरों को दिया यह निर्णय कठिन होता है। उन्होंने पद का त्याग ही नहीं किया व्यवस्था भी बना दी की पद को कौन संभालेगा।</p>
<p><strong>हम धर्म का आचरण करने को तैयार हैं</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि गुरु के लिए सब बराबर होते हैं लेकिन, एक को चुनना होता है। गुरुदेव हम सबको एक साथ रहना सिखाया है। आचार्य श्री ने बहुत कुछ दिया। इसी कारण पंचम काल में हम निर्बाध रूप से हम धर्म का आचरण करने को तैयार हैं। जो धर्म की गहराई से नहीं जुड़ सकता वह समाधि से नहीं जुड़ सकता त्याग आपको धर्म से जोड़ता है और सुख से जोड़ता है।</p>
<p><strong>गुरु गुरु होते हैं वह शिष्य को बहुत कुछ दे जाते हैं </strong></p>
<p>गुरु गुरु होते हैं वह शिष्य को बहुत कुछ दे जाते हैं लेकिन शिष्य गुरु को कुछ भी नहीं दे पाता है। गुरुदेव ने मुझे सिखाया समझाया गुरुदेव ने हमें बनाने में बहुत मेहनत की। गुरुवर ने इतना संभाला इतना संभाला वह ज्ञान देते गए हम लेते गए और चार महीने में ही गुरुदेव ने हाथ में पिच्छि दे दी। गुरु के उपकार को हम सदियों तक भी नहीं चुका सकते उनकी शिक्षा और उनकी स्मृति जीवन में उतारी जा सकती है।</p>
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		<title>आचार्य श्री विराग सागर का प्रथम समाधि दिवस मनाया: 1008जिन सहस्रनाम मंत्राभिषेक किया गया  </title>
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		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 08:04:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विरागसागर महाराज का प्रथम समाधि दिवस आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज संघ सानिध्य में शुक्रवार को मनाया गया। इसमें प्रातः बेला में श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा उपरान्त 1008 जिन सहस्रनाम मंत्राभिषेक किया गया। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विरागसागर महाराज का प्रथम समाधि दिवस आचार्य श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विरागसागर महाराज का प्रथम समाधि दिवस आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज संघ सानिध्य में शुक्रवार को मनाया गया। इसमें प्रातः बेला में श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा उपरान्त 1008 जिन सहस्रनाम मंत्राभिषेक किया गया। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विरागसागर महाराज का प्रथम समाधि दिवस आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज संघ सानिध्य में शुक्रवार को मनाया गया। इसमें प्रातः बेला में श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा उपरान्त 1008 जिन सहस्रनाम मंत्राभिषेक किया गया। इसके उपरांत आचार्य श्री विराग सागर महाराज का गुरु पूजन किया गया। जिसके लिए विशेष गुरु मंदिर बनाया गया। इस कार्यक्रम में विशेष थाल सजाकर अष्ट द्रव्यों से पूजन किया गया। इसी अनुपम बेला में विनयांजलि दी गई।</p>
<p><strong>आचार्य श्री विराग सागर महाराज का परिचय </strong></p>
<p>आचार्य विराग सागर का जन्म 2 मई 1963 को दमोह जिले के पथरिया में हुआ था। बचपन से ही सूर्य की तरह चमक और बुद्धि के धनि बालक अरविंद (बचपन का नाम) ने पथरिया के ही शासकीय प्राथमिक शाला में पांचवीं तक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद 1974 में 11 वर्ष की आयु में ही उन्होंने वैराग्य का रास्ता धारण किया और पिता कपूर चंद और मां श्यामा देवी जैन के आाशीर्वाद पर वह कटनी शांति निकेतन जैन संस्कृत विद्यालय में पढऩे के लिए चले गए। जहां धार्मिक, शास्त्र और लौकिक शिक्षा से मेट्रिक पास की। इसके बाद वह शास्त्री बन गए और साधु, संतों के साथ रहते हुए अरविंद का का ज्ञान और बढ़ता गया। यही समय था कि उन्होंने जिन शासन में अपना योगदान देने का मन बना लिया था। धर्म की राह पर निकले अरविंद ने फिर घर की ओर नहीं देखा। यही वजह थी 1980 में वह समय आया जब उनकी शिक्षा, त्याग और ज्ञान को गुरु का आशीर्वाद मिला। तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मति सागर ने मप्र के शहडोल जिले के बुढ़ार में अरविंद शास्त्री को 20 फरवरी 1980 को क्षुल्लक दीक्षा दी। तब अरविंद 17 साल के ही थे। साथ ही उन्हें नई पहचान क्षुल्लक पूर्णसागर के रूप में मिली। गुरू से क्षुल्लक दीक्षा के बाद उनकी तपस्या और बढ़ गई। जिसे देख आचार्य विमलसागर महाराज ने 9 दिसंबर 1983 यानि 20 वर्ष की उम्र में उन्हें मुनि दीक्षा दी और यहीं सें उनका नाम मुनि विराग सागर हुआ। विराग सागर को मुनि दीक्षा महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मिली थी। मुनि रहते विरागसागर ने त्याग और तपस्या बढ़ाई। अनेक जगहों पर विहार कर धर्म प्रभावना बढ़ाई। जिसे देख गुरू आचार्य विमलसागर ने 8 नवंबर 1992 को मप्र के छतरपुर जिले के द्रोणागिरी में मुनि विरागसागर को आचार्य पद जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी। तब उनकी उम्र महज 29 वर्ष ही थी।</p>
<p><strong>बुंदेलखंड के प्रथम आचार्य ऐसे बने गणाचार्य</strong></p>
<p>29 की उम्र में ही आचार्य पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद विराग सागर ने जैन संस्कृति की धर्म प्रभावना को ऐसा बढ़ाया कि हर युवा उनसे प्रभावित होने लगा। न सिर्फ बुंदलेखंड, मप्र बल्कि उप्र, विहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रांतों में विहार करते हुए धर्म पताका फहराया। इस दौरान आचार्य विरागसागर ने संघ में 94 मुनियों, 73 आर्यिकाओं, 5 ऐलक, 23 क्षुल्लक, 32 क्षुल्लिका दीक्षाएं देकर युवाओं को मोक्ष मार्ग की और प्रशस्त किया। इस तरह करीब 222 साधु, साध्वियां विराग सागर के बड़े संघ में हैं। इसके अलावा 110 ऐसे वृद्धजनों को दीक्षा देकर संलेखना की ओर ले गए, जिनका जीवन पूरी तरह धर्म में व्यतीत रहा हो। आचार्य विराग सागर ने अपने शिष्यों के ज्ञान की परख करते हुए बीच में ही 9 मुनियों को आचार्य पद दे दिया था। इसीलिए बुंदलेखंड के प्रथम आचार्य विराग सागर को अब गणाचार्य की उपाधि मिल चुकी थी।</p>
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		<title>समाधि साधना प्रारंभ की : अपना आचार्य पद छोड़ा  </title>
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		<pubDate>Mon, 22 Jul 2024 10:16:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर। आचार्य विराग सागर जी की समाधि पश्चात पर किया आचार्य श्री सम्भव सागर जी ने अपने आचार्य पद का त्याग कर अपने शिष्य मोक्ष सागर को दिया। उन्होंने शिखर जी में एक आहार, एक उपवास, 2 आहार, 1 उपवास और मौन साधना और समाधि की साधना आचार्य श्री शान्तिसागर जैसी समाधि की साधना अंगीकार [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्य विराग सागर जी की समाधि पश्चात पर किया आचार्य श्री सम्भव सागर जी ने अपने आचार्य पद का त्याग कर अपने शिष्य मोक्ष सागर को दिया। उन्होंने शिखर जी में एक आहार, एक उपवास, 2 आहार, 1 उपवास और मौन साधना और समाधि की साधना आचार्य श्री शान्तिसागर जैसी समाधि की साधना अंगीकार कर समाधि साधना प्रारंभ कर दी है। आप पिछले कई वर्षों से 6 रसों का त्याग कर चुके हैं।</p>
<p>धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आचार्य श्री सम्भव सागर जी ने चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी को पत्र लिखकर कहा कि मैं अपना आचार्य पद अपने शिष्य मुनि मोक्ष सागर जी को सौंपता हूं।</p>
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		<title>गणाचार्य श्री विरागसागर जी का महाप्रयाण : अनुपम और असाधारण संयम के धारक थे गुरुदेव </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Jul 2024 07:23:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विरागवाणी के यशस्‍वी संपादक इंजी. श्री आनन्‍द कुमार जैन ने 4 जुलाईए 2024 को प्रात: 6 बजे गुरुदेव श्री विरागसागर जी की समाधिस्‍थ होने के दु:खद समाचार हमें दिए। नैनागिरि में न्‍यास कमेटी के मंत्री द्वय और सदस्‍यगण स्‍थानीय समाज और हमारे सभी सहायकों ने शांतिविधान कर गुरुदेव के प्रति अपनी विनयांजलि समर्पित की। पढ़िए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विरागवाणी के यशस्&#x200d;वी संपादक इंजी. श्री आनन्&#x200d;द कुमार जैन ने 4 जुलाईए 2024 को प्रात: 6 बजे गुरुदेव श्री विरागसागर जी की समाधिस्&#x200d;थ होने के दु:खद समाचार हमें दिए। नैनागिरि में न्&#x200d;यास कमेटी के मंत्री द्वय और सदस्&#x200d;यगण स्&#x200d;थानीय समाज और हमारे सभी सहायकों ने शांतिविधान कर गुरुदेव के प्रति अपनी विनयांजलि समर्पित की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सुरेश जैन (आईएएस) का विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>विरागवाणी के यशस्&#x200d;वी संपादक इंजी. श्री आनन्&#x200d;द कुमार जैन ने 4 जुलाईए 2024 को प्रात: 6 बजे गुरुदेव श्री विरागसागर जी की समाधिस्&#x200d;थ होने के दु:खद समाचार हमें दिए। नैनागिरि में न्&#x200d;यास कमेटी के मंत्री द्वय और सदस्&#x200d;यगण स्&#x200d;थानीय समाज और हमारे सभी सहायकों ने शांतिविधान कर गुरुदेव के प्रति अपनी विनयांजलि समर्पित की। इसके पूर्व उनके विपरीत स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य की जानकारी मिलते ही 2 और 3 जुलाई को नैनागिरि तीर्थ के बड़े पुजारी कोमलचन्&#x200d;द्र जैन , वरिष्&#x200d;ठ प्रबंधक शिखरचन्&#x200d;द्र जैन तथा सहायक प्रबंधक विकास जैन आदि सभी सहायकों और उपस्थित महानुभावों ने भगवान पार्श्&#x200d;वनाथ के मंदिर में शांतिधारा कर उनके अच्&#x200d;छे स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य के लिए प्रार्थना की थी।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63345" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240713-WA0007.jpg" alt="" width="1025" height="1114" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240713-WA0007.jpg 1025w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240713-WA0007-276x300.jpg 276w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240713-WA0007-942x1024.jpg 942w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240713-WA0007-768x835.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240713-WA0007-990x1076.jpg 990w" sizes="(max-width: 1025px) 100vw, 1025px" />वर्ष 1992 में द्रोणगिरि में आयोजित उनके आचार्य दीक्षा समारोह का साक्षी बनने का हमें सौभाग्&#x200d;य प्राप्&#x200d;त हुआ। उनकी सात नैनागिरि यात्राओं में तथा विभिन्&#x200d;न तीर्थो पर उनके दर्शन कर न्&#x200d;यायमूर्ति विमला जी तथा हमने आत्&#x200d;मीय आशीर्वाद प्राप्&#x200d;त किया। उनकी मधुर वाणी की महात्रिवेणी से मन भर, जल दुग्&#x200d;ध रसपान का अपरिमित आनन्&#x200d;द लिया। नैनागिरि तीर्थ प्रबंधन समिति की प्रथम प्रार्थना पर ही सहजता और सरलता पूर्वक गुरुदेव नैनागिरि तीर्थ पर आयोजित पंचकल्&#x200d;याणक 2023 में पधारे और अपने पूरे संघ का सान्निध्&#x200d;य प्रदान किया। कठिन और कलुषित मानवीय व्&#x200d;यवहार की पुन: पुन: उलझती गांठे सरलता से खोलकर उन्&#x200d;होंने समग्र समाज के बीच गोवत्&#x200d;स प्रीति पूर्वक शाश्&#x200d;वत समन्&#x200d;वय स्&#x200d;थापित किया। पूरी शांति और सफलतापूर्वक देशना स्&#x200d;थल पर निर्माणाधीन तीन मूर्ति मंदिर में पीतल की तीन विशाल मूर्तियों की प्राण प्रतिष्&#x200d;ठा की।</p>
<p>नवनिर्मित श्रुत मंदिर में विशाल श्रुतस्&#x200d;कंध विराजमान कराया। उनकी स्&#x200d;नेहभरी सतत मंद- मंद मुस्&#x200d;कान से अपार प्रेरणा प्राप्&#x200d;त कर तीर्थ समिति ने तन, मन और धन से रात- दिन कार्य करते हुए सफलतम पंचकल्&#x200d;याणक संपन्&#x200d;न करने का श्रेष्&#x200d;ठतम उदाहरण प्रस्&#x200d;तुत किया।</p>
<p>गुरुदेव की मिसरी सी मीठी मधुरतम वाणी से अपरिमित ऊर्जा प्राप्&#x200d;त कर इस पंचकल्&#x200d;याणक में अपना अमृतकालीन जीवन व्&#x200d;यतीत कर रहीं श्रीमती कस्&#x200d;तूरीदेवी और उनके पति श्री लालचन्&#x200d;द्र जी भगवान के माता &#8211; पिता बने। शिशु पार्श्&#x200d;व को देखते हुए उनके तन-मन की प्रसन्&#x200d;नता जन &#8211; जन के आकर्षण का केन्&#x200d;द्र बन रही थी। समाज के इस वयोवृद्ध परिवार के साथ &#8211; साथ सभी पात्रों ने पूरे उत्&#x200d;साह और समर्पण पूर्वक अपने विविध कर्तव्&#x200d;यों का निर्वाह किया। सम्&#x200d;यकदर्शन के सभी अंगो को स्&#x200d;वीकार करते हुए उनके युवा पौत्र पुलकित और पौत्रवधु राखी ने सौधर्मइन्&#x200d;द्र और शची की प्रभावी भूमिका का सम्&#x200d;यक् और सफलतम ढंग से निर्वाह किया।</p>
<p>इस अवसर पर विरागोदय तीर्थ पथरिया में समा&#x200d;योजित यतिसम्&#x200d;मेलन : युग प्रतिक्रमण की स्&#x200d;मृति को स्&#x200d;थाई स्&#x200d;वरूप देने के लिए नैनागिरि तीर्थ पर प्रशस्ति शिलालेख स्&#x200d;थापित किया गया। घनघोर वरदत्&#x200d;त वन में स्थित सिद्ध शिला पर बैठे श्री विरागसागर जी ,श्री विशुद्धसागर जी, श्री आदित्&#x200d;यसागर जी, श्री विरंजनसागर जी प्रभृति अनेक संघस्&#x200d;थ साधुओं के दिगंबरत्&#x200d;व की असाधारण साधना के विविध आयाम खिल उठे।</p>
<p>यद्यपि आषाढ़ की रिमझिम फुहारों में भी विराग के वियोग के आंसुओं को विराम देना और मन &#8211; मस्तिष्&#x200d;क को संतुलित करना कठिन हो रहा है तदपि थोड़ा सा आत्मिक साहस जुटाकर बुन्&#x200d;देखण्&#x200d;ड की शताधिक प्रभावशाली आध्&#x200d;यात्मिक शक्तियों के जनक, सिद्ध पथ के महापथिक, समग्र जैन समाज के विराट सामाजिक सेतु के महान शिल्&#x200d;पी तथा आज के व्&#x200d;यावहारिक जगत में समतापूर्वक महासमाधि के सर्वोत्&#x200d;कृष्&#x200d;ट उदाहरण के महान प्रस्&#x200d;तोता श्री विरागसागर जी को हम सब शत &#8211; शत प्रणाम करते है। आध्&#x200d;यात्मिक और सामाजिक समरसता के महासागर को पुनः पुनः नमोस्&#x200d;तु करते है। इस महामुनि के चरणों में चार शताब्दियों में एक बार खिलने वाले महामेरु मंगल पुष्&#x200d;प समर्पित करते है।</p>
<p>अनुपम और असाधारण संयम के धारक गुरुदेव ने अपने संघस्&#x200d;थ श्री विशुद्धसागर प्रभृति नौ साधु रत्&#x200d;नों का सर्वोत्&#x200d;तम वैज्ञानिक पद्धति से गुणात्&#x200d;मक उत्&#x200d;थान करते हुए उनमें आचार्यो के मूलगुणों की सफलता पूर्वक संस्&#x200d;थापना की है और उन्&#x200d;हें अपने जीवन काल में ही आचार्यो के पद पर प्रतिष्ठित कर दिया है। पूरे संघ को वैज्ञानिक प्रबंधन के पटल पर सुस्&#x200d;थापित कर आध्&#x200d;यात्मिक एकता का सुदृढ़ शिलान्&#x200d;यास कर दिया है। हमें पूरा भरोसा है कि गुरुदेव के प्रथम श्रेष्&#x200d;ठतम रत्&#x200d;न श्री विशुद्धसागर जी के नेतृत्&#x200d;व में सभी आचार्य रत्&#x200d;न और सभी संत मिल &#8211; जुलकर सम्&#x200d;यकदर्शन, सम्&#x200d;यकज्ञान और सम्&#x200d;यकचारित्र की शताधिक त्रिवेणियों की शक्ति समेकित कर भगवान महावीर की प्राचीनतम आधारभूत आध्&#x200d;यात्मिक परंपराओं को हिमालयीन ऊँचाई प्रदान करते रहेंगे।</p>
<p>यह उल्&#x200d;लेख करना अत्&#x200d;यावश्&#x200d;यक प्रतीत होता है कि श्री विरागसागर जी के सभी शिष्&#x200d;य आध्&#x200d;यात्मिक पदों के राग से परे है। आध्&#x200d;यात्मिक अहंकार से बहुत दूर हैं। अभी तक उनके संघ में किसी भी पद के लिए विसंवाद का उदाहरण समाज को देखने में नहीं आया है। हमें यह दृढ़ विश्&#x200d;वास है कि यह संघ आध्&#x200d;यात्मिक विखण्&#x200d;डन की दुष्&#x200d;प्रवृत्तियों को कभी भी प्रश्रय नहीं देगा और भौतिकता से ओतप्रोत इक्&#x200d;कीसवीं सदी में भी महावीर की आदर्श चर्या के सफलतम उदाहरण विश्&#x200d;व के समक्ष प्रस्&#x200d;तुत करेगा।</p>
<p>ममता और वात्&#x200d;सल्&#x200d;य से ओतप्रोत राष्&#x200d;ट्र संत विरागसागर जी को उनके महाप्रयाण पर मध्&#x200d;यप्रदेश के मुख्&#x200d;यमंत्री डॉ मोहन यादव, नई दिल्&#x200d;ली के सांसद श्री मनोज तिवारी प्रभृति अनेक राजनेताओं, पूरे देश के संतो और वरिष्&#x200d;ठतम विद्वानों ने अपनी विनयांजली प्रस्&#x200d;तुत की।</p>
<p>नैनागिरि में बीसवीं शताब्दि के 87 वें वर्ष में आध्&#x200d;यात्मिक जन्&#x200d;म लेकर अभूतपूर्व शैक्षणिक क्रांति के जनक बने मुनिवर सुधासागर जी ने अपने प्रवचन में गुरुदेव को अपरिमित पुण्&#x200d;य के स्&#x200d;वामी और प्रभावशाली प्रभावक आचार्य घोषित किया है। अपने संघ को अपने संगठन कौशल से व्&#x200d;यवस्थित स्&#x200d;वरूप प्रदान करने के लिए उनकी सराहना की है। उन्&#x200d;हें संबोधित करते हुए पूरा धैर्य रखने की सलाह दी है। प्रभावना योग के प्रभावी प्रस्&#x200d;तोता मुनिवर प्रमाणसागर जी ने कहा कि विरागसागर जी के महाप्रयाण से श्रमण संस्&#x200d;कृति की बड़ी क्षति हुई है। उन्&#x200d;होंने इतने बड़े संघ को अपना सक्षम और कुशलतम नायकत्&#x200d;व प्रदान करते हुए श्रमण संस्&#x200d;कृति को असाधारण विस्&#x200d;तार दिया है। इन दोनों राष्&#x200d;ट्रीय संतों ने अपने शब्&#x200d;द सुमनों से आध्&#x200d;यात्मिक और सामाजिक समन्&#x200d;वय की सराहनीय सद्प्रवृत्तियों को ऊर्जा प्रदान की है। यह सुखद और प्रसन्&#x200d;न्&#x200d;तादायक है कि उनकी इस स्&#x200d;मराणां&#x200d;जलियों ने आध्&#x200d;यात्मिकता और जैन धर्म की अनेकांतात्&#x200d;मक &#8211; एकता के समुन्&#x200d;नत मापदण्&#x200d;ड स्&#x200d;थापित किए है। इससे सभी संघों के बीच पारस्&#x200d;परिक सौहार्द और सम्&#x200d;मान की वृद्धि हो रही है। महावीर का एकीकृत मंगलपथ प्रशस्&#x200d;त हो रहा है।</p>
<p>शुद्ध &#8211; स्&#x200d;वस्&#x200d;थ मस्तिष्&#x200d;क तथा संपूर्ण विवेक के साथ पूर्णतः जाग्रत तथा चैतन्&#x200d;य स्थिति में श्री विरागसागर जी ने जैन आगम के अनुकूल अपनी समाधि साधना के अंतिम प्रवचन दिनांक 3 जुलाई 2024 में श्रमणाचार्य श्री विशुद्धसागर जी को पट्टाचार्य बनाने की स्&#x200d;पष्&#x200d;ट घोषणा कर दी। उनके संघ से वर्षो पूर्व अलग हुए आचार्य श्री वसुनंदी जी से क्षमायाचना करते हुए उनके प्रति अपना प्रति नमोस्&#x200d;तु निवेदित किया। यह मार्मिक प्रकरण पूरे विश्&#x200d;व के समक्ष उनकी हिमालयीन आध्&#x200d;यात्मिक ऊँचाई और समता की पूरी गहराई को प्रदर्शित करता है। पवित्रता और पावनता से ओतप्रोत श्रेष्&#x200d;ठतम आत्&#x200d;मा का यह प्रभावी , बिरला , असाधारण और अनूठा प्रवचन भारतीय सांस्&#x200d;कृतिक जगत के इतिहास में सदैव स्&#x200d;वर्णाक्षरों में अंकित किया जावेगा। सर्वोत्&#x200d;तम समाधि का प्रकाश स्&#x200d;तंभ बनेगा। इस प्रवचन के कुछ ही घण्&#x200d;टों बाद गुरुदेव ने अपना शरीर त्&#x200d;याग कर भौतिकता की इस सदी में भी महासमाधि का अनुपम उदाहरण प्रस्&#x200d;तुत कर दिया। बुन्&#x200d;देलखण्&#x200d;ड की वीर प्रसूता माटी में जन्&#x200d;मीं उनकी देह कुबेर प्रसूता महाराष्&#x200d;ट्र की माटी में मिल गई। अपने पद का त्&#x200d;याग करते हुए और सभी से क्षमायाचना करते हुए वे चिरनिद्रा में विलीन हो गए। हमे ऐसा प्रतीत होता है कि उन्&#x200d;हें अपनी मृत्&#x200d;यु का सही &#8211; सही पूर्वाभास हो गया था।</p>
<p>4 जुलाई की रात्रि में 8 बजे डॉ. श्रेयांस जी बड़ौत और ब्र. भैया प्रतिष्&#x200d;ठाचार्य जय निशांत जी के द्वारा पं. राजकुमार जैन शास्&#x200d;त्री के सक्षम एवं कुशल संचालकत्&#x200d;व में आयोजित विनयांजलि समर्पण सभा की गई। हमें और विमला जी को श्रद्धासुमन भेंट करने का अवसर देने के लिए हम उन्&#x200d;हें अनंत साधुवाद प्रदान करते हैं और गणाचार्य गुरुदेव, पट्टाचार्य श्री विशुद्धसागर जी और उनके संघस्&#x200d;थ सभी संतों के चरणों में पुनः पुनः शत &#8211; शत वंदन करते हैं।</p>
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		<title>कार्यशाला में 40 शाखायें हुईं शामिल : बड़े बाबा मंदिर प्रांगण में किया वृक्षारोपण </title>
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		<pubDate>Tue, 09 Jul 2024 10:15:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन मिलन क्षेत्र क्र.10 की प्रथम कार्यकारिणी की बैठक राष्ट्रीय मंत्री अतिवीर एड. कमलेंद्र जैन के मुख्यअतिथित्व एवं क्षेत्रीय अध्यक्ष अतिवीर अरुण चंदेरिया की अध्यक्षता में बड़े बाबा जैन मिलन पटेरा के तत्वावधान में श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर जिला दमोह में संपन्न हुई। बड़े बाबा मंदिर परिषद में वृक्षारोपण सभी आई हुई शाखों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन मिलन क्षेत्र क्र.10 की प्रथम कार्यकारिणी की बैठक राष्ट्रीय मंत्री अतिवीर एड. कमलेंद्र जैन के मुख्यअतिथित्व एवं क्षेत्रीय अध्यक्ष अतिवीर अरुण चंदेरिया की अध्यक्षता में बड़े बाबा जैन मिलन पटेरा के तत्वावधान में श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर जिला दमोह में संपन्न हुई। बड़े बाबा मंदिर परिषद में वृक्षारोपण सभी आई हुई शाखों द्वारा किया गया, जिसमें 100 नीम के वृक्ष लगाये गये। क्षेत्रीय अध्यक्ष की अनुमति से समाधिस्थ गणाचार्य परम् पूज्य आचार्य विराग सागर जी महाराज को श्रद्धांजलि दी गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनीष सागर विद्यार्थी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong> कुंडलपुर।</strong> जैन मिलन क्षेत्र क्र.10 की प्रथम कार्यकारिणी की बैठक राष्ट्रीय मंत्री अतिवीर एड. कमलेंद्र जैन के मुख्यअतिथित्व एवं क्षेत्रीय अध्यक्ष अतिवीर अरुण चंदेरिया की अध्यक्षता में बड़े बाबा जैन मिलन पटेरा के तत्वावधान में श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर जिला दमोह में संपन्न हुई। कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अतिवीर नेमकुमार सराफ़, अति वीर इंजी. आर के जैन, वीर संजय जैन शक्कर, प्रमोद भाईजी, सुधीर जैन डवलू,दिलेश चौधरी, ललित सराफ, जिनेश बहरोल, मनीष जैन विधार्थी, वीरांगना अर्चना जैन, ममता जैन , कल्पना सेठ, संगीता चन्देरिया, मंन्जु सतभैया, आदि रहे। कार्यक्रम की शुरुआत महावीर वंदना बंसुधरा नगर एवं टंडन बगीचा की बहनों द्वारा किया गया एवं मंगलाचरण डॉ रवि जैन बांसा तारखेड़ा के साथ अनिल जैन पटेरा द्वारा किया गया, मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63189" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019.jpg" alt="" width="1600" height="720" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019-1536x691.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019-990x446.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0019-1320x594.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /> मंचासीन अतिथियों एवं सभी उपस्थित शाखों के सम्मान के साथ प्रथम सत्र के प्रारंभ में सर्वप्रथम स्वागत भाषण क्षेत्रीय अध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत कर सभी का अभिनंदन किया गया। जैन मिलन की क्षेत्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक का महत्व बतलाते हुए क्षेत्रीय अध्यक्ष ने कहा सत्र के प्रारंभ की यह बैठक पूरे साल भर क्षेत्र की गतिविधियों को तय करती है और ऊर्जा देती है पटेरा शाखा को शुभकामनाएं दी जिन्होंने यह बैठक आयोजित कराई,इसके बाद क्षेत्रीय मंत्री श्रीमती कविता जैन ने 3 माह का प्रतिवेदन पढ़कर सुनाया उन्होंने बताया की क्षेत्र क्रमांक 10 में 32 स्थानों पर स्थापना दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, वहीं 35 स्थानों पर अक्षय तृतिया का कार्यक्रम आयोजित किया गया।</p>
<p>38 स्थानों पर श्रुत पंचमी का आयोजन एवं 31स्थानो पर योग दिवस में शिविर का आयोजन किया गया है, इसके अलावा विभिन्न शाखाओं द्वारा पांच हजार से अधिक पौधे रौपड किये जा चुके हैं, तद् पश्चात सभी शाखाओं से प्रतिनिधि के रूप में आए मंत्रीयों ने तीन माह का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, साथ में आगे आयोजित करने वाले कार्यक्रमों पर भी प्रकाश डाला। पटेरा शाखा द्वारा स्थानीय प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान किया गया।</p>
<p>द्वितीय सत्र में भारतीय जैन मिलन द्वारा आयोजित कार्यशाला में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों एवं जैन मिलन के उद्देश्य और जैन मिलन क्षेत्र 10 द्वारा आयोजित कार्यक्रम युवा संसद के संबंध में सभी को जानकारी प्रदान की गई, उन्होंने बताया समाज के युवाओं में नेतृत्व करने एवं संगठित हो समाज के लिए आवाज उठाने का हौसला देने के लिए यह आयोजन किया जायेगा। जिसमें क्षेत्र क्रमांक 10 के प्रत्येक मंदिर जी से युवा सांसद का चुनाव किया जायेगा साथ ही राज्य सभा में मनोनयन किया जायेगा यह एक अद्वितीय कार्यक्रम होगा, साथ ही समाज में समरसता के साथ कार्य करने के विषय पर एड. अतिवीर कमलेंद्र जैन ने एवं शाखाओं को एक अच्छा आयोजन कैसे करना चाहिए इस विषय पर,वीर दिलेश जैन चौधरी ने एवं शाखा संचालन में अध्यक्ष मंत्री की भूमिका विषय पर वीरांगना श्रीमती कविता जैन ने अपने वक्तव्य के द्वारा सभी को प्रशिक्षित किया।</p>
<p>वर्तमान समय में जैन मिलन की समाज को क्यों आवश्यकता है एवं हम छोटे-छोटे आयोजनों के माध्यम से समाज का सहयोग कैसे कर सकते हैं, इस विषय पर भी वक्ताओं ने अपनी बात रखी। कार्यक्रमों को हमें किस प्रकार से आयोजित करना है, कार्यक्रम का समाज में क्या संदेश जाएगा, यह सारी बातें कार्यशाला के दौरान बताई गई। भारतीय जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक 10 द्वारा वार्षिक शुल्क जमा करने वाली सभी शाखाओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मान किया गया। भारतीय जैन मिलन स्थापना दिवस 2 मई पर आयोजित प्रतियोगिता भगवान महावीर स्वामी पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का ड्रा निकाल कर प्रथम, द्वितीय,तृतीय प्रतियोगियों का सम्मान किया गया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63190" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018.jpg" alt="" width="1280" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240709-WA0018-990x743.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />कार्यक्रम का संचालन वीर जिनेश जैन बहरोल एवं वीर नरेंद्र जैन बजाज पटेरा आभार क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री अरुण चंदेरिया जी ने माना। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि जुलाई माह में संभाग स्तरीय पोस्टर टप्रतियोगिता एवं अगस्त माह में निबंध लेखन प्रतियोगिता के साथ ही अन्य आयोजन भगवान महावीर स्वामी पच्चीस सौ पचास निर्वाण महोत्सव अंतर्गत किये जायेंगे। अंत में बड़े बाबा मंदिर परिषद में वृक्षारोपण सभी आई हुई शाखों द्वारा किया गया, जिसमें 100 नीम के वृक्ष लगाये गये। सभी उपस्थित सदस्यों की स्वीकृति उपरांत क्षेत्रीय अध्यक्ष की अनुमति से समाधिस्थ गणाचार्य परम् पूज्य आचार्य विराग सागर जी महाराज को श्रद्धांजलि करते हुए बैठक की समाप्ति की गई।</p>
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