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	<title>आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जहां सारे भेष विसर्जित हो जाते हैं वहां दिगंबर भेष जन्म लेता है : आचार्य श्री विमर्श सागर जी के सानिध्य में आचार्य श्री विरागसागर जी का मनाया 43 वां दीक्षा दिवस  </title>
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		<pubDate>Wed, 10 Dec 2025 09:46:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विराग सागर जी का 43 वां मुनि दीक्षा दिवस बुढ़ाना धर्मनगर में मनाया गया। आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ससंघ (35 पिच्छी) के सानिध्य में बुढ़ाना शहर के कृष्णा पैलेस में हुआ &#8216;विराग महोत्सव&#8217; मनाया गया। बुढ़ाना (उप्र) से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230; बुढ़ाना (उप्र)। आचार्य श्री विराग सागर जी का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विराग सागर जी का 43 वां मुनि दीक्षा दिवस बुढ़ाना धर्मनगर में मनाया गया। आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ससंघ (35 पिच्छी) के सानिध्य में बुढ़ाना शहर के कृष्णा पैलेस में हुआ &#8216;विराग महोत्सव&#8217; मनाया गया। <span style="color: #ff0000">बुढ़ाना (उप्र) से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बुढ़ाना (उप्र)।</strong> आचार्य श्री विराग सागर जी का 43 वां मुनि दीक्षा दिवस बुढ़ाना धर्मनगर में मनाया गया। आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ससंघ (35 पिच्छी) के सानिध्य में बुढ़ाना शहर के कृष्णा पैलेस में हुआ &#8216;विराग महोत्सव&#8217; मनाया गया। मंगलवार को संपूर्ण भारत वर्ष में आचार्य श्री विरागसागर जी महामुनिराज का 43 वां मुनि दीक्षा दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। आचार्य गुरुवर के 500-550 शिष्य प्रशिष्यों ने धर्म समाजों के मध्य गुरुवर का संयमोत्सव मनाया। बुढ़ाना धर्मनगर में आयोजित गुरुवर के 43 वें महामुनि दीक्षा दिवस पर भक्तों और शिष्यों की विनयांजलि के उपरांत आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने अपने गुरुवर आचार्य श्री विरामसागर जी के चरणों में भाव विनयांजलि समर्पित करते हुए कहा कि यह पावन पवित्र जिनमुद्रा मात्र इस धरती पर ही मान्य नहीं है अपित यह जिनमुद्रा संपूर्ण तीनों लोकों में वंदनीय,अर्थनीय, पूजनीय है। आज वह श्रेष्ठ दिवस है।</p>
<p><strong>9  दिसम्बर 1983 को मुनि मुद्रा को धारण किया</strong></p>
<p>जब इस युवा के महान संत आचार्य विरागसागर जी महामुनिराज ने 9  दिसम्बर 1983 को महाराष्ट्र प्रांत के औरंगाबाद धर्मनगरी में जिनेन्द्र भगवान द्वारा प्रतिपादित सर्वश्रेष्ठ मुनि मुद्रा को धारण किया था। हमारे आचार्य गुरुदेव अत्यंत सरल स्वभावी थे। वे जहां से गुजर जाते थे वहीं से अनेकों युवा साथी सांसारिक भोग-विलासों को ठुकराकर वैराग्य पथ को अंगीकार कर लिया करते थे।</p>
<p><strong>भक्ति युक्त भाव विनयांजलि समर्पित</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने प्रवचनों में कहा- बन्धुओं ! दिगम्बर भेष इस धरा पर अलौकिक हुआ करता है, जहां अन्य कोई वेशभूषा नहीं ओढ़ी जाती। अपितु जहां सारे भेष विसर्जित हो जाते हैं, वहां दिगम्बर भेष जन्म लेता है। आचार्य गुरुवर की साधना का माहात्म्य बताते हुए आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा कि साधक ने अपने पूरे जीवन काल में कैसी उत्कृष्ट साधना की है। यह उसका अंतिम समय बताता है। आचार्य श्री ने अपनी साधना का फल उत्कृष्ट समाधि के रूप में हमारे बीच प्रस्तुत किया। बंधुओं आचार्य गुरुवर जैसी सर्वश्रेष्ठ समाधि दूर-दूर तक भी नहीं देखी जाती है। आज के शुभ दिवस पर हम सभी गुरुवर के चरणों में भक्ति युक्त भाव विनयांजलि समर्पित करते हैं।</p>
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		<title>आचार्य श्री विरागसागर जी की चरणछत्री का शिलान्यास हुआ: आचार्यश्री विमर्शसागर जी के सान्निध्य में हुआ भव्यतम कार्यक्रम  </title>
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		<pubDate>Thu, 02 Oct 2025 16:16:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[युगों-युगों तक भव्यजीवों के दुख-संकटों को दूर करती रहेगी आचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज की चरण छत्री यह उद्बोधन आचार्यश्री विमर्शसागर जी ने दिए। आचार्य श्री विरागसागर जी की चरणछत्री का शिलान्यास हुआ। सहारनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230; सहारनपुर। नगर में आचार्य श्री विरागसागर जी महामुनिराज का समाधिस्थल चरणछत्री बनने जा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>युगों-युगों तक भव्यजीवों के दुख-संकटों को दूर करती रहेगी आचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज की चरण छत्री यह उद्बोधन आचार्यश्री विमर्शसागर जी ने दिए। आचार्य श्री विरागसागर जी की चरणछत्री का शिलान्यास हुआ। <span style="color: #ff0000">सहारनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सहारनपुर।</strong> नगर में आचार्य श्री विरागसागर जी महामुनिराज का समाधिस्थल चरणछत्री बनने जा रही है। यहां के जैन बाग वीरनगर में श्री 1008 महावीर जिनालय प्रांगण में आचार्य श्री के समाधि स्थल के रूप में चरण छत्री की स्थापना की जाएगी। विजयादशमी के शुभ दिवस प्रातः काल में आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज (ससंघ 30 पिच्छी) के सान्निध्य में आचार्य श्री की चरणछत्री का भव्य शिलान्यास समारोह किया गया। शिलान्यास करने का सौभाग्य पंचान समिति के उपाध्यक्ष एवं स्वागताध्यक्ष विपिन जैन (चाँदी वाले) सपरिवार को प्राप्त हुआ। जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन ने बताया कि गुरुवर की तीनों चरण छत्रियों का निर्माणकार्य शीघ्रातिशीघ्र प्रारंभ होकर पूर्णता को प्राप्त होगा। प्रातःकालीन शिलान्यास समारोह में उपस्थित श्रद्धालु भक्तों ने भी शिलायें रखकर अपने सौभाग्य को वर्धित किया। उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री विमर्शसागर जी मुनिराज जिस पवित्र स्थान से भव्य जीव सिद्धत्व को प्राप्त करते हैं। वह सिद्धभूमि &#8211; सिद्धक्षेत्र कहलाता है और जहाँ रत्नत्रय धारी निर्ग्रन्य मुनिराजों की समाधि संस्कार होता है। वह स्थान निषद्या स्थल कहलाता है। इस निषद्या-स्थल की शास्त्रों में आचार्य भगवंतों ने बड़ी महिमा बतायी है। आपके जीवन में आने वाले विघ्नों को नाश करने वाले यह निषद्यास्थल हुआ करते हैं। यह स्थान अत्यंत पूजनीय और पवित्र होते हैं। आचार्य श्री विरागसागर जी महामुनिराज की जीवन भर की सर्वाेत्कृष्ट साधना का फल सर्वाेत्कृष्ट समाधि के रूप में हम सबके सामने आया।</p>
<p>पुण्य तो सब जीव लेकर आते हैं कोई पुष्य का भोग करता है तो कोई पुण्य का साधना में उपयोग करता है, साधक के जीवन के अंत की समाधि यह बता देती है कि साधक ने पुण्य का भोग किया है या साधना में उपयोग किया है। आचार्य गुरुवर सर्वश्रेष्ठ साधक थे और गुरुवर ने सर्वाेत्तम समाधि साधकर आगामी श्रमण संस्कृति के लिए आदर्श प्रस्तुत कर दिया है जो युगों-युगों तक साधकों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। ऐसे युग के सर्वश्रेष्ठ आचार्य श्री विरागसागर जी महामुनिराज का यह समाधिस्थल चरणछत्री भव्य जीवों के आत्मकल्याण और दुःख -संकटों को दूर करने साधन बनती रहेगी।</p>
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		<title>आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज का पट्टाचार्य महोत्सव 27 अप्रैल से: 450 पिच्छी की उपस्थिति में होगा यह महोत्सव </title>
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		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 06:20:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर के इतिहास में पहली बार विशाल पट्टाचार्य महोत्सव होने जा रहा है। 27 अप्रैल से आरंभ होकर यह पांच दिवसीय कार्यक्रम 2 मई को पूर्ण होगा। इसमें देशभर के करीब 450 साधु-संत, साध्वियां और करीब 15 लाख श्रद्धालुुगण शामिल होंगे। इसके लिए तैयारियां की जा रही है। व्यवस्थाएं जुटाई जा रही हैं। इंदौर से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इंदौर के इतिहास में पहली बार विशाल पट्टाचार्य महोत्सव होने जा रहा है। 27 अप्रैल से आरंभ होकर यह पांच दिवसीय कार्यक्रम 2 मई को पूर्ण होगा। इसमें देशभर के करीब 450 साधु-संत, साध्वियां और करीब 15 लाख श्रद्धालुुगण शामिल होंगे। इसके लिए तैयारियां की जा रही है। व्यवस्थाएं जुटाई जा रही हैं। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए टीके वेद की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्यश्री आदिसागर जी महाराज की परंपरा में आचार्य श्री महावीर कीर्ति जी महाराज, आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज, आचार्य श्री सन्मतिसागर जी महाराज एवं आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज हुए। 3 जून 2024 को जालना महाराष्ट्र में पूर्ण चैतन्य अवस्था में आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज ने अपने शिष्य आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के लिए यह कहा कि हम चाहते हैं कि विशुद्धसागर जी महाराज का अपनी निःस्वार्थ भावना से, साधुओं में बिना राग द्वेष, प्रेम, वात्सल्य के साथ सभी का यथोचित ध्यान रखें। चर्या सभी श्रेष्ठ हों। बिना किसी जल्दबाजी के यह कार्यक्रम लगभग एक वर्ष बाद किया जा रहा है। इंदौर एवं जैन समाज में वात्सल्य और सेवा का कीर्तिमान बनाने वाले श्रेष्ठ श्रावक दंपत्ति ने स्व प्रेरणा से यह कार्यक्रम करने की भावना व्यक्त की। जिसे आचार्यश्री ने सहज स्वीकार कर यह दायित्व मनीष सपना गोधा गांधीनगर इंदौर को सौंपा। तभी से इस महोत्सव की तैयारियां की जा रही है तथा मनीष सपना गोधा दंपत्ति ने पूरे भारत वर्ष के सभी प्रमुख आचार्यों, श्रमणों को लगभग दो माह भ्रमण कर व्यक्तिगत निवेदन किया। इसमें देश भर के सभी संघों को बिना किसी भेदभाव के आमंत्रित किया गया। इसकी जो आमंत्रण पत्रिका बनी वह भी अविस्मरणीय और संग्रहणीय हो गई है। यह तय है कि समूचे भारत के इतिहास में इतने श्रमण और साध्वियां इसके पूर्व कभी एकत्रित नहीं हुए। लगभग 450 पिच्छी की उपस्थिति संभावित है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-78625" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0008.jpg" alt="" width="503" height="634" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0008.jpg 503w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0008-238x300.jpg 238w" sizes="(max-width: 503px) 100vw, 503px" />विशाल पांडाल में 25 हजार एक साथ बैठ सकेंगे</strong></p>
<p>इस कार्यक्रम के लिए जो मुख्य पांडाल बना है। उसे देशना मंडपम नाम दिया गया है। यह पूर्णतः वातानुकूलित होगा। इसमें एक साथ 25 हजार व्यक्तियों की बैठने की व्यवस्था रहेगी। श्रावकों के लिए 4 वातानुकूलित भोजनशाला होंगी। इसमें वीआइपी, सामान्य श्रावक, त्यागी वृत्ति, सोले के भोजन की अलग-अलग व्यवस्था रहेगी। श्रमणों और साध्वियों के लिए लगभग 400 चौकों की व्यवस्था की गई है। इच्छुक श्रावकों को ये चौके दिए गए है। अशुद्धि में जो माताजी रहेंगी, उनके लिए प्रथक व्यवस्था की गई हैं।</p>
<p><strong>सभी की ठहरने की अलग-अलग रहेगी व्यवस्था </strong></p>
<p>लगभग 40 एकड़ का विशाल पार्किंग होगा और 200 एकड़ भूमि में यह पूर्ण कार्यक्रम होगा। महोत्सव स्थल पर देश भी सभी प्रमुख सामाजिक संस्थाओं के वरिष्ठों को आमंत्रित किया गया है तथा उनके लिए पूर्ण व्यवस्थाएं की गई हैं। आचार्यो को सौभाग्य सदन में, मुनिसंघ आचार्य विमलसागर भवन में, आर्यिका माताजी आचार्य विराग सागर भवन में ठहरेंगे। इसके अलावा आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज एवं आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के प्रकाशित ग्रंथों की भव्य प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है। साथ ही बाल संस्कार शिविर, प्लेजोन, इमर्सिव जोन, समवशरण की रचना आदि भी रहेगी। प्रोजेक्शन मेपिंग के माध्यम से जैन आगम की सुंदर कहानियां, आदिनाथ गाथा, महावीर गाथा, सम्राट खारवेल गाथा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, आधुनिक लेजर शो, ड्रोन शो भी दिखाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय व्यक्ति प्राप्त स्वस्ति मेहुल जैन की भजन संध्या भी रखी गई है। इन कलाकारो की ख्याति इसलिए भी है कि देश के विश्वस्तरीय कार्यक्रम में यह अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं।</p>
<p><strong>कार्यक्रम इस प्रकार रहेंगे</strong></p>
<p>27 अप्रैल को सुबह 6 बजे महावीर बाग से सुमतिधाम मंगल प्रवेश, सुबह 9 बजे प्रवचन देशना मंडपम में, आहारचर्या, सुबह 10.30 बजे, स्वाध्याय दोपहर 2.30बजे वात्सल्य मंडपम में, आचार्य भक्ति शाम 6 बजे आरती मंडपम में, आरती शाम 7.30 बजे आरती मंडपम में, प्रेजेक्शन मेपिंग 8 बजे आरती मंडपम में, लेजर शो, 8.30 बजे, सांस्कृतिक कार्यक्रम 9 बजे देशना मंडपम में होंगे। प्रोजेक्शन मेपिंग रात 11 बजे आरती मंडपम में होंगे। यह कार्यक्रम प्रतिदिन होंगे। इसके अलावा विशेष कार्यक्रमों में 27 अप्रैल को पत्रकार सम्मेलन, 28 अप्रैल को पूत्य गणाचार्य जी का पूजन, 29 अप्रैल को पूज्य आचार्यों को शास्त्र, सिंहासन और कमंडल भेंट, 30 अप्रैल को पट्टाचार्य महोत्सव, 1 मई को राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा 2 मई को पूज्य गणाचार्य का जन्म जयंती समारोह किया जाएगा। इसके अलावा प्रतिदिन दोपहर में एक-एक सामाजिक संस्थाओं का गुरुदेव के सामने चर्चा, प्रतिनिधियों की सभा होगी। प्रवेश रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही होगा। अभी तक लगभग 80 हजार लोग पंजीयन करवा चुके हैं। पांच दिवसीय कार्यक्रम में लगभग 15 लाख लोग शामिल होंगे।</p>
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		<title>84 लाख मंत्रों का महामंत्र &#039;णमोकार महामंत्र : आचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने बताई महामंत्र की महत्ता </title>
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		<pubDate>Sun, 23 Mar 2025 16:09:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने पंचकल्याणक में अपने प्रवचन में कहा कि 9 अप्रैल को महामंत्र णमोकार का पाठ पूरे विश्व में गूंजेगा। आचार्य श्री ने णमोकार मंत्र की महत्ता बताई। जलाना से पढ़िए अभिषेक पाटिल की यह खबर&#8230; जालना। आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज अपने गुरु आचार्य श्री विरागसागर जी की समाधि स्थली जालना पहुंचे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने पंचकल्याणक में अपने प्रवचन में कहा कि 9 अप्रैल को महामंत्र णमोकार का पाठ पूरे विश्व में गूंजेगा। आचार्य श्री ने णमोकार मंत्र की महत्ता बताई। <span style="color: #ff0000">जलाना से पढ़िए अभिषेक पाटिल की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जालना।</strong> आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज अपने गुरु आचार्य श्री विरागसागर जी की समाधि स्थली जालना पहुंचे तो भावुक हो गए। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने पंचकल्याणक में अपने प्रवचन में कहा कि 9 अप्रैल को महामंत्र णमोकार का पाठ पूरे विश्व में गूंजेगा।</p>
<p>जालना धर्मसभा में आचार्य भगवन श्री विशुद्ध सागर जी ने कहा कि 84 लाख मंत्रों का महामंत्र &#8216;णमोकार महामंत्र&#8217; है। णमोकार महामंत्र से 84 लाख मंत्रों की उत्पत्ति हुई है। देवों में महान देव अरहंत देव होते हैं। ज्ञान में महान केवलज्ञान है। गुरु में महान गुरु निर्ग्रन्थ गुरु हैं। शास्त्रों में महानशास्त्र सिद्धांत शास्त्र है। उसी प्रकार मंत्रों में महान मंत्र णमोकार मंत्र है।</p>
<p>णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आइरियाणं। णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्वसाहूणं।।</p>
<p>णमोकार मंत्र प्राकृत भाषा का मंत्र है। प्राकृत में इसे णमोकार मंत्र कहते हैं। संस्कृत में इसे नमस्कार मंत्र कहते हैं। हिन्दी में इसी का अपभ्रंश नाम नवकार मंत्र है। इस मंत्र के अनेक नाम हैं। इनमें प्रमुख हैं-पंच नमस्कार मंत्र, महामंत्र, अपराजित मंत्र, मूलमंत्र, मंत्रराज, अनादिनिधन मंत्र, मंगल मंत्र आदि।</p>
<p><strong>इनका संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है</strong></p>
<p>(1) पंच नमस्कार मंत्र:-</p>
<p>जो परम पद (मोक्ष) प्राप्त कर चुके हैं अथवा उस मार्ग पर अग्रसर हैं, ऐसे पांच परमेष्ठियों को इस मंत्र में नमस्कार किया गया है, अत: इसे पंच नमस्कार मंत्र कहते हैं।</p>
<p>(2) महामंत्र अपराजित मंत्र:-</p>
<p>तीनों लोकों में इस मंत्र के समान कोई मंत्र नहीं है। आचार्य उमास्वामी ने णमोकार मंत्र स्तोत्र में कहा है कि तराजू के एक पलड़े में णमोकार मंत्र और दूसरे में तीन लोक रख दें तो णमोकार मंत्र वाला पलड़ा ही भारी रहेगा। अत: इसे महामंत्र अथवा अपराजित मंत्र भी कहते हैं।</p>
<p>(3) मूलमंत्र-मंत्रराज:-</p>
<p>यह मंत्र संसार के सभी मंत्रों का जनक (मूल) है। इससे 84 लाख मंत्रों की उत्पत्ति हुई है। अत: इसे मूल मंत्र अथवा मंत्रराज भी कहते हैं।</p>
<p>(4) अनादि निधन मंत्र:-</p>
<p>पांचों परमेष्ठी अनंत काल से होते आ रहे हैं और भविष्य में भी अनन्त काल तक होते रहेंगे। इस प्रकार इनका आदि भी नहीं है और अंत भी नहीं है। इस मंत्र को किसी ने बनाया नहीं है और न यह कभी नष्ट होगा। अतः यह अनादि-निधन मंत्र कहलाता है। वर्तमान काल की अपेक्षा से आचार्य भूतबलि और पुष्पदन्त ने इस मंत्र को जैनधर्म के महान् ग्रन्थ ‘षट्खण्डागम’ में सर्व प्रथम प्राकृत भाषा में लिपिबद्ध किया।</p>
<p>(5) मंगल मंत्र:-</p>
<p>यह मंत्र पापों का नाश करने वाला व मंगल करने वाला है।</p>
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		<title>बड़े बाबा के रंग में रंगने पहुंचे श्रद्धालु: आचार्य श्री विद्यासागर जी की अनुपम कृति है कुंडलपुर </title>
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		<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 09:16:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में होली-धुलेंडी पर्व पर देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु और भक्तों ने बड़े बाबा का अभिषेक, पूजन, दर्शन वंदना कर धर्मलाभ लिया। आचार्य श्री विहर्ष सागर जी ने मंगल प्रवचन दिए। उन्होंने आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज सहित अन्य जैन संतों का भी स्मरण किया। कुंडलपुर से पढ़िए राजीव सिंघई / जयकुमार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में होली-धुलेंडी पर्व पर देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु और भक्तों ने बड़े बाबा का अभिषेक, पूजन, दर्शन वंदना कर धर्मलाभ लिया। आचार्य श्री विहर्ष सागर जी ने मंगल प्रवचन दिए। उन्होंने आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज सहित अन्य जैन संतों का भी स्मरण किया। <span style="color: #ff0000">कुंडलपुर से पढ़िए राजीव सिंघई / जयकुमार जलज की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर (दमोह)।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में होली-धुलेंडी पर्व पर देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु और भक्तों ने बड़े बाबा का अभिषेक, पूजन, दर्शन वंदना कर धर्म लाभ लिया। इस अवसर पर आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विहर्ष सागर जी ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि अभी मैं ऊपर से बड़े बाबा मंदिर के दर्शन कर रहा था। नजारा देख रहा था लोग तो अंदर से, बाहर से दर्शन करते हैं। मैं ऊपर से देख रहा था। यदि कोई अनुपम कार्य कर सकता था तो वह है आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज थे, जिन्होंने कुंडलपुर के जंगल में मंगल कर दिया। ऐसे संत जिनका नाम विद्यासागर महाराज है। जिनकी अनुपम कृति का नाम है कुंडलपुर। जिसकी छवि लोगों की आंखों में बसी हुई है।</p>
<p><strong>जैन संत धर्म की सुगंध बिखेर रहे हैं</strong></p>
<p>आज होली का दिन है। लोग बोलते है ‘बुरा ना मानो होली है’। आज बड़े बाबा के श्री चरणों में सामने हम आप सब नतमस्तक हैं। अभिषेक पूजन कर रहे हैं। इस पंचमकाल में 24 तीर्थंकर नहीं हैं। कुंदकुंद आदि आचार्य नहीं हैं, लेकिन आचार्य विद्यासागर जी, आचार्य विराग सागर जी, आचार्य समय सागर जी, आचार्य विशुद्ध सागर जी, मुनि सुधासागर जी, प्रमाण सागर जी जैसे संत धर्म की सुगंध बिखेर रहे हैं। हम बड़े बाबा और छोटे बाबा दोनों का अभिषेक कर रहे हैं। जब मस्तक पर कलश लेकर अभिषेक करने जाओ तो सोचना यह बड़े बाबा का अभिषेक है। जब चरणों पर अभिषेक करो तो सोचना यह छोटे बाबा का अभिषेक है।</p>
<p><strong>बड़े बाबा के चरणों का किया अभिषेक</strong></p>
<p>संत शिरोमणि हमें छोड़ कर चले गए। दूसरे बड़े संघ के नायक आचार्य विरागसागर भी छोड़ कर चले गए। आचार्य श्री जहां भी हो हम सभी को उनकी चरण छाया मिलती रहे हम भी उनके पद चिन्हों पर आगे बढ़ते रहें। हम लोग तीन साधु 2 वर्ष पहले होली पर ही बड़े बाबा के चरणों में आशीर्वाद लेकर सम्मेद शिखर की यात्रा पर गए थे और 2 वर्ष बाद अब जब होली पर ही लौटकर आए तो 16 साधु आए यह बड़े बाबा का ही चमत्कार हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोगों ने बड़े बाबा के चरणों का अभिषेक किया।</p>
<p><strong>इन समाजजनों को मिला अभिषेक का सौभाग्य </strong></p>
<p>प्रथम अभिषेक ,शांतिधारा, रिद्धि कलश करने का सौभाग्य विपिन अमरचंद गाला अश्विन शाह मुंबई, हितेश संजीव कासलीवाल जयपुर, प्रमोद वैभव जैन दिल्ली, विपिन अभिषेक दिल्ली, चंद्र प्रकाश अनुज इटावा, अंकुर आकाश खेकड़ा, अनुज अभिनंदन अहमदाबाद, निखिल शुभम बिजोलिया, किशोर शुभम रायपुर, अभय विवेक ललितपुर, सतीशचंद्र अमित दिल्ली, पारस महेंद्र जयपुर, सुचित सचिन अशोकनगर, निर्मल अरुण आगरा आदि ने प्राप्त किया। इस अवसर पर कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी सदस्यों की उपस्थिति रही।</p>
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		<title>आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का 62वां अवतरण दिवस मनाया 2 मई को अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ किया कार्यक्रम का शुभारंभ </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/62nd_incarnation_day_of_acharya_shri_viragsagar_ji_maharaj_celebrated_on_2nd_may/</link>
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		<pubDate>Fri, 03 May 2024 03:09:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मेडिटेशन गुरू उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसम्यसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का 62 वाँ अवतरण दिवस समारोह 2 मई को सकल जैन समाज के तत्वावधान में आगरा के कमला नगर स्थित शालीमार एनक्लेव के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर में बड़े ही हर्ष -उल्लास [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मेडिटेशन गुरू उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसम्यसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का 62 वाँ अवतरण दिवस समारोह 2 मई को सकल जैन समाज के तत्वावधान में आगरा के कमला नगर स्थित शालीमार एनक्लेव के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर में बड़े ही हर्ष -उल्लास के साथ मनाया गया।<span style="color: #ff0000">पढि़ए शुभम जैन की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा ।</strong> मेडिटेशन गुरू उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसम्यसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का 62 वाँ अवतरण दिवस समारोह 2 मई को सकल जैन समाज के तत्वावधान में आगरा के कमला नगर स्थित शालीमार एनक्लेव के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर में बड़े ही हर्ष -उल्लास के साथ मनाया गया| भक्तों ने कार्यक्रम का शुभारंभ अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ किया| साथ ही भक्तों ने आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलित किया| इसके बाद भक्तों ने अष्ट द्रव की थाल सजाकर आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के चित्र को साक्षी मानकर गुरु पूजन किया|</p>
<p>कार्यक्रम के मध्य में उपाध्याय श्री विहसन्त सागर जी महाराज धर्मसभा को संबोधित करते हुए गुरु-शिष्य के बारे में भक्तों को समझाया| इस दौरान ग्रेटर कमला नगर सकल जैन समाज ने उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज का पाद पक्षालन एवं शास्त्र भेंटकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong> 62 दीपकों से की मंगल आरती</strong></p>
<p>कार्यक्रम के समापन पर भक्तों ने आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के चित्र को साक्षी मानकर 62 दीपकों से मंगल आरती की गई| साय 7:00 बजे से उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज की ससंघ की गुरुभक्ति आयोजित की गई |उपाध्याय श्री विहसन्त सागर जी महाराज ससंघ का शालीमार एनक्लेव जैन मंदिर से मंगल विहार 4 मई को प्रातः7:00 बजे कर्मयोगी जैन मंदिर कमलानगर, के लिए होगा| इस अवसर पर जगदीश प्रसाद जैन,एसबी जैन,राजू गोधा,संजू गोधा,राजकुमार गुड्डू,अजय जैन, संजय जैन,शैलेंद्र जैन रपरिया,प्रमोद जैन,अनुज जैन, शुभम जैन,विनीता जैन,पुष्पा बैनाड़ा, शालीमार एनक्लेव जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे|</p>
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