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	<title>आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>माजी विद्यार्थियों का समंतभद्र विद्या मंदिर वेरुल एलोरा में हुआ सम्मान : 700 से अधिक माजी विद्यार्थियों ने एलोरा में एकत्र होकर इस स्वर्णिम क्षण का एहसास किया। </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 08:26:35 +0000</pubDate>
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<p><strong>श्री गुरुदेव समंतभद्र विद्या मंदिर वेरुल (एलोरा) की पहचान लेनी एवं भगवान भोलेनाथ का मंदिर 12वें ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर समूचे विश्व में हुई हैं। श्री महावीर ब्रह्मचर्य आश्रय गुरुकुल के माजी विद्यार्थियों का एक दिवसीय स्नेह सम्मेलन पूरे उत्साह के साथ हुआ। इस कार्यक्रम को आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का अशीष मिला था तो आचार्यश्री समयसागरजी ने भी आशीर्वाद प्रदान किया था। <span style="color: #ff0000">एलोरा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>एलोरा</strong>। श्री गुरुदेव समंतभद्र विद्या मंदिर वेरुल (एलोरा) की पहचान लेनी एवं भगवान भोलेनाथ का मंदिर 12वें ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर समूचे विश्व में हुई हैं। श्री महावीर ब्रह्मचर्य आश्रय गुरुकुल के माजी विद्यार्थियों का एक दिवसीय स्नेह सम्मेलन पूरे उत्साह के साथ हुआ। इस कार्यक्रम को आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का अशीष मिला था तो आचार्यश्री समयसागरजी ने भी आशीर्वाद प्रदान किया था। पूरे विश्व से अलग-अलग देश, राज्य प्रांत विभाग, ज़िला में स्थित सात सौ से अधिक माजी विद्यार्थियों ने एलोरा में एकत्र होकर इस स्वर्णिम क्षण का एहसास किया। इस कार्यकम को कई दिगंबर संतों ने आशीर्वाद प्रदान किया तो कार्यक्रम मुनिश्री नियमसागरजी, मुनिश्री सुपार्श्वसागरजी के सान्निध्य में मुख्य अतिथि विभागीय आयुक्त छत्रपति संभाजी नगर जितेंद्र पापड़कर, सतीशजी संघई अध्यक्ष म.ब्र.जैन गुरुकुल करंजा लाड, अध्यक्ष दिनेश गंगवाल, सचिव डॉ. प्रेमचंद पाटनी, स्कूल समिति अध्यक्ष वर्धमान पांडे, मुख्याध्यापक गुलाबचंद बोरालकर, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित गुरुकुल के माजी विद्यार्थी स्कूल के माजी मुख्य अध्यापक निर्मलकुमार ठोले सर के साथ ही वाशिम के पूर्व छात्र प्राचार्य प्रशांत गड़ेकर, प्रा. पंकज बांदे को मंच पर स्थान मिला। इस कार्यक्रम को यशस्वी करने के लिए स्कूल, गुरुकुल के सभी कर्मचारियों ने अथक परिश्रम किया। सन 1962 से लेकर अब तक के सभी माजी विद्यार्थियों का स्नेहसम्मेलन प्रेरणा का विषय बना।</p>
<p><strong>सम्मान पत्र देकर गुरुकुल की पुरानी यादों को समेटा गया</strong></p>
<p>अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गुरुकुल के एक बच्चे को दत्तक लेकर प्रशांत गडेकर ने संकल्पित दान पूर्ति के साथ ही गुरु आज्ञा का पालन किया। इस कार्यक्रम में गुरुकुल के छात्रों के लिये नूतन जैन मंदिर के प्रथम शीला को रखने का मान 1090 बैच के छात्रों को प्राप्त हुआ। स्कूल की ओर से भी उपस्थित माजी छात्रों को मान वंदना देकर विशेष सम्मान किया गया। आने वाले सभी हिमाचल माजी विद्यार्थियों को सम्मान पत्र देकर गुरुकुल, स्कूल की पुरानी यादों को समेटा गया। अब स्कूल को वर्ग में 1 अ दर्जा प्राप्त, आद्यावत डिजिटल स्कूल के साथ भव्य प्ले ग्राउंड के साथ ही नूतन जिन मंदिर के साथ ही सुसज्य स्टेज का निर्माण की अध्यक्ष दिनेश गंगवाल के कलात्मक सोच की प्रशंसा की। साथ ही अध्यक्ष, महामंत्री राम लक्ष्मण की जोड़ी के कारण गुरुकुल, स्कूल का विकास संभव हो पाया। इसकी भी चर्चा रही।</p>
<p><strong>सुनहरी यादों को समेटे एक समाज को प्रेरणा देने वाला आयोजन</strong></p>
<p>इस कार्यक्रम की धार्मिक विधि बाल ब्रह्मचारी मनीष भैया के माध्यम से पूर्ण की गई। अक्षय तृतीया के पावन दिनपर जैन धर्म में दान का अनन्य महत्व विविध माध्यम से दान कर गुरुकुल के सभी छात्रों ने धर्म प्रभावना की। श्याम के भोजन के पश्चात सैकड़ों माजी छात्र जिनकी उम्र लगभग 70/76के ऊपर थी, आंखे नम थी। भाव विभोर होकर अच्छी सुनहरी यादों को समेटे एक समाज को प्रेरणा देने वाला आयोजन स्कूल, गुरुकुल ने कर सबको नवीन ऊर्जा देने का कार्य किया। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त माझी मुख्याध्यापक के साथ ही गुरुकुल के माजी छात्र प्रशांत गड़ेकर तीन युग का मिलन हुआ। गुरु$शिष्य, मुख्य अध्यापक$विद्यार्थी और दोनों ही गुरुकुल माजी विद्यार्थी एक मंच पर शामिल हुए।</p>
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		<title>मुनि श्री निष्पक्ष सागरजी एवं मुनि श्री निस्पृह सागर जी का हुआ मंगल प्रवेश : जय जयकार करते हुए बैंड बाजों दिव्यघोष के साथ हुई अगवानी </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 16:18:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के दीक्षित एवं आचार्य श्रीसमयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज मुनि श्री निस्पृह सागरजी महाराज का शनिवार की बेला में नगर में मंगल आगमन हुआ।रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;  रामगंजमंडी। आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के दीक्षित एवं आचार्य श्रीसमयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के दीक्षित एवं आचार्य श्रीसमयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज मुनि श्री निस्पृह सागरजी महाराज का शनिवार की बेला में नगर में मंगल आगमन हुआ।<span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> रामगंजमंडी</strong>। आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के दीक्षित एवं आचार्य श्रीसमयसागर महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज मुनि श्री निस्पृह सागरजी महाराज का शनिवार की बेला में नगर में मंगल आगमन हुआ। पूज्य संघ अतिशय क्षेत्र कैथुली से मंगल विहार करते हुए नगर आगमन हुआ।</p>
<p>नगर की सीमा पर पहुंचे ही उन्हें जय जयकार करते हुए बैंड बाजों एवम दिव्यघोष के साथ उन्हें नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लाया गया। जगह- जगह मुनि संघ का पाद प्रक्षालन करते हुए मंगल आरती करते हुए उनकी अगवानी की गई। जैसे ही मुनि संघ ने शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवेश किया मंदिर के प्रवेश द्वार पर भव्य आगवानी करते हुए पाद प्रक्षालन एवम मंगल आरती की गई। उसके उपरांत मुनि द्वय ने मूलनायक शांतिनाथ भगवान के दर्शन करते हुए समस्त जिनालय के दर्शन किए इसके उपरांत धर्म सभा हुई धर्म सभा के शुभारंभ में मुनिद्वय के सानिध्य में आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज का पूजन किया गया। धर्मसभा का संचालन प्रशांत जैन शास्त्री एवं राजकुमार गंगवाल ने किया। सभी समाजबंधुओं ने मुनि द्वय के चरणों में आदिनाथ जयंती आपके सानिध्य में आयोजित हो इस हेतु निवेदन किया। मंगल प्रवचन से पूर्व आर्वी जैन ने नृत्य करते हुए मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। मंगल प्रवचन देते हुए मुनि श्री निस्पृह सागर जी महाराज ने कहा कि घोड़े पर अपने हाथ फेरो तो उसे अच्छा लगता है और इस प्रकार यदि मनुष्य की कोई प्रशंसा करता है तो उसे भी अच्छा लगता है आप सभी प्रशंसनीय है रामगंजमंडी का नाम सुन रखा था काफी समय से मुनि श्री ने श्रद्धा के विषय में बोलते हुए कहा कि श्रद्धा को यदि विवेक की आंख मिल जाए तो उससे रत्नत्रय की पूर्ति में विलंब नहीं होगा। ज्ञान का पर्याप्त होना ही काफी नहीं है विवेक भी होना चाहिए उपादान में भी शक्ति होना चाहिए मिट्टी में घड़े बनने की यदि योग्यता नहीं है तो कुछ नहीं है उसमें योग्यता होनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने एक लोकोक्ति के माध्यम से कहा मेहनत करना जिनकी आदत बन जाती है वहां पर जो फल उसे प्राप्त होता है वही उसका मुकद्दर बन जाती है।</p>
<p><strong>आत्मा की चिंता करो स्वयं की चिंता नहीं </strong></p>
<p>महाराज श्री ने जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने आचरण को छोड़ नहीं पाता यदि वह उसे छोड़ दे तो देखें कि उसका स्वरूप कैसा हो जाता है छोटी-छोटी खुशियों को कुर्बान कर दो फिर देखो बड़ी खुशियां अपने आप सुशोभित हो जाएगी। पंचेंद्रीय के विषयों का त्याग करो। जैसी संगत वैसी रंगत जैसी संगत में रहोगे वैसा ही प्रभाव दिखता है।</p>
<p>आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का जिक्र करते हुए कहा कि संयम का सुख प्राप्त करना है &#8220;डूबो मत डुबकी लगाओ&#8221; आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के विषय में कहा कि हमने उनमें डुबकी लगाई उन डुबकी की बूंदों ने हमें सराबोर किया आचार्य श्री के तप का प्रताप है कि गुरुवर यहां नहीं आए लेकिन उनकी खुशबू यहां तक आती है। आचार्य श्री का औरा इतना ज़बरदस्त था कि उन्होंने संपूर्ण भारत को प्रभावित किया अपने शिष्यों को सब जगह भेजा कहा सभी जीवो का कल्याण करो।</p>
<p>जो गुरु की आज्ञा का पालन करेगा वहीं लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा : मुनि श्री निष्पक्ष सागरजी महाराज</p>
<p>मुनि श्री निष्पक्ष सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि युग बदलते हैं सृष्टि में परिवर्तन आता है समय के प्रभाव से अपने अनुसार होती है। गुरु महिमा का बखान करते हुए कहा कि आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज की कृपा हम पर सदा बरसती रहती है उन्होंने कहा कि जो भी गुरु आज्ञा का पालन करेगा वहीं लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा। आपको आत्म राम बनने का प्रयास करना है जो राम के दास हैं वही राम के खास हैं रामगंज मंडी का मतलब बताते हुए उन्होंने कहा कि रामगंजमंडी का मतलब है राम के पास आने का पुरुषार्थ करो। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि दुनिया धन की दास है लेकिन धन किसी का दास नहीं है धन वैभव शक्ति पुण्य आत्मा की दास है। इस संसार में दुर्लभ एक जथारथ ज्ञान है। धन कन कंचन राज सुख सबही सुलभ कर जान दुर्लभ है संसार में एक जथारथ ज्ञान।</p>
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		<title>मुनिराजों का भानपुरा से हुआ मंगलविहार : रामगंजमंडी नगर में आगमन की संभावना से क्षेत्रवासी हर्षित  </title>
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		<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 07:02:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री निष्पक्ष सागर जी एवं मुनि श्री निस्पृह सागर जी महाराज का मंगल विहार गुरुवार को सुबह हुआ। महाराज श्री संघ का प्रातः बेला में मंगल विहार भानपुरा से हुआ और गुरुवार की आहार चर्या नीमथुर में होगी। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री निष्पक्ष सागर जी एवं मुनि श्री निस्पृह सागर जी महाराज का मंगल विहार गुरुवार को सुबह हुआ। महाराज श्री संघ का प्रातः बेला में मंगल विहार भानपुरा से हुआ और गुरुवार की आहार चर्या नीमथुर में होगी। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री निष्पक्ष सागर जी एवं मुनि श्री निस्पृह सागर जी महाराज का मंगल विहार गुरुवार को सुबह हुआ। महाराज श्री संघ का प्रातः बेला में मंगल विहार भानपुरा से हुआ और गुरुवार की आहार चर्या नीमथुर में होगी। शाम को अतिशय क्षेत्र कैथूली में मंगल आगमन होगा।</p>
<p>जिसको लेकर क्षेत्र कमेटी काफी उत्साहित है। अगवानी की तैयारी भव्यता के साथ की जा रही है। क्षेत्र आगमन से नगरवासियों में हर्ष की लहर है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि नगर में भी मंगल आगमन होगा। महाराज श्री संघ का वर्ष 2025 का वर्षायोग भवानीमंडी में हुआ था, जो स्वर्णिम रहा। चातुर्मास के बाद भानपुरा की धरा पर महत्ती धर्म प्रभावना हुई। ऐसा कार्य हुआ जो अविस्मरणीय बन गया।</p>
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		<title>आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रतिकृति हुई विराजमान: गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजी के चरण स्थापित </title>
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		<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 13:35:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर परिसर के गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजीके चरण स्थापित कर उनकी मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिष्ठा मुनि श्री संभवसागरजी, मुनि श्री निस्सीम सागरजी, मुनि श्री संस्कार सागरजी के सानिध्य में की गई। इसके बाद दोनों चरणों का प्रथम अभिषेक शुद्ध वस्त्रों के साथ किया गया। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर परिसर के गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजीके चरण स्थापित कर उनकी मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिष्ठा मुनि श्री संभवसागरजी, मुनि श्री निस्सीम सागरजी, मुनि श्री संस्कार सागरजी के सानिध्य में की गई। इसके बाद दोनों चरणों का प्रथम अभिषेक शुद्ध वस्त्रों के साथ किया गया। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर परिसर के गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजीके चरण स्थापित कर उनकी मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिष्ठा मुनि श्री संभवसागरजी, मुनि श्री निस्सीम सागरजी, मुनि श्री संस्कार सागरजी के सानिध्य में की गई। इसके बाद दोनों चरणों का प्रथम अभिषेक शुद्ध वस्त्रों के साथ किया गया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि इस बीच आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रतिकृति का आगमन जयजयकार के साथ हुआ तथा गुरु उपकार भवन में सिंहासन पर प्रतिकृति विराजमान की गई। इस अवसर पर मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने कहा कि नगर के प्रत्येक भक्त के हृदय में गुरुदेव विराजमान है और यहां पर जितने भी कार्यक्रम हुए हैं और चल रहे हैं। वह सभी अभूतपूर्व हुए तथा ऊंचाइयों को प्राप्त हो रहे हैं। यह सब गुरुदेव की वरदानी छांव का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने अपने सभी शिष्यों को ऐसी घुट्टी पिलाई है कि उसके पास आशीर्वाद की कोई कमी नहीं रहेगी। उन्होंने गुरुदेव के हायकू को सुनाते हुए कहा कि ‘गुरु अंक में पले बड़े हम, अंक भी वही देंगे’ अर्थात उनकी गोद में रहकर हमने जो शिक्षा प्राप्त की उसका परिणाम भी उनके ही द्वारा हम सभी मुनिराजों को प्राप्त हो रहा है।</p>
<p><strong>मुनि श्री संभवसागरजी ने सुनाए अपने संस्मरण </strong></p>
<p>मुनि श्री ने 17 फरवरी 2024 को स्मरण करते हुए कहा कि आज के दिन पूरे देश की नजर चंद्रगिरी डोंगरगढ़ की ओर थी। भारत ही नहीं विश्व का प्रत्येक भक्त जाप, भक्तामर, शांतिविधान या णमोकार महामंत्र का पाठ कर रहा था कि आज कोई चमत्कार घटित हो जाए और पूज्य गुरुदेव उठकर बैठ जाएं लेकिन, कोई चमत्कार घटित न हो सका। सभी की आंख गीली थी। सभी के मुख से एक ही उच्चारण था। ‘सबकुछ दिया है तुमने हमको हम कुछ भी न दे पाए’ हमारे और गुरुदेव के बीच अभी भी पचास किमी का फासला था। प्रातःकाल से हम लोग संध्या काल तक चालीस किमी चले और मात्र 10 किमी की दूरी शेष रह गई थी लेकिन, आप लोग सभी पुण्यशाली हो कि हमारे बाजू में बैठे मुनिराज निस्सीम सागर जी पिछले एक हफ्ता से गुरुजी के पास सेवा में दिनरात तत्पर थे।</p>
<p><strong>गुरुदेव की स्मृतियां उभर रही: मुनिश्री </strong></p>
<p>गुरुदेव की शेष स्मृति को आप लोग उनके ही मुख से कल सुनेंगे। मुनि श्री ने कहा कि विदिशा वालों को जो कुछ भी गुरुदेव ने दिया। वह ‘भूतो न भविष्यति’। गुरु के उपकार को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अरिहंत विहार का यह विशाल परिसर हो या शीतलधाम का विशाल समवशरण, गुरुदेव की स्मृतियां स्मृति पटल पर एक के बाद एक उभरकर सामने आ रही है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री समयसागरजी 23 मुनि दीक्षा देंगे</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया 18 फरवरी को शाम 6 बजे नगर से मुक्तागिरी सिद्धक्षेत्र के लिए 6 बस तथा कई चार पहिया वाहनों से भक्तगण रवाना होंगे। ‘मुक्तागिरी’ मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र की सीमा से लगा हुआ प्रकृति का अनुपम स्थान है। जहां से अनंतानंत मुनिराजों ने साधना की एवं मोक्ष को गए हैं। ऐसे स्थान पर पहली बार आचार्य श्री समयसागर महाराज 19 फरवरी को 23 जैनेश्वरी मुनि दीक्षा देंगे। जिसमें विदिशा नगर गौरव ऐलक कैवल्य सागर एवं ऐलक गरिष्ठ सागर महाराज, ऐलक गौरव सागर महाराज सहित अन्य मुनिसंघों के संघस्थ ऐलक एवं क्षुल्लक शामिल हैं तथा कई नए ब्रह्मचारी भी दीक्षित हो सकते हैं।</p>
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		<title>श्रेष्ठ एवं ज्येष्ठ आर्यिका माता जी ससंघ का मंगल मिलन हुआ : आर्यिका ससंघ की स्थानीय कमेटी और समाजजनों ने भव्य मंगल अगवानी की  </title>
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		<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 12:19:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अयोध्या में श्रेष्ठ गणनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी का ज्येष्ठ आर्यिका गुरुमति माताजी, दृणमति माताजी का भव्य मंगल मिलन हुआ। समाजजनों ने भव्य अगवानी कर वंदना की। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। अयोध्या में श्रेष्ठ गणनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी का ज्येष्ठ आर्यिका गुरुमति माताजी, दृणमति माताजी का भव्य मंगल मिलन हुआ। आचार्य श्री विद्यासागरजी की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अयोध्या में श्रेष्ठ गणनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी का ज्येष्ठ आर्यिका गुरुमति माताजी, दृणमति माताजी का भव्य मंगल मिलन हुआ। समाजजनों ने भव्य अगवानी कर वंदना की। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। अयोध्या में श्रेष्ठ गणनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी का ज्येष्ठ आर्यिका गुरुमति माताजी, दृणमति माताजी का भव्य मंगल मिलन हुआ। आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रथम शिष्या आर्यिका गुरुमतिमाताजी, आर्यिका दृणमतिमाताजी, आर्यिका गुणमतिमाताजी ससंघ सहित सभी 54 पिच्छीधारिओं का समूह तीर्थराज श्रीसम्मेदशिखर जी से चातुर्मास के बाद पंचतीर्थों की वंदना करते हुए भगवान श्री पारसनाथ की जन्म नगरी की वंदना करते हुए बनारस से पद विहार कर भगवान ऋषभदेव की जन्म कल्याणक भूमि धर्मनगरी अयोध्या पहुंचा। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आर्यिका ससंघ की स्थानीय कमेटी तथा उपस्थित समाज जनों ने भव्य मंगल अगवानी की।</p>
<p><strong>श्री आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर के दर्शन किए</strong></p>
<p>यहां पर विराजमान गणनी आर्यिका ज्ञानमति माताजी की संघस्थ चंदनामति माताजी एवं कर्मयोगी रविंद्र कीर्ति जी तथा संघस्थ बहनों एवं भाइओं ने मंगल अगवानी कर वंदन अभिनंदन किया। इसके बाद आर्यिकासंघ ने श्री आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर के दर्शन किए एवं गणनी आर्यिका ज्ञानमति माताजी के दर्शनार्थ पहुंची और सभी का भव्य मंगल मिलन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ।</p>
<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी को याद करते हुए उनको नमोस्तु किया </strong></p>
<p>आर्यिका संघ ने एक-दूसरे का परिचय दिया तथा धर्म चर्चा हुई। इतने बड़े संघ को देखकर अयोध्या में उपस्थित जनसमुदाय ने भी भक्ति भाव के साथ संपूर्ण आर्यिका संघ एवं ज्येष्ठ आर्यिकाओं की वंदना की। इस अवसर पर गणनी आर्यिका ज्ञानमति माताजी ने आचार्य श्री विद्यासागरजी को याद करते हुए उनको नमोस्तु किया तथा उन पलों को भी याद किया, जो उन्होंने आचार्य गुरुदेव के साथ खुरई नगर में बिताए। राजेश जैन दद्दू ने बताया आर्यिका संघ का बुधवार को अयोध्या नगरी में मंगल प्रवेश हुआ एवं संपूर्ण संघ श्री आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में विराजमान है।</p>
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		<title>शीतलधाम में विराजमान की जाने वाली 4 जिन प्रतिमा की भव्य अगवानी: भक्ति संगीत, जयघोष और मंगल पाठ के बीच वातावरण धर्ममय  </title>
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		<pubDate>Sun, 08 Feb 2026 13:26:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रेरणा एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से शीतलधाम विदिशा बर्राे वाले बाबा के मंदिर में विराजमान होने वाली 4 प्रतिमाओं की ऐतिहासिक अगवानी विदिशा नगर में विराजमान मुनि श्री संभवसागरजी महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज, मुनि श्री संस्कार सागरजी महाराज ससंघ सानिध्य में हजारों की संख्या श्रद्धालुओं द्वारा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रेरणा एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से शीतलधाम विदिशा बर्राे वाले बाबा के मंदिर में विराजमान होने वाली 4 प्रतिमाओं की ऐतिहासिक अगवानी विदिशा नगर में विराजमान मुनि श्री संभवसागरजी महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज, मुनि श्री संस्कार सागरजी महाराज ससंघ सानिध्य में हजारों की संख्या श्रद्धालुओं द्वारा की गई। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रेरणा एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से शीतलधाम विदिशा बर्राे वाले बाबा के मंदिर में विराजमान होने वाली 4 प्रतिमाओं की ऐतिहासिक अगवानी विदिशा नगर में विराजमान मुनि श्री संभवसागरजी महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज, मुनि श्री संस्कार सागरजी महाराज ससंघ सानिध्य में हजारों की संख्या श्रद्धालुओं द्वारा की गई। जिससे पूरा नगर धर्ममय हो गया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि श्री जी की मंगल अगवानी जुलूस में समाज बंधु अनुशासित पंक्तियों में चलते नजर आए। जुलूस के आगे चारों प्रतिमाएं रथ में चल रही थीं। नगर के प्रमुख मार्गों से निकले जुलूस का जगह-जगह नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। भक्ति संगीत, जयघोष और मंगल पाठ के बीच वातावरण श्रद्धा, शांति और सौहार्द से ओतप्रोत रहा।</p>
<p><strong>12 से 15 फरवरी तक शीतलधाम विदिशा में वेदिका शिलान्यास </strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने कहा कि समवशरण ऐसी जगह है जहां सबके लिए समान अवसर है। इसलिए प्रत्येक परिवार के प्रत्येक सदस्य से एक एक शिला वेदिका में विराजमान होनी चाहिए। ज्ञात हो कि 12 से 15 फरवरी तक शीतलधाम विदिशा में वेदिका शिलान्यास का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यासागर नवयुवक मंडल सहित समस्त युवा वर्ग एवं महिला मंडलों की सक्रिय भागीदारी उल्लेखनीय रही। नगरवासियों ने इस भव्य आयोजन को सामाजिक एकता, धार्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम बताया।</p>
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		<title>आचार्य श्री विद्यासागरजी का द्वितीय समाधि दिवस: मुनि श्री योगसागरजी के सानिध्य में आचार्य श्री के प्रकल्पों की प्रस्तुति हुई  </title>
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		<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 08:27:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनिश्री योगसागरजी महाराज संघ के सानिध्य में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। जो सुरेशकुमार सिद्धार्थ कुमार जैन बाबरिया दोतडा वाला परिवार द्वारा किया गया। उन्हें महाराज श्री को शास्त्र भेंट करने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में मंगलाचरण स्वरा जैन ने किया। इसके बाद आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का पूजन विशेष थाल सजाकर अष्ट द्रव्य से किया गया। इस अनुपम बेला में पूरा पंडाल भक्तों से भरा हुआ था। इन मांगलिक क्षणों में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के प्रकल्प गौशाला, इंडिया नहीं भारत बोलो, स्वालंबन के लिए हथकरघा इंडिया नहीं भारत बोलो को नाटकीय रूपांतरण के माध्यम से दर्शाया गया। इस अनुपम बेला में दूरदराज से भक्त भी पधारे। साथ ही मीडिया भी मौजूद रही। जैन श्वेतांबर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख एवं रूपचंद लाडवा ने भी महाराज श्री संघ के चरणों में श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>आचार्य श्री साधना के हिमालय थे </strong></p>
<p>इसके बाद गणिनी आर्यिका संगममति माताजी ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के विषय में बताया आचार्य श्री के प्रति बच्चों में भी श्रद्धा विद्धमान है वे कहते हैं बीमार है आचार्य श्री का नाम लेंगे ठीक हो जाएंगे। मुनिश्री निर्भीक सागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री साधना के हिमालय थे, जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं। एक गीत के माध्यम से कहा- ‘गुरु मात पिता गुरु बंधु सखा तेरे चरणों में कोटि कोटि प्रणाम।’ मुनिश्री निरामय सागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य श्री भेद विज्ञानी अध्यात्म के सरोवर थे। मुनिश्री निर्माेह सागरजी महाराज ने कहा कि हमारे जो भी थे वही थे, जो कुछ छोड़ा था। उन्हीं के लिए छोड़ा था। उनकी पूर्ति नहीं हो सकती। गुरु मिट्टी से सोना बनाते हैं। गुरु के प्रति सच्ची आस्था श्रद्धा है। गुरु कही भी बिठा सकता। गुरु हमारे लिए जीवंत भगवान थे।</p>
<p><strong>आत्म कल्याण गुरु की आज्ञा अनुपालन में है</strong></p>
<p>मुनि श्री निरोग सागरजी महाराज ने आचार्य श्री ने कहा कि जीवन लग जाए तभी भी हम गुणमाला नहीं लिख पाएंगे। आचार्य श्री शारीरिक दृष्टि से हमारे बीच नहीं लेकिन, आत्मा से हमेशा जुड़े रहेंगे। आचार्य श्री ने अपनी चर्या में दोष नहीं लगे और किसी के दोष नहीं दिखे। मुनि श्री योगसागरजी महाराज ने कहा कि मुझे हर्ष हो रहा है कि आचार्य परंपरा में साधु बना, मैं नहीं सोच सकता था। गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि आत्म कल्याण गुरु की आज्ञा अनुपालन में है। जब में गृहस्थ अवस्था में था, 5 साल का था तब उन्होंने मुझे नमोकर मंत्र सिखाया। इसीलिए आचार्य श्री 65 साल से मेरे धर्म गुरु हैं। गुरु आज्ञा बड़ी चीज है इसी से नैया पार होगी।</p>
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		<title>संयम पथ के 51 वर्ष में पहली बार रामगंजमंडी आएंगे मुनिश्री योगसागर जी : जगह-जगह गुरुदेव का मंगल पद प्रक्षालन होगा </title>
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		<pubDate>Sun, 25 Jan 2026 08:06:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री योगसागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में संध्या बेला में रविवार को आगमन होगा। उनकी अगवानी नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग से की जाएगी। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। मुनि श्री योगसागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में संध्या बेला में रविवार को आगमन होगा। उनकी अगवानी नगर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री योगसागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में संध्या बेला में रविवार को आगमन होगा। उनकी अगवानी नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग से की जाएगी। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> मुनि श्री योगसागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में संध्या बेला में रविवार को आगमन होगा। उनकी अगवानी नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग से की जाएगी। उन्हें नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लाया जाएगा। इसको लेकर समाज में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। जगह-जगह गुरुदेव का मंगल पद प्रक्षालन किया जाएगा।</p>
<p><strong>राजस्थान में ऐतिहासिक आगमन</strong></p>
<p>1979 के बाद लगभग 47 वर्षों के अंतराल में महाराज श्री का राजस्थान में पुनः मंगल आगमन हुआ है।</p>
<p>विशेष रूप से रामगंजमंडी नगर में यह उनका प्रथम आगमन है, जिससे नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में अपूर्व धार्मिक उल्लास और श्रद्धा का वातावरण बना है।महाराज श्री के सानिध्य में 27 जनवरी की बेला में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मनाया जाएगा।</p>
<p><strong> मुनि श्री योगसागर जी : त्याग और तप की जीवंत प्रतिमा</strong></p>
<p>मुनि श्री योगसागर जी महाराज दिगंबर जैन परंपरा के एक श्रेष्ठ, तपस्वी और सिद्ध साधक हैं। उनका जीवन आडंबर से दूर, कठोर संयम, शुद्ध चर्या और आत्मशुद्धि को समर्पित है। वर्तमान समय में वे दीक्षा-काल के अनुसार सबसे वरिष्ठ मुनिपदधारी हैं और &#8216;मुनि शिरोमणि&#8217; के रूप में श्रद्धापूर्वक सम्मानित हैं।</p>
<p><strong>जन्म एवं पारिवारिक परिचय</strong></p>
<p>महाराज श्री का जन्म 13 सितंबर 1956 (गुरुवार) को हुआ। आपके पिता मलप्पा जैन एवं माता श्रीमतीबाई जैन हैं। बचपन से ही उनमें वैराग्य और धर्मभाव प्रबल रहा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>संयम पथ की यात्रा</p>
<p>ब्रह्मचर्य व्रत : 2 मई 1975</p>
<p>क्षुल्लक दीक्षा : 18 दिसंबर 1975</p>
<p>ऐलक दीक्षा : 19 नवंबर 1977</p>
<p>मुनि दीक्षा : 15 अप्रैल 1980</p>
<p><strong>निर्यापक पद : 8 मार्च 2019</strong></p>
<p>इन चरणों से गुजरते हुए महाराज श्री ने पूर्ण दिगंबर मुनि जीवन को अंगीकार किया। गुरु परंपरा एवं विशेषता मुनि श्री योगसागर जी महाराज आचार्य परंपरा के महान संत आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित हैं। योग सागर जी मुनिराज अपने दीक्षा गुरु आचार्य विद्यासागर जी और वर्तमान आचार्य समय सागर महाराज के गृहस्थ जीवन के सगे भाई हैं।</p>
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		<title>स्कूल के बच्चों को पिलाई स्वर्ण प्राशन औषधि : माधवगंज चौक पर कांच मंदिर स्थित पांडाल में जुटे बच्चे और अभिभावक </title>
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		<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 15:02:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विदिशा नगर में गुरुवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। जब यहां पर सकल दिगंबर जैन समाज के लगभग पांच सौ से अधिक कार्यकर्ताओं ने नगर के सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में जाकर आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद की दो बूंद स्वर्णप्राशन की पिलाई।विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। विदिशा नगर में गुरुवार का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विदिशा नगर में गुरुवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। जब यहां पर सकल दिगंबर जैन समाज के लगभग पांच सौ से अधिक कार्यकर्ताओं ने नगर के सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में जाकर आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद की दो बूंद स्वर्णप्राशन की पिलाई।<span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> विदिशा नगर में गुरुवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। जब यहां पर सकल दिगंबर जैन समाज के लगभग पांच सौ से अधिक कार्यकर्ताओं ने नगर के सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में जाकर आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद की दो बूंद स्वर्णप्राशन की पिलाई। प्रातःकाल कार्यक्रम का शुभारंभ कांच मंदिर के पास बने विशेष पांडाल में मुनि श्री संभवसागर महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज, मुनि श्री संस्कार सागर महाराज के आशीर्वाद के बाद सभी बच्चों को स्वर्णप्राशन पिलाने का कार्य प्रारंभ किया गया। नगर में शीतलहर होने से नर्सरी से कक्षा पांच तक के बच्चों का शासकीय अवकाश घोषित था। नगर में &#8220;स्वर्णप्राशन&#8221; का कार्य पुष्य नक्षत्र में गुरुवार के दिन ही होना निश्चित था। इसलिए सभी स्कूलों में एक साथ प्रारंभ किया गया। जिसमें नर्सरी से पांचवीं तक के छोटे बच्चों के अभिभावक खुद अपने बच्चों को स्वर्णप्राशन पिलाने के लिए माधवगंज चौक पर कांच मंदिर स्थित पांडाल में लेकर आए। सभी स्कूलों में भी बच्चों को यह स्वर्णप्राशन की दवा निःशुल्क पिलाई गई।</p>
<p><strong>रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है</strong></p>
<p>अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि सबसे बड़ी बात देखने आई कि इस दवा को आचार्य गुरुदेव का आशीर्वाद मानकर जाति धर्म से परे हटकर उनके पेरेंटस ने बच्चों को यह दवा पिलाई। इस बारे में आशी वैद्य ने बताया कि यह औषधि स्वस्थ्य बच्चों को यदि प्रत्येक माह में एक बार पिला दी जाए तो बच्चे निरोग बने रहते हैं। उनके अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा वह मौसमी बीमारियों से बचे रहते हैं।</p>
<p><strong>मुनि श्री ने सभी को आशीर्वाद दिया</strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री ने सभी कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद दिया और कहा कि यह कार्य गुरुदेव के आशीर्वाद से ही सफल हुआ। इस अवसर पर संयुक्त कलेक्टर अनुभा जैन, एसडीएम एवं महिला बाल विकास अधिकारी विनीता कांसवा ने आचार्य श्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की संयोजना में ममता जैन न्यू जैन हायर सेकेन्ड्री स्कूल, रिया जैन सीए तथा नेहा जैन सीए ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही नगर के समस्त महिला मंडलों एवं समग्र पाठशाला समिति से जुड़ी समस्त शिक्षक एवं शिक्षकाओं एवं मुनि सेवक समिति के सभी सदस्यों ने सभी स्कूलों में जाकर स्कूल प्रबंधन से मिलकर के इस महत्वपूर्ण कार्य में अपना योगदान दिया।</p>
<p><strong>सभी का मिला सहयोग</strong></p>
<p>कार्यक्रम संयोजक संजय सेठ, अध्यक्ष शैलेंद्र चौधरी बड़ू, महामंत्री प्रदीप जैन एलआईसी, वित्त प्रभारी स्वतक जैन ने सभी का आभार प्रकट किया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि स्वर्ण प्राशन के इस महत्व पूर्ण कार्य में जिला प्रशासन तथा समस्त स्कूल प्रबंधन एवं शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी के सभी कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान मिला तथा जैन समाज के सभी महिला एवं पुरुष कार्यकर्ताओं ने सभी केन्द्रों पर उत्साह पूर्वक कार्य का निर्वाहन किया। संयोजक संजय सेठ ने आभार माना।</p>
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		<title>मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छा पूरी करना धर्म: मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में दिए मंगल आशीर्वचन  </title>
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		<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 14:34:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं की पूर्ति करना संतान का पहला कर्तव्य होता है। समग्र पाठशालाओं से आए हुए सभी बच्चों तथा बड़े को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं की पूर्ति करना संतान का पहला कर्तव्य होता है। समग्र पाठशालाओं से आए हुए सभी बच्चों तथा बड़े को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं की पूर्ति करना संतान का पहला कर्तव्य होता है। समग्र पाठशालाओं से आए हुए सभी बच्चों तथा बड़े बच्चों को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनि श्री ने उन सभी बच्चों के साथ उनके माता पिता को समझाते हुये कहा कि आप लोगों को भी यह ख्वाब नहीं देखना चाहिये कि मेरा बच्चा किस कंपनी में कितने बड़े पैकेज पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सब कुछ धन ही नहीं होता धन से भी बढ़कर बच्चों में अंदर के संस्कार होते है। बचपन में जो संस्कार पड़ जाते है वह ही उनका भविष्य बनाते है। मुनि श्री ने कहा कि धन की चिंता मत करो जिसने चोंच दी है वह दाना भी देगा उन्होंने कहा कि आपने अपने बच्चे को पढ़ाई करने विदेश भेज दिया अथवा इंजीनियर बनाकर विदेश में अथवा महानगरों में पहुंचा दिया। बच्चे में यदि संस्कार होंगे तो वह मां बाप की परवाह करेगा अन्यथा जिन कागज के नोटों के लिये आपने उसे विदेश भेजा था उस धन को कमाने में वह इतना व्यस्त हो जाता है कि फिर उसके पास इतना समय ही नहीं होता कि वह भारत आकर अपने बूढे मां बाप की सेवा कर सके।</p>
<p><strong>बड़े शान से कहते है कि मेरे दोनों बेटे विदेश में है! </strong></p>
<p>उन्होंने बच्चों को एक सच्ची घटना सुनाते हुए कहा कि मध्यमवर्गीय जैन परिवार में दो बेटों का जन्म होता है। मां बाप दोनों बच्चों को उच्च शिक्षा के लिये विदेश भेजते हैं। बच्चे शिक्षा के साथ साथ वहीं सेटिल हो जाते हैं। कुछ दिनों तक उनकी मोबाइल पर बातचीत होती रहती है और वह भी बड़े शान से कहते है कि मेरे दोनों बेटे विदेश में उच्च पदों पर हैं। बच्चे थोड़े संस्कारित थे तो वह अपने माता-पिता को धन भी भेजते रहते थे। उनका विवाह हो गया और वह वहीं सैटल हो गए। इधर, बूढे मां-बाप अकेले थे और अपने बच्चों की याद करते करते उसकी मां बीमार पड़ जाती है तो पिता बच्चों को संदेश भेजते हैं कि तुम्हारी मां बीमार है और अपने बच्चे बहु नाती पोतों से मिलना चाहती है तो उधर से संदेश आता है कि आप उनका अच्छे से अच्छा अस्पताल में इलाज कराओ हमारे पास अभी समय नहीं है और मां का देहांत हो जाता है। इसकी सूचना पिता अपने दोनों बेटों को देता है तो उनके अंतिम संस्कार में छोटा बेटा अकेले पहुंचता है। पिता उससे पूछता है कि बड़का नहीं आया तो छोटा जबाब देता है कि भैया ने कहा है कि इस बार तुम चले जाओ अगली बार मैं चला जाऊंगा। जब पिता अपने यह संदेश सुनता है तो वह दुःखी होकर सुसाइड कर लेता है।</p>
<p><strong>सबसे पहला धर्म अपने माता-पिता की सेवा है</strong></p>
<p>एक और सच्ची घटना सुनाते हुये मुनि श्री ने कहा कि दो भाई थे। एक तो पढ़-लिखकर आईएएस अफसर बन गया और किसी महानगर में पहुंच गया। छोटा थोड़ा पढ़ने में कमजोर था सो उसने पढ़ाई की और अपनी पुस्तैनी दुकान संभाल ली और अपने माता-पिता की सेवा करता और साथ में रहता था लेकिन उसके माता-पिता तो बड़े बेटे बहू की ही तारीफ किया करते थे। इस बात से छोटे बेटे बहू को बहूत तकलीफ होती थी। वह कहता पिताजी सेवा तो आपकी हम ही करते हैं लेकिन, तारीफ आप हमेशा बड़े की करते हैं। ऐसी घटनाएं आजकल हर परिवार में आम हो गई है। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे पहला धर्म अपने माता-पिता की सेवा करने का ही होना चाहिए। जिन्होंने कितने कष्टों के साथ हमारा लालन-पालन किया और काबिल बनाया।</p>
<p><strong>50 हजार बच्चों को स्वर्णप्राशन दवा दी जाएगी</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागरजी के द्वितीय समाधि दिवस 27 जनवरी को आ रहा है। उसके पूर्व 8 जनवरी गुरुवार को विदिशा नगर के सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों तथा समस्त आंगनवाड़ियों के माध्यम से श्री सकल दि. जैन समाज के महिला एवं पुरुष कार्यकर्ता उन स्कूलों में जाकर 50 हजार बच्चों को स्वर्णप्राशन दवा दी जाएगी। आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से पूर्णायु जबलपुर एवं दयोदय गौशाला बीना वारह के सहयोग से तैयार की गई है। इसके लिए रविवार दोपहर तीन बजे कार्यकर्ताओं की मीटिंग हुई। जिसमें उन सभी कार्यकर्ताओं को दवा पिलाने का प्रशिक्षण दिया गया।</p>
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