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	<title>आचार्य श्री वसुनंदी सागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में ज्ञान कल्याणक मनाया: आचार्यश्री वसुनंदी के सानिध्य में हुई विभिन्न धार्मिक क्रियाएं  </title>
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		<pubDate>Sun, 09 Feb 2025 10:40:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सिहोनिया अतिशय क्षेत्र में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आचार्य वसुनंदी महाराज के मंगल सानिध्य में चौथे दिन ज्ञान कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इसमें धार्मिक क्रियाएं हुईं। आचार्यश्री के प्रवचन हुए। इसमें उन्होंने भगवान आदिनाथ के ज्ञान कल्याणक के बारे में विस्तार से बताया। पढ़िए अंबाह से सौरभ  जैन की खबर&#8230; अंबाह। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सिहोनिया अतिशय क्षेत्र में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आचार्य वसुनंदी महाराज के मंगल सानिध्य में चौथे दिन ज्ञान कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इसमें धार्मिक क्रियाएं हुईं। आचार्यश्री के प्रवचन हुए। इसमें उन्होंने भगवान आदिनाथ के ज्ञान कल्याणक के बारे में विस्तार से बताया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अंबाह से सौरभ  जैन की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> सिहोनिया अतिशय क्षेत्र में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में आचार्य वसुनंदी महाराज के मंगल सानिध्य में चौथे दिवस ज्ञान कल्याणक महोत्सव बहुत धूमधाम से मनाया गया। सोनू मित्र मंडल ने बताया कि ज्ञान कल्याणक दिवस पर आर्यिका वधरस्वनंदनी के निर्देशन एवं पंडित मनोज शास्त्री निर्देशन में प्रातः कालीन धर्मिक क्रियाएं हुईं। इसके बाद मुनि आदिकुमार को आहार चर्या का दृश्य प्रदर्शित किया गया। राजा श्रेयांस एवं राजा सोम ने पडगाहन कर मुनि आदिकुमार को आहार देने का सौभाग्य अर्जित किया।</p>
<p><strong>ऋषि बनो या कृषि का उपदेश सारी दुनिया को दिया</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य वसुनंदी महाराज ने अपने मंगल प्रवचनों में कहा कि युग के आदि में जब जन सामान्य को मुनियों को आहार देने की क्रिया का ज्ञान नहीं था। तब भगवान आदिनाथ जो मुनि आदिकुमार के रूप 6 माह तक आहार नहीं प्राप्त हुआ था। 6 माह के बाद राजा श्रेयांस और राजा सोम ने नवधा भक्ति के साथ सर्वप्रथम इच्छू रस का आहार दिया था। भगवान आदिनाथ ने ही कल्प वृक्षों की समाप्ति के पश्चात सामान्य प्रजा के हित के लिए आसी मसी कृषि वाणिज्य शिल्प एवं कला आदि की शिक्षाए जन सामान्य को सिखाई थीं। उन्होंने ही सर्वप्राथम विश्व को ऋषि बनो या कृषि का उपदेश सारी दुनिया को दिया था।</p>
<p><strong>विशिष्ट अतिथि का होगा पदार्पण</strong></p>
<p>सिहोनिया अतिशय क्षेत्र के परम संरक्षक जिनेश जैन ने बताया कि 10 फरवरी को पंचकल्याणक महोत्सव का समापन होगा। 10 फरवरी को केवल मोक्ष कल्याणक मनाया जाएगा एवं विश्व महायज्ञ होगा। मप्र के उप मुख्यमंत्री 9 फरवरी ज्ञान कल्याणक पर सिहोनिया अतिशय क्षेत्र में हेलिकॉप्टर से दोपहर 3 बजे पधार रहे हैं। 10 फरवरी को राजस्व मंत्री और कई विधायक, नेता गण मोक्ष कल्याणक पर पधार रहे हैं।</p>
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		<title>सिहोनिया पंचकल्याणक महोत्सव में धूमधाम से मनाया गया जन्म कल्याणक : तीसरे दिन तीर्थंकर बालक के जन्म की मनाई खुशियां </title>
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		<pubDate>Sat, 08 Feb 2025 04:10:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शांतिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनिया जी पर आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन भगवान का जन्म कल्याण महोत्सव बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया।इस दौरान गांव में विशाल रथ यात्रा निकाली गई। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन तीर्थंकर बालक के जन्म की खुशियां मनाई गई। पढ़िए अंबाह से अजय जैन की यह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>शांतिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनिया जी पर आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन भगवान का जन्म कल्याण महोत्सव बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया।इस दौरान गांव में विशाल रथ यात्रा निकाली गई। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन तीर्थंकर बालक के जन्म की खुशियां मनाई गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अंबाह से अजय जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>  अंबाह।</strong> श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनिया जी पर आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन भगवान का जन्म कल्याण महोत्सव बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान गांव में विशाल रथ यात्रा निकाली गई। प्रात: साढ़े 6 बजे से प्रतिष्ठाचार्य मनोज शास्त्री आहार जी के निर्देशन में जाप, मंत्राराधान, नित्यमह पूजा और हवन आदि की धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गई। इसके बाद आठ बजे से आदि कुमार का जन्म, जन्मतिशय आरोपण, बधाइयां, सौधर्म इंद्र द्वारा अयोध्या नगरी की प्रदक्षिणा आदि का मंचन किया गया।</p>
<p><strong>अयोध्या नगरी में त्रिलोकीनाथ का जन्म हो गया</strong></p>
<p>आचार्य श्री वसुनंदी महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा कि जब भगवान का जन्म होता है तो सर्वत्र सुख-शांति की लहर दौड़ जाती है। आपसी बैर भाव और वैमनस्यता स्वत: ही समाप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि भगवान का जन्म होते ही सौधर्म इंद्र का आसन पुन: कंपायमान हो जाता है। इंद्र अपने अवाधिज्ञान से पता करता है कि अयोध्या नगरी में त्रिलोकीनाथ का जन्म हो गया है। इंद्र-इंद्राणी सहित स्वर्ग से आयोध्या नगरी आकर तीन प्रदक्षिणा देता है। इंद्राणी प्रसूती ग्रह से बालक आदि कुमार को लाती हैं, सौधर्म इंद्र भगवान के रूप एवं स्वरूप को देखकर मंत्रमुग्ध थे। दो नेत्रों से तृप्ति न होने पर इंद्र अपने सहस्त्र नेत्र कर लेते हैं और त्रिलोकीनाथ को निहारते हैं फिर ऐरावत हाथी पर प्रभु को विराजमान कर पांडुक शिला पर ले जाकर 1008 कलशों से भगवान का अभिषेक किया जाता है।वही आयोजन में रात्रि के समय आरती, शास्त्र प्रवचन के साथ पालना, बाल क्रीड़ा, पालनहार का पालना आदि का मनमोहक मंचन किया गया। इस अवसर पर निकाली कई भव्य शोभा यात्रा में हाथी और झांकियां आकर्षण का केन्द्र रही। महिलाएं धार्मिक धुनों पर नृत्य करती हुई चल रही थी। इस दौरान आकाश भगवान आदि कुमार के जयघोषों से गुंजायमान रहा।</p>
<p><strong>शामिल हुए विधानसभा अध्यक्ष तोमर</strong></p>
<p>सिहोनिया के पंचकल्याणक महोत्सव में शुक्रवार को मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर शामिल हुए। उन्होंने इस दौरान कहा कि चंबल का क्षेत्र अब डकैतों की पहचान से बाहर निकलकर आध्यात्मिकता, जैनधर्म और संतों की अमृतवाणी से पहचाना जा रहा है। तोमर ने कहा कि कभी डकैतों के नाम से कुख्यात चंबल क्षेत्र अब सनातन धर्म, जैन धर्म और वीर सपूतों की बलिदानी धरती के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा भिंड, मुरैना, दतिया के सोनागिरि, बरासों एवं सिहोनिया में स्थित जैन तीर्थ स्थल जैन धर्म के विचारों और सिद्धांतों को प्रसारित कर रहे हैं। उन्होंने कहा जैन संतों की कठोर तपस्या, त्याग और शाकाहार के प्रचार ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी जैन धर्म की पहचान को मजबूती दी है। उन्होंने पंचकल्याणक महोत्सव को जैनधर्म की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया और कहा कि संतों के आशीर्वाद से सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।</p>
<p><strong>पंचकल्याणक पाषाण को भगवान बनाने की क्रिया </strong></p>
<p>महोत्सव के दौरान विधान सभा अध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर ने महोत्सव में भाग लिया। इसके साथ ही मंच पर उपस्थित सभी संत जनों का आशीर्वाद लिया। इस दौरान पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष जिनेश जैन ने कहा कि यह आयोजन केवल सिहोनिया मंदिर का नहीं होकर संपूर्ण मुरैना जिले का है। सिहोनिया धर्म की नगरी है। पंचकल्याणक का महत्व बताते हुए उन्होंने बताया कि पंचकल्याणक पाषाण को भगवान बनाने की क्रिया है। यह अनुष्ठान प्रेरणा देता है कि हमें धार्मिक क्रियाओं पालन करना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा पंचकल्याणक आत्मा को परमात्मा बनाने, पतित को पावन बनाने, तीर्थंकर प्रभु की  कथा सुनने और धर्म की महिमा बताने का माध्यम है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-74075" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0003-scaled.jpg" alt="" width="1152" height="2560" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0003-scaled.jpg 1152w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0003-135x300.jpg 135w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0003-461x1024.jpg 461w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0003-768x1707.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0003-691x1536.jpg 691w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0003-922x2048.jpg 922w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0003-990x2200.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250208-WA0003-1320x2933.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1152px) 100vw, 1152px" />बच्चों को संस्कारित करना जरूरी</strong></p>
<p>पंच कल्याणक में अभी तक आपने गर्भ कल्याणक और जन्म कल्याणक देखा है। शनिवार को ज्ञान एवं रविवार को दीक्षा तप कल्याणक होगा और अंतिम दिवस मोक्ष कल्याणक होगा। पंचकल्याणक से आपको छोटे-छोटे नियम लेकर जीवन को धर्म पर मार्ग पर चलने के लिए प्रयास करना चाहिए। इसके लिए छोटे बच्चों को संस्कारित करना बहुत जरूरी है।</p>
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		<title>पंच कल्याणक के महत्व के बारे में जाने विस्तार से : अतिशय क्षेत्र सिहोनिया में जारी है पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Feb 2025 16:52:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अतिशय क्षेत्र सिहोनिया जी में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य श्री वसुनंदी सागर महाराज जी संसंघ सानिध्य में चल रहा है। इसमें आचार्य वसुनंदी सागर जी महाराज ने पंच कल्याणक के बारे में विस्तार से बताया। पढ़िए अंबाह से यह खबर&#8230; अंबाह(सिहोनिया)। अतिशय क्षेत्र सिहोनिया जी में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य श्री वसुनंदी सागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अतिशय क्षेत्र सिहोनिया जी में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य श्री वसुनंदी सागर महाराज जी संसंघ सानिध्य में चल रहा है। इसमें आचार्य वसुनंदी सागर जी महाराज ने पंच कल्याणक के बारे में विस्तार से बताया। पढ़िए अंबाह से यह खबर&#8230;</strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह(सिहोनिया)</strong>। अतिशय क्षेत्र सिहोनिया जी में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य श्री वसुनंदी सागर महाराज जी संसंघ सानिध्य में चल रहा है। इसमें स्वर्गलोक की अष्ट कुमारियां भगवान की माता मरू देवी की सेवा करती हैं। तीर्थंकर के गर्भ में आने के 6 माह पहले से ही देवता उनकी भावी जन्म नगरी में दिव्य रत्नों की वर्षा करते हैं। तीर्थंकर को जन्म देने वाली मां को 16 स्वप्न दिखाई देते हैं। तीर्थंकर के जन्म से सौधर्म इंद्र का आसन कंपायमान होता है। अन्य चारों निकाय के देवों के महलों में भी विचित्र संकेत होते हैं।</p>
<p><strong>वे पांच मुख्य घटनाएं </strong></p>
<p>नरक के जीवों को भी कुछ क्षण की शांति मिलती है। तीर्थंकर के जन्म के बाद इंद्र बालक को ऐरावत हाथी पर बिठाकर सुमेरु पर्वत पर ले जाकर अभिषेक कर असंख्य देवों के साथ तीर्थंकर का जन्म कल्याणक मनाता है। सौरभ जैन वरेह वाले ने बताया कि पंचकल्याणक, जैन ग्रंथों के अनुसार वे पांच मुख्य घटनाएं हैं, जो सभी तीर्थंकरों के जीवन में घटित होती हैं। ये पांच कल्याणक हैं।</p>
<p><strong>गर्भ कल्याणक : जब तीर्थंकर प्रभु की आत्मा माता के गर्भ में आती है।</strong></p>
<p>जन्म कल्याणक : जब तीर्थंकर बालक का जन्म होता है।</p>
<p>दीक्षा कल्याणक : जब तीर्थंकर सब कुछ त्यागकर वन में जाकर मुनि दीक्षा ग्रहण करते है।</p>
<p>केवल ज्ञान कल्याणक : जब तीर्थंकर को कैवल्य की प्राप्ति होती है।</p>
<p>मोक्ष कल्याणक : जब भगवान शरीर का त्यागकर अर्थात सभी कर्म नष्ट करके निर्वाण/ मोक्ष को प्राप्त करते है।</p>
<p><strong>यह भी पुण्य योग है</strong></p>
<p>भगवान के गर्भ में आने से 6 माह पूर्व से लेकर जन्म पर्यन्त 15 मास तक उनके जन्म स्थान में कुबेर द्वारा प्रतिदिन तीन बार साढ़े तीन करोड़ रत्नों की वर्षा की जाती है। यह भगवान के पूर्व अर्जित कर्मों का शुभ परिणाम है। दिक्ककुमारी देवियां माता की परिचर्या और गर्भशोधन करती हैं। यह भी पुण्य योग है।</p>
<p>गर्भ अवतरण के समय माता को 16 उत्तम स्वप्न दिखते हैं। प्रत्येक सपना का अपना अलग-अलग मतलब होता है।</p>
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		<item>
		<title>कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ सिहोनिया जी में पंचकल्याणक महोत्सव: महोत्सव के लिए ध्वजाओं से सज गया है सिहोनिया </title>
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		<pubDate>Wed, 05 Feb 2025 09:38:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनिया में 6 दिनी पंच कल्याणक महोत्सव का शुभारंभ बुधवार से हो गया है। पहले दिन गर्भ कल्याणक पूर्व की धार्मिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य तथा विद्वानों संपन्न करवा रहे हैं। इस अवसर पर देश के विभिन्न प्रांतों से श्रद्धालुओं का स्वागत-सत्कार आदि किया जा रहा है। यहां पर आचार्यश्री वसुनंदी सागर महाराज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनिया में 6 दिनी पंच कल्याणक महोत्सव का शुभारंभ बुधवार से हो गया है। पहले दिन गर्भ कल्याणक पूर्व की धार्मिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य तथा विद्वानों संपन्न करवा रहे हैं। इस अवसर पर देश के विभिन्न प्रांतों से श्रद्धालुओं का स्वागत-सत्कार आदि किया जा रहा है। यहां पर आचार्यश्री वसुनंदी सागर महाराज के सानिध्य में महोत्सव संपन्न होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अंबाह से अजय जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनिया में छह दिवसीय पंचकल्याणक महा-महोत्सव का शुभारंभ बुधवार से हो गया है। पहले दिन गर्भ कल्याणक पूर्व की धार्मिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य तथा विद्वानों द्वारा संपन्न हो रही हैं। कई राज्यों से यहां पधारे जैन श्रद्धालुओं के लिए स्वागत और कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करने के लिए सिहोनिया नगरी को सजाया गया है। आयोजन समिति से लेकर प्रशासन तक पूरी तरह से मुस्तैद हैं। विशाल मैदान में हो रहे महोत्सव के शुभांरभ के लिए रात भर तैयारियां की गईं। मंगलवार को मैदान पर 40 फीट लंबे ध्वज दंड को स्थापित किया गया। जिस पर बुधवार को जैन ध्वज फहराया गया। कार्यक्रम पूर्व संध्या पर इंद्र-इंद्राणियों तथा राजा-रानियों के पात्रों ने अपने-अपने संवादों का रिहर्सल किया। कार्यक्रम के लिए पधारे विद्वानों ने सभी पात्रों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।</p>
<p><strong>1008 महिलाओं ने सज-धज के निकाली घटयात्रा</strong></p>
<p>सुबह पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ हुआ और जैन समाज की 1008 महिलाएं गाजे-बाजे के साथ घटयात्रा में शामिल हुईं। घट यात्रा मंदिर प्रांगण से रवाना हुई और कार्यक्रम के लिए तैयार किए गए पांडाल तक पहुंची। जहां पर घट स्थापना हुई। यह पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य वसुनंदी जी महाराज के सान्निध्य में संयोजित हो रहा है। बुधवार को देवाज्ञा, गुरु आज्ञा, प्रतिष्ठाचार्य निमंत्रण, घटयात्रा, विमानोत्सव, ध्वजारोहण, वेदी शुद्धि, पांडाल उद्घाटन और जप प्रारंभ जैसे कार्यक्रम आरंभ हो रहे हैं। प्रथम दिवस आयोजन में आचार्य श्री के प्रवचन, नित्यमह पूजा, सकलीकरण, इन्द्र प्रतिष्ठा, नांदी विधान मंडप प्रतिष्ठा, यागमंडल विधान, मंगल आरती और इंद्र दरबार, कुबेर द्वारा रत्नवृष्टि, माता मरुदेवी की सेवा सोलह, स्वप्न दर्शन नृत्य, गर्भकल्याणक क्रियाएं (मध्य रात्रि) की क्रियाएं होंगी।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73760" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0015-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1920" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0015-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0015-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0015-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0015-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0015-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0015-2048x1536.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0015-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0015-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0015-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0015-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250205-WA0015-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />10 फरवरी तक चलेगा पंच कल्याणक महोत्सव</strong></p>
<p>आयोजन में चित्र अनावरण कर्ता के तौर पर रुपेश कुमार जैन दिल्ली, दीप प्रज्ज्वलन कर्ता प्रेमचंद जैन मुरैना, जिनवाणी स्थापनाकर्ता निर्मल जैन दिल्ली, मुख्य कलश स्थापना ध्वजारोहण कर्ता धनेंद्रकुमार जैन, निर्माण विहार दिल्ली एवं मुख्य कलश स्थापना का कार्य दिनेश कुमार जैन सुपर फॉर्मा, उज्जैन कर रहे हैं। कमेटी के संरक्षक जिनेश जैन ने बताया कि 10 फरवरी तक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव मनाया जाएगा। पंचकल्याण महोत्सव के तहत मंदिर में बनाई गई नवीन वेदियों में भगवान शांतिनाथ, भगवान नेमिनाथ, पार्श्वनाथ, आदिनाथ, चंद्रप्रभु, महावीर स्वामी सहित 24 तीर्थकर की 142 मूर्ति विधि-विधान से विराजमान की जाएगी। आयोजन के लिए भव्य पांडाल बनाया गया है। इसके पास ही भोजन और पार्किंग की व्यवस्था रहेगी।</p>
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		<title>आचार्य श्री वसुनंदी सागर महाराज जी ससंघ का अम्बाह में मंगल प्रवेश : इंद्र देव हुए प्रसन्न हुई बारिश से वसुधा हुई शुद्ध </title>
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		<pubDate>Tue, 04 Feb 2025 17:53:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यानंद जी महाराज जी के शिष्य आचार्य श्री वसुनंदी सागर महाराज जी ससंघ मंगल प्रवेश अम्बाह में हुआ। सभी भक्तजनों में भारी उत्साह है। आचार्य श्री के सानिध्य में बुधवार से पंचकल्याणक होगा। पढ़िए अम्बाह से सौरभ जैन की खबर&#8230; अम्बाह। आचार्य श्री विद्यानंद जी महाराज जी के शिष्य आचार्य श्री वसुनंदी सागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यानंद जी महाराज जी के शिष्य आचार्य श्री वसुनंदी सागर महाराज जी ससंघ मंगल प्रवेश अम्बाह में हुआ। सभी भक्तजनों में भारी उत्साह है। आचार्य श्री के सानिध्य में बुधवार से पंचकल्याणक होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अम्बाह से सौरभ जैन की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अम्बाह।</strong> आचार्य श्री विद्यानंद जी महाराज जी के शिष्य आचार्य श्री वसुनंदी सागर महाराज जी ससंघ का बैंडबाजे के साथ भव्य मंगल प्रवेश अम्बाह नगरी में हुआ। सभी भक्तजनों में भारी उत्साह देखने को मिला। सुबह से लोग बरबाई गांव में अम्बाह के लिए विहार कराने पहुंचे। आचार्य श्री वसुनंदी सागर महाराज के चरण अम्बाह में पड़ने लगे तो मौसम ने अपना रूप बदल दिया।</p>
<p><strong>बुधवार से शुरू होगा पंच कल्याणक</strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी सौरभ जैन ने बताया कि अतिशय क्षेत्र सिहोनिया जी में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 5 से 10 फरवरी आचार्य श्री वसुनंदी सागर महाराज जी ससंघ के सानिध्य में होने जा रहा है। जिसमें आचार्य श्री वसुनंदी सागर महाराज जी संसंघ का विहार फिरोजाबाद से सिहोनिया जी की ओर चल रहा है।‌</p>
<p><strong>18 वर्ष बाद हुआ मंगल प्रवेश </strong></p>
<p>आचार्य श्री वसुनंदी सागर महाराज जी संसंघ जी का भव्य मंगल प्रवेश अम्बाह नगरी में 18 वर्ष बाद हुआ। जैसे-जैसे आचार्य श्री वसुनंदी सागर महाराज जी संसंघ का बरबाई गांव से अम्बाह की ओर पड़ रहे थे। तो इंद्रदेव भी प्रसन्न हो गए और बारिश होने से पूरा वातावरण शुद्ध हो गया।</p>
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