<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%86%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B9/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Fri, 04 Jul 2025 08:30:21 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>स्यादवाद महिला मंडल ने चढ़ाया निर्वाण लाड़ू: कृत्रिम गिरनार पर्वत का किया निर्माण  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/syadvad_mahila_mandal_offered_nirvana_laddu/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/syadvad_mahila_mandal_offered_nirvana_laddu/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 08:30:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vasunandi Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Artificial Girnar Mountain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Neminath Swami]]></category>
		<category><![CDATA[Munishri Prashmanand Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Munishri Shivanand Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Shakarpur Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Syadvad Mahila Mandal]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[कृत्रिम गिरनार पर्वत]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान नेमिनाथ स्वामी]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री प्रश्मानंदजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री शिवानंदजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[शकरपुर दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[स्यादवाद महिला मंडल]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=84328</guid>

					<description><![CDATA[तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पूर्वक मनाया गया। आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के शिष्य मुनिश्री शिवानंदजी महाराज एवं मुनिश्री प्रश्मानंदजी महाराज के सान्निध्य में 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ स्वामी का निर्वाण लाड़ू महोत्सव मनाया गया। नईदिल्ली से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पूर्वक मनाया गया। आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के शिष्य मुनिश्री शिवानंदजी महाराज एवं मुनिश्री प्रश्मानंदजी महाराज के सान्निध्य में 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ स्वामी का निर्वाण लाड़ू महोत्सव मनाया गया। <span style="color: #ff0000">नईदिल्ली से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पूर्वक मनाया गया। जिसमें स्यादवाद महिला मंडल शकरपुर दिल्ली ने पूर्ण श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सहभागिता की। स्यादवाद महिला मंडल की अध्यक्षा कुसुम जैन एवं महामंत्री नीलम जैन ने बताया कि श्री दिगंबर जैसवाल जैन उपरोचियां परिषद द्वारा आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के शिष्य मुनिश्री शिवानंदजी महाराज एवं मुनिश्री प्रश्मानंदजी महाराज के सान्निध्य में 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ स्वामी का निर्वाण लाड़ू महोत्सव मनाया गया। इस पावन अवसर पर कृत्रिम गिरनार पर्वत की रचना की। पर्वत की चोटी पर तीर्थंकर नेमिनाथ जी को विराजमान कर भक्तिभाव एवं श्रद्धा के साथ निर्वाण कांड का वाचन करते हुए निर्वाण लाड़ू समर्पित किया गया। यह संगठन लगभग 30 वर्षों से समाजसेवा के क्षेत्र में कार्यरत है। इसमें स्यादवाद महिला मंडल शकरपुर दिल्ली ने पूर्ण समर्पण एवं भक्ति के साथ हिस्सा लिया। सभी सदस्याएं अपने मंडल की विशेष परिधान में उपस्थित रहीं। मंडल की सभी महिलाओं ने थालियों में निर्वाण लाड़ू को रखकर श्रद्धा के साथ सिर पर धारण किया।</p>
<p>मंचासीन मुनिराजों ने निर्वाण महोत्सव की सभी क्रियाओं को मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न कराया। निर्वाण लाड़ू महोत्सव के अवसर पर स्यादवाद महिला मंडल की संरक्षक मुन्नी महेंद्र जैन मधुवन, कुसुम जैन, नीलम देवेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष सुनीता जैन, डोली सुदर्शन जैन मधुवन, अनीता प्रदीप जैन वसुंधरा, मनीषा मनोज जैन नोएडा, पुष्प जैन, लक्ष्मी सुनील जैन ग्रीन पार्क, सुमन सुनील जैन (बरबाई वाले) मुख्य रूप से उपस्थित थीं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/syadvad_mahila_mandal_offered_nirvana_laddu/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुनि दीक्षा लेकर एलक दयानंद जी बने शुद्धानंद सागर: आचार्यश्री वसुनंदी जी ने दी मुनि दीक्षा  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/after_taking_the_initiation_of_a_monk_alak_dayanand_ji_became_shuddhanand_sagar/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/after_taking_the_initiation_of_a_monk_alak_dayanand_ji_became_shuddhanand_sagar/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Mar 2025 13:16:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vasunandi Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Elak Dayanand Ji]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Diksha]]></category>
		<category><![CDATA[Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Self Exploration]]></category>
		<category><![CDATA[Self Realization]]></category>
		<category><![CDATA[Self-welfare]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Shuddhanand Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आत्म कल्याण]]></category>
		<category><![CDATA[आत्मानुभूति]]></category>
		<category><![CDATA[आत्मान्वेषण]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[एलक दयानंद जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि दीक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[शुद्धानंद सागर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[साधु]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=77947</guid>

					<description><![CDATA[पदमपुरा में आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के सानिध्य में रविवार को दिमनी चांदपुर निवासी ऐलक दयानंद सागर जी महाराज को मुनि पद की दीक्षा दी गई। दीक्षा के बाद उनका नाम मुनि शुद्धानंद सागर जी महाराज रखा गया। जनवरी 2025 में ऐलक पद की दीक्षा प्राप्त की थी। अंबाह से पढ़िए यह खबर&#8230; अंबाह। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पदमपुरा में आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के सानिध्य में रविवार को दिमनी चांदपुर निवासी ऐलक दयानंद सागर जी महाराज को मुनि पद की दीक्षा दी गई। दीक्षा के बाद उनका नाम मुनि शुद्धानंद सागर जी महाराज रखा गया। जनवरी 2025 में ऐलक पद की दीक्षा प्राप्त की थी। <span style="color: #ff0000">अंबाह से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> पदमपुरा में आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के सानिध्य में रविवार को दिमनी चांदपुर निवासी ऐलक दयानंद सागर जी महाराज को मुनि पद की दीक्षा दी गई। दीक्षा की प्रक्रिया दोपहर 2 बजे शुरू हुई। दीक्षा के बाद उनका नाम मुनि शुद्धानंद सागर जी महाराज रखा गया। मुनि बनने से पहले ऐलक दयानंद जी ने आचार्य श्री से दीक्षा की प्रार्थना की थी। आचार्य श्री ने स्वीकृति दी। अक्टूबर 2024 में उन्होंने वसुनंदी जी महाराज से क्षुल्लक दीक्षा ली थी। जनवरी 2025 में ऐलक पद की दीक्षा प्राप्त की। इसके बाद रविवार को उन्हें मुनि पद की दीक्षा मिली। इस अवसर पर आचार्य वसुनंदी जी महाराज ने कहा कि दिगंबर अवस्था धारण किए बिना आत्मा परमात्मा नहीं बन सकती। मोक्ष की प्राप्ति भी नहीं होती। हर इंसान दिगंबर रूप में जन्म लेता है। मृत्यु के बाद कफन हटाना भी दिगंबरता का प्रतीक है। शुद्धानंद मुनि श्री के परिजन संतोष जैन, नीलेश जैन, रूपेश जैन और दीपक जैन ने बताया कि हमारे पिताजी ने जैन धर्म की महानता से प्रेरित होकर सर्वाेच्च मुनि पद प्राप्त किया है।</p>
<p><strong>अपने पद के अनुसार मूल गुणों का पालन करना होता है</strong></p>
<p>दिगंबर मुनिराज भीषण ठंड, तपती धूप और मूसलधार बारिश जैसी विषम परिस्थितियों में भी संसार के सभी विकल्पों को त्याग कर आत्म कल्याण, आत्मानुभूति और आत्मान्वेषण के लक्ष्य की ओर जीवन शैली अपनाते हैं। वे जिन व्रतों, गुणों और तपों का पालन करते हैं, वह सभ्यता के इतिहास में पठनीय, चिंतन योग्य और मननीय है। जैन धर्म गुणवाचक है। इसी कारण जैन साधु बहिरंग और अंतरंग गुणों के विकास के लिए सतत जागृत और साधनारत रहते हैं। जैन मुनियों को आचार्य, उपाध्याय और साधु परमेष्ठी कहा जाता है। इन्हें अपने पद के अनुसार मूल गुणों का पालन करना होता है। इन्हीं गुणों के कारण उन्हें महाव्रती और महा तपस्वी कहा जाता है। आचार्य परमेष्ठी को 36 मूलगुणों का पालन करना होता है।</p>
<p><strong>पांचों इंद्रियों को वश में रखना अनिवार्य</strong></p>
<p>आचार्य परमेष्ठी को 36 मूलगुणों का पालन करना होता है। इनमें बहिरंग 6 तप, अंतरंग 6 तप और 12 तप शामिल हैं। ये हैं- अनशन, ऊनोदर, व्रत परिसंस्थान, रस परित्याग, कायकलेश, प्रायश्चित, विनय, वैय्यावृत्ति, स्वाध्याय, व्युत्सर्ग और ध्यान। इन्हीं 36 मूल गुणों में पांच पंचाचार होते हैं- दर्शनाचार, ज्ञानाचार, तपाचार, चारित्राचार और वीर्याचार। साथ ही 10 धर्मों का पालन करना होता है- उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, सत्य, शौच, संयम, तप, त्याग, आकिंचन और ब्रह्मचर्य। छह आवश्यक- समता, वंदना, स्तुति, प्रतिक्रमण, प्रत्याख्यान और कार्याेत्सर्ग के साथ तीन युक्तियां- मनोगुप्ति, वचनगुप्ति और कायगुप्ति की साधना भी आवश्यक होती है। उपाध्याय और साधु परमेष्ठी 14 अंग, 14 पूर्व और 24 मूलगुणों के धारक होते हैं। साधु परमेष्ठी पांच महाव्रत- अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह का पालन करते हैं। वे पांच समितियां- ईर्या, भाषा, ऐष्णा, प्रतिस्थापना और व्युत्सर्ग समिति का पालन करते हैं। पांचों इंद्रियों को वश में रखना अनिवार्य होता है।</p>
<p><strong>श्रमण सभ्यता मानव विकास की धरोहर</strong></p>
<p>साधु के अन्य गुणों में केशलोच, नग्न रहना, स्नान नहीं करना, भूमि पर लेटना, दांत नहीं धोना, खड़े होकर हाथ में आहार लेना और दिन में एक बार आहार लेना शामिल है। वर्षा जैन ने बताया कि दिगंबर जैन मुनि यम, नियम, संयम और तपस्या के प्रमाणिक प्रज्ञापुरुष होते हैं। उनका जीवन अंतरंग साधना से जुड़ा होता है। वे जगत कल्याण की भावना से ओतप्रोत रहते हैं। भारतीय सभ्यता के इतिहास में श्रमण संस्कृति और श्रमण सभ्यता मानव विकास की धरोहर है। दिगंबर जैन मुनि तप और साधना के ऐसे प्रमाण पुरुष होते हैं, जिनका केवल दर्शन ही जीवन के अंधकार को मिटा सकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/after_taking_the_initiation_of_a_monk_alak_dayanand_ji_became_shuddhanand_sagar/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जैन तीर्थ सिहोनियां में छःदिवसीय पंचकल्याणक महोत्सवः  5 से 10 फरवरी तक होगा भव्य कार्यक्रम </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/six_day_panchkalyanak_mahotsav_at_jain_tirtha_sihoniya/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/six_day_panchkalyanak_mahotsav_at_jain_tirtha_sihoniya/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Jan 2025 09:32:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[acharya vasunadi ji maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Ambah]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[jinbimb panchkalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[majjinendra panchkalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[morena]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Sihoniya]]></category>
		<category><![CDATA[अंबाह]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जिनबिम्ब पंचकल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मज्जिनेंद्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सिहोनियां]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=72073</guid>

					<description><![CDATA[दिगंबर जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र सिहोनियां जी में श्री मज्जिनेंद्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ 5 से 10 फरवरी तक विभिन्न धार्मिक समारोह होंगे। महोत्सव में कमल मंदिर, पंच मानस्तंभ, श्री चंद्रप्रभु जिनालय सहित 31 फीट की उतंग भगवान शांतिनाथ की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इसकी तैयारियों के लिए समिति बनाई गई है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगंबर जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र सिहोनियां जी में श्री मज्जिनेंद्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ 5 से 10 फरवरी तक विभिन्न धार्मिक समारोह होंगे। महोत्सव में कमल मंदिर, पंच मानस्तंभ, श्री चंद्रप्रभु जिनालय सहित 31 फीट की उतंग भगवान शांतिनाथ की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इसकी तैयारियों के लिए समिति बनाई गई है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मुरैना से मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> 11वीं शताब्दी का अति प्राचीन दिगंबर जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र सिहोनियां जी में श्री मज्जिनेंद्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ 5 से 10 फरवरी तक विभिन्न धार्मिक समारोह होने जा रहे हैं। जैन समाज अंबाह के अध्यक्ष एवं अतिशय क्षेत्र सिहोनियां के परम संरक्षक जिनेश जैन ने बताया कि दिगंबर जैन समाज के ख्याति प्राप्त संत अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में होने जा रहे श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक महोत्सव में कमल मंदिर, पंच मानस्तंभ, श्री चंद्रप्रभु जिनालय सहित 31 फीट की उतंग भगवान शांतिनाथ की प्राण प्रतिष्ठा होगी।</p>
<p><strong>26 शिष्यों के साथ होगा आचार्यश्री का मंगल प्रवेश</strong></p>
<p>इस महोत्सव को संपन्न कराने के लिए आचार्यश्री वसुनंदी जी महाराज का अपने 26 शिष्यों के साथ जैन तीर्थ सिहोनियां जी में आगमन होगा। संभावना है कि पूज्य गुरुदेव का 2 या 3 फरवरी को क्षेत्र पर भव्य मंगल आगमन हो सकता है।</p>
<p><strong>आयोजन समिति का गठन, धन्नालाल जैन बने मुख्य संयोजक</strong></p>
<p>इस कार्यक्रम की विशालता एवं भव्यता को देखते हुए अलग से आयोजन समिति का गठन किया गया है। जिसमें मुख्य संयोजक धन्नालाल जैन निर्माण विहार दिल्ली, अध्यक्ष रूपेश जैन मेघा फ्रूट्स दिल्ली, महामंत्री सुनील जैन मोना जनरेटर दिल्ली एवं कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश जैन दिल्ली को बनाया गया है। सभी व्यवस्थाओं के लिए संयोजक मनोनीत किए गए हैं।</p>
<p><strong>पांच कल्याणक के होते हैं संस्कार</strong></p>
<p>श्री मज्जिनेंद्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में तीर्थंकरों के पांच कल्याणकों गर्भ, जन्म, ज्ञान, तप एवं मोक्ष कल्याणक के संस्कार किए जाते हैं। अंतिम दिन पूज्य दिगंबराचार्याे द्वारा पाषाण एवं अष्टधातु की जिन प्रतिमाओं को सूर्यमंत्र देकर प्राण प्रतिष्ठा की जाती है।</p>
<p><strong>मनोज शास्त्री कराएंगे महोत्सव की क्रियाएं</strong></p>
<p>महोत्सव की सभी क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य मनोज जैन शास्त्री अहारजी के आचार्यत्व में संपन्न होंगी। मुख्य प्रतिष्ठाचार्य के साथ 11 अन्य विद्वानों की टीम भी सहयोगी के रूप में उपस्थित रहेगी। संगीतकार के रूप में ऋषभ जैन सरस दिल्ली अपनी सेवाए प्रदान करेंगे। छःदिवसीय आयोजन में 5 फरवरी को ध्वजारोहण के साथ गर्भ कल्याणक पूर्व रूप, 6 फरवरी को गर्भ कल्याणक उत्तर क्रिया, 7 फरवरी को जन्म कल्याणक, 8 फरवरी को तप कल्याणक, 9 फरवरी को ज्ञान कल्याणक, 10 फरवरी को मोक्ष कल्याणक के संस्कार किए जाएंगे।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-72075" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250106-WA0015.jpg" alt="" width="666" height="846" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250106-WA0015.jpg 666w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250106-WA0015-236x300.jpg 236w" sizes="(max-width: 666px) 100vw, 666px" />तीनों प्रतिमाएं की एक ही शिला पर </strong></p>
<p>जिला मुख्यालय मुरैना से 33 किमी की दूरी पर (अंबाह की ओर) एक विशाल एवं भव्य जैन मंदिर स्थापित है। जिसमें 11वीं शताब्दी की जैन तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ प्रभु की 16 फीट उतंग खड़गासन प्रतिमा एवं उनके आजू-बाजू में भगवान कुंथनाथ प्रभु और भगवान अरहनाथ प्रभु की प्रतिमाएं विराजमान हैं। इस तीर्थ की विशेषता यह है कि ये तीनों प्रतिमाएं एक ही शिला पर बनी हुई हैं। साथ ही यह मूर्तियां उसी स्थान पर विराजमान हैं। जहां से ये खुदाई में प्राप्त हुई थी।</p>
<p>सिहोनिया जी कमेटी के संरक्षक आशीष जैन सोनू ने बताया कि इस आयोजन में संपूर्ण भारतवर्ष से हजारों की संख्या में जैन धर्मावलंबियों की आने की संभावना को देखते हुए कमेटी ने तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। आने वाले सभी बंधुओं के आवास एवं भोजनादि की समुचित व्यवस्था क्षेत्र पर की जा रही है। श्री अतिशय क्षेत्र सिहोनियां कमेटी, जैन युवा क्लब, सोनू मित्र मंडल ने सभी साधर्मी बंधुओं से कार्यक्रम में अधिकाधिक संख्या में सम्मिलित होने की अपील की है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/six_day_panchkalyanak_mahotsav_at_jain_tirtha_sihoniya/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के पावन सान्निध्य में भव्य जैन दीक्षा समारोह का आयोजन : संयम का मार्ग अपनाकर आत्मा के उद्धार की ओर बढ़े नत्थीलाल जैन </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/nathilal_jain_moves_towards_salvation_of_soul_by_adopting_the_path_of_restraint/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/nathilal_jain_moves_towards_salvation_of_soul_by_adopting_the_path_of_restraint/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Oct 2024 07:36:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vasunandi Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Ambah]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Deeksha]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[Firozabad श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jaineshwari Deeksha]]></category>
		<category><![CDATA[Nathilal Jain]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[अंबाह]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[जैनेश्वरी दीक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दीक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[नत्थीलाल जैन]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[फिरोजाबाद]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=68421</guid>

					<description><![CDATA[संसार के भोग विलास को त्यागकर संयम के पथ पर बढ़ना कोई सरल कार्य नहीं है। आज के युग में भौतिक आकांक्षाओं का त्याग कर आत्मा के उद्धार का मार्ग स्वीकार करने वाले विरले ही होते हैं। रविवार को आचार्य वसुनंदी महाराज के चातुर्मासिक स्थल फिरोजाबाद में ऐसा ही एक विरला दृश्य देखने को मिला, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>संसार के भोग विलास को त्यागकर संयम के पथ पर बढ़ना कोई सरल कार्य नहीं है। आज के युग में भौतिक आकांक्षाओं का त्याग कर आत्मा के उद्धार का मार्ग स्वीकार करने वाले विरले ही होते हैं। रविवार को आचार्य वसुनंदी महाराज के चातुर्मासिक स्थल फिरोजाबाद में ऐसा ही एक विरला दृश्य देखने को मिला, जहां चांदपुर दिमनी के नत्थीलाल जैन ने संयम जीवन को स्वीकार कर अपना जीवन आत्मा के उद्धार और परोपकार के लिए समर्पित कर दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> संसार के भोग विलास को त्यागकर संयम के पथ पर बढ़ना कोई सरल कार्य नहीं है। आज के युग में भौतिक आकांक्षाओं का त्याग कर आत्मा के उद्धार का मार्ग स्वीकार करने वाले विरले ही होते हैं। रविवार को आचार्य वसुनंदी महाराज के चातुर्मासिक स्थल फिरोजाबाद में ऐसा ही एक विरला दृश्य देखने को मिला, जहां चांदपुर दिमनी के नत्थीलाल जैन ने संयम जीवन को स्वीकार कर अपना जीवन आत्मा के उद्धार और परोपकार के लिए समर्पित कर दिया। यहां आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के पावन सान्निध्य में भव्य जैन दीक्षा समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें तीन दीक्षाएं प्रदान की गईं।</p>
<p>आचार्य श्री के सानिध्य में दीक्षा समारोह से श्रद्धालुओं का उत्साह द्विगुणित हो गया। हजारों की संख्या में विशाल जन समुदाय इस भव्य दीक्षा समारोह का साक्षी बनने के लिए उपस्थित था। समारोह में आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज ने नत्थीलाल जैन को विधि-विधान पूर्वक क्षुल्लक दीक्षा प्रदान कर दयानंद जी महाराज नाम दिया। उन्हें नवीन पिच्छी, कमंडल और शास्त्र भी भेंट किए गए। आयोजन में ध्वजारोहण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन आदि धार्मिक कार्य भी संपन्न कराए गए। समारोह में दूर-दूर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में आचार्य श्री का आशीर्वाद लेने के लिए राज्यसभा सांसद नवीन जैन भी पधारे। इस अवसर पर आर्यिका संघ भी मौजूद था।</p>
<p><strong>दीक्षा लेना कठिन काम</strong></p>
<p>आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में दीक्षा लेना बहुत कठिन कार्य है, यह कांटों से भरा ताज पहनने के समान है। किंतु यदि हम किसी कठिन कार्य को करने की ठान लें, तो वह कार्य भी सरल लगने लगता है। जैनेश्वरी दीक्षा बिरले ही ले पाते हैं, क्योंकि यह संयम का मार्ग है। उन्होंने कहा कि जीवन के किसी भी क्षण में वैराग्य उमड़ सकता है, और संसार में रहकर प्राणी संसार को तज सकता है। इससे पहले, ब्रह्मचारी ब्रह्म प्रकाश भैया उर्फ़ नत्थीलाल जैन ने आचार्य श्री से क्षुल्लक दीक्षा देने के लिए निवेदन किया। आचार्य श्री ने उनकी संयम साधना को देखते हुए दीक्षा की स्वीकृति प्रदान की।</p>
<p>दीक्षा देने से पूर्व आचार्य श्री ने ब्रह्मचारी ब्रह्म प्रकाश भैया के परिजनों, रिश्तेदारों, उपस्थित जन समुदाय और संघस्थ सभी साधुओं से दीक्षा के लिए स्वीकृति प्राप्त की। इस दौरान दीक्षार्थी ने संसार के सभी जीवों से जानबूझकर या अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना की और अपनी ओर से सभी जीवों को क्षमा किया।</p>
<p>आयोजन में नत्थीलाल जैन के परिजन संतोष जैन, नीलेश जैन और दीपक जैन सहित मुरैना से लगभग चार सैकड़ा लोग उपस्थित थे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/nathilal_jain_moves_towards_salvation_of_soul_by_adopting_the_path_of_restraint/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>58वें अवतरण दिवस पर विशेष आलेख : मेरे गुरुदेव आचार्य श्री वसुनंदी जी महामुनिराज  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shree_vasunandi_maharaj_avataran_diwa_special_article-me/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shree_vasunandi_maharaj_avataran_diwa_special_article-me/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Oct 2024 16:01:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[58th avtaran diwas]]></category>
		<category><![CDATA[58वें अवतरण दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[acharya shree vasunandji mahamuniraj]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[muraina श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Special Article]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना]]></category>
		<category><![CDATA[विशेष आलेख]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=67735</guid>

					<description><![CDATA[परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महाराज के रूप में भारत वर्ष ही नहीं बल्कि विश्व में सत्य, अहिंसा, शाकाहार, भाईचारे का संदेश देते हुए जैन धर्म और जैन सिद्धांतों का प्रचार प्रसार करते हुए जैन ध्वजा को फहरा रहे हैं। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट.. मुरैना&#124; आश्विन कृष्ण अमावस्या 3 [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महाराज के रूप में भारत वर्ष ही नहीं बल्कि विश्व में सत्य, अहिंसा, शाकाहार, भाईचारे का संदेश देते हुए जैन धर्म और जैन सिद्धांतों का प्रचार प्रसार करते हुए जैन ध्वजा को फहरा रहे हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट..</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना|</strong> आश्विन कृष्ण अमावस्या 3 अक्टूबर 1967 को राजस्थान के जिला धौलपुर में कस्बा मनियां के नजदीक ग्राम विरौधा में दिगम्बर जैसवाल जैन (उपरोचियां) समाज के श्रावक श्रेष्ठी ऋषभचंद जी जैन के आंगन में मातुश्री श्रीमती त्रिवेणी देवी जैन की कोख से एक बालक का जन्म हुआ। दिनेश चंद जैन नामकरण हुआ, जो कि आज परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महाराज के रूप में भारत वर्ष ही नहीं बल्कि विश्व में सत्य, अहिंसा, शाकाहार, भाईचारे का संदेश देते हुए जैन धर्म और जैन सिद्धांतों का प्रचार प्रसार करते हुए जैन ध्वजा को फहरा रहे हैं।</p>
<p>बालक दिनेश बचपन से ही धीर, वीर और गंभीर प्रवृत्ति के थे। आपकी प्रारंभिक लौकिक शिक्षा ग्राम विरोधा, मनियां में हुई। आपने धौलपुर राजस्थान से बी.कॉम की परीक्षा उत्तीर्ण की। आप गृह कार्यों के साथ-साथ प्रतिदिन जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय में लीन रहते थे। अल्प आयु (1979) में ही आपके हृदय में वैराग्य का बीज अंकुरित होने लगा था।</p>
<p>सन् 1988 के प्रारंभ में दिनेश के गृह नगर मनियां में परम पूज्य निमित्त ज्ञानी समाधिस्थ आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज का ससंघ मंगल आगमन हुआ। आचार्य श्री के संघ में एक युवा मुनिराज श्री विरागसागर जी महाराज को देखकर युवा बालक दिनेश काफी प्रभावित हुआ और वैराग्य का बीज पूर्णता के साथ अंकुरित होने लगा। पूज्य युवा मुनिराज का सान्निध्य मिला और युवक दिनेश ने दृढ़ता के साथ वैराग्य पथ पर चलने की ठान ली। कुछ दिन बाद संघ का विहार हो गया, युवा दिनेश मनियां अपने घर पर ही रुक गए, लेकिन घर पर उनका मन कहां लगने बाला था। इसी बीच आचार्य श्री विमल सागर जी का संघ मुरैना पहुंचा और लगभग एक माह रुककर धर्म प्रभावना की। इसी बीच युवक दिनेश मुरैना पहुंचे और युवा मुनिराज विराग सागर जी का सान्निध्य प्राप्त किया। अतिशय क्षेत्र सिहोनियां जी में 18 मई 1988 को श्री 1008 भगवान शांतिनाथ जी के दरबार में युवा दिनेश ने आचार्य श्री विमल सागर जी महाराज को श्रीफल अर्पित कर आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लेकर ब्रह्मचारी दीक्षा ग्रहण की।</p>
<p>आपने 16 नवम्बर 1988 को अतिशय क्षेत्र बरासों जिला भिंड (म .प्र.) में मुनि श्री विराग सागर जी महाराज से क्षुल्लक दीक्षा ग्रहण की, नामकरण हुआ क्षुल्लक श्री जिनेन्द्र सागरजी महाराज। बुधवार 11अक्तूबर 1989 आश्विन सुदी 11 वि.संवत 2046 को श्री दिगम्बर जैन मंदिर, नसिया जी, भिंड में मुनिश्री श्री विराग सागर जी महाराज से मुनि दीक्षा लेकर अपनी मनुष्य पर्याय को धन्य किया। नामकरण हुआ मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज।</p>
<p>राष्ट्रसंत श्वेत पिच्छाचार्य आचार्य श्री विद्यानंद जी महाराज ने 17 फरवरी 2002 बसंत पंचमी को विश्वास नगर पंचकल्याणक, दिल्ली में आपको उपाध्याय की उपाधि से अलंकृत किया। आचार्य श्री विद्यानंदजी महामुनिराज ने 01 अप्रेल 2009 को एलाचार्य की उपाधि से विभूषित कर नामकरण किया एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज। कुंद कुंद भारती दिल्ली में 03 जनवरी 2015 को आचार्य श्री विद्यानंद जी महाराज ने आपको आचार्य पद देकर उपकृत किया। पूज्य गुरुदेव अभीक्षण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज ने अभी तक भारत वर्ष के 10 से अधिक राज्यों में पद विहार करते हुए 37 नगरों में वर्षायोग कर धर्म प्रभावना की है। पूज्य श्री ने संयम की साधना करते हुए शताधिक दीक्षायें प्रदान की हैं। आपने अपनी लेखनी से आगमानुसार 300 से अधिक ग्रंथों को तैयार किया है। आपके होनहार, सुयोग्य शिष्यों द्वारा सम्पूर्ण भारतवर्ष में अहिंसा, शाकाहार, जीव दया का प्रचार प्रसार कर जैन धर्म की प्रभावना की जा रही है। वर्तमान में पूज्य आचार्य श्री ससंघ सुहाग नगरी फिरोजाबाद में चातुर्मासरत हैं। पूज्य श्री के सुयोग्य शिष्य युगल मुनिराज श्री शिवानंद जी महाराज एवम मुनिश्री प्रश्मानंद की महाराज संस्कारधानी नगरी मुरैना में चातुर्मारत हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shree_vasunandi_maharaj_avataran_diwa_special_article-me/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>13 अक्टूबर को लेंगे जैनेश्वरी दीक्षा : आज होगी दीक्षार्थी की बिनोली यात्रा एवं गोद भराई </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/today_will_binoli_yatra_and_baby_shower_of_the_deekshi/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/today_will_binoli_yatra_and_baby_shower_of_the_deekshi/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 02 Oct 2024 07:50:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vasunandi Maharaj श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[baby shower]]></category>
		<category><![CDATA[Binoli Yatra]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Deeksha]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jaineshwari Deeksha]]></category>
		<category><![CDATA[morena]]></category>
		<category><![CDATA[Nathilal Jain]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[गोद भराई]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[जैनेश्वरी दीक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दीक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[नत्थीलाल जैन]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[बिनोली यात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=67677</guid>

					<description><![CDATA[जैन संत बनने जा रहे नत्थीलाल जैन की भव्य बिनोली शोभायात्रा और गोद भराई का कार्यक्रम आज आयोजित होने जा रहा है। अम्बाह रोड, मुरैना निवासी 74 वर्षीय नत्थीलाल जैन आगामी 13 अक्टूबर को फिरोजावाद में चातुर्मासरत आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के कर कमलों द्वारा जैनेश्वरी दीक्षा लेने जा रहे हैं। पढ़िए मनोज जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन संत बनने जा रहे नत्थीलाल जैन की भव्य बिनोली शोभायात्रा और गोद भराई का कार्यक्रम आज आयोजित होने जा रहा है। अम्बाह रोड, मुरैना निवासी 74 वर्षीय नत्थीलाल जैन आगामी 13 अक्टूबर को फिरोजावाद में चातुर्मासरत आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के कर कमलों द्वारा जैनेश्वरी दीक्षा लेने जा रहे हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन संत बनने जा रहे नत्थीलाल जैन की भव्य बिनोली शोभायात्रा और गोद भराई का कार्यक्रम आज आयोजित होने जा रहा है। अम्बाह रोड, मुरैना निवासी 74 वर्षीय नत्थीलाल जैन आगामी 13 अक्टूबर को फिरोजावाद में चातुर्मासरत आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के कर कमलों द्वारा जैनेश्वरी दीक्षा लेने जा रहे हैं। जैन सिद्धांतों के अनुसार, जैनेश्वरी दीक्षा से पूर्व किए जाने वाले संस्कारों के तहत बिनोली शोभायात्रा और गोद भराई का कार्यक्रम किया जाता है।</p>
<p>बड़ा जैन मंदिर कमेटी के पूर्व मंत्री पदमचंद जैन &#8220;गैदा&#8221; (चैटा वाले) ने जानकारी दी कि आज, बुधवार को शाम 06 बजे पूज्य युगल मुनिराज श्री शिवानंद जी महाराज एवं मुनिश्री प्रश्मानंद जी महाराज के पावन सान्निध्य में श्री चंद्रप्रभु पल्लीवाल जैन मंदिर, लोहिया बाजार, मुरैना से दीक्षार्थी श्री नत्थीलाल जैन की भव्य बिनोली शोभायात्रा निकाली जाएगी। दीक्षार्थी को मुकुट और हार से सुसज्जित कर घोड़ा बग्घी में विराजमान कराया जाएगा, और नगर भ्रमण कराया जाएगा।</p>
<p>शोभायात्रा लोहिया बाजार जैन मंदिर से प्रारंभ होकर सराफा बाजार, हनुमान चौराहा, स्टेशन रोड, शंकर बाजार होते हुए बड़ा जैन मंदिर पहुंचेगी। जैन मंदिर में गोद भराई का आयोजन होगा, जिसमें सभी बंधु एवं माताएं-बहनें पंच मेवा से उनकी गोद भरकर उन्हें विदाई देंगी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/today_will_binoli_yatra_and_baby_shower_of_the_deekshi/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अंतिम समय में आचार्य वसुनंदी जी के सान्निध्य में संल्लेखना की ओर अग्रसर : मृत्यु को महोत्सव के रूप में मनाने का नाम है संल्लेखना समाधि </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/in_the_last_moments_moving_towards_sanlekhna_in_the_presence_of_acharya_vasunandi_ji/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/in_the_last_moments_moving_towards_sanlekhna_in_the_presence_of_acharya_vasunandi_ji/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Sep 2024 15:31:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vasunandi Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Binu Jain श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Dasalakshan Parva]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[Firozabad]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Paryushan]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[Sanlekhana]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दसलक्षण पर्व]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[पर्युषण]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[फिरोजाबाद]]></category>
		<category><![CDATA[बीनु जैन]]></category>
		<category><![CDATA[संल्लेखना]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=66980</guid>

					<description><![CDATA[सुहाग नगरी फिरोजाबाद में अभिक्षण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महाराज के आशीर्वाद से गोहद निवासी स्वर्गीय श्री स्वरूप चंद्र जी की पुत्रवधू श्रीमती बीनु जैन धर्म पत्नी महेश चंद्र जैन बंटी हाल निवासी गौतम नगर दिल्ली का स्वास्थ्य कुछ समय से खराब चल रहा था । कुछ समय पूर्व जब डॉक्टरों ने बताया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सुहाग नगरी फिरोजाबाद में अभिक्षण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महाराज के आशीर्वाद से गोहद निवासी स्वर्गीय श्री स्वरूप चंद्र जी की पुत्रवधू श्रीमती बीनु जैन धर्म पत्नी महेश चंद्र जैन बंटी हाल निवासी गौतम नगर दिल्ली का स्वास्थ्य कुछ समय से खराब चल रहा था । कुछ समय पूर्व जब डॉक्टरों ने बताया कि इनका अंतिम समय चल रहा है । तो बीनु जैन ने अपने इस नश्वर शरीर को छोड़ने से पहले संल्लेखना धारण करने की इच्छा व्यक्त की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>फिरोजाबाद।</strong> जैन दर्शन में अष्ट कर्मों का उल्लेख है, जिनमें से एक आयु कर्म भी है । आयु कर्म के पूर्ण होने को ही हम मरण कहते हैं । आत्मा तो अजर अमर है किन्तु आयु कर्म पूर्ण होने पर शरीर बदल जाता है। यदि आत्मा सरल परिणाम के साथ राग द्वेष को तज कर शांत परिणाम से इस नश्वर शरीर से गमन करती है तो उसे ही सल्लेखना समाधि कहते हैं। मुरैना निवासी अनूप भंडारी ने बताया कि वर्तमान में सुहाग नगरी फिरोजाबाद में अभिक्षण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महाराज के आशीर्वाद से गोहद निवासी स्वर्गीय श्री स्वरूप चंद्र जी की पुत्रवधू श्रीमती बीनु जैन धर्म पत्नी महेश चंद्र जैन बंटी हाल निवासी गौतम नगर दिल्ली का स्वास्थ्य कुछ समय से खराब चल रहा था ।</p>
<p>कुछ समय पूर्व जब डॉक्टरों ने बताया कि इनका अंतिम समय चल रहा है । अब हमारे पास इनको बचा पाना संभव नही है और उन्हें घर ले जाने को कहा तो बीनु जैन ने अपने इस नश्वर शरीर को छोड़ने से पहले संल्लेखना धारण करने की इच्छा व्यक्त की । तब उन्हें सेठ छदामी लाल जी जैन मंदिर प्रांगण फिरोजाबाद में परम पूज्य आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी महाराज के पास ले जाया गया । आचार्य श्री ने उन्हें संघ में सानिध्य देकर सप्तम प्रतिमा के व्रत देकर ब्रह्मचारिणी संयम प्रभा दीदी नाम दिया और उन्हें सोलहकारण पर्युषण पर्व के पावन अवसर पर 16 सितंबर को क्षुल्लिका दीक्षा देकर श्री 105 सर्वज्ञनंदनी नाम दिया। तब से संल्लेखनारत हैं। ज्ञात हो बीनु जैन स्व. श्री पन्नालाल जी अगरैया निवासी मुरार की नातिनी, स्व. श्रीमति व्रजेश स्व.श्री महेश चंद्र जी की पुत्री है व श्री दिनेश चंद्र जी की भतीजी हैं।</p>
<p>आपका ननिहाल श्री भोलाराम जमुना दास जी चडोसिया धौलपुर के यहां था। आपकी शादी 1999 में सम्पन्न हुई थी।सभी उनके पुण्य की अनुमोदना करते हुए भावना भाते हैं कि आप अष्ट कर्मों को नष्ट कर शीघ्र सिद्धालय की ओर गमन करें। अभी आप पूज्य गुरुदेव अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के संघ में फिरोजाबाद में संल्लेखना की ओर अग्रसर हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/in_the_last_moments_moving_towards_sanlekhna_in_the_presence_of_acharya_vasunandi_ji/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुरैना चातुर्मास के लिए युगल मुनिराजों को श्रीफल भेंट मुनिराजों के प्रवचनों से नगर के जैन-अजैन सभी बंधु होंगे लाभान्वित </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/gift_of_quince_to_couple_muniraj_for_morena_chaturmas/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/gift_of_quince_to_couple_muniraj_for_morena_chaturmas/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 May 2024 16:00:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vasunandi Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[morena]]></category>
		<category><![CDATA[Munishree Prashmanand Ji Maharaj श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Munishree Shivanand Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री प्रश्मानन्द जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री शिवानंद जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=60809</guid>

					<description><![CDATA[युगल मुनिराजों को मुरैना नगर में चातुर्मास करने हेतु जैन समाज द्वारा श्रीफल अर्पित किया गया। श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर कमेटी के मंत्री विनोद जैन (तार वाले) द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार पूज्य गुरुदेव अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री शिवानंद जी महाराज एवं मुनिश्री प्रश्मानन्द [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>युगल मुनिराजों को मुरैना नगर में चातुर्मास करने हेतु जैन समाज द्वारा श्रीफल अर्पित किया गया। श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर कमेटी के मंत्री विनोद जैन (तार वाले) द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार पूज्य गुरुदेव अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री शिवानंद जी महाराज एवं मुनिश्री प्रश्मानन्द जी महाराज श्री सिद्धाक्षेत्र सोनागिर जी में विराजमान हैं। <span style="color: #ff0000">पढि़ए मनोज जैन नायक की पूरी रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> युगल मुनिराजों को मुरैना नगर में चातुर्मास करने हेतु जैन समाज द्वारा श्रीफल अर्पित किया गया। श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर कमेटी के मंत्री विनोद जैन (तार वाले) द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार पूज्य गुरुदेव अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री शिवानंद जी महाराज एवं मुनिश्री प्रश्मानन्द जी महाराज श्री सिद्धाक्षेत्र सोनागिर जी में विराजमान हैं। रविवार को मुरैना जैन समाज के सैकड़ों साधर्मी बंधुओं ने सोनागिर जी पहुंचकर युगल मुनिराजों को 2024 में मुरैना नगर में चातुर्मास करने हेतु श्रीफल अर्पित किया। सभी बंधुओं ने मुनिराजों से निवेदन किया कि हे गुरुदेव आपके हमारे नगर में चातुर्मास करने से काफी धर्म प्रभावना होगी। आपके प्रवचनों से नगर के जैन-अजैन सभी बंधु लाभान्वित होंगे। पूज्य युगल मुनिराजों ने मुरैना समाज के निवेदन पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया है, न ही कोई आश्वासन दिया है। उन्होंने सभी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आपकी भावना अच्छी है, प्रयास करते रहिए। हो सकता है कि आपकी इच्छा पूर्ति हो जाएं।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-60811" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240519-WA0041.jpg" alt="" width="1018" height="564" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240519-WA0041.jpg 1018w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240519-WA0041-300x166.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240519-WA0041-768x425.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240519-WA0041-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240519-WA0041-990x548.jpg 990w" sizes="(max-width: 1018px) 100vw, 1018px" /> श्रीफल भेट करने वालों में विनोद जैन मंत्री, प्रदीप जैन उपाध्यक्ष, विजय जैन पूर्व मंत्री, नितिन जैन पूर्व उपमंत्री, शैलेश जैन शैलू, अजय जैन बल्लू, चंद्रप्रकाश जैन, धर्मेंद्र जैन, शशांक जैन, मुकेश जैन सहित अनेकों गणमान्य साधर्मी बंधु उपस्थित थे ।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/gift_of_quince_to_couple_muniraj_for_morena_chaturmas/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
