<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%86%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Wed, 22 Jul 2026 14:58:33 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0.2</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>सीकर में दूसरी बार होगा आचार्य श्री धर्मसागर जी की जन्मभूमि पर मंगल प्रवेश : आचार्य श्री वर्धमानसागर जी संघ करेगा नगर भ्रमण, श्रावक-श्राविकाओं में उत्साह का माहौल  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_dharmasagar_ji_to_make_an_auspicious_entry_into_his_birthplace_in_sikar_for_the_second_time/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_dharmasagar_ji_to_make_an_auspicious_entry_into_his_birthplace_in_sikar_for_the_second_time/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 14:58:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Dharmasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhamansagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Ascetic State]]></category>
		<category><![CDATA[auspicious entry]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[english tag: Shrifal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Kalpavriksha]]></category>
		<category><![CDATA[Prathamacharya Shri Shanti Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Third Successor (Pattadhish)]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री धर्मसागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[कल्पवृक्ष]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तृतीय पट्टाधीश]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[मंगल प्रवेश]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि अवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=109758</guid>

					<description><![CDATA[अनेक जिनालयों, दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी की समाधि स्थली, अनेक साधुओं की दीक्षा स्थली और जन्मभूमि सीकर में इस बार आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का दूसरी बार भव्य मंगल प्रवेश होगा। सीकर से पढ़िए, श्रीफल साथी डॉ.राजेश पंचोलिया की खबर सीकर। अनेक जिनालयों, दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी की समाधि स्थली, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अनेक जिनालयों, दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी की समाधि स्थली, अनेक साधुओं की दीक्षा स्थली और जन्मभूमि सीकर में इस बार आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का दूसरी बार भव्य मंगल प्रवेश होगा। <span style="color: #ff0000">सीकर से पढ़िए, श्रीफल साथी डॉ.राजेश पंचोलिया की खबर</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सीकर।</strong> अनेक जिनालयों, दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी की समाधि स्थली, अनेक साधुओं की दीक्षा स्थली और जन्मभूमि सीकर में इस बार आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का दूसरी बार भव्य मंगल प्रवेश होगा। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी से सन 1969 में दीक्षित 57 वर्ष के संयमी जीवन में 37 वर्षों से आचार्य पद पर प्रतिष्ठित 76 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का सीकर में आचार्य बनने के बाद पहली बार भव्य मंगल प्रवेश होगाा। इससे पूर्व वे सन 1986-87 में मुनि अवस्था में सीकर पधारे थे।</p>
<p><strong>आत्मा में विचारों और कार्यों से कर्म का बंध होता है</strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने प्रवचन में कहा कि आचार्य श्री धर्मसागर जी कल्पवृक्ष के समान थे। जैसे भोगभूमि में कल्पवृक्ष से मनचाही वस्तु मिल जाती थी, वैसे ही उनसे हमें धर्म और ज्ञान की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि आत्मा में विचारों और कार्यों से कर्म का बंध होता है जिससे भावानुसार पुण्य या पाप अर्जित होता है। वर्तमान में 24 तीर्थंकरों ने धर्म का प्रवर्तन किया है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री धर्मसागर जी चर्या के प्रति अत्यंत सजग थे</strong></p>
<p>डॉ. राजेश पंचोलिया और विवेक पाटोदी के अनुसार आचार्य श्री ने गुणानुवाद करते हुए बताया कि आचार्य श्री धर्मसागर जी चर्या के प्रति अत्यंत सजग थे। बीमारी और कमजोरी के बावजूद वे प्रतिमाह देवपुरा विहार कर रात्रि विश्राम वहीं करते और अगले दिन आहार लेकर पुनः विहार करते थे। उन्होंने ऐसा तीन माह तक किया। उसी पुण्य के कारण सीकर की पहली धर्मसभा देवपुरा में हुई। वर्ष 1972 में लाडनूं का वर्षायोग पूर्ण कर 1973 का वर्षायोग आचार्य श्री धर्मसागर जी ने सीकर में किया और यहीं से वे महावीर स्वामी महोत्सव के लिए दिल्ली गए थे।</p>
<p><strong>प्रातः नींद खुलते ही पंच परमेष्ठी का ध्यान करें और मंदिर में पूजन </strong></p>
<p>मुनि श्री हितेन्द्रसागर जी ने कहा कि जिन दर्शन और भगवान के नाम स्मरण से सुख प्राप्त होता है और कष्ट दूर होते हैं। सभी को प्रातः नींद खुलते ही पंच परमेष्ठी का ध्यान कर मंदिर जाकर दर्शन, अभिषेक और पूजन करना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2020 के कोरोना काल का उदाहरण देते हुए बताया कि संघ के साधु-श्रावक-श्राविकाओं ने भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति से 20 दिन में रोगमुक्ति पाई। उस समय सीकर के युवा आशीष जयपुरिया ने बेलगांव जाकर प्राणों की बाजी लगाकर संघ सेवा की जो प्रशंसनीय है।</p>
<p><strong>37 पिच्छी के साथ आचार्यश्री का होगा मंगल प्रवेश और 58वां चातुर्मास</strong></p>
<p>नगर के इतिहास में पहली बार आचार्य श्री का यह मंगल प्रवेश 10 मुनिराज, 20 आर्यिका माताजी, 1 ऐलक, 4 क्षुल्लक और 1 क्षुल्लिका सहित 37 पिच्छी के साथ होगा। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर के महेश बाकलीवाल, संतोष विनायगा, अजीत जयपुरिया, अभिनव सेठी और आशीष जयपुरिया के अनुसार संघ दिगंबर जैन चन्द्रप्रभ जिनालय से प्रस्थान कर संघ चैत्यालय, नगर के विभिन्न जिनालयों के दर्शन करता हुआ सिल्वर जुबली रोड, स्टेशन रोड, अहिंसा सर्किल, जाट बाजार, कोतवाली रोड, बावड़ी गेट और बजाज रोड होते हुए पारस भवन दंग की नसिया पहुंचेगा, जहां आचार्य श्री का 58वां चातुर्मास होगा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_dharmasagar_ji_to_make_an_auspicious_entry_into_his_birthplace_in_sikar_for_the_second_time/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री वर्धमानसागर जी का लूंणवा में 27 जून को भव्य मंगल प्रवेश : आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी की प्रतिमा पूर्ण विधि विधान से होगी विराजित  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/grand_auspicious_entry_of_acharya_shri_vardhamansagar_ji_into_lunwa_on_june_27/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/grand_auspicious_entry_of_acharya_shri_vardhamansagar_ji_into_lunwa_on_june_27/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 07:41:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Kalp Shri Shrutsagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhamansagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar monk]]></category>
		<category><![CDATA[Idol]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Kalash Yatra श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Adinath]]></category>
		<category><![CDATA[Lunwa]]></category>
		<category><![CDATA[Mahavir Swami]]></category>
		<category><![CDATA[Scriptural Study]]></category>
		<category><![CDATA[Shrifal Jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[कलशयात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतिमा]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान आदिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[महावीर स्वामी]]></category>
		<category><![CDATA[लूणवा]]></category>
		<category><![CDATA[स्वाध्याय]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=108638</guid>

					<description><![CDATA[गुरु शिक्षक माता, पिता ,परिजन का टोकना गलत लगता हैं किंतु वह जीवन की भलाई के लिए कहते हैं। विवेक द्वारा आप उनके कहने का गुण दोष समझ सकते हैं। विवेक से पुण्य का अर्जन होता है। यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने विहार के समय धर्मसभा में प्रकट की। लूंणवा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>गुरु शिक्षक माता, पिता ,परिजन का टोकना गलत लगता हैं किंतु वह जीवन की भलाई के लिए कहते हैं। विवेक द्वारा आप उनके कहने का गुण दोष समझ सकते हैं। विवेक से पुण्य का अर्जन होता है। यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने विहार के समय धर्मसभा में प्रकट की। <span style="color: #ff0000">लूंणवा से पढ़िए, डॉ.राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>लूंणवा।</strong> जीवन में सर्वसंपन्नता विवेक और विनय गुण से प्राप्त होती है। आपको गुरु शिक्षक माता, पिता,परिजन का टोकना गलत लगता हैं किंतु वह जीवन की भलाई के लिए कहते हैं। विवेक द्वारा आप उनके कहने का गुण दोष समझ सकते हैं। विवेक से पुण्य का अर्जन होता है। यह धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने विहार के समय धर्मसभा में प्रकट की। आचार्य श्री ने कहा कि विवेक से हम अतीत और भविष्य को समझ सकते हैं। वर्तमान ठीक करेंगे तो भविष्य भी हमारा ठीक होगा। विवेक से ज्ञान मिलता है। विवेक और ज्ञान एक दूसरे के पूरक है और ज्ञान हमें स्वाध्याय से मिलता है। स्वाध्याय स्वयं निज आत्मा का अध्ययन होता है।</p>
<p><strong>आदिनाथ से लेकर महावीर स्वामी का जीवन हमारे समक्ष </strong></p>
<p>स्वाध्याय से हम वर्तमान भविष्य की तैयारी कर सकते हैं। जन्म मरण से गति पर्याय जो मिलती है वह किए गए कार्यों के अनुसार पुण्य या पाप अनुसार प्राप्त होती है। भगवान आदिनाथ से लेकर महावीर स्वामी तक का जीवन हमारे समक्ष है कि वह कैसे महापुरुष भगवान बने हैं। आचार्य श्री ने बताया कि भगवान महावीर सिंह की पर्याय में होने के बावजूद पुण्य से महावीर स्वामी बने हैं।</p>
<p><strong>आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी का पूजन होगा</strong></p>
<p>प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा में प्रथम पट्टाधीश आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से दीक्षित आचार्य कल्प श्री श्रुतसागर जी महाराज की प्रतिमा उनकी समाधि स्थली अतिशय क्षेत्र लूणवा जिला नागौर में 27 जून को परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ 37 पिच्छी के सानिध्य में मंत्रोचार विधिपूर्वक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान सहित विराजित की जाएगी। इस अवसर पर आचार्य संघ के आगमन के पश्चात आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी महाराज का पूजन होगा।</p>
<p><strong>महिलाओं की कलशयात्रा निकाली जाएगी</strong></p>
<p>महिलाओं की कलशयात्रा के बाद ध्वजारोहण, कलश स्थापना चित्र अनावरण ,दीप प्रज्वलन, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन, पूजन, जिनवाणी भेंट, विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों द्वारा धार्मिक क्रिया की जाएगी। आचार्य श्री के प्रवचन के बाद आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी की प्रतिमा पूर्ण विधि विधान मंत्रोच्चार से पुण्यार्जक द्वारा विराजित होगी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/grand_auspicious_entry_of_acharya_shri_vardhamansagar_ji_into_lunwa_on_june_27/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>9वां संयम वर्षवर्द्धन दिवस 25 अप्रैल को: वैशाख शुक्ल दशमी पर तिथि अनुसार विशेष, आर्यिका महायशमती ने आर्यिकाओं की परंपरा को किया गौरवान्वित </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/9th_sanyam_varshavardhan_day_on_25th_april/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/9th_sanyam_varshavardhan_day_on_25th_april/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:33:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[9th Spiritual Discipline Anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[9वां संयम वर्षवर्द्धन दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shree Shantisagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shree Vardhmansagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Shree Mahayashmati Mataji. श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Vaishakh Shukla Dashami]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका श्री महायशमति माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[वैशाख शुक्ल दशमी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=105540</guid>

					<description><![CDATA[भारतीय संस्कृति के उन्नयन में श्रमण संस्कृति का महनीय योगदान है। श्रमण संस्कृति के बिना भारतीय संस्कृति की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस गौरवमयी श्रमण परंपरा में चतुर्विध संघ के अंतर्गत आर्यिकाओं का भी अहम योगदान रहा है। धर्म और संस्कृति की रक्षा में महिलाओं का योगदान प्रमुख है। संस्कारों से धर्म और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भारतीय संस्कृति के उन्नयन में श्रमण संस्कृति का महनीय योगदान है। श्रमण संस्कृति के बिना भारतीय संस्कृति की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस गौरवमयी श्रमण परंपरा में चतुर्विध संघ के अंतर्गत आर्यिकाओं का भी अहम योगदान रहा है। धर्म और संस्कृति की रक्षा में महिलाओं का योगदान प्रमुख है। संस्कारों से धर्म और संस्कृति निरंतर बनी रहती है। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, डॉ.सुनील जैन संचय की यह प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> भारतीय संस्कृति के उन्नयन में श्रमण संस्कृति का महनीय योगदान है। श्रमण संस्कृति के बिना भारतीय संस्कृति की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस गौरवमयी श्रमण परंपरा में चतुर्विध संघ के अंतर्गत आर्यिकाओं का भी अहम योगदान रहा है। धर्म और संस्कृति की रक्षा में महिलाओं का योगदान प्रमुख है। संस्कारों से धर्म और संस्कृति निरंतर बनी रहती है। जैन परंपरा में आर्यिका के रूप में नारी को महत्वपूर्ण पूजनीय स्थान प्राप्त है। आर्यिकाओं के उपदेश से समाज, संस्कृति के उत्थान में नई प्रेरणा मिलती है। मानवीय मूल्यों की संरचना में आर्यिकाओं का योगदान महत्वपूर्ण है। आर्यिकाओं की गौरवशाली परंपरा में आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज जी की अक्षुण्ण पट्ट परंपरा के आचार्य श्री वर्धमानसागर जी की सुयोग्य सुशिष्या आर्यिका श्री महायशमति माताजी का महनीय योगदान है। आर्यिका श्री महायशमति माताजी का जन्म सनावद, जिला खरगोन (मप्र) में 3 जनवरी 1989 पोष वदी ग्यारस को हुआ था। जन्म नाम सिद्धा जैन पंचोलिया था। आपके पिता श्रावक श्रेष्ठी राजेश जैन पंचोलिया और माता संगीता पंचोलिया हैं। आपने लौकिक शिक्षा एमएससी (आईटी) तक ग्रहण की। बचपन से ही आपके मन में वैराग्य के प्रति लगाव था। पारिवारिक धार्मिक संस्कार के कारण 8 वर्ष की उम्र में सनावद में धार्मिक फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में आर्यिका माता का अभिनय किया। स्कूल, समाज में सांस्कृतिक गतिविधियों में विभिन्न अभिनय, पंचकल्याणक में अष्ट कुमारी का अभिनय, ब्राह्मी-सुंदरी का अभिनय बड़ी कुशलता के साथ किया।</p>
<p><strong>खेलकूद में दिखाई अपनी प्रतिभा</strong></p>
<p>अध्ययन के दौरान स्कूल में कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया। जिसमें अनेक पुरस्कार प्राप्त किए। जिसमें प्रमुख हैं- जूडो-कराटे में राज्य स्तर पर गोल्ड मैडल, राष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर मेडल, कराटे में ब्लैक बेल्ट जैसे पुरस्कार मिले। वहीं स्कूल, कॉलेज में ट्रेंनिग भी दी</p>
<p><strong>वैराग्य का बीजारोपण</strong></p>
<p>हम देखते हैं कि वर्तमान के युवक-युवतियों को फिल्मी स्टार, क्रिकेट खिलाड़ियों से ऑटोग्राफ का शौक रहता है किंतु इन्हें आचार्याे, मुनियों, आर्यिका माताजी से डायरी में आशीर्वाद लिखवाने की गहन रुचि थी। बचपन से ही धार्मिक संस्कार प्राप्त होने के कारण धर्म मार्ग पर आगे बढ़ती रहीं। दादाजी की दीक्षा के बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने आशीर्वाद में लिखा कि -कुल परंपरा अनुसार धर्म और त्याग मार्ग पर आगे बढ़ो। आचार्यश्री के इस आशीर्वचन का सिद्धा दीदी पर काफी प्रभाव पड़ा। अल्पायु से ही दादाजी के साथ मंदिर जाना, रात्रि को मंदिर में पाठशाला जाना, आलू-प्याज आदि जमींकंद का सेवन नहीं किया।</p>
<p><strong>दादाजी की दीक्षा’ </strong></p>
<p>जब सिद्धा दीदी की उम्र मात्र 4 वर्ष की थी तब आपके दादाजी श्री श्रवणबेलगोला में आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज के सिद्ध हस्त कर कमलों से मुनि दीक्षित होकर मुनि श्री चारित्र सागर जी महाराज नाम करण हुआ। जब आपकी उम्र मात्र 13 वर्ष की थी। तब गृह नगर सनावद में ही मुनि श्री चारित्र सागर जी की समाधि निकटता से देखने का अवसर मिला।</p>
<p><strong>आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के संघ में शामिल</strong></p>
<p>सिद्धा दीदी, श्री सम्मेद शिखर जी पर वर्ष 2011 में विजयादशमी के दिन आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के संघ में शामिल हो गईं। पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से अतिशय क्षेत्र पपौरा जी जिला टीकमगढ़ (म.प्र.) में वर्ष 2012 में आपने अक्षय तृतीया के दिन आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत पूर्ण रूप से अपनाकर जीवन संयम की ओर मोड़ लिया। सिद्धा दीदी के रूप में आपने अपनी साधना, ओजस्वी प्रवचन, लेखन, संचालन आदि के माध्यम से अल्प समय में अपना एक अलग स्थान बना लिया। मेरा सौभाग्य रहा है कि सिद्धा दीदी जी से अनेक बार चर्चा, परिचर्चा का अवसर मिला। आपका स्नेह और वात्सल्य सदैव मुझे मिला। आचार्यश्री के सान्निध्य में विद्वत संगोष्ठियों में मुझे संयोजक के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। आयोजन संबंधी कोई भी जानकारी मुझे सिद्धा दीदी से ही मिलती थी। 2018 में श्रवणबेलगोला में संपन्न गोमटेश्वर बाहुबली भगवान के महमस्तकाभिषेक के समय भी आपसे अनेक बार चर्चा करने का अवसर मिला। जानकारी आदि आपसे प्राप्त की। सिद्धा दीदी ने जैन संस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे खुद युवा अवस्था में संयम के मार्गपर चलकर दूसरों के लिए प्रेरणा का अनुकरणीय उदाहरण बनीं। साथ ही उन्होंने अपने लेखन, प्रवचन आदि के माध्यम से युवाओं में नैतिकता का शंखनाद किया।</p>
<p><strong> आर्यिका दीक्षा का बना अद्भुत संयोग </strong></p>
<p>29 वर्ष की युवावस्था में ग्रहण की आर्यिका दीक्षा तारीख 25 अप्रैल 2018 वैशाख शुक्ल दशमी को विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल श्रवणबेलगोला, कर्नाटक में आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने विधि विधान के साथ आर्यिका दीक्षा के संस्कार प्रदान किए। आर्यिका दीक्षा का यह महोत्सव अपने आप में अनूंठा था। दीक्षार्थी दीदी के चेहरे पर मनचाही कामना पूर्ति की झलक मुस्कान स्पष्ट देखी जा सकती थी। दीक्षा के समय 29 वर्ष की आयु थी। इस उम्र में जहां युवा वर्ग अपना संसार वर्द्धन करता है। वहीं दीक्षार्थी अपना मोक्षमार्ग वर्द्धन करने निकल पड़ीं थीं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा भव्य जैनेश्वरी दीक्षा श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला, कर्नाटक में प्रदान कर वैराग्य पथ पर अग्रसर कर नवीन नामकरण अपने श्री मुख से उच्चारित किए। गृहस्थ अवस्था का नाम सिद्धा दीदी था , जो सिद्ध भगवान का सूचक है। दीक्षा के बाद ड्रेस, एड्रेस दोनों बदले। आचार्यश्री ने नया नामकरण आर्यिका श्री महायशमति माता जी किया, जो कि भगवान के 1008 नामों में एक नाम है। 468 नंबर श्री महायश नाम भगवान का है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि आपके दादाजी तिलोक चंद सराफ सनावद ने भी वर्ष 1993 को श्रवण बेलगोला में आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री चारित्र सागर जी बने। आपकी बुआजी ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षा लेकर आर्यिका श्री निर्माेह मति माताजी हैं। आपके ताऊजी के लड़के मुनि श्री श्रेष्ठ सागर जी हैं। ऐसे संयोग पुण्यशाली आत्माओं धर्मात्माओं को नसीब होते हैं।</p>
<p><strong>सहज और सरल हैं आर्यिका महायशमती</strong></p>
<p>विलक्षण और तपस्वी साध्वी के रूप में आपकी पहचान है। समाज और संस्कृति को भी एक नई दिशा दिखा रहीं हैं। वे सहज और सरल हैं । उन्होंने समाज में अभिनव चेतना और जागृति का संचार किया। माता जी ने अपने नाम को सार्थक किया है, वे निरंतर ज्ञानाराधना और शास्त्रानुशासन के संबल से अपने जनकल्याणी और जगतकल्याणी विचारों को आगम के संबल से ऊर्जित होकर साधनातीत जीवन की आत्यंतिक गहराईयों- अनुभूतियों और वात्सल्य के संचार से मानवीय चिंतन के सतत परिष्कार में सतत सन्नद्ध होकर जीवन को एक सहज-सरल जीने की एक कला बताने में आचार्यश्री की प्रेरणा से निरंतर संलग्न हैं। आर्यिकाओं की परंपरा को आपने गौरवान्वित किया है।</p>
<p>25 अप्रैल वैशाख शुक्ल दशमी 9वां संयम वर्षवर्द्धन दिवस के इस पावन अवसर पर यही कामना है कि आचार्य श्री शांतिसागर जी की परंपरा में शांति मार्ग पर वीरता, दृढ़ता से शिव, मोक्ष को लक्ष्य बना कर श्रुत का संवर्धन करते हुए धर्ममार्ग पर अजीत रहते हुए वर्तमान के वर्धमान सम वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमानसागर जी का यश बढ़ाते हुए उत्तम चारित्र का पालन कर महायश की प्राप्त करें। आर्यिका महायशमती माता जी के रूप में आप आचार्यश्री की क्षत्रछाया में निरंतर जहां अपनी रत्नत्रय की साधना में संलग्न हैं। वहीं गहन स्वाध्याय, अध्ययन, मनन-चिंतन जारी है साथ ही अपनी प्रखर, तेजस्वी, उर्जावान वाणी के द्वारा प्रभावना कर रहीं हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/9th_sanyam_varshavardhan_day_on_25th_april/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>महावीर जयंती पूर्व भगवान महावीर का किया पंचामृत अभिषेक : पुण्यार्जक परिवारों ने भक्ति भाव से अभिषेक किया </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/panchamrit_abhishekam_performed_for_lord_mahavir_ahead_of_mahavir_jayanti/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/panchamrit_abhishekam_performed_for_lord_mahavir_ahead_of_mahavir_jayanti/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Mar 2026 10:00:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhaman Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Chulgiri]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Mahavir]]></category>
		<category><![CDATA[Mahavir Jayanti]]></category>
		<category><![CDATA[panchamrit abhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[चुलगिरी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[पंचामृत अभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान महावीर]]></category>
		<category><![CDATA[महावीर जयंती]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[साधु]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=103249</guid>

					<description><![CDATA[चुलगिरी में आचार्य श्री वर्धमानसागर जी 35 साधुओं के सानिध्य में 21 फीट के खड्गासन वर्तमान शासन नायक 24 वें तीर्थकर भगवान महावीर का महामस्तकाभिषेक श्री महावीर जन्म कल्याणक उपलक्ष्य में पंचामृत अभिषेक किया गया। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; जयपुर। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी परंपरा में आचार्य श्री देशभूषण जी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>चुलगिरी में आचार्य श्री वर्धमानसागर जी 35 साधुओं के सानिध्य में 21 फीट के खड्गासन वर्तमान शासन नायक 24 वें तीर्थकर भगवान महावीर का महामस्तकाभिषेक श्री महावीर जन्म कल्याणक उपलक्ष्य में पंचामृत अभिषेक किया गया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी परंपरा में आचार्य श्री देशभूषण जी महाराज की मंगल प्रेरणा से निर्मित अतिशय क्षेत्र अनेक समाधिस्थ साधुओं की छतरी स्थली चुलगिरी में आचार्य श्री वर्धमानसागर जी 35 साधुओं के सानिध्य में 21 फीट के खड्गासन वर्तमान शासन नायक 24 वें तीर्थकर भगवान महावीर का महामस्तकाभिषेक श्री महावीर जन्म कल्याणक उपलक्ष्य में पंचामृत अभिषेक किया गया। कई पुण्यार्जक परिवारों ने भक्ति भाव से अभिषेक किया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-103253" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028.jpg" alt="" width="1" height="1" /><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-103253" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-2048x1536.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-990x742.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260328-WA0028-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>शनिवार को प्रातः 21 फीट के खड्गासन श्री महावीर स्वामी का जल अभिषेक,भव्य पंचामृत अभिषेक, नारियल रस, शर्करा,घी, क्षीर, दूध, सर्वोषधि चार कलश, चंदन, पुष्प, मंगल आरती, सुगंधित जल आदि से महामस्तकाभिषेक एवं शांति धारा संघ सान्निध्य में हुई। सुरेश सबलावत, राजकुमार सेठी अनुसार आचार्य श्री संघ की आहार चर्या के बाद सामयिक राणा जी की नसिया में हुई। आचार्य श्री संघ का संभावित शनिवार शाम को 2.7 किमी विहार दिगंबर मंदिर सेठी नगर से होगा। 29 मार्च को प्रातः 4 किमी पाटोदी जी के दिगंबर मंदिर मोदीखाना के लिए विहार होगा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/panchamrit_abhishekam_performed_for_lord_mahavir_ahead_of_mahavir_jayanti/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गुरु चरण शरण से कष्ट विपत्ति कम होती है: आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने दीक्षा पूर्व दीक्षार्थियों को दिए मंगल आशीर्वचन  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/taking_refuge_at_the_feet_of_the_guru_reduces_suffering_and_adversity/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/taking_refuge_at_the_feet_of_the_guru_reduces_suffering_and_adversity/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 13:59:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar JI]]></category>
		<category><![CDATA[Countess Aryika Shri Saraswati Mati]]></category>
		<category><![CDATA[Countess Aryika Shri Swasti Bhushan Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Ganadhar Vidhan]]></category>
		<category><![CDATA[Initiation Ceremony]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jaineshwari initiation]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[गणधर विधान]]></category>
		<category><![CDATA[गणनी आर्यिका श्री सरस्वती मति]]></category>
		<category><![CDATA[गणनी आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैनेश्वरी दीक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दीक्षा संस्कार]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=100720</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी, गणनी आर्यिका श्री सरस्वती मति, गणनी आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में संघ सहित विराजित हैं। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने कहा कि मोक्षमार्ग ,वैराग्य, संयम से सभी प्राणी घबराते हैं उन्हें कठिन लगता है। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; पदमपुरा। आचार्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमानसागर जी, गणनी आर्यिका श्री सरस्वती मति, गणनी आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में संघ सहित विराजित हैं। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने कहा कि मोक्षमार्ग ,वैराग्य, संयम से सभी प्राणी घबराते हैं उन्हें कठिन लगता है। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा।</strong> आचार्य श्री वर्धमानसागर जी, गणनी आर्यिका श्री सरस्वती मति, गणनी आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में संघ सहित विराजित हैं। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने कहा कि मोक्षमार्ग ,वैराग्य, संयम से सभी प्राणी घबराते हैं उन्हें कठिन लगता है। पहाड़ दूर से बहुत कठिन लगता है किंतु निकट जाने पर जो चलना प्रारंभ करता है, उसका रास्ता सरल और आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि उसी प्रकार मोक्ष मार्ग भी आसान है। सम्यक दर्शन, सम्यकज्ञान ,सम्यक चारित्र ,धर्म से राह सरल और आसान हो जाती है। तब मोक्ष रूपी फल मिलता है। धर्म रूपी बीज को गुरु चरणों में अर्चना निष्ठा समर्पण से सिंचित करते रहना चाहिए। दोनों दीक्षार्थियों ने आज गणघर वलय विधान में गणधरों की रिद्धियां की अर्चना भक्ति कर अर्घ समर्पित किए हैं। देव शास्त्र गुरु की चरण शरण से राह आसान हो जाती है। जिन सुकुमाल मुनि को बिस्तर पर सरसों का दाना भी चुभता था। उन्होंने भी दीक्षा ली है। आज सभी अनुमोदना करने के लिए एकत्र हुए है।</p>
<p><strong>तीन वलय वाले गणधर विधान में 48 अर्घ्य किए समर्पित </strong></p>
<p>अनुमोदना करने के साथ दीक्षा भी लेना चाहिए। घर हो या संयम साधु जीवन हो कर्मों के कारण कष्ट और विपत्ति रोग आते हैं। भगवान की भक्ति से सब रोग कष्ट पीड़ा दूर होती है। दीक्षार्थी लादूराम जी भी आचार्य श्री धर्मसागर जी के समय से संघ परंपरा से जुड़े हैं। गुरुचरण से शरण मिलती है। भावना भव नाशिनी होती है। भावना और भव से दुख दूर होते हैं। यह मंगल धर्म देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने दीक्षा पूर्व दीक्षार्थियों द्वारा किए गए गणधर विधान के पूजन के अवसर पर प्रकट की। पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा श्री ब्रह्मचारी लादूराम जी और बालब्रह्मचारी सत्यम भैय्या के केशलोचन बाद मस्तक और हाथों पर दीक्षा संस्कार कर जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान की जाएगी। तीन वलय वाले गणधर विधान में प्रथम वलय में आठ ,दूसरे में 16 और तीसरे वलय में 24 कुल 48 अर्घ्य समर्पित किए गए। इसके बाद आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पूजन किया गया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/taking_refuge_at_the_feet_of_the_guru_reduces_suffering_and_adversity/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने नव निर्मित प्रतिमाओं का किया परीक्षण : आचार्य श्री ने आवश्यक मार्गदर्शन देकर कार्य जल्द पूर्ण करने की प्रेरणा दी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhaman_sagar_ji_examined_the_newly_made_statues/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhaman_sagar_ji_examined_the_newly_made_statues/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 10:56:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar JI]]></category>
		<category><![CDATA[Atishay Kshetra Shri Padmapura]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Main Deity Lord Shri Padmaprabh]]></category>
		<category><![CDATA[Padmapura Temple Committee]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अतिशय क्षेत्र श्री पदमपुरा]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पदमपुरा मंदिर कमेटी]]></category>
		<category><![CDATA[मूलनायक भगवान श्री पद्मप्रभ]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=99881</guid>

					<description><![CDATA[ आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 32 पिच्छी सहित अतिशय क्षेत्र श्री पदमपुरा विराजित हैं। गुरुवार को आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने संघ सहित 18 से 22 फरवरी तक होने वाले पंच कल्याणक में प्रतिष्ठित होने वाली प्रतिमाओं का निरीक्षण किया। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; पदमपुरा। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 32 [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 32 पिच्छी सहित अतिशय क्षेत्र श्री पदमपुरा विराजित हैं। गुरुवार को आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने संघ सहित 18 से 22 फरवरी तक होने वाले पंच कल्याणक में प्रतिष्ठित होने वाली प्रतिमाओं का निरीक्षण किया। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 32 पिच्छी सहित अतिशय क्षेत्र श्री पदमपुरा विराजित हैं। गुरुवार को आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने संघ सहित 18 से 22 फरवरी तक होने वाले पंच कल्याणक में प्रतिष्ठित होने वाली प्रतिमाओं का निरीक्षण किया। पदमपुरा मंदिर कमेटी के राजकुमार कोठारी और अन्य पदाधिकारी भी साथ में रहे। आचार्य श्री ने आवश्यक मार्गदर्शन और अन्य कार्य जल्द पूर्ण करने की प्रेरणा दी। इसके पूर्व बुधवार को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी, आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी सानिध्य में मूलनायक भगवान श्री पद्मप्रभ की विशेष अष्ट द्रव्यों से, जिसमें 8 से अधिक जल, चंदन, अनेक अक्षत, अनेक प्रकार के पुष्प, अनेक प्रकार के मोदक नैवेद्य दीप, धूप, फल, सूखे मेवे अनाज अर्ध्य से भगवान के गुणों की विशेष पूजा की गई। पूजन विभिन्न सौभागशाली पुण्यार्जक परिवारों, आचार्य संघ के ब्रह्मचारी, ब्रह्मचारिणियों, चौका व्यवस्था के सहयोगी श्रावक-श्राविकाओं द्वारा समर्पित किए गए। पूजन के सभी अर्ध्य का मंत्रोच्चार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी, मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवं और अन्य साधुओं ने किया।</p>
<p><strong>कल्याणक भूमि में पूजन से कर्मों का क्षय होकर असीम पुण्य की प्राप्ति </strong></p>
<p>संभवतः प्रथम बार 108 से अधिक अष्ट द्रव्यों से पूजन हुई। सैकड़ों भक्तों ने पूजन कर धर्मलाभ लिया। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने उपदेश में बताया कि देव शास्त्र और गुरुओं के सानिध्य में सिद्ध क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र, कल्याणक भूमि में पूजन से कर्मों का क्षय होकर असीम पुण्य की प्राप्ति होती हैं। सुरेश सबलावत ने बताया कि बुधवार को आर्यिका श्री सरस्वती माताजी का संघ सहित आगमन हुआ। गुरुवार को आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी का अल्प प्रवास के बाद चाकसू की ओर संघ सहित मंगल विहार हुआ। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के आशीर्वाद से प्रतिदिन पुण्यशाली भक्तों द्वारा पंच कल्याणक में पात्र बनने की स्वीकृति दी जा रही है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhaman_sagar_ji_examined_the_newly_made_statues/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री धर्मसागर जी का 113 वां अवतरण दिवस मनाया : आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने दीक्षा गुरु को स्मरण कर उनका गुणानुवाद किया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/celebrated_the_11_th_birth_anniversary_of_acharya_shri_dharamsagar_/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/celebrated_the_11_th_birth_anniversary_of_acharya_shri_dharamsagar_/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 13:03:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[13 वां अवतरण दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[13th Birth Anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Dharmasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhmansagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Eulogy]]></category>
		<category><![CDATA[Initiation Guru]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री धर्मसागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[गुणानुवाद]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दीक्षा गुरु]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=97632</guid>

					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की अक्षुण्ण मूल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर संघ सानिध्य में आचार्य श्री धर्मसागर जी का 113 वां अवतरण दिवस गुरु भक्तों ने मनाया। इस अवसर पर आचार्य श्री धर्मसागर विधान का पूजन किया गया। निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया इंदौर की यह खबर&#8230; निवाई। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की अक्षुण्ण मूल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर संघ सानिध्य में आचार्य श्री धर्मसागर जी का 113 वां अवतरण दिवस गुरु भक्तों ने मनाया। इस अवसर पर आचार्य श्री धर्मसागर विधान का पूजन किया गया। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया इंदौर की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की अक्षुण्ण मूल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर संघ सानिध्य में आचार्य श्री धर्मसागर जी का 113 वां अवतरण दिवस गुरु भक्तों ने मनाया। इस अवसर पर आचार्य श्री धर्मसागर विधान का पूजन किया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने दीक्षा गुरु को स्मरण कर उनका गुणानुवाद कर बताया कि आज ऐसे भव्य पुण्यात्मा को स्मरण करने का दिन है। जिनके जन्म दिवस और समाधि दिवस पर तीर्थंकर भगवान का कल्याणक दिवस था और जो श्रमण परंपरा के गौरव प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की मूल परंपरा में तृतीय पट्टाधीश बने। गंभीरा में सन 1914 में श्री धर्मनाथ भगवान के केवल ज्ञान कल्याणक दिवस पर जन्मे चिरंजीलाल जी का प्राथमिक जीवन संघर्ष तथा निर्माेहता के साथ बीता। मात्र 15 वर्ष की उम्र में शुद्ध जल के नियम 30 वर्ष की उम्र में क्षुल्लक तथा 38 वर्ष की उम्र में मुनि दीक्षा ली।</p>
<p><strong>साधु जीवन के 43 वर्षाें में 76 दीक्षा दीं</strong></p>
<p>संयोग देखिए कि श्री धर्मनाथ भगवान के कल्याणक पर जन्मे आपकी मुनि दीक्षा बाद नाम भी भगवान के नाम पर ही मुनि श्री धर्मसागर जी किया गया। सन 1969 में आप द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिवसागर जी की समाधि के बाद तृतीय पट्टाधीश बनाए गए। साधु जीवन के 43 वर्षाें में आपने 76 दीक्षा दीं। जिसमे आचार्य पदारोहण पर 11 भव्य प्राणियों को दीक्षा दी। जिसमें हमें भी मुनि दीक्षा देकर हम पर उपकार किया। यह मंगल देशना आचार्यश्री वर्धमान सागर जी ने श्री धर्म सागर विधान के पूजन पर प्रगट की।</p>
<p><strong>113 वां वर्ष वर्धन अवतरण दिवस </strong></p>
<p>पवन बोहरा के अनुसार वर्तमान में आचार्य श्री वर्धमान सागर, आर्यिका श्री शुभमति माताजी सहित 6 शिष्य एवं शिष्या धर्म प्रभावना कर रहे हैं। आज आपका 113 वां वर्ष वर्धन अवतरण दिवस है। सन 1987 में आपकी समाधि श्री मुनिसुव्रत नाथ भगवान के केवल ज्ञान कल्याणक के दिन सीकर में हुई थी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/celebrated_the_11_th_birth_anniversary_of_acharya_shri_dharamsagar_/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शाही ठाठ बाट से कराया आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का नगर प्रवेश : पग-पग पर चरण प्रक्षालन कर सत्कार में उमड़े श्रद्धालु </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhaman_sagar_ji_was_given_a_grand_and_royal_welcome_upon_/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhaman_sagar_ji_was_given_a_grand_and_royal_welcome_upon_/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 07:48:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar Ji Sangh]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nasiya Ji Temple]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Mangal Pravesh]]></category>
		<category><![CDATA[Prathamacharya Shri Shantisagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन नसिया जी मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी]]></category>
		<category><![CDATA[मंगल प्रवेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=96425</guid>

					<description><![CDATA[शीतकालीन प्रवास के लिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का रविवार दोपहर 1 बजे भव्य मंगल प्रवेश हुआ। संतों की अगवानी के लिए सुबह 8 बजे से ही टोंक जिले और आसपास से श्रावक पहुंचना शुरू हो गए।निवाई से पढ़िए, यह खबर&#8230; निवाई। कई जन्मों का पुण्य उदय जब जीवन में आता है तब [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>शीतकालीन प्रवास के लिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का रविवार दोपहर 1 बजे भव्य मंगल प्रवेश हुआ। संतों की अगवानी के लिए सुबह 8 बजे से ही टोंक जिले और आसपास से श्रावक पहुंचना शुरू हो गए।<span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> कई जन्मों का पुण्य उदय जब जीवन में आता है तब जाकर एक साथ ऐसे दिगंबर जैन संतों का दर्शन सानिध्य मिल पाता है। यह बात एकदम सत्य है जीवन में सबकुछ संभव है परंतु, संतों का संगम सानिध्य मिलना महा दुर्लभ है। धरती बिछौना है, आसमान ओढ़ना है और संयम, तप, त्याग ही जिनका ग़हना है। पारस जैन पार्श्वमणि पत्रकार कोटा का ये कहना है। जीवन में इनके चरणों में ही रहना है। जिसका हमें था इंतजार, जिसके लिए था मन बेकरार। वो घड़ी आ गईं-आ गई। जी हां, शीतकालीन प्रवास के लिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का रविवार दोपहर 1 बजे भव्य मंगल प्रवेश हुआ। संतों की अगवानी के लिए सुबह 8 बजे से ही टोंक जिले और आसपास से श्रावक पहुंचना शुरू हो गए। आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज का 3 साल बाद यहां शीतकालीन प्रवास के लिए आगमन हुआ है।</p>
<p>आचार्य श्री के मंगल प्रवेश को लेकर श्रावकों में अपार उत्साह देखा गया। जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला एवं राकेश संधी ने बताया कि निवाई की सीमा पर जैन समाज की कमेटी एवं श्रावक जनों ने अगवानी की। यहां से श्रावक नाचते-गाते जैन धर्म और गुरुदेव की जयकार लगाते हुए श्री शांतिनाथ अग्रवाल मंदिर की तरफ बढ़े। &#8216;गुरुवर आज मेरी कुटिया में आए हैं आओ बाबा पधारो बाबा&#8217; जैसे भजनों से चारों तरफ अध्यात्म बिखर गया। यहां से सभी संत श्री शांतिनाथ अग्रवाल मंदिर पहुंचे जहां से उन्हें विशाल शोभायात्रा के रूप में नसिया मंदिर तक ले जाया गया। शोभायात्रा से पूर्व अग्रवाल मंदिर में आचार्य श्री के शिष्य मुनि प्रभव सागर महाराज सहित सभी 26 साधुओं ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की भव्य अगवानी की। 28 दिन दूर रहने के बाद सभी साधुओं ने भाव विभोर होकर आचार्य श्री के दर्शन किए। इस दृश्य को देखकर वहां उपस्थित सभी श्रावक भाव विभोर हो उठे। अग्रवाल मंदिर पर बनाए गए मंच पर आचार्य श्री के सभी शिष्यों ने आचार्य वर्धमान सागर महाराज का पाद पक्षालन किया। इसके बाद गाजे बाजे के साथ विशाल शोभायात्रा रवाना हुई।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-96429" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251215-WA0034.jpg" alt="" width="1280" height="576" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251215-WA0034.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251215-WA0034-300x135.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251215-WA0034-1024x461.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251215-WA0034-768x346.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/12/IMG-20251215-WA0034-990x446.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />शोभायात्रा में उमड़ा धार्मिक उल्लास</strong></p>
<p>शोभायात्रा में सर्वप्रथम घोड़े पर युवक जैन ध्वज लेकर चल रहे थे पीछे प्रथम ऐरावत हाथी पर पाद प्रक्षालन कर्ता श्रेष्ठी जितेंद्र कुमार गजेंद्र कुमार जैन चवरियां परिवार बैठे हुए चल रहा था। दूसरे ऐरावत हाथी पर शास्त्र भेंट कर्ता श्रेष्ठी नेमीचंद संजयकुमार जैन सिरस जिनवाणी लेकर चल रहे थे। तीसरे ऐरावत हाथी पर चित्र अनावरण और दीप प्रज्वलन कर्ता दामोदर प्रसाद, हनुमान प्रसाद, गिर्राज प्रसाद जैन आचार्य शांति सागर महाराज की तस्वीर लेकर चल रहे थे। जैन समाज के मीडिया प्रभारी विमल जौंला एवं राकेश संघी ने निवाई का सोनम डीजे बैंड अपने मधुर भजनों की धुन बजाता हुआ चल रहा था। पीछे महिला मंडल जैन ध्वज लेकर जयकारा लगाते हुए चल रही थी। इसके बाद नैनवा से आया बैंड जैन भजनों पर युवक भक्ति नृत्य के साथ झुमते हुए चल रहे थे। साथ में महिला मंडल अपनी ड्रेस कोड में साफा लगाते हुए चल रही थी। अंत में किशनगढ़ से आया आर के बैंड आचार्य श्री के साथ अपने भजनों की मधुर ध्वनि के साथ धुन बजाता हुआ चल रहा था। जिस पर सभी युवक आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज के जयकारे लगाते हुए झूमते हुए भक्ति नृत्य के साथ चल रहे थे।</p>
<p><strong>जयकारों से पूरा शहर गूंजायमान</strong></p>
<p>आचार्य श्री की भक्ति में ऐसा लग रहा था जैसे स्वर्ग से आकर देवलोक भक्ति कर रहे हो। निवाई शहर में रविवार को ऐसा लग रहा था जैसे स्वर्ग धरती पर उतर चुका है। चारों ओर आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज की जयकारों से पूरा शहर का वातावरण गूंजायमान हो गया। जैनेतर लोग भी आचार्य श्री के दर्शनों के लिए आतुर थे। निवाई शहर के नगर पालिका अध्यक्ष अध्यक्ष दिलीप इसरानी राजेश चौधरी और रतन गुर्जर ने भी आचार्य श्री के श्रीफल चढाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि शोभा यात्रा का जुलूस अग्रवाल मंदिर से रवाना होकर भगवान महावीर मार्ग अहिंसा सर्किल होता हुआ बपूई वालों के चैत्यालय होता हुआ पाटनी काम्प्लेक्स के बहार बनाए गए मंच पर पूर्व मुख्य सचेतक महावीर प्रसाद जैन की धर्मपत्नी पिस्तोल देवी, जितेंद्र कुमार गजेंद्र कुमार जैन चवरियां परिवार द्वारा आचार्य श्री का चांदी की थालियों में रजत कलश से पाद प्रक्षालन किया गया। जिसे देखने निवाई शहर के जैन और जैनेतर सभी श्रद्धालु उमड़ पड़े। इसके बाद जुलूस बड़ा बाजार बड़ा जैन मंदिर बिचला जैन मंदिर होता हुआ जैन नसियां स्थित संत निवास पहुंचा।</p>
<p><strong>यह समाजजन मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा कि जब नगर में दिगंबर संत आते हैं तो वह नगर सोना-सोना हो जाता है, और जब दिगम्बर साधु जाते हैं तो वह नगर सूना-सूना हो जाता है। पारस जैन &#8220;पार्श्वमणि ने बताया कि इस अवसर पर महावीर प्रसाद पराणा दिनेश चंवरिया, हेमचंद संधी, महावीर प्रसाद माधोराजपुरा, विष्णु बोहरा, राजेन्द्र बगड़ी, अमित कटारिया, गोपी कासलीवाल, शिखरचंद काला, धर्मचंद चंवरिया, पारसमल पराणा, गोपाल कठमाणा, शंभु कठमाणा, चंद्र प्रकाश जौंला, त्रिलोक सिरस, पवन कंटान, नीटू छामुनिया, धर्मचंद सर्राफ, कमल सर्राफ, धर्मेंद्र पासरोटिया, राजेश सर्राफ, पवन गुप्ता, पदम जौंला, आदिश गंगवाल, चेतन गंगवाल, पदम टोंग्या विमल गिन्दोडी, पवन बड़ागांव, विमल सेदरिया सहित अनेक लोग मौजूद रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhaman_sagar_ji_was_given_a_grand_and_royal_welcome_upon_/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ससंघ का निवाई में हुआ मंगल प्रवेश : समाजजनों ने बैंडबाजों के साथ कि भव्य अगवानी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhmansagar_ji_and_hisdisciples_/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhmansagar_ji_and_hisdisciples_/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 05:23:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar Ji Sangh]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nasiya Ji Temple]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Mangal Pravesh]]></category>
		<category><![CDATA[Prathamacharya Shri Shantisagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी]]></category>
		<category><![CDATA[मंगल प्रवेश]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=96401</guid>

					<description><![CDATA[ प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने चतुर्विध सऺघ सहित निवाई के जैन नसिया जी मंदिर और सभी जिन मन्दिरों के दर्शन कर भव्यातिभव्य मऺगल प्रवेश किया। निवाई से पढ़िए, यह खबर&#8230; निवाई। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने चतुर्विध सऺघ सहित निवाई के जैन नसिया जी मंदिर और सभी जिन मन्दिरों के दर्शन कर भव्यातिभव्य मऺगल प्रवेश किया। </strong><span style="color: #ff0000"><strong>निवाई से पढ़िए, यह खबर&#8230;</strong></span></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने चतुर्विध सऺघ सहित निवाई के जैन नसिया जी मंदिर और सभी जिन मन्दिरों के दर्शन कर भव्यातिभव्य महा मऺगल प्रवेश किया। अश्व, बग्घी, हाथी, डीजे कई बैंडबाजे, आचार्य श्री पर ड्रोन कैमरे से पुष्प वृष्टि, 57 रजत थालियों में दूध केशर, पुष्प रत्नों से चरण प्रक्षालन ,3 किमी की रांगोली, 76 से अधिक स्वागतद्वार नगर के अनेक सामाजिक, धार्मिक मंडलों सहित नगर के सभी धर्मों की सहभागिता आकर्षण का केंद्र रही। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने निवाई नगर प्रवेश पर आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि इसके पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 32 साधुओं सहित नगर गौरव आर्यिका श्री पूर्णिमा मति जी एवं अन्य साधुओं की जन्म नगरी निवाई में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य संघ के आगे श्रीजी शोभायात्रा में विराजित रहे निवाई की धरती का कण-कण आज इठला रहा था क्योंकि, धरती के भगवान के चरण आज उसकी धरती पर पड़ रहे थे।</p>
<p>आचार्य श्री शांति सागर महाराज की पंचम पट्टाधीश को अपनी भूमि पर 3 वर्ष बाद एक बार फिर पाकर निवाई वासियों का रोम-रोम पुलकित हो रहा था। रविवार प्रातः काल की बेला से ही से ही भक्तों का विभिन्न स्थानों से भक्तो आगमन प्रारम्भ हो चुका था। धर्म नगरी निवाई का बच्चा-बच्चा श्री सऺघ एव मेहमानो की अगवानी के लिए पूर्णतया तैयार था। दोपहर से ही सभी जनों के चेहरे पर उभरे खुशी के भाव स्पष्ट नजर आ रहे थे। निवाई वासियों के 3 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा अब पूरी होने जा रही थी। संघ का भव्य स्वागत करने हेतु निवाई प्रवेश की जगह पर भव्य तोरण द्वार बनवाया गया था। कदम-कदम पर आचार्य श्री के मंगल प्रवेश और अभिनंदन के होर्डिंग्स नजर आ रहे थे।</p>
<p>निवाई पूरी तरह से केशरिया रंग में रंगी थी। दोपहर 12 बजे से आस पास के गांवों से श्रद्धालुओं की अपार संख्या गुरु भक्ति के लिए प्रवेश द्वार पर पहुंचने लगीं और देखते ही देखते हजारों का अपार समूह जयकारों के उद्घोष से गूंजने लगा।  चारों और स्त्री पुरुष अगवानी करते नजर आ रहे थे। जिले की सभी समाज के सभी जन भव्य अगवानी हेतु उपस्थित थे। 2 बजे आचार्य श्री ने संघ सहित निवाई की सीमा में अग्रवाल दिगंबर जैन मंदिर में प्रवेश कर मूल नायक भगवान के दर्शन किए।शेष संघ के 26 साधुओं ने अगवानी की प्रथमाचार्य श्री शान्ति सागर जी व आचार्य श्री वर्धमानसागर जी की जयकारों से आकाश गुंजायमान हो उठा। प्रवेश द्वार पर आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन हुए। राजस्थान शासन के राजकीय अतिथि बनने के बाद निवाई में प्रथम बार प्रवेश हुआ। फिर प्रारम्भ हुई शोभायात्रा। आगे-आगे घोड़े, ऊंट, तरह-तरह के बैंड बाजे, साथ में विभिन्न पोशाकों में स्थानीय समाज जन। स्थानीय महिलाएं मस्तक पर कलश धारण कर चल रही थी। भक्तिभाव से युवाओं ने बैंड वादन किया।  मोसम भी अपनी मंद सुहानी धूप से आचार्य श्री की अगवानी कर रहा था ।निवाई का प्रत्येक नागरिक आज आचार्य संघ के दर्शन और शोभायात्रा में शामिल होने को आतुर था। श्रद्धालुओं के हुजूम के मध्य आचार्य संघ मानो किसी सिंह की भांति चल रहे थे। निवाई नगरी आज उत्साह और भावों की धरा नजर आ रही थी। दो किलोमीटर रंगोली युक्त नगर में सभी जिनालयों के भक्ति सिद्ध भक्ति सहित दर्शन किए मन्दिर जी मे दर्शन के उपरांत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री दिगंबर नसिया शांतिनाथ मंदिर के दर्शन कर आचार्य श्री सऺघ सहित मऺचासीन होने पर सर्वप्रथम श्री और आचार्य श्री शांति सागर जी एवं पूर्वाचार्यों के चित्रों समक्ष दीप प्रवज्जलन श्री दामोदर प्रसाद श्री हनुमानप्रसाद सिंघल परिवार ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन श्री महावीर प्रसाद,श्रीमती पिस्तौल देवी,जितेंद्र,गजेंद्र परिवार ने किया जिनवाणी श्री नेमीचंद मधुबाला संजय अंकित सिरस वाले परिवार निवाई ने भेंट की। नृत्य मंगलाचरण महिला मंडल ने किया तत्पश्चात आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज एवं पट्ट परंपरा के आचार्य वृन्द को अर्घ समर्पित किया गया। स्थानीय लोगो के सहयोग और समिति के मार्गदर्शन से गुरु प्रवेश के अवसर को एक ऐतिहासिक स्मृति बनाने में समाज के युवाओ ने श्रावकों ने अहम भूमिका निभाई। सकल दिगम्बर समाज द्वारा संघ की आहार बिहार व्यवस्था में तन,मन,धन ,से सहयोगियों का समाज ने कृतज्ञतापूर्वक सम्मान तिलक,माला,श्रीफल, स्मृति चिन्ह से किया ।इस अवसर पर आसपास के गांवों से जन समूह आचार्य संघ की अगवानी हेत निवाई आये। , जयपुर , किशनगढ़, कोटा , टोंक ,पीपल्दा लावा,डिग्गी टोडारायसिंह देवली,पिपलु,उनियारा, मालपुरा इचलकरंजी, धरियावद, सनावद, जोबनेर, इंदौर, और अन्य अनेक शहरों से श्रद्धालुओं का आगमन हुआ।हजारो जन समूह के भावों से भरी निवाई आज सच मे धर्म नगरी लग रही थी। शाम को संपूर्ण जैन समाज को वात्सल्य भोजन प्रसाद के पुण्यार्जक फूलचंद, महावीर प्रसाद निवाई रहे। 57वर्षों का विहार आपका, दिग्विजय सा लगता है। जहां पहुंच जाते है गुरुवर, समवशरण वहीं लगता है, तेरी चर्या से गुंजित गर्जित गर्वित हो गया गगन।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhmansagar_ji_and_hisdisciples_/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>संघ का 55 वर्षों के बाद वर्षायोग और श्री पारसनाथ भगवान की पंचकल्याण प्रतिष्ठा हुई : आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने कहा- मिथ्यात्व छोड़ें, सम्यक दर्शन प्राप्त करे संयम धारण करें </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/after_55_years_the_varshayoga_of_the_sangh_and_the_panch_kalyan_pratishtha_of_lord_parasnath_took_place/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/after_55_years_the_varshayoga_of_the_sangh_and_the_panch_kalyan_pratishtha_of_lord_parasnath_took_place/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Nov 2025 09:47:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar JI]]></category>
		<category><![CDATA[Adinath Jinalaya Nasiya Amirganj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Panchkalyan Pratishtha]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Parasnath Bhagwan]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आदिनाथ जिनालय नसिया अमीरगंज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पंचकल्याण प्रतिष्ठा]]></category>
		<category><![CDATA[श्री पारसनाथ भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=94258</guid>

					<description><![CDATA[नगर का सौभाग्य है कि सन 1970 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी का वर्षायोग हुआ और सन 1971 में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य संघ सान्निध्य में हुई। जिसमें भी हम मुनि अवस्था में शामिल थे। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के मोक्ष कल्याणक अवसर पर धर्मसभा में प्रकट [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर का सौभाग्य है कि सन 1970 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी का वर्षायोग हुआ और सन 1971 में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य संघ सान्निध्य में हुई। जिसमें भी हम मुनि अवस्था में शामिल थे। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के मोक्ष कल्याणक अवसर पर धर्मसभा में प्रकट की। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> टोंक।</strong> नगर का सौभाग्य है कि सन 1970 में दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी का वर्षायोग हुआ और सन 1971 में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य संघ सान्निध्य में हुई। जिसमें भी हम मुनि अवस्था में शामिल थे। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के मोक्ष कल्याणक अवसर पर धर्मसभा में प्रकट की। उन्होंने बताया कि 2025 में संघ का 55 वर्षों के बाद वर्षायोग यहां हुआ और श्री पारसनाथ भगवान की पंचकल्याणक प्रतिष्ठा हुई है। पंच कल्याणक प्रतिष्ठा विगत 36 वर्षों में छोटे से छोटे ग्राम गंभीरा में भी हुई और बड़े से बड़े महानगर कोलकाता आदि में भी हुई है और पंचकल्याणक प्रतिष्ठा से आपने क्या प्राप्त किया है, यह चिंतन का विषय है? आपकी ही तरह श्री पारसनाथ भगवान भी संसारी प्राणी थे। जिन्होंने मनुष्य भव में सम्यक दृष्टि होकर तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध कर भगवान बने हैं। उन्होंने विजय जन्मों में अनेक उपसर्गों को समता भाव और क्षमा से सहन किया। समता से शक्ति मिलती हैं। क्षमा से आत्मा को शक्ति मिलती हैं।</p>
<p><strong>णमोकार मंत्र ही जिनवाणी,समयसार है</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ ने संयम धारण कर कर्मों को नष्ट कर सिद्धालय विराजित हुए। संसार में दुःख अधिक है, सुख कम है, इसलिए संयम वैराग्य धारण करना चाहिए। राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि णमोकार मंत्र वह कार हैं, जिससे संसार भ्रमण से छुटकारा मिलता है। मंत्र में इतनी शक्ति है कि वह दुःखों से छुटकारा दिला सकती है। णमोकार मंत्र ही जिनवाणी,समयसार है। पारसनाथ भगवान भी बाल ब्रह्मचारी तीर्थंकर थे। उन्होंने आत्मा को परमात्मा बनाने का पुरुषार्थ कर केवल ज्ञान प्राप्त कर सिद्ध अवस्था प्राप्त की है। आचार्य श्री ने एक सूत्र बताया कि जीवन में मिथ्यात्व छोड़कर सम्यक दर्शन प्राप्त करें। संयम रत्नत्रय धर्म धारण कर उन्नति का पुरुषार्थ कर मनुष्य जन्म सार्थक करना चाहिए। सभी को चमत्कारी श्री पार्श्वनाथ श्यामबाबा से प्रतिदिन देव दर्शन, अभिषेक, पूजन का संकल्प लेना चाहिए।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-94262" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003.jpg" alt="" width="1536" height="1291" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003-300x252.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003-1024x861.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003-768x646.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003-990x832.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251112-WA0003-1320x1109.jpg 1320w" sizes="auto, (max-width: 1536px) 100vw, 1536px" />आचार्य श्री का आदिनाथ जिनालय नसिया अमीरगंज विहार हुआ</strong></p>
<p>देव गुरु हमारे आराध्य हैं। आर्यिका श्री वत्सल मति जी ने स्वयं संयम जीवन में क्रम से प्रतिदिन त्याग कर उत्कृष्ट समाधि प्राप्त की। नगर में 4 साधुओं की समाधि हुई है। इन सब भी समाधि स्थल का निर्माण होना चाहिए। बुधवार को प्रातः श्री जी के अभिषेक पूजन के बाद प्रतिष्ठाचार्य श्री हंसमुख जी ने बताया कि अरिहंत भगवान 4 कर्मों के बाद शेष 4 कर्म किस प्रकार श्रेणी बार क्षय कर सिद्धालय विराजित होते हैं। भगवान के मोक्ष जाने के बाद अग्निकुमार देव नख और केश अग्नि संस्कार करते हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ के सान्निध्य में रथ में श्री जी को विराजित कर नूतन मंदिर में नूतन बेदी पर पुण्यशाली परिवारों द्वारा विराजित कर नूतन शिखर पर स्वर्ण कलशारोहण कर ध्वज दंड लगाए गए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का संघ सहित दोपहर को श्री आदिनाथ जिनालय नसिया अमीर गंज विहार हुआ।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/after_55_years_the_varshayoga_of_the_sangh_and_the_panch_kalyan_pratishtha_of_lord_parasnath_took_place/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
