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	<title>आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्यश्री सुनील सागर जी ससंघ का भव्य चातुर्मास इंदौर में : सभी दिगंबर जैन समाज में हर्ष की लहर </title>
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		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 07:40:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चतुर्थ पट्टाचार्य सुनील सागर जी महाराज ससंघ का भव्य वर्षायोग (चतुर्मास) इस वर्ष नेमीनगर जैन कालोनी के हिस्से में आया है। यहां चातुर्मास होने से समस्त दिगंबर जैन समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई है। इंदौर से पढ़िए, कैलाश लुहाड़िया की यह खबर&#8230; इंदौर। चतुर्थ पट्टाचार्य सुनील सागर जी महाराज ससंघ का भव्य वर्षायोग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>चतुर्थ पट्टाचार्य सुनील सागर जी महाराज ससंघ का भव्य वर्षायोग (चतुर्मास) इस वर्ष नेमीनगर जैन कालोनी के हिस्से में आया है। यहां चातुर्मास होने से समस्त दिगंबर जैन समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, कैलाश लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> चतुर्थ पट्टाचार्य सुनील सागर जी महाराज ससंघ का भव्य वर्षायोग (चतुर्मास) इस वर्ष नेमीनगर जैन कालोनी के हिस्से में आया है। यहां चातुर्मास होने से समस्त दिगंबर जैन समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई है। नेमीनगर जैन कालोनी के चातुर्मास संयोजक इंद्रकुमार सेठी, दिगंबर जैन समाज नेमीनगर जैन कालोनी के अध्यक्ष कैलाश लुहाड़िया एवं महामंत्री गिरीश पाटोदी के नेतृत्व में इंदौर से लगभग 400 समाजजन आचार्यश्री सुनील सागर जी महाराज को चातुर्मास के लिए निवेदन करने दाहोद गए थे। आचार्य श्री ने इंदौर नेमीनगर जैन कालोनी के लिए अपना आशीर्वाद प्रदान किया और आचार्य श्री का दाहोद से इंदौर की और विहार भी शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि दाहोद में इस अवसर पर मंच पर आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज जी विराजमान थे। संयुक्त रूप से दोनों आचार्य को इंदौर वर्षायोग के लिए निवेदन किया गया। आचार्य प्रसन्नसागरजी ने अपनी दिशा पुष्पगिरी बतलाई और आचार्यश्री सुनील सागर जी ने इंदौर को आशीर्वाद दिया है।</p>
<p><strong>इन समाजजनों ने किया करबद्ध निवेदन </strong></p>
<p>इस अवसर पर दाहोद में इंदौर से विनय बाकलीवाल, आनंद गोधा, नवीन गोधा, हंसमुख गांधी, विमल झांझरी, प्रदीप बड़जात्या, रानी दोषी, प्रतिपाल टोंग्या, पार्षद टीनू जैन, मनीष सोनी, अतुल जैन, जिनेश झंझरी, कैलाश वेद, दीपक पाटनी, सचिन जैन, पिंकी टोंगिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन आचार्य श्री सुनील सागरजी से इंदौर चातुर्मास के निवेदन में उपस्थित थे। सभी ने आचार्य श्री से आग्रह किया कि आपके माध्यम से इंदौर में धर्म की गंगा बहेगी। संस्कारों का बीजारोपण होगा। समाज में एक रुपता आएगी।</p>
<p><strong>इंदौर समाज नया इतिहास रचेगा</strong></p>
<p>इस अवसर पर नैनागिर, सागवाड़ा, मुंगाणा, दाहोद आदि अनेक स्थानों के भक्तों ने भी चातुर्मास के लिए निवेदन किया था। आचार्य श्री ने अपने प्रवचन के माध्यम से सभी को अपना आशीर्वाद प्रदान किया और कहा संत को साधना के लिए चातुर्मास में एक स्थान पर रहना होता है। चातुर्मास काल में समाज के साथ सामंजस्य के साथ सभी कार्य होने चाहिए। आचार्य श्री के इंदौर चातुर्मास का समाचार पवन वेग की तरह सभी जगह पहुंच गया।</p>
<p><strong>इनके संयोजन में चल रहा विहार </strong></p>
<p>इंदौर से दाहोद यात्रा का संपूर्ण संयोजन सुयश बाकलीवाल एवं प्रवीण पहाड़िया कर रहे हैं। राजेश बज, पवन गुना वाले, वीणा सेठी, निर्मला पटोदी, रेखा पतंगया, सरिता जैन, ममता बज आदि ने कहा कि समस्त समाजजन एकजुट होकर इस महा अभियान में जुड़ेंगे और इंदौर समाज नया इतिहास रचेगा।</p>
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		<title>गुरु महिमा का अनूठा दृश्य: गुजरात की दाहोद नगरी गवाह बनेगी दो महान जैन आचार्यों के महामिलन की </title>
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		<pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:15:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कोडरमा। जैन समाज और अध्यात्म जगत के लिए 17 जून का दिन एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम सवेरा लेकर आ रहा है। गुजरात की पावन दाहोद नगरी में तप और संयम के दो महान संतों का अभूतपूर्व मिलन होने जा रहा है।दाहोद / कोडरमा से पढ़िए, राजकुमार अजमेरा की यह खबर&#8230; दाहोद / कोडरमा। जैन समाज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कोडरमा। जैन समाज और अध्यात्म जगत के लिए 17 जून का दिन एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम सवेरा लेकर आ रहा है। गुजरात की पावन दाहोद नगरी में तप और संयम के दो महान संतों का अभूतपूर्व मिलन होने जा रहा है।<span style="color: #ff0000">दाहोद / कोडरमा से पढ़िए, राजकुमार अजमेरा की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>दाहोद / कोडरमा।</strong> जैन समाज और अध्यात्म जगत के लिए 17 जून का दिन एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम सवेरा लेकर आ रहा है। गुजरात की पावन दाहोद नगरी में तप और संयम के दो महान संतों का अभूतपूर्व मिलन होने जा रहा है। इसे &#8220;तप के दो शिखरों का महामिलन&#8221; और &#8220;संयम के दो सूर्यों का संगम&#8221; कहा जा रहा है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।</p>
<p><strong>परतापुर से पुष्पगिरी विहार के बीच का ऐतिहासिक पड़ाव</strong></p>
<p>सिंह निष्क्रीड़ित व्रत जैसी कठिन साधना करने वाले आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी का मंगल विहार इस समय राजस्थान के परतापुर से पुष्पगिरी की ओर हो रहा है। इसी विहार के दौरान, 17 जून को दाहोद नगरी में उनका आगमन होगा।</p>
<p><strong>दो तपस्वियों का अनूठा मिलन</strong></p>
<p>दाहोद की धरती पर आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज का मिलाप, आचार्य श्री सन्मति सागर जी के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री सुनील सागर जी से होगा। जब यह दो महान अध्यात्मिक विभूतियाँ एक साथ मंच पर उपस्थित होंगी, तो वह दृश्य गुरु महिमा का एक अनूठा और अलौकिक उदाहरण पेश करेगा।</p>
<p><strong>भक्तों में उत्साह का माहौल</strong></p>
<p>इस महामिलन के साक्षी बनने के लिए स्थानीय जैन समाज सहित देश के विभिन्न कोनों से भक्तों का दाहोद पहुँचना शुरू हो चुका है। धर्मसभा और अगवानी को लेकर तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। लोगों का कहना है कि ऐसे महान संतों का एक साथ मिलना साक्षात ऊर्जा के महापुंज के मिलन जैसा है।</p>
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		<title>आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी की माता श्री संत धीरेंद्र शास्त्री ने लिया आशीर्वाद : बागेश्वर धाम देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर में अपनी आध्यात्मिक स्थापित कर चुका है पहचान </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:46:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज की माताजी शोभादेवी के चरणों शीश रखकर वात्सल्य भाव से अपने सिर पर हाथ रखवा कर आशीर्वाद पाया।बागेश्वर धाम/कोडरमा से पढ़िए, राजकुमार जैन अजमेरा की यह खबर&#8230; बागेश्वर धाम/कोडरमा। बागेश्वर धाम जी हां देश-विदेश का हर सनातनी जिनके दर्शन और चरणों की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज की माताजी शोभादेवी के चरणों शीश रखकर वात्सल्य भाव से अपने सिर पर हाथ रखवा कर आशीर्वाद पाया।<span style="color: #ff0000">बागेश्वर धाम/कोडरमा से पढ़िए, राजकुमार जैन अजमेरा की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बागेश्वर धाम/कोडरमा।</strong> बागेश्वर धाम जी हां देश-विदेश का हर सनातनी जिनके दर्शन और चरणों की धूल पाने के लिए लालायित रहता है। ऐसे राष्ट्रीय संत बागेश्वर धाम के संत श्री धीरेंन्द्र शास्त्री महाराज ने आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज, जिन्होंने 596 दिन की मौन साधना और 498 दिन की निर्जल उपवास करने का विश्व रेकॉर्ड बनाया ऐसे संत की गृहस्थ अवस्था की माताजी शोभादेवी के चरणों शीश रखकर वात्सल्य भाव से अपने सिर पर हाथ रखवा कर आशीर्वाद पाया। निश्चित रूप से बागेश्वर धाम में श्रद्धा और सम्मान का अद्भुत संगम देखने को मिला। आध्यात्मिक जगत में उस समय भावनात्मक और प्रेरणादायी वातावरण निर्मित हो गया। शोभा देवी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p>श्रद्धालुओं ने भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति के सम्मान और संत परंपरा के प्रति श्रद्धा का प्रेरक उदाहरण बताया।</p>
<p><strong>संत परंपरा के प्रति श्रद्धा का प्रेरक उदाहरण</strong></p>
<p>इस अवसर पर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने विनम्र भाव से माताश्री का सम्मान करते हुए उनके चरणों में श्रद्धा अर्पित की तथा आशीर्वाद प्राप्त कर स्वयं को धन्य अनुभव किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति के सम्मान और संत परंपरा के प्रति श्रद्धा का प्रेरक उदाहरण बताया। बागेश्वर धाम देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर में अपनी आध्यात्मिक पहचान स्थापित कर चुका है। करोड़ों श्रद्धालु बागेश्वर धाम से जुड़कर सनातन संस्कृति, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं। ऐसे में पूज्य माताश्री शोभा देवी के प्रति व्यक्त किया गया सम्मान सभी के लिए प्रेरणादायक संदेश बन गया। श्रद्धालुओं ने कहा कि संतों की जन्मदात्री माताओं का सम्मान वास्तव में उस तप, संस्कार और त्याग का सम्मान है, जिसके कारण समाज को महान संतों का सान्निध्य प्राप्त होता है।</p>
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		<title>आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी का डडूका में मंगल प्रवेश : 7 वर्षों बाद हुआ है आचार्यश्री का पुनर्रागमन  </title>
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		<pubDate>Thu, 28 May 2026 10:41:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने गुरुवार को प्रातः 7.30बजे धर्म नगरी डडूका में 7वर्षों बाद पुनः मंगल प्रवेश किया है। आचार्य श्री ससंघ अरथूना से प्रातः 6 बजे ससंघ ने मंगल विहार कर 11 किमी की अहिंसा पदयात्रा तय कर डडूका में मंगल प्रवेश किया। डडूका से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने गुरुवार को प्रातः 7.30बजे धर्म नगरी डडूका में 7वर्षों बाद पुनः मंगल प्रवेश किया है। आचार्य श्री ससंघ अरथूना से प्रातः 6 बजे ससंघ ने मंगल विहार कर 11 किमी की अहिंसा पदयात्रा तय कर डडूका में मंगल प्रवेश किया। <span style="color: #ff0000">डडूका से पढ़िए, अजीत कोठिया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डडूका।</strong> आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने गुरुवार को प्रातः 7.30बजे धर्म नगरी डडूका में 7वर्षों बाद पुनः मंगल प्रवेश किया है। आचार्य श्री ससंघ अरथूना से प्रातः 6 बजे ससंघ ने मंगल विहार कर 11 किमी की अहिंसा पदयात्रा तय कर डडूका में मंगल प्रवेश किया। जैन समाज डडूका, जैन युवा समिति डडूका, महिला मंडल डडूका, जैन पाठशाला परिवार डडूका तथा सर्व समाज डडूका द्वारा गुरु के आगमन पर रामोर तालाब के पास भव्य अगवानी की गई और वहां से पार्श्वनाथ जिनालय डडूका लाया गया। स्थानीय पार्श्व सभागार में आचार्य श्री के मांगलिक प्रवचनों के बाद उनका पाद प्रक्षालन हुआ। परतापुर निवासी नव दीक्षित मुनि श्री सामायिक सागर जी (संजय भैया जी) तथा मुनि श्री अर्ध सागरजी (विनोद दोसी भैयाजी जी) मुनि श्री अप्रमत सागर जी (भरत भाई पालोदावाले), मुनि श्री परिमल सागरजी (राघवेश मैयावत), गणिनी माताजी आर्यिका श्री ज्ञान प्रभा जी, आर्यिका चारित्र प्रभा जी, आर्यिका श्री धर्म प्रभा माताजी, क्षुल्लिका श्री द्रव्य प्रभा माताजी एवं क्षुल्लिका भाव प्रभा माताजी अपनी दीक्षा के बाद पहली बार डडूका पधार रहे हैं।</p>
<p>आचार्य संघ आगमन को लेकर डडूका दिगंबर जैन समाज का रोम रोम पुलकित है। आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी के हर मास एक उपवास कार्यक्रम को लेकर यहां हर कोई उत्साहित हैं। आहारचर्या के बाद दिन में चार बजे गुरु पूजा कार्यक्रम हुआ। समाज की महिलाएं केसरिया साड़ी में कलशों के साथ और पुरुष श्वेत वस्त्रों में संघ की अगवानी करने उपस्थित रहे। सायंकाल आचार्य श्री ससंघ रैयाना के लिये विहार करेंगे।</p>
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		<title>32 साल का हुआ इंतजार खत्म: आंजना में आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश उमड़ा जनसैलाब </title>
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		<pubDate>Tue, 26 May 2026 13:49:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आंजना जैन समाज के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। &#8216;आंजना में आनंद भयो, साधना महोदधि रो विहार भयो&#8217; के जयकारों के साथ पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। आंजना से पढ़िए, अजित कोठिया की रिपोर्ट&#8230; आंजना। स्थानीय जैन समाज के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आंजना जैन समाज के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। &#8216;आंजना में आनंद भयो, साधना महोदधि रो विहार भयो&#8217; के जयकारों के साथ पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। <span style="color: #ff0000">आंजना से पढ़िए, अजित कोठिया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>आंजना।</strong> स्थानीय जैन समाज के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। &#8216;आंजना में आनंद भयो, साधना महोदधि रो विहार भयो&#8217; के जयकारों के साथ पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। ठीक 32 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, मंगलवार सुबह ठीक 7:35 बजे आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज का ससंघ मांगलिक प्रवेश हुआ। सूरज की तपिश बढ़ने से पहले ही गुरुदेव के दर्शनों के लिए भक्तों की आंखें कृतज्ञता और भावुकता से नम हो गईं।</p>
<p><strong>सैकड़ों भक्तों संग 11 किमी की अहिंसा पदयात्रा</strong></p>
<p>आचार्य श्री ससंघ गढ़ी से विहार कर आंजना पहुंचे। इस दौरान उनके साथ परतापुर, गढ़ी, डडूका, बोरी, अरथूना, आंजना और मोर सहित आसपास के कई गांवों के सैकड़ों श्रद्धालु चल रहे थे। विशेष बात यह रही कि आचार्य श्री ने एक उपवास (बेला/तप) की अवस्था में 11 किलोमीटर की कठिन अहिंसा पदयात्रा पूरी की। आंजना आगमन पर अपार जनसमूह ने अत्यंत भक्तिभाव से गुरुदेव का पड़गाहन किया और आहार चर्या संपन्न हुई।</p>
<p><strong>&#8220;चेहरे वही, उम्र बढ़ी&#8230; आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें&#8221;</strong></p>
<p>जिनालय परिसर में आयोजित भव्य धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने समाज को आत्मनिरीक्षण की सीख दी। उन्होंने मार्मिक शब्दों में कहा कि साधु तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन आप वहीं के वहीं रह जाते हैं। आंजना में 32 साल बाद भी कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। हां, मंदिर जरूर नव-निर्माणाधीन है। इस बीच दादा-दादी चले गए, बच्चे बड़े हो गए। चेहरे वही हैं, बस उम्र बढ़ गई है। हमारी यही प्रेरणा और आशीर्वाद है कि अब समय रहते अपने आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें। सभा में आचार्य संघ के तपस्वी मुनि डॉ. सहज सागर जी महाराज का भी ओजस्वी मांगलिक प्रवचन हुआ, जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। आंजना के सकल जैन समाज द्वारा आचार्य संघ की अभूतपूर्व और ऐतिहासिक अगवानी की गई।</p>
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		<title>जब इंसान अपने अहंकार और इच्छाओं का होता है शिकार : आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी ने समझाया ड्रिपेशन से किस प्रकार बचना चाहिए  </title>
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		<pubDate>Tue, 12 May 2026 10:15:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी एवं उपाध्याय श्री पियूष सागरजी ससंघ परतापुर बांसवाड़ा राजस्थान में विराजमान हैं। उनके सानिध्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हो रहे हैं। सोमवार को गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि मानव जीवन में अहंकार और इच्छा ऐसे मादक तत्व हैं, जो व्यक्ति को किसी भी प्रकार के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी एवं उपाध्याय श्री पियूष सागरजी ससंघ परतापुर बांसवाड़ा राजस्थान में विराजमान हैं। उनके सानिध्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हो रहे हैं। सोमवार को गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि मानव जीवन में अहंकार और इच्छा ऐसे मादक तत्व हैं, जो व्यक्ति को किसी भी प्रकार के नशे की लत की ओर धकेल सकते हैं। <span style="color: #ff0000">परतापुर से पढ़िए, नरेंद्र अजमेरा और पियूष कासलीवाल की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>परतापुर।</strong> आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी एवं उपाध्याय श्री पियूष सागरजी ससंघ परतापुर/बांसवाड़ा में विराजमान हैं। उनके सानिध्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हो रहे हैं। सोमवार को गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि मानव जीवन में अहंकार और इच्छा ऐसे मादक तत्व हैं, जो व्यक्ति को किसी भी प्रकार के नशे की लत की ओर धकेल सकते हैं। दुनिया में नशा करने वाले कितने लोग हैं, यह जानना मानो रेत से तेल निकालने जैसा कठिन है। नशा भी दो प्रकार का होता है-एक अच्छा नशा और एक बुरा नशा। फिर प्रश्न उठता है कृ सही और गलत क्या है? जो नशा पाप से बचाए, पुण्य की राह दिखाए, स्वयं से मिलाए और परमात्मा बनाए, वह नशा श्रेष्ठ और कल्याणकारी है। ऐसा नशा हर व्यक्ति को होना चाहिए। जो नशा पाप की राह पर ले जाए, स्वयं से दूर करे और इंसान को इंसानियत से गिराकर शैतान बना दे,वह नशा केवल बुरा ही नहीं, बल्कि जीवन के लिए अत्यंत घातक है।</p>
<p><strong>डिप्रेशन के दो बड़े दुष्परिणाम सामने आते हैं- भय और नशा</strong></p>
<p>आज 20ः लोग एक अदृश्य नशे में डूबे हुए हैं-एंटी-डिप्रेसेंट और नींद की दवाओं का नशा। जब जीवन में दबाव बढ़ता है, वह तनाव में बदलता है; तनाव से उदासी जन्म लेती है, उदासी से अकेलापन, और अंततः डिप्रेशन। फिर इस डिप्रेशन के दो बड़े दुष्परिणाम सामने आते हैं- भय और नशा। बीमारी से बचने के लिए ली गई दवा ही धीरे-धीरे बीमारी का कारण बन जाती है। आज पूरी दुनिया कहीं न कहीं इसी संघर्ष से गुजर रही है। मेरा आध्यात्मिक चिंतन कहता है- यदि आप डिप्रेशन की दवा ले रहे हैं या नींद की गोलियों पर निर्भर हैं तो सावधान हो जाइए और 24 घंटे में केवल 10 मिनट आत्मचिंतन अवश्य कीजिए। अपने आप से पूछिए-मैं यह सब किसके लिए कर रहा हूँ? जो मैं कर रहा हूँ, क्या वह वास्तव में मेरा स्वभाव है? जीवन का सारा खेल केवल एक श्वास का है। क्यों न हम प्रतिदिन 10 मिनट अपनी आती-जाती श्वास को देखें और समझें कृ श्वास का आना जीवन है और श्वास का रुक जाना मृत्यु। यह चिंतन ही हमें शुभ परिणामों की ओर ले जाएगा, और फिर जो होगा, वह शुभ ही होगा।</p>
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		<title>संजय भैया जी दोसी बने मुनि श्री सामायिक सागरजी : क्षुल्लक अर्घ्य सागरजी बने मुनि श्री अर्घ्यसागरजी महाराज </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 06:31:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[37 बरस के लंबे इंतजार के बाद रविवार को परतापुर नगरी का सौभाग्य पुनः जगा, जब आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के मांगलिक सान्निध्य में नगर में एक साथ पांच दीक्षाए संपन्न हुई। परतापुर से पढ़िए, अजीत कोठिया की रिपोर्ट&#8230; परतापुर। 37 बरस के लंबे इंतजार के बाद रविवार को परतापुर नगरी का सौभाग्य पुनः [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>37 बरस के लंबे इंतजार के बाद रविवार को परतापुर नगरी का सौभाग्य पुनः जगा, जब आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के मांगलिक सान्निध्य में नगर में एक साथ पांच दीक्षाए संपन्न हुई। <span style="color: #ff0000">परतापुर से पढ़िए, अजीत कोठिया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>परतापुर</strong>। 37 बरस के लंबे इंतजार के बाद रविवार को परतापुर नगरी का सौभाग्य पुनः जगा, जब आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के मांगलिक सान्निध्य में नगर में एक साथ पांच दीक्षाए संपन्न हुई। सुबह 7 बजे ही परतापुर का सुभाष स्टेडियम श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया था और इसके बाद गांव गांव से अपार जन सैलाब उमड़ घुमड़ कर आ ही रहा था। क्या जैन, क्या अजैन हर पंथ, जाति, संप्रदाय और समाज में धार्मिक श्रद्धा का मानो ज्वार ही उमड़ पड़ा था। 37 वर्ष पूर्व की महावीर जयंती 18 अप्रैल 1989 की यादें ताज़ा हो गई, जब आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज, आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी सहित इसी स्थान पर इसी नगरी में एक साथ पांच दीक्षाए दी थी।</p>
<p>ब्रह्मचारी सेवानिवृत वीआरएस शिक्षक, गुरुभक्त संजय भैया दोसी ने गुरुदेव द्वारा मंत्रोच्चार से दीक्षित होकर जब अपने वस्त्र उतार फेंके तो पंडाल में अपार जन समूह जय जय कार कर उठा। ये त्याग, भक्ति, वैराग्य ओर तप साधना की पराकाष्ठा थी। ब्रह्म मुहूर्त में आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी ने संजय भैया दोसी का केशलोंचन किया। शोभा यात्रा वैराग्य भावो के साथ खेल मैदान पहुंची, समाज और परिजनों की परमिशन के साथ ही संजय दोसी भैयाजी मुनि श्री सामायिक सागर जी महाराज बन गए। वास्तव में जैन दर्शन पाषाण को परमात्मा ओर आत्मा को भगवान बनाने की कला है। यहां कोई भी व्यक्ति परमात्मा बनने के पथ पर अग्रसर हो सकता है। आयोजन के दौरान कई भावुक पल भी आए पर किसी भी दीक्षार्थी के कदम एक क्षण को भी नहीं डगमगाए।</p>
<p><strong>सभी दीक्षार्थियों ने भी अपनी भावांजलि अर्पित की</strong></p>
<p>संघस्थ क्षुल्लक अर्घ्य सागरजी ने आज मुनि दीक्षा ग्रहण कर मुनि श्री अर्घ्य सागरजी महाराज नाम धारण किया। क्षुल्लिका धर्म प्रभा माताजी आर्यिका श्री धर्म प्रभा माताजी बनी। इसी क्रम में परतापुर की संघस्थ आर्यिका ज्ञानप्रभा माताजी को आज गणिनी ज्ञान प्रभा माताजी के रूप में प्रतिष्ठापित किया गया। परतापुर से गणिनी माताजी का दर्जा पाने वाली वो प्रथम आर्यिका बन गई है। आज कनक दीदी ने क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण कर 105श्रीद्रव्यप्रभा माताजी बनी। परतापुर के पचौरी परिवार की बड़ी बहु ओर 1989में आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज की मुनि दीक्षा के दौरान उनकी धर्म माता बनी सुशीला देवी को आज गुरुदेव ने क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान कर श्री भाव प्रभा माताजी नाम दिया। सुबह 7बजे से प्रारंभ भव्य ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव सुबह 11.50 तक चला। सभा को आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी ने संबोधित किया, सभी दीक्षार्थियों ने भी अपनी भावांजलि अर्पित की। ब्र. अरुण भैया के शानदार संयोजन ने आयोजन में चार चांद लगा दिए।</p>
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		<title>संजय भैया जी दोसी बने मुनि श्री सामायिक सागरजी : क्षुल्लक अर्घ्य सागरजी बने मुनि श्री अर्घ्यसागरजी महाराज </title>
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		<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 13:10:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[37 बरस के लंबे इंतजार के बाद रविवार को परतापुर नगरी का सौभाग्य पुनः जगा, जब आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के मांगलिक सान्निध्य में नगर में एक साथ पांच दीक्षाए संपन्न हुई। परतापुर से पढ़िए, अजीत कोठिया की रिपोर्ट&#8230; परतापुर। 37 बरस के लंबे इंतजार के बाद रविवार को परतापुर नगरी का सौभाग्य पुनः [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>37 बरस के लंबे इंतजार के बाद रविवार को परतापुर नगरी का सौभाग्य पुनः जगा, जब आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के मांगलिक सान्निध्य में नगर में एक साथ पांच दीक्षाए संपन्न हुई। <span style="color: #ff0000">परतापुर से पढ़िए, अजीत कोठिया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>परतापुर।</strong> 37 बरस के लंबे इंतजार के बाद रविवार को परतापुर नगरी का सौभाग्य पुनः जगा, जब आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के मांगलिक सान्निध्य में नगर में एक साथ पांच दीक्षाए संपन्न हुई। सुबह 7 बजे ही परतापुर का सुभाष स्टेडियम श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया था और इसके बाद गांव गांव से अपार जन सैलाब उमड़ घुमड़ कर आ ही रहा था। क्या जैन, क्या अजैन हर पंथ, जाति, संप्रदाय और समाज में धार्मिक श्रद्धा का मानो ज्वार ही उमड़ पड़ा था। 37 वर्ष पूर्व की महावीर जयंती 18 अप्रैल 1989 की यादें ताज़ा हो गई, जब आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज, आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी सहित इसी स्थान पर इसी नगरी में एक साथ पांच दीक्षाए दी थी।</p>
<p>ब्रह्मचारी सेवानिवृत वीआरएस शिक्षक, गुरुभक्त संजय भैया दोसी ने गुरुदेव द्वारा मंत्रोच्चार से दीक्षित होकर जब अपने वस्त्र उतार फेंके तो पंडाल में अपार जन समूह जय जय कार कर उठा। ये त्याग, भक्ति, वैराग्य ओर तप साधना की पराकाष्ठा थी। ब्रह्म मुहूर्त में आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी ने संजय भैया दोसी का केशलोंचन किया। शोभा यात्रा वैराग्य भावो के साथ खेल मैदान पहुंची, समाज और परिजनों की परमिशन के साथ ही संजय दोसी भैयाजी मुनि श्री सामायिक सागर जी महाराज बन गए। वास्तव में जैन दर्शन पाषाण को परमात्मा ओर आत्मा को भगवान बनाने की कला है। यहां कोई भी व्यक्ति परमात्मा बनने के पथ पर अग्रसर हो सकता है। आयोजन के दौरान कई भावुक पल भी आए पर किसी भी दीक्षार्थी के कदम एक क्षण को भी नहीं डगमगाए।</p>
<p><strong>सभी दीक्षार्थियों ने भी अपनी भावांजलि अर्पित की</strong></p>
<p>संघस्थ क्षुल्लक अर्घ्य सागरजी ने आज मुनि दीक्षा ग्रहण कर मुनि श्री अर्घ्य सागरजी महाराज नाम धारण किया। क्षुल्लिका धर्म प्रभा माताजी आर्यिका श्री धर्म प्रभा माताजी बनी। इसी क्रम में परतापुर की संघस्थ आर्यिका ज्ञानप्रभा माताजी को आज गणिनी ज्ञान प्रभा माताजी के रूप में प्रतिष्ठापित किया गया। परतापुर से गणिनी माताजी का दर्जा पाने वाली वो प्रथम आर्यिका बन गई है। आज कनक दीदी ने क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण कर 105श्रीद्रव्यप्रभा माताजी बनी। परतापुर के पचौरी परिवार की बड़ी बहु ओर 1989में आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज की मुनि दीक्षा के दौरान उनकी धर्म माता बनी सुशीला देवी को आज गुरुदेव ने क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान कर श्री भाव प्रभा माताजी नाम दिया। सुबह 7बजे से प्रारंभ भव्य ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव सुबह 11.50 तक चला। सभा को आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी ने संबोधित किया, सभी दीक्षार्थियों ने भी अपनी भावांजलि अर्पित की। ब्र. अरुण भैया के शानदार संयोजन ने आयोजन में चार चांद लगा दिए।</p>
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		<title>कविता: संजय बने सामायिक सागर : 26अप्रैल को नया इतिहास बना वैराग्य का </title>
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		<pubDate>Sun, 26 Apr 2026 13:08:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[परतापुर में रविवार को आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान की। यह क्षेत्र के लिए इतिहास रचने जैसा उत्सव रहा। इस पर डडूका के अजीत कोठिया की पढ़िए, यह कविता&#8230; बरसो की उसकी चाहत आज हुई पूरी। संजय ने छोड़ा घर, धारा दिगंबर भेष छोड़ी मैना, मुक्ति, नीरा मां पुत्र चिंतन का [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>परतापुर में रविवार को आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान की। यह क्षेत्र के लिए इतिहास रचने जैसा उत्सव रहा। <span style="color: #ff0000">इस पर डडूका के अजीत कोठिया की पढ़िए, यह कविता&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बरसो की उसकी चाहत आज हुई पूरी।</strong></p>
<p>संजय ने छोड़ा घर,</p>
<p>धारा दिगंबर भेष</p>
<p>छोड़ी मैना, मुक्ति, नीरा मां</p>
<p>पुत्र चिंतन का चिंतन त्यागा</p>
<p>दीक्षा को 37वर्षों से बेताब</p>
<p>आज हुआ पूरा संजय का ख्वाब</p>
<p>साधना महोदधि आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने</p>
<p>तराश दिया आज</p>
<p>संजय से एक नवमुनि</p>
<p>श्री सामायिक सागर!</p>
<p>आओ करे नमोस्तु,</p>
<p>आज मिली समाज को नव गणिनी मां ज्ञान प्रभा</p>
<p>बढ़ा परतापुर का गौरव</p>
<p>एक ओर मुनि दीक्षा हुई</p>
<p>मुनि अर्ध सागरजी के रूप में</p>
<p>एक आर्यिका हुई धर्म प्रभा जी</p>
<p>तो दो नव दीक्षित क्षुल्लिकाए,</p>
<p>द्रव्यप्रभा एवं भावप्रभा माताजी</p>
<p>नगर हुआ निहाल!</p>
<p>पांच दिशाएं</p>
<p>26अप्रैल 2026</p>
<p>नया इतिहास बना वैराग्य का!</p>
<p>सभी को नमन!</p>
<p>सभी को वंदन!!</p>
<p>सभी का अभिनंदन!!!</p>
<p>&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;-</p>
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		<title>परतापुर के संजय भैया बनने जा रहे हैं जैन मुनि : आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी देंगे दीक्षा 26 अप्रैल को </title>
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		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 07:29:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[000 Dasha Humad Digambar Jain Society]]></category>
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		<category><![CDATA[18000 दशा हूमड़ दिगंबर जैन समाज]]></category>
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		<category><![CDATA[महावीर इंटरनेशनल गढ़ी परतापुर]]></category>
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					<description><![CDATA[नगर में जन्मे, हम सबके साथी, सेवानिवृत वीआरएस लिए समर्पित शिक्षक, महावीर इंटरनेशनल गढ़ी परतापुर के पूर्व सदस्य 18000 दशा हूमड़ दिगंबर जैन समाज के समर्पित सदस्य, साधु सेवा संस्थान के समर्पित सदस्य जिन्होंने कोरोना काल ओर उसके बाद वागड़ क्षेत्र में जैन साधुओं-साध्वियों के आने जाने के प्रबंधन में सक्रिय युवा हस्ताक्षर दो प्रतिमाधारी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर में जन्मे, हम सबके साथी, सेवानिवृत वीआरएस लिए समर्पित शिक्षक, महावीर इंटरनेशनल गढ़ी परतापुर के पूर्व सदस्य 18000 दशा हूमड़ दिगंबर जैन समाज के समर्पित सदस्य, साधु सेवा संस्थान के समर्पित सदस्य जिन्होंने कोरोना काल ओर उसके बाद वागड़ क्षेत्र में जैन साधुओं-साध्वियों के आने जाने के प्रबंधन में सक्रिय युवा हस्ताक्षर दो प्रतिमाधारी संजय दोसी भैयाजी 26 अप्रैल को आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के कर कमलों से दिगंबर जैन मुनि दीक्षा लेने जा रहे हैं। <span style="color: #ff0000">परतापुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>परतापुर।</strong> नगर में जन्मे, हम सबके साथी, सेवानिवृत वीआरएस लिए समर्पित शिक्षक, महावीर इंटरनेशनल गढ़ी परतापुर के पूर्व सदस्य 18000दशा हूमड़ दिगंबर जैन समाज के समर्पित सदस्य, साधु सेवा संस्थान के समर्पित सदस्य जिन्होंने कोरोना काल ओर उसके बाद वागड़ क्षेत्र में जैन साधुओं-साध्वियों के आने जाने के प्रबंधन में सक्रिय युवा हस्ताक्षर दो प्रतिमाधारी अनुज संजय दोसी भैयाजी 26 अप्रैल को आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के कर कमलों से दिगंबर जैन मुनि दीक्षा लेने जा रहे हैं। 26 अप्रैल को धर्मनगरी में एक नया इतिहास बनने जा रहा है। वागड़ मेवाड़ का जन-जन, गांव-गांव हर्षित है दीक्षा के इन मांगलिक पलों का साक्षी बनने के लिए। गुरुवार को दिगंबर जैन मंदिर में पत्रकार वार्ता में आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने दीक्षार्थी संजय दोसी भैयाजी के त्याग और 30 वर्षों के समर्पण की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। संजय दोसी वागड़ क्षेत्र का धर्म के क्षेत्र में चर्चित वो नाम है, जो 26 अप्रैल को जैन मुनि दीक्षा ग्रहण इस क्षेत्र को पूरे जैन समाज ओर पूरे देश में गौरवान्वित करेंगे। संजय दोसी भैयाजी को सभी पत्रकारों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी। फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के संस्थापक सदस्य अजीत कोठिया ने फेडरेशन के सभी, पांचों प्रोविंसेज की ओर से संजय दोसी भैयाजी को शुभकामनाएं दी।</p>
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