<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%86%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AD%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%9C/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sat, 28 Mar 2026 10:32:13 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>गुरु अपने शिष्यों के अंतरंग को शुद्ध कर आत्मज्ञानी बनाते हैं : आचार्य श्री निर्भय सागर जी के सानिध्य में रविवार को भगवान महावीर करेंगे नगर भ्रमण </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_guru_purifies_the_inner_selves_of_his_disciples_and_transforms_them_into_knowers_of_the_self/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_guru_purifies_the_inner_selves_of_his_disciples_and_transforms_them_into_knowers_of_the_self/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Mar 2026 10:32:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Nirbhay Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vipul Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Avtaran Diwas Celebration]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Mahavir]]></category>
		<category><![CDATA[Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अवतरण दिवस समारोह]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री विपुलसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान महावीर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[साधु]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=103255</guid>

					<description><![CDATA[गुरु के बिना जीवन अंधकारमय होता है। सांसारिक जीवन में ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक जीवन में भी गुरु का अत्यधिक महत्व है। किसी ने ठीक ही कहा है &#8220;जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं&#8221;। यह उद्गार आचार्य श्री निर्भयसागरजी ने आचार्यश्री विपुलसागरजी के अवतरण दिवस समारोह में बड़े जैन मंदिर में किए। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>गुरु के बिना जीवन अंधकारमय होता है। सांसारिक जीवन में ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक जीवन में भी गुरु का अत्यधिक महत्व है। किसी ने ठीक ही कहा है &#8220;जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं&#8221;। यह उद्गार आचार्य श्री निर्भयसागरजी ने आचार्यश्री विपुलसागरजी के अवतरण दिवस समारोह में बड़े जैन मंदिर में किए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> गुरु के बिना जीवन अंधकारमय होता है। सांसारिक जीवन में ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक जीवन में भी गुरु का अत्यधिक महत्व है। किसी ने ठीक ही कहा है &#8220;जिसके जीवन में गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं&#8221;। यह उद्गार आचार्य श्री निर्भयसागरजी ने आचार्यश्री विपुलसागरजी के अवतरण दिवस समारोह में बड़े जैन मंदिर में किए। उन्होंने कहा कि आध्यात्मक गुरु केवल किताबी ज्ञान नहीं देता, बल्कि शिष्य के अंतरंग को शुद्ध एवं निर्मल कर उसे आत्मज्ञानी बनाता है। जैन दर्शन में गुरु को अज्ञान के अंधकार से निकालकर मोक्ष मार्ग दिखाने वाला, परम उपकारी और सच्चा मार्गदर्शक बताया गया है। वे निग्रंथ साधु होते हैं जो विषयों से विरक्त होकर ज्ञान, ध्यान और तप में लीन रहते हैं।</p>
<p><strong>उपदेशों से ही शिष्य में वैराग्य उत्पन्न होता है</strong></p>
<p>गुरु ही आत्मा के स्वरूप को उजागर करते हैं, धर्म के संस्कार देते हैं, और कर्मों के बंधनों को तोड़कर भवसागर से पार उतारते हैं। गुरु ही अज्ञानी जीव को सम्यक दर्शन और सम्यक ज्ञान प्रदान कर आत्मा का बोध कराते हैं। गुरु ही बताते हैं कि सच्चा सुख सांसारिक भोगों में नहीं, बल्कि संयम और त्याग में है। गुरु के उपदेशों से ही शिष्य के मन में वैराग्य उत्पन्न होता है, जिससे वह तप-संयम अपनाकर कर्मों की निर्जरा करता है। गुरु ही शिष्य को हिंसक प्रवृत्तियों से बचाकर अहिंसा, संयम और तप के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं । निर्ग्रथ साधु ही सच्चे गुरु होते है जो मोक्ष मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करते है और अपने शिष्यों को संयम पथ पर बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। गुरु के उपकार को कभी भुलाया नहीं जा सकता, न ही गुरु के ऋण को कभी चुकाया जा सकता है आचार्य श्री निर्भयसागरजी के ससंघ सान्निध्य में आचार्यश्री विपुलसागरजी महाराज के अवतरण दिवस के अवसर पर प्रातः श्री जी के अभिषेक, शांतिधारा के पश्चात आचार्य विधान किया गया।</p>
<p><strong>आचार्य श्री का चित्रावरण किया</strong></p>
<p>आचार्यश्री विपुलसागरजी महाराज का अष्ट दृव्य से पूजन किया गया। कार्यक्रम से पूर्व गुरु भक्त परिवार विनोदकुमार शोभितकुमार जैन मेरठ द्वारा आचार्य श्री के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलित किया गया। गुरुदेव एवं मुनिश्री सुदत्त सागर महाराज, मुनिश्री भूदत्तसागर जी महाराज का निर्मल जैन भंडारी परिवार द्वारा पाद प्रक्षालन किया गया। श्रावक श्रेष्ठियों द्वारा आचार्य संघ को शास्त्र भेंट किए गए। संचालन प्रतिष्ठाचार्य संजय शास्त्री सिहोनिया एवं प्रतिष्ठाचार्य अजय भैयाजी ज्ञापन तमूरा वाले दमोह द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>प्रभात फेरी बड़े जैन मंदिर से प्रारंभ होगी</strong></p>
<p>भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर आज प्रातः प्रभात फेरी निकाली जाएगी। प्रभात फेरी बड़े जैन मंदिर से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गो से भ्रमण करती हुई बड़ा जैन मंदिर पहुंचेगी। आचार्य श्री निर्भयसागरजी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस मनाया जाएगा। शाम को इंद्र दरबार सजेगा और माता के सोलह स्वप्न दिखाए जाएंगे । 30 मार्च को प्रातः आचार्यश्री के ससंघ सान्निध्य में भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_guru_purifies_the_inner_selves_of_his_disciples_and_transforms_them_into_knowers_of_the_self/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सांसारिक वस्तुओं का त्याग ही मोक्ष का मार्ग: मुनि श्री गुरुदत्त सागर ने बताए साधुओं के तप की प्रक्रिया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/renunciation_of_worldly_things_is_the_path_to_salvation/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/renunciation_of_worldly_things_is_the_path_to_salvation/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Jul 2025 12:56:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Nirbhay Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Gurudutt Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Ajitnath Digambar Jain Big Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[श्री अजितनाथ दिगंबर जैन बड़े मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=85452</guid>

					<description><![CDATA[श्री अजितनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक वस्तुओं का त्याग किए बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में दो प्रकार के साधु होते [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्री अजितनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक वस्तुओं का त्याग किए बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में दो प्रकार के साधु होते हैं कृ श्वेतांबर और दिगंबर। <span style="color: #ff0000">महरौनी से पढ़िए, राजीव सिंधई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी (ललितपुर)।</strong> श्री अजितनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक वस्तुओं का त्याग किए बिना मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में दो प्रकार के साधु होते हैं, श्वेतांबर और दिगंबर। श्वेतांबर साधु जहां सफेद वस्त्र धारण करते हैं, वहीं दिगंबर साधु पूर्णतः नग्न रहते हैं, चाहे सर्दी हो या गर्मी, वे रजाई या ऊनी वस्त्र का भी सहारा नहीं लेते। मुनिश्री ने कहा कि कपड़ा भी एक भौतिक वस्तु है, जो शरीर की कामनाओं को ढकने के लिए प्रयुक्त होता है।</p>
<p>जब साधु का जीवन विकारों से मुक्त हो जाता है, तब उसे वस्त्र की आवश्यकता नहीं रहती। जिनके मन में कोई खोट नहीं, उनके तन पर कोई लंगोट नहीं, यह उक्ति दिगंबर साधुओं के जीवन पर पूरी तरह लागू होती है। उन्होंने कहा कि दिगंबर साधु चारों दिशाओं को वस्त्र मानते हैं, धरती को बिछौना और आकाश को ओढ़ना। उनका जीवन कठोर तप, ध्यान, संयम और साधना से भरा होता है।</p>
<p><strong>अहिंसा के अनुपालन का सर्वाेच्च उदाहरण</strong></p>
<p>धर्मसभा में उपस्थित मुनि श्री मेघदत्त सागर महाराज ने कहा कि दिगंबर साधुओं का नग्न रहना केवल त्याग नहीं बल्कि सूक्ष्म जीवों की रक्षा का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वस्त्रों की सफाई में जल में रहने वाले अनगिनत सूक्ष्म जीवों की हिंसा होती है, जिससे बचने के लिए दिगंबर साधु नग्न रहते हैं।</p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि जिस प्रकार एक निष्पाप शिशु नग्न अवस्था में निर्दाेष और निर्मल होता है, उसी प्रकार दिगंबर साधु भी वासनाओं और सांसारिक इच्छाओं से मुक्त होकर पवित्रता के प्रतीक बनते हैं। इस अवसर पर नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने पहुंचकर मुनिश्री के प्रवचनों को श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/renunciation_of_worldly_things_is_the_path_to_salvation/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जीवन में श्रद्धा से ही मिलता मोक्षमार्ग: आचार्य निर्भय सागरजी ने श्रद्धा भक्ति की शक्ति को बलशाली  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_salvation_is_found_only_by_faith_in_life-2/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_salvation_is_found_only_by_faith_in_life-2/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Jul 2025 13:53:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Nirbhay Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Hedonism]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Materialism]]></category>
		<category><![CDATA[Shraddha Deepak]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Western Culture]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पाश्चात्य संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[भोगवादिता]]></category>
		<category><![CDATA[भौतिकता]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धा दीपक]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=85346</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने धर्म सभा में कहा कि जीवन में श्रद्धा से ही संसार और मोक्ष का मार्ग मिलता है। श्रद्धा पागलों में नहीं होती है। श्रद्धा दीपक की कांपती हुई लौं के समान नहीं होना चाहिए बल्कि अंगारे के समान होना चाहिए। ललितपुर से अशोक कुमार जेतावत -धरियावद की पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने धर्म सभा में कहा कि जीवन में श्रद्धा से ही संसार और मोक्ष का मार्ग मिलता है। श्रद्धा पागलों में नहीं होती है। श्रद्धा दीपक की कांपती हुई लौं के समान नहीं होना चाहिए बल्कि अंगारे के समान होना चाहिए। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से अशोक कुमार जेतावत -धरियावद की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने धर्म सभा में कहा कि जीवन में श्रद्धा से ही संसार और मोक्ष का मार्ग मिलता है। श्रद्धा पागलों में नहीं होती है। श्रद्धा दीपक की कांपती हुई लौं के समान नहीं होना चाहिए बल्कि अंगारे के समान होना चाहिए। चाहे कितना भी तूफान आए तो भी अंगारा बुझाता नहीं है बल्कि और ध़धकता है। इसी प्रकार कितनी भी भौतिकता भोगवादिता और पाश्चात्य संस्कृति का तूफान आए तो भी हमारी श्रद्धा नहीं बुझाना चाहिए। जिसे अपने किए कर्मों पर भगवान द्वारा बतलाए धर्म पर गुरु द्वारा चलाए गए मार्ग पर और जिनवाणी में लिखे वाक्यों पर सच्चा श्रद्धा होती है। वह सदा धर्म मार्ग पर चलता है। पाप से डरता है और घर में बैरागी बनकर चक्रवर्ती की तरह रहता है। उसके लिए चक्रवर्ती की संपदा और स्वर्ग के इंद्र जैसे भोग मिलने पर भी वह विचलित नहीं होता है।</p>
<p><strong>गणधराचार्य का गूथा गया हो और मुनियों का लिखा वह जैन आगम है</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने आगम शब्द की परिभाषा बताते हुए कहा कि जो आप्त अर्थात भगवान के द्वारा कहा गया हो। गणधराचार्य द्वारा गूथा गया हो और मुनियों द्वारा लिखा गया हो वह जैन आगम है। जैन आगम पढ़ने और सुनने से विषय वासना ईर्ष्या और कषायों की आग शांत होती है। यह विचार आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने पार्श्व नाथ जैन अटा मंदिर में धर्म सभा में व्यक्त किए। गुरुवार को प्रातः काल भारतीय स्टेट बैंक के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक सर्वेश त्रिपाठी, मुख्य प्रबंधक संजीव लोहिया एवं हिमांशु तिवारी ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया।</p>
<p><strong>यह रहे मौजूद </strong></p>
<p>इस मौके पर दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, मन्दिर प्रबंधक मनोज बबीना, सनत खजुरिया, राजकुमार जैन, अखिलेश कुमार गदयाना,अक्षय अलया मीडिया प्रभारी, स्वतंत्र मोदी अमित सराफ, पुष्पेंद्र जैन, आनंद जैन एवं शादी लाल जैन एड, अनिता मोदी,ममता मोहनी,वीणा जैन,संगीता जैन,आदि मौजूद रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_salvation_is_found_only_by_faith_in_life-2/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जीवन में श्रद्धा से ही मिलता मोक्षमार्ग: आचार्य निर्भय सागरजी ने श्रद्धा भक्ति की शक्ति को बलशाली  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_salvation_is_found_only_by_faith_in_life/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_salvation_is_found_only_by_faith_in_life/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Jul 2025 13:52:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Nirbhay Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Hedonism]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Materialism]]></category>
		<category><![CDATA[Shraddha Deepak]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Western Culture]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पाश्चात्य संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[भोगवादिता]]></category>
		<category><![CDATA[भौतिकता]]></category>
		<category><![CDATA[श्रद्धा दीपक]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=85341</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने धर्म सभा में कहा कि जीवन में श्रद्धा से ही संसार और मोक्ष का मार्ग मिलता है। श्रद्धा पागलों में नहीं होती है। श्रद्धा दीपक की कांपती हुई लौं के समान नहीं होना चाहिए बल्कि अंगारे के समान होना चाहिए। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। आचार्य श्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने धर्म सभा में कहा कि जीवन में श्रद्धा से ही संसार और मोक्ष का मार्ग मिलता है। श्रद्धा पागलों में नहीं होती है। श्रद्धा दीपक की कांपती हुई लौं के समान नहीं होना चाहिए बल्कि अंगारे के समान होना चाहिए। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज ने धर्म सभा में कहा कि जीवन में श्रद्धा से ही संसार और मोक्ष का मार्ग मिलता है। श्रद्धा पागलों में नहीं होती है। श्रद्धा दीपक की कांपती हुई लौं के समान नहीं होना चाहिए बल्कि अंगारे के समान होना चाहिए। चाहे कितना भी तूफान आए तो भी अंगारा बुझाता नहीं है बल्कि और ध़धकता है। इसी प्रकार कितनी भी भौतिकता भोगवादिता और पाश्चात्य संस्कृति का तूफान आए तो भी हमारी श्रद्धा नहीं बुझाना चाहिए। जिसे अपने किए कर्मों पर भगवान द्वारा बतलाए धर्म पर गुरु द्वारा चलाए गए मार्ग पर और जिनवाणी में लिखे वाक्यों पर सच्चा श्रद्धा होती है। वह सदा धर्म मार्ग पर चलता है। पाप से डरता है और घर में बैरागी बनकर चक्रवर्ती की तरह रहता है। उसके लिए चक्रवर्ती की संपदा और स्वर्ग के इंद्र जैसे भोग मिलने पर भी वह विचलित नहीं होता है।</p>
<p><strong>गणधराचार्य का गूथा गया हो और मुनियों का लिखा वह जैन आगम है</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने आगम शब्द की परिभाषा बताते हुए कहा कि जो आप्त अर्थात भगवान के द्वारा कहा गया हो। गणधराचार्य द्वारा गूथा गया हो और मुनियों द्वारा लिखा गया हो वह जैन आगम है। जैन आगम पढ़ने और सुनने से विषय वासना ईर्ष्या और कषायों की आग शांत होती है। यह विचार आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने पार्श्व नाथ जैन अटा मंदिर में धर्म सभा में व्यक्त किए। गुरुवार को प्रातः काल भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक सर्वेश त्रिपाठी, मुख्य प्रबंधक संजीव लोहिया एवं हिमांशु तिवारी ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन किया।</p>
<p><strong>यह रहे मौजूद </strong></p>
<p>इस मौके पर दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, मन्दिर प्रबंधक मनोज बबीना, सनत खजुरिया, राजकुमार जैन, अखिलेश कुमार गदयाना,अक्षय अलया मीडिया प्रभारी, स्वतंत्र मोदी अमित सराफ, पुष्पेंद्र जैन, आनंद जैन एवं शादी लाल जैन एड, अनिता मोदी,ममता मोहनी,वीणा जैन,संगीता जैन,आदि मौजूद रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_salvation_is_found_only_by_faith_in_life/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भगवान के डाकिए बनकर गुरु देते हैं उपदेश : मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी का मंगलवार को होगा कलश स्थापना समारोह </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/guru_gives_advice_by_becoming_gods_postman/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/guru_gives_advice_by_becoming_gods_postman/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Jul 2025 12:26:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Nirbhay Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain Big Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Good wishes]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Mahroni]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Gurudutt Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Meghdatt Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[Shantinath Vidhan]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन बड़ा मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[मंगलकामनाएं]]></category>
		<category><![CDATA[महरौनी]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री मेघदत्त सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिनाथ विधान]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=85082</guid>

					<description><![CDATA[वर्षा ऋतु के अवसर पर दिगंबर जैन समाज महरौनी को एक विशेष सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी एवं मुनि श्री मेघदत्त सागर जी के सान्निध्य में शांतिनाथ विधान संपन्न हुआ। महरौनी से राजीव सिंघई की पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वर्षा ऋतु के अवसर पर दिगंबर जैन समाज महरौनी को एक विशेष सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी एवं मुनि श्री मेघदत्त सागर जी के सान्निध्य में शांतिनाथ विधान संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">महरौनी से राजीव सिंघई की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी।</strong> वर्षा ऋतु के अवसर पर दिगंबर जैन समाज महरौनी को एक विशेष सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी एवं मुनि श्री मेघदत्त सागर जी के दिव्य सान्निध्य में शांतिनाथ विधान संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश की सुख-शांति और समृद्धि के लिए सामूहिक रूप से मंगलकामनाएं की गईं। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री गुरुदत्त सागर जी ने कहा कि जिस प्रकार पक्षी और बादल बिना किसी भेदभाव के भगवान के डाकिए बनकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुगंध और वर्षा द्वारा प्रकृति का संदेश फैलाते हैं, उसी प्रकार सच्चे गुरु भी भगवान के संदेश वाहक बनकर समाज में ज्ञान, सत्य, प्रेम, दया, एकता और भाईचारे की भावना फैलाते हैं। मुनिश्री ने आगे कहा कि गुरु अपने उपदेशों के माध्यम से न केवल लोगों को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं, बल्कि अपने शिष्यों को नैतिकता और सामाजिक मूल्यों का भी बोध कराते हैं। गुरु का उपदेश एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ज्ञान और चेतना का संचार करता है और शिष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर करता है। इस अवसर पर मुनि श्री मेघदत्त सागर जी ने भी श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि डाकिए का अर्थ होता है दूत या संदेशवाहक।</p>
<p>हमें भी पक्षी और बादल की तरह, बिना भेदभाव के, प्रेम और सद्भाव के साथ समाज में सुगंध और शांति फैलाने वाले बनना चाहिए। मुनिश्री ने मानव जीवन को समृद्ध और सार्थक बनाने के लिए ऐसे कार्यों की प्रेरणा दी। जिनकी सुगंध पूरे विश्व में व्याप्त हो। इस पुण्य अवसर पर क्षेत्रीय जैन समाज के अनेक श्रावक-श्राविकाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। जिन्होंने भावपूर्वक विधान में भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया। समाजसेवी पवन मोदी ने बताया कि मुनि श्री गुरु दत्त सागर जी का पावन वर्षायोग 2025 के अंतर्गत मंगल कलश स्थापना का आयोजन 15 जुलाई मंगलवार प्रातः 8 बजे से दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में होगा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/guru_gives_advice_by_becoming_gods_postman/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गुरुकुल और पाठशालाओं के लिए कार्य करेगा वर्णी संस्थान:  मां चिरौंजाबाई महिला विकास सभा का किया गठन </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/varni_sansthan_will_work_for_gurukul_and_schools/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/varni_sansthan_will_work_for_gurukul_and_schools/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Mar 2025 09:40:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Nirbhay Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Gurukul]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Oath Taking]]></category>
		<category><![CDATA[pathshala]]></category>
		<category><![CDATA[Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Seminar]]></category>
		<category><![CDATA[Shrifal Jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Souvenir Release]]></category>
		<category><![CDATA[Varni Gyan Prabhavna Yatra]]></category>
		<category><![CDATA[Varni Sansthan Vikas Sabha]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[गुरुकुल]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पाठशाला]]></category>
		<category><![CDATA[वर्णी ज्ञान प्रभावना यात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[वर्णी संस्थान विकास सभा]]></category>
		<category><![CDATA[शपथ ग्रहण]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[संगोष्ठी]]></category>
		<category><![CDATA[सागर]]></category>
		<category><![CDATA[स्मारिका विमोचन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=75861</guid>

					<description><![CDATA[वर्णी संस्थान विकास सभा के तत्वावधान में गुरुकुल और पाठशालाओं के प्रचार-प्रसार के लिए वर्णी ज्ञान प्रभावना यात्रा निकाली गई। इस दौरान संगोष्ठी, स्मारिका विमोचन, शपथ ग्रहण आदि के समारोह हुए। सागर, टीकमगढ़, ललितपुर, छतरपुर, दमोह के 30 स्थानों पर यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। सागर से पढ़िए मनीष जैन विद्यार्थी की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वर्णी संस्थान विकास सभा के तत्वावधान में गुरुकुल और पाठशालाओं के प्रचार-प्रसार के लिए वर्णी ज्ञान प्रभावना यात्रा निकाली गई। इस दौरान संगोष्ठी, स्मारिका विमोचन, शपथ ग्रहण आदि के समारोह हुए। सागर, टीकमगढ़, ललितपुर, छतरपुर, दमोह के 30 स्थानों पर यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। <span style="color: #ff0000">सागर से पढ़िए मनीष जैन विद्यार्थी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> वर्णी संस्थान विकास सभा के तत्वावधान में गुरुकुल और पाठशालाओं के प्रचार-प्रसार के लिए वर्णी ज्ञान प्रभावना यात्रा निकाली गई। इस दौराना संगोष्ठी, स्मारिका विमोचन, शपथ ग्रहण आदि के समारोह हुए। बुंदेलखंड के जैन संतश्री गणेशप्रसाद वर्णी, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में देश में 100 से ज्यादा स्थान पर गुरुकुलों, महाविद्यालय स्थापना की। वर्णी ज्ञान प्रभावना का उद्देश्य उनके कार्यों को पुनः जीवंत करने के लिए वर्णी संस्थान विकास सभा के तत्वावधान में दो दिवसीय यात्रा का शुभारंभ नवीन तीर्थ क्षेत्र तपोवन बहेरिया में आचार्य श्री निर्भय सागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य में हुआ।</p>
<p>आचार्य श्री ने सभी को आशीर्वाद दिया एवं वर्णी जी के कार्यों को जीवंत करने वाली युगद्रष्टा स्मारिका का विमोचन किया। यात्रा तपोवन तीर्थ बहेरिया से श्री दिगंबर जैन तीर्थ पजनारी, पाटन, पिडहुवा, मदनपुर, वर्णी ग्राम हंसेरा, वर्णी नगर मड़ावरा पहुंची। यहां पर पंडित देवेंद्र जैन, विनोद जैन, डीके सराफ, अभिनंदन जैन ने सभी का स्वागत सत्कार किया। मड़ावरा से यात्रा श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन, जहां पं. महेश शास्त्री, डॉ. विजय जैन, डॉ. श्रेयांश जैन क्षेत्र कमेटी की ओर से आयोजित आरती कार्यक्रम में सभी ने भाग लिया और यात्रा का स्वागत किया गया। यात्रा का रात्रि विश्राम प्रैतिहासिक क्षेत्र नवागढ़ उप्र में हुआ।</p>
<p><strong>यात्रा का विभिन्न स्थानों पर हुआ स्वागत</strong><br />
सुबह पूजन विधान एवं महामस्तकाभिषेक एवं दोपहर 1 बजे से वर्णी संस्थान विकास सभा का शपथ ग्रहण, संगोष्ठी, स्मारिका का विमोचन एवं मां चिरौंजा बाई महिला विकास सभा का गठन किया गया। जिसमें सरिता जैन अध्यक्ष एवं रश्मि जैन को महामंत्री नियुक्त किया गया। नवागढ़ क्षेत्र के निर्देशक ब्र. जयकुमार निशांत ने सभी को शपद ग्रहण कराई। क्षेत्र के महामंत्री वीरचंद जैन नैकोरा, अशोक जैन मेनवार, सुरेंद्र जैन सोजना, इंद्रकुमार जैन आदि क्षेत्र कमेटी ने सभी उपस्थित वर्णी विकास सभा के पदाधिकारी का सम्मान किया। वहां से यात्रा श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र बड़ागांव, पार्श्वगिरी भगवां, श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरी, उदासीन आश्रम जहां पर सभी का स्वागत सत्कार किया गया। श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर पारस विहार कॉलोनी शाहगढ़ में सामूहिक आरती, पाठशाला के बच्चों ने विचार प्रस्तुत किए गए एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई। विद्वानों ने अपने विचार रखे और सभी विद्वानों का सम्मान मंदिर समिति द्वारा स्वागत किया गया और यात्रा का समापन कार्यक्रम संपन्न हुआ।</p>
<p><strong>पांच हजार लोगों तक पहुंचाया संदेश</strong><br />
महामंत्री कैलाश जैन टीला ने बताया कि वर्णी ज्ञान प्रभावना यात्रा का उद्देश्य पश्चिम संस्कृति में लिप्त होती भारतीय संस्कृति को, पुनः जीवंत करना है ।बुंदेलखंड के पांच जिले के 30 स्थानों पर यह यात्रा पहुंच कर लगभग पांच हजार लोगों को संदेश पहुंचाने का काम किया। मुख्य संयोजक चंद्रेश शास्त्री भोपाल द्वारा संयोजित युगद्रष्टा स्मारिका, जिसमें पूज्य वर्णी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व की जानकारी दी गई। वर्णी जी के लिए समर्पित स्मारिका को सभी स्थानों पर विमोचन कर उनके द्वारा किए गए कामों की जानकारी दी गई। आयोजन में अधिष्ठाता पं. जीवंधर शास्त्री जबलपुर, अध्यक्ष डॉ. हरिश्चंद्र जैन, महामंत्री कैलाश चंद जैन टीला, कोषाध्यक्ष प्रकाश जैन सागोनी, दीपचंद जैन शास्त्री पं. विजय कुमार शास्त्री, उत्तमचंद जैन, सुरेश जैन परसोरिया, कडोरीलाल जैन, सनत जैन वंडा, कमलेश जैन, यात्रा संयोजक द्वय राजकुमार जैन कर्द, मनीष विद्यार्थी, अनिल शास्त्री भोपाल अरविंद जैन आदि मौजूद रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/varni_sansthan_will_work_for_gurukul_and_schools/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
