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	<title>आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ससंघ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ससंघ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>गुरु अपने आप में पूर्ण मां और मां प्रथम गुरु : गुरु पूर्णिमा पर आचार्यश्री की देशना से लाभान्वित हुआ समाज  </title>
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		<pubDate>Fri, 11 Jul 2025 08:54:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गुरुवार को गुरुपूर्णिमा पर पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में आचार्य श्री का अष्टमंगल द्रव्यों से पूजन और पाद प्रक्षालन किया गया। आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ससंघ की आहारचर्या हुई। जहां सैकड़ों की संख्या में श्रावकांे ने आहारदान कर पुण्य अर्जित किया। ललितपुर से अक्षय अलय की पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ने जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गुरुवार को गुरुपूर्णिमा पर पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में आचार्य श्री का अष्टमंगल द्रव्यों से पूजन और पाद प्रक्षालन किया गया। आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ससंघ की आहारचर्या हुई। जहां सैकड़ों की संख्या में श्रावकांे ने आहारदान कर पुण्य अर्जित किया। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से अक्षय अलय की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ने जैन दर्शन में गुरु पूर्णिमा की महिमा बताई और कहा कि गुरु के माध्यम से ही धर्म का बोध होता है। गुरु अपने आप में पूर्ण मां है। यह स्वयं पूर्णिमा शब्द कहता है। सच्चा गुरु वही है, जो शिष्य को अनर्थ से बचाए और परमार्थ में लगाए। असंयम से संयम में, भोग से योग में, राग से वैराग्य में, आधुनिकता में ले जाए। गुरु को ब्रह्म इसलिए कहते हैं क्योंकि, गुरु ही शिष्य के जीवन का अच्छा सृजन करते हैं। मुनिश्री ने कहा कि गुरु ही शिष्य के पापों और दुखों का संहार करते हैं। गुरु पूर्णिमा पर आहारदान श्रावक के लिए श्रेष्ठ दान बताते हुए आचार्य श्री ने कहा कि इस दिन जो गुरु को आहारदान देता है उसको असीम पुण्य का संचय होता है और पाप धुलते हैं।</p>
<p><strong>आचायश्री का पाद प्रक्षालन और पूजन किया </strong></p>
<p>गुरुवार को गुरुपूर्णिमा पर पार्श्वनाथ जैन अटामंदिर में आचार्य श्री का अष्टमंगल द्रव्यों से पूजन और पाद प्रक्षालन किया गया। आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ससंघ की आहार चर्या हुई। जिसमें आचार्य श्री को आहारदान का पुण्यार्जन अनिलकुमार अक्षय अलया परिवार को मिला। जहां सैकड़ों की संख्या में श्रावकांे ने आहारदान कर पुण्य अर्जित किया। आचार्य श्री के दर्शनार्थ बड़ी संख्या में भक्तगण श्रावक ललितपुर पहुंचे। जहां उन्होंने आशीर्वाद ग्रहण किया। गौरतलब रहे कि जैन साधु 24 घंटे में सिर्फ एक बार ही उबला हुआ आहार ग्रहण करते हैं। बीच में दूध पानी आदि कुछ भी नहीं ग्रहण करते। जैन मुनि खडे़ होकर आहार ग्रहण करते हैं क्योंकि, मुक्ति की मंजिल वाहन से नहीं पैरों से तय की जाती है। किसी थाली कटोरे में आहार नहीं लेते वरन हाथ की अंजलि बनाकर आहार लेते हैं।</p>
<p><strong>आचार्यश्री का चातुर्मास आरंभ </strong></p>
<p>गौरतलब रहे कि ललितपुर नगर में आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज का जैन अटामंदिर में चातुर्मास शुरू हो गया है। आचार्यश्री संघ में मुनि शिवदत्त सागर महाराज, मुनि सुदत्त सागर महाराज, मुनि भूदत्त सागर महाराज, मुनि पदमदत्त सागर महाराज, मुनि वृषमदत्त सागर महाराज, क्षुल्लक चंददत्त सागर महाराज एवं श्रीदत्तसागर महाराज विराजमान हैं जिनके माध्यम से अपूर्व धर्म प्रभावना हो रही है।</p>
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		<title>प्रभु और गुरु पर श्रद्धान ही जीवन में कल्याणकारी: आचार्य श्री ससंघ ने की चातुर्मास कलश स्थापना </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Jul 2025 14:52:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ससंघ ने पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामंदिर से भव्य शोभायात्रा के साथ विहार किया। जिसमें आगे-आगे महिला मंडल की श्राविकाएं भक्ति नृत्य करते हुए चल रही थीं। वहीं विशेष वाहन में मंगल कलश लेकर श्रावक शोभायमान थे। शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए अभिनंदनोदय तीर्थ पहुंची। जहां श्रावकों ने रंगोली सजाकर आचार्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ससंघ ने पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामंदिर से भव्य शोभायात्रा के साथ विहार किया। जिसमें आगे-आगे महिला मंडल की श्राविकाएं भक्ति नृत्य करते हुए चल रही थीं। वहीं विशेष वाहन में मंगल कलश लेकर श्रावक शोभायमान थे। शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए अभिनंदनोदय तीर्थ पहुंची। जहां श्रावकों ने रंगोली सजाकर आचार्य श्री की अगुवाई की एवं श्रावकों ने पाद प्रक्षालन किया। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से अक्षय अलय की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ससंघ ने पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामंदिर से भव्य शोभायात्रा के साथ अभिनंदनोद तीर्थ के लिए विहार किया। जिसमें आगे आगे महिला मंुडल की श्राविकाएं भक्ति नृत्य करते हुए चल रही थीं। वहीं विशेष वाहन में मंगल कलश लेकर श्रावक शोभायमान थे। शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से होते हुए अभिनंदनोदय तीर्थ पहुंची। जहां श्रावकों ने रंगोली सजाकर आचार्य श्री की अगुवाई की एवं श्रावकों ने पाद प्रक्षालन किया। यहां आचार्यश्री संघ ने चातुर्मास के लिए कलश स्थापना की। इस अवसर पर आचार्यश्री निर्भयसागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया। चातुर्मास को श्रवण संस्कृति का प्रतीक और सामाजिक एकता का सूत्र बताते हुए आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज ने कहा कि यह आत्म जगत का तंत्र हैं।</p>
<p>हर चेहरे की मुस्कान है। चातुर्मास वृद्धों के लिए सहारा और श्रद्धालुओं को अमृतपान है। जैन संत चातुर्मास के माध्यम से समाज में आई विकृतियों को निकालने की प्रेरणा देते हैं। जैसे वर्षा काल में नदी में आई बाढ़ नदी की गंदगी को बहाकर ले जाती है। वैसे ही वर्षायोग में सामू रूपी नदी ज्ञान रूपी बाढ़ से समाज रूपी गंदगी को बहाकर साफ कर देती हैं। उन्होंने कहा गुरू और प्रभु पर श्रावक को श्रद्धा रखनी चाहिए। गुरु के उपकार को कभी भुलाया नहीं जा सकता। संत जहां एक स्थान पर रहकर चातुर्मास स्थापित करते हैं वहीं श्रावक यदि उनके सानिध्य में रहकर उपयोग करे जो जीवन का कल्याण है।</p>
<p><strong>मुनिराजों के गृहस्थ जीवन के परिजनों की अनुमोदना की </strong></p>
<p>धर्मसभा का शुभारंम वीतराग शासन महिला मंडल की श्राविकाओं ने गुरुभक्ति कर किया। जबकि श्रुति ने भक्ति में नृत्य प्रस्तुत किया। आचार्य श्री के चित्र का अनावरण पंचायत कमेटी के पदाधिकारियों ने किया। दीप प्रज्वलन संजीव जैन लकी परिवार द्वारा किया गया। विद्या पुनीत महिला मंडल ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। चातुर्मास कलश स्थापना समारोह के दौरान अतिशय क्षेत्र तपोवन तीर्थ सागर, नवागढ़, महरौनी, मडावरा, वासी समाज के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद ग्रहण किया। आचार्य श्री एवं संघस्थ मुनिराजों के गृहस्थ जीवन के परिजनों को ललितपुर जैन पंचायत ने सम्मानित कर उनके पुण्य की अनुमोदना की।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में इन्हें मिला सौभाग्य और यह समाजजन रहे मौजूद </strong></p>
<p>कलश स्थापनकर्ताओं का चयन प्रतिष्ठाचार्य डॉ. अभिषेक जैन दमोह द्वारा किया गया। जिसमें पुण्यअर्जन राजेन्द्र जैन अंकित जैन थनवारा, राकेश जैन बरया, अजय जैन गंगचारी, अखिलेश जैन गदयाना, बीरेन्द्र जैन मयूर सौरम जैन सीए, जिनेन्द्र जैन पंसारी, देवेन्द्र जैन परिवार, वीरचंद सुरेश जैन न्यूतन ज्वैलर्स, रतन चंद जैन, सोमचंद राजीव जैन लकी, राजेश जैन चंदा परिवार द्वारा किया गया।</p>
<p>ललितपुर नगर में आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज एवं संघस्थ मुनि शिवदत्त सागर महाराज, मुनि सुबदत्तसागर महाराज, मुनि गुरुदत्त सागर महाराज, मुनि भूदत्त सागर महाराज, मेघदत्त सागर महाराज, पदमदत्त सागर महाराज, मुनि वृषमदत्त सागर महाराज, छुल्लक चंद्रदत्त सागर महाराज, छुल्लक श्रीदत्त सागर महाराज ससंघ का चातुर्मास कराने का सौभाग्य मिला। इसके पूर्व मध्यान्ह में इस मौके पर प्रमुख रूप से जैन पंचायत अध्यक्ष डा अक्षय टडया, महामंत्री आकाश जैन, शीलचद अनौरा, कैप्टन राजकुमार जैन, सनत खजुरिया, प्रबंधक मोदी पंकज जैन, मनोज जैन बबीना, प्रतीक इमलिया, राकेश जैन, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, नरेन्द्र जैन छोटे पहलवान, संजय रसिया, वीणा जैन, अनीता मोदी, आदि मौजूद रहे।</p>
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