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	<title>आचार्य श्री ज्ञान सागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>नवागढ़ अतिशय क्षेत्र पर मनाया मोक्ष सप्तमी पर्व : अतिशयकारी भगवान अरनाथ स्वामी का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई </title>
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		<pubDate>Fri, 01 Aug 2025 08:01:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रागैतिहासिक नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में श्री पारसनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव संगीतमय विधान के साथ गुरुकुलम के बच्चों के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में विशेष सानिध्य ब्रह्मचारी श्री जय कुमार निशांत जी का रहा। नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; नवागढ़। प्रागैतिहासिक नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में श्री पारसनाथ भगवान का निर्वाण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रागैतिहासिक नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में श्री पारसनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव संगीतमय विधान के साथ गुरुकुलम के बच्चों के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में विशेष सानिध्य ब्रह्मचारी श्री जय कुमार निशांत जी का रहा। <span style="color: #ff0000">नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नवागढ़।</strong> प्रागैतिहासिक नवागढ़ अतिशय क्षेत्र में श्री पारसनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव संगीतमय विधान के साथ गुरुकुलम के बच्चों के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में विशेष सानिध्य ब्रह्मचारी श्री जय कुमार निशांत जी का रहा। कार्यक्रम का प्रारंभ सातवीं सदी के भोंयरे के साथ भू गर्भ से प्रकटित मनोकामनापूर्ण अतिशयकारी भगवान अरनाथ स्वामी के अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ हुआ। इसमें गुरुकुलम के बच्चों ने उत्साह पूर्वक अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार श्रद्धा राशि समर्पित करके भगवान अरनाथ जी कि शांतिधारा की एवं दैनिक पूजन के साथ भगवान पारसनाथ स्वामी का विधान हुआ।</p>
<p><strong>सौजन्य एवं पुण्यार्जन इनका रहा</strong></p>
<p>इस अवसर पर राजेंद्र कुमार कुसुम लता जैन सपरिवार ग्वालियर द्वारा निर्वाण लाडू समर्पित किया गया एवं दिनेश कुमार जैन खजांची सपरिवार ग्वालियर वालों द्वारा वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया।</p>
<p><strong>निर्वाण महोत्सव की जानकारी दी</strong></p>
<p>कार्यक्रम के समापन पर क्षेत्र महामंत्री वीरचंद्र नैकोरा एवं क्षेत्र निर्देशक ब्रह्मचारी जय निशांत भैयाजी द्वारा तीर्थंकर भगवान् पार्श्वनाथ के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कमठ द्वारा किए गए उपसर्ग एवं पारसनाथ भगवान की सहनशीलता एवं क्षमाशीलता के बारे में बताते हुए गुरुकुलम के सभी छात्रों को पारसनाथ भगवान के निर्माण महोत्सव की विशेष जानकारी दी गई।</p>
<p>आर्यिका स्वस्ति भूषण जी का मिल रहा आशीर्वाद महामंत्री वीरचंद ने नवागढ़ क्षेत्र के इतिहास एवं गुरुकुलम के बारे में जानकारी देते हुए सभी लोगों को आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के द्वारा किए गए पंचकल्याणक उनके आशीर्वाद एवं भारत गौरव गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी का विशेष आशीर्वाद नवागढ़ को प्राप्त हो रहा है। अवगत कराते हुए आचार्य श्री ज्ञान सागर जी एवं स्वस्तिभूषण माताजी के प्रति अपना विनम्र भाव निवेदित किया।</p>
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		<title>जीवन को सफल और सुरक्षित बनाने में सहायक हैं संस्कार : खूंटी जिले में शिक्षण शिविरों का समापन </title>
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		<pubDate>Sat, 24 May 2025 09:50:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में झारखंड प्रांत के खुटी जिले में चल रहे शिक्षण शिविरों का समापन 24 मई को हुआ। शिविर समापन में जूम चैनल के माध्यम से मुनि श्री नियोग सागर जी महाराज, आर्यिका श्री सुज्ञान मति का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा में आयोजित शिक्षण शिविरों में 1000 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में झारखंड प्रांत के खुटी जिले में चल रहे शिक्षण शिविरों का समापन 24 मई को हुआ। शिविर समापन में जूम चैनल के माध्यम से मुनि श्री नियोग सागर जी महाराज, आर्यिका श्री सुज्ञान मति का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा में आयोजित शिक्षण शिविरों में 1000 से ज्यादा बच्चों ने भाग लिया। <span style="color: #ff0000">खुटी से पढ़िए, मनीष जैन विद्यार्थी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>खुटी।</strong> आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के जन्म दिवस के पावन अवसर पर पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा के सराक क्षेत्र में आचार्य श्री ज्ञेय सागर जी, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका श्री आर्ष मति माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से ब्र. मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया के निर्देशन में भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में झारखंड प्रांत के खुटी जिले में चल रहे शिक्षण शिविरों का समापन 24 मई को हुआ। शिविर समापन में जूम चैनल के माध्यम से मुनि श्री नियोग सागर जी महाराज, आर्यिका श्री सुज्ञान मति का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का मंगलाचरण अनुज जैन सराक ने किया चित्रावरण, दीप प्रज्वलन उपस्थित विद्वत श्रीपं. राजकुमार शास्त्री कर्द ने किया। सामूहिक मंगरचारण विदुषी सपना जैन, साधिका जैन ने किया।</p>
<p>सभी उपस्थित विद्वानों का सम्मान स्थानीय समाज के वरिष्ठजन द्वारा किया गया। शिविर स्थानों में कसमार, कोरला, डोडमा, खूटी स्थानों पर शिक्षण शिविरों द्वारा धर्म प्रभावना हुई। जिसके सामूहिक समापन समारोह में प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त शिविराथियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। जिन्होंने मेहंदी, सिलाई, पेंटिंग में अपना स्थान प्राप्त किया है। उनका भी सम्मान किया गया। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।</p>
<p><strong>ज्ञान प्राप्त करने के अवसर का हमें लाभ लेना चाहिए</strong></p>
<p>अंत में आर्यिका श्री सुज्ञानमती माताजी ने आशीष वचन में कहा कि आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आयोजित शिक्षण शिविरों द्वारा संस्कारों का बीजारोपण का कार्य हो रहा है। जो भविष्य में जाकर जैन संस्कृति की प्रभावना करेगा। शिक्षण शिविरों द्वारा कम समय में ज्ञान प्राप्त करने के अवसर का हमें लाभ लेना चाहिए। संस्कार जीवन को सफल एवं सुरक्षित बनाते हैं। मुनि श्री नियोग सागर जी महाराज ने कहा कि अगर हमें ज्ञान प्राप्त करना है तो हमें कुछ सीखना और जानना होगा। इसके लिए कम समय में होने वाले शिक्षण शिविरों में भाग लेकर समय का सदुपयोग कर जीवन में ज्ञानार्जन करें। शिविर मुख्य संयोजक मनीष विद्यार्थी ने कहा कि इस भीषण गर्मी में विद्वानों द्वारा समय निकालकर सराक क्षेत्र आना, वहां शिविर लगाना और अपने अनुकूल परिस्थितियों के न होने पर भी शिविरों का संचालन करना बड़ा कठिन कार्य है। फिर भी यहां आकर बच्चों को धार्मिक शिक्षा देकर जैन धर्म की प्रभावना करना बड़ा ही सराहनीय कार्य है।</p>
<p><strong>मद्य और मांस त्याग का संकल्प लिया </strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल, झारखंड,उड़ीसा प्रांत के बच्चों ने आयोजित शिक्षण शिविरों में शामिल होकर एक हजार से ज्यादा बच्चों नाम मद्य त्याग, मांस त्याग का संकल्प लिया। जिसमें खूटी दिगंबर जैन समाज द्वारा विद्वानों की आवास एवं भोजन व्यवस्था की गई। समाज के अध्यक्ष शिखरचंद जैन ने कहा कि मेरा सौभाग्य है की आचार्यश्री ज्ञान सागर जी द्वारा आयोजित शिक्षण शिविरों में विद्वान हमारे क्षेत्र में पधारकर जैन धर्म की प्रभावना कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। शिविर व्यवस्थाओं के लिए अनुज जैन सराक भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा के विभिन्न स्थानों पर धार्मिक शिक्षण शिविर एवं शाकाहार के लिए किया जा रहा कार्य से भारतीय संस्कृति को पुनः जीवंत करने में सफलता मिलेगी।</p>
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		<title>श्री सर्वतोभद्र जिनालय का संपन्न हुआ भूमि शिलान्यास समारोह: मंदिर में पूजा करने से धर्म और पुण्य प्राप्त होता है </title>
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		<pubDate>Sat, 11 May 2024 07:12:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसन्त सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में आगरा के बल्केश्वर स्थित गंगेगौरी बाग के निकट न्यू आदर्श नगर में प्रस्तावित भूमि पर आगरा का प्रथम बल्केश्वर ग्रेटर कमलानगर में नवनिर्मित [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसन्त सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में आगरा के बल्केश्वर स्थित गंगेगौरी बाग के निकट न्यू आदर्श नगर में प्रस्तावित भूमि पर आगरा का प्रथम बल्केश्वर ग्रेटर कमलानगर में नवनिर्मित होने जा रहे श्री सर्वतोभद्र जिनालय का भूमि शिलान्यास समारोह अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर 10 मई को बल्केश्वर स्थित गंगेगौरी पार्क में बने विशाल पंडाल पर आयोजित किया गया | <span style="color: #ff0000">पढि़ए शुभम जैन की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा ।</strong>समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसन्त सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में आगरा के बल्केश्वर स्थित गंगेगौरी बाग के निकट न्यू आदर्श नगर में प्रस्तावित भूमि पर आगरा का प्रथम बल्केश्वर ग्रेटर कमलानगर मे नवनिर्मित होने जा रहे श्री सर्वतोभद्र जिनालय का भूमि शिलान्यास समारोह अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर 10 मई को बल्केश्वर स्थित गंगेगौरी पार्क में बने विशाल पंडाल पर आयोजित किया गया| जिसमें प्रहलाद जैन ने विशाल पंडाल का फीता खोलकर समारोह का शुभारंभ किया| शिलान्यास समारोह का ध्वजारोहण अतुल जैन एव अमन जैन परिवार ने किया| ध्वजारोहण के बाद श्री सर्वतोभद्र दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने गणाचार्यश्री विराग सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलित किया| सौभाग्यशाली भक्तों ने उपाध्याय श्री विहसन्तसागर जी महाराज के चरणों का पाद प्रक्षालन किया| पीएनसी परिवार की महिलाओं ने उपाध्यायश्री को शास्त्र भेंट किया| महिलाओं ने भक्ति गीत पर नृत्य कर मंगलाचरण की प्रस्तुति दी|</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-60325" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM.jpeg" alt="" width="1280" height="852" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM.jpeg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-1024x682.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-768x511.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-990x659.jpeg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />दान करने से अगले भव का होता है निर्माण</strong></p>
<p>समारोह के मध्य में भक्तों को उपाध्यायश्री विहसन्तसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि नवीन मंदिर बनाने से जीवन में सुख ,शांति की प्राप्त होती है।मंदिर में पूजा करने से धर्म की प्राप्ति होती है और पुण्य प्राप्त होता है। दान करने से अगले भव का निर्माण होता है। इस अवसर पर आयोजन समिति ने सभी अतिथियों को माला,पगड़ी पहनाकर एवं प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत सम्मान किया| इस दौरान श्री सर्वतोभद्र दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ के समक्ष श्रीफल भेंटकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया| इसके बाद विधानाचार्य संदीप जैन शास्त्री मेहगांव वालों के कुशल निर्देशन में मंत्रोच्चारण के साथ नवनिर्मित श्री सर्वतोभद्र जिनालय के भूमि शिलान्यास की मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई ।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-60324" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM.jpeg" alt="" width="1280" height="852" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM.jpeg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-1024x682.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-768x511.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-990x659.jpeg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />एनसी जैन इंजीनियर एवं हिमांशु जैन परिवार एवं सभी सौभाग्यशाली भक्तों ने शिला रखकर संपन्न कीं| शिलान्यास समारोह में सभी मुख्य शिला नरेंद्र कुमार जैन परिवार ने प्राप्त की| जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़- चढ़कर दान दिया| इस दौरान,एटा,मैनपुरी फिरोजाबाद,ग्वालियर,सोनागिर,मुरैना,भिंड,इटावा,कुरावली,मेहगांव,बरासो,आगरा के अलावा विभिन्न नगरों के जैन समाज ने उपाध्यायश्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ के समक्ष वर्षायोग 2024 हेतु श्रीफल भेंटकर निवेदन किया| शिलान्यास समारोह का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल एव उमेश जैन भिंड वालों द्वारा किया गया| कार्यक्रम के समापन के बाद साय: 5:00 बजे उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर, कचौड़ा बाजार बेलनगंज के लिए हुआ|</p>
<p>उपाध्यायश्री 108 विहसंतसागर जी महाराज ससंघ का दो दिन का मंगल प्रवास राजा की मंडी, जैन मदिर में रहेगा| इसके बाद 13 और 14 मई को मोती कटरा, जैन मंदिर 15 और 16 मई को छीपीटोला जैन मंदिर में मंगल प्रवास रहेगा|इस अवसर पर कार्यक्रम में आगरा दिगंबर जैन परिषद के अध्यक्ष जगदीशप्रसाद जैन,राकेश जैन पर्देवाले,प्रदीप जैन पीएनसी ,निर्मल मौठ्या,नीरज जैन जिनवाणी चैनल,पंकज जैन,पारस जैन,शिखरचंद जैन सिंघई,राजीव जैन,दिलीप जैन उत्तम उघोग,रजत जैन, सचिन जैन, प्रमोद जैन,अमित जैन चांदी वाले, अनिल कागज,राजेन्द्र जैन,सुरेश पांड्या,सुमेर पांडया,राजू गोधा,संजू गोधा,मीडिया प्रभारी शुभम जैन, समस्त बल्केश्वर एवं ग्रेटर कमला नगर जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर पुण्यार्जन किया।</p>
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		<title>साधना और मंगल भावना की संपूर्णता का नाम है पूज्य आर्यिका 105 श्री सृष्टि भूषण माताजी    आर्यिका105 सृष्टि भूषण माताजी अवतरण दिवस 23 मार्च पर विशेष आलेख     </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Mar 2024 12:10:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आध्यात्म की सरिता स्वरूपा, आत्महित एवं परहित में संलग्न पूज्य माता श्री आर्यिका 105 श्री सृष्टि भूषण माताजी जी, साधना और मंगल भावना की संपूर्णता का नाम है। सृष्टि का अलंकरण करती पूज्य माता जी सृष्टि के दुखों को भी हरती है। परम पूजनीय जैनधर्म प्रभाविका आर्यिका 105 सृष्टि भूषण माताजी संयम वर्ष वद्र्धन दिवस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आध्यात्म की सरिता स्वरूपा, आत्महित एवं परहित में संलग्न पूज्य माता श्री आर्यिका 105 श्री सृष्टि भूषण माताजी जी, साधना और मंगल भावना की संपूर्णता का नाम है। सृष्टि का अलंकरण करती पूज्य माता जी सृष्टि के दुखों को भी हरती है। परम पूजनीय जैनधर्म प्रभाविका आर्यिका 105 सृष्टि भूषण माताजी संयम वर्ष वद्र्धन दिवस 26 मार्च एवं अवतरण दिवस 23 मार्च पर<span style="color: #ff0000"> संघस्थ बाल ब्रह्मचारिणी आर्यिका श्री विश्वयशमति जी का विशेष आलेख पढि़ए</span>&#8211;      </strong></p>
<hr />
<p>साधना और मंगल भावना की संपूर्णता का नाम है 60 वर्षीय पूज्य आर्यिका 105 श्री सृष्टि भूषण माताजी, पूज्य माता जी ने भारतवर्ष के मध्य प्रदेश प्रांत की रत्नमय मुंगावली की धरा पर 23 मार्च सन 1964 चैत्र शुक्ला नवमी को श्रद्धेय पिताश्री कपूर चंद एवं माता श्री पदमा देवी की बगिया में जन्म लिया। मानवता के दिव्य आलोक से परिपूर्ण संयम की मंगल मनीषा सुलोचना यह परिवार की तीसरी संतान थी। इसे विधि का विधान कहे की इनसे पूर्व जन्मे दोनों ही पुत्र अल्प समय में ही इस मनुष्य पर्याय से पलायन कर गए। दोनों संतानों के चले जाने के बाद आपका जन्म हुआ।</p>
<p><strong>ताई को सौंपी परवरिश की जिम्मेदारी </strong></p>
<p>आपके जन्म से पहले ही आपकी मातृश्री को सपनों के माध्यम से आदेशित किया गया यह संतान को अपने पास ना रख कर कहीं और परवरिश कराई जाए अन्यथा संतान भी काल के गाल में विलीन हो जाएगी। बड़ा ही व्याकुल क्षण था मां के लिए, अपने हृदय और भावनाओं पर पत्थर रखकर आपको जन्म के कुछ क्षणों बाद ताई रामप्यारी बाई को सौंप दिया। जो आपके गांव की एक वरिष्ठ महिला थी। उनके पति का देहांत भी उनके विवाह के मात्र 6 महीने बाद ही हो गया था। उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी। उन्होंने आपको हृदय से लगाकर अपनी खुद की संतान से भी ज्यादा प्यार देकर पाला पोसा और संस्कारित किया। आप सभी के आकर्षण का केंद्र थी। पूरे गांव की लाडली सुलोचना पूरे कुटुंब का आकर्षण थी। मेधावी छात्रा को शिक्षकों ने भरपूर स्नेह दिया। वह इन्होंने आत्मीयता से शिक्षा को सम्पन्न किया। चाहे लौकिक शिक्षा हो, हस्त कला हो, संगीत कला हो सभी में पारंगत रही।</p>
<p><strong>दैदीप्यमान ललाट देखकर हुई भविष्यवाणी</strong></p>
<p>जब सुलोचना की 4 वर्ष की थी तो ताई जी आर्यिका श्री सुपाश्र्वमति माताजी के दर्शन के लिए उन्हें लेकर गई, उन्हें देखकर माताजी स्वयं ही बोल पड़ी, अरे इस बालिका को तो संन्यास लेने से कोई नहीं रोक सकता। तब ताई हैरानी से बोली पर ऐसा क्यों? माताजी ने कहा कि जिस दिन यह बच्ची जैन संतों के दर्शन कर लेगी उसी दिन गृह त्याग की भावना बन जाएगी, जो रोकने से नहीं रुकेगी। माताजी ने छोटी सी सुलोचना को छोटे-छोटे कमंडल और मयूर पीछी भी आशीर्वाद में दिए। ताई धार्मिक महिला होते हुए इस बात से चिंतित हुई। जब कोई संत नगर में आते तब उन्होंने सुलोचना का मंदिर जाना बंद कर दिया, पर होता वही है जो भाग्य में लिखा होता है संयोग से सुलोचना को मुंगावली जाना पड़ा जहां भाग्य प्रतीक्षा कर रहा था। सुलोचना के मस्तिष्क पर धर्म का स्वस्तिक रचना के संयोग बने नगर में क्षुल्लक श्री गुण सागर जी वर्तमान समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी आए हुए थे। जिनके सानिध्य में दहेज विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता रखी गई सुलोचना ने भी प्रतियोगिता में भाग लिया और अपनी वाक पटुता से प्रथम स्थान प्राप्त किया। पुरस्कार में मिली कुछ पुस्तकों में एक पुस्तक मिली आटे का मुर्गा। इन पुस्तकों के स्वाध्याय से परिजनों के लाख यत्न करने पर भी सुलोचना को मोक्ष मार्ग चढऩे-बढऩे पर कोई रोक नहीं सका।</p>
<p><strong> धार्मिक शिक्षा में बड़ा लगाव </strong></p>
<p>ललितपुर की प्रखर मेधावी ब्रह्मचारिणी कमलेश जी ब्रह्म सुलोचना के लिए वरदान बनकर मिली। उन्होंने ही ब्रह्म सुलोचना को आगम का अध्ययन कराया और बड़ी बहन जैसी आत्मीयता स्नेह दिया। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री का वात्सल्य प्रसंग है 1993 श्री बाहुबली भगवान के महामस्तकाभिषेक का तब माताजी की दीक्षा नहीं हुई थी। ब्रह्मचारिणी थी। वह भी 93 में मस्तकाभिषेक देखने संघ की अन्य दीदियों के साथ गई थी। उन्होंने पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से संघ के साथ अभिषेक देखने का निवेदन किया। आचार्य श्री ने सहज स्वीकृति देकर अगले दिन दोपहर को सामायिक के बाद का समय दिया। आचार्य श्री संघ समय पर बड़े पहाड़ के गेट तक पहुंच गए। किंतु दीदियों के नहीं पहुंचने पर इंतजार कर बुलाने भेजा और संघ के साथ लेकर चले गए। घटना छोटी है किंतु यह अन्य संघ के प्रति वात्सलय को दर्शाती है कि सचमुच आचार्य श्री का हृदय कितना विशाल एवं करुणामय है।</p>
<p><strong>जीवन की नश्वरता से दीक्षा की ओर </strong></p>
<p>सभी बहनों के साथ गुरु आज्ञा से तीर्थराज सम्मेद शिखर जी की यात्रा करने के लिए पहुंची, वहां एक पर्वत पर एक श्रावक के साथ हृदय विदारक घटना घटी। श्रावक को लुटेरों ने लूटा और गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। उसकी मूर्छित पत्नी और तड़पते बच्चों को देखकर ब्रह्मचारिणी सुलोचना को इस संसार की असारता और नश्वरता को गहराई से भाप गई, तुरंत दीक्षा लेकर आत्म कल्याण को व्याकुल हो गई।</p>
<p><strong> सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेद शिखर जी में हुई आर्यिका दीक्षा </strong></p>
<p>26 मार्च 1994 चैत्र शुक्ला 14 चतुर्दशी को आचार्य श्री सुमति सागर जी महाराज एवं विद्या भूषण आचार्य श्री सम्मति सागर जी से बाल ब्रह्मचारिणी सुलोचना दीदी ने 30 वर्ष की उम्र में सीधे आर्यिका दीक्षा ग्रहण की आचार्य श्री ने नाम प्रदान किया आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी। आप विशिष्ट प्रज्ञा समन्वित एवं रत्यत्रय विभूषित है। माताजी द्वारा समाज सेवा धार्मिक क्षेत्र में देश में अनेक कीर्तिमान बने हैं जो स्वयं में भूतो ना भविष्यति की संख्या लिए हुए हैं। इसमें माताजी द्वारा बद्रीनाथ की यात्रा अतिशय क्षेत्र रानीला में 57 दिवसीय अखंड भक्तामर आराधना, औद्योगिक नगरी गुडग़ांव में पद्म पुराण मानस लीला का मंचन, अतिशय क्षेत्र बड़ा गांव में अखंड 44 दिवसीय आराधना, अतिशय क्षेत्र महावीर जी और मुरादाबाद में विषपाहार स्त्रोत शामिल है। माताजी के निमित्त से धर्म में जोडऩे वालों की संख्या हजारों लाखों से भी ज्यादा है, जहां माताजी के चरण पड़ते हैं वहीं श्रद्धालुओं का हुजूम लग जाता है जब माताजी चल पड़ती तो ऐसा लगता है मानो कोई मेला लगा हुआ है।</p>
<p><strong> मानव कल्याण के लिए पदयात्रा</strong></p>
<p>माता जी के चातुर्मास पाने के लिए समाज में तो होड़ लगी रहती। इतना ही नहीं आपने धर्म की प्रभावना करते हुए लगभग 25000 किलोमीटर की पदयात्रा की है एवं आपने अपने 30 वर्षीय संयमी जीवन में करीब 25000 किलोमीटर की पदयात्रा पूरी की। जिसमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, गुजरात आदि के प्रांतों के नगर एवं महानगर सम्मिलित हैं। आपके द्वारा महानगर दिल्ली समेत सिद्ध क्षेत्र श्री सम्मेद शिखरजी झारखंड, सिद्ध क्षेत्र सोनागिर जी मध्य प्रदेश, अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी राजस्थान में भक्तों के सहयोग से श्री सृष्टि मंगलम फाउंडेशन ऐसी संस्थाओं की स्थापना करवाई। जिसमे त्यागी महाव्रती अणुव्रत धारी के आहार की व्यवस्था की गई । जिसके माध्यम से समाज के हर वर्ग के लोग लाभान्वित हो सके। साथ ही प्यारी आत्माओं जो संयम के मार्गदर्शक हैं। निर्विकल्प अपनी संयम साधना कर सकें। ऐसी व्यवस्था प्रदान की गई भविष्य में भी की जाती रहेंगी। आपके आशीर्वाद से एवं निर्देशन में जगह-जगह निशुल्क भोजनालय खुलवाए गए। छात्रवृत्ति शिक्षण शिविर, संस्कार शिविर, पूजन विधान शिविर, वस्त्र वितरण ट्राई साइकिल बैसाखी कानों की मशीन सिलाई मशीन कंबल निशुल्क दवाइयों के वितरण के साथ-साथ असहाय गरीब लड़कियों की शादी करवाना एवं साथ-साथ बेरोजगार परिवारों को कार्य दिलवाने के कार्य किए जा रहे हैं। कैंसर और थैलेसीमिया जैसी दो बड़ी बीमारियों को ध्यान में रखते हुए आप की प्रेरणा से गठन हुआ श्री आदि सृष्टि कैंसर ट्रस्ट का। अनेक सेमिनार अल्प समय में ही देश के विभिन्न प्रांतों, जिलों, गांव-कस्बों के साथ विदेशों में भी जांच शिविर सेमिनार एवं जागरूकता अभियान शुरू किए गए। शासन प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला। सरकारी योजनाओं के द्वारा लाभान्वित लोगों इलाज कराया गया।</p>
<p><strong>मानव रत्न से अलंकृत</strong></p>
<p>प्रख्यात मानव सेविका एवं जैनधर्म प्रभाविका आर्यिका 105 श्री सृष्टि भूषण माताजी को मानव कल्याणार्थ किए गए अति विशिष्ट कार्यों के लिए इंटरनेशनल न्यूज एंड व्यूज कॉर्पोरेशन द्वारा मानव रत्नअलंकरण से सम्मानित किया गया है। वे एक प्रख्यात जैन संत एवं समाज सेविका हैं, जो पिछले कई दशकों से कैंसर पीडि़त व्यक्तियों, दिव्यांगजन, अनाथ बच्चों की शिक्षा एवं महिला रोजगार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक महा अभियान चला कर सृष्टि के मानव ग्रह भारतीय भू-वसुंधरा का संताप हरण कर रहीं हैं। उनको यह अलंकरण, कैंसर पीडि़त व्यक्तियों की सेवा के लिए चलाए जाए जा रहे आदि सृष्टि कैंसर सेवा ट्रस्ट के संचालन के लिए दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एवं विचार निगम के मानव रत्न अवार्ड सिलेक्शन कमेटी के समन्वयक डॉ डीपी शर्मा जो कि यूनाइटेड नेशंस की संस्था आईएलओ के अंतरराष्ट्रीय परामर्शक एवं भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के राष्ट्रीय ब्रांड एंबेसडर है ने बताया कि यह पुरस्कार सेवा के क्षेत्र में अति विशिष्ट कार्यों के लिए परंपरा से परे भागीरथ प्रयासों के लिए दिया जाता है। यह पुरस्कार उन्हें 29 सितंबर 2019 को दिल्ली के राजवाडा पैलेस में एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया है। डॉक्टर डीपी शर्मा ने आगे कहा की कैंसर पीडि़तों एवं गरीबों की सेवा के लिए सृष्टि भूषण माता श्री का योगदान अंतरराष्ट्रीय ख्याति का है। उन्होंने कहा कि सेवा एवं ममता की प्रतिमूर्ति माता श्री मनुष्य देह में एक देवी स्वरूपा हैं जो दिन-रात अनवरत रूप से मानव कल्याण के लिए प्रयासरत हैं। उनको यह सम्मान प्रदान करते हुए संपूर्ण मानवता कृतज्ञता के भाव से स्वयं को गौरवान्वित महसूस करेगी।</p>
<p><strong>  चातुर्मास आपने देश के अनेक राज्यों में वर्षायोग किए। </strong></p>
<p>1994 आगरा, 1995 इटावा, 1996 कुरावली, 1997 बड़ौत, 1998 गोहाना, 1999 चंडीगढ़, 2000 सहारनपुर, 2001 मुरादाबाद, 2002 सम्मेद शिखर, 2003 सिरसागंज, 2004 त्रिनगर दिल्ली, 2005 अजमेर, 2006 त्रिनगर दिल्ली, 2007 शाहदरा दिल्ली, 2008 सुल्तानपुर, 2009 शामली, 2010 बिहारी कॉलोनी दिल्ली, 2011 गुडग़ांव-हरियाणा, 2012 बूंदी, 2013 केसरगंज-अजमेर, 2014 रोहतक, 2015 सेठी कालोनी जयपुर, 2016 महावीर जी, 2017 भीलवाड़ा, 2018 नजफगड़, 2019 राणा प्रताप बाग दिल्ली, 2020 कोशी, 2021 महावीर जी, 2022 महावीर जी, 2023 मुरादाबाद।</p>
<p><strong>अलंकरण और उपाधियां</strong></p>
<p>आपको इन महान कार्यों के लिए निम्न उपाधियां भी पूर्व में सम्मान स्वरूप प्रदान की गई हैं, जो मुख्य है- हरियाणा समाज द्वारा सन 1998 हरियाणा उद्धारक (200 देशों के शंकराचार्यों की उपस्तिथि में) अजमेर समाज द्वारा सन 2005 &#8211; जिनधर्म प्रभाविका, गुडगांव समाज द्वारा सन 2011 कविमना, बूंदी राजस्थान समाज द्वारा सन 2012 -वात्सल्य मूर्ति, महावीर जी समाज द्वारा सन 2016 समता शिरोमणि, नजफगढ़ समाज द्वारा सन 2018 में वात्सल्य निधि। आचार्य अतिवीर जी महाराज जी द्वारा सन 2015 गणनी पद के संस्कार किए है, आदि अनेकों उपाधियां आपको प्रदान की गईं। परन्तु हर उपाधि आपके द्वारा किये जा रहे कार्यों के समक्ष छोटी ही नजर आई।</p>
<p><strong> आपने अपने साथ जुड़े लाखो भक्तों को एक ही सन्देश दिया है-  </strong></p>
<p><strong>&#8221;मेरा तो है बस एक ही सपना, </strong></p>
<p><strong>स्वस्थ सुखी हो जीवन सबका&#8221;  </strong></p>
<p>आपकी इसी मंगल भावना और आशीर्वाद को साथ लेकर संकल्पित और समर्पित है आपके सभी भक्तगण। हम प्रभु से निवेदन करते हैं कि आध्यात्म की सरिता स्वरूपा, आत्महित एवं परहित से संलग्न पूज्य माता श्री आपने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज अभ्युत्थान, संस्कृति के संरक्षण एवं श्रमण परम्परा के संवर्धन में समर्पित किया है। आपकी यह कृति सम्पूर्ण मानवता के लिए अनुकरणीय है, वन्दनीय है । आपकी यशोगाथा का कांतिमय दीपस्तंभ युगों युगों तक इसी तरह दैदीप्यमान रहे। साथ ही आपने अपने साथ जुड़े लोगों को भक्तों को एक ही संदेश दिया।मेरा तो है बस एक ही सपना स्वस्थ सुखी हो भारत अपना।अनेकों धार्मिक मंडल विधान आपके निर्देशन में 44 दिवसीय से लेकर अनेक दिनों में धार्मिक विधान करवा कर समाज को धर्मसे लगातार जोड़ कर रखा। शाम को गुरुवंदना कार्यक्रम में भी काफी श्रद्धालु उपस्थित होते हैं।</p>
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