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	<title>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>पं.बंगाल में शिक्षण शिविरों का हुआ समापन : 40 सराक जैन प्रतिभाओं का हुआ सम्मान, 3 राज्य, 20 स्थानों में 2 हजार शिविरार्थी हुए शामिल  </title>
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		<pubDate>Thu, 21 May 2026 14:22:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के 70 वें अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष मति माता जी,आर्यिका श्री सुज्ञान मति माता जी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उड़ीसा, झारखंड,पश्चिम बंगाल के विभिन्न अंचलों में शिक्षण शिविर हुआ। बांकुडा से पढ़िए, मनीष विद्यार्थी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के 70 वें अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष मति माता जी,आर्यिका श्री सुज्ञान मति माता जी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उड़ीसा, झारखंड,पश्चिम बंगाल के विभिन्न अंचलों में शिक्षण शिविर हुआ। <span style="color: #ff0000">बांकुडा से पढ़िए, मनीष विद्यार्थी की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांकुडा।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के70 वें अवतरण दिवस के अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माता जी, आर्यिका श्री आर्ष मति माता जी,आर्यिका श्री सुज्ञान मति माता जी की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उड़ीसा, झारखंड,पश्चिम बंगाल के विभिन्न अंचलों में शिक्षण शिविर हुआ है। बंगाल प्रांत के पुरुलिया एवं बांकुडा जिले के विभिन्न स्थानों पर आयोजित शिक्षण शिविरों का समापन भव्य कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ। ब्र.मंजुला दीदी के निर्देशन में ग्रीष्मकालीन ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविरों का समापन, विशिष्ट जनों की उपस्थिति में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ। आचार्य ज्ञानसागर जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन, मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ। स्थानीय शिविर सहयोगियों का सम्मान,बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गई। ज्ञान दर्पण भाग 1,2, पूजन प्रशिक्षण,मेहंदी, ड्राइंग, सिलाई में प्रथम, द्वितीय,तृतीय पुरस्कार दिए गए एवं सभी शिविरार्थीओं को सांत्वना पुरस्कार दिए गए। इसके साथ ही कक्षा 10वीं एवं 12वीं में अच्छे अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र, मेडल, स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। शिविर विशेषांक अहिंसा करुणा समाचार पत्रिका का विमोचन किया गया। शिक्षण शिविरों अध्यापन कराने हेतु शिविर मुख्य संयोजक मनीष शास्त्री विद्यार्थी सागर. संहसंयोजक पं. जयकुमार दुर्ग, पं. राजकुमार शास्त्री कर्द, पं. शिखर चंद्र जैन भिलाई विदुषी बहन राखी जैन के द्वारा सफलतम आयोजन के लिए सम्मान सराक ट्रस्ट्र द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>अग्रिम कार्यक्रम के लिए अभी से तैयारी करनी पड़ेगी</strong></p>
<p>शिक्षण शिविरों के विषय में स्थानीय सराक ट्रस्ट अध्यक्ष गया राम जैन सराक ने कहा कि ऐसे आयोजन से धर्म की प्रभावना होती है और यह हमेशा होते रहने चाहिए, शीतकालीन शिविरों के लिए अभी से हम लोगों का आमंत्रण है, हम सभी आपका सहयोग करेंगे। मंत्री संजय जैन सराक ने कहा हमें आगे के कार्यक्रम के लिए अभी से तैयारी करनी पड़ेगी, तब जाकर हम बहुत अच्छे तरीके से कार्यक्रम कर सकेंगे।शिविर संयोजक मनीष शास्त्री विद्यार्थी ने कहा ऐसे आयोजन में अगर स्थानीय समाज सहयोग करती है, तो कार्यक्रम निश्चित ही सफल होते हैं और आप लोगों का हमें सहयोग मिलेगा तो हम शीतकालीन शिविरों का भव्य आयोजन करेंगे।</p>
<p><strong>ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविर</strong></p>
<p>जिससे पूरे सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का सफलतम आयोजन हो सकें। स्थानीय 40 सराक प्रतिभाओं का सम्मान भी इस मंच से किया गया। शिक्षण शिविरों की आयोजक भारतवर्षीय दिगंबर जैन सराक ट्रस्ट दिल्ली एवं पश्चिम बंगाल, झारखंड उड़ीसा स्थानीय सराक ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविरों का सफलतम कार्यक्रम संपन्न हो सका।</p>
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		<title>भुवनेश्वर में ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर हुए आरंभ : जैनत्व संस्कार के साथ हुआ शिक्षण शिविरों में अध्यापन </title>
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		<pubDate>Fri, 08 May 2026 08:27:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट, जैनम् फाउंडेशन दिल्ली के तत्वावधान में भुवनेश्वर (उड़ीसा) के विभिन्न स्थानों पर 5 मई से ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविरों में अध्यापन के लिए वरिष्ठ एवं युवा विद्वानों के साथ कला विशेषज्ञ विदुषी महिलाएं भी अपना योगदान दे रही हैं। भुवनेश्वर से पढ़िए, मनीष विद्यार्थी की खबर&#8230; भुवनेश्वर। आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट, जैनम् फाउंडेशन दिल्ली के तत्वावधान में भुवनेश्वर (उड़ीसा) के विभिन्न स्थानों पर 5 मई से ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविरों में अध्यापन के लिए वरिष्ठ एवं युवा विद्वानों के साथ कला विशेषज्ञ विदुषी महिलाएं भी अपना योगदान दे रही हैं। <span style="color: #ff0000">भुवनेश्वर से पढ़िए, मनीष विद्यार्थी की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>भुवनेश्वर। आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के जन्म दिवस के पावन अवसर पर आचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज, गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी , गणिनी आर्यिका श्री आर्ष माताजी माता जी, आर्यिका श्री सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट, जैनम् फाउंडेशन दिल्ली के तत्वावधान में भुवनेश्वर (उड़ीसा) के विभिन्न स्थानों पर 5 मई से ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर का शुभारंभ हुआ। शिविरों में अध्यापन के लिए वरिष्ठ एवं युवा विद्वानों के साथ कला विशेषज्ञ विदुषी महिलाएं भी अपना योगदान दे रही हैं। शिक्षण शिविरों में ज्ञान दर्पण, भाग 1, 2 पूजन शिविर, मेहंदी, सिलाई, नृत्य आदि की क्लास संचालित हो रही है। शिविरों के आयोजन में सभी ने दान देकर सहयोग किया। शिविर मुख्य संयोजक मनीष विद्यार्थी ने बताया कि आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा से बंगाल, झारखंड, उड़ीसा क्षेत्र में पाठशाला, होम्योपैथिक अस्पताल, मंदिर,धर्मशाला एवं समाज हित के अनेक कार्य हुए हैं। वर्ष 2000 से अब तक शिक्षण शिविरों के माध्यम से धार्मिक शिक्षा एवं नैतिक शिक्षा का ज्ञान की क्लासों के माध्यम से बच्चों को संस्कार दिए जा रहे हैं। भारतीय संस्कृति में पश्चात संस्कृति का प्रवेश होना हमारा पतन का कारण है। इसी कारण ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन संस्कार शिविरों का आयोजन होता आ रहा हैं।</p>
<p>शिविर निर्देशक ब्र. मंजुला दीदी,ब्र. मनीष भैया ने कहा कि आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज ने भारतवर्ष में ज्ञान और शाकाहार का संदेश दिया। हमारा भी कर्तव्य है, कि हम उनके आदर्श पर चलें उनके अवतरण दिवस के पावन अवसर पर उनके द्वारा बताए गए मार्ग का अनुशरण कर,लोगों को बताएं। शिविरों में थैला,रजिस्टर,पेन आर्यिका श्री आर्ष मति माताजी की प्रेरणा से ज्ञानार्ष भक्त मंडल परिवार ने दिए और प्रतिवर्ष 1000 की संख्या में संस्था द्वारा सराक शिविरों के लिए दिए जाएंगे। शिक्षण शिविरों में मुख्य रूप से पं. जयकुमार दुर्ग, पं. शिखरचंद जैन भिलाई, पं. राजकुमार जैन कर्द, विदुषी राखी जैन स्थानीय स्तर पर हेमंत जैन सराक, रामजी जैन सराक का सहयोग रहा।</p>
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		<title>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी का 69वां अवतरण दिवस महोत्सव 1 मई को : ज्ञानतीर्थ क्षेत्र महाराधक परिवार, ज्ञानार्ष भक्त परिवार, सकल जैन समाज एवं बड़ा मंदिर कमेटी के सान्निध्य में होगा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:21:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुरैना नगर गौरव आचार्य रत्न श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज के 69वें अवतरण दिवस का पावन महोत्सव वैशाख शुक्ल पूर्णिमा 1 मई को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह दिव्य आयोजन श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर, मुरैना में होगा। मुरैना से पढ़िए, अजय जैन की यह रिपोर्ट&#8230; मुरैना। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुरैना नगर गौरव आचार्य रत्न श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज के 69वें अवतरण दिवस का पावन महोत्सव वैशाख शुक्ल पूर्णिमा 1 मई को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह दिव्य आयोजन श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर, मुरैना में होगा। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, अजय जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>मुरैना। मुरैना नगर गौरव आचार्य रत्न श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज के 69वें अवतरण दिवस का पावन महोत्सव वैशाख शुक्ल पूर्णिमा 1 मई को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह दिव्य आयोजन श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर, मुरैना में होगा। प्रातः 9 बजे आचार्य श्री की मंगलमयी आरती के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेय एवं भोजन प्रसादी का वितरण किया जाएगा। सायंकालीन बेला में रात्रि 7 बजे भव्य महाआरती होगी, जिसमें विभिन्न महिला मंडलों द्वारा प्रस्तुत भक्तिमय भजनों की स्वर लहरियां वातावरण को गुरु भक्ति से अनुप्राणित कर देंगी। ज्ञात रहे कि मुरैना में जन्मे आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज तप, त्याग, ज्ञान और अध्यात्म की दिव्य ज्योति हैं। उनका व्यक्तित्व धर्म, संस्कृति, शिक्षा और समाजोत्थान के क्षेत्र में प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। उनके पावन सान्निध्य और ओजस्वी मार्गदर्शन ने अनगिनत जनमानस के जीवन को आलोकित किया है। इस शुभ अवसर पर समस्त साधर्मी बंधु, गुरु भक्त, स्वयंसेवी संस्थाएं, महिला मंडल, युवा वर्ग एवं श्रद्धालुओं को सपरिवार, इष्टमित्रों सहित सादर आमंत्रित किया गया है। यह गरिमामय आयोजन ज्ञानतीर्थ क्षेत्र महाराधक परिवार, ज्ञानार्ष भक्त परिवार, सकल जैन समाज मुरैना एवं श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर कमेटी, मुरैना के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न होगा। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से इस पुण्य अवसर पर उपस्थित होकर गुरु भक्ति के इस महापर्व को सफल एवं स्मरणीय बनाने का विनम्र आह्वान किया है।</p>
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		<title>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी का 69वां अवतरण दिवस 1 मई को : श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाने की तैयारी जारी </title>
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		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 10:10:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[षष्ठ पट्टाचार्य, सराकोद्धारक, ज्ञानतीर्थ प्रणेता एवं मुरैना नगर के गौरव आचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज का 69वां अवतरण दिवस आगामी 1 मई को वैशाख शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट&#8230; मुरैना। षष्ठ पट्टाचार्य, सराकोद्धारक, ज्ञानतीर्थ प्रणेता एवं मुरैना [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>षष्ठ पट्टाचार्य, सराकोद्धारक, ज्ञानतीर्थ प्रणेता एवं मुरैना नगर के गौरव आचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज का 69वां अवतरण दिवस आगामी 1 मई को वैशाख शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।<span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना</strong>। षष्ठ पट्टाचार्य, सराकोद्धारक, ज्ञानतीर्थ प्रणेता एवं मुरैना नगर के गौरव आचार्य श्री 108 ज्ञानसागर जी महाराज का 69वां अवतरण दिवस आगामी 1 मई को वैशाख शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर मुरैना नगर का धार्मिक वातावरण भक्तिमय हो उठेगा।समारोह का मुख्य आयोजन श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर, मुरैना में किया जाएगा। आयोजन को लेकर सकल जैन समाज, ज्ञानतीर्थ क्षेत्र महाराधक परिवार, ज्ञानार्ष भक्त परिवार एवं मंदिर कमेटी द्वारा व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। समाजजनों में इस पावन अवसर को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में प्रातः 9 बजे आचार्य श्री की मंगल आरती संपन्न होगी। इसके पश्चात श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेय एवं भोजन प्रसादी का वितरण किया जाएगा। दिनभर श्रद्धालु आचार्य श्री के व्यक्तित्व, कृतित्व और उनके आध्यात्मिक अवदान का स्मरण करेंगे। शाम 7 बजे से मंदिर परिसर में भव्य महाआरती का आयोजन होगा। इसके साथ ही विभिन्न महिला मंडलों द्वारा भक्ति-भाव से ओतप्रोत भजन प्रस्तुत किए जाएंगे। भजनों की मधुर स्वर लहरियों से पूरा वातावरण धर्ममय और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठेगा। समाज के विजय जैन ने बताया कि आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने अपने तप, त्याग, संयम और ज्ञान से समाज को नई दिशा प्रदान की है। उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शन में ज्ञानतीर्थ जैसे अनेक प्रेरणादायी कार्य संपन्न हुए हैं। वे न केवल जैन समाज, बल्कि समूचे समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। आयोजकों ने समस्त साधर्मी बंधुओं, गुरु भक्तों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला मंडलों तथा इष्टमित्रों सहित सभी श्रद्धालुओं से इस मांगलिक अवसर पर सपरिवार उपस्थित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है। यह आयोजन श्रद्धा, समर्पण और गुरु भक्ति का अनुपम संगम बनेगा।</p>
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		<title>महावीर जयंती पर दीक्षा और महावीर निर्वाण पर देह-निर्वाण : तप, त्याग और राष्ट्र चेतना के प्रेरक संत आचार्य श्री ज्ञानसागर जी </title>
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		<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 08:51:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[खंदार क्षेत्र को साधना से तीर्थ बनाने वाले तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ने विश्व हिंदू परिषद की सर्वधर्म यात्रा में दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना देकर हजारों श्रद्धालुओं में राष्ट्रीय गौरव और धर्म चेतना का संचार किया। पढ़िए जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चन्देरी’ का विशेष आलेख भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और संतों का योगदान भारत की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>खंदार क्षेत्र को साधना से तीर्थ बनाने वाले तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ने विश्व हिंदू परिषद की सर्वधर्म यात्रा में दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना देकर हजारों श्रद्धालुओं में राष्ट्रीय गौरव और धर्म चेतना का संचार किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चन्देरी’ का विशेष आलेख</span></strong></p>
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<p><strong>भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और संतों का योगदान</strong></p>
<p>भारत की आध्यात्मिक परंपरा सदैव महान संतों और तपस्वियों की तपस्या से आलोकित रही है। जब-जब समाज को दिशा की आवश्यकता हुई, तब-तब संतों ने अपने त्याग, तप और ज्ञान से जनमानस को प्रेरित किया। दिगंबर जैन परंपरा के महान तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी का जीवन भी ऐसी ही प्रेरणादायक गाथा है, जिसमें धर्म, तपस्या, समाज जागरण और राष्ट्र चेतना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।</p>
<p><strong>महावीर जयंती पर दीक्षा &#8211; एक अद्भुत संयोग</strong></p>
<p>उनके जीवन का एक अत्यंत विलक्षण संयोग यह रहा कि उन्होंने भगवान महावीर जयंती के पावन दिवस पर दिगंबर मुनि दीक्षा ग्रहण की। जैन धर्म में यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान महावीर का जन्म हुआ था, जिन्होंने संसार को अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम का महान संदेश दिया। ऐसे पावन दिवस पर दीक्षा लेना मानो भगवान महावीर के आदर्शों को अपने जीवन में पूर्ण रूप से आत्मसात करने का संकल्प था।</p>
<p><strong>तप, त्याग और सादगीपूर्ण जीवन</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी ने दीक्षा के बाद अपने जीवन को पूर्णतः तप और साधना के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने वैराग्य, संयम और त्याग का ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जो आज भी साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण था, परंतु उनकी आत्मिक शक्ति और आध्यात्मिक प्रभाव असाधारण था।</p>
<p><strong>खंदार क्षेत्र &#8211; निर्जन वन से पावन तीर्थ तक की यात्रा</strong></p>
<p>उनकी साधना का एक महत्वपूर्ण केंद्र बुंदेलखंड की ऐतिहासिक नगरी चंदेरी के समीप स्थित पावन तीर्थ श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खंदार जी रहा। आज यह स्थान जैन श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ है, परंतु एक समय ऐसा भी था जब यह क्षेत्र घने जंगलों और निर्जन वातावरण से घिरा हुआ था। चारों ओर ऊँचे वृक्ष, झाड़ियाँ और पथरीली भूमि थी। वहाँ सर्प, बिच्छू, तेंदुआ और अन्य जंगली जानवर विचरण करते थे। मधुमक्खियों के विशाल छत्ते भी भय का कारण बने रहते थे। सामान्य व्यक्ति के लिए वहाँ पहुँचना भी अत्यंत कठिन था, परंतु आचार्य ज्ञानसागर जी ने उसी निर्जन स्थान को अपनी साधना का केंद्र बना लिया।</p>
<p><strong>कठोर साधना और अडिग संकल्प</strong></p>
<p>उन्होंने वहाँ चातुर्मास कर उस क्षेत्र को धर्म साधना का केंद्र बना दिया। वर्षा ऋतु में उस क्षेत्र की स्थिति और भी विकट हो जाती थी। आसपास के डूब क्षेत्र जलमग्न हो जाते थे और पूरा स्थान पानी से भर जाता था। किन्तु गुरुदेव का संकल्प अडिग था। जब चारों ओर जलभराव हो जाता था, तब भी वे एक छोटे से ऊँचे स्थान पर बैठकर ध्यान और तप में लीन रहते थे। वही स्थान उनका तपस्थल बन जाता था और उसी सीमित स्थान पर वे रात्रि विश्राम भी करते थे।</p>
<p><strong>प्रकृति भी हुई तपस्या से प्रभावित</strong></p>
<p>श्रद्धालुओं के अनुसार, जब गुरुदेव ध्यान में लीन होते थे, तब आसपास के जंगलों से तेंदुआ, सर्प और अन्य वन्य जीव भी उनके समीप आकर शांत भाव से बैठ जाते थे। यह दृश्य अत्यंत अद्भुत होता था। ऐसा प्रतीत होता था मानो प्रकृति भी उस महान तपस्वी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रही हो।</p>
<p><strong>धार्मिक केंद्र के रूप में खंदार का विकास</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी की तपस्या और प्रेरणा के परिणामस्वरूप धीरे-धीरे उस निर्जन क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियाँ प्रारंभ हुईं। लोगों का भय दूर हुआ और श्रद्धालुओं का आगमन बढ़ने लगा। उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से वहाँ मंदिरों के निर्माण की आधारशिला रखी गई और धीरे-धीरे वह स्थान एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ के रूप में विकसित हो गया। आज खंदार क्षेत्र की प्रतिष्ठा का मुख्य श्रेय आचार्य ज्ञानसागर जी को ही दिया जाता है।</p>
<p><strong>राष्ट्र चेतना और सामाजिक समर्पण</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी का व्यक्तित्व केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं था। उनके भीतर समाज और राष्ट्र के प्रति भी गहरा समर्पण था। इसी कारण उनकी वाणी को विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मंचों पर अत्यंत सम्मान के साथ सुना जाता था।</p>
<p><strong>दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना</strong></p>
<p>विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित सर्वधर्म यात्रा के दौरान चंदेरी के ऐतिहासिक दिल्ली दरवाजा पर आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज का ऐतिहासिक प्रवचन हुआ। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु, नागरिक और विभिन्न समाजों के लोग उपस्थित थे। उनकी देशना में केवल धार्मिक उपदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और नैतिक जीवन का प्रेरक संदेश भी समाहित था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म का उद्देश्य केवल पूजा-अनुष्ठान नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर सत्य, अहिंसा, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करना है।</p>
<p><strong>सर्वधर्म समभाव का अद्भुत उदाहरण</strong></p>
<p>चंदेरी नगर में उनके अनेक भक्त और शिष्य थे। प्रमुख श्रद्धालुओं में विनोद कठरया, कु. पद्म सिंह, कमलेश, हाथीशाह, मुनालाल और सुमन आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। जैनेतर समाज से भी मजीद खान पठान और बाबू मुजाबर जैसे श्रद्धालुओं ने गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह दर्शाता है कि उनका व्यक्तित्व किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं था। उनकी करुणा और समत्व से सभी धर्मों के लोग प्रभावित होते थे।</p>
<p><strong>महावीर निर्वाण दिवस पर देह-निर्वाण</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी के जीवन का एक और अद्भुत संयोग यह रहा कि जिस पावन पर्व महावीर जयंती पर उन्होंने दीक्षा ग्रहण की थी, उसी परंपरा से जुड़े महावीर निर्वाण दिवस पर उन्होंने देह-निर्वाण प्राप्त किया। यह संयोग उनके जीवन को और भी अधिक आध्यात्मिक और प्रेरणादायक बना देता है।</p>
<p><strong>प्रेरणादायक जीवन संदेश</strong></p>
<p>उनका जीवन यह संदेश देता है कि तप, संयम और आत्मबल से मनुष्य न केवल आत्मकल्याण कर सकता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। आज जब श्रद्धालु खंदार क्षेत्र के दर्शन करते हैं, तो उन्हें यह स्मरण अवश्य करना चाहिए कि इस पावन तीर्थ के पीछे एक महान तपस्वी की कठिन साधना, त्याग और आध्यात्मिक शक्ति का योगदान है। आचार्य ज्ञानसागर जी का जीवन यह सिद्ध करता है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और आत्मबल प्रबल हो, तो निर्जन वन भी धर्म और आस्था के महान केंद्र बन सकते हैं।</p>
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		<title>बंगाल, झारखंड, उड़ीसा सराक क्षेत्र में हो रही हैं धर्म प्रभावना : ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविरों का शंखनाद  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:44:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य ज्ञेय सागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका आर्षमति माताजी, आर्यिका सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर 2025-26 का सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का शंखनाद हुआ। रघुनाथपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; रघुनाथपुर। आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य ज्ञेय सागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका आर्षमति माताजी, आर्यिका सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर 2025-26 का सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का शंखनाद हुआ। <span style="color: #ff0000">रघुनाथपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>रघुनाथपुर।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य ज्ञेय सागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका आर्षमति माताजी, आर्यिका सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर 2025-26 का सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का शंखनाद हुआ। शिक्षण शिविर ब्र. मंजुला दीदी, ब्र.मनीष भैया के निर्दशन में धर्म प्रभावना के साथ होंगे। शिक्षण शिविर में जैनत्व संस्कार कार्यक्रम, प्रतिभा सम्मान समारोह, प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। शिविर संयोजक मनीष विद्यार्थी ने बताया कि पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा प्रांत के विभिन्न अंचलों में शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों द्वारा नैतिक शिक्षा,ज्ञान दर्पण भाग 1,2 छहढाला की शिक्षा दी जाएगी।</p>
<p><strong>5 जनवरी को होगा समापन </strong></p>
<p>शिविर में छत्तीसगढ़ से आए पंडित जयकुमार दुर्ग, पंडित शिखरचंद जैन भिलाई, टीकमगढ़ से पंडित श्रीनंदन, उत्तर प्रदेश महरौनी से पंडित कपिल शास्त्री, सागर से पंडित मुन्नालाल जैन, पंडित राजकुमार कर्द, सहसंयोजक पंडित मोहित शास्त्री धर्म प्रभावना कर रहे हैं। स्थानीय संयोजक लखन, गौरांग जैन, रामदुलार जैन, डॉ. प्रदीप जैन, शक्तिपथ सराक समिति के लखनपुर से गयाराम जैन अध्यक्ष, संजय जैन सचिव, रघुनाथपुर से पुटुक जैन अध्यक्ष एवं सराक उत्थान समिति बंगाल, उड़ीसा, झारखंड सहयोग कर रही हैं। शिक्षण शिविरों का श्री दिगंबर जैन मंदिर रघुनाथपुर 5 जनवरी को भक्तामर विधान और विद्वानों के सम्मान, प्रतियोगिता ड्रॉ के साथ समापन होगा।</p>
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		<title>दो दिवसीय आचार्य ज्ञानसागर अभा प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को: अतिशय क्षेत्र रानिला जी आदिनाथपुरम में होगा आयोजन  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/two_day_acharya_gyan_sagar_abha_pratibha_samman_ceremony_on_1516_november-2/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Sep 2025 13:12:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से गुरु मां गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य एवं निर्देशन में इस वर्ष आचार्य ज्ञानसागर अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानिला जी ‘आदिनाथपुरम‘ (जिला [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से गुरु मां गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य एवं निर्देशन में इस वर्ष आचार्य ज्ञानसागर अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानिला जी ‘आदिनाथपुरम‘ (जिला चरखी दादरी) हरियाणा में होने जा रहा है। पंजीयन की अंतिम तिथि 30 सितंबर है। <span style="color: #ff0000">आदिनाथपुरम रानिला से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आदिनाथपुरम रानिला।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से गुरु मां गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य एवं निर्देशन में इस वर्ष आचार्य ज्ञानसागर अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानिला जी ‘आदिनाथपुरम‘ (जिला चरखी दादरी) हरियाणा में होने जा रहा है। अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार के अध्यक्ष सुनील जैन मोना जनरेटर दिल्ली एवं मुख्य संयोजक लोकेश जैन किरण विहार दिल्ली ने बताया कि इस अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 30 सितंबर रखी गई है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस वृहद आयोजन में संपूर्ण देश से छात्र-छात्राएं एवं अभिभावक शामिल होंगे। दो दिवसीय कार्यक्रम की तैयारियां अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार की ओर से उल्लास और उमंग के साथ की जा रही है। यहां बच्चों को जैन धर्म के क्रियाकलापों से परिचित कराते हुए उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की जाती है एवं करियर संबंधित समस्याओं के लिए जाने-माने काउंसलर रीतेश जैन गाजियाबाद उनकी बाधाओं को दूर करते हैं। जिससे वह धर्म के रास्ते पर चलते हुए अपने देश, समाज और परिवार का नाम रोशन कर सके।</p>
<p>गुरु भक्त रूपेश जैन चांदी वाले आगरा ने बताया कि पूज्य गुरुदेव की अंतिम दीक्षित शिष्या गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य में यह पांचवां एवं प्रारंभ से यह 25 वां सम्मान समारोह है। जिसे हम रजत वर्ष के रूप में मनाने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के लिए सोनू जैन बरहाना वाले मुरैना, मोहित जैन से संपर्क किया जा सकता है। अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह के आयोजक अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार और ज्ञानार्ष भक्त सेवा समिति है। श्री दिगंबर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट रानिला (हरियाणा) ने कार्यक्रम में अधिक से अधिक समाजजनों के प्रतिभावान बालक-बालिकाओं के सम्मिलित किए जाने का निवेदन किया है।</p>
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		<title>दो दिवसीय आचार्य ज्ञानसागर अभा प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को: अतिशय क्षेत्र रानिला जी आदिनाथपुरम में होगा आयोजन  </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Sep 2025 11:32:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से गुरु मां गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य एवं निर्देशन में इस वर्ष आचार्य ज्ञानसागर अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानिला जी ‘आदिनाथपुरम‘ (जिला [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से गुरु मां गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य एवं निर्देशन में इस वर्ष आचार्य ज्ञानसागर अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानिला जी ‘आदिनाथपुरम‘ (जिला चरखी दादरी) हरियाणा में होने जा रहा है। पंजीयन की अंतिम तिथि 30 सितंबर है। <span style="color: #ff0000">आदिनाथपुरम रानिला से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आदिनाथपुरम रानिला।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से गुरु मां गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य एवं निर्देशन में इस वर्ष आचार्य ज्ञानसागर अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानिला जी ‘आदिनाथपुरम‘ (जिला चरखी दादरी) हरियाणा में होने जा रहा है। अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार के अध्यक्ष सुनील जैन मोना जनरेटर दिल्ली एवं मुख्य संयोजक लोकेश जैन किरण विहार दिल्ली ने बताया कि इस अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 30 सितंबर रखी गई है। उन्होंने बताया कि इस वृहद आयोजन में संपूर्ण देश से छात्र-छात्राएं एवं अभिभावक शामिल होंगे।</p>
<p>दो दिवसीय कार्यक्रम की तैयारियां अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार की ओर से उल्लास और उमंग के साथ की जा रही है। यहां बच्चों को जैन धर्म के क्रियाकलापों से परिचित कराते हुए उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की जाती है एवं करियर संबंधित समस्याओं के लिए जाने-माने काउंसलर रीतेश जैन गाजियाबाद उनकी बाधाओं को दूर करते हैं। जिससे वह धर्म के रास्ते पर चलते हुए अपने देश, समाज और परिवार का नाम रोशन कर सके। गुरु भक्त रूपेश जैन चांदी वाले आगरा ने बताया कि पूज्य गुरुदेव की अंतिम दीक्षित शिष्या गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य में यह पांचवां एवं प्रारंभ से यह 25 वां सम्मान समारोह है।</p>
<p>जिसे हम रजत वर्ष के रूप में मनाने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के लिए सोनू जैन बरहाना वाले मुरैना, मोहित जैन से संपर्क किया जा सकता है। अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह के आयोजक अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार और ज्ञानार्ष भक्त सेवा समिति है। श्री दिगंबर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट रानिला (हरियाणा) ने कार्यक्रम में अधिक से अधिक समाजजनों के प्रतिभावान बालक-बालिकाओं के सम्मिलित किए जाने का निवेदन किया है।</p>
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		<title>श्री नंदीश्वर जिनालय में पूजा भक्ति अर्चना का दौर : प्रतिदिन हो रहा है दस धर्मों का पूजन </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 13:22:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्मावलंबियों के लिए पर्यूषण पर्वों के दस दिन संयम की आराधना करने के दिन होते हैं। इन दस दिनों में जैन समाज के सभी पुरुष, महिलाएं, युवा एवं बच्चे जिनेंद्र प्रभु की पूजन भक्ति करते हुए संयम के मार्ग पर चलने की साधना का अभ्यास करते हैं। अंबाह रोड पर स्थित श्री महावीर दिगंबर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्मावलंबियों के लिए पर्यूषण पर्वों के दस दिन संयम की आराधना करने के दिन होते हैं। इन दस दिनों में जैन समाज के सभी पुरुष, महिलाएं, युवा एवं बच्चे जिनेंद्र प्रभु की पूजन भक्ति करते हुए संयम के मार्ग पर चलने की साधना का अभ्यास करते हैं। अंबाह रोड पर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन नसियां जी मंदिर के प्रांगण में श्री नंदीश्वर द्वीप जिनालय अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन धर्मावलंबियों के लिए पर्यूषण पर्वों के दस दिन संयम की आराधना करने के दिन होते हैं। इन दस दिनों में जैन समाज के सभी पुरुष, महिलाएं, युवा एवं बच्चे जिनेंद्र प्रभु की पूजन भक्ति करते हुए संयम के मार्ग पर चलने की साधना का अभ्यास करते हैं। अंबाह रोड पर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन नसियां जी मंदिर के प्रांगण में श्री नंदीश्वर द्वीप जिनालय अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से आर्यिका श्री राजमति माताजी की भावना के अनुरूप नंदीश्वर दीप जिनालय का निर्माण कराया गया था। नंदीश्वर द्वीप जैन धर्म का आठवां द्वीप है और यह मानुषोत्तर पर्वत से परे स्थित है। इसलिए मनुष्य यहां नहीं जा सकते हैं। इसमें कुल 52 जिनालय (मंदिर) हैं, जो चार दिशाओं में बने हुए हैं और इन मंदिरों में पद्मासन प्रतिमाएँ विराजमान हैं। इन मंदिरों के आस-पास अंजनगिरि, दधिमुख और रतिकर पर्वत तथा चार बावड़ियां हैं। इस जिनालय में यू तो प्रतिदिन ही पूजा अर्चना होती है, लेकिन पर्यूषण पर्वों में भक्तों की भक्ति देखते ही बनती है।</p>
<p>नियमित पुजारियों द्वारा श्री नंदीश्वर द्वीप जिनालय में स्थापित जिनबिम्बों का मंगलाष्टक एवं अभिषेक पाठ पढ़ते हुए प्रासुक जल से अभिषेक किया गया। तत्पश्चात सभी ने नंदीश्वर द्वीप की तीन तीन प्रदक्षिणा कीं। पीले केशरिया धोती दुपट्टा में सुसुज्जित श्रावकों द्वारा अष्टद्रव्य से पूजन किया गया। श्री नंदीश्वर द्वीप जिनालय में प्रतिदिन अभिषेक पूजन करने वालों में राजकुमार जैन कुथियाना, भागचंद जैन पीपरी पुरा, सतीशचंद जैन, विमल जैन टोस वाले, राजकुमार जैन पलपुरा, रमाकांत जैन खड़ियाहार, पारस जैन खनेता, पंकज जैन नायक आगरा, बलराम जैन खड़ियाहार, सुरेंद्र जैन रतिराम पुरा, पीयूष जैन नायक, पारस जैन चेंटा वाले प्रमुख हैं।</p>
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		<title>माताजी संघ की इंद्रदेव ने की अभूतपूर्व अगवानी: बारिश भी नहीं तोड़ पाई भक्तों का उत्साह  </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Jun 2025 16:59:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञानसागर जी के शिष्य आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी की शिष्या आर्यिका प्रशममति माताजी एवं आर्यिका उपशममति माताजी का शनिवार सुबह नगर में आगमन हुआ। जैसे ही नगर में आगमन हुआ इंद्रदेव जमकर बरसे। मानो लग रहा था इंद्रदेव भी आगमन से हर्षित हो रहे हैं। रामगंजमंडी से पढ़िए, यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। समाधिस्थ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञानसागर जी के शिष्य आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी की शिष्या आर्यिका प्रशममति माताजी एवं आर्यिका उपशममति माताजी का शनिवार सुबह नगर में आगमन हुआ। जैसे ही नगर में आगमन हुआ इंद्रदेव जमकर बरसे। मानो लग रहा था इंद्रदेव भी आगमन से हर्षित हो रहे हैं। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञानसागर जी के शिष्य आचार्य श्री ज्ञेय-सागर जी की शिष्या आर्यिका प्रशममति माताजी एवं आर्यिका उपशममति माताजी का शनिवार सुबह नगर में आगमन हुआ। जैसे ही नगर में आगमन हुआ इंद्रदेव जमकर बरसे। मानो लग रहा था इंद्रदेव भी आगमन से हर्षित हो रहे हैं। माताजी संघ को नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग स्टेशन पेट्रोल पंप से थाना चौराहा होते हुए बाजार नंबर एक शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लाया गया। मार्ग में माताजी संघ ने श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर के भी दर्शन किए। माताजी संघ का भारी वर्षा के बीच नगर के प्रमुख मार्गाे से होते हुए आगमन हो रहा था तो इंद्रदेव उनकी अगवानी में जमकर बरस रहे थे । भारी वर्षा के बीच भक्तों के उत्साह में भी कोई कमी नहीं थी एवं तन-मन-धन समर्पित करते हुए भक्त गुरु मां के साथ भारी बारिश की परवाह किए बिना अपना सर्वत्र समर्पित किए हुए थे एवं भक्तिमय भजनों पर झूम रहे थे। बस यही मन में भाव कर रहे थे बारिशों की छम-छम में गुरु मां तेरे दर पर आए हैं।</p>
<p><strong> ‘गुरु मा दया कर दो झोलियां सबकी भर दो’ भजनों पर झूमे भक्त </strong></p>
<p>‘गुरु मा दया कर दो झोलियां सबकी भर दो पारस प्यारा लागों’ आदि भजनो पर झूमते हुए भक्त भक्ति से ओत-प्रोत थे। निश्चित रूप से रामगंजमंडी में भक्तों की भक्ति समर्पण का एक अभूतपूर्व उदाहरण देखने को मिला। जैसे ही गुरु मां शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंची मंदिर के प्रवेश द्वार पर संरक्षक अजीत कुमार सेठी, अध्यक्ष दिलीप विनायका, एवंम समाजबंधुओं ने गुरु मां की अगवानी की। माताजी ने मूलनायक शांतिनाथ भगवान के दर्शन किए एवं समस्त जिनालय के दर्शन करते हुए जिनालय का अवलोकन किया। माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि यदि नगर में साधु विराजमान हैं तब तक साधु को ही प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि यदि धरती पर साधु का अभाव हो जाएगा तो धर्म समाप्त हो जाएगा। जैन धर्म बहुत सुंदर हैं, लेकिन स्वार्थ के कारण हमने इस जटिल बना दिया है। दोपहर की बेला में स्वाध्याय हुआ एवं संध्या बेला में माताजी का मंगल विहार सराफ फार्म हाउस तक हुआ। रविवार की प्रातः माता जी का आगमन मोड़क ग्राम में हुआ। आहारचर्या भी वही हुई। माताजी संघ का इस वर्ष का वर्षायोग सिंगोली मध्यप्रदेश में होगा।</p>
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