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	<title>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>महावीर जयंती पर दीक्षा और महावीर निर्वाण पर देह-निर्वाण : तप, त्याग और राष्ट्र चेतना के प्रेरक संत आचार्य श्री ज्ञानसागर जी </title>
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		<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 08:51:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[खंदार क्षेत्र को साधना से तीर्थ बनाने वाले तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ने विश्व हिंदू परिषद की सर्वधर्म यात्रा में दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना देकर हजारों श्रद्धालुओं में राष्ट्रीय गौरव और धर्म चेतना का संचार किया। पढ़िए जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चन्देरी’ का विशेष आलेख भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और संतों का योगदान भारत की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>खंदार क्षेत्र को साधना से तीर्थ बनाने वाले तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ने विश्व हिंदू परिषद की सर्वधर्म यात्रा में दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना देकर हजारों श्रद्धालुओं में राष्ट्रीय गौरव और धर्म चेतना का संचार किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चन्देरी’ का विशेष आलेख</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और संतों का योगदान</strong></p>
<p>भारत की आध्यात्मिक परंपरा सदैव महान संतों और तपस्वियों की तपस्या से आलोकित रही है। जब-जब समाज को दिशा की आवश्यकता हुई, तब-तब संतों ने अपने त्याग, तप और ज्ञान से जनमानस को प्रेरित किया। दिगंबर जैन परंपरा के महान तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी का जीवन भी ऐसी ही प्रेरणादायक गाथा है, जिसमें धर्म, तपस्या, समाज जागरण और राष्ट्र चेतना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।</p>
<p><strong>महावीर जयंती पर दीक्षा &#8211; एक अद्भुत संयोग</strong></p>
<p>उनके जीवन का एक अत्यंत विलक्षण संयोग यह रहा कि उन्होंने भगवान महावीर जयंती के पावन दिवस पर दिगंबर मुनि दीक्षा ग्रहण की। जैन धर्म में यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान महावीर का जन्म हुआ था, जिन्होंने संसार को अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम का महान संदेश दिया। ऐसे पावन दिवस पर दीक्षा लेना मानो भगवान महावीर के आदर्शों को अपने जीवन में पूर्ण रूप से आत्मसात करने का संकल्प था।</p>
<p><strong>तप, त्याग और सादगीपूर्ण जीवन</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी ने दीक्षा के बाद अपने जीवन को पूर्णतः तप और साधना के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने वैराग्य, संयम और त्याग का ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जो आज भी साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण था, परंतु उनकी आत्मिक शक्ति और आध्यात्मिक प्रभाव असाधारण था।</p>
<p><strong>खंदार क्षेत्र &#8211; निर्जन वन से पावन तीर्थ तक की यात्रा</strong></p>
<p>उनकी साधना का एक महत्वपूर्ण केंद्र बुंदेलखंड की ऐतिहासिक नगरी चंदेरी के समीप स्थित पावन तीर्थ श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खंदार जी रहा। आज यह स्थान जैन श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ है, परंतु एक समय ऐसा भी था जब यह क्षेत्र घने जंगलों और निर्जन वातावरण से घिरा हुआ था। चारों ओर ऊँचे वृक्ष, झाड़ियाँ और पथरीली भूमि थी। वहाँ सर्प, बिच्छू, तेंदुआ और अन्य जंगली जानवर विचरण करते थे। मधुमक्खियों के विशाल छत्ते भी भय का कारण बने रहते थे। सामान्य व्यक्ति के लिए वहाँ पहुँचना भी अत्यंत कठिन था, परंतु आचार्य ज्ञानसागर जी ने उसी निर्जन स्थान को अपनी साधना का केंद्र बना लिया।</p>
<p><strong>कठोर साधना और अडिग संकल्प</strong></p>
<p>उन्होंने वहाँ चातुर्मास कर उस क्षेत्र को धर्म साधना का केंद्र बना दिया। वर्षा ऋतु में उस क्षेत्र की स्थिति और भी विकट हो जाती थी। आसपास के डूब क्षेत्र जलमग्न हो जाते थे और पूरा स्थान पानी से भर जाता था। किन्तु गुरुदेव का संकल्प अडिग था। जब चारों ओर जलभराव हो जाता था, तब भी वे एक छोटे से ऊँचे स्थान पर बैठकर ध्यान और तप में लीन रहते थे। वही स्थान उनका तपस्थल बन जाता था और उसी सीमित स्थान पर वे रात्रि विश्राम भी करते थे।</p>
<p><strong>प्रकृति भी हुई तपस्या से प्रभावित</strong></p>
<p>श्रद्धालुओं के अनुसार, जब गुरुदेव ध्यान में लीन होते थे, तब आसपास के जंगलों से तेंदुआ, सर्प और अन्य वन्य जीव भी उनके समीप आकर शांत भाव से बैठ जाते थे। यह दृश्य अत्यंत अद्भुत होता था। ऐसा प्रतीत होता था मानो प्रकृति भी उस महान तपस्वी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रही हो।</p>
<p><strong>धार्मिक केंद्र के रूप में खंदार का विकास</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी की तपस्या और प्रेरणा के परिणामस्वरूप धीरे-धीरे उस निर्जन क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियाँ प्रारंभ हुईं। लोगों का भय दूर हुआ और श्रद्धालुओं का आगमन बढ़ने लगा। उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से वहाँ मंदिरों के निर्माण की आधारशिला रखी गई और धीरे-धीरे वह स्थान एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ के रूप में विकसित हो गया। आज खंदार क्षेत्र की प्रतिष्ठा का मुख्य श्रेय आचार्य ज्ञानसागर जी को ही दिया जाता है।</p>
<p><strong>राष्ट्र चेतना और सामाजिक समर्पण</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी का व्यक्तित्व केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं था। उनके भीतर समाज और राष्ट्र के प्रति भी गहरा समर्पण था। इसी कारण उनकी वाणी को विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मंचों पर अत्यंत सम्मान के साथ सुना जाता था।</p>
<p><strong>दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना</strong></p>
<p>विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित सर्वधर्म यात्रा के दौरान चंदेरी के ऐतिहासिक दिल्ली दरवाजा पर आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज का ऐतिहासिक प्रवचन हुआ। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु, नागरिक और विभिन्न समाजों के लोग उपस्थित थे। उनकी देशना में केवल धार्मिक उपदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और नैतिक जीवन का प्रेरक संदेश भी समाहित था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म का उद्देश्य केवल पूजा-अनुष्ठान नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर सत्य, अहिंसा, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करना है।</p>
<p><strong>सर्वधर्म समभाव का अद्भुत उदाहरण</strong></p>
<p>चंदेरी नगर में उनके अनेक भक्त और शिष्य थे। प्रमुख श्रद्धालुओं में विनोद कठरया, कु. पद्म सिंह, कमलेश, हाथीशाह, मुनालाल और सुमन आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। जैनेतर समाज से भी मजीद खान पठान और बाबू मुजाबर जैसे श्रद्धालुओं ने गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह दर्शाता है कि उनका व्यक्तित्व किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं था। उनकी करुणा और समत्व से सभी धर्मों के लोग प्रभावित होते थे।</p>
<p><strong>महावीर निर्वाण दिवस पर देह-निर्वाण</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी के जीवन का एक और अद्भुत संयोग यह रहा कि जिस पावन पर्व महावीर जयंती पर उन्होंने दीक्षा ग्रहण की थी, उसी परंपरा से जुड़े महावीर निर्वाण दिवस पर उन्होंने देह-निर्वाण प्राप्त किया। यह संयोग उनके जीवन को और भी अधिक आध्यात्मिक और प्रेरणादायक बना देता है।</p>
<p><strong>प्रेरणादायक जीवन संदेश</strong></p>
<p>उनका जीवन यह संदेश देता है कि तप, संयम और आत्मबल से मनुष्य न केवल आत्मकल्याण कर सकता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। आज जब श्रद्धालु खंदार क्षेत्र के दर्शन करते हैं, तो उन्हें यह स्मरण अवश्य करना चाहिए कि इस पावन तीर्थ के पीछे एक महान तपस्वी की कठिन साधना, त्याग और आध्यात्मिक शक्ति का योगदान है। आचार्य ज्ञानसागर जी का जीवन यह सिद्ध करता है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और आत्मबल प्रबल हो, तो निर्जन वन भी धर्म और आस्था के महान केंद्र बन सकते हैं।</p>
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		<title>बंगाल, झारखंड, उड़ीसा सराक क्षेत्र में हो रही हैं धर्म प्रभावना : ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविरों का शंखनाद  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:44:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य ज्ञेय सागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका आर्षमति माताजी, आर्यिका सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर 2025-26 का सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का शंखनाद हुआ। रघुनाथपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; रघुनाथपुर। आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य ज्ञेय सागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका आर्षमति माताजी, आर्यिका सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर 2025-26 का सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का शंखनाद हुआ। <span style="color: #ff0000">रघुनाथपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रघुनाथपुर।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आचार्य ज्ञेय सागर जी महाराज, आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका आर्षमति माताजी, आर्यिका सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर 2025-26 का सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविरों का शंखनाद हुआ। शिक्षण शिविर ब्र. मंजुला दीदी, ब्र.मनीष भैया के निर्दशन में धर्म प्रभावना के साथ होंगे। शिक्षण शिविर में जैनत्व संस्कार कार्यक्रम, प्रतिभा सम्मान समारोह, प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। शिविर संयोजक मनीष विद्यार्थी ने बताया कि पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा प्रांत के विभिन्न अंचलों में शीतकालीन ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्वानों द्वारा नैतिक शिक्षा,ज्ञान दर्पण भाग 1,2 छहढाला की शिक्षा दी जाएगी।</p>
<p><strong>5 जनवरी को होगा समापन </strong></p>
<p>शिविर में छत्तीसगढ़ से आए पंडित जयकुमार दुर्ग, पंडित शिखरचंद जैन भिलाई, टीकमगढ़ से पंडित श्रीनंदन, उत्तर प्रदेश महरौनी से पंडित कपिल शास्त्री, सागर से पंडित मुन्नालाल जैन, पंडित राजकुमार कर्द, सहसंयोजक पंडित मोहित शास्त्री धर्म प्रभावना कर रहे हैं। स्थानीय संयोजक लखन, गौरांग जैन, रामदुलार जैन, डॉ. प्रदीप जैन, शक्तिपथ सराक समिति के लखनपुर से गयाराम जैन अध्यक्ष, संजय जैन सचिव, रघुनाथपुर से पुटुक जैन अध्यक्ष एवं सराक उत्थान समिति बंगाल, उड़ीसा, झारखंड सहयोग कर रही हैं। शिक्षण शिविरों का श्री दिगंबर जैन मंदिर रघुनाथपुर 5 जनवरी को भक्तामर विधान और विद्वानों के सम्मान, प्रतियोगिता ड्रॉ के साथ समापन होगा।</p>
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		<title>दो दिवसीय आचार्य ज्ञानसागर अभा प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को: अतिशय क्षेत्र रानिला जी आदिनाथपुरम में होगा आयोजन  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/two_day_acharya_gyan_sagar_abha_pratibha_samman_ceremony_on_1516_november-2/</link>
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		<pubDate>Wed, 03 Sep 2025 13:12:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से गुरु मां गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य एवं निर्देशन में इस वर्ष आचार्य ज्ञानसागर अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानिला जी ‘आदिनाथपुरम‘ (जिला [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से गुरु मां गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य एवं निर्देशन में इस वर्ष आचार्य ज्ञानसागर अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानिला जी ‘आदिनाथपुरम‘ (जिला चरखी दादरी) हरियाणा में होने जा रहा है। पंजीयन की अंतिम तिथि 30 सितंबर है। <span style="color: #ff0000">आदिनाथपुरम रानिला से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आदिनाथपुरम रानिला।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से गुरु मां गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य एवं निर्देशन में इस वर्ष आचार्य ज्ञानसागर अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानिला जी ‘आदिनाथपुरम‘ (जिला चरखी दादरी) हरियाणा में होने जा रहा है। अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार के अध्यक्ष सुनील जैन मोना जनरेटर दिल्ली एवं मुख्य संयोजक लोकेश जैन किरण विहार दिल्ली ने बताया कि इस अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 30 सितंबर रखी गई है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस वृहद आयोजन में संपूर्ण देश से छात्र-छात्राएं एवं अभिभावक शामिल होंगे। दो दिवसीय कार्यक्रम की तैयारियां अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार की ओर से उल्लास और उमंग के साथ की जा रही है। यहां बच्चों को जैन धर्म के क्रियाकलापों से परिचित कराते हुए उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की जाती है एवं करियर संबंधित समस्याओं के लिए जाने-माने काउंसलर रीतेश जैन गाजियाबाद उनकी बाधाओं को दूर करते हैं। जिससे वह धर्म के रास्ते पर चलते हुए अपने देश, समाज और परिवार का नाम रोशन कर सके।</p>
<p>गुरु भक्त रूपेश जैन चांदी वाले आगरा ने बताया कि पूज्य गुरुदेव की अंतिम दीक्षित शिष्या गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य में यह पांचवां एवं प्रारंभ से यह 25 वां सम्मान समारोह है। जिसे हम रजत वर्ष के रूप में मनाने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के लिए सोनू जैन बरहाना वाले मुरैना, मोहित जैन से संपर्क किया जा सकता है। अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह के आयोजक अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार और ज्ञानार्ष भक्त सेवा समिति है। श्री दिगंबर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट रानिला (हरियाणा) ने कार्यक्रम में अधिक से अधिक समाजजनों के प्रतिभावान बालक-बालिकाओं के सम्मिलित किए जाने का निवेदन किया है।</p>
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		<title>दो दिवसीय आचार्य ज्ञानसागर अभा प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को: अतिशय क्षेत्र रानिला जी आदिनाथपुरम में होगा आयोजन  </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Sep 2025 11:32:02 +0000</pubDate>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से गुरु मां गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य एवं निर्देशन में इस वर्ष आचार्य ज्ञानसागर अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानिला जी ‘आदिनाथपुरम‘ (जिला चरखी दादरी) हरियाणा में होने जा रहा है। पंजीयन की अंतिम तिथि 30 सितंबर है। <span style="color: #ff0000">आदिनाथपुरम रानिला से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आदिनाथपुरम रानिला।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से गुरु मां गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य एवं निर्देशन में इस वर्ष आचार्य ज्ञानसागर अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह 15-16 नवंबर को श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानिला जी ‘आदिनाथपुरम‘ (जिला चरखी दादरी) हरियाणा में होने जा रहा है। अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार के अध्यक्ष सुनील जैन मोना जनरेटर दिल्ली एवं मुख्य संयोजक लोकेश जैन किरण विहार दिल्ली ने बताया कि इस अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 30 सितंबर रखी गई है। उन्होंने बताया कि इस वृहद आयोजन में संपूर्ण देश से छात्र-छात्राएं एवं अभिभावक शामिल होंगे।</p>
<p>दो दिवसीय कार्यक्रम की तैयारियां अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार की ओर से उल्लास और उमंग के साथ की जा रही है। यहां बच्चों को जैन धर्म के क्रियाकलापों से परिचित कराते हुए उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की जाती है एवं करियर संबंधित समस्याओं के लिए जाने-माने काउंसलर रीतेश जैन गाजियाबाद उनकी बाधाओं को दूर करते हैं। जिससे वह धर्म के रास्ते पर चलते हुए अपने देश, समाज और परिवार का नाम रोशन कर सके। गुरु भक्त रूपेश जैन चांदी वाले आगरा ने बताया कि पूज्य गुरुदेव की अंतिम दीक्षित शिष्या गणिनी आर्यिका श्री आर्षमति माता जी के सानिध्य में यह पांचवां एवं प्रारंभ से यह 25 वां सम्मान समारोह है।</p>
<p>जिसे हम रजत वर्ष के रूप में मनाने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के लिए सोनू जैन बरहाना वाले मुरैना, मोहित जैन से संपर्क किया जा सकता है। अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान समारोह के आयोजक अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार और ज्ञानार्ष भक्त सेवा समिति है। श्री दिगंबर जैन चेरिटेबल ट्रस्ट रानिला (हरियाणा) ने कार्यक्रम में अधिक से अधिक समाजजनों के प्रतिभावान बालक-बालिकाओं के सम्मिलित किए जाने का निवेदन किया है।</p>
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		<title>श्री नंदीश्वर जिनालय में पूजा भक्ति अर्चना का दौर : प्रतिदिन हो रहा है दस धर्मों का पूजन </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 13:22:35 +0000</pubDate>
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<p><strong>जैन धर्मावलंबियों के लिए पर्यूषण पर्वों के दस दिन संयम की आराधना करने के दिन होते हैं। इन दस दिनों में जैन समाज के सभी पुरुष, महिलाएं, युवा एवं बच्चे जिनेंद्र प्रभु की पूजन भक्ति करते हुए संयम के मार्ग पर चलने की साधना का अभ्यास करते हैं। अंबाह रोड पर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन नसियां जी मंदिर के प्रांगण में श्री नंदीश्वर द्वीप जिनालय अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन धर्मावलंबियों के लिए पर्यूषण पर्वों के दस दिन संयम की आराधना करने के दिन होते हैं। इन दस दिनों में जैन समाज के सभी पुरुष, महिलाएं, युवा एवं बच्चे जिनेंद्र प्रभु की पूजन भक्ति करते हुए संयम के मार्ग पर चलने की साधना का अभ्यास करते हैं। अंबाह रोड पर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन नसियां जी मंदिर के प्रांगण में श्री नंदीश्वर द्वीप जिनालय अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से आर्यिका श्री राजमति माताजी की भावना के अनुरूप नंदीश्वर दीप जिनालय का निर्माण कराया गया था। नंदीश्वर द्वीप जैन धर्म का आठवां द्वीप है और यह मानुषोत्तर पर्वत से परे स्थित है। इसलिए मनुष्य यहां नहीं जा सकते हैं। इसमें कुल 52 जिनालय (मंदिर) हैं, जो चार दिशाओं में बने हुए हैं और इन मंदिरों में पद्मासन प्रतिमाएँ विराजमान हैं। इन मंदिरों के आस-पास अंजनगिरि, दधिमुख और रतिकर पर्वत तथा चार बावड़ियां हैं। इस जिनालय में यू तो प्रतिदिन ही पूजा अर्चना होती है, लेकिन पर्यूषण पर्वों में भक्तों की भक्ति देखते ही बनती है।</p>
<p>नियमित पुजारियों द्वारा श्री नंदीश्वर द्वीप जिनालय में स्थापित जिनबिम्बों का मंगलाष्टक एवं अभिषेक पाठ पढ़ते हुए प्रासुक जल से अभिषेक किया गया। तत्पश्चात सभी ने नंदीश्वर द्वीप की तीन तीन प्रदक्षिणा कीं। पीले केशरिया धोती दुपट्टा में सुसुज्जित श्रावकों द्वारा अष्टद्रव्य से पूजन किया गया। श्री नंदीश्वर द्वीप जिनालय में प्रतिदिन अभिषेक पूजन करने वालों में राजकुमार जैन कुथियाना, भागचंद जैन पीपरी पुरा, सतीशचंद जैन, विमल जैन टोस वाले, राजकुमार जैन पलपुरा, रमाकांत जैन खड़ियाहार, पारस जैन खनेता, पंकज जैन नायक आगरा, बलराम जैन खड़ियाहार, सुरेंद्र जैन रतिराम पुरा, पीयूष जैन नायक, पारस जैन चेंटा वाले प्रमुख हैं।</p>
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		<title>माताजी संघ की इंद्रदेव ने की अभूतपूर्व अगवानी: बारिश भी नहीं तोड़ पाई भक्तों का उत्साह  </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Jun 2025 16:59:24 +0000</pubDate>
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<p><strong>समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञानसागर जी के शिष्य आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी की शिष्या आर्यिका प्रशममति माताजी एवं आर्यिका उपशममति माताजी का शनिवार सुबह नगर में आगमन हुआ। जैसे ही नगर में आगमन हुआ इंद्रदेव जमकर बरसे। मानो लग रहा था इंद्रदेव भी आगमन से हर्षित हो रहे हैं। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञानसागर जी के शिष्य आचार्य श्री ज्ञेय-सागर जी की शिष्या आर्यिका प्रशममति माताजी एवं आर्यिका उपशममति माताजी का शनिवार सुबह नगर में आगमन हुआ। जैसे ही नगर में आगमन हुआ इंद्रदेव जमकर बरसे। मानो लग रहा था इंद्रदेव भी आगमन से हर्षित हो रहे हैं। माताजी संघ को नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग स्टेशन पेट्रोल पंप से थाना चौराहा होते हुए बाजार नंबर एक शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लाया गया। मार्ग में माताजी संघ ने श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर के भी दर्शन किए। माताजी संघ का भारी वर्षा के बीच नगर के प्रमुख मार्गाे से होते हुए आगमन हो रहा था तो इंद्रदेव उनकी अगवानी में जमकर बरस रहे थे । भारी वर्षा के बीच भक्तों के उत्साह में भी कोई कमी नहीं थी एवं तन-मन-धन समर्पित करते हुए भक्त गुरु मां के साथ भारी बारिश की परवाह किए बिना अपना सर्वत्र समर्पित किए हुए थे एवं भक्तिमय भजनों पर झूम रहे थे। बस यही मन में भाव कर रहे थे बारिशों की छम-छम में गुरु मां तेरे दर पर आए हैं।</p>
<p><strong> ‘गुरु मा दया कर दो झोलियां सबकी भर दो’ भजनों पर झूमे भक्त </strong></p>
<p>‘गुरु मा दया कर दो झोलियां सबकी भर दो पारस प्यारा लागों’ आदि भजनो पर झूमते हुए भक्त भक्ति से ओत-प्रोत थे। निश्चित रूप से रामगंजमंडी में भक्तों की भक्ति समर्पण का एक अभूतपूर्व उदाहरण देखने को मिला। जैसे ही गुरु मां शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंची मंदिर के प्रवेश द्वार पर संरक्षक अजीत कुमार सेठी, अध्यक्ष दिलीप विनायका, एवंम समाजबंधुओं ने गुरु मां की अगवानी की। माताजी ने मूलनायक शांतिनाथ भगवान के दर्शन किए एवं समस्त जिनालय के दर्शन करते हुए जिनालय का अवलोकन किया। माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि यदि नगर में साधु विराजमान हैं तब तक साधु को ही प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि यदि धरती पर साधु का अभाव हो जाएगा तो धर्म समाप्त हो जाएगा। जैन धर्म बहुत सुंदर हैं, लेकिन स्वार्थ के कारण हमने इस जटिल बना दिया है। दोपहर की बेला में स्वाध्याय हुआ एवं संध्या बेला में माताजी का मंगल विहार सराफ फार्म हाउस तक हुआ। रविवार की प्रातः माता जी का आगमन मोड़क ग्राम में हुआ। आहारचर्या भी वही हुई। माताजी संघ का इस वर्ष का वर्षायोग सिंगोली मध्यप्रदेश में होगा।</p>
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		<title>बडौत समाज के पुण्य का जागरण : चार्तुमास के लिए आर्यिका श्री आर्षमति माता जी का होगा मंगल प्रवेश  </title>
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		<pubDate>Mon, 09 Jun 2025 07:01:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्मप्रेमी समाज के लिए यह अत्यंत हर्ष और सौभाग्य का विषय है कि आर्यिका श्री आर्षमति माता जी ससंघ का ज्ञानार्ष अमृत वर्षायोग 2025 का दिव्य आयोजन श्री 1008 अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर मंडी बडौत में सानंद होगा। यह पुण्यप्रद क्षण बडौत जैन समाज के लिए न केवल गर्व का विषय है, अपितु [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्मप्रेमी समाज के लिए यह अत्यंत हर्ष और सौभाग्य का विषय है कि आर्यिका श्री आर्षमति माता जी ससंघ का ज्ञानार्ष अमृत वर्षायोग 2025 का दिव्य आयोजन श्री 1008 अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर मंडी बडौत में सानंद होगा। यह पुण्यप्रद क्षण बडौत जैन समाज के लिए न केवल गर्व का विषय है, अपितु संपूर्ण ज्ञानार्ष भक्त परिवार के लिए श्रद्धा और साधना का अमूल्य अवसर भी है। <span style="color: #ff0000">बड़ौत से पढ़िए, अजय जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बडौत।</strong> जैन धर्मप्रेमी समाज के लिए यह अत्यंत हर्ष और सौभाग्य का विषय है कि आर्यिका श्री आर्षमति माता जी ससंघ का ज्ञानार्ष अमृत वर्षायोग 2025 का दिव्य आयोजन श्री 1008 अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर मंडी बडौत में सानंद होगा। यह पुण्यप्रद क्षण बडौत जैन समाज के लिए न केवल गर्व का विषय है, अपितु संपूर्ण ज्ञानार्ष भक्त परिवार के लिए श्रद्धा और साधना का अमूल्य अवसर भी है। ज्ञात रहे कि गुरु मां श्री आर्षमति माता जी, आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की अंतिम दीक्षित शिष्या हैं। वे आज की युवा पीढ़ी के लिए त्याग, तपस्या, समर्पण और वात्सल्य की जीवंत मूर्ति हैं। उनका ससंघ पदार्पण बडौत नगर में होने से नगर की पुण्यभूमि अत्यंत पावन और दिव्य हो उठेगी।</p>
<p><strong>समाजजनों ने की अनुमोदना </strong></p>
<p>इस मंगल अवसर पर अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार एवं ज्ञानार्ष भक्त सेवा समिति (रजि.) ने अनुमोदना करते हुए कहा कि यह आयोजन समाज की अध्यात्मिक चेतना को जागृत करने वाला तथा संयम पथ पर अग्रसर होने का अनुपम माध्यम होगा। गुरु मां का सानिध्य प्राप्त होना पूर्व जन्मों के पुण्य का प्रतिफल है। गौरतलब है कि ज्ञानार्ष अमृत वर्षायोग जैन परंपरा में एक विशेष महत्व रखता है।</p>
<p><strong>श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर को आकर्षक सजाया जाएगा</strong></p>
<p>यह आयोजन तप, स्वाध्याय, प्रवचन, ध्यान, संयम और धर्म आराधना से ओतप्रोत रहता है। ससंघ आर्यिका संघ के साथ गुरु मां के प्रवचनों, चिंतन-सत्रों एवं भक्ति कार्यों से नगर का वातावरण धर्ममय हो उठेगा। इस महाअवसर के लिए श्री अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला की जाएगी। गणाचार्य परंपरा की प्रतिष्ठा और जैन संस्कृति की दिव्यता को अनुभव कराने वाले इस कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों से सहभागिता की अपील की गई है। अखिल भारतीय ज्ञानार्ष भक्त परिवार की ओर से सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे इस धर्म प्रभावना और पुण्यार्जन के अवसर पर सपरिवार सहभागी बनें और गुरु मां श्री 105 आर्षमति माता जी का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन को सार्थक करें। साथ ही गुरु मां का आशीर्वाद समस्त समाज को संयम, साधना और समरसता की ओर ले जाए। यही कामना है।</p>
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		<title>ब्र.मनीष भैया ने किया शिक्षण शिविरों का निरीक्षण:  पूजन के साथ मेहंदी पेंटिंग का प्रशिक्षण </title>
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		<pubDate>Tue, 13 May 2025 06:14:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत वर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविर जारी हैं। यह शिविर लखनपुर, बारकोना, राजामेला,भोक्ताबांध, हारीबांगा, लक्ष्मणपुर, साहिबखेड़ा, खगड़ा, चुडरी में चल रहे हैं। इनमें पूजन प्रशिक्षण के साथ पेंटिंग, मेहंदी और नृत्य आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बाकुड़ा से पढ़िए, मनीष जैन विद्यार्थी की यह खबर&#8230; बाकुडा। आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत वर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविर जारी हैं। यह शिविर लखनपुर, बारकोना, राजामेला,भोक्ताबांध, हारीबांगा, लक्ष्मणपुर, साहिबखेड़ा, खगड़ा, चुडरी में चल रहे हैं। इनमें पूजन प्रशिक्षण के साथ पेंटिंग, मेहंदी और नृत्य आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">बाकुड़ा से पढ़िए, मनीष जैन विद्यार्थी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बाकुडा।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी के जन्म दिवस के पावन अवसर पर पश्चिम बंगाल के सराक में आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी, आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी, आर्यिका श्री आर्षमति माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञानमति माताजी के आशीर्वाद से ब्र.मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया के निर्देशन में भारत वर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में ज्ञान संस्कार बाल शिक्षण शिविर जारी हैं। यह शिविर लखनपुर, बारकोना, राजामेला,भोक्ताबांध, हारीबांगा, लक्ष्मणपुर, साहिबखेड़ा, खगड़ा, चुडरी में चल रहे हैं। इनमें पूजन प्रशिक्षण के साथ पेंटिंग, मेहंदी और नृत्य की क्लासों के लिए स्नेहा जैन और साधिका जैन ने बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ लौकिक कलाओं का प्रशिक्षण दिया।</p>
<p>यह शिक्षण शिविर सफलता की ओर अग्रसर हैं। इसके बाद मध्यप्रदेश से पधारे विद्वान पं. रीतेंद्र जैन, राजकुमार शास्त्री, जिनांश जैन, विदुषी सपना जैन, काव्या जैन ने भी शिक्षण शिविर में बच्चों को प्रशिक्षण दिया। शिविर निर्देशक ब्र. मनीष भैया ने शिक्षण शिविरों का निरीक्षण किया। जिसमें सर्वप्रथम बारकोना पहुंचकर बच्चों से शिक्षण शिविर के विषय में जानकारी ली। इसके बाद भैया जी मोलाहीर पहुंचकर बच्चों से धार्मिक क्लासों की जानकारी ली। शिविर मुख्य संयोजक मनीष विद्यार्थी सागर ने बताया कि पांच दिवसीय संस्कार शिविरों से निश्चित ही संस्कारों का बीजारोपण होगा। स्थानीय स्तर पर बाकुड़ा जिला सराक ट्रस्ट के अध्यक्ष गयाराम जैन, सचिव संजय जैन, डॉ प्रदीप जैन,रामदुलार जैन, लखन जैन राजा मेला, शक्तिपथ जैन, शिक्षण शिविरों को सफल बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं।</p>
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		<title>तीन राज्यों में लगाए जाएंगे ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर: भारतीय जैन मिलन के पदाधिकारी द्वारा किट का विमोचन  </title>
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		<pubDate>Wed, 07 May 2025 11:56:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत वर्षीय सराक ट्रस्ट दिल्ली के तत्वावधान में पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड के विभिन्न स्थानों पर 8 मई से ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर लगाए जाएंगे। शिक्षण शिविरों में ज्ञान दर्पण भाग 1, 2 पूजन शिविर, मेहंदी, सिलाई, नृत्य आदि की क्लास संचालित होंगी। इसमें विद्वानों द्वारा शिक्षण दिया जाएगा। सागर से पढ़िए, यह खबर&#8230; सागर। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत वर्षीय सराक ट्रस्ट दिल्ली के तत्वावधान में पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड के विभिन्न स्थानों पर 8 मई से ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर लगाए जाएंगे। शिक्षण शिविरों में ज्ञान दर्पण भाग 1, 2 पूजन शिविर, मेहंदी, सिलाई, नृत्य आदि की क्लास संचालित होंगी। इसमें विद्वानों द्वारा शिक्षण दिया जाएगा। <span style="color: #ff0000">सागर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज के जन्म दिवस के पावन अवसर पर आचार्यश्री ज्ञेयसागर जी महाराज, गणिनी आर्यिकाश्री स्वस्तिभूषण माताजी, गणिनी आर्यिका श्री आर्ष माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञानमति माताजी के आशीर्वाद से भारत वर्षीय सराक ट्रस्ट दिल्ली के तत्वावधान में पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड के विभिन्न स्थानों पर 8 मई से ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविर का आयोजन होगा। शिविरों में अध्यापन के लिए वरिष्ट एवं युवा विद्वानों के साथ कला विशेषज्ञ की विदुषी महिलाएं भी अपना योगदान दे रही हैं। शिक्षण शिविरों में ज्ञान दर्पण भाग 1, 2 पूजन शिविर, मेहंदी, सिलाई, नृत्य आदि की क्लास संचालित होंगी। शिविरों के आयोजन ज्ञानयज्ञ में सभी ने अपने धन का दान देकर सहयोग किया। शिविर मुख्य संयोजक मनीष विद्यार्थी सागर ने बताया कि आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से बंगाल, झारखंड, उड़ीसा के क्षेत्र में पाठशाला, होम्योपैथिक अस्पताल, मंदिर, धर्मशाला एवं समाजहित के अनेक कार्य हुए हैं।</p>
<p>सन 2000 से अब तक शिक्षण शिविरों के माध्यम से धार्मिक शिक्षा एवं नैतिक शिक्षा का ज्ञान की क्लासों के माध्यम से बच्चों को संस्कार दिए जा रहे हैं। भारतीय संस्कृति में पश्चात संस्कृति का प्रवेश होना हमारा पतन का कारण है। इसी कारण ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन संस्कार शिविरों का आयोजन होता आ रहा है। शिविर निर्देशक ब्र. मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया ने कहा कि आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज ने भारतवर्ष में ज्ञान और शाकाहार का शंखनाद किया। हमारा भी कर्तव्य है कि हम उनके आदर्श पर चलें उनके जन्मदिवस के पावन अवसर पर उनके द्वारा बताए गए मार्ग का अनुसरण कर लोगों को बताएं।</p>
<p><strong>शिक्षण शिविरों की सफलता के लिए अनुमोदना की</strong></p>
<p>शिक्षण शिविरों में भारतीय जैन मिलन क्षेत्र क्रमांक 10 राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतिवीर कमलेंद्र जैन, क्षेत्रीय अध्यक्ष अरुण चंदेरिया राष्ट्रीय संयोजक इंजी. महेश जैन ने थैला, स्टीकर, प्रमाण पत्र, बैच, टोपी एवं वर्णी संस्थान पर विकास सभा के महामंत्री कैलाश जैन टीला एवं मुख्य संयोजक चंदेश शास्त्री भोपाल ने अपनी वैवाहिक वर्षगांठ के अवसर पर टोपी, थैला शिक्षण शिविरों के लिए सहयोग कर धर्म प्रभावना में अपना योगदान दिया।</p>
<p>संस्कार शिविर किट का विमोचन भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतिवीर कमलेंद्र जैन, क्षेत्रीय अध्यक्ष अरुण चंदेरिया राष्ट्रीय संयोजक इंजी. महेश जैन एसडीओ एवं शिविर संयोजक और भारतीय जैन मिलन के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष मनीष विद्यार्थी ने किया। सभी ने शिक्षण शिविरों की सफलता के लिए अनुमोदना की।</p>
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		<title>सदलगा स्कूल का नाम आचार्य विद्यासागर की स्मृति में रखा जाए: लोकसभा अध्यक्ष से जैन समाज का अनुग्रह  </title>
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		<pubDate>Tue, 29 Apr 2025 08:26:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबराचार्य की जन्म स्थली के स्कूल का नामकरण जैन संत आचार्य विद्यासागर के नाम करने बाबत सकल जैन समाज समिति कोटा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को ज्ञापन दिया है। आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज का जन्म कर्नाटक प्रांत के ग्राम सदलगा में 10 अक्टूबर 1946 को हुआ था। कोटा से पढ़िए, मनोज जैन नायक की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगंबराचार्य की जन्म स्थली के स्कूल का नामकरण जैन संत आचार्य विद्यासागर के नाम करने बाबत सकल जैन समाज समिति कोटा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को ज्ञापन दिया है। आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज का जन्म कर्नाटक प्रांत के ग्राम सदलगा में 10 अक्टूबर 1946 को हुआ था। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> दिगंबराचार्य की जन्म स्थली के स्कूल का नामकरण जैन संत आचार्य विद्यासागर के नाम करने बाबत सकल जैन समाज समिति कोटा द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को ज्ञापन दिया गया है। कोटा जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी सीए अजय जैन ने बताया कि दिगंबराचार्य जैन संत आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज का जन्म कर्नाटक प्रांत के ग्राम सदलगा में 10 अक्टूबर 1946 को हुआ था। बाल्यकाल से ही आपका झुकाव जैन दर्शन की ओर रहा। मात्र 9 वर्ष की अल्पायु में ही आपने जैन दर्शन को अंगीकार करने का मन बना लिया था। केवल 22 वर्ष की यौवन अवस्था में आपने आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज से 30 जून 1968 में जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण कर संयम का मार्ग स्वीकार किया। संत शिरोमणी की उपाधि से सुशोभित आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जैन धर्मांवलंबियों के नहीं बल्कि संपूर्ण मानव जाति के संत थे।</p>
<p>आपके प्रति जैन एवं जैनेत्तर समाज देवतुल्य श्रद्धाभाव रखते हैं। पूज्य गुरुदेव सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चारित्र की त्रिवेणी थे। आपकी उत्कृष्ट संयम समाधि 18 फरवरी 2024 को डोंगरगढ़ के चंद्रगिरि में हुई। सकल दिगंबर जैन समाज समिति कोटा द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को दिए ज्ञापन में ऐसे जैन संत गुरुदेव की स्मृति को चिरस्थाई रखने के लिए उनकी जन्म स्थली ग्राम सदलगा के स्कूल का नामकरण उन्हीं के नाम पर करने का निवेदन किया है।</p>
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